हैलो दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। आज हम आपको बतायेंगे । घुटने के दर्द का देसी इलाज के बारे में। घुटनों के दर्द होने के कारण और निवारण के बारे में। घुटना टांग और जांघ को जोड़ने वाला हिस्सा है। यह दो संधियों के मिलाप से बना होता है। यह संधि फीमर और टिबिया के बीच होता है, जबकि दूसरा फीमर और पेटेला के बीच।  संधि में चार अस्थियों की संधि होती है। 

उर्वास्थि (फीमर/femur), अंतर्जंघिका (टिबिया/tibia), बहिर्जंघिका (फिबुला/fibula) और जानुका (पटेला/patella)। घुटने में चार प्रकोष्ट (compartments) होते हैं। बार-बार के तनाव, चोट या किसी रोग के कारण इन प्रकोष्ठों के अवयवों को नुकसान पहुँच सकता है। यह मानव शरीर की सबसे बड़ी संधि होती है और बहुत  जटिल होती है। घुटनों में दर्द की समस्या आम हो गयी है। यह समस्या बुजुर्गों में ही नहीं अपितु युवाओं में भी देखी गयी है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा है। 

घुटने के दर्द का देसी इलाज

दोस्तो अब बताते हैं कुछ देसी और प्राकृतिक इलाज जो आपको घुटनों के दर्द से मुक्ति दिला सकते हैं :-

घुटने के दर्द का देसी इलाज – Knee Pain Relief

1. मसाज (Massage)– सरसों का तेल की मालिश से घुटनों के दर्द के अलावा सर्दी वाले दर्द से राहत मिलती है। घर पर आप मालिश के लिये सरसों का विशेष तेल बना सकते हैं। 250 ग्राम सरसों के तेल को कढ़ाई में गर्म करते समय 8-10 कली लहसुन की छील कर डाल दें। गर्म तेल में एक-एक चम्मच अजवाइन, दाना मेथी, सोंठ पाउडर भी डाल दें, जब सारा मसाला पक जाए तो ठंडा होने पर किसी काँच के बर्तन रख लें।

2. नींबू और तिल का तेल (Lemon and Sesame Oil)– नींबू में कई आस्टियोआर्थराइटिस गुण होते हैं जो घुटने के दर्द और सूजन से राहत दिलाते हैं। एक नींबू रस में दो चम्मच तिल के तेल मिलाएं और रात में सोने से पहले और सुबह उठने के बाद, हल्के हाथों से घुटनों पर मालिश करें। आपको राहत महसूस होगी।

3. हॉट व कोल्ड कंप्रेस थेरेपी (Hot and Cold Compress Therapy) – ये थेरेपी घुटने के दर्द से राहत दिला सकती है। पर याद रखिये यदि आपको सूजन है तो आपको हीट कंप्रेस से बचना चाहिए। गठिया जैसे पुराने दर्द के लिए हीट अच्छी है।

4. एलोवेरा (Aloe Vera)– एलोवेरा का गूदा, हल्दी के साथ हल्का गर्म करके बांधने पर जोड़ों के दर्द, चोट लगने, सूजन, घाव एवं त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है।

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5. अश्वगंधा एवं सोंठ पाउडर (Ashwagandha and Dry Ginger Powder)– 40 ग्राम नागौरी अश्वगंधा पाउडर, 20 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा 40 ग्राम खाण्ड पाउडर, तीनों को अच्छी तरह से मिला लें। इस चूर्ण को 3-3 ग्राम मात्रा में सुबह शाम गर्म दूध के साथ लेने से घुटनों, जोड़ों के दर्द में और सूजन में बहुत लाभ मिलता है।

6. हल्दी और अदरक (Turmeric and Ginger)– एक गिलास पानी में अदरक और हल्दी डालकर 12−15 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को रोजाना पिएं। हल्दी और अदरक में बहुत  औषधीय गुण होते हैं। हल्दी में करक्यूमिन नामक एक पावरफुल एंटी−इंफ्लेमेटरी तत्व पाया जाता है। यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। चोट लगने से लेकर किसी भी तरह के दर्द में राहत पाने के लिए हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है। इसी प्रकार अदरक में प्रभावशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। जो वात-रोग (गाउट), संधिशोथ (रहेयूमेटॉइड आर्थराइटिस) और ऑस्टियोआर्थराइटिस से संबंधित दर्द में राहत दिलाते हैं। 2001 के एक अध्ययन के मुताबिक, घुटने के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में अदरक का अर्क अति प्रभावी था।

