दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, आपने जड़ी-बूटियां, पेड़-पौधे तो बहुत देखे होंगे परन्तु एक पौधा ऐसा है जिसका नाम एक पशु के नाम से आरम्भ होता है। उस पशु और इस पौधे के गुण की समानता यह है कि दोनों को ही शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस गुणकारी पौधे का उपयोग प्राचीन काल से ही किसी ना किसी रूप में अनेक बीमारियों में आयुर्वेदिक उपचार में  होता रहा है। दोस्तो, हम बात कर रहे हैं अश्वगंधा की। यही हमारा आज का टॉपिक “अश्वगंधा”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माधयम से, आपको अश्वगंधा के फायदे पर विस्तार से जानकारी देगा। सबसे पहले जानते हैं कि अश्वगंधा क्या है?

अश्वगंधा क्या है?- What is Ashwagandha

अश्वगंधा वास्तव में जड़ी-बूटी है। इसका पौधा झाड़ीनुमा होता है। इसकी पत्तियों तथा जड़ों में घोड़े की मूत्र की गंध आती है इसीलिये इसे “अश्वगंधा” कहा जाता है। भारत में दो प्रकार की अश्वगंधा पाई जाती है। एक छोटी अश्वगंधा जिसकी झाड़ी छोटी होती है पर जड़ें बड़ी होती हैं। दूसरी बड़ी अश्वगंधा। इसकी झाड़ी बड़ी होती है पर जड़ें छोटी। अश्वगंधा की पत्तियां अण्डाकार होती हैं और फूल हरे और पीले। ये छोटे और पांच के समूह में होते हैं। अश्वगंधा का फल बेरी मटर की तरह छोटा और दूध से भरा हुआ होता है जो पकने पर लाल रंग का हो जाता है। अश्वगंधा की जड़ें 2.5-3.5 सेमी मोटी, मूली की भांति होती हैं और 30-45 सेमी लम्बी। 

अश्वगंधा के फायदे

अश्वगंधा को औषधीय गुणों का श्रोत कहा जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में अश्वगंधा का उपयोग प्राचीन काल से परम्परागत रूप से किया जाता रहा है। इसके पत्ते,जड़, फल, बीज सब कुछ उपयोग में लाये जाते हैं। आयुर्वेद मे अश्वगंधा को मेध्य रसायन भी कहा जाता है। 

अश्वगंधा की खेती कहां होती है – Where is Ashwagandha cultivated

1. इसकी खेती स्पेन, मोरक्को, जोर्डन, मिश्र (Egypt), अफ्रीका, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और श्रीलंका में होती है। 

2. हमारे देश भारत के राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश एंव हिमाचल प्रदेश जिलों में इसकी खेती की जाती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश जिलों में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है।

अश्वगंधा किस रूप में मिलता है? – How does get ashwagandha

अश्वगंधा के निम्न रूप हैं। केमिस्ट स्टोर से ले सकते हैं  या ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगवा सकते हैं –

1. अश्वगंधा चूर्ण

2. अश्वगंधा पाउडर

3. अश्वगंधा कैप्सूल

4. अश्वगंधा गोलियां 

5. अश्वगंधा रस

6. अश्वगंधा की जड़

7. अश्वगंधा चाय

अश्वगंधा चाय आप घर भी बना सकते हैं। 

अश्वगंधा चाय बनाने की विधि – Ashwagandha Tea Recipe

डेड़ (1 1/2)  कप पानी में एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर या अश्वगंधा जड़ का एक छोटा टुकड़ा काट कर डालकर हल्की आग पर तब तब उबालें जब तक पानी एक कप ना रह जाये। इसे उतार कर छान लें। थोड़ा ठंड होने पर इसे ऐसे ही पीलें। यदि इसको मीठा करना है तो आधा चम्मच शहद मिला लें। चाहें तो इसमें आधा नींबू काटकर निचोड़ लें।

याद रखिये – अश्वगंधा चाय में कभी चीनी या गुड़ ना मिलायें क्योंकि चीनी केमिल्स द्वारा प्रोसेस होके बनती है और गुड़ की तासीर अश्वगंधा की ही तरह गर्म होती है। इसलिये फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है।

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अश्वगंधा के गुण – Properties of Ashwagandha 

1. अश्वगंधा की तासीर गर्म होती है। 

2. अश्वगंधा औषधीय गुणों से समृद्ध होता है। इसमें  एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीस्ट्रेस, एंटीटयूमर एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायोटिक गुण होते हैं।

3. अश्वगंधा के पोषक तत्व पाउडर (प्रति 100 ग्राम):-

कैलोरी  245 Kcal

मॉइस्चर  7.45%

प्रोटीन 3.9 g

फैट 0.3g

ऐश 4.41g

क्रूड फाइबर 32.3g

आयरन 3.3 mg

कार्बोहाइड्रेट 49.9 g

कैल्शियम 23 mg

कुल कैरोटीन 75.7 µg

विटामिन-सी  3.7 mg

अश्वगंधा के फायदे – Benefits of Ashwagandha 

1. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करे(Defence system) – अश्वगंधा को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर माना गया है। इसके इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव प्रतिरोधक क्षमता में शरीर की जरूरत के हिसाब से कुछ परिवर्तन करके प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है। प्रतिदिन अश्वगंधा चूर्ण का सेवन कर से आपको लाभ होगा। 

