दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, हमारे शरीर की कार्य प्रणाली ऐसी है की यदि इसमें किसी भी प्रकार का छोटा या बड़ा कोई भी व्यवधान आता है तो शरीर हमें संकेत भेजता है कि मैं बीमार पड़ने वाला हूं, अभी से कोई उपचार कर लो। मगर हम, इसका इशारा समझ नहीं पाते और नतीजा होता है कि हम बीमार पड़ जाते हैं। आज हम शरीर के एक संकेत की बात करेंगे जिसे समझ कर हम अपना जीवन बचा सकते हैं या यदि कोई और व्यक्ति अपने लिये यह संकेत बता रहा है तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचा कर उसकी जान बचा सकते हैं। यह संकेत है सीने में उठने वाले दर्द का, यदि यह दर्द जल्दी खत्म हो गया तो ठीक अन्यथा यह चेतावनी है कि आपको हार्ट अटैक आने वाला है। इसलिये सावधान हो जाइये और जो करना है वो जल्दी कीजिये। हमारा आज का टॉपिक सीने में उठने वाला दर्द नहीं है बल्कि कुछ और है। दोस्तो, जरा सोचिये कि ऐसा क्या किया जाये कि हार्ट अटैक की नौबत ही ना आये अर्थात् हमें कुछ ऐसा करना चाहिये जो हार्ट अटैक से बचाव कर सके। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको हार्ट के बारे विस्तार से जानकारी देगा और कुछ ऐसे घरेलू उपाय भी बतायेगा जो हार्ट अटैक से बचाव करेंगे। तो, सबसे पहले जानते हैं कि हार्ट क्या है, हार्ट अटैक क्या होता है और सीने में होने वाले दर्द और हार्ट अटैक में क्या अंतर है? इसके बाद फिर अन्य बिन्दुओं (Points) की जानकारी देंगे। 

हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय

हार्ट क्या है? – What is Heart?

दोस्तो, आपको याद होगा कि हमने पिछले आर्टिकल “बाईपास सर्जरी क्या होती है?”, में हृदय के बारे में विस्तार से बताया था, आज एक बार फिर दोहरा देते हैं कि हृदय यानी हार्ट क्या होता है। हार्ट मांसल (cardiac muscle) से बना हुआ शरीर का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण अंग है जिसमें हड्डी नहीं होती। इसका काम शरीर के प्रत्येक अंग को, उसका कार्य करने के लिये ऑक्सीजन युक्त रक्त को उपलब्ध करना है। चूंकि बायां फेफड़ा दायीं तरफ के फेफड़े से छोटा होता है इसलिये छाती के बीच बायीं तरफ अधिक जगह होने के कारण हार्ट यहां स्थित होता है। यह बहुत ही कम मामलों (Rare of rarest ) में दायीं तरफ भी देखा गया है। औसतन इसका वजन महिलाओं में 250 से 300 ग्रा. और पुरुषों में 300 से 350 ग्राम होता है। यह औसतन एक मिनट में 72 बार धड़कता है और एक मिनट मे 70 मि.ली. रक्त पम्प करता है।

हार्ट अटैक क्या होता है? – What is a Heart Attack?

हार्ट अटैक मायोकार्डियल इंफ्रेर्क्शन (Myocardial infarction) के नाम से भी जाना जाता है। हार्ट को रक्त पहुंचाने का काम तीन मुख्य धमनियां करती हैं जिन्हें हृदय धमनियां (Coronary Arteries) कहा जाता है। रक्त मिलने पर हार्ट पम्पिंग के जरिये ऑक्सीजन युक्त रक्त, रक्त वाहिकाओं में रक्त भेजता है। रक्त वाहिकाओं के द्वारा यह ऑक्सीजन युक्त रक्त शरीर के सभी अंगों को जाता है जिससे वे अपना काम करते हैं। जब किसी कारणवश हृदय धमनियों में, किसी एक या तीनों में रुकावट (Blockage) जाये तो इसे हृदय धमनी रोग (Coronary Artery Disease – CAD) कहते हैं। हृदय धमनियों में आयी रुकावट की वजह से हार्ट को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता तो उसे पम्पिंग के लिये अधिक जोर लगाना पड़ता है। हार्ट की मांसपेशियां चोटिल होती हैं जिससे सीने में दबाव और दर्द उत्पन्न होता है। यही दबाव और दर्द हार्ट अटैक कहलाता है। यह बेहद गंभीर और आपात स्थिति होती है जिसमें मस्तिष्क को ऑक्सीजन युक्त रक्त की निरन्तर आपूर्ति रुक जाती है। यदि मरीज को समय रहते तुरंत चिकित्सा ना मिले तो उसकी मृत्यु हो जाती है। हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज क्यों आती है यानी हृदय धमनी रोग (CAD) के क्या कारण होते हैं, इसका जिक्र हम बाद में करेंगे। 

