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दोस्तो, व्यंजनों में विशेषकर भारतीय व्यंजनों में उनमें भी  खासकर कढ़ी, दाल आदि में तड़के का बहुत महत्व होता है। तड़कों में अक्सर जीरा, प्याज, अदरक, लहसुन, मेथी का तड़का लगाया जाता है, परन्तु एक वस्तु ऐसी है जिसका तड़का अधिकतर दालों में और कढ़ी में लगाया जाता है, और ये वस्तु है “हींग”। तड़का, ना केवल अपनी खुश्बू खाने में मिक्स करता है बल्कि खाने के स्वाद और पौष्टिकता को भी बढ़ाता है। जहां तक हींग की बात है तो समझिये कि खुश्बू और पौष्टिकता के अतिरिक्त भोजन से होने वाली अवांछनीय और हानिकारक प्रतिक्रियाओं से शरीर की रक्षा करती है। इसे हम कुछ इस तरह कह सकते हैं कि जैसे काली दाल (उड़द की दाल), मूली की भूजी, कढ़ी आदि से जो पेट में गैस बनती है, वह नहीं बनेगी। हींग का उपयोग अन्य वस्तुओं जैसे जीरा,लहसुन आदि की तरह चम्मच भर कर नहीं किया जाता बल्कि हींग की एक चुटकी से भी कम मात्रा ही अपना चमत्कार दिखाती है। इसका सेवन करना स्वास्थ के लिये अत्यंत लाभदायक होता है, मगर कैसे? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “हींग के फायदे और नुकसान”। देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको हींग के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि हींग के क्या फायदे होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि हींग क्या है और हींग कैसे बनाई जाती है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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हींग के फायदे और नुकसान
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हींग क्या है? – What is a Asafoetida

दोस्तो हींग कोई फूल या फल नहीं है बल्कि हींग के पौधै के तने और जड़ से निकलने वाले शुष्क रस का संसाधित (Processed) रूप है जो व्यंजनों विशेषकर दाल में खुश्बू और स्वाद बढ़ाने के काम आती है। इसका तड़का लगाया जाता है या पानी में धोलकर ऐसे ही मिला दिया जाता है।

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हींग का वानस्पतिक नाम फेरुला एसाफिटिडा (Ferula Asafetida) है और इसे अंग्रेजी में Asafoetida  कहा जाता है। यह सौंफ़ की प्रजाति है और यह ईरानी मूल का पौधा है। इसका पौधा लगभग एक मीटर से दो मीटर तक ऊंचा हो जाता है। इसका पौधा कई वर्षों तक हरा भरा रहता है और इसमें से भी खुश्बू आती है। बीज बोने के चार से पांच साल बाद ही वास्तविक उपज मानी जाती है अर्थात् एक पौधे से लगभग आधा किलो हींग बनाई जा सकती है। 

हींग कैसे बनाई जाती है? – How is Asafoetida Made?

दोस्तो, पौधे से हींग प्राप्त करने के लिये कम से कम चार साल तक इंतजार करना पड़ता है। बीज बोने के बाद चार से पांच साल बाद इसकी वास्तविक उपज बनती है यानी पौधा इस लायक हो जाता है कि इससे रस निकाला जा सके। मार्च से अगस्त के महीने में इसके तने और जड़ में चीरा लगाकर रस प्राप्त किया जाता है, फिर इसमें स्टार्च और खाने वाला गोंद मिलाकर इसको process किया जाता है और छोटे-छोटे टुकड़ों में तैयार करके हींग का रूप देकर बाजार में भेज दिया जाता है। 

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हींग की खेती कहां होती है? – Where is Asafoetida Cultivated?

