दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। इस संसार में कोई भी जीव 24 घंटे गतिशील नहीं रह सकता कुछ समय के लिये सबको आराम की जरूरत होती है ताकि वे प्रत्येक दृष्टिकोण से स्वस्थ रह कर प्रतिदिन की क्रिया को सुचारु रूप से कर सकें। यहां तक कि मशीनरी को भी आराम देना पड़ता है, उदहारण के लिये यदि लंबे सफर पर आप जा रहे हैं तो 100-150 किलोमीटर के बाद गाढ़ी को आराम देना पड़ता है। जहां तक प्राणियों की बात है, प्रकृति ने उनके आराम के लिये, रात्री का समय निश्चित किया हुआ है। प्रकृति ने रात सोने के लिये बनाई है ताकि मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से आराम मिल सके, वह स्वस्थ रह सके, अगले दिन वह अपने कार्य को ठीक से कर सके। दोस्तो, नींद मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ के लिये “आवश्यक” है।  परन्तु जब इस नींद में किसी कारणवश रोजाना बाधा आने लगे तो मनुष्य प्रयास करने के बावजूद और सोना चाह कर भी नहीं सो पाता। तब समस्या पैदा होती है इंसोमनिया (Insomnia) की अर्थात् अनिद्रा जो शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है।  दोस्तो, अनिद्रा कोई मानसिक विकार नहीं है लेकिन मानसिक समस्या का कारण जरूर बन सकती है। यह एक निद्रा विकार है। इससे कैसे राहत पायी जाये? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “अनिद्रा के लिए घरेलू उपाय”।  देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको इंसोमनिया के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इससे राहत पाने के देसी उपाय क्या हैं। इंसोमनिया को समझने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि नींद क्या होती है, तभी हम यह जान पायेंगे कि इंसोमनिया यानी अनिद्रा क्या होती है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि नींद क्या होती है। 

अनिद्रा के लिए घरेलू उपाय

नींद क्या होती है? – What is Sleep?

संक्षेप में कहा जाये तो समझिये कि शरीर की वह आवश्यक गतिविधि, जो रात के समय मस्तिष्क और शरीर को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से आराम देती है नींद कहलाती है। नींद वह अग्रिम निर्माण क्रिया विषयक (Anabolic) स्थिति है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity system) तंत्रिका-तंत्र (Nervous system) के विकास पर जोर देती है और इनमें नयी जान डाल देती है। शरीर को भोजन की आवश्यकता के समान ही नींद भी बेहद जरूरी है। नींद के कारण ही हम प्रतिदिन तरोताजा, ऊर्जावान अनुभव करते हैं और स्वस्थ जीवन जीते हैं। विस्तार से यदि इसकी बात की जाये तो समझिये कि यह नींद का विषय समन्दर के समान अथाह और असीम है। 

उम्र के अनुसार नींद की जरूरत – Sleep Needs According to Age

नींद की सबसे ज्यादा जरूरत बच्चों को होती है उनके विकास के लिये और ठीक से काम करने के लिये। आपने नोटिस किया होगा कि नवजात शिशु इसी लिये सबसे ज्यादा सोते हैं, लगभग 18 घंटे तक। फिर उम्र बढ़ने के साथ-साथ नींद में कमी आने लगती है। उम्र और स्थिति के अनुसार प्रतिदिन औसत नींद निम्न प्रकार है – 

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नवजात       18 घंटे तक

1 से 12 महीने, 14–18 घंटे

1 से 3 वर्ष,   12–15 घंटे

3 से 5 वर्ष,  11–13 घंटे

5 से 12 वर्ष,   9–11 घंटे

किशोर    9–10 घंटे

वयस्क और बुजुर्ग 7–8(+) घंटे

गर्भवती महिलाएं   8 (+) घंटे

अनिद्रा (इंसोमनिया) क्या है? – What is Insomnia?