हार्ट अटैक और सीने के दर्द में अंतर – Difference between Heart Attack and Chest Pain

हार्ट अटैक और सीने में उठने वाले दर्द के बीच अंतर को पहचानना जरूरी है क्योंकि सीने में उठने वाला हर दर्द, हार्ट अटैक का संकेत नहीं हो सकता। यदि सीने में दर्द ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट में खत्म हो जाता है तो यह हार्ट अटैक का संकेत नहीं है, यह केवल सीने का ही दर्द है जो किसी अन्य कारण से हो सकता है जैसे सर्दी, श्वसन तंत्र की समस्या, कठिन परिश्रम, अधिक वजन उठा लेना, धूम्रपान या शराब का अधिक सेवन। दोस्तो, यदि सीने का दर्द 20 मिनट से ज्यादा रहता है, 30 मिनट या इससे भी ज्यादा में यह खत्म ना हो तो इसे खतरे की घंटी समझिये, यह हार्ट अटैक आने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना एक पल गंवाये तुरंत डॉक्टर के पास जायें और उपचार करायें।

हार्ट अटैक के कारण  – Cause of Heart Attack

1. दोस्तो, हार्ट अटैक का मुख्य कारण केवल एक होता है और वह है हृदय की धमनियों में आई रुकावट जिससे हार्ट के पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता। इस बारे में हम ऊपर विस्तार से बता चुके हैं। हृदय की धमनियों में रुकावट (Blockage) आने के क्या कारण होते हैं, यह हम आगे बतायेंगे। इसके अतिरिक्त हार्ट अटैक के कुछ और भी कारण हो सकते हैं    जैसे –

2. तनाव (Tension), चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression)।

3. सदमा लगना

4. बहुत अधिक खुशी बर्दाश्त ना कर पाना

5. हृदय की अनियमित धड़कन (Atrial fibrillation)

हृदय की धमनियों में रुकावट के कारण – Causes of blockage in the arteries of the heart:

1. अधिक वसा (Fat) युक्त भोजन करना जिससे वसा का जमाव होने लगता है और इस जमाव से धमनियां कठोर हो जाती हैं जिससे रक्त के निरन्तर प्रवाह में रुकावट आ जाती है।  

2. उच्च रक्तचाप

3. कोलेस्ट्रॉल स्तर में असंतुलन।  “खराब” कोलेस्ट्रॉल एलडीएल बढ़ का जाना और “अच्छा” वाला कोलेस्ट्रॉल एचडीएल का स्तर कम हो जाना।

4. मोटापा अर्थात् वजन का बढ़ना।

5. डायबिटीज की समस्या।

6. व्यायाम ना करना। 

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7. आसीन जीवन शैली (Sedentary lifestyle) अर्थात् शारीरीक गतिविधि का ना होना, होना भी तो नहीं के समान। बस एक ही जगह पड़े रहना और खाते रहना। 

