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सी.पी.आर क्या होता है? – What is C.P.R in Hindi

सी.पी.आर क्या होता है?

दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉक पर। दोस्तो, प्रशिक्षण ज़िन्दगी में हमेशा काम आता है, किसी की ज़िन्दगी बचाने के लिये। प्रशिक्षण चाहे सैनिकों का हो या सिविलियन्स के लिये, सबका उद्देश्य एक होता है आपातकाल में मानवता की सेवा करना। इतिहास गवाह है जब भी कोई आपदा आई है जैसे, बाढ़, सूखा, भूकम्प, महामारी आदि, हमारे सैनिक और आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग देवदूत बनकर आते रहे हैं और मानव जीवन के साथ-साथ पशु-पक्षियों के जीवन को बचाते रहे हैं। ये तो रही समूहों द्वारा सामूहिक रूप से सेवा करने की बात। लेकिन जब केवल एक व्यक्ति अचानक आपात् स्थिति से प्रभावित होता है तो उसके अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी जान कैसे बचाई जाये?। उदाहरण के तौर पर अचानक किसी को कार्डियक अरेस्ट हुआ, उसकी सांस थमने लगी, या चलते-चलते बेहोश हो गया या कोई और इमरजेंसी उसके साथ हो गई तो उसकी जान कौन बचायेगा। 

तभी कोई व्यक्ति भीड़ से निकलकर उसके पास आता है, उसे देखता है और उसे लिटाकर उसकी छाती को दबाने लगता है, बीच-बीच में उसे अपने मुंह से सांस भी दे रहा है। थोड़ी देर में एंबुलेंस आ जाती है और अस्पताल ले जाती है। समय रहते उसकी जान बच जाती है। दोस्तो, एंबुलेंस आने से पहले उस व्यक्ति ने जो किया वह हर कोई नहीं कर सकता क्योंकि उसने ऐसा करने का प्रशिक्षण लिया है जिसे सीपीआर कहा जाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “सी.पी.आर क्या होता है?”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको सीपीआर के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि सी.पी.आर क्या है और क्यों इसकी जरूरत पड़ती है। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से यह भी बतायेगा कि सीपीआर कैसे दिया जाता है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि सीपीआर क्या है और इसका उद्देश्य क्या है। इसके बाद फिर बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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सी.पी.आर क्या होता है?
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सी.पी.आर क्या होता है? – What is C.P.R 

दोस्तो, सबसे पहले तो हम आपको बतायें कि सीपीआर संक्षेपाक्षर यानी (Abbreviation) है जिससे पूरे शब्द बनते हैं “कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन”(Cardiopulmonary resuscitation)। यह कोई दवाई, गोली, कैप्सूल या इंजेक्शन नहीं है बल्कि यह एक विशेष प्रशिक्षण है जिसमें एक चिकित्सकीय प्रक्रिया शामिल हो जाती है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें  कार्डियक अरेस्ट और सांस न ले पाने की आपातकालीन स्थिति में किसी व्यक्ति का जीवन बचाई जा सकती है। इस प्रक्रिया द्वारा पीड़ित व्यक्ति के हृदय और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह (Blood circulation) में मदद मिलती है। उसे सांस आने लगता है। जब किसी को कार्डियक अरेस्ट होता है तो उसके दिल की धड़कन बंद हो जाती है, वह बेहोश हो जाता है। उसकी नब्ज नहीं चल रही होती है और ना ही उसकी सांस, ऐसी गंभीर और आपात् स्थिति में पीड़ित व्यक्ति की छाती को बार-बार दबाया जाता है और मुंह से सांस दी जाती है। घटना स्थल से अस्पताल जाने तक का समय यह प्रक्रिया उसे जीवन प्रदान करने में मदद करती है। इसी प्रक्रिया को “सीपीआर” कहा जाता है। और घटना स्थल से अस्पताल जाने तक का जो समय होता है उसे “गोल्डन ऑवर” (Golden hour) कहा जाता है जिसमें मरीज की जान बचाये जाने का आपको सुनहरी अवसर मिलता है। इस गोल्डन ऑवर का पल-पल मरीज के लिये बेहद कीमती होता है।

