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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, बरसात का मौसम आने पर गर्मी की तपस से राहत मिलने लगती है और कुछ ऐसा स्पेशल खाने का पदार्थ आता है जिसका नाम सुनते ही, खैर मुंह में पानी तो नहीं आता मगर मन प्रसन्न हो जाता है। जी हां इस स्पेशल का नाम है “भुट्टा”। भुट्टा जिसे मकई या मक्का भी कहा जाता है, खाने में बेहद लजीज होता है। लकड़ी के कोयले की आग पर भुना, नींबू और नमक लगा भुट्टा वास्तव में लाजवाब होता है। इसके स्वाद में लकड़ी के कोयले की आग की खुश्बू इसके जायके को और बढ़ा देती है। इसे उबालकर भी स्नैक्स के रूप में भी खाया जाता है। इसे सेहत का खजाना कहा जाता है। यह ना केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ के लिये अत्यंत लाभदायक होता है। जी हां, दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “भुट्टा खाने के फायदे”। देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको भुट्टा यानी मकई के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि भुट्टा खाने क्या फायदे होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि मकई क्या है, भुट्टा खाने के बाद पानी क्यों नहीं पीना चाहिये और मकई की खेती कहां होती है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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भुट्टा खाने के फायदे
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मकई क्या है? – What is Corn

दोस्तो, मकई या मक्का जिसे भुट्टा भी कहा जाता है, अनाज की फसल है जो मोटे अनाज की श्रेणी में आता है। इसका उत्पत्ति स्थान मैक्सिको है। इसका वैज्ञानिक नाम जी-मेज़ (Zea Maize) है और अंग्रेजी में इसे Corn कहा जाता है। मकई का पौधा 5 से 8 फुट तक लंबा हो जाता हैं। मकई का पीला रंग इसमें मौजूद कैरोटीन की वजह से होता है। भारत में इसका उपयोग अधिकतर मकई की रोटी बनाने के लिये किया जाता है। इसके हरे पत्ते तथा बड़े डंठल दोनों ही पशुओं के चारे के रूप में काम आते हैं। 

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स्वास्थ की दृष्टि से मकई सेहत का खजाना है क्यों कि इसमें विटामिन्स, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड जैसे कई खनिज मौजूद होते हैं। इसमें प्राकृतिक मिठास होती है। मकई, पॉप कॉर्न और कॉर्न फ्लेक्स इंडस्ट्री की तो जान है। मकई के आटे की रोटियों के अतिरिक्त, बरसात के दिनों में भुट्टे को, लकड़ी के कोयले की आग पर भूनकर, नींबू और नमक लगाकर, बड़े चाव से खाया जाता है। 

भुट्टा खाकर पानी क्यों नहीं पीना चाहिये? – Why Should We not Drink Water after Eating Corn?

दोस्तो, भुट्टा खाकर कभी भी तुरंत पानी पीने की गलती कभी ना करें क्यों कि ऐसा करने से पाचन तंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। भुट्टे में स्टार्च और कॉम्प्लेक्स कार्ब होने के कारण पेट दर्द और कब्ज़ की समस्या हो सकती है। भुट्टा खाने के कम से कम आधा घंटे बाद ही पानी पीयें। 

मकई की खेती कहां होती है? –  Where is Corn Cultivated?

1. मकई की जन्मस्थली दक्षिणी मैक्सिको है। लगभग 10,000 वर्ष पहले दक्षिणी मैक्सिको में वहां के निवासियों ने इसे पहली बार फसल के रूप में उगाया था। मकई उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व में प्रथम स्थान पर है। 

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2. मकई की खेती, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन,ब्राज़िल, अर्जेंटीना, यूक्रेन, इंडोनेशिया, भारत, मैक्सिको, कनाडा, रोमानिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, रूस, नाइजीरिया, हंगरी, फिलीपींस, इथियोपिया, मिस्र, सर्बिया, इटली, पाकिस्तान, तंजानिया, टर्की, परागुआ और थाईलैंड आदि देशों में मुख्य रूप से की जाती है।

3. भारत में 1600 ई० के अन्त में मकई की खेती की शुरुआत गई थी। 

4. भारत के उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू, काश्मीर, गुजरात, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश और हिमाचल प्रदेश राज्यों में इसकी खेती की जाती है। 

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मकई के प्रकार – Type of Corn

दोस्तो, रंग और स्वाद के आधार पर मकई के कई प्रकार होते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक प्रकार की मकई की खेती की जाती है, इसका जिक्र हम आगे करेंगे। मकई के कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं – 

1. येलो डेंट कॉर्न (Yellow Dent Corn)-  इसका इस्तेमाल इथेनॉल (एक प्रकार का अल्कोहल) के उत्पादन में किया जाता है जिसे पेट्रोल में मिलाते हैं। यही पेट्रोल गाड़ियों के लिये इस्तेमाल होता है।