8. छाती में किसी प्रकार की रेडिएशन थेरेपी।

9. हृदय के वाल्व खराब होना।

10. धूम्रपान करना।

11. बहुत अधिक शराब का सेवन करना। नशीली दवाऐं, ड्रग्स आदि लेना।

हार्ट अटैक के लक्षण – Symptoms of Heart Attack

हमने ऊपर बताया है कि शरीर की कार्य प्रणाली में व्यवधान आने पर शरीर हमें संकेत देता है बीमार पड़ने के बारे में। हार्ट अटैक में भी यह सिद्धान्त लागू होता है। हार्ट अटैक से कई महीने या कई सप्ताह पहले हमें संकेत मिलने लगते हैं अर्थात् शरीर में कुछ लक्षण प्रकट होने लगते हैं जिनको समझना बहुत जरूरी है। ये संकेत/लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं –

1. सूजन (Swelling)-  जब हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता तो शरीर के सभी अंगों में रक्त पहुंचाने के लिये हृदय को बहुत अधिक मेहनत से पम्पिंग करनी पड़ती है। जिससे रक्त शि‍राएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन बढ़ जाती है। इसका सीधा प्रभाव हाथ, पैरों पर पड़ता है। हाथ, एड़ी, पैर के पंजों और दूसरे हिस्सों में भी सूजन आ जाती है। यदि ऐसे लक्षण प्रकट होते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये। 

2. थकान (Fatigue)- किसी काम को करने के बाद थकावट होना एकदम सामान्य बात है लेकिन बिना किसी मेहनत के बिना कोई काम करे लंबे समय तक थकावट रहती है तो निश्चित रूप से यह सामान्य बात नहीं। जब कोई व्यक्ति हर समय बहुत ज्यादा थकान महसूस करने लगे चाहे वह कोई शारीरिक गतिविधि करे या ना करे, कोई काम करे या ना करे, आराम करने पर भी उसकी थकावट खत्म ना हो, ऊर्जा की निरन्तर कमी बनी रहे तो ये क्रोनिक फ़टीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome) के लक्षण हो सकते हैं। यह बात हमने अपने पिछले आर्टिकल “शारीरिक कमजोरी दूर करने के उपाय” में बताई है। ये लक्षण शारीरिक कमजोरी के अतिरिक्त संभावित हार्ट अटैक की ओर संकेत करते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये। 

3. चक्कर आना (Dizziness)- हृदय कमजोर होने पर उसकी पम्पिंग क्षमता भी कम हो जाती है और रक्त संचार भी कम होता है। परिणामस्वरूप, मस्तिषक में पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में सिर में दर्द रहने लगता है और चक्कर आने लगते हैं। ऐसे लक्षण को हल्के में ना लें। डॉक्टर से परामर्श करें।  

4. कंधों में दर्द (Shoulder Pain)- यदि हाथ, बाजू के अतिरिक्त, कमर में या कंधों में लगातार दर्द रहता है तो यह संभावित हार्ट अटैक की चेतावनी हो सकती है। इसे इग्नोर ना करें। 

5. जबड़े में दर्द होना (Jaw Pain)- जबड़े या दांत में दर्द होना सामान्य हो सकता है यदि इनमें पहले से ही कोई प्रोबलम चल रही है तो, वर्ना बिना किसी समस्या के इनमें दर्द होना हार्ट अटैक से पहले की चेतावनी हो सकती है। 

6. सांस लेने में कठिनाई (Difficulty Breathing)- फेफड़ों को उचित मात्रा में ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति में बाधा आने से श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। सांस लेने में कठिनाई या कमी या कोई अन्य परिवर्तन महसूस होता है तो यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये। 

7. बहुत अधिक पसीना आना (Sweating Profusely)- गर्मियों में पसीना आना सामान्य है लेकिन अचानक से घर में कम तापमान में बैठे हुऐ भी बहुत अधिक पसीना आ जाये या सर्दियों में सामान्य से अधिक पसीना आ जाये तो निश्चित रूप से यह बेहद खतरनाक लक्षण है। यह हार्ट अटैक का साफ़ लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें। 

