दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं एक ऐसा व्यंजन जो तरल पेय पदार्थ है। देखने में यह दूध के समान सफेद है परन्तु दूध नहीं। स्वाद में खट्टा है और पाचन के लिये सर्वोत्तम। जिसका जिक्र आयुर्वेद में भी किया गया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं छाछ की। यही है हमारा आज का टॉपिक “छाछ”। देसी हैल्थ क्ल्ब इस लेख के माध्यम से आपको छाछ के फायदे के विषय में विस्तृत जानकारी देगा। आयुर्वेद में छाछ को सात्विक और सम्पूर्ण आहार कहा गया है और इसकी उपयोगिता के विषय में कहा गया है कि –

भोजनान्ते पिबेत्‌ तक्रं, दिनांते च पिबेत्‌ पय:।

निशांते पिबेत्‌ वारि: दोषो जायते कदाचन:।

अर्थात् भोजन के बाद छाछ, दिनान्त यानि सांयकाल में  दूध, निशांत यानि सुबह पानी पीने वाले के शरीर में कभी किसी तरह का दोष या रोग नहीं होता। 

छाछ क्या है? – What is the Buttermilk

दूध के परिवार से जन्मा एक तरल पदार्थ, जो देखने में दूध के समान परन्तु स्वाद में खट्टा; को छाछ कहा जाता है। 

छाछ के फायदे

छाछ कैसे बनती है? – How Buttermilk is Made

दही में पानी मिलाकर, रई की सहायता से अच्छी तरह काफी समय तक बिलोया जाता है अर्थात् मथा जाता है तो दही से मक्खन अलग हो जाता है और जो तरल पदार्थ बचता है वह छाछ कहलाती है। 

छाछ के गुण – Properties of Buttermilk 

1. छाछ की तासीर ठंडी होती है और स्वाद खट्टा होता है  गर्मियों में इसका सेवन स्वास्थ के लिये अत्यंत लाभदायक है।  

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2. छाछ में 90% से अधिक पानी होता है जो शरीर में जल संतुलन को बनाये रखता है।

3. छाछ स्वयं एक संपूर्ण भोजन है जो पोषण से समृद्ध है। उत्तम संतुलित आहार के सभी आवश्यक तत्व इसमें मौजूद होते हैं जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, न्यूनतम लिपिड (फैट), विटामिन और आवश्यक एंजाइम।

4. छाछ में बहुत कम होती है। एक गिलास में लगभग 26-30 कैलोरी। 

5. छाछ के पोषक तत्व (मात्रा प्रति 100 ग्रा।)

कैलोरी (kcal) 40

टोटल फैट 0.9 g

सैचुरेटिड फैट  0.5 g

पोलीसैचुरेटिड फैट  0 g

मोनोसैचुरेटिड फैट 0.3 g

सोडियम 105 mg

पोटैशियम 151 mg

कुल कार्बोहायड्रेट 4.8 g

कोलेस्टेरॉल 4 mg

डाइट् फाइबर  0 g

चीनी 4.8 g

प्रोटीन 3.3 g

विटामिन-ए   47.U

विटामिन-सी  1 mg

विटामिन-डी  1.U

विटामिन-बी6   0 mg

विटामिन-बी12  0.2 µg

मैग्नेशियम   11 mg

कैल्सियम 116 mg

आयरन   0.1 mg

छाछ के प्रकार – Type of Buttermilk

दोस्तो, यहां देसी हैल्थ क्लब स्पष्ट करता है कि छाछ के कोई “विशेष” प्रकार नहीं होते। छाछ तो केवल छाछ होती है। इसको बनाने की विधि या स्वाद में बदलाव लाकर भिन्नता लाई जा सकती है जैसे कि –

1. फुल क्रीम दही से बनी गई छाछ के गुण प्राकृतिक दही की भांति ही होंगे। यह पाचन-तंत्र के लिये उत्तम होती है। 

2. बिना क्रीम वाली दही से बनाई गयी छाछ की अपनी विशेषता है। वजन कम करने वालों या डायबिटीज रोगियों के लिये उत्तम है। यह थकावट दूर करती है।

3. छाछ के प्राकृतिक स्वाद में परिवर्तन करके इसे मसाले वाली या तड़के वाली छाछ कह सकते हैं। आप अपनी इच्छानुसार चाहे, सफेद नमक मिलाइये चाहे काला या सेंदा। अदरक, भुना हुआ जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च, करी पत्ता और धनिया पत्ता जो भी मिला दोगे उसी रूप की छाछ बन जायेगी।

