दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, दिल की दुनियां भी बहुत विचित्र होती है। दिल टूटता है, फूटता है, हंसता है, गाता है, रोता है, इसमें पूरे जहां का दर्द समा जाता है, यहां तक कि यह पागल भी हो जाता है। ये सब हमने किताबों में पढ़ा है, फिल्मों में देखा है और वास्तविक जीवन में भी देखा है। लेकिन मेडिकल की दुनियां का दिल बिल्कुल अलग होता है, यह टूटता फूटता नहीं है गाता है ना हंसता है। इसे जब धोखा मिलता है तो चोट इसे लगती है और तक्लीफ़ औरों को होती है, खुद नहीं रोता  बल्कि औरों को रुलाता है। अब प्रश्न ये है कि इसको धोखा देता कौन है? जी हां, इसको धोखा देते हैं, अनेक कारणों से इसी की धमनियां और नसें। ये दिल में और दिल से बाहर शरीर के सभी भागों को रक्त प्रवाह को बाधित कर देती हैं। ऐसी स्थिति में इसे आघात लगता है और दर्द, सीने में होता है। हमारे साथ रोना, हमारे परिवार वालों को भी आता है। फिर इन धमनियों का उपचार कराना पड़ता है जिसे बाईपास सर्जरी कहा जाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “बाईपास सर्जरी क्या होती है?”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको बाईपास सर्जरी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि यह सर्जरी कैसे की जाती है। सबसे पहले जानते हैं कि दिल यानी हृदय क्या है, हृदय गति रुक जाना क्या होता है, नसें क्या होती हैं, धमनियां क्या होती हैं और बाईपास सर्जरी किसे कहते हैं। इनके बाद फिर अन्य बिन्दुओं (Points) की जानकारी देंगे। 

बाईपास सर्जरी क्या होती है?

हृदय क्या है? – What is Heart?

हृदय, शरीर के जटिल अंगों में से एक प्रमुख अंग है जो हृदय मांसल (cardiac muscle) से बना होता है। यह ऊतक एक अनैच्छिक पेशी (involuntary muscle)  है जो सिर्फ़ हृदय अंग में ही पाया जाता है। हृदय का काम  सारे शरीर की जैविक क्रियाओं (Biological functions) के लिये ऑक्सीजन युक्त रक्त उपलब्ध करना है। यह सामान्य रूप से छाती के बीच में होता है, इसका सबसे बड़ा भाग कुछ बायीं तरफ स्तन की हड्डी (breastbone) के नीचे होता है। हालाँकि यह बहुत ही कम मामलों में दायीं तरफ देखा गया है। बायां हृदय (निलय – Ventricle) अधिक शक्तिशाली होता है। यह शरीर के सभी भागों के लिये पम्प करता है। बायां फेफड़ा दायीं तरफ के फेफड़े से छोटा होता है क्योंकि बायीं तरफ की आधी छाती की अधिक जगह में, हृदय स्थित होता है। कोरोनरी परिसंचरण (coronary circulation) के द्वारा रक्त हृदय में पहुंचता है। दोस्तो, हृदय तक और हृदय से बाहर पूरे शरीर में रक्त लाने ले जाने का काम नसें और धमनियां करती हैं। हृदय, औसतन एक मिनट में 72 बार धड़कता है और एक मिनट मे 70 मि।ली। रक्त पम्प करता है। हृदय का भार औसतन महिलाओं में 250 से 300 ग्रा।और पुरुषों में 300 से 350 ग्राम होता है। 

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हृदय गति रुक जाना क्या होता है? – What is Heart Failure?

किसी कारणवश यदि हृदय का धड़कना रुक जाये तो इसे हृदय गति का रुक जाना (Cardiac arrest) कहा जाता है। यह अत्यंत गंभीर और आपातकाल की स्थिति होती है जिसमें मस्तिष्क को ऑक्सीजन की निरन्तर आपूर्ति रुक जाती है। इस स्थिति में यदि तुरन्त चिकित्सा ना मिले तो मृत्यु हो जाती है। दोस्तो, बाईपास सर्जरी के बारे में जानने से पहले जरूरी है कि नसें और धमनियां क्या होती हैं?