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8. असामान्य धड़कन (Abnormal Heartbeat)- नर्वस या एक्साइटेमेंट या किसी और स्थिति में हृदय की धड़कन तेज हो जाना सामान्य बात है जोकि थोड़ी देर में ठीक हो जाती है जैसे कि कुछ लोगों की धड़कन अस्पताल में जाते ही बढ़ जाती है चाहे वे मरीज के साथ ही गये हों। फिर यह धड़कन धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है। या फिर कोई डरावनी या खतरनाक मूवी देख रहे हों तो धड़कन बढ़ जाती है या क्रिकेट मैच के रोमान्चक मोड़ पर। परन्तु ये सब क्षणिक होता है। लेकिन यदि हृदय की धड़कन देर तक बनी रहे और कंट्रोल में ना पाये तो निश्चित रूप से यह हृदय के लिये गंभीर स्थिति है और इसमें डॉक्टरी उपचार की आवश्यकता होती है। 

9. सीने में असहजता (Chest Discomfort)- सीने में असहजता महसूस करना एक प्रमुख लक्षण है हार्ट अटैक आने का। सीने में जलन महसूस करना, दबाव या कोई परिवर्तन जो असुविधाजनक लगे या सीने में लगातार दर्द, चुभन जो जल्दी से खत्म ना हो, ये सब हार्ट अटैक आने के लक्षण  हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

प्राथमिक उपचार – First Treatment

यदि किसी को हार्ट अटैक आया है तो प्राथमिक उपचार देने की कोशिश करनी चाहिये। मुम्बई के ज़ेन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ।नारायण गाडकर का कहना है कि, “दिल का दौरा पड़ने पर मरीज़ को यदि तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाये, तो उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती हैं”। प्राथमिक उपचार के लिये करें निम्नलिखित काम –

1. यदि मरीज लेटना चाहता है उसे लिटायें, उसी के अनुसार उसे आरामदायक अवस्था में रखें। 

2. मरीज के आसपास घेरा बनाकर खड़े ना हों, उसे हवा आने दें ताकि उसे घुटन ना हो। 

3. उसके कपड़ों को ढीला करें। ऐसा करने से वह  आराम से सांस ले सकेगा। 

4. एस्प्रिन की गोली दें – हार्ट अटैक में मरीज की जान बचाने के लिये एस्प्रिन की गोली रामबाण उपाय है। ऐस्प्रिन चूसने से हार्ट अटैक में मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है। यह खून के थक्के नहीं बनने देती। मरीज के मुंह में एस्प्रिन की गोली डालें और उसे चूसने को कहें। यदि मरीज बेहोश है तो भी एस्प्रिन की गोली उसके मुंह में डाल दें, यह अपने आप घुलती रहेगी। डॉ। नारायण गाडकर का कहना है कि ,”मैं हमेशा एस्प्रिन घर पर रखने की सलाह देता हूं। एस्प्रिन अधिकांश मामलों में कारगर उपाय साबित होती है”

5. यदि मरीज की हृदयगति रुकी हुई है तो उसे सीपीआर  का उपचार दें यानी अपने दोनों हाथों की हथेलियों से उसके सीने को दबायें। सांस में दिक्कत होने पर अपने मुंह से कृत्रिम सांस दें। इस बारे में आपको पूरी जानकारी हमारे पिछले आर्टिकल सीपीआर क्या है में मिल जायेगी।

6. पानी पिलायें – यदि मरीज होश में है तो उसे हल्का ठंडा पानी दें और धीरे-धीरे पीने को कहें। यदि होश में नहीं है तो चम्मच से उसके मुंह में पानी डालने की कोशिश करें। पानी ऐसी हालत में अमृत का काम करेगा। 

7. एम्बुलेंस का इंतजार न करें – यह सबसे महत्वपूर्ण है कि एम्बुलेंस का इंतजार न किया जाये बल्कि अपनी गाढ़ी से या टैक्सी, कैब, ऑटोरिक्शा से मरीज को जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचायें क्योंकि एक-एक पल मरीज की जान बचाने के लिये बहुत कीमती होता है। 

हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय – Home Remedies to Prevent Heart Attack