2. संक्रमण से बचाएं (Prevent infection)- अश्वगंधा के सेवन से आप अनेक प्रकार के आंतरिक और बाह्य संक्रमणों से आप सुरक्षित रहते हैं। अश्वगंधा में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो  संक्रमणों से लड़ते हैं। साल्मोनेला नामक बैक्टीरिया के कारण विषाक्तता और आंत संबंधी समस्याऐं हो सकती हैं। अश्वगंधा की जड़ और पत्तों का रस इस बैक्टीरिया को खत्म करते हैं।

3. तनाव दूर करे (Relieve stress)- अश्वगंधा आपको निश्चित रूप से मानसिक तनाव से रखेगा। इसके एंटी-स्ट्रेस गुण तनाव कम करते हैं और आपको मानसिक परेशानियों से बचाते हैं। सिटोइंडोसाइड्स (Sitoindosides) और एसाइलस्टरीग्लुकोसाइड्स (Acylsterylglucosides) नामक यौगिक (Compound) के कारण ही एंटी-स्ट्रेस गुण अपना प्रभाव दिखाते हैं।

4. चिंता और अवसाद दूर करे (Remove anxiety and depression)- भागदौड़ भरी जिन्दगी और बदलते जीवनशैली के आयाम ही बहुत हैं चिंता और अवसाद को बढ़ाने के लिये। ज्यादातर हर किसी को कोई ना कोई चिंता लगी रहती है फिर चिंता से उत्पन्न होता है अवसाद (Dippression)। अश्वगंधा में बायोएक्टिव यौगिक में एंक्सियोलिटिक (Anxiolytic – एंग्जाइटी कम करने की दवा) और एंटी-डिप्रेसेंट प्रभाव देखने को मिलते हैं। अतः निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि अश्वगंधा का सेवन चिंता और अवसाद दूर करने में लाभकारी है। 

5. अनिद्रा की समस्या दूर करे (Get rid of insomnia problem)- अश्वगंधा के सेवन से नींद न आने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। अश्वगंंधा के पत्तों में ट्राएथिलीन ग्लाइकोल नामक यौगिक पाया जाता है जो गहरी नींद लाने में मदद कर सकते हैं। जब नींद अच्छी आयेगी तो निश्चित रूप से आप तनाव मुक्त भी रहेंगे। 

6. पेट के लिये फायदेमंद (Stomach)- अश्वगंधा चूर्ण पेट के लिये अत्यंत लाभकारी है। नियमित रूप से अश्वगंधा चूर्ण आधा चम्मच से भी कम लगभग दो ग्राम गुनगुने पानी से लेने पर कब्ज की समस्या नहीं होगी। गैस की समस्या से भी राहत मिलेगी। यदि पेट में कीड़े हैं तो अश्‍वगंधा चूर्ण को बहेड़ा चूर्ण (बराबर मात्रा) में मिलाकर थोड़े से गुड़ लगभग पांच ग्राम के साथ सेवन करें। या बराबर का गिलोय चूर्ण मिलाकर आधा चम्मच शहद से ले लें।

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7. मांसपेशियां मजबूत बनें (Muscle be Strong)- अश्वगंधा के सेवन से ऊर्जा तो मिलती ही है, शरीर भी मजबूत बनता है। हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जिम में वर्कआउट करने वाले और Wrestler भी अश्वगंधा सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं। इससे न्यूरोमस्कुलर भी मजबूत होते हैं। शारीरिक कमजोरी दूर होने के साथ-साथ  की मांसपेशियों की स्थिती में सुधार होता है। 

8. घाव जल्दी भरे (Wounds heal)-  घाव भरने का सिद्धांत यह है कि बैक्टीरिया को पनपने से रोका जाये अश्वगंधा इसी सिद्धांत पर काम करती है। इसके एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव जीवाणुओं को खत्म करते हैं ताकि संक्रमण की संभावना को रोका जा सके। संक्रमण नहीं होगा तो घाव भी जल्दी भरेगा। चोट, घाव की स्थिती में पानी के साथ अश्वगंधा की जड़ों को पीस कर पेस्ट बनाकर लगायें। पेस्ट के बजाय आप अश्वगंधा का तेल भी घाव पर लगा सकते हैं।

9. त्वचा की सूजन में लाभकारी (Skin inflammation)- अश्वगंधा किसी भी कारण से त्वचा में आई सूजन को कम करने में लाभकारी होती है। त्वचा में सूजन स्टैफिलोकोकस ऑरियस नामक बैक्टिरिया के कारण होती है। अश्वगंधा के एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी  Anti-inflammatory गुण स्टैफिलोकोकस ऑरियस  बैक्टिरिया को खत्म कर त्वचा की सूजन को कम करते हैं। इसके लिये अश्वगंधा का पेस्ट त्वचा पर लगायें।