     याद रहे अदरक का  सेवन गर्भावस्था में निषिद्ध है

7. अदरक (Ginger)– गर्म अदरक के पेस्ट को हल्दी के साथ एक दिन में दो बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से गठिया के दर्द में आराम मिलेगा। दर्द कर रही मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द शांत करने के लिए नहाने के पानी में अदरक के तेल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं।

8. सौंठ, मेथी दाना और हल्दी (Saunt and Turmeric)– मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें।  रोजाना सुबह, शाम, खाना खाने के बाद एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें।

9. हल्दी वाला दूध (Turmeric Milk) – हल्दी और दूध का संगम, सोने पे सुहागा होता है। हल्दी के गुण हमने ऊपर बताये हैं। दूध में कैल्शियम और विटामिन-डी प्रचुर मात्रा में होता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं और जोड़ों को मजबूत रखने के लिए बेहद जरूरी है। एक ग्लास दूध में एक चम्मच हल्दी के पाउडर को मिलाकर सुबह-शाम कम से कम दो बार पीना, घुटनों के दर्द में बेहद फायदेमंद होता है। जो दूध नहीं पी सकते, उनको दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये जैसे पनीर, दही आदि।

 “याद रहे, रात को सोते समय दूध हानिकारक है। इससे शरीर में अधिक मात्रा में यूरिक एसिड जमा होने लगता है।

10. मेथी दाना (Fenugreek Seeds)– मेथी दाने का पाउडर आधा से एक चम्मच सुबह शाम खाने के बाद गर्म पानी से सेवन करने पर जोड़ों पर असर, दर्द की गोली की तरह ऐनलजैसिक एवं एंटी-इंफ्लामेट्री होता है। दर्द में आराम मिलेगा।

11. सेब का सिरका (Apple Vinegar)– सेब के सिरके में एंटी−इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज (Anti-Inflammatory Properties)पाई जाती है, जिसके कारण गठिया जैसे पुराने दर्द से राहत दिलाती है और घुटने के दर्द में भी। एक गिलास पानी में आधा कप सेब का सिरका मिलाएं और रात को सोने से पहले इसका सेवन करें। 

12. हल्दी, चूने का लेप (Lime Paste) – हल्दी और चूना को मिलाकर सरसों के तेल में थोड़ी देर तक गर्म कर लेप बना लें। इस लेप को घुटने में लगाकर रखने से दर्द कम हो सकता है।

घुटने के दर्द का प्राकृतिक  इलाज – Knee Pain Relief Natural Method

1. धूप सेंकना (Sunbathe)- घुटनों के दर्द से का यह प्राकृतिक उपचार है। सूरज की धूप से मिलने वाले विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत है जो हड्डी के लिए अधिक लाभदायक होता है। विटामिन-डी के विषय में हम पिछले लेख में बता चुके हैं।

2. व्यायाम करें (Exercise)– रोजाना हमें व्यायाम करना चाहिये। तैराकी करना जोड़ों के दर्द के लिए सबसे फायदेमंद व्यायाम होता है। व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि आप नियमित व्यायाम करते हैं तो व्यायाम के साथ आपको स्ट्रेचिंग करने की भी सलाह दी जाती है, परंतु याद रखिए स्ट्रेचिंग हफ्ते में केवल तीन बार करें और करने से पहले थोड़ा वार्मअप भी करना चाहिये। एकदम शुरू नहीं करना चाहिए।

3. प्रातःकालीन भ्रमण (Morning Walk)– यह भी व्यायाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो आपको सारा दिन चुस्त दुरुस्त रखता है। इससे न केवल चर्बी कम होगी बल्कि आपका वजन भी कम होगा। कम वजन होने पर उठने बैठने में घुटनों में दर्द नहीं होगा। आप पूरी तरह से Fit भी दिखते हैं।