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सी.पी.आर की ताजा घटना – CPR Latest Incident

दोस्तो, इस संदर्भ में देसी हैल्थ क्लब अभी हाल ही की एक घटना का उल्लेख करना चाहेगा जिसमें सीपीआर की ताजा घटना का सुखद परिणाम देखने को मिला, जहां एक बच्चे की जान भारतीय रेल के एक टिकट कलेक्टर ने बचाई। घटना 09 अगस्त 2021 की है। महाराष्ट्र एक्सप्रेस ट्रेन पुणे से कोल्हापुर जा रही थी। इस ट्रेन में सफर कर रहे एक दम्पति के दो वर्ष के बच्चे की धड़कन रुक गई। यह देख माता-पिता की हालत खराब हो गई, बोगी में हड़कम्प मच गया, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये। तभी यह बात एक टिकट कलेक्टर को पता चली। वहां पहुंचकर टिकट कलेक्टर ने बच्चे को अपने मुंह से सांस देनी शुरु की मगर कोई नतीजा नहीं निकला। लेकिन टिकट कलेक्टर ने हार नहीं मानी और मुंह से सांस देनी जारी रखा। लगभग 15 मिनट तक लगातार सांस देते रहने पर बच्चा अचानक रोने लगा उसकी सांस वापस आ चुकी थी। इस प्रकार देवदूत बनकर आये टिकट कलेक्टर के सीपीआर देने की प्रक्रिया ने अपना सुखद उद्देश्य पूरा किया।

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सी.पी.आर का उद्देश्य – Purpose of CPR

जब किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होता है तो उसके दिल की धड़कन, सांस और नब्ज बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में यदि उसे तुरंत चिकित्सकीय सहायता ना मिले तो रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन प्रवाह, मस्तिष्क सहित शरीर के अन्य भागों में रुक जाते हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा के बगैर, शरीर की कोशिकाएं बहुत जल्दी नष्ट होने लगती हैं और इसका असर मस्तिष्क पर भी पड़ता है, जिसके कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है। अतः मरीज की जान बचाने के लिये मस्तिष्क और ह्वदय के ऊतकों को बचाने के लिये रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह निरन्तर बनाए रखना सीपीआर का उद्देश्य होता है। सीपीआर प्रक्रिया “जीवन रक्षक” के रूप में काम करती है।

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सी.पी.आर कौन दे सकता है? – Who Can Provide CPR?

जो सीपीआर दे सकते हैं उनका विवरण निम्न प्रकार है –

1. कोई भी व्यक्ति जिसने सीपीआर का प्रशिक्षण ले रखा है।

2. प्रशिक्षण नहीं मगर सीपीआर के बारे में अच्छी तरह जानकारी है।

3. अस्पताल, किसी समुदाय से जुड़े प्रशिक्षित लोग।

4. इमरजेंसी में प्रोफेशनल चिकित्सा सहायक।

5. एंबुलेंस के कर्मचारी (इनको सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाता है)।

बी.एल.एस और सी.पी.आर में क्या अंतर है? – What is the Difference Between BLS and CPR?