2. स्वीट कॉर्न (Sweet Corn)- इस कॉर्न को बाजार से या किराने की दुकान से खरीदते हैं।

3. व्हाइट कॉर्न (White Corn)-  इसका उपयोग भोजन और चिप्स बनाने में किया जाता है।

4.  हाई एमाइलोज कॉर्न (High Amylose Corn)- इसमें स्टार्च की मात्रा होने के कारण इसका इस्तेमाल अधिकतर कपड़ा उद्योग में किया जाता है। 

5. पॉप कॉर्न (Pop Corn)- इसके दाने गर्म करने फूल जाते हैं, इन्हीं को पॉप कॉर्न कहा जाता है।

7. रेड कॉर्नर (Red Corner)- यह प्रकार खाने में अखरोट के स्वाद जैसी लगती है। इसे मीठे कॉर्न की श्रेणी में गिना जाता है।

8. ब्लू कॉर्न (Blue Corn)- इसका इस्तेमाल चिप्स और खाद्य पदार्थों को बनाने के लिये किया जाता है।

9. ओर्नामेंटल कॉर्न (Ornamental Corn)- यह भारतीय मक्का का एक किस्म है, जो कई रंग, रूप में पाई जाती है।

भारत में मकई के प्रकार – Types of Corn in India

भारत में निम्नलिखित सात प्रकार की मकई की खेती की जाती है –

1. पॉप कॉर्न 

2. स्वीट कॉर्न 

3. फ्लिंट कॉर्न 

4. वैक्सि कॉर्न

5. पॉड कॉर्न 

6. फ्लोर कॉर्न 

7. डेंट कॉर्न

मकई के गुण – Properties of Corn

1. मकई की तासीर गर्म होती है।

2. मकई का स्वाद प्राकृतिक मिठास लिये होता है।

3. पकाने के बाद भुट्टे के 50% एंटीऑक्सीडेंट बढ़ जाते हैं। 

4. पके हुए भुट्टे में फेरुलिक एसिड पाया जाता है जो कैंसर जैसी बीमारी में लड़ता है।

5. भुट्टे में विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, कॉपर, जिंक और फोलिक एसिड आदि खनिज होते हैं।

मकई के पोषक तत्व (मात्रा प्रति 100 ग्राम) – Corn Nutrients (Quantity per 100 grams)

पानी                              76 ग्राम 

एनर्जी                  125 Kcal

(कोमल और सॉफ्ट मकई) 

(पकने और सूखने के बाद)  345

प्रोटीन                       2.14 ग्रा.

फैट                                 1.5 ग्राम 

टोटल लिपिड (फैट)           5.46 ग्रा.

कार्बोहाइड्रेट               24 ग्रा.

(कोमल और सॉफ्ट मकई) 

(पकने और सूखने के बाद) 86 ग्रा.

फाइबर                            3 ग्रा.

शुगर                               7.15 ग्रा.

कैल्शियम                       13 मि.ग्रा.

मैग्नीशियम                       12 मि.ग्रा.

फास्फोरस                       46 मि.ग्रा.

आयरन                       0.22 मि.ग्रा.

पोटेशियम                       121 मि.ग्रा.

सोडियम                       218 मि.ग्रा.

कॉपर                       0.028 मि.ग्रा.

जिंक                               0.3 मि.ग्रा.

सेलेनियम                       0.7 माइक्रो. ग्रा.

विटामिन-सी             1.5 मि.ग्रा.

थायमिन                       0.035 मि.ग्रा.

राइबोफ्लेविन               0.089 मि.ग्रा.

नियासिन                       0.833 मि.ग्रा.

विटामिन-बी6                   0.303 मि.ग्रा.

फोलेट (डीएफई)               30 माइक्रो. ग्रा.

विटामिन-ए (आईयू)       65.U

विटामिन-ई                       1.6 मि.ग्रा.

विटामिन-के               7.3 माइक्रो.ग्रा.

फैटी एसिड (सैचुरेटेड)       1.166 ग्रा.

फैटी एसिड 

(मोनोअनसैचुरेटेड)            1.742 ग्रा.

फैटी एसिड 

(पॉलीअनसैचुरेटेड)       2.341 ग्रा.

मकई का उपयोग – Use of Corn

1. मकई की रोटी बनाकर खाई जाती है। सर्दियों में सरसों के साग के साथ मकई की रोटी का Perfect combination बनता है।

2. मकई के दाने उबाल कर स्नैक्स के तौर पर खाये जा सकते हैं।

3. मकई के दानों को भून कर पॉप कॉर्न के रूप में खाये जाते हैं। 

4. कॉर्न फ्लेक्स के रूप में, सुबह के नाश्ते में दूध के साथ खा सकते हैं। 

5. बरसात के दिनों में भुट्टे को लकड़ी के कोयले की आग भूनकर नींबू और नमक लगाकर खाया जाता है।

मकई खाने का समय – Corn Meal Time

1. मकई खाने का कोई समय तो निश्चित नहीं है, सुबह और शाम खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

2. दोपहर को मकई खाना ज्यादा अच्छा नहीं होता है, इसलिये दोपहर को मकई खाना अवॉइड करना चाहिये। 

3. रात में मकई खाने से पचने में समय लगता है। ज्यादा नहीं 25 ग्राम तक खा सकते हैं।

मकई कितनी खानी चाहिये?- How Much Corn Should be Eaten?