जब कोई व्यक्ति सोने की करता है मगर उसे नींद नहीं आ रही, ना चाहते हुऐ भी उसके मन में अनेकों विचार आ रहे हैं, कुछ अच्छे, कुछ बुरे, कुछ यादें, कुछ बातें। दिमाग में कुछ चिंताऐं, कुछ भविष्य की प्लानिंग। मतलब ऐसी उधेड़बुन की स्थिति में, आंखों में नींद होते हुऐ भी ना सो पाना इंसोमनिया यानी अनिद्रा कहलाती है। एक, दो दिन ऐसा हो जाना तो सामान्य है लेकिन जब यह स्थिति ज्यादा दिनों, हफ्तों या महीनों तक बनी रहे तो स्थिति गंभीर मानी जाती है। यहां देसी हैल्थ क्लब स्पष्ट करना चाहता है कि यदि नींद की गोली भी ली जाती है तो उससे भी नींद तभी आयेगी जब आप सोने की कोशिश करेंगे अन्यथा नींद नहीं आयेगी बल्कि सिर में चक्कर जरूर बन जायेगा। देसी हैल्थ क्लब नींद की गोली लेने की सलाह नहीं देता, नींद प्राकृतिक रूप से आनी चाहिये, इसके लिये कुछ घरेलू उपाय अपनाये जा सकते हैं। 

अनिद्रा (इंसोमनिया) के प्रकार – Types of Insomnia

दोस्तो, वैसे तो इंसोमनिया को तीन भाग में बांटा जा सकता है – अस्थायी (इसमें नींद ना आने की समस्या तीन रात तक रह सकती है), एक्यूट और क्रोनिक इंसोमनिया, परन्तु यह दो प्रकार की ही होती है। अस्थायी इंसोमनिया को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती। 

1. एक्यूट इंसोमनिया (Acute Insomnia)- इस स्थिति में नींद ना आने की समस्या कुछ दिनों या कुछ हफ्तों तक रह सकती है। इसे अल्पकालिक अनिद्रा भी कहते हैं। कामकाज या पारिवारिक कारणों से ऐसी स्थिति बन जाती है।

2. क्रोनिक इंसोमनिया (Chronic Insomnia)- इसकी अवधि बहुत लंबी होती है। इस स्थिति में नींद ना आने की समस्या कई महीनों या कई वर्षों तक चलती है। इसे गंभीर स्थिति माना जाता है। क्रोनिक इंसोमनिया के अनेक कारण और रोग हो सकते हैं।  

अनिद्रा (इंसोमनिया) के कारण – Cause of Insomnia

इंसोमनिया के हो सकते हैं निम्नलिखित कारण –

1. चिंता और तनाव

2. अवसाद (Depression)

3. बाइपोलर डिसऑर्डर

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4. सोने से पहले कैफीन का सेवन

5. शराब का सेवन

6. धूम्रपान

7. सोने के समय में या स्थान में बदलाव होना

8. सोने के कमरे में या आस-पास या बार का बहुत शोर या रोशनी का होना।

9. नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करना, दिन की शिफ्ट आने पर कुछ दिनों नींद नहीं आती। 

10. कुछ विशेष दवाइयों का सेवन करना।

11. सोने से पहले टीवी, लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना। 

12. गर्भावस्था। गर्भावस्था में भी ठीक से नींद ना आने की समस्या रहती है।

13. शरीरिक बीमारी में किसी प्रकार का दर्द या किसी अन्य प्रकार की असुविधा महसूस करना। 

14. स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)- यह एक ऐसी परेशानी है जिसमें व्यक्ति की सांस सोते समय कुछ देर के लिए रुक जाती है। सांस टूटने पर एकदम से आंख खुल जाती है और उठते ही वह तेजी से हांफने लगता है। ऐसी अवस्था में वह ठीक से सो नहीं पाता।

15. नींद की गोलियों की आदत (Sleeping Pills Habit)- शुरुआत में तो इनसे नींद आ जाती है लेकिन समय व्यतीत होने के साथ-साथ   इन गोलियों का प्रभाव कम होने लगता है, तो गोलियों की मात्रा बढ़ने लगती है और एक समय ये भी काम नहीं करतीं। ऐसी अवस्था में स्थिति भयंकर और गंभीर हो जाती है। 

अनिद्रा (इंसोमनिया) के लक्षण – Symptoms of Insomnia

1. सोने की कोशिश करने पर भी नींद नहीं आना यह प्रमुख लक्षण है। 

2. नींद आने के बाद बार-बार नींद टूटना।

3. चिड़चिड़ापन रहना।

4. जल्दी-जल्दी गुस्सा आना।

5. देर रात नींद आने के बाद, सुबह जल्दी उठ जाना। 

6. सुबह उठ कर अपने को ताजा महसूस न करना।

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7. थकावट, कमजोरी और सुस्ती महसूस करना।