नसें क्या होती हैं? – What are Nerves?

नसें रक्त वाहिकाएं होती हैं। ये ऑक्सीजन रहित रक्त को हृदय की ओर ले जाती हैं। पेशी संकुचन (Muscle contraction) की सहायता से नसों में रक्त बहता है। रक्त का दबाव (Blood pressure) 5 मिमी एचजी होता है। नसों का व्यास 1 मिमी से 1.5 सेमी तक अलग-अलग हो सकता है।

धमनियां क्या होती हैं? – What are Arteries?

धमनियां भी रक्त वाहिकाएं होती हैं। हमारे शरीर में 250 धमनियां होती हैं।  पल्मोनरी एवं आवलनाल धमनियों के अतिरिक्त सभी धमनियां ऑक्सीजन-युक्त रक्त हृदय से आगे ले जाती हैं। धमनियां मोटी होती हैं और लचीली होती हैं। इनके अंदर का व्यास कम होता है, रंग गुलाबी या चटख लाल होता है और ज्यादा दबाव होने पर इनमें रक्त झटके के साथ बहता है ना कि सामान्य तौर पर। हमारे शरीर में मौजूद कुल रक्त का करीब 15 प्रतिशत भाग धमनियों में हर समय मौजूद रहता है। इनमें रक्त का दबाव (Blood pressure) 120 मिमी एचजी होता है। धमनियां दो प्रकार की होती हैं –

1. फुफ्फुसीय धमनियां (Pulmonary Arteries) – ये धमनियां ऑक्सीजन-क्षीण रक्त oxygen-depleted blood को हृदय से फेफड़ों तक ले जाती हैं। 

2. प्रणालीगत धमनियां (Systemic Arteries) – ये धमनियां ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय से शरीर के अन्य भागों तक ले जाती हैं। 

महाधमनी शरीर में सबसे बड़ी धमनी होती है जो हृदय के बांये निलय (Ventricle) से शुरु होती है। इसमें  ऑक्सीजन युक्त रक्त,  सारे शरीर की ऊतकों में ऑक्सीजन का संचारण करता है।  इस महाधमनी की 25 शाखाऐं होती हैं। 

दिमाग में रक्त की आपूर्ति करने वाली मुख्य धमनी को ब्राचियोसेफिलिक (Brachiocephalic) धमनी कहते हैं। मुख्य धमनी हृदय को रक्त की आपूर्ति करती है। शरीर के नीचे वाले क्षेत्रों को कोरोनरी धमनी कहा जाता है। 

हृदय को रक्त की सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाओं को कोरोनरी धमनियां (Coronary arteries) कहा जाता है।  

बाईपास सर्जरी किसे कहते हैं? – What is Bypass Surgery?

इसका पूरा नाम हृदय धमनी बाईपास शल्य-क्रिया (Coronary Artery Bypass Graft Surgery – CABG) है। इसे बाईपास सर्जरी, हृदय बाईपास आदि नामों से से भी जाना जाता है। हृदय को रक्त पहुंचाने का काम तीन मुख्य धमनियां करती हैं। किसी भी एक धमनी में या तीनों धमनियों में, किसी कारणवश रुकावट आ जाये तो इसे हृदय धमनी रोग (Coronary Artery Disease – CAD) कहा जाता है। इसके उपचार के लिये शल्य क्रिया सबसे अच्छा विकल्प होता है। इसका दूसरा और सस्ता विकल्प एंजियोप्लास्टी होता है।  शल्य क्रिया में शरीर के किसी विशेष भाग से नस लेकर उसे हृदय की धमनी के रुके हुए स्थान के समानांतर जोड़ देते हैं। यह जोड़ी हुई नस हृदय की धमनी में रक्त प्रवाह फिर से चालू कर देती है। शल्य-क्रिया की इस तकनीक को ही बाईपास सर्जरी कहा जाता है। 

एंजियोप्लास्टी क्या होती है? – (What is Angioplasty?)