4. गतिशीलता (Mobility) – जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सदैव गतिशील रहे। यदि जोड़ों की मूवमेंट होती रहे तो आपको लंबे समय किसी भी प्रकार का कोई दर्द होने की संभावना नहीं होगी। इसलिए गतिशील रहना चाहिए। बहुत देर तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से भी जोड़ों में कठोरता महसूस होती है। 

5. भार नियंत्रण वजन (Control Weight)– ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है और जिससे शरीर के कार्टिलेज के टूटने की संभावना बनी रहती है। इसलिये वजन को नियंत्रण में रखना आवश्यक है। व्यायाम, प्रातःकालीन भ्रमण आदि प्राकृतिक रूप से आपका वजन नियंत्रण में रहता है। 

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6. सही पोस्चर/आसन (Perfect Posture)– जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सही पोस्चर या आसन में उठना, बैठना और चलना भी अति आवश्यक है। आपका सही पोस्चर ही गर्दन से लेकर घुटनों तक शरीर के सभी जोड़ों की प्राकृतिक रूप से रक्षा करता है।

घुटनों में दर्द के कारण – Causes of Knee Pain

वात एवं कफ दोष जब अपने चरम स्थिति में होते हैं तब घुटनों एवं जोड़ों में दर्द होता है। घुटना हमारे शरीर का ऐसा स्थान है जो दो से ज्यादा अस्थियों से मिलकर बना है। जब किसी जोड़ में उप-अस्थि भंग हो जाती है तो हड्डियां एक-दूसरे के साथ रगड़ खाती हैं, इससे दर्द, सूजन और ऐंठन उत्पन्न होती है और घुटनों में दर्द का कारण बन जाता है। लम्बी दूरी तक दौड़ने से घुटनों के जोड़ में दर्द हो सकता है क्योंकि इससे घुटनों पर बहुत झटका लगता है।

1. आर्थराइटिस (Arthritis)– लूपस जैसा-रयूमेटाइड, आस्टियोआर्थराइटिस और गाउट (gout) सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार गाउट गठिया का एक रूप होता है, जो यूरिक एसिड बनने की वजह से होता है।

2. ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) – इसमें जोड़ों के बिगड़ने और खराब हालत होने के कारण दर्द, सूजन और अन्य समस्याएं होती हैं।

3. बरसाइटिस (Barasitis)– घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)

4. टेन्टीनाइटिस (Tantinitis) – इसमें घुटने के अगले भाग में दर्द होता है। ये सीढ़ियां चढ़ने, उतरने और चलते समय और अधिक बदतर हो जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को भी होता है।

5. बर्साइटिस (Bursitis) – यह घुटने का बार-बार सामान्य से अधिक इस्तेमाल करना, या चोट आदि लगने से होता है।

6. बेकर्स सिस्ट (Baker’s cyst) – इसमें घुटने के पीछे सिनोवियल द्रव (जोड़ों में चिकनाई लाने वाला द्रव) का निर्माण होने लगता है। घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ आर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आप की पिंडली तक जा सकता है।

7. स्नायु का टूटना (Torn Ligaments) – स्नायु (Ligaments) तंतुमय रेशेदार और लचीला ऊतक के समांतर सूत्रों के लंबे पट्ट होते हैं, जो दो हड्डियों को आपस में जोड़ने में मदद करते हैं।  ये स्नायु कोशिका के बाहर स्थित रहती है और कुछ भीतर। लिगामेंट्स, शरीर में घुटनों की स्थिरता को बनाए रखने में सहायक होते हैं। घुटने में स्थित चार लिगामेंट में से एक का भी टूटना घुटने के दर्द का कारण बन सकता है। घिसा हुआ या क्षतिग्रस्त लिगामेंट (ए सी एल टियर),  घुटने में दर्द और स्थायित्व उत्पन्न कर सकता है। झटका लगना, मोच, मामूली चोट (हड्डी ना टूटी हो तो भी), अचानक या अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाना, ये सब घुटने के दर्द का कारण बनते हैं।

8. संधिशोथ (Rheumatoid Arthritis) –  यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) सूजन संबंधी स्व-प्रतिरक्षित विकार होता है, जो दर्दनाक सूजन का कारण बन सकता है, और अंत में हड्डियों में विकृति और क्षय (घिसना, अपरदन) का कारण बन सकता है। एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठ बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया भी कहते हैं। 