8. दिन में नींद आना।

अनिद्रा (इंसोमनिया) के शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव – Effects of Insomnia on the Body

1. अनिद्रा के कारण पाचन-तंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि पाचन प्रक्रिया को काम करने का यही समय सबसे उत्तम होता है। ऐसी स्थिति में पाचन-तंत्र कमजोर पड़ जाता है और फिर पेट से जुड़ी समस्याऐं जैसे पेट में गैस, कब्ज़ आदि, बन जाती हैं।

2. नींद पूरी ना होने से चिंता, तनाव, अवसाद एवं मानसिक विकारों से पीड़ित हो जाता है।

3. स्मरण शक्ति भी कमजोर होने की संभावना रहती है।

4. नींद पूरी न होने से शरीर को आराम नहीं मिलता जिससे मांसपेशियों में दर्द, अकड़न और थकावट रहती है।

5. पाचन-तंत्र के ठीक से काम ना कर पाने के कारण अक्सर पेट खराब रहता है। जो नींद का समय होता है वही पाचन-तंत्र को काम करने के लिये सही समय होता है। 

6. किसी भी विषय पर या काम पर एकाग्रचित्त (Concentrate) नहीं हो पाता। 

7. बिना कोई काम करे व्यक्ति को थकावट महसूस होती है।

8. व्यवहार में बदलाव जैसे जोर-जोर से चिल्ला कर बात करना, वाणी में  कठोरता, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना।

अनिद्रा के लिए घरेलू उपाय – Home Remedies for Insomnia

1. दूध और शहद (Milk and Honey)- दूध को अनिद्रा से राहत पाने के लिये सर्वोत्तम उपाय माना जाता है। जब शहद इसके साथ मिल जाये तो इसकी गुणवत्ता और भी बढ़ जाती है। दूध में पाये जाने वाला एमिनो एसिड ट्रिप्टोफेन मस्तिष्क के रसायन सेरोटोनिन के लिये बहुत महत्वपूर्ण होता है। इन दोनों की मदद से नींद आराम से आ जाती है। एक गिलास दूध में (गुनगुना या ठंडा पसंद आपकी) एक चम्मच शहद मिलाकर रात को सोने से पहले पीयें। 

2. जायफल पाउडर और दूध (Nutmeg Powder and Milk)- जायफल का इस्तेमाल नींद आने के लिये किया जाता रहा है। रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर जायफल पाउडर मिलाकर पीयें। नींद आ जायेगी। 

3. केसर और दूध (Saffron and Milk)- केसर में एंक्सियोलिटिक (Anxiolytic यानी चिंता दूर करना) और हिप्नोटिक (Hypnotic यानी नींद को बढ़ावा देने वाला) गुण मौजूद होते हैं। दूध में चार, पांच रेशे केसर के डालकर उबाल लें। इसे गुनगुना होने तक ठंडा कर लें और रात को सोने से पहले पी लें।  

4. दालचीनी और दूध (Cinnamon and Milk)- एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रात को सोने से पहले पीयें। अच्छी नींद आयेगी। 

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5. केला (Banana)-  केले में प्राकृतिक रूप से मांसपेशियों को शिथिल (Loose) करने वाले मैग्नीशियम और पोटेशियम मौजूद होते हैं। इसमें मेलाटोनिन नामक हार्मोन से भरपूर होता है जो नींद में सुधार का काम करता है। प्रतिदिन दो केले अवश्य खायें। सुबह नाश्ते में दूध और केला ले सकते हैं 

6. चेरी (Cherry)- चेरी में मेलाटोनिन नामक हार्मोन पर्याप्त मात्रा में होता है जो शरीर की बॉडी क्लॉक को नियंत्रित करता है। एक शोध के अनुसार यदि, सोने से कुछ घंटे पहले चेरी खायी जाये तो अच्छी नींद आती है। इंसोमनिया के मरीजों को दिन में दो बार एक गिलास चेरी का जूस पीना चाहिये।

7. कीवी (Kiwi)- एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर कीवी एक ऐसा फल है जिसे नींद लाने वाले फलों की श्रेणी में रखा गया है। इसमें सेरोटोनिन नामक रसायन होता है जो नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। रात को सोने से कुछ घंटे पहले एक या दो कीवी खा लेना चाहिये। इंसोमनिया विकार में आराम लगेगा। 