दोस्तो, यहां देसी हैल्थ क्लब स्पष्ट करना चाहता है कि निम्नलिखित घरेलू उपाय केवल हार्ट अटैक से बचाव के लिये हैं ताकि इसकी कोई संभावना ही ना बने, ना कि हार्ट अटैक के उपचार। हार्ट अटैक का उपचार केवल डॉक्टरी चिकित्सा ही है। 

1. हल्दी (Turmeric)- दोस्तो, हल्दी मसाले के साथ-साथ एक आयुर्वेदिक औषधी भी है जो एंटीबायोटिक और  एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है। हल्दी को ‘प्राकृतिक एस्पिरिन’ कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को खत्म करते हैं। हार्ट अटैक आने पर प्राथमिक उपचार के तौर पर एस्पिरिन की गोली दी जाती है जिससे मृत्यु दर 15 प्रतिशत कम हो जाती है। यही गुण हल्दी में मिलता है। यह कोलेस्ट्रॉल स्तर में संतुलन बनाये रखती है और डायबिटीज को भी कंट्रोल करती है। प्रतिदिन 500 मिलीग्राम हल्दी का सेवन करना चाहिये, यह रक्त को पतला करने का काम करती है। इससे रक्त के थक्के नहीं बनते।  हल्दी की कुछ गांठें चार दिन के लिये चूने के पानी में भिगोकर रख दें। बाद में इनको निकाल कर सुखाकर अच्छी तरह बारीक पीस लें। इस चूर्ण की एक-एक ग्राम मात्रा सुबह और शाम गुनगुने पानी से ले लें। इससे हार्ट अटैक की संभावना खत्म हो जायेगी और यदि रक्त की   धमनियों में कुछ ब्लॉकेज है तो वह खुल जायेंगी। 

दोस्तो, हम जानते हैं कि आज की व्यस्त ज़िन्दगी में किसी के पास इतना समय नहीं है कि वो चार दिन तक इंतजार करेगा फिर उनको सुखायेगा और पीसेगा इसी लिये इसके विकल्प स्वरूप दूसरा बेहद सरल उपाय है कि रात को गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीया जाये। यदि किसी को दूध पीने में भी परेशानी है तो वह सादा पानी के साथ हल्दी पाउडर का सेवन कर सकता है। 

2. लहसुन (Garlic)- हल्दी के ही समान लहसुन भी आयुर्वेदिक औषधी की श्रेणी में आता है। बढ़े हुऐ कोलेस्ट्रॉल को कम करने का सर्वोत्तम उपाय। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हार्ट से सम्बंधित बीमारियों का सबसे बड़ा कारण होता है। लहसुन में एलिसिन नामक एंटी-ऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है। भोजन में लहसुन का उपयोग तो होता ही है, इसकी दो कच्ची कलियां भी रोजाना खाइये। हार्ट अटैक के कारक अपने आप ही खत्म हो जायेंगे।  

3. धनिया के बीज (Coriander Seeds)- धनिया के बीजों एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं। ये कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने और रक्त प्रवाह में सुधार लाने में मदद करते हैं और फ्री रेडिकल्स से हृदय को सुरक्षित रखने का काम करते हैं।

4. दालचीनी (Cinnamon)- दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटिक, एंटीइंफ्लामेटरी गुण मौजूद होते हैं। दालचीनी को हार्ट डिजीज़ से बचाव के लिये महत्वपूर्ण माना है क्योंकि इसमें पाये जाने वाले घटक सिनामलडिहाइड (Cinnamaldehyde) और सिनामिक एसिड कार्डियो प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। इससे रक्त प्रवाह में सुधार होता है रक्त के थक्के नहीं बनते। प्रतिदिन छह ग्राम तक दालचीनी का सेवन कर लेना चाहिये। इससे खराब कोलेस्ट्रॉल एलडीएल, सीरम ग्लूकोज, ट्राइग्लिसराइड (रक्त में मौजूद एक प्रकार की वसा) और टोटल कोलेस्ट्रॉल के स्तर कम हो कर हृदय संबंधी रोगों, हार्ट अटैक आदि से बचाव होगा।

