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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, वैसे तो सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया होती है लेकिन यह जटिलता उस समय और बढ़ जाती है जब शरीर में कोई अंग प्रत्यारोपित करना हो। यह बेहद जोखिम भरी, चुनौतीपूर्ण और जटिल सर्जिकल प्रक्रिया होती है जैसे लिवर ट्रांसप्लांट करना, हार्ट ट्रांसप्लांट करना आदि। ट्रांसप्लांट वाले मामलों में अस्वीकरण (Rejection) की संभावना भी बनी रहती है। फिर भी कोई अन्य विकल्प ना होने के कारण यह जोखिम उठाना पड़ता है, अंग ट्रांसप्लांट किये जाते हैं, हमेशा सकारात्मक सोच और उद्देश्य के साथ। देसी हैल्थ क्लब आज आपको एक ऐसे ही अंग प्रत्यारोपण के बारे में  जानकारी देगा। दोस्तो, मनुष्य के आंतरिक अंगों में एक अंग ऐसा है जो जोड़े में होता है और ये दोनों मिलकर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इनमें से यदि एक खराब होने लगे तो दूसरा काम संभालता है। परन्तु जब दोनों ही हद से ज्यादा खराब होकर अंतिम चरण में पहुंच जायें तो इनमें से एक को, किसी अन्य व्यक्ति से लेकर बदलना पड़ता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं गुर्दों की यानी किडनी की जो मानव शरीर में दो होती हैं और खराब किडनी को दान में मिली किडनी से बदलना होता है अर्थात् शरीर में ट्रांसप्लांट करना होता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “किडनी ट्रांसप्लांट क्या है?”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि किडनी ट्रांसप्लांट क्या है? और इसे कैसे ट्रांसप्लांट किया जाता है। तो पहले जानते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट क्या है और किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब पड़ती है। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे। लेकिन सबसे पहले एक स्पष्टीकरण। 

स्पष्टीकरण The Explanation

देसी हैल्थ क्लब यह स्पष्ट करता है कि अंग प्रत्यारोपण ‘दि ट्रांसप्लांट ऑफ ह्वूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट 1994′ के अंतर्गत किया जाता है। कोई भी व्यक्ति अंगों को न तो बेच सकता है न ही खरीद सकता है। कानूनी तौर पर किडनी बेचना और खरीदना दोनों ही दण्डनीय अपराध हैं।

 

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किडनी ट्रांसप्लांट क्या है? What is a Kidney Transplant

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किडनी ट्रांसप्लांट क्या है?
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दोस्तो, किडनी क्या है, यह क्या काम करती है, इसके खराब होने के क्या कारण है, किडनी के कितने चरण होते हैं आदि, इन सब के बारे में हम पहले ही बता चुके हैं। किडनी के बारे में विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “किडनी को स्वस्थ रखने के घरेलू उपाय” पढ़ें। दोस्तो, क्रोनिक किडनी डिजीज़ के अंतिम चरण वाले मरीज का जीवन बचाने के लिये एकमात्र विकल्प स्वरूप, दान में मिली एक स्वस्थ किडनी को मरीज के शरीर में, सर्जिकल प्रक्रिया द्वारा प्रत्यारोपित करना, किडनी ट्रांसप्लांट कहलाता है। यह ट्रांसप्लांट तब किया जाता है जब डायलिसिस से भी मरीज का जीवन संकट में हो। 

किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब पड़ती है? When is Kidney Transplant Needed?