इन दोनों के बीच अंतर निम्नलिखित हैं –

बुनियादी जीवन समर्थन (Basic Life Support – BLS)

1. यह एक ऐसा पाठ्यक्रम है जिसकी अवधि एक महीने की होती है।

2. इसके पाठ्यक्रम में सीपीआर भी शामिल होता है।

3. सीपीआर के अतिरिक्त इसके पाठ्यक्रम में ये भी शामिल होते हैं –

(i) वेंटिलेशन की सहायता के लिये बैग-मास्क तंत्र का उपयोग कैसे करें।

(ii) श्वास तकनीक पूरा बचाव कैसे करें।

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(iii) एईडी (Automated External Defibrillator)  डिवाइस का उपयोग।

(iv) बाल चिकित्सा बीएलएस

(v) चोकिंग

(vi) ओपिओइड प्रेरित कार्डियक अरेस्ट (opioid induced cardiac arrest)।

(vii) एक व्यापक टीम के रूप में कार्य करना।

सी.पी.आर -C.P.R

(i)  सीपीआर और एईडी  पाठ्यक्रम 3-6 घंटे का होता है जबकि सीपीआर एचसीपी कोर्स की 6-8 घंटे का।

(ii) सीपीआर पाठ्यक्रम में ऐसे विषय होते हैं जो बीएलएस में नहीं होते।

(iii) शिशुओं/बच्चों से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटना।

(iv) व्यस्कों के लिये – छाती पर दबाव, माउथ-टू-माउथ रिससिटेशन।

(v) स्वचालित बाहरी डीफिब्रिलेटर (Automatic External Defibrillator AED) का उपयोग।

(vi) बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा।

(vii) रक्त रोगजनकों की जानकारी

(viii) सीपीआर अधिकतर केवल एक व्यक्ति द्वारा किया जाता है।

सी.पी.आर देने की जरूरत कब पड़ती है? – When is CPR Required?

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सीपीआर देने की आवश्यकता निम्नलिखित परिस्थितियों  में होती है –

1. किसी व्यक्ति की हृदय गति रुक जाने पर, घटना स्थल और अस्पताल पहुंचने के दरमियान।

2. किसी व्यक्ति के बेहोश होने पर सांस के रुक जाने और नब्ज के ना मिलने पर।

3. बिजली का करंट लगने पर बेहोश होते हुऐ व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत होती है।

4. पानी में डूबते हुऐ बाहर निकाल कर मुंह से ऑक्सिजन देने की जरूरत होती है।

5. ड्रग्स/धुंए के संपर्क में आने से बेहोश हुऐ व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत होती है।

6. कई बार सड़क दुर्घटना में घायल होने पर बेहोश व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत पड़ जाती है।

सी.पी.आर के प्रकार – Types of C.P.R

सीपीआर निम्नलिखित दो प्रकार से दी जाती है –

1. मेन्युअल अर्थात् एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति (मरीज) को सीपीआर दिया जाना।

2. उपकरणों/चिकित्सा सामग्री की मदद से सीपीआर देना जैसे ए ई डी का उपयोग करना।

सी.पी.आर देने की विधि – Method of Giving CPR

दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करना चाहता है कि बच्चों और बड़ों को सीपीआर देने की विधि अलग होती है जिसका विवरण हम नीचे दे रहे हैं। बच्चों का मामला बहुत नाजुक होता है इसलिये यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे के शरीर पर कितना दबाव डालना है और कितनी गहराई तक डालना है। एक बात और कि सीपीआर केवल प्रशिक्षित व्यक्ति को देना चाहिये हर कोई कोशिश ना करे।

बच्चों को सी.पी.आर देना – Giving Children CPR

1. पहले बच्चे को सीधा लिटा कर स्वयं उसके पास घुटनों के बल बैठ जायें।

2. शिशु/छोटे बच्चे की छाती दबाने की जरूरत हो तो अपनी हथेलियों की अपेक्षा उंगलियों का उपयोग करें।

3. बच्चे की छाती पर 1/2 से 2 इंच तक का ही दबाव पड़ना चाहिये।

4. सांस ना आने की स्थिति में बच्चे को मुंह से सांस दें।

5. यथाशीघ्र बच्चे को लेकर अस्पताल जायें ताकि उसे समुचित चिकित्सा मिल सके।

6. अस्पताल में डॉक्टर को जो आपने सीपीआर दी है उसके बारे में बतायें।

बड़ों को सी.पी.आर देना – Giving CPR to Elders

1. मरीज को सीपीआर देने से पहले उसकी कैरॉटिड पल्स (गले की नब्ज कंठ के दोनों तरफ होती है) की जांच करें, तीन अंगुलियों की मदद से धड़कन टटोलें। इससे मरीज की सांस के बारे में पता चल जाएगा कि सांस कैसे चल रही है।