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5. अदरक (Garlic)- अदरक का हाइपोटेंसिव प्रभाव, ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है। इसके एंटीइन्फ्लामेट्री गुण सूजन कम करते हैं और इसमें मौजूद अन्य गुण मुक्त कणों का प्रभाव को कम करते हैं, रक्त जमने की प्रक्रिया को रोकते हैं अर्थात् अदरक खून के थक्के नहीं बनने देती और कॉलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करते हैं। अदरक से मिलने वाले प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम के जैसे तत्व शरीर की सभी जरूरतों को पूरा करते हैं। अदरक फैट बर्नर के रूप में काम करती है। कुल मिलाकर अदरक हृदय के अनेक रोगों, अटैक आदि से रक्षा करती है। 

6. नींबू  (Lemon)- नींबू विटामिन-सी का बेहतरीन श्रोत है। विटामिन-सी स्वयं एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। रोजाना खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीने से फैट बर्न होता है जिससे वजन कम होता है। नींबू एंटीकैंसर, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से भी भरपूर होता है। नींबू में  पाये जाने वाला फ्लेवोनोइड, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, हाइपरलिपिडेमिया यानी खून में जमा फैट, सूजन को कम करने, धमनी रक्तचाप और लिपिड चयापचय में सुधार करने का काम करता है। यह फ्लेवोनोइड एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में प्लाक जमना) के उपचार में भी मदद करता है। नींबू  कॉलेस्ट्रॉल लेवल और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। कुल मिलाकर नींबू के सेवन से हृदय सुरक्षित रहता है और हार्ट अटैक की संभावना भी कम रहती है। 

7. शहद (Honey)-  शहद यानी प्राकृतिक मिठास का सर्वोत्तम श्रोत है जिसमें विटामिन्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्निशियम तत्व मौजूद होते हैं। इसे देवताओं का अमृत भी कहा जाता है। यह हार्ट के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।  शहद में पाये जानेवाले एंटीडायबिटिक और हाइपोग्लाइसेमिक गुण रक्त में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को कम कर डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। शहद में पाये जाने वाला क्वेरसेटि नामक फ्लेवोनोइड रक्तचाप को नियंत्रित करता है, फ्लेवोनोइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। एक शोध के अनुसार शहद में क्वेरसेटिन, कैफिक एसिड फेनिथाइल एस्टर जैसे कई फेनोलिक कंपाउंड भी होते हैं। शहद के सभी आवश्यक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट गुण हृदय संबंधी रोगों के  उपचार में सहायक होते हैं। अटैक आदि से रक्षा करते हैं। शहद का सेवन अनेक प्रकार से कर सकते हैं जैसे नींबू पानी में मिलाकर, दूध में मिलाकर या चीनी के विकल्प के रूप में। 

8. आँवला (Amla)- विटामिन-सी से भरपूर आँवला में गैलिक एसिड (Gallic Acid), गेलोटेनिन (Gallotannin), एलेजिक एसिड (Ellagic Acid) और कोरिलागिन (Corilagin) नामक एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये शरीर में मुक्त कणों के प्रभाव को खत्म करते हैं और एंटी-डायबिटिक प्रभाव भी छोड़कर ब्लड शुगर को नियंत्रित करते हैं। आँवला के एंटीओबेसिटी गुण मोटापे की समस्या से छुटकारा दिलाते हैं। इंडियन जर्नल ऑफ फार्मेकोलोजी की एक शोध के अनुसार आँवला का सेवन बढ़े हुए लिपिड को कम करने के साथ-साथ बढ़े हुए रक्तचाप को भी कम करने में मदद कर सकता है। ये दोनों ही हृदय के जोखिम भरे कारक हैं। इसलिये हृदय संबंधी खतरों विशेषकर हार्ट अटैक को कम करने और हृदय को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिये आँवला का सेवन करें। आँवला का सेवन आप जूस के रूप में, मुरब्बा, अचार और चूर्ण के रूप में कर सकते हैं।  वैसे सूखा आँवला और मिस्री को बराबर मात्रा में पीसकर प्रतिदिन एक चम्मच पानी के साथ सेवन करें। इससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है। 