क्रोनिक किडनी डिजीज़ के अंतिम चरण जिसे End Stage Renal Disease (ESRD) or End Stage Kidney Disease (ESKD) कहा जाता है, के मरीज की जब दोनों किडनी 85 प्रतिशत से अधिक खराब जायें। जब खून में क्रीएटिनिन की मात्रा 8.0 से 10.0 मिली ग्राम प्रतिशत हो, eGFR 15 मि.ली. प्रति मिनट से कम हो और नियमित दवाईयों तथा डायलिसिस के बावजूद भी मरीज की तबियत और अधिक बिगड़ती जाये तथा उसका जीवन संकट में हो तो किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। मरीज के लिये यही एकमात्र उपचार का प्रभावकारी विकल्प होता है। किडनी ट्रांसप्लांट से मरीज को बीमारी से मुक्ति मिल जाती है। यह एक प्रकार से जीवन उपहार है जिससे मरीज को जीवन जीने का अवसर मिल जाता है। 

किडनी ट्रांसप्लांट किन कारणों से किया जाता है? Why is Kidney Transplant done?

दोस्तो, ये तो हमने ऊपर बता दिया कि दोनों किडनी 85 प्रतिशत से अधिक खराब होने, रक्त में क्रीएटिनिन की मात्रा बढ़ने और eGFR कम होने पर किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। लेकिन इसके अतिरिक्त चिकित्सा विशेषज्ञ निम्नलिखित कारणों और लक्षणों को ध्यान में रखते हुऐ, मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह देते हैं

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1. किडनी द्वारा रक्त को फिल्टर ना किये जाने के कारण शरीर में विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन्स) और द्रव्य पदार्थ (फ्लूड) जमा होते रहते हैं जिससे मिर्गी या कोमा की संभावना बन सकती है या शरीर के अन्य अंग खराब हो सकते हैं।  

2. फ्लूइड रिटेंशन की वजह से मरीज को सांस लेने में दिक्कत होना।

3. ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीज को चक्कर आना या बेहोशी छाना। 

4. शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का कम बनना जिसके कारण रक्त की कमी हो जाती है और मरीज को लगातार कमजोरी महसूस होती है। मांसपेशियों में ऐंठन रहने लगती है।

5. मूत्र संबंधी समस्याऐं जैसे मूत्र कम आना, या बहुत अधिक और बार-बार आना। 

6. हाई ब्लड प्रैशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल में असंतुलन आदि।

7. सांस में दुर्गंध, भूख कम लगना या ना लगना, खाने के स्वाद का पता ना चलना।

8. आंखों के नीचे, पेट के ऊपर, ऐड़ियों, पैरों पर सूजन होना।

9. शरीर पर बहुत खुजली की होना।

10. जी मिचलाना, उल्टी होना। 

11. रीनल ट्यूमर।

12. ल्यूपस एक दीर्धकालीन ऑटोइम्‍यून रोग है जो प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को सक्रिय करता है। यह सक्रियता का कुप्रभाव हृदय, फेफड़े, हड्डियों के जोड़, त्वचा, मस्तिष्क और किडनी पर पड़ता है, साथ ही यह शरीर के स्वस्थ ऊतकों की भी क्षति करता है।  

किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब नहीं होती?   When is Kidney Transplant not Needed?

1. एक्यूट किडनी फेल्योर (Acute Kidney Injury, AKI)- जब दोनों किडनी में से एक अल्प काल (थोड़े समय के लिये) खराब हो जाये तो दूसरी स्वस्थ किडनी से काम सामान्य रूप से चलता रहता है। इस दौरान खराब किडनी का उपचार किया जाता है। किडनी फेल्योर के इस प्रकार को एक्यूट किडनी फेल्योर (इंज्युरी Acute Kidney Injury, AKI) कहा जाता है। 

2. एक्यूट किडनी फेल्योर (इंज्युरी Acute Kidney Injury, AKI) किडनी फेल्योर की ही श्रेणी में यदि दोनों किडनी खराब हो जाती हैं तो भी इनका उपचार दवाओं और डायालिसिस के द्वारा किया जाता है। किडनी फेल्योर के इस प्रकार में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं होती।

अंतिम चरण के मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह कब नहीं दी जाती When Kidney Transplant is not Recommended for end Stage Patient