एंजियोप्लास्टी, जिसे हिन्दी में रक्तवाहिकासंधान कहते हैं, को पर्क्युटेनियस कोरोनरी इण्टरवेंशन (Petictiani Coronary Intervention) के नाम से जाना जाता है। इसे सामान्यःतौर पर कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (Coronary Angioplasty) कहा जाता है। यह भी एक शल्य प्रकिया है जिसमें संकुचित (Stenosis) या बाधित हुई हृदय धमनियों को रक्त यांत्रिक रूप से चौड़ा कर दिया जाता है जिससे रक्त संचार (Blood circulation) फिर से चालू हो जाता है। किसी मामले में कोरोनरी आर्टरी स्टेंट भी (Coronary Artery Stent) भी डाल दिया जाता है। एंजियोप्लास्टी संकुचित या बाधित हुई हृदय धमनियों में दुबारा से रक्त संचार रक्त चालू करने का सबसे तेज तरीका है। एंजियोप्लास्टी को बाईपास सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है।

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हृदय की धमनियों में रुकावट के कारण –  Cause of Blockage in the Arteries of the Heart

हृदय की धमनियों में रुकावट निम्न कारणों से आती है-

1. वसा (Fat) के जमाव होने से धमनियां कठोर हो जाती हैं जिससे रक्त के निरन्तर प्रवाह में रुकावट आ जाती है।  

2. हाई ब्लड प्रेशर।

3. कॉलेस्ट्रोल स्तर में असंतुलन। एलडीएल यानी “खराब” कॉलेस्ट्रोल बढ़ जाना और एचडीएल यानी “अच्छा” कॉलेस्ट्रोल का कम हो जाना।

4. डायबिटीज की समस्या।

5. मोटापा यानी वजन का बढ़ना।

6. व्यायाम ना करना। हल्का-फुल्का व्यायाम तो होना ही चाहिये।

7. बेहद आरामपूर्ण जीवनशैली अर्थात् शारीरिक गतिविधि ना होना या नहीं के समान होना।

8. बहुत अधिक धूम्रपान करना।

9. छाती में किसी प्रकार की रेडिएशन थेरेपी।

10. हृदय के वाल्व खराब होना।

बाईपास सर्जरी क्यों की जाती है? – Why is Bypass Surgery Done?

बाईपास सर्जरी निम्नलिखित परिस्थितियों में की जाती  है –

1. जब अचानक छाती में दर्द उठे। यह दर्द दांत, जबड़े, उंगलियां, हाथ, में भी महसूस किया जाये। इसका मतलब है की हृदय को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं हो रही। धमनियों में ब्लॉकेज हो सकता है।

2. सांस लेने में दिक्कत हो, सांस फूलता हो। शरीर में कमजोरी महसूस हो और हल्का सी भी गतिविधि करने से सांस लेने में तकलीफ हो। यह हृदय धमनी की क्षति के कारण हो सकता है।  

3. एंजाइना के लक्षण नहीं होने पर भी अनेक परीक्षणों से  धमनियों में रुकावट का पता चले।  छाती में दर्द को एंजाइना कहा जाता है। इसे एंजाइना पेक्‍टोरिस या इस्‍केमिक चेस्‍ट पेन भी कहते हैं। 

4. एंजियोग्राफी से जब यह पता चले कि मरीज को कभी भी हृदयाघात (Heart attack) हो सकता है तब ऐसी परिस्थिति में मरीज के सीने में दर्द उठने के कम से कम छह घंटे पहले ही मरीज की बाईपास सर्जरी कर दी जानी चाहिये।