9. अव्यवस्था (Dislocation) – जब एक हड्डी संयुक्त से बाहर निकल जाती है यानी हड्डियों के जोड़ उखड़ने या जगह से हिल जाने को डिस्लोकेशन कहा जाता है, घुटने की ऊपरी हड्डी (टॉपी) का डिस्लोकेशन अक्सर चोट के कारण ही होता है।

10. हड्डियों के ट्यूमर (Bone Tumors) – ऑस्टियो सार्कोमा कैंसर, दूसरा सबसे प्रचलित हड्डियों का कैंसर होता है। ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों में होने वाला ऐसा घाव है जो कैंसर में बदल जाता है। यह आमतौर पर घुटने के पास पिंडली में होता है। ऑस्टियो सार्कोमा (Osteo Sarcoma)उन लोगों में विकसित होता है जिन्हें कोई अन्य बीमारी नहीं होती है। ये अनुवांशिक होती है। लेकिन परिवार में किसी को भी ये बीमारी नहीं है फिर भी हो सकती है। अगर परिवार में किसी एक को भी ये बीमारी होती है तो डॉक्टर बाकी सदस्यों में इस बीमारी की पहचान आसानी से कर सकता है। हड्डियों के सिरों के आसपास सूजन या गांठ, हड्डी और जोड़ों का दर्द, कई महीनों तक दर्द बना रहना  ऑस्टियो सार्कोमा के लक्षण हो सकते हैं। हड्डियों के सभी ट्यूमर कैंसर (Tumor Cancer) कारक नहीं होते। दरअसल गैर-कैंसर कारक ट्यूमर ज़्यादा आम प्रकार के होते हैं। 

हड्डी के कैंसर के मुख्यतः दो भाग हैं। प्राथमिक और माध्यमिक। प्राथमिक हड्डी का कैंसर ‘सारकोमा’ (sarcomas) का ट्यूमर हड्डी में ही शुरू होता है। सारकोमा कैंसर वो होते हैं जो हड्डी, मांसपेशी, रेशेदार ऊतक, रक्त वाहिकाओं, वसा ऊतकों के साथ ही साथ कुछ अन्य ऊतकों में शुरू होते हैं। माध्यमिक कैंसर या ‘मेटास्टेटिक’ कैंसर कहीं और से शुरू हो के हड्डियों में फैल जाता है। यह कई विभिन्न प्रकार के उन्नत कैंसर में देखा जा सकता है, जैसे स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, और फेफड़ों के कैंसर।

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11. मेनिस्कस टियर (Meniscus Tear) – घुटने के कार्टिलेज में एक या उससे ज्यादा टूट-फूट होना।

12. अन्य (Other)– घुटनों का ज्यादा इस्तेमाल करना, जोड़ में

संक्रमण होना, गलत मुद्रा व ढंग से शारीरिक गतिविधियां करना, किसी शारीरिक गतिविधि को करने से पहले और बाद में, वार्म-अप और कूलिंग डाउन ना करना, 

मांसपेशियों को अनुचित तरीके से स्ट्रेच करना आदि।

घुटने में दर्द के लक्षण – Symptoms of Knee Pain

1. अचानक घुटने में दर्द होना (चोट के साथ या बिना चोट के)।

2. 5-6 दिनों के बाद भी घुटने का दर्द रहना।

3. प्रभावित तरफ आराम से ना चल पाना।

4. घुटने के लॉकिंग या घुटने के जोड़ में बकलिंग का अनुभव करना।

5. घुटने में सूजन के साथ बुखार और लालिमा जैसे संक्रमण के लक्षण होना।

6. ठीक से उठने बैठने में घुटनों में दर्द होना।

Conclusion

दोस्तो, आज इस लेख के माध्यम से हमने आपको घुटने के दर्द का देसी इलाज के विषय में जानकारी दी। इसके कारण, देसी और प्राकृतिक निवारण, सावधानियां आदि के बारे में बताया। आशा है आपको यह अवश्य पसन्द आयेगा। कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer- किसी भी रोग/समस्या के लिये कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें।  यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी रोग का उपचार/विकल्प नहीं। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है। 


1 Comment

Shiv Kumar Kardam · November 27, 2020 at 6:10 am

It is also a large and complicated subject. The same is summarized systematically. Nice. Thank you so much Respected Blogger.

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