1. दोस्तो, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पूरी दुनियां में हींग की खपत, भारत में 40 प्रतिशत होती है, इसके बावजूद भारत में हींग की खेती बेहद कम होती है। हींग की जन्मस्थली ईरान को माना जाता है।

2. हींग की खेती ईरान, अफ़गानिस्तान, तुर्किस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, रूस और सीरिया में होती है।

3. भारत में कश्मीर और पंजाब के कुछ हिस्सों में, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और सिरमौर क्षेत्र में हींग की खेती की जाती है। 

हींग इतनी महंगी क्यों है? – Why is Asafoetida so Expensive?

भारत में हींग का बाजार भाव 11000/- रुपये से लेकर 35000/- रुपये के बीच है। जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि हींग की मांग (Demand) यानी खपत बहुत अधिक है लगभग 40 प्रतिशत और उत्पादन (Production) यानी खेती, नहीं के बराबर। अतः डिमांड पूरी करने के लिये भारत को हींग, ईरान, अफगानिस्तान और उज्बेकिस्तान से निर्यात करना पड़ता है। इसीलिये हींग मंहगी है। सबसे ज्यादा हींग अफ़गानिस्तान से मंगवाई जाती है। अफ़गानिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान से कच्चा माल यानी रेजीन (दूध) भी आता है जिसे हींग में बदलने प्रोसेस उत्तर प्रदेश के हाथरस में होता है जो कि हींग निर्माण का एक विशाल केंद्र है।  

हींग के प्रकार – Types of Asafoetida

दोस्तो, वैसे तो पूरे विश्व में हींग की लगभग 130 किस्में पाई जाती हैं मगर हींग दो प्रकार की होती  है –

1. हींग काबुली सफेद – यह पानी में घुल जाती है। सफेद और पीले पानी में।

2. हींग लाल या काला – यह तेल में घुलती है, गहरे और काले रंग वाले तेल में। 

हींग के गुण – Properties of Asafoetida

1. हींग की तासीर गर्म होती है।

2. कच्ची हींग का स्वाद लहसुन के स्वाद जैसा तीखा होता है।

3. हींग का स्वाद तीखा और कड़वा होता है।

4. इसकी खुश्बू बहुत तेज होती है जो अच्छी नहीं लगती।

5. हींग हवा के सम्पर्क में आते ही जल्द खराब हो जाती है।

6. हींग में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीकैंसर, एंटीइंफ्लेमटरी, एंटीट्यूमर, एंटी वायरल, एंटी बेक्टिरियल, एंटीस्पास्मोडिक और दर्द निवारक (Analgesic) गुण होते हैं। 

7. हींग में फास्फोरस, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन, केरोटीन, नियासिन आदि जैसे खनिज मौजूद होते हैं। 

8. हींग के पोषण तथ्य –

(मात्रा प्रति 100 ग्राम, सेवारत (लगभग))

कैलोरी                       369.9 किलो कैलोरी

प्रोटीन                        8.64 ग्राम.

टोटल फैट                   3.98 ग्रा.

कैल्शियम                    304.2 मि.ग्रा.

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फास्फोरस                   50 मि.ग्रा.

डायटरी फाइबर            5.86 ग्रा.

आयरन                       2.42 मि.ग्रा.

मैंगनीज                      1.1 मि.ग्रा.

सोडियम                     51.4 मि.ग्रा.

कॉपर                         0.4 मि.ग्रा.

जिंक                          0.8 मि.ग्रा.

नियासिन                    0.3 मि.ग्रा.

हींग का उपयोग  – Use of Asafoetida

हींग का मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है विशेषतौर पर तड़का लगाने के लिये जैसे जीरे का तड़का लगाया जाता है। इसका उपयोग निम्न प्रकार किया जाता है –

1. कढ़ी, दालों तथा अन्य पानी वाली सब्जियों में तड़के के रुप में या पानी में घोलकर मिलाने के रूप में।

2. अनेक प्रकार के सॉस तथा अचारों में खुश्बू के लिये।

3. एंटीबायोटिक गुणों के कारण दवाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