5. हृदयाघात से उबरने के बाद भी सीने में दर्द बने रहने की स्थिति में। 

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6. धमनी में सूजन की स्थिति में। सूजन से धमनी की दीवारों को नुकसान पहुंचता है। यह सूजन शरीर की किसी भी धमनी को प्रभावित कर सकती है। कोनोनरी धमनी को भी  क्षतिग्रसत कर सकती है।

7. एक या एक से ज्यादा धमनियों में ब्लॉकेज आने पर धमनी की उपशाखाऐं संकुचित हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में बाईपास सर्जरी ही विकल्प होता है।

8. हृदय के वाल्व खराब हो जाने की स्थिति में। इनको ठीक के लिये सर्जरी की आवश्यकता होती है।  

9. हृदय की रक्त को पंप करने की क्षमता का कम हो जाना।

10. एंजियोप्लास्टी के असफल रहने पर या एंजियोप्लास्टी के बाद कुछ जटिलताऐं आने पर। 

बाईपास सर्जरी से पहले होने वाले टैस्ट – Tests Before Bypass Surgery

दोस्तो, हृदय और हृदय धमनियों की स्थिति जानने के लिये डॉक्टर्स निम्नलिखित टैस्ट करवा सकते हैं तभी बाईपास सर्जरी के बारे में निर्णय लिया जाता है –

1. इलैक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी या ईकेजी)

2. इकोकार्डियोग्राम (इको)

3. स्ट्रेस टेस्ट

4. न्युक्लीयर हार्ट स्कैन

5.  इलैक्ट्रॉन बीम कंप्युटराइज्ड टोमोग्राफी (ईबीसीटी)

6. मैग्नेटिक रिजोनेन्स एंजियोग्राफी (एमआरए)

7. एंजियोग्राफी

8. इंटरावस्कूलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस)

9. एक्स-रे

10. ब्लड टेस्ट

11. सीटी एंजियोग्राफी

बाईपास सर्जरी से पहले डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली जानकारियां/दिशा निर्देश – Information/Guidelines to be Given by the Doctor before Bypass Surgery

1. सर्जरी से पहले निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखा जाता है –

(i)  मरीज की आयु और उसका सामान्य स्वास्थ्य।

(ii) मरीज, वर्तमान में जो दवाऐं ले रहा है।

(iii) किसी विशेष दवा से एलर्जी।

(iv) पहले हुई किसी भी प्रकार की सर्जरी।

(v)  हृदय रोग के लिये पहले किया गया कोई उपचार।

(vi) परिवार किसी को हृदय रोग होना।

2. डॉक्टर एनेस्थीसिया के बारे जानकारी देते हैं।

3. ऑपरेशन के बाद बरतने वाली सावधानियां।

4. ऐसी दवाएं लेने से मना किया जाता है जो रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया पर  प्रभाव डालती हैं। 

5. सर्जरी से पहले इस्तेमाल करने के लिए एक विशेष प्रकार का साबुन दिया जाता है।

6. धूम्रपान की सख्त मनाही होती है। 

7. सर्जरी से तुरंत पहले कुछ भी खाना पीना वर्जित होता है। 

8. पानी भी पीने की मनाही होती है। यदि प्यास से मुंह सूख रहा है तो पानी से गरारे कर सकते हैं, पी नहीं सकते। पानी बिल्कुल भी पेट में नहीं जाना चाहिये।

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बाईपास सर्जरी कैसे की जाती है? – How is Bypass Surgery Performed?

दोस्तो, बाईपास सर्जरी के लिये हार्ट सर्जन, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ), पर्फ्युशनिस्ट (हार्ट-लंग मशीन विशेषज्ञ), अन्य सर्जन और नर्स की एक पूरी टीम की होती है।  

