दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। भोजन में स्वाद मसालों और खुशबू से आता है। हर मसाले की अपनी पहचान उसके गुणों और खुशबू से होती है जो उसे सबसे अलग करते हैं। इन मसालों में कुछ विशेष प्रकार के मसाले होते हैं जिनमें औषधीय गुण भी होते हैं, जिनसे दवाइयां भी बनती है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं एक इसी प्रकार का मसाला जो अपने औषधीय गुण लिये हुये है, जिसकी खुशबू भी अद्भुत है और नाम मिठास लिये हुऐ है परन्तु इसे खाने में मिठास कहीं भी नहीं है। हम बात कर रहे हैं दालचीनी की। इसके नाम में चीनी है पर स्वाद में मिठास नहीं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “दालचीनी के फायदे और नुकसान”। देसी हेल्थ क्लब आज आपको दालचीनी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि दालचीनी खाने के क्या फायदे हैं और इसे ज्यादा खाने के क्या नुकसान। तो, सबसे पहले जानते हैं दालचीनी के बारे में कि यह क्या होती है।

दालचीनी के फायदे

दालचीनी क्या है? – What is Cinnamon?

दोस्तो, दालचीनी मूलरूप से “मसाले” की श्रेणी में आने वाला खाद्य पदार्थ है। इसका उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है। दालचीनी “सिन्नामोमम ज़ाइलैनिकम ब्राइन” (Cinnamomum zeylanicum Breyn) नामक पेड़ की छाल होती है। इस पेड़ की छाल को 24 घंटों तक सुखाया जाता है, फिर इसे साफ करके हाथों से लपेटकर, उनको एक मीटर लंबी, पतली नलियों के आकार में बांधा जाता है। फिर इसे बाजार में बेचा जाता है। पेड़ से पहली बार,  दूसरे वर्ष के अंत में, बरसात के मौसम में छाल उतारी जाती है।  छाल उतर जाने पर पेड़ लगभग मर जाता है, लेकिन उसके मुख्य तने में चार, छः नई शाखाएं निकल आती हैं, जिन से फिर दो साल बाद छाल उतारी जाती है। इस प्रकार यह सिलसिला चलता रहता है।  दालचीनी का आकार गोल और रंग लाल या भूरा होता है। इसकी सुगंध अद्भुत और मनमोहक होती है। दालचीनी की पत्तियों के से तेल बनाया जाता है जो मच्छर भगाने के काम आता है। दालचीनी में,लौंग के बाद सबसे बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। 

दालचीनी की खेती – Cinnamon Cultivation

दोस्तो, सिन्नामोमम ज़ाइलैनिकम यानी दालचीनी का पेड़, छोटा और सदाबहार पेड़ है जो लगभग 10 से 15 मीटर होता है। यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुत होता है। इसकी खेती, श्रीलंका द्वीप के दक्षिण-पश्चिम भाग में  लगभग बीस किलोमीटर तक नेगुंडो, कोलंबो और मातुरा के बीच की जाती है। श्रीलंका, विश्व में दालचीनी का 90% उत्पादन कर पहले स्थान पर है। श्रीलंका के अतिरिक्त दालचीनी की खेती चीन, बांग्लादेश, जावा, सुमात्रा, इंडोनेशिया, मेक्सिको, वेस्ट इंडीज, ब्राजील, वियतनाम, मेडागास्कर, जंजीबार, मिस्र आदि देशों में की जाती है। हमारे देश भारत के दक्षिणी राज्यों में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु और पूर्वी भारत के राज्यों,  हिमालय क्षेत्र असम और सिक्किम में इसकी खेती होती है।

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दालचीनी के प्रकार – Type of Cinnamon

दालचीनी चार प्रकार की होती है। विवरण निम्नप्रकार है –

1. सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon) – इसे ट्रू दालचीनी या मैक्सिकन दालचीनी भी कहा जाता है। इसका पेड़ रेतीली मिट्टी में होता है। इस पेड़ की टहनियां अन्य दालचीनी के पेड़ों की अपेक्षा पतली होती हैं। सीलोन दालचीनी, स्वाद और गुणों के कारण सबसे अच्छी मानी जाती है परन्तु महंगी भी बहुत होती है। फिर भी लोग इसे खरीदना पसंद करते हैं।

