दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, आपने लोगों को कहते सुना होगा कि बुरे वक्त के घाव तो भर जाते हैं मगर यादें कभी खत्म नहीं होतीं। यही बात कुछ विकारों पर कुछ बीमारियों पर भी लागू होती है। चाहे कोई कितना भी दावा करले मगर विकार या कुछ बीमारियां कभी खत्म नहीं होतीं, हां उनको नियन्त्रित करके उनका असर कम किया जा सकता है जैसे डाइबिटीज, त्वचा के सफेद दाग, गर्भावस्था में पड़ने वाले स्ट्रैच मार्क्स आदि। आज हम आपको एक ऐसे ही रोग के विषय में जानकारी देंगे। आपने देखा होगा कि कई व्यक्तियों को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगती है फिर वो Respiratory Inhaler को निकाल कर मुंह में रख कर दवा लेते हैं तब जाकर वो सामान्य रूप से सांस ले पाते हैं। इन लोगों में कुछ बच्चे भी होते हैं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “अस्थमा” (Asthma)। देसी हैल्थ क्लब आपको अस्थमा का घरेलू उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी देगा। जानते हैं इस बारे में कि अस्थमा क्या होता है?

अस्थमा का घरेलू उपचार

अस्थमा क्या है? – What is Asthma

दोस्तो, सरल भाषा में कहा जाये तो समझिये कि अस्थमा फेफड़ों से सम्बंधित ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। इस स्थिति में वायुमार्ग यानि सांस की नलिकायें एलर्जी के कारण या किसी अन्य कारण से सिकुड़ जाती हैं। इन नलिकाओं के सिकुड़ जाने के कारण फेफड़ों में ऑक्सीजन निर्बाध गति से नहीं पहुंच पाती, जिससे सामान्य रूप से सांस लेने में कठिनाई होती है। सांस फूलने लगती है छाती में जकड़न, भारीपन, बार-बार खांसी उठना जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं। 

अस्थमा किसी भी आयु में हो सकता है। वैसे सबसे अधिक यह बच्चों में विशेष रूप से 5 साल की आयु में विकसित होता है और अधिकतर बच्चों में ठीक भी हो जाता है। बहुत ही कम बच्चों में बड़े होने पर भी अस्थमा बना  रहता है। 

अस्थमा के प्रकार – Type of Asthma

अस्थमा अनेक प्रकार का होता है। हम कुछ मुख्य प्रकारों के बारे में विवरण दे रहे हैं जो निम्न प्रकार हैं –

1. एलर्जिक (Allergic) – वायु प्रदूषण, धूल, मिट्टी, दुर्गन्ध, सुगन्ध, धूंआं आदि से एलर्जी पैदा करने वाला एलरजेन नामक तत्व शरीर में प्रवेश करने पर के अस्थमा के लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

2. नॉन एलर्जिक (Non Allergic)- कोई एलर्जी नहीं होने पर भी किसी को बहुत ज्यादा सर्दी, जुकाम या खांसी होने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। या बहुत ज्यादा तनाव महसूस कर रहा हो तब यह स्थिति नॉन एलर्जिक अस्थमा कहलाती है। 

3. सिजनल (Regional)-  किसी विशेष मौसम में ही किसी को अस्थमा वाले लक्षण प्रकट होने लगें। जैसे कि बहुत सर्दी में या बहुत अधिक गर्मी में खांसी, सांस लेने में दिक्कत। वसंत ऋतु में पराग या बारिश के मौसम में मिट्टी की सुगंध या कचरे की सड़ांध से एलर्जी। 

4. एक्सरसाइज इंड्यूज (Exercise Induced)- जिम में वर्कआउट के दौरान अपनी क्षमता से अधिक एक्सरसाइज करना या अन्य किसी और तरह की कोई शारीरिक गतिविधि करने से अस्थमा की स्थिति सकती है। इसे एक्सरसाइज इंड्यूज अस्थमा कहते हैं।  

5. ऑक्यूपेशनल(Occupational) – किसी विशेष प्रकार के काम करने से यदि अस्थमा की स्थिति बनती है तो इसे ऑक्यूपेशनल अस्थमा कहते हैं। पशुपालन से जुड़े लोग, किसान, नाई, आरा मशीन पर लकड़ी की चिराई का काम करने वाले, ऊन के कारखाने में काम करने वाले, धागा बनाने वाले, चक्की पर गेंहूं पीसने वाले, चूना भट्टी पर काम करने वाले, भट्टे पर ईंट बनाने मजदूर इस ऑक्यूपेशनल अस्थमा का शिकार बनते हैं। 

अस्थमा के कारण – Cause of Asthma

दोस्तो, अस्थमा के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे –

1. अटॉपी (Atopy) अर्थात् आनुवंशिक रूप से मिलने वाली एलर्जी। 

2. आनुवंशिकी – परिवार का कोई सदस्य माता-पिता या भाई-बहन जो अस्थमा से पीड़ित है, की आपको भी इसके होने की संभावना रहती है।