4. हींग की गोलियां और कैप्सूल भी बनते हैं। 

असली और नकली हींग की पहचान – Identification of Real and Fake Asafoetida

दोस्तो, अब बताते हैं आपको असली और नकली हींग की पहचान करने के तरीके जो निम्न प्रकार  हैं –

1. हींग को पानी में घोलने पर यदि इसका रंग दूध की तरह सफेद हो जाये तो यह असली हींग है, अन्यथा नकली।  

2. हींग को जलाकर देखिये, यदि यह आसानी से जल जाती है और चमकदार लौ निकलती है तो यह असली है। यदि हींग को जलने में समय लगता है तो समझिये कि यह नकली है।

3. हींग को थोड़ी देर हाथ में रखिये फिर वापस रख दीजिये, आपके हाथ से बहुत तेज खुश्बू आयेगी और जो कि बहुत देर तक रहेगी। फिर हाथ धो लीजिये, हाथ धोने पर भी हाथ से यदि हींग की खुश्बु आती है तो समझिये कि यह असली है। नकली हींग की खुश्बू ज्यादा तेज नहीं होगी और हाथ धोने पर यह तुरन्त खत्म हो जायेगी। 

4. असली हींग का हींग का रंग हल्‍का भूरा होता है। यदि इसे घी में डाला जाये तो डालते ही इसका रंग भूरे से हल्‍का लाल हो जायेगा और यह फूलने लगेगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो समझिये कि हींग नकली है।

हींग की मात्रा – Amount of Asafoetida

1. सामान्यतः घर परिवार के लिये बनने वाले भोजन के लिये एक या दो ग्राम हींग ही काफी होती है।

2. समारोह आदि में बनने वाले भोजन की मात्रा के आधार पर हींग की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

3. किसी रोग के उपचार के लिये हींग की मात्रा  चिकित्सक की सलाह के अनुसार लें।

हींग के फायदे – Health Benefits of Asafoetida

दोस्तो, अब बताते हैं आपको हींग के फायदे जो निम्नलिखित हैं –

1. पेट के लिये फायदेमंद (Beneficial for Stomach)- हींग का सबसे मुख्य फायदा पेट के लिये होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-फ्लैटुलेंट गुण मौजूद होते हैं।  पेट की समस्याओं जैसे अपच, गैस बनना, पेट फूलना, पेट में कीड़े, इर्रिटेबल आंत्र सिंड्रोम से छुटकारा दिलाती है। यह फूड पोइज़निंग को भी खत्म करती है। पेट के लिये यह एक बेहतरीन औषधी है। दाल, कढ़ी आदि में हींग का इस्तेमाल मसाले के तौर पर करें। इसके अतिरिक्त एक गिलास पानी में हींग के कुछ टुकड़े पानी में अच्छी तरह घोल कर रोजाना भोजन के बाद पीयें। 

2. सिर दर्द में फायदा (Headache Relief)- भगदौड़ भरी जिन्दगी और तनाव के कारण सिर में दर्द होना एक आम समस्या है। यदि किसी को माइग्रेन है तो समस्या और भी बढ़ जाती है। हींग में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को कम करते हैं और हींग के गुण रक्त प्रवाह को भी बढ़ाने में मदद करते हैं और सिर दर्द को दूर करते हैं। इसके लिये डेढ़ कप पानी में थोड़ी सी हींग डालकर उबाल लें। इस पानी को दिन में दो, तीन बार पीयें, निश्चित रूप से सिर दर्द खत्म हो जायेगा। 

3. दांत दर्द में आराम दिलाये (Relieve Toothache)- हींग में दर्द निवारक एनालजेसिक (analgesic) गुण पाये जाते हैं जो दर्द को खत्म करने में मदद करते हैं।  हींग के एंटीबैक्टीरियल गुण दांतों में सड़न से बचाव का काम करते हैं। हींग दांत दर्द की दवा के रूप में काम करते हुऐ दांत दर्द से राहत दिलाती है।