2. मरीज को फ्लोर पर पीठ के बल एकदम सीधा लिटा दें। ध्यान रखें कि मरीज के हाथ पैर मुड़ें नहीं।

3. अपने दोनों हाथों की उंगलियों को एक दूसरे के ऊपर रखकर छाती के बीच की हड्डी (स्टर्नम) जहां खत्म होती है वहां पर दबाव डालते रहें। यह दबाव दो से ढ़ाई इंच तक होना चाहिये, इससे ज्यादा नहीं अर्थात् हर बार छाती लगभग दो से ढ़ाई इंच नीचे जाये।

4. दिल की धड़कन सामान्य रूप से  60-100 होती है। इसलिये 1 मिनट में 60 बार या ज्यादा से ज्यादा 100 बार छाती पर दबाव डालें। 

5. बीच-बीच में मरीज की नाक को बंद करके तेजी से उसके मुंह में सांस फूंकें।

6. मरीज को मुंह से सांस देने के लिये मरीज की नाक को अपनी दो उंगलियों से बंद करके मरीज़ के मुंह से चिपका कर उसके मुंह में धीरे-धीरे सांस फूंके, इससे सांस सीधा फेफड़ों तक जाती है। यह प्रक्रिया तब तक करते रहें जब तक मरीज की सांस वापस ना आ जाये या ऐंबुलेंस/अस्पताल से उचित चिकित्सा ना मिल जाये।

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कुछ सावधानियां – Some Precautions

सीपीआर देते समय सीपीआर देने वाला निम्नलिखित कुछ सावधानियां बरते और इन बातों का ध्यान रखे :-

1. यह बहुत जरूरी है कि सीपीआर देने वाला व्यक्ति मरीज की हालत देखते हुऐ अपने दिमाग का संतुलन ना खोये, उसे देखकर घबराये ना।

2. सीपीआर देने से पहले एंबुलेंस को फोन करना ना भूले या किसी और को फोन करने को कहे।

3. सीपीआर देने से पहले मरीज की कैरॉटिड पल्स जांच ले ताकि यह पता चल जाये कि उसकी सांस कैसे चल रही है। 

4. यदि मरीज होश को कुछ होश है तो मरीज से बात करके उसकी समस्या को समझने की कोशिश करे।

5. यदि मरीज बेहोश है तो सीपीआर देने के लिये मरीज (बच्चा या बड़ा जो भी है) को फ्लोर पर पीठ के बल लिटा दें।

6. ध्यान रहे कि मरीज के हाथ और पैर मुड़ें नहीं। 

7. सीपीआर देने वाला ध्यान रखे कि वह अपनी कोहनियों और हाथों को सीधा रखे। ये मुड़ने नहीं चाहियें अन्यथा छाती पर दबाव ठीक से नहीं पड़ेगा।

8. मुंह से सांस (Mouth to mouth oxygen supply) ठीक से दे।

9. एंबुलेंस आने पर चिकित्सक को मरीज की सही पोजीशन समझाये और यह भी बताये की उसने सीपीआर किस तरह दी है।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में ने आपको सी.पी.आर क्या होता है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सीपीआर क्या है, सीपीआर की ताजा घटना, सीपीआर का उद्देश्य, सीपीआर कौन दे सकता है, बीएलएस और सीपीआर में क्या अंतर है, सीपीआर देने की जरूरत कब पड़ती है, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से सीपीआर के प्रकार बताये, सीपीआर करने की विधि बताई और सीपीआर देने वाले के लिये कुछ सावधानियां और ध्यान रखने वाली बातें भी विस्तार पूर्वक बताईं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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