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9. सेब का सिरका (Apple Vinegar)- एक-एक चम्मच सेब का सिरका, शहद, सौंफ का अर्क और आधा चम्मच तुलसी का रस एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीयें।  बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हृदय की अनियमित धड़कन, ब्लॉकेज, सीने का दर्द और सांस फूलने जैसी समस्या में कुछ दिनों में ही आराम आ जायेगा।  इसे दो महीने से अधिक ना लें।  

10. प्रतिदिन तुलसी की पांच पत्तियां और पुदीने की पांच पत्तियां खायें। इससे हृदय की धमनियों में रुकावट (Blockage) नहीं आयेगी। इससे रक्त का रोज़ाना खाने से रक्त की हाइड्रोजन क्षमता  (Potential of Hydrogen –  PH ) का स्तर सामान्य रहेगा। इससे हार्ट अटैक से बचाव भी होगा। 

हार्ट पेशेंट को क्या खाना चाहिये? – What Should a Heart Patient Eat?

हार्ट पेशेंट को वसा रहित या बहुत कम वसा वाले, प्रोटीन युक्त खाद्य/पेय पदार्थ लेने चाहियें, जैसे कि – 

1 . अनाज – गेहूं, जौ, मटर, पुराना चावल, ओट्स, सोयाबीन।

2. दालें – मसूर दाल, मूंग दाल, अरहर दाल।

3. सब्जियां – बीन्स, तोरई, लौकी, परवल, करेला, कद्दू, आलू, टमाटर, पालक, टिण्डा, मेथी, गाजर, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, ब्रोकली।

4. मसाले – हल्दी, लहसुन, दालचीनी, जीरा, हरा धनिया, इलायची।

5. फल – सेब, अंगूर, काला अंगूर, अनार, अमरुद, नाशपाती, केला, चेरी, स्ट्रॉबेरी, खुबानी।

6. ड्राई फ्रूट्स – अख़रोट, अंजीर।

7. डेयरी उत्पाद – कम वसा वाले डेयरी पदार्थों का सेवन करें जैसे कम वसा वाला दूध, सादा दही, छाछ, नमकीन लस्सी, पनीर। 

हार्ट पेशेंट को क्या नहीं खाना चाहिये? – What Should a Heart Patient not Eat?

हार्ट पेशेंट को निम्नलिखित पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिये – 

नया चावल, बासी खाना, मैदा, उड़द दाल, बथुआ, अरबी, कटहल, बैंगन, चौलाई, शकरकंद, सिंगाड़ा, अचार, उपयोग किया हुआ तेल, घी, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, सॉस, तली सब्जियां, खोया, मलाई, मक्खन, नारियल का तेल, तीखा तेज मिर्च मसाले वाला भोजन,  फास्ट फूड, जंकफूड, बिस्कुट, अंडा, मांस, मछली, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, ज्यादा मिठाई, ज्यादा चाय और कॉफी, शराब, धूम्रपान, खैनी, गुटखा, नशीली वस्तुऐं आदि। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हार्ट क्या है, हार्ट अटैक क्या होता है, हार्ट अटैक और सीने के दर्द में अंतर, हार्ट अटैक के कारण, हृदय की धमनियों में रुकावट के कारण, हार्ट अटैक के लक्षण और प्राथमिक उपचार, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको हार्ट अटैक से बचाव के घरेलू उपाय बताये और यह भी बताया कि हार्ट पेशेंट को क्या खाना चाहिये और क्या नहीं खाना चाहिये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हार्ट क्या है, हार्ट अटैक क्या होता है, हार्ट अटैक और सीने के दर्द में अंतर, हार्ट अटैक के कारण, हृदय की धमनियों में रुकावट के कारण, हार्ट अटैक के लक्षण और प्राथमिक उपचार, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · September 18, 2021 at 2:57 am

Perfect Article

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