ESRD के मरीज को निम्नलिखित परिस्थितियों में किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह नहीं दी जाती

1. जब मरीज एड्स, कैंसर जैसे गंभीर और जानलेवा रोगों से पीड़ित हो।

2. जब मरीज को कोई गंभीर सक्रिय संक्रमण हो। 

3. जब मरीज किसी तीव्र मनोवैज्ञानिक समस्या या मानसिक मंदता से ग्रस्त हो।

4. जब मरीज अस्थिर कोरोनरी धमनी Coronary Disease की बीमारी से ग्रस्त हो।

5. हृदयाधात की संभावना हो। 

6. दाता किडनी के विरुद्ध एंटीबॉडी की उपस्थिति हो। 

7. कोई अन्य तीव्र तथा गंभीर रोगों से पीड़ित हो।

किडनी कौन दे सकता है? Who Can Donate a Kidney?

1. परिवार के सदस्य जिनकी आयु 18 से 55 वर्ष की हो, किडनी दे सकते हैं। इनमें पति पत्नी एक दूसरे को किडनी दे सकते हैं। माता, पिता, भाई, बहिन किडनी दे सकते हैं। किडनी दाता में जुड़वा भाई/ बहन आदर्श माने जाते हैं।

2. यदि परिवार से किडनी नहीं मिल रही है तो ब्लड रिलेशन में अन्य परिवार के सदस्य जैसे ताऊ, चाचा, बूआ, मामा, मौसी किडनी दान दे सकते हैं।

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3. इनके अतिरिक्त किडनी प्राप्त करने का एक और श्रोत/विकल्प बचता है, वह है मृत दाता। परन्तु मृत दाता से किडनी प्राप्त करने के लिये बहुत लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसके लिये ESRD वाले मरीज को चिकित्सा मूल्यांकन से गुजरना होता है कि वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिये योग्य है। यदि उसे योग्य समझा जाता है तो उसे प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। संयोगवश किडनी बहुत जल्दी भी मिल सकती है। 

किडनी ट्रांसप्लांट से पहले की जांच Testing Before Kidney Transplant

1. दोस्तो, किडनी ट्रांसप्लांट से पहले मरीज का शारीरिक, लेबोरेटरी और रेडियोलॉजिकल परीक्षण किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं है और ऑपरेशन किया जा सकता है। 

2. माइक्रोस्कोप की मदद से किडनी के ऊतक के नमूनों की जांच की जाती है और किडनी की बायोप्सी भी की जा सकती है। इससे असामान्य कोशिकाओं को देखने में मदद मिलती है।

3. अंतःशिरा पाइलोग्राम द्वारा किडनी की विफलता का निदान किया जाता है। इसमें किडनी, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय की सभी असामान्यताओं का पता चल जाता है।

4. किडनी की विफलता का निदान किडनी के अल्ट्रासाउंड द्वारा किया जा सकता है जिसमें ट्रांसड्यूसर का उपयोग करके किडनी की इमेजिज़ को बनाने के लिये ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। 

5. उचित ब्लड ग्रुप, के मिलान के अतिरिक्त मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन (Human Leukocytes Antigen) को जांचा जाता है। यदि मरीज और दानकर्ता दोनों का HLA टाइप मैच कर जाता है तो मरीज के शरीर द्वारा किडनी रिजेक्शन की संभावना बहुत कम हो जाती है। 

6. मरीज की एंटीबॉडीज़ दानकर्ता के अंग पर आक्रमण ना करें इसे परखने के लिये मरीज का रक्त बहुत कम मात्रा में लेकर दानकर्ता के रक्त के साथ मिलाकर जांचा जाता है। यदि मरीज के रक्त में दानकर्ता के रक्त के प्रभाव में एंटीबॉडीज़ बनते हैं तो किडनी ट्रांसप्लांट नहीं की जा सकती। 