1. एक दिन में 40 से 50 ग्राम तक मकई खाई जा सकती है। 

2. भुट्टा एक या दो से ज्यादा नहीं खाना चाहिये। 

भुट्टा खाने के फायदे – Benefits of Eating Corn

अब बताते हैं आपको भुट्टा खाने के फायदे जो निम्न प्रकार हैं 

1. तुरन्त एनर्जी दे (Give Instant Energy)- दोस्तो, भुट्टा खाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको तुरन्त एनर्जी मिल जाती है जिससे कमजोरी और थकान से राहत महसूस होती है। भुट्टे में कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर मात्रा होती है, यह उस समय और बढ़ जाती है जब भुट्टे को भूना जाता है। इसमें स्‍टार्च की भी अधिक मात्रा होती है। कार्बोहाइड्रेट तुरन्त और लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करता है। कार्बोहाइड्रेट अधिक होने के कारण एथलीटों को मकई खाने की सलाह दी जाती है। भुट्टा मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) की कार्य क्षमता में भी सुधार लाता है। 

2. पाचन के लिये फायदेमंद (Beneficial for Digestion)- भुट्टा पाचन क्रिया में भी मदद करता है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर मौजूद होते हैं। घुलनशील फाइबर  कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को रोकता है तो अघुलनशील फाइबर पाचन संबंधी समस्‍याओं को सुलझाता है। यह कब्‍ज़ और आंतों से जुड़ी समस्‍याओं को खत्म करता है जिसे इर्रेबल बाउल सिंड्रोम और दस्‍त, बवासीर, कोलन कैंसर की संभावनाओं को कम करता है। 

3. एनीमिया को दूर करे (Cure Anemia)- विटामिन-बी12, फोलिक एसिड और आयरन की कमी से एनीमिया यानी शरीर में रक्त की कमी की समस्या को दूर करने में मदद करता है। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं को होती है। भुट्टे से इन तीनों की पर्याप्त मात्रा मिल जाती है। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। फोलिक एसिड भोजन से आयरन को सोखता है। भुट्टा में फोलिक ऐसिड की पर्याप्त मात्रा होती है। अतः एनीमिया की समस्या में नियमित रूप से भुट्टा खाया जा सकता है। 

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4. कोलेस्ट्रॉल के लिये फायदेमंद (Beneficial for Cholesterol)- भुट्टा में विटामिन-सी, कैरोटीनॉयड और बायोफ्लावोनोइड्स होते है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कंट्रोल करके रक्‍त प्रवाह को बढ़ाते हैं। मकई के तेल में लिनोलेइक एसिड पाया जाता है जो यह बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम कर नियंत्रित करता है। भुने हुए भुट्टे मे एंथैथोजेनिक (antiatherogenic) प्रभाव शरीर द्वारा कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को कम करने का काम करता है और शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाये रखता है। भुट्टा में ओमेगा-3 फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है जो खराब कोलेस्‍ट्रोल LDL को नियंत्रित करती है। 

5. डायबिटीज में फायदेमंद (Beneficial in Diabetes)- डायबिटीज के मरीजों के लिये भुट्टा एक अच्छा विकल्प है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने का कोई खतरा नहीं रहता और उनकी मीठा खाने की इच्छा भी पूरी हो जाती है। ब्लू कॉर्न में कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करते हैं। भुट्टा में मौजूद फाइटोकेमिकल्‍स हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के साथ-साथ डायबिटीज को को भी कम करते हैं।

ये फाइटोकेमिकल्‍स शरीर में इंसुलिन के अवशोषण और मुक्‍त (absorption and release ) होने को कंट्रोल करते हैं। भुट्टा में पैंटोथिनेक एसिड विटामिन-बी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय में मदद करने करते हुए एड्रेनल ग्रंथियों (adrenal glands) के कार्य को बढ़ा कर तनाव को कम करने का काम करते हैं। विशेषज्ञ भी फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर मकई को भोजन में सम्मलित करने की सलाह देते हैं।