2. इंडोनेशियन दालचीनी (Indonesian Cinnamon) – इसे कोरंटजी दालचीनी या पैडंग कैसिया भी कहा जाता है। इसके पेड़ टहनी मोटी और तेज सुगंध वाली होती है। यह सीलोन दालचीनी से सस्ती होती है।

3. साइगॉन दालचीनी (Saigon Cinnamon) – इसको वियतनामी कैसिया या वियतनामी दालचीनी भी कहा जाता है। इसकी प्रसिद्धि इसके तेज स्वाद और सुगंध की वजह से है। यह स्पाइसी और स्वीट होती है। 

4. कैसिया दालचीनी (Cassia Cinnamon) – इसको चाइनीज दालचीनी भी कहा जाता है। यह स्वाद में हल्की कड़वी, तीखी और कम मीठी होती है। इसका उपयोग  चाइनीज दवाइयों में किया जाता है। 

दालचीनी का उपयोग – Use of Cinnamon

दोस्तो, दालचीनी का उपयोग निम्नलिखित रूप में कर सकते हैं :-

1. दालचीनी का उपयोग सब्जी बनाने में मसाले के रूप में होता है

2. दालचीनी पाउडर को दूध में मिलाकर पी सकते हैं।

3. दालचीनी को स्मूदी जूस में डाल सकते हैं।

4. योगर्ट और दही में भी डाल सकते हैं।

5. सूप में डाला जा सकता है।

6. दलिया में भी दालचीनी डाल सकते हैं।

7. दालचीनी पाउडर को गुनगुने पानी में भी मिलाकर पीया जा सकता है।

8. सामान्य चाय बनाते समय साबुत दालचीनी या इसका पाउडर डाल सकते हैं।

9. हर्बल टी या काढ़ा बनाते समय दालचीनी भी डाल सकते हैं।

10. दालचीनी का इस्तेमाल च्यवनप्राश बनाने के लिए भी  किया जाता है।

11. सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है जैसे दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं और दालचीनी मिले गर्म पानी से बाल धो सकते हैं।

12. दालचीनी का तेल भी बनाया जाता है। 

दालचीनी के गुण – Properties of Cinnamon

1. दालचीनी की तासीर गर्म होती है।

2. दालचीनी एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होती है। इसके अतिरिक्त इसमें एंटीडायबिटिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटी माइक्रोबियल, एंटी इंफ्लामेटरी आदि गुण होते हैं।

3. दालचीनी के पोषक तत्व (मात्रा प्रति 100 ग्रा।)

कैलोरी (kcal) 247

कुल वसा  1.2 ग्रा.

संतृप्त वसा  0.3 ग्रा.

बहुअसंतृप्त वसा  0.1 ग्रा.

मोनो असंतृप्त वसा  0.2 ग्रा.

ट्रांस वसा   0 ग्रा.

कोलेस्टेरॉल  0 मि.ग्रा.

सोडियम 10 मि.ग्रा.

पोटैशियम 431 मि.ग्रा.

मैग्नीशियम 60 मि.ग्रा.

कैल्शियम 1,002 मि.ग्रा.

आयरन 8.3 मि.ग्रा.

कुल कार्बोहायड्रेट 81 ग्रा.

डाइट्री फाइबर 53 ग्रा.

शुगर  2.2 ग्रा.

प्रोटीन 4 ग्रा.

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विटामिन-ए   295.U

विटामिन-सी   3.8 मि.ग्रा.

विटामिन-डी    0.U

विटामिन-बी6  0.2 मि.ग्रा.

