दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, गर्मी के दिनों में अक्सर लोगों को खुजाते देखा होगा ज्यादातर गर्दन पर, पीठ पर, कंधों के पास, कलाई पर और अन्य जगह पर भी। बच्चे तो मम्मी-मम्मी कह कर जैसे घर को सिर पे उठा लेते हैं क्योंकि वे ज्यादा परेशान होते हैं इस खुजली से। वास्तव में ये खुजली तो कम होती है लेकिन त्वचा में  चिनचिनाहट ज्यादा लगती है, कांटे जैसे चुभते महसूस होते हैं। यह उस समय कुछ ज्यादा ही होता है जब उमस भरी गर्मी पड़ती है यानी बरसात के दिनों वाली गर्मी में जिसे “सड़ी गर्मी” कहा जाता है। दोस्तो, यह खुजली नहीं होती और ना ही खुजली हमारा टॉपिक है बल्कि यह “अस्थाई त्वचा विकार” होता है जिसे घमौरी कहा जाता है। यह कोई रोग नहीं है परन्तु यह विकार परेशान बहुत करता है। खासतौर पर शिशुओं को जो अपने आप खुजा भी नहीं सकते, बस रोते हैं फिर माँ उनको कोई पाउडर लगाती है तब जाकर वे शांत होते हैं। आखिर इन घमौरियों से राहत पाने के उपाय क्या हैं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “घमौरी दूर करने के घरेलू उपाय”

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको घमौरी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि घमौरियों से राहत पाने के क्या घरेलू उपाय हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि घमौरी क्या होती है, इसके कितने प्रकार होते हैं और घमौरी होने के क्या कारण होते हैं। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

घमौरी दूर करने के घरेलू उपाय

घमौरी क्या होती है? – What is a Heat Rash

जब स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस नामक बैक्टीरिया त्वचा के रोम छिद्रों को बंद कर देते हैं तब पसीना शरीर से बाहर नहीं निकल पाता, यह त्वचा के नीचे फंस जाता है। त्वचा के रोम छिद्र गंदगी के कारण भी बंद हो जाते हैं। परिणामस्वरूप त्वचा पर बहुत छोटे-छोटे लाल, गुलाबी रंग के दाने उभर आते हैं जिनमें खुजली लगती है। त्वचा के इसी विकार की स्थिति को यानी इन दानों को घमौरी कहा जाता है। 

घमौरियों को मेडिकल भाषा में मिलियारिया (Miliaria) या एक्रीन मिलियारिया कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, इसे मरोड़ी, स्वेट रैश, हीट रैश, प्रिक्ली हीट आदि नामों से भी जाना जाता है। ये दाने पीठ, गर्दन, पेट, छाती का ऊपरी भाग, कलाईयां, जांध के बीच का भाग और बगल आदि हिस्सों में हो जाते हैं। ये किसी भी हो सकती हैं शिशु से लेकर छोटे-बड़े बच्चे, व्यस्क और बूढ़े व्यक्ति तक। ये गर्मी और बरसात के मौसम में निकलती हैं। त्वचा विकार की यह कोई गंभीर स्थिति नहीं होती। ये हफ्ता, दस दिन में अपने आप ठीक हो जाती हैं, इसीलिये देसी हैल्थ क्लब ने इसे “अस्थाई त्वचा विकार” माना है। 

घमौरी के प्रकार – Types of Heat Rash

दोस्तो, घमौरी के तीन प्रकार होते हैं। विवरण निम्न प्रकार है –

1.क्रिस्टालिना (Kristalina)- यह घमौरी का सबसे सामान्य प्रकार होता है। इसमें त्वचा की सतह पर द्रव या पसीने से भरे छोटे सफेद दाने या बहुत छोटे फफोले उभरते हैं। ये आसानी से फूट जाते हैं। इनमें ना खुजली होती है और ना ही दर्द। ये वयस्कों की तुलना में शिशुओं को अधिक होती हैं। यह स्थिति त्वचा की ऊपरी परत में पसीने की नलिकाओं के प्रभावित होने पर बनती है। 

2. रूब्रा (Rubra)- घमौरियों के इस प्रकार को चुभती, जलती गर्मी या प्रिक्ली हीट (prickly heat) भी कहा जाता है। यह स्थिति त्वचा की गहरी परतों में पसीना नलिकाओं के बंद होने के कारण बनती है और यह बहुत असुविधाजनक स्थिति होती है। इसमें लाल उभार और सूजन जैसी स्थिति बनती है। इन उभारों के बढ़ जाने पर इनमें मवाद भर जाती है जिसे मिलिअरिया पस्टुलोसा (miliaria pustulosa) कहते हैं। 