7. यदि मृत डोनर की किडनी ट्रांसप्लांट की जानी है तो दोनों के ऊतकों का मिलान किया जाता है और एंटीबॉडीज़ टैस्ट उसी प्रकार किये जाते हैं जैसे जीवित डोनर के साथ किये जाते हैं। 

8.  एनेस्थीसिया की जांच की जाती है।

किडनी ट्रांसप्लांट के प्रकार Types of Kidney Transplant 

दोस्तो, ट्रांसप्लांट निम्नलिखित दो प्रकार के होते  हैं

1. जीवित दाता का गुर्दा प्रत्यारोपण (Living donor Kidney Transplant) इसमें डोनर परिवार का कोई सदस्य होता है या ब्लड रिलेशन में अन्य परिवार का सदस्य।  डोनर के रक्त और ऊतक के मिलान के बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

2. मृत दाता का गुर्दा प्रत्यारोपण (Deceased donor Kidney Transplant) इसमें हाल ही में मृत व्यक्ति से प्राप्त किडनी का ट्रांसप्लांट किया जाता है।

किडनी ट्रांसप्लांट कौन करता है? Who does Kidney Transplant?

किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन करने वाली टीम में निम्नलिखित विशेषज्ञ शामिल होते हैं

1. नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी फिजिशियन)

2. यूरोलोजिस्ट (किडनी के सर्जन)

3. पैथोलॉजिस्ट 

4. अन्य प्रशिक्षित सहायक।

ऑपरेशन का काम यूरोलोजिस्ट करते हैं।

किडनी ट्रांसप्लांट कैसे की जाती है? How is Kidney Transplant Done?

सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि किडनी जीवित दाता से प्राप्त हुई है तो मरीज और डोनर का ऑपरेशन एक साथ किया जाता है। एनेस्थीसिया देने के बाद पेट के नीचे बड़ा चीरा लगा कर डोनर से किडनी निकाल कर विशेष प्रकार के ठंडे द्रव से अच्छी प्रकार साफ़ किया जाता है। फिर इसे मरीज के पेट के नीचे चीरा लगाकर पेट के आगे वाले हिस्से में दाहिनी ओर नीचे (पेड़ू ) में लगा दिया जाता है। इसके बाद मरीज की धमनियों और नसों को डोनर से मिली किडनी के साथ जोड़ दिया जाता है। किडनी की मूत्रनली को मरीज के मूत्राशय से जोड़ दिया जाता है। मरीज की खराब किडनी को बाहर नहीं निकाला जाता बल्कि उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। बहुत ही कम मामलों में, जैसे किडनी संक्रमित हो गई है या उच्च रक्तचाप की समस्या उत्पन्न कर रही है, तो ऐसी स्थिति में खराब किडनी को बाहर निकाल दिया जाता है। ऑपरेशन होने के बाद सर्जिकल धागों से टांके लगाकर चीरा बंद कर दिया जाता है। मरीज को मूत्र त्याग करने में  आसानी रहे इसके लिये मूत्राशय में एक कैथेटर लगा दिया जाता है।  किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में लगभग 3 घंटे का समय लग जाता है। परिवार से मिली किडनी ऑपरेशन के बाद तुरंत काम करना शुरू कर देती है किन्तु मृत दाता से मिली किडनी को काम शुरू करने में कुछ दिन या हफ्ते का समय लग सकता है। 

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल Care After Kidney Transplant

1.ऑपरेशन के बाद, मरीज को, होश आने पर श्वास, नब्ज, रक्तचाप सामान्य हो जाने पर, ICU में शिफ्ट कर दिया जाता है वहां मरीज की स्थिति पर निगरानी रखी जाती है।

2. कुछ समय बाद मरीज को ICU से सामान्य कमरे में शिफ्ट कर दिया जाता है। मरीज को अस्पताल में कितने दिन रहना पड़े यह उसके स्वास्थ की स्थिति पर निर्भर करता है। वैसे एक हफ्ता तो अस्पताल में रहना ही