इसके लिये आधा चम्मच हींग को एक चम्मच नींबू के रस में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को रुई की मदद से दर्द वाले दांत पर लगायें। इससे तुरंत आराम लगेगा। नींबू ना हो तो सादा पानी के साथ ही पेस्ट बनाकर लगायें। मसूड़ों से खून निकलना, संक्रमण, दांत की अन्य समस्या के लिये एक कप पानी में थोड़ी सी हींग और कुछ लौंग उबाल कर इसे गुनगुना होने तक ठंडा कर लें, इस पानी से कुल्ला करें।

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4. कान दर्द में फायदेमंद (Beneficial in Earache)- संक्रमण से होने वाले कान दर्द और सूजन को खत्म करने में हींग के एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक गुण मदद करते हैं। कान दर्द की स्थिति में नारियल का तेल गर्म करके इसमें हींग का छोटा सा टुकड़ा डाल दें और इसे घुलने दें। इसे बहुत हल्का गुनगुना होने तक (सहन करने लायक) ठंडा होने दें, फिर इसकी दो, तीन बूंदें कान में डालें। कान दर्द में आराम आ जायेगा। 

5. श्वसन प्रणाली के लिये फायदेमंद (Beneficial to the Respiratory System)- श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, शुष्क खांसी, काली खांसी और सर्दी आदि से छुटकारा दिलाने के लिये हींग के एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल और एंटीबायोटिक गुण अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। हींग एक श्वसन उत्तेजक के रूप में कार्य करते हुऐ कफ को बाहर निकालती है और सीने की जकड़न से राहत दिलाती है। श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिये डेढ़ चम्मच हींग पाउडर, डेढ़ चम्मच सूखी अदरक का पाउडर और शहद के दो चम्मच मिलाकर एक मिश्रण बना लें और दिन में दो, तीन बार सेवन करें।

6. कीड़े के काटने का उपचार (Insect Bite Treatment)- कई बार मधुमक्खी या ततैया डंक मार देता है या अन्य कोई कीड़ा काट लेता है जिससे भयंकर दर्द होता है और सूजन भी बहुत अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में हींग जहरीले प्रभाव को कम करती है, सूजन को खत्म करती है और दर्द से राहत दिलाती है। इसके लिये हींग पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगायें। जलन और दर्द में तुरन्त आराम आने लगेगा। इसे दिन में कई बार लगायें। 

7. ब्लड प्रेशर कम करे (Reduce Blood Pressure)- जिन लोगों का ब्लड प्रेशर हाई रहता है उनके लिये हींग वरदान है मगर लो ब्लड प्रेशर वालों के लिये यह हानिकारक है। हींग ब्लड प्रेशर को कम करती है। हींग खून को प्राकृतिक रूप से पतला करने का काम भी करती है, यह एक प्रकार से प्राकृतिक थिनर है। हींग में पाये जाने वाला कोमेरिन नामक तत्व रक्त के प्रवाह को बढ़ाने और सुचारू बनाने में मदद करता है जिससे खून के थक्कों को जमने से रोका जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों का हींग का रोजाना सेवन करना चाहिये। इसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करके इसका सेवन करें। 

8. शूल दर्द के लिये  (for Colic)- नवजात शिशुओं में शूल दर्द (colic pain) या पेट दर्द अक्सर होता ही रहता है जोकि आम बात है परन्तु इसका उपचार तो आवश्यक है। ऐसे में हींग मददगार बनकर आती है जो गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट की लाइनिंग म्यूकस मेम्ब्रेन को शांत करके शिशुओं को शूल दर्द से राहत दिलाती है।

यदि बच्चे का पेट टाइट है और फूला हुआ है, तो समझिये कि वह गैस से पीड़ित है। इस स्थिति में हल्के गर्म पानी के साथ हींग का पतला पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बच्चे की नाभि के आसपास लगा दें और इस बात का ध्यान रखें कि यह पेस्ट बच्चे की नाभि में ना जाये। बच्चे को आराम आ जायेगा। एक बात का और ध्यान रखें कि बच्चों के कभी पानी में हींग घोलकर ना पिलायें। 