3. प्रोफुंडा (Profunda)- यह घमौरी का सबसे असामान्य और दुर्लभ प्रकार है। ये त्वचा की सबसे गहरी परत (डर्मिस) के प्रभावित होने के कारण बनती हैं। ये बड़े, कठोर और मांस के रंग के अल्सर, गांठ या धब्बे के रूप में बनती हैं और ये बार-बार बन सकती हैं और स्थायी भी हो सकती हैं।

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घमौरी के कारण – Cause of  Heat Rash

1. घमौरियों के लिये मुख्यतः गर्मी और बरसात का मौसम जिम्मेदार होता है।

2. गंदगी और स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस नामक बैक्टीरिया द्वारा त्वचा के छिद्रों को बंद करना।

3. पसीने का भाप बनने के बजाय, त्वचा के नीचे फंस जाना। 

4. कुछ दवाओं की प्रतिक्रिया स्वरूप अधिक पसीना आना। 

5. बहुत ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने के कारण बहुत पसीना आना जैसे अधिक शारीरिक श्रम वाला काम या ज्यादा एक्सरसाइज करना। 

6. अविकसित पसीने वाली नलिकाऐं। नवजात शिशु की नलिकाऐं आसानी से बंद हो जाती हैं क्योंकि वे पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होतीं। ऐसा उस स्थिति में भी होता है जब नवजात शिशु इनक्यूबेटर में हो, उसे बहुत गर्म कपड़े पहनाए गये हों या उसे बुखार हो। 

7. कुछ बीमारियों जैसे बुखार आदि के कारण जिसमें लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करना पड़े। 

घमौरी के लक्षण – Symptoms of Heat Rash

घमौरियां निकलने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते   हैं –

1. पीठ, गर्दन, पेट, छाती का ऊपरी भाग, कलाईयां, जांध के बीच का भाग और बगल आदि में छोटे-छोटे लाल दाने निकल आना।

2. इन दानों में जलन होना, खुजली लगना और चिनचिनाहट होना। 

3. त्वचा पर सूजन होना। 

4. पसीना अधिक और लगातार बहना।

5. कपड़ों से भी चुभन महसूस होना। 

घमौरी का परीक्षण – Test of Heat Rash

घमौरियां कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती हैं इसलिये इनके परीक्षण के लिये किसी विशेष टैस्ट की जरूरत नहीं होती। 

घमौरी का उपचार – Treatment of Heat Rash 

घमौरी का किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती। हां, यदि लाल दाने बहुत ज्यादा हैं तो डॉक्टर निम्नलिखित सलाह दे सकते हैं –

1. त्वचा को ठंडा रखें, सफाई का ध्यान रखें।

2. एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।

3. कैलामाइन या मेन्थॉल या टॉपिकल स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग करें ताकि खुजली में आराम लगे।

4. संक्रमण रोकने के लिये ड्राई मिल्क प्रोटीन, लैबिलिन और ट्राईक्लोसन और एंटीबैक्टीरियल कंपाउंड  पाउडर का उपयोग करें। 

घमौरी से बचाव के लिये टिप्स – Tips to prevent Heat Rash 

अपने आप को घमौरियों से बचाने के लिये निम्नलिखित टिप्स अपना सकते हैं –

1. त्वचा की सफाई बनाये रखें और ठंडा रखें। 

2. नहाने के लिये साबुन का उपयोग करें। 

3. त्वचा को ठंडा रखने के लिये त्वचा पर पाउडर छिड़कें।

4. गर्मियों के अनुकूल हल्के, मुलायम और सूती वस्त्र पहनें। 

5. टाइट कपड़े पहनने से बचें। 

6. बेवजह गर्मी में बाहर जाने से बचें।

7. पंखा, कूलर या एयर कंडीशन के द्वारा अपने घर को ठंडा रखें।

8. सोने का कमरा और बिस्तर भी ठंडा होना चाहिये।

9. पसीना लाने वाली अधिक शारीरिक गतिविधियों से बचें।

10. अपने को हाइड्रेट रखने के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें।

11. तरल पदार्थों का सेवन करें जैसे फलों का जूस, शरबत, ठंडाई, गन्ने का जूस, लस्सी, छाछ आदि।  

12. ताजा फलों का विशेषकर तरबूज, खरबूज, अनानास, संतरा आदि का सेवन करें।

13. भोजन में सलाद विशेषकर खीरा का सेवन करें। 

14. भोजन में ठंडी तासीर वाले खाद्य, पेय पदार्थों का सेवन करें जैसे नींबू, पुदीना की चटनी, टमाटर, दही, छाछ, पनीर आदि। 