विटामिन-बी12  0 µg

दालचीनी के फायदे – Benefits of Cinnamon

1. पेट और पाचन के लिये (Stomach and Digestion)- पेट और पाचन-तंत्र के स्वास्थ्य के लिये दालचीनी बहुत फायदेमंद है। इसमें पाये जाने वाले एंटीमाइक्रोबियल गुण उन बैक्टीरिया से लड़ते हैं जो व पेट में संक्रमण का कारण बनते हैं और जिसकी वजह से पेट की बीमारियां बनती हैं। एंटीमाइक्रोबियल गुण लिस्टेरिया और एस्चेरिचिया कोली (Escherichia Coli) जैसे बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। शहद में दालचीनी का पाउडर मिलाकर सेवन करने से पेट की समस्या जैसे पेट दर्द, गैस, कब्ज आदि दूर हो जाती हैं, यहां तक कि पेट का अल्सर भी खत्म हो जाता है। दालचीनी का सेवन पाचन प्रक्रिया में सुधार कर इसको स्वस्थ बनाए रखता है।

2. वजन कम करें (Lose Weight)- दालचीनी वजन कम करने के लिये रामबाण उपाय माना जाता है। दालचीनी का एंटी-ओबेसिटी प्रभाव और इसमें मौजूद कई अन्य तत्व मोटापे को कम करने में मदद करते हैं। एक गिलास पानी  में एक चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर उबाल लें, फिर  इसमें दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह का भोजन करने से आधा घंटा पहले पियें। इसी प्रकार रात को सोने से पहले भी इसका सेवन करें। इससे आपकी फालतू की चर्बी धीरे-धीरे खत्म हो जायेगी। 

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3. ब्लड शुगर में फायदेमंद (Beneficial in Blood Sugar)- दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करने से में फायदा होता है। यह काफी हद तक डायबिटीज को नियंत्रित करने में सक्षम है।  दालचीनी के एंटीडायबिटिक गुण और पॉलीफेनॉल्स एंटीऑक्सीडेंट, इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को बेहतर कर ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करते हैं और डायबिटीज के खतरे की संभावना को खत्म करते हैं। दालचीनी में पाए जाने वाले सक्रिय संघटक (Active ingredients) रक्त कोशिकाओं की शुगर को चयापचय (Metabolism) करने की क्षमता को 20 गुना तक बढ़ा देते हैं। अतः दालचीनी को अपने भोजन में शामिल करें। 

4. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करे (Control Cholesterol)- दालचीनी के विशेष तत्व रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) और खराब वाले कोलेस्ट्रॉल एल।डी।एल।(LDL) के स्तर को कम करते हैं और अच्छे वाले कोलेस्ट्रॉल एच।डी।एल।(HDL) बढ़ाते हैं। इस प्रकार दालचीनी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को हृदय रोग की संभावना को खत्म करती है।  कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सही रखने के लिये दिन में एक बार दालचीनी पाउडर को कॉफी, चाय या अपने किसी खाद्य पदार्थ पर छिड़क कर सेवन कर सकते हैं।

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5. हृदय को स्वस्थ रखें (Keep Heart Healthy)- दालचीनी से आपका वजन नियंत्रण में रहता है, ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है और कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रण में रहता है जो कि हृदय रोग के कारक कहलाये जाते है। इन सब के नियंत्रण में रहने के कारण हृदय सुरक्षित हो जाता है। NCBI के एक शोध में बताया गया है कि एक, तीन और छह ग्राम दालचीनी का सेवन करने से, एलडीएल, सीरम ग्लूकोज, ट्राइग्लिसराइड और टोटल कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रित करके, हृदय संबंधी रोगों से बचने में मदद मिल सकती है। यह हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने नहीं देती। आम प्रतिदिन शहद और दालचीनी का गर्म पानी पीयें।

6. जोड़ों के दर्द में फायदेमंद (Joint Pain)- जोड़ों में दर्द (Arthritis) के उपचार में दालचीनी बहुत ही उत्तम उपाय है। इस रोग में अकड़न या सूजन रहती है और जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और बेहद पीड़ादायक दर्द होता है, इस रोग को गठिया या संधिवात भी कहा जाता है। दालचीनी गठिया दर्द से जुड़े साइटोकिन्स (cytokines) को कम करने में मदद करती है। आप रोजाना दालचीनी का गर्म पानी पीयें  और दालचीनी के गर्म पानी से दर्द वाली जगह की मालिश करें। आपको बहुत जल्दी आराम मिलेगा।  दालचीनी के गर्म पानी के स्थान पर दालचीनी पाउडर में शहद मिला कर भी खा सकते हैं। दालचीनी के तेल से मालिश करने से भी जोड़ों में दर्द में आराम आ जाता है।