4. छाछ को मीठा रूप देने के लिये इसमें चीनी मिलाइये या गुड़, दोनों का स्वाद एकदम अलग होगा।

गर्मियों में छाछ के फायदे – Benefits of Buttermilk

1. लू से बचाव (Sunstroke)- छाछ की तासीर ठंडी होती है जो गर्मियों  में शरीर को शीतलता देती ही है साथ ही लू से रक्षा भी करती है। यह गर्मियों में छाछ पीने का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण फायदा है। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती। प्यास भी जल्दी-जल्दी नहीं लगती।

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2. कब्ज (Constipation)- असमय और असंतुलित भोजन के कारण कब्ज, डायरिया जैसी समस्या हो जाती है। ऐसी समस्या में एक गिलास अमृत समान है। छाछ में थोड़ी सी अजवायन मिलाकर नियमित तौर पर पीने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा। मल त्याग में भी आसानी रहेगी।

3. एसिडिटी दूर करे (Acidity)- तीखे तेज मसालेदार भोजन से पेट में एसिडिटी और जलन की समस्या हो जाती है।  छाछ में अदरक, भुना हुआ जीरा काली मिर्च पाउडर और सेंधा नमक मिलाकर पी सकते हैं। गैस, जलन में आराम आ जायेगा। 

4. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करे (Cholesterol)- छाछ में पाये जाने वाले तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोक कर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखते हैं। जिससे आपका हृदय सुरक्षित रहता है। 

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5. विटामिन्स (Vitamins)- छाछ में लगभग सभी विटामिन होते हैं जो शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। और हमें अनीमिया और कमजोरी जैसी समस्या से बचाते हैं। छाछ के सेवन से हमें अन्य विटामिन स्रोत से 21% से अधिक विटामिन मिलते हैं। 

6. वजन कम करे (Weightloss)- जो वजन कम करना चाहते हैं उनके लिये छाछ अच्छा विकल्प है। इसके पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती हैं और फैट नहीं के बराबर होता है। यह कम कैलोरी और बिना फैट के शरीर को आवश्यक पोषण और एंजाइम प्रदान करती है। छाछ भूख को नियन्त्रित करती है। इसके पीने से आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती। आप एक गिलास छाछ के साथ एक चम्मच त्रिफला पाउडर ले सकते हैं। इससे मोटापा कम होता है। 

7. आंतों की सूजन दूर करे (Inflammation of the Intestines)- यदि आंतों में सूजन आई हुई है तो इसे खत्म करने के लिये छाछ उत्तम विकल्प है। एक गिलास छाछ में सेंधा नामक, भुना हुआ जीरा पाउडर, काली मिर्च पाउडर और पोदीना मिक्स करके पीयें। सूजन में आराम आ जायेगा।  

8. हड्डियों को मजबूती दे (Strengthen Bones)- छाछ कैल्शियम का भरपूर स्रोत है। कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिये बहुत आवश्यक है। एक गिलास छाछ से दिनभर की जरूरत का 28% कैल्शियम मिल जाता है। यह हड्डियों की डेंसिटी बनाये रखता है, ऑस्टियोसोरायसिस जैसे अस्थि रोग से बचाव करता है और दांतों को भी मजबूत बनाये रखता है।

9. डिहाइड्रेशन से बचाव (Dehydration)- छाछ में भरपूर मात्रा में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी को पूरा करते हैं और गर्मी के विरुद्ध लड़ते हैं। छाछ डिहाइड्रेशन की समस्या से छुटकारा पाने के लिये बेहद प्रभावी उपाय है। छाछ गर्मी के कारण शरीर में होने वाली बेचैनी और थकावट से राहत दिलाती है। डिहाइड्रेशन से राहत पाने के लिये छाछ में भुने जीरे का पाउडर, बहुत हल्की सी काली मिर्च और स्वादानुसार काला/सेंधा नमक मिलाकर पीयें। 

10. पाचन-तंत्र में सुधार (Digestive System)- छाछ ज्वलनशील तत्वों को खत्म कर पेट की जलन को कम करती है। भोजन के पश्चात छाछ का सेवन भोजन को पचाने में मदद करता है। इसमें, अदरक, काली मिर्च पाउडर, पुदीना, भुना जीरा, काला नमक मिलाकर पीने से चिकित्सीय गुण बढ़ जाते हैं, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल पाचन-तंत्र में सुधार करते हैं।

11. आंखों के लिये (Eyes)- गर्मियों में अक्सर आंखें दुखने लगती हैं। छाछ का सेवन प्रतिदिन करें और आंखों पर दही की मलाई लगायें। आराम लग जायेगा।