घमौरी दूर करने के घरेलू उपाय – Home Remedies to Get Rid of Heat Rash

दोस्तो, गर्मी में घमौरियों से बचाव के टिप्स के बाद अब बताते हैं आपको घमौरियों से राहत पाने के घरेलू उपाय जो निम्न प्रकार हैं –

1. बर्फ़ (Ice)- फ्रिज़ से कुछ बर्फ़ के टुकड़े (Ice Qube) निकालकर किसी साफ़ और सूती कपड़े में रखकर धीरे-धीरे हल्के हाथों से घमौरियों पर 5 से 10 मिनट तक मसाज करें। इसे दिन में कम से कम दो बार जरूर करें। इससे तुरंत राहत मिलेगी। यह सबसे सरल उपाय है। बर्फ़ उपलब्ध ना होने की स्थिति में घड़े के ठंडे पानी में कपड़ा भिगोकर थोड़ी-थोड़ी देर के लिये घमौरियों पर रखें। 

2. मुल्तानी मिट्टी (Multani Mitti)- घमौरियों से राहत पाने के लिये मुल्तानी मिट्टी का उपयोग प्राचीन काल से होता आया है। यह आज भी लोकप्रिय उपाय है विशेषकर देहातों में। मुल्तानी मिट्टी की तासीर ठंडी होने के नाते यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है। इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण फंगल, बैक्टीरिया, वायरस तथा परजीवियों को पनपने से रोकते हैं।  आवश्यकतानुसार मुल्तानी मिट्टी पाउडर में थोड़ा सा पानी या गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाकर छोड़ दें। लगभग 20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। इसे हफ्ते में तीन, चार दिन करें। मुल्तानी मिट्टी पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “मुल्तानी मिट्टी के फायदे और नुकसान” पढ़ें। 

3. नीम (Neem Tree)- यह भी एक प्राचीन उपाय है जिसे आज भी लोग घमौरियों की समस्या दूर करने के लिये उपयोग में लाते हैं। नीम में भी एंटीमाइक्रोबियल गुण पाये जाते हैं जो किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया और परजीवियों को पनपने से रोकते हैं। घमौरियों के लिये आवश्यकतानुसार नीम की पत्तियां लेकर पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इस इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाकर छोड़ दें। लगभग 20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें। इसे हफ्ते में दो, तीन दिन कर सकते हैं। 

4. ओट्स (Oats)- ओट्स को घमौरियों के लिये रामबाण उपाय माना जाता है। इसमें भी एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। घमौरियों से राहत पाने के लिये ओट्स का उपयोग निम्न प्रकार कर सकते हैं – 

(i) आधा कप ठंडे दूध में एक चम्मच ओट्स मिलाकर आधे घंटे के लिये फ्रिज में रख दें, फिर इसे निकालकर घमौरियों पर लगाकर 15 मिनट तक मसाज करें। बाद में नहा लें या पानी से साफ़ कर दें, जैसा भी आप उचित समझें। इसे दिन में दो या तीन बार कर सकते हैं। इससे त्वचा मुलायम हो जायेगी और इसमें ग्लो भी आ जायेगा।

(ii) एक बाथटब में गुनगुना पानी भरकर इसमें तीन, चार कप ओट्स मिला लें। फिर इस पानी में बैठ जायें और शरीर पर यह पानी डालते रहें। 20 मिनट के बाद इस पानी से नहाकर तौलिये से हल्के हाथ से शरीर पोंछ लें। यह उपचार एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-प्रुरिटिक प्रभाव छोड़ता है जो त्वचा को मॉइस्चराइज़ और सूदिंग करने में मदद करता है।

5. बेकिंग सोडा (Baking Soda)- बेकिंग सोडा एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है जो बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद करता है। यह त्वचा की गंदगी को भी साफ़ करने का काम करता है जिसकी वजह से खुजली और जलन होती है। एक कप ठंडे पानी में दो चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर उसमें एक साफ कपड़ा भिगो दें। अब इस कपड़े को निचोड़कर घमौरियों पर लगाकर छोड़ दें। 10 मिनट के बाद इस कपड़े को हटाकर त्वचा को ठंडे पानी से साफ़ कर लें। इसे एक हफ्ते तक रोजाना तीन, चार बार करें।