1. सामान्य प्रक्रिया – General Procedure

मरीज को एनेस्थीसिया देने के बाद, मरीज के सीने की बीच की हड्डी, जिसे स्टर्नम (Sternum) कहा जाता है,  को काट दिया जाता है ताकि हृदय तक पहुंचा जा सके। पूरे शरीर में ऑक्सीजन और रक्त का प्रवाह चालू रखने के लिये उसे हार्ट-लंग मशीन से जोड़ दिया जाता है। यह मशीन हृदय और फेफड़ों का काम करने लगती है। हृदय को एक ऐसे घोल से धो दिया जाता है जिससे उसका तापमान कम हो जाये और धड़कना भी बंद हो जाये। फिर ग्राफ्टिंग का काम किया जाता है। ग्राफ्टिंग के लिये शरीर के अंगों की धमनी/नस (इसका जिक्र आगे करेंगे) का पहले से ग्राफ्ट तैयार करके रखा जाता है जिसे जरूरत के हिसाब से बाईपास ग्राफ्ट कर दिया जाता है। अर्थात् जो रुकी हुई धमनी है उसी में ब्लॉकेज या रुकावट के आगे नई धमनी/नस जोड़ दी जाती है। फिर हृदय और फेफड़ों को रक्त संचार व्यवस्था से वापस जोड़ कर हार्ट लंग मशीन को हटा दिया जाता है और हृदय की सतह पर दो पेसमेकर के तार लगा देते हैं। इन तारों को अस्थाई पेसमेकर से जोड़ देते हैं, यदि हृदय की धड़कन अनियमित हो जाये तो यह पेसमेकर उसे नियंत्रित कर लेता है। फिर अंत में सीने की हड्डी को तारों से सिलाई करके त्वचा में टांके लगा देते हैं। इस ऑपरेशन में तीन से चार घंटे का समय लगता है और चार से छह यूनिट तक रक्त की आवश्यकता होती है। 

ग्राफ्ट के लिये ली जाने वाली धमनी/नस – Grafted Artery/Vein

(i)  आर्टरी ग्राफ्ट (Artery Graft)- सामान्य रूप से बाएं स्तन की आंतरिक धमनी का इस्तेमाल किया जाता है। या फिर ग्राफ्ट के लिये बांह की धमनी का भी किया जा सकता है। इसे रेडियल आर्टरी कहते हैं।

(ii) वेन ग्राफ्ट (Vein Graft)- सेफेनॉस वेन एक लंबी नस होती है जो पैर के आंतरिक भाग में होती है  यह नस ग्राफ्ट के लिये सबसे सामान्य रूप में उपयोग में लाई जाती है। समय व्यतीत होने के साथ इसके ब्लॉक होने की संभावना ज्यादा होती है। 

2. नॉन ट्रेडिशनल आर्टरी बाईपास सर्जरी (बीटिंग हार्ट सर्जरी) – Non-Traditional Artery Bypass Surgery (Beating Heart Surgery)

दोस्तो, बाईपास सर्जरी की नई आधुनिक तकनीक में बीटिंग हार्ट सर्जरी पूरी तरह सफल है यहां तक कि छः महीने के बच्चे की भी बाईपास सर्जरी की जा सकती है। देसी हैल्थ क्लब यह बताना चाहता है कि इस तकनीक द्वारा, दुनियां में पहली बार हमारे देश भारत के शहर मुंबई में, जनवरी 2009 में, शॅरॉन डिसूज़ा नाम की छः महीने की बच्ची की सफल बाईपास सर्जरी हुई थी। दोस्तो, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उस बच्ची को उसे जन्मजात रेयर कंजेनाइटल हृदय विकार के कारण एनॉमल्स लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी फ्रॉम पल्मोनरी धमनी  (Anamneous left coronary artery from pulmonary artery disease) रोग था जो 5 लाख बच्चों में एक को होता है।  यह सर्जरी भी हृदय धमनी बाईपास शल्य-क्रिया (CABG) के समान ही होती है। इस प्रक्रिया में भी सीने की हड्डी काट कर हृदय तक पहुंचना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में हृदय की धड़कन को रोका नहीं जाता और ना ही हार्ट-लंग मशीन का उपयोग किया जाता है। इसे बीटिंग हार्ट बाईपास ग्राफ्टिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस आधुनिक तकनीक से  हृदय के केवल उसी विशेष स्थान के रक्त श्राव को रोका जाता है जहां की शल्य-क्रिया होनी है। इस सर्जरी में केवल एक से दो यूनिट रक्त की ही आवश्यकता होती है और मरीज को केवल एक सप्ताह में ही अस्पताल में डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