12. शरीर को डिटॉक्स करे (Body Detox)- छाछ में पाये जाने वाला  राइबोफ्लेविन नामक तत्व अनेक कार्य करता है जैसे  भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके, हार्मोन के स्राव और पाचन में मदद करना। कोशिकाओं में एंजाइम को सक्रिय करने के लिये राइबोफ्लेविन की आवश्यकता पड़ती है। यह लिवर के कार्य को प्रभावित कर शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।

13. त्वचा के लिये (Skin)- छाछ त्वचा के स्वास्थ के लिये भी बहुत लाभकारी है। यह प्रोबायोटिक लैक्टिक एसिड से भरपूर होती है, इसका उपयोग फेशियल मास्क के रूप में किया जा सकता है। यह त्वचा को प्राकृतिक चमक दमक देता है। छाछ के ब्लीचिंग इंग्रेडिएंट्स दाग-धब्बे और झाईयों को हटाते हैं। छाछ में आटा मिलाकर लेप बना सकते हैं। मुंहासे खत्म करने के लिये गुलाब की जड़ को छाछ में पीसकर चेहरे पर लगाइये। 

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17. धूप से झुलसी त्वचा को ठीक करे (Sunburned Skin)- छाछ सूरज की तेज धूप से झुलसी हुई त्वचा में भी आराम दिलाती है।  आधा कप छाछ में आधा कप टमाटर का जूस मिक्स करके त्वचा पर लगाने से आराम आ जायेगा। इसे लगभग एक घंटा लगाकर रखें। यह त्वचा को शीतलता प्रदान करेगी और दर्द व त्वचा की लालिमा भी दूर हो जायेगी। 

सही समय और मात्रा

1. सही समय – सुबह से लेकर दोपहर 2 बजे के बीच। संध्याकाल और रात्री काल में छाछ व दही का सेवन हानिकारक है। 

2. मात्रा – एक गिलास अर्थात् 300 मि.ली। उचित मात्रा है।

छाछ के नुकसान – Side Effects of Buttermilk

दोस्तो, यदि आप बहुत अधिक मात्रा में छाछ पीते हैं या सर्दी के मौसम में छाछ पीते हैं तो हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान

1. पेट फूल सकता है, गैस बन सकती है या पेट में दर्द हो सकता है। 

2. डायरिया या उल्टी, मितली आदि की समस्या हो सकती है।

3. नसों में, मांसपेशियों में, रक्त संचार में बाधा आ सकती है। 

4. जोड़ों में दर्द और अकड़न हो सकती है।

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5. बुखार होने पर छाछ के सेवन से बुखार बिगड़ सकता है व कमजोरी और बढ़ जायेगी। 

6. गुर्दे की समस्या में छाछ के सेवन से बचें यह हानिकारक हो सकता है।

7. सर्दी के मौसम में छाछ के सेवन से सर्दी, जुकाम, खांसी में हो सकती है बढ़ोत्तरी।  

8. सर्दी के मौसम में छाछ के सेवन से हो सकती है श्वसन प्रणाली में समस्या।

किन व्यक्तियों को छाछ पीने से बचना चाहिये

1. सांस की समस्या वाले व्यक्तियों को।

2. जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द की समस्या वाले व्यक्तियों को। 

3. हृदय से जुड़ी समस्या वाले व्यक्तियों को। 

4. गुर्दे की तकलीफ वालों को।

5. त्वचा रोग विशेषकर एक्जिमा वाले मरीजों को।

कुछ सावधानियां

1. छाछ और दही को कभी भी तांबे, पीतल व कांसे के बर्तन में नहीं रखना चाहिये। इनमें रखने से छाछ और दही विष के समान हो जाती हैं।

2. छाछ और दही के लिये मिट्टी के बर्तन उत्तम होते हैं। मिट्टी के बर्तन में रखने से छाछ और दही के गुणों में बढ़ोत्तरी हो जाती है।  बढ़ जाते है l

3. संध्याकाल और रात्रीकाल में तथा सर्दी और बरसात के मौसम में छाछ और दही का सेवन ना करें। ऐसा करना स्वास्थ के लिये हानिकारक है। 

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको छाछ पीने के फायदे के विषय में विस्तार से जानकारी दी। छाछ क्या होती है, कैसे बनती है, छाछ के प्रकार, गुण, इसके पोषक तत्व के बारे में भी बताया। यह भी बताया कि किन व्यक्तियों को छाछ का सेवन नहीं करना चाहिये।  इस लेख के माध्यम से गर्मियों में छाछ पीने के फायदे और नुकसान भी बताएं और साथ ही कुछ सावधानियां भी बतायीं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

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