9. पुरुषों की यौन समस्याओं में फायदेमंद  (Beneficial in Sexual Problems of Men)-  पुरुषों की यौन समस्याओं के उपचार में हींग वरदान है। इसका उपयोग नपुंसकता (Erectile Dysfunction) शीघ्रपतन, शुक्राणुओं की कमी, काम शक्ति और काम क्षमता की कमी के उपचार में किया जाता रहा है। इन समस्याओं के निवारण के लिये एक चौथाई चम्मच हींग पाउडर को घी में फ्राई कर लें, फिर इसमें आधा चम्मच बरगद के पेड़ के ताजा दूध (Latex) और थोड़ा सा शहद मिलाकर प्रतिदिन 40 दिन तक सेवन करें। 

10. मासिक धर्म में फायदेमंद(Beneficial in Menstruation) – हींग महिलाओं के लिये भी वरदान स्वरूप है। मासिक धर्म की अनियमितता, भारी रक्तस्राव, पेट में ऐंठन, असहनीय दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। हींग प्रोजेस्टेरोन स्राव को बढ़ाने और सामान्य रक्त प्रवाह को बढ़ावा देने में मदद करती है। एक कप छाछ में एक चुटकी भर हींग पाउडर, एक चम्मच मेथी पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाकर पीयें। पीरियड के समय होने वाले दर्द और असुविधा को कम करने के लिये हर महीने दो या तीन बार इसे पीयें। विकल्प स्वरूप एक गिलास पानी के साथ एक चुटकी हींग को मिलाकर भी पी सकती हैं। 

हींग के नुकसान – Side Effects of Asafoetida

दोस्तो, हींग के फायदों के बाद अब हींग के नुकसान पर भी गौर कर लेते हैं। हींग के ज्यादा सेवन करने से हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. ज्यादा सेवन से एलर्जी हो सकती है, त्वचा पर रैशेज़ पड़ सकते हैं।

2. होंठों में असामान्य रूप से सूजन हो सकती है।

3. पेट में जलन, हो सकती है, गैस बन सकती है, दस्त लग सकते हैं, उल्टी मितली की शिकायत हो सकती है।

4. यद्यपि हींग सिर दर्द के उपचार में लाभकारी होती है परन्तु इसका हद से ज्यादा सेवन सिर दर्द और चक्कर का कारण बन सकता है।

5. जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कम रहता है उनको हींग के  सेवन से बचना चाहिये क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को और कम कर सकती है। 

6. गर्भवती महिलाओं को हींग के सेवन से बचना चाहिये। हींग का सेवन गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है जिससे गर्भपात होने की संभावना रहती है। 

7. शिशु को स्तनपान कराने वाली माताओं को भी हींग के सेवन से बचना चाहिये। हींग दूध के माध्यम से शिशु को प्रभावित कर सकती है। मां द्वारा खाया गया हींग और अधिक मसालेदार भोजन, मां के दूध की स्थिति को बिगाड़ देता है जिससे शिशु की तबीतय बिगड़ सकती है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने हींग के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हींग क्या है, हींग कैसे बनाई जाती है,  हींग की खेती कहां होती है, हींग इतनी मंहगी क्यों है, हींग के प्रकार, हींग के गुण, हींग का उपयोग, असली और नकली हींग की पहचान और हींग की मात्रा, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से हींग के बहुत सारे फायदे बताये और कुछ नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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हींग के फायदे और नुकसान
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने हींग के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हींग क्या है, हींग कैसे बनाई जाती है,  हींग की खेती कहां होती है, हींग इतनी मंहगी क्यों है, हींग के प्रकार, हींग के गुण, हींग का उपयोग, असली और नकली हींग की पहचान और हींग की मात्रा, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया है।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · August 30, 2022 at 10:38 pm

It’s unique topic and unique Article.

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