3. यदि बचपन में कोई गंभीर वायरल संक्रमण रहा है तो व्यस्क होने पर वाले  अस्थमा विकसित होने की संभावना रहती है।

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4. तनाव के कारण भी सांस की समस्या हो सकती है।

5. धूल, मिट्टी के संपर्क में आने के कारण।

6. पालतू जानवर के झड़ते बाल, रूसी और उनकी सांस के कारण।

7. एक्सरसाइज या कोई अन्य शारीरिक गतिविधि के कारण।

8. वायु प्रदूषण या वायु में रसायन, गैस आदि के कारण। 

9. धूम्रपान बहुत बड़ा कारण बनता है।

10. मौसम में बदलाव से भी खांसी/सांस की समस्या बनती है।

11. कुछ विशेष दवाऐं भी अस्थमा का कारण बन सकती हैं जैसे एस्पिरिन या एनएसएआईडीएस( NSAIDS)। 

12. बचपन से ही रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना।

अस्थमा के लक्षण – Symptoms of Asthma

1. अस्थमा को सबसे बड़ा और मूल लक्षण यही है कि सांस लेने में दिक्कत होती है। 

2. सांस लेने में सीटी जैसी आवाज आना।

3. बच्चों में सांस छोड़ते हुए घरघराहट की आवाज हो सकती है। ये आवाज खांसी के कारण भी हो सकती है। गंभीर अस्थमा की स्थिति में घरघराहट नहीं होती क्योंकि वायु प्रवाह बहुत कम हो जाता है जिसके कारण घरघराहट की आवाज नहीं हो पाती। 

4. सांस फूलना।

5. छाती में दर्द, जकड़न और भारीपन।

6. बार-बार खांसी उठना। खांसने में दिक्कत होना। आराम से बलगम ना निकल पाना।

7. चेहरे और होंठों का रंग नीला होना।

8. नाड़ी गति का तेज होना।

9. बेचैनी होना, पसीना आना, घबराहट होना।

10. चिंता, तनाव का बढ़ना।

अस्थमा का घरेलू उपचार – Home Remedies for Asthma

दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब यह स्पष्ट करता है कि अस्थमा को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता परन्तु इसको निरन्त्रित कर, इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। ऐसे ही कुछ निम्नलिखित उपाय हम आपको बता रहे हैं।

1. सूखे अंजीर (Dried figs)- अंजीर अस्थमा से होने वाली तकलीफ में राहत पहुंचा सकते हैं। रात को तीन, चार सूखे अंजीर पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इनको खायें। इनके सेवन से श्वास नली में जमा हुआ बलगम धीरे-धीरे हल्का पड़ने लगेगा। जब बलगम साफ हो जायेगा तो सांस लेने में भी रुकावट नहीं होगी, फेफड़े भी सही काम करने लगेंगे। 

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2. आँवला (Amla)-  आँवला के सेवन से भी अस्थमा में राहत मिलती है। इसमें सूजन कम करने वाले एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। आँवला का काट कर बीज निकाल दें, इसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में आधा चम्मच अदरक पाउडर और शहद मिलाकर प्रतिदिन दिन में दो बार खायें। आँवला को पानी में उबाल भी सकते हैं इससे यह कटने में आसान हो जायेगा। आँवला की जगह आँवला पाउडर भी ले सकते हैं।

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3. तुलसी (Basil)- तुलसी में भी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को कम करते हैं। अस्थमा रोग के उपचार में भी तुलसी लाभदायक है। तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल लें। इसे गुनगुना होने तक ठंडा होने दें। फिर इस पानी को पी लें। या तुलसी के पत्तों पीसकर पानी में मिला लें। इसमें सेंधा नमक, सोंठ, जीरा और भुनी हुई हींग भी डालकर उबाल लें। ठंडा करके गुनगुना पी लें।

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4. हल्दी दूध (Turmeric milk)- हल्दी कै औषधीय गुणों की रानी कहा जाता है। इसमें भी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सांस नलिकाओं में आयी सूजन को कम करते हैं। इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण संक्रमण के कारण होने वाले अस्थमा से राहत दिलाते हैं। हल्दी में पाये जाने वाला विशेष तत्व करक्यूमिन अस्थमा के लक्षणों के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। रात को रोजाना एक गिलास दूध में एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीयें। 

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5. शहद, हल्दी और काली इलायची (Honey, turmeric and black cardamom)- अस्थमा के उपचार में शहद को उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है। हल्दी की भांति शहद में भी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो श्वास नलिकाओं की सूजन को कम करते हैं। दो चम्मच शहद में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और आधा चम्मच काली इलायची पाउडर मिक्स करके खाएं। 

6. लहसुन (Garlic)- लहसुन के एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव श्वास नलिकाओं की सूजन को कम करके अस्थमा की तकलीफ से राहत दिलाते हैं। आधा कप दूध में लहसुन की पांच, सात कलियां उबालकर थोड़ा ठंडा करके, गुनगुना पिएं।

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7. अदरक (Ginger)- औषधीय गुणों से समृद्ध अदरक अनेक रोगों के उपचार में उपयोग में लाई जाती रही है। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण श्वास तंत्रिका की सूजन को कम करके, अस्थमा से राहत दिलाते हैं। अदरक और दो कलियां लहसुन को कूटकर पानी में अच्छी तरह उबालें इसमें आधा चम्मच शहद भी डाल दें। इसे थोड़ा ठंडा करके चाय की तरह पिएं। 

8. प्याज (onion)- एनसीबीआई की एक रिसर्च में प्याज के एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी अस्थमैटिक गुणों के बारे में बताया गया है कि ये अस्थमा में राहत पहुंचाने में सक्षम हैं। प्याज श्वास नलिकाओं की सूजन को कम करने के साथ-साथ इसमें पाये जाने वाला सल्फर फेफड़ों की जलन को कम करती है। इसका उपयोग आप किसी भी रूप में कर सकते हैं। 

9. मेथी दाना (Fenugreek seeds)- मेथी शरीर के अंदर की एलर्जी और विशाक्त पदार्थों को समाप्त करने में सक्षम होती है। एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी के दाने डालकर तब तक उबालें जब तक पानी एक तिहाई न रह जाये। इस मेथी वाले पानी में आधा चम्मच शहद और एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पियें। 

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10. अजवाइन (Celery)- अस्थमा के उपचार में अजवाइन के एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुणों का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एक गिलास पानी में आधा चम्मच अजवाइन, चार-पांच तुलसी के पत्ते, दो लौंग, कुछ काली मिर्च के दाने और आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच अदरक पाउडर मिलाकर उबालें। थोड़ा ठंडा करके, गुनगुना पी लें। दिन में दो बार पी सकते हैं। इसकी भाप लेने से नाक और गले के संक्रमण को दूर करती है।

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11. कॉफी (Coffee)- कॉफी में पाए जाने वाला कैफीन तत्व श्वास नलिकाओं की सिकुड़न को खोलने का काम करता है जिससे सांस लेने की तकलीफ में आराम मिलता है। आप अपनी पसंद की कॉफी बनाकर पी सकते हैं।  

12. सहजन की पत्तियां (Drumstick leaves)- सहजन की पत्तियों को भी अस्थमा के उपचार में कारगर उपाय माना जाता रहा है। पानी में मुट्ठी भर सहजन की पत्तियां डालकर उबालें। ठंडा होने पर इसमें काली मिर्च, नींबू  रस और स्वादानुसार नमक मिलाकर पिएं।  

अन्य –  Others

13. बराबर मात्रा में बड़ी इलायची, अंगूर और खजूर को  पीसकर शहद के साथ सेवन करने से अस्थमा में राहत मिलेगी।  

14. तेजपत्ता और पीपल के पत्ते, इन दोनों को 2 ग्राम लेकर पीस लें, फिर इसे मुरब्बे की चाशनी में मिलाकर खाएं। अस्थमा में आराम लगेगा।

15. प्रतिदिन पालक और गाजर के रस को मिलाकर पीने से अस्थमा में आराम मिलता है।

अस्थमा के मरीजों को क्या खाना चाहिए? – What Should Asthma Patients Eat

अस्थमा में ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जिससे कफ ना बने और कफ को पतला करे। निम्नलिखित को भोजन में कर सकते हैं शामिल –

1. अनाज में पुराना चावल गेहूं , मूंग, जौ, कुल्थी का सेवन करें।

2. सब्जियों में गाजर, फूलगोभी, करेला, पालक, शकरकंद, लौकी, कद्दू, ब्रोकोली, रतालू, सफेद मूली, लाल मूली।

3. मसालों में हल्दी, काली मिर्च, अदरक, लहसुन, हरी प्याज़।

4. शहद का सेवन करें।

5. गर्म पानी पीयें। 

क्या खाना नहीं चाहिये? – What Should not be Eaten?

1. ठंडी तासीर वाले खाद्य/पेय पदार्थ

2. कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, ठंडा पानी।

3. मछली, मांस, चिकन अस्थमा मरीजों के लिये नुकसानदायक है।

4. दूध, दही, मक्खन, पनीर, पास्ता, सफेद चावल और अधिक मीठा। 

5. प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें। 

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको अस्थमा का घरेलू उपचार के विषय में विस्तृत जानकारी दी।  अस्थमा क्या होता है, कितने प्रकार का होता है, इसके क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं, इस बारे में बताया। दोस्तो, इस लेख के माध्यम से अस्थमा को नियंत्रण में करने के देसी उपाय भी बताये। अस्थमा में क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए और कुछ सावधानियों के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।  आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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