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7.  श्वसन संक्रमण को दूर करे (Cure Respiratory Infections)- एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार दालचीनी  श्वसन तंत्र से जुड़े रोगों को कम करने में मदद कर सकती है। इस रोग में फेफड़ों के अंदर श्वास नली में सूजन और संक्रमण हो जाने से सांस लेने में दिक्कत होती है और सीने में जलन। इस रोग से राहत पाने के लिये एक या दो चम्मच दालचीनी पाउडर ग्रीन टी में मिलाकर पीयें। ग्रीन टी के स्थान पर आप सेब के सिरके के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं। 

8. सर्दी, जुकाम, खांसी में फायदेमंद (Cold and Cough)-  सर्दी, खांसी, जुकाम, गले में दर्द या सूजन जैसी बीमारियों में दालचीनी अत्यंत प्रभावशाली औषधि के रूप में करती है। इसका इस्तेमाल आप निम्न प्रकार कर सकते हैं –

(i)  शहद को हल्का सा गुनगुना कर इसमें 1/4 यानी एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह नाश्ता करने के बाद और रात को सोने से पहले सेवन करें।

(ii)  गुनगुने पानी में दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाकर पी सकते हैं। 

(iii)  दालचीनी के पाउडर को काली मिर्च पाउडर के साथ मिलाकर सेवन करने से पुराने कफ की समस्या से राहत मिल जायेगी।

(iv)  दालचीनी में नींबू का रस भी मिला कर सेवन करने से भी आराम लग जायेगा। 

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9. सिर दर्द से राहत (Headache Relief)- दालचीनी सिर दर्द से भी छुटकारा दिलाती है। सर्दी के मौसम में ठंडी हवा कारण सिर दर्द हो जाता है। इससे राहत पाने के लिये माथे पर दालचीनी का लेप करें। आराम आ जाएगा। इसके अलावा सामान्य मौसम में सिर दर्द में तिल के तेल में दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर सिर पर मालिश करें। 

10. मौखिक स्वास्थ्य के लिये (Oral Health)- दालचीनी पूरी तरह मौखिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में मदद करती है। दालचीनी का तेल, स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स नामक बैक्टीरिया की गतिविधियों को रोकने में मदद करता है। यह बैक्टीरिया दांतों की कैविटी का कारक होता है जो दांतों पर बुरा प्रभाव भी डालता है। दालचीनी ओरोफेशियल कंडीशन को भी नियंत्रित करती है। इसके कारण मुंह और जबड़े में दर्द बनता है। दालचीनी का तेल अपने एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंह को बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं। दालचीनी का तेल दांतों के दर्द, जबड़े की सूजन में  राहत देता है। दालचीनी को मुंह में रखकर चूसने से मुंह की बदबू भी खत्म हो जाती है। 

11. कील, मुंहासों के लिये (Nail, Acne)- दालचीनी का सेवन त्वचा के लिए भी लाभकारी है। इसके एंटी इंफ्लामेटरी गुण त्वचा रोग से बचाने में मदद करते हैं। दालचीनी के एंटीइंफ्लामेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण, कील मुंहासे के बैक्टीरिया को मारकर इनसे राहत दिलाते हैं और दाग-धब्बों को कम करते हैं। मुंहासों से राहत पाने के लिये तीन चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर को मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाकर छोड़ दें। इसके सूखने पर चेहरा धो लें। यह मिश्रण त्वचा को सुखाकर इसकी सतह तक रक्त और ऑक्सीजन को पहुंचाता है और त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है। इससे त्वचा में चमक बनी रहती है।   