3. मिनिमली इनवेसिव डायरेक्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (मिनिमल इन्वेसिव तकनीक) – Minimally Invasive Direct Coronary Artery Bypass Grafting (Minimally Invasive Technique)

इस आधुनिक तकनीक में, आधुनिक स्टेबलाइजर उपकरण की सहायता से केवल तीन इंच जितने छोटे कट लगाकर भी बाईपास सर्जरी की जाती है। इसमें भी हार्ट-लंग मशीन की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक के कारण बड़ा चीरा लगाने के जरूरत नहीं होती।  सीने के बांये हिस्से में छोटे-छोटे चीरे लगाकर सीने की हड्डी को खोल दिया जाता है। यह उन रक्त वाहिकाओं में ग्राफ्टिंग के लिये किया जाता है, जो सामने की तरफ होती हैं। मिनिमल इनवेसिव तकनीक के द्वारा हृदय को जरूरत के हिसाब से घुमाया जा सकता है जिससे हृदय के पिछले और किनारे के भागों को भी देख पाना आसान हो जाता है। मरीज को तीन से चार दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है। इसके बाद दुबारा ऑपरेशन की संभावना नहीं के बराबर होती है। देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करना चाहता है कि यह प्रक्रिया सामान्य ना होकर बिल्कुल नई है और इस प्रक्रिया से दो या दो से अधिक कोरोनरी आर्टरी में बाईपास नहीं बनाया जा सकता।

ऑपरेशन के बाद की स्थिति – (After operation condition)

1. ऑपरेशन के बाद मरीज को 24 से 48 घंटे तक गहन देखरेख इकाई (आई।सी।यू) में रखा जाता है। 

2. मरीज की छाती से कार्डियक मॉनीटर की तारें इलेक्ट्रॉड के द्वारा लगी होती हैं जिनसे ईसीजी और  हृदय की गति की स्थिति का निरन्तर पता चलता रहता है। 

3. एक धमनी में एक केन्यूला लगी होती है जिससे मरीज का ब्लड प्रैशर जांचा जाता है। 

4. मरीज के सीने में दो नली लगी होती हैं जिनके द्वारा सीने के अंदर से द्रव्य बाहर निकलता रहता है। इन नलियों को ऑपरेशन के एक दिन बाद निकाल दिया जाता है।

5. मरीज की सांस नली में, 16 से 24 घंटे बाद तक के लिये एक एंडोट्रेकियल टयूब लगी रहती है जो कृत्रिम श्वास-यंत्र से जुड़ी होती है। यह मरीज को सांस लेने में मदद करता है। जब मरीज अपने आप अच्छी तरह से सांस लेने लगता है तब इसको हटा देते हैं। जब तक यह ट्यूब मरीज की सांस नली में लगी होती है तब तक वह ना कुछ खा सकता है, ना पी सकता है और ना बात कर सकता है।

6. मरीज के मुंह और नाक पर एक ऑक्सीजन मास्क भी लगा रहता है जिससे उसे सही से ऑक्सीजन मिलती रहे।

7. एक या दो सप्ताह में मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इस दौरान उसके सीने और पैर के घाव (यदि पैर से नस निकाली गई है तो) या शरीर का वह हिस्सा जहां से नस ली गई है, के घाव भी सूख जाते हैं। यदि पैर से नस निकाली गई है तो पैर में सूजन रह सकती है। इसी लिये पैर ऊपर करके, मतलब पैर नीचे नहीं लटकने चाहियें, आराम करने की सलाह दी जाती है। और चलते समय पैर पर क्रैप बैंडेज बांधने को कहा जाता है इससे सूजन बढ़ेगी नहीं।