6. एलोवेरा (Aloe vera)- त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार के लिये एलोवेरा बेहद फायदेमंद है। एलोवेरा में पाये जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण घमौरियों का कारण स्टेफिलोकोकस एपिडरमाइडिस बैक्टीरिया के विरुद्ध लड़ते हैं और इनको पनपने नहीं देते। घमौरियों के लिये एलोवेरा का पत्ता काटकर इसका जैल निकालकर घमौरियों पर लगायें और हल्के हाथ से मसाज करें। इससे त्वचा मॉइस्चराइज़ हो जायेगी और खुजली, जलन में भी आराम लग जायेगा।  बाद में पानी से साफ़ कर लें। 

8. खीरा (Cucumber)- घमौरियों के उपचार में खीरा रामबाण उपाय माना जाता है। यह त्वचा को ठंडक देकर खुजली और जलन में आराम पहुंचाता है। खीरा के उपयोग से त्वचा नम रहेगी और ग्लो भी बढ़ेगा। घमौरियों के उपचार के लिये खीरा का उपयोग निम्न प्रकार से कर सकते हैं – 

(i)  खीरा के पतले-पतले स्लाइस काटकर फ्रिज़ में रख दें। 15 मिनट बाद इनको फ्रिज़ से निकालकर घमौरियों पर रख दें। इनको तब तक लगा रहने दें जब तक इनकी ठंडक खत्म होकर गर्माहट महसूस ना हो। इसे दिन में दो बार कर सकते हैं। 

(ii) खीरा के इन स्लाइस को घमौरियों पर रखने के बजाय इनको घमौरियों पर 10-15 मिनट तक धीरे-धीरे रगड़ें। 

(iii) एक खीरा को कद्दूकस करके इसमें एक चम्मच चंदन पाउडर मिलाकर फ्रिज़ में रख दें। 20 मिनट बाद इसे फ्रिज़ से निकालकर घमौरियों पर लगाकर छोड़ दें। इसके सूख जाने पर त्वचा को पानी से साफ़ कर लें। 

9. पपीता और गेहूं का आटा (Papaya and Wheat Flour)- पपीता के एंटीइंफ्लामेटरी गुण सूजन कम करने का काम करते हैं। पपीता त्वचा रोगों से छुटकारा दिलाने में मददगार होता है। यदि इसके बीजों को पीसकर, उसमें ग्लिसरीन मिलाकर त्वचा पर लगाया जाये तो दाद और खुजली में लाभ होता है। इसकी खुद की तसीर गर्म होती है मगर त्वचा को ठंडक पहुंचाता है और गेहूं का आटा घमौरियों की मृत त्वचा  को हटाने का काम करता है। पके हुऐ पपीता की एक फांक को मसलकर इसमें एक चम्मच चम्मच गेहूं का आटा मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाकर हल्के हाथ से मसाज करें। बाद में धो लें या नहा लें। पपीता पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “पपीता खाने के फायदे और नुकसान” पढ़ें।

10. आलू (Potato)- आलू में एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं जो घमौरी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकते हैं। आलू का रस त्वचा में होने वाली जलन और चुभन से छुटकारा दिलाता है। घमौरियों को खत्म करने के लिये आलू के पतले-पतले स्लाइस काट कर फ्रिज़ में रख दें। दस मिनट बाद इनको निकाल कर घमौरियों पर रखकर धीरे-धीरे मसाज करें। बाद में त्वचा को पानी से साफ़ कर लें।  

11. चंदन पाउडर (Sandalwood Powder)- चंदन के एंटीमाइक्रोबियल गुण घमौरियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं। चंदन अपनी प्रकृति के अनुसार त्वचा को ठंडक पहुंचाता है जिससे खुजली, जलन और सूजन में आराम लगता है। दो चम्मच चंदन पाउडर में चार चम्मच गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को घमौरियों पर लगाकर छोड़ दें। 15 मिनट बाद त्वचा को ठंडे पानी से धो लें। इसे सप्ताह में दो, तीन बार करें। 

12. दही (Curd)- आधा कप दही में 8-10 पुदीना की पत्तियां पीसकर अच्छी तरह मिला लें। इसे घमौरियों पर लगाकर हल्के हाथ से 10 मिनट तक मसाज करें। बाद में त्वचा को पानी से साफ़ कर लें या नहा लें। इसे दिन में दो बार कर सकते हैं। यह उपाय बच्चों के लिये बहुत सुरक्षित है क्योंकि उनकी कोमल त्वचा को कोई हानि नहीं होगी।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको घमौरी दूर करने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। घमौरी क्या होती है, घमौरी के प्रकार, घमौरी के कारण, घमौरी के लक्षण, घमौरी का परीक्षण, घमौरी का उपचार और घमौरी से बचाव के लिये टिप्स, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से घमौरी से राहत पाने के लिये बहुत सारे उपाय भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

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Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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