8. मेथी (Fenugreek)-  मेथी के बीजों में एक प्रकार का एमिनो एसिड मौजूद होता है, जो एंटी-डिप्रेशन और एंटी-एंजाइटी के रूप में काम करता है। मेथी के बीजों में मेलाटोनिन नामक  हार्मोन होता है, जो नींद को बढ़ाने में मदद करता है। नींद के लिये आप मेथी के पत्तों का जूस निकाल कर, दो चम्मच जूस में आधा चम्मच शहद मिलाकर रोजाना पीयें। या रात को मेथी के बीजों को पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट, इस मेथी के बीज के पानी को पीयें।

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9. जीरा (Cumin)-  जीरा अनिद्रा की समस्या से राहत दिलाता है। जीरा में मेलाटोनिन हार्मोन होता है जो अनिद्रा से या ऐसे कारकों से लड़ता है जो सोने में व्यावधान डालते हैं। नींद आने के लिये आप जीरा का इस्तेमाल इस प्रकार कर सकते  हैं –

(i)  एक चम्मच जीरा पाउडर को मसले हुऐ केले में मिलाकर सोने से पहले खायें। 

(ii)  एक चम्मच जीरा भून कर पीस लें। इसे एक कप गर्म पानी में मिलाकर पांच मिनट के लिये ढक दें। फिर इस पानी को रोजाना सोने से पहले पीयें।

(iii) दो चम्मच जीरा रात को पानी में भिगो दें। अगले दिन सुबह इसे उबालें जब तक कि पानी का रंग ना बदल जाये। इसे छानकर थोड़ा ठंडा करके पीयें। 

10. सौंफ (Fennel)- सौंफ इंसोमनिया की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकती है। इसमें  मौजूद मैग्नीशियम से नींद आ सकती है और नींद का समय भी बढ़ सकता है। नींद के लिये एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ को उबालकर दिन में दो बार पीयें। 

11. ग्रीन टी (Green Tea)- ग्रीन टी में एक विशेष अमीनो एसिड एल-थिएनाइन होता है, जो नींद को बढ़ावा देने का काम करता है। ग्रीन टी तनाव की समस्या को कम कर नींद की गुणवत्ता में सुधार करती है, परन्तु इसके लिये कम कैफीन वाली ग्रीन टी का ही सेवन करें। ग्रीन टी में आप शहद भी मिला सकते हैं। 

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12. कैमोमाइल टी (Chamomile Tea)- नींद से संबंधित विकारों के उपचार   के लिए इस विशेष हर्बल टी के सेवन से लाभ होता है। इस चाय में नींद को बढ़ावा देने वाले गुण होते हैं। इस चाय में स्वाद के लिये नींबू के रस की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं। यह चाय चिंता, तनाव आदि से भी छुटकारा दिलाने में मदद करती है। 

13. चावल(Rice) – चावल में पर्याप्त मात्रा में ग्लिसेमिक इंडेक्स पाया जाता है और साथ ही ट्रिप्टोफेन और सेरोटोनिन नामक रसायन नींद लाने में मदद करते हैं। रात के भोजन में चावल को सम्मलित करें। चावल खाने से अच्छी नींद  आती है। 

14. सरसों के तेल (Mustard Oil)- रात को सोने से पहले पैरों को अच्छी तरह धोकर, तलवों पर सरसों के तेल मालिश करें। इससे अच्छी नींद आयेगी। तेल की मालिश से न्यूरल सिस्टम शांत होता है जिससे तनाव, चिंता बदन दर्द आदि से राहत मिलती है और अच्छी नींद आती है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको अनिद्रा के लिए घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको विस्तारपूर्वक बताया कि नींद क्या होती है, उम्र के अनुसार नींद की कितनी जरूरत होती है, इंसोमनिया क्या है इसके कितने प्रकार होते हैं, इसके कारण क्या होते हैं, इसके लक्षण क्या होते हैं, शरीर पर इसके क्या प्रभाव पड़ते हैं और इंसोमनिया से राहत पाने के देसी उपाय क्या हैं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

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Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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अनिद्रा के लिए घरेलू उपाय - Home Remedies for Insomnia in Hindi
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