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घर पर देखभाल – Home Care

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मरीज की घर पर देखभाल बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसके लिये निम्न बातों का ध्यान रखें –

1. मरीज का कमरा एकदम साफ सुथरा और हवादार होना चाहिये। प्रतिदिन उस कमरे में, पानी में डिटॉल डालकर पोछा लगना चाहिये ताकि कोई संक्रमण ना हो।

2. मरीज के बिस्तर की चादर, तकिया कवर रोजाना बदलना चाहिये। मरीज के कपड़े भी रोजाना बदलवाने चाहियें।

3. सर्जरी के बाद शरीर में कमजोरी आ जाती है, इसलिये अपनी शारीरिक गतिविधि कम करें। 

4. इस बात का ध्यान रखें कि सीने पर चीरा लगा हुआ है इसलिये कोई भारी सामान उठाने/खींचने की गलती ना करें।

5. खांसते और छींकते समय आपको सीने में दर्द होगा, इसके लिये परेशान ना हों। पूरी तरह ठीक होने तक इस तरह का दर्द होगा ही।

6. डॉक्टर ने जो दवाईयां दे रखी हैं, उनको ठीक से नियमित रूप से लेते रहें।

7. सर्जरी के स्थान का ध्यान रखें, यदि जरा भी लालिमा, या पस या कोई संक्रमण का आभास होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

8. अपने ब्लड प्रैशर की नियमित जांच करवाते रहें।

9. डॉक्टर जब-जब भी जांच के लिये कहें, अपॉइंटमेंट लेकर जायें और जांच करवायें, इससे आपका और डॉक्टर दोनों का समय बचेगा।

10. खाने का विशेष ध्यान रखें। साफ और ताजे फल, सब्जियां खायें। संतृप्त वसा (Saturated Fat) वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें जैसे केक, पेस्ट्री, डेरी पदार्थ, पिज्जा, बर्गर आदि। बेहतर होगा यदि आहार विशेषज्ञ से डाइट चार्ट बनवा लें।

11. धूम्रपान बिल्कुल भी ना करें। शराब के बारे में डॉक्टर से सलाह ले लें।

12. इस बात का ध्यान रखें कि घर पर पूरी तरह ठीक होने में 6 से 12 हफ्ते का समय लग सकता है, इसलिये मन और मस्तिष्क को शांत रखें और डॉक्टर के दिशा निर्देशों का ईमानदारी से पालन करें। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बाईपास सर्जरी क्या होती है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हृदय क्या है, हृदय गति रुक जाना क्या होता है, नसें क्या होती हैं, धमनियां क्या होती हैं, बाईपास सर्जरी किसे कहते हैं, एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) क्या होती है, हृदय की धमनियों में रुकावट के क्या कारण होते हैं, बाईपास सर्जरी क्यों की जाती है, बाईपास सर्जरी से पहले होने वाले टैस्ट और बाईपास सर्जरी से पहले डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली जानकारियां/दिशा निर्देश, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।  देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको विस्तार से बताया कि बाईपास सर्जरी कैसे की जाती है, ऑपरेशन के बाद की स्थिति क्या होती है और घर पर देखभाल कैसे की जाये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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बाईपास सर्जरी क्या होती है? पूरी जानकारी
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बाईपास सर्जरी क्या होती है? पूरी जानकारी
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बाईपास सर्जरी क्या होती है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हृदय क्या है, हृदय गति रुक जाना क्या होता है, नसें क्या होती हैं, धमनियां क्या होती हैं, बाईपास सर्जरी किसे कहते हैं, एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) क्या होती है, हृदय की धमनियों में रुकावट के क्या कारण होते हैं, बाईपास सर्जरी क्यों की जाती है।
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2 Comments

Shiv Kumar Kardam · July 29, 2021 at 3:01 am

It’s outstanding Article

  • Rakesh · July 29, 2021 at 5:04 am

    very informative post thanks for your writing skill…

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