10. बालों के स्वास्थ्य के लिये (Hair Health)- अश्वगंधा बालों के स्वास्थ के लिये भी बेहद फायदेमंद है।  भरपूर नींद ना आने के कारण स्ट्रैस बनता है जो त्वचा के विकारों जन्म देता है जैसे, स्कैल्प में खुजली, डैंड्रफ और लाल चकत्ते। जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अश्वगंधा के सेवन से तनाव दूर होता है और नींद भी अच्छी आती है। परिणामस्वरूप इन सब विकारों की संभावना नहीं बनेगी। अश्वगंधा और नारियल तेल के बने टॉनिक को लगाने से बालों की जड़ें  मजबूत होती हैं जिससे उनका झड़ना बंद हो जाता है। अश्वगंधा बालों के मेलेनिन को भी बढ़ाता है जिसके कारण बालों का रंग बना रहता है और असमय बाल सफेद नहीं होते।

11. हृदय स्वास्थ्य के लिये (Heart Health)-  अश्वगंधा में पाये जाने वाले  एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एपोप्टोटिक गतिविधियां कार्डियोप्रोटेक्टिव प्रभाव दिखाती हैं। जिनसे हृदय सुरक्षित रहता है।  वैसे भी अश्वगंधा में पाये जाने वाले हाइपोलिपिडेमिक प्रभाव कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अश्वगंधा चूर्ण का नियमित रूप से सेवन करने से टोटल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर नियन्त्रण में रहता है। यह एचडीएल अच्छे  वाले कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है। अश्वगंधा के हाइपोग्लाइमिक प्रभाव, ग्लूकोज की मात्रा को भी नियन्त्रित कर डाइबिटीज की समस्या को कम करने में मदद करते हैं। इस प्रकार कोलेस्ट्रॉल और ग्लूकोज स्तर नियन्त्रण में रहने से हृदय का स्वास्थ सही बना रहता है।

12. यौन क्षमता में वृद्धि (Increased sexual stamina)- अश्वगंधा का सेवन यौन क्षमता की वृद्धि में रामबाण उपाय माना जाता है। अश्वगंधा चूर्ण या कैप्सूल दूध या पानी से लेने पर निश्चित रूप से काम शक्ति में बढ़ोतरी होती है। अश्वगंधा पुरुषों के लिये अत्यंत शक्तिशाली औषधी है जिसके सेवन से नपुंसकता दूर होती है, वीर्य गाढ़ा होता है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता के साथ-साथ इनकी संख्या भी बढ़ती है। 

अश्वगंधा की मात्रा/सावधानियां –  Quantity / precautions of Ashwagandha –

1. अश्वगंधा की मात्रा निर्भर करती है व्यक्ति की आयु, उसके स्वास्थ और उसके रोग पर। इसलिये डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

2. वैसे तो अश्वगंधा के पैकेट, शीशी पर मात्रा लिखी रहती है फिर भी इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिये।

3. इसकी तासीर गर्म होने के कारण इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं किया जाना चाहिये।

4. इसका लंबे समय तक भी सेवन नहीं किया जाना चाहिये।  

5.आंत से संबंधित किसी समस्या से पीड़ित व्यक्ति को इसके सेवन से बचना चाहिये। इस बारे में डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिये। 

6. अश्वगंधा का सेवन करने वाले व्यक्ति को शराब व अन्य प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिये। 

7. रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलास पर ही अश्वगंधा का सेवन करना चाहिये। जिनका रक्तचाप कम रहता हो उनको इसके सेवन से बचना चाहिये। 

अश्वगंधा के नुकसान – Side Effects of Ashwagandha

अश्वगंधा के अधिक सेवन से हो सकते हैं ये नुकसान –

1. पेट में दर्द हो सकता है। दस्त लग सकते हैं। 

2. पेट में गैस बन सकती है।

3. लंबे समय तक सेवन से नींद की समस्या हो सकती है। 

4. उल्टी, जी मिचलाने की समस्या हो सकती है।

5. बुखार, थकावट और सिर दर्द हो सकता है। 

6. गर्भावस्था के समय गर्भपात की संभावना बन सकती है। इसलिये डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।

7. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में अवसाद उत्पन्न हो सकता है।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको अश्वगंधा के फायदे के विषय में विस्तृत जानकारी दी। अश्वगंधा क्या है, इसकी खेती  कहां होती है, किस रूप में मिलती है, इसके गुण क्या होते हैं। इसमें कौन से पोषक होते हैं, इसके बारे में विस्तार से बताया। इस लेख के माध्यम से अश्वगंधा के फायदे और नुकसान भी बताये साथ ही इसकी मात्रा और सावधानियां भी बताईं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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