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12. त्वचा के सौंदर्य के लिये (Skin Beauty)- दालचीनी त्वचा में कोलेजन (Collagen) को क्षति से बचाती है और उसके लचीलेपन को बनाये रखती है। दालचीनी द्वारा कोलेजन जैव संश्लेषण को बढ़ाये रखने से एंटी-एजिंग की समस्या से भी राहत मिलती है। यह त्वचा में कसावट लाकर चेहरे की झुर्रियों को कम करने में मदद करती है। त्वचा के सौंदर्य को निखारने के लिये एक नीबू के रस में दो बड़े चम्मच जैतून का तेल, एक कप चीनी, आधा कप दूध, दो चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर शरीर पर लगाकर छोड़ दें। पांच से दस मिनट बाद नहा लें, त्वचा दमक उठेगी। रात को सोने से पहले शहद और दालचीनी के पेस्ट को चेहरे पर लगायें। सुबह उठकर गुनगुने पानी से धो लें, चेहरा खिल उठेगा। 

13. बालों के लिए (Hair)-  बालों के गिरने की समस्या से छुटकारा पाने के लिये भी दालचीनी मदद करती है। इसके लिए गर्म जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर अच्छे से पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सिर पर लगाकर छोड़ दें। लगभग 15-20 मिनट बाद यह सूख जाएगा, फिर सिर धो लें। 

14. मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिये (Brain Health)- दालचीनी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिये भी बहुत लाभकारी होती है। दालचीनी में मौजूद फाइटोकेमिकल्स अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये फाइटोकेमिकल्स, अल्जाइमर (स्मरण शक्ति का कमजोर पड़ जाना – Alzheimer) रोग के कारण मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तन/गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं। और पार्किंसंस रोग ( हाथों में कंपकंपी, पूरे शरीर में अकड़न या मूवमेंट का धीमा होना Parkinson) के खतरे से बचाव में भी मदद करते हैं। ये मस्तिष्क की ग्लूकोज के उपयोग करने की क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करते हैं। ये ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके मस्तिष्क को स्वस्थ बनाये रखने का काम करते हैं। 

दालचीनी कितनी खानी चाहिये? – How Much Cinnamon Should be Eaten?

एक्सपर्ट्स के अनुसार दालचीनी 0.1 mg/kg ली जा सकती है। इससे अधिक शरीर में टॉक्सिक प्रभाव हो सकता है। 

दालचीनी के नुकसान – Side Effects of Cinnamon

दालचीनी के अधिक खाने से हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. दालचीनी की अम्लीय प्रकृति (Acidic nature) का कुप्रभाव दांतों पर पड़ सकता है। प्लाक व अन्य समस्याएं  हो सकती हैं।

2. एलर्जी भी हो सकती है, बेशक पहले आपने दालचीनी का सेवन किया हो और कोई साइड इफेक्ट भी ना हुआ हो।

3. पेट से जुड़ी समस्याऐं जैसे गैस, कब्ज़ आदि हो सकती हैं। 

4. लिवर संबंधी समस्या हो सकती है।

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5. ग्लुकोज़ स्तर कम हो सकता है।

6. गर्भवती महिलाऐं डॉक्टर की सलाह पर ही दालचीनी का सेवन करें क्योंकि दालचीनी या इसका तेल, समय से पहले ही दर्द उत्पन्न कर सकता है या गर्भाशय भी छोटा हो सकता है। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको दालचीनी के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। दालचीनी क्या होती है, इसकी खेती कहां होती है, यह कितने प्रकार की होती है, इसकी क्या उपयोगिता है, इसके गुण क्या होते हैं, इसके बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। इस लेख के माध्यम से दालचीनी खाने के फायदे बताये और यह भी बताया कि यह कितनी खानी चाहिये साथ ही दालचीनी ज्यादा खाने के नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर या लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दालचीनी के फायदे - Benefits of Cinnamon in Hindi
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आज के लेख में हमने आपको दालचीनी के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। दालचीनी क्या होती है, इसकी खेती कहां होती है, यह कितने प्रकार की होती है,
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · June 4, 2021 at 4:17 pm

Nice information

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