6. हृदय के लिये फायदेमंद (Beneficial for Heart)- हमने ऊपर बताया है कि भुट्टा के फाइटोकेमिकल्‍स ब्लड प्रेशर को कम करते हैं, विटामिन-सी, कैरोटीनॉयड और बायोफ्लावोनोइड्स कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कंट्रोल करते हैं, इसके विटामिन और खनिज डायबिटीज को कंट्रोल करते हैं। भुट्टा के विटामिन्स और खनिज, तनाव को कम करते हैं। ये सभी कारक हृदय स्वास्थ के लिये खतरा बनते हैं। भुट्टा में पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है जो ब्लड प्रेशर को कम करने काम करता है और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है ताकि रक्त संचार और रक्त प्रवाह सही बने रहें। इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक की संभावना नहीं रहती। निष्कर्षतः भुट्टा खाने से हृदय सुरक्षित रहता है।

7. अल्जाइमर में फायदा (Benefits of Alzheimer’s)- अल्जाइमर को “भूलने वाला रोग” कहा जाता है जिसमें स्मृति कमजोर हो जाना, बोलने में परेशानी, निर्णय ना ले पाना आदि लक्षण होते हैं।  यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो अधिकर 65 वर्ष की आयु के बाद होती है। भुट्टे में थायमिन की पर्याप्त मात्रा होती है जो स्मरण शक्ति को बढ़ाने, मस्तिष्‍क कोशिकाओं और ज्ञान संबंधी क्रियाकलापों  (cognitive function) को बढ़ाने में मदद करती है। 

8. वजन बढ़ाने में फायदेमंद (Beneficial in Weight Gain)- वो लोग जो अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिये भुट्टा बहुत अच्छा विकल्प है। वजन बढ़ाने के लिए अधिक मात्रा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। भुट्टा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं जो वजन बढ़ाने में मदद करते हैं। 

9. आंखों के लिये फायदेमंद (Beneficial for Eyes)- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ दृष्टि भी कमजोर पड़ने लगती है, मोतियाबिंद होना एक आम समस्या है। मैक्युलर डीजेनेरेशन (macular degeneration) की भी संभावना रहती है। पीले भुट्टे में कैरोटीनोइड नामक पदार्थ होता है जो मैक्युलर डीजेनेरेशन की संभावना को रोकने में मदद करता है।

भुट्टे में पाये जाने वाला बीटा कैरोटीन विटामिन-ए के उत्पादन में मदद करता है और देखने की क्षमता को बढ़ाता है। भुट्टे के फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सिडेंट  गुण कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं जिससे मोतियाबिंद होने की संभावना नहीं रहती। 

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10. गर्भावस्था में फायदेमंद (Beneficial in Pregnancy)- गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को अपने और गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिये, आहार में अतिरिक्त विटामिन्स और आयरन, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन जैसे खनिजों की अतिरिक्त जरूरत होती है। ये सब भुट्टा खाने से मिल जाते हैं। भुट्टे में फोलिक एसिड भी मौजूद होता है जिसकी वजह से शिशु का वजन कम होना (Under weight) तथा अन्य रोग होने, की संभावना नहीं रहती। 

भुट्टा खाने के नुकसान – Side Effects of Eating Corn 

भुट्टा अधिक खाने से हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. किसी-किसी को एलर्जी भी हो सकती है जैसे त्वचा पर रैशेज़ पड़ जाना, उल्टी आदि। ऐसा होने पर तुरन्त इसका सेवन बंद कर देना चाहिये।

2. अधिक मात्रा में खाने से पिलाग्रा (Pellagra) यानी विटामिन्स की कमी हो सकती है।

3. अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट से संबंधित समस्याऐं हो सकती हैं जैसे, पेट फूलना, पेट में दर्द, अपच, गैस, उल्टी आदि।

4. कच्ची मकई खाने से दस्त लग सकते हैं।

5. डायबिटीज के मरीजों को सावधानी से इसका सेवन करना चाहिये, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है।

6. कई लोगों को भुट्टा अधिक मात्रा में खाने से अस्थमा का दौरा भी पड़ सकता है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने भुट्टा खाने के फायदे यानी मकई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मकई क्या है, भुट्टा खाकर पानी क्यों नहीं पीना चाहिये, मकई की खेती कहां होती है, मकई के प्रकार, भारत में मकई के प्रकार, मकई के गुण, मकई के पोषक तत्व, मकई का उपयोग, मकई खाने का समय और मकई कितनी खानी चाहिये, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से भुट्टा खाने के बहुत सारे फायदे बताये और कुछ नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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भुट्टा खाने के फायदे
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने भुट्टा खाने के फायदे यानी मकई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मकई क्या है, भुट्टा खाकर पानी क्यों नहीं पीना चाहिये, मकई की खेती कहां होती है, मकई के प्रकार, भारत में मकई के प्रकार, मकई के गुण, मकई के पोषक तत्व, मकई का उपयोग, मकई खाने का समय और मकई कितनी खानी चाहिये, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया है।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · September 22, 2022 at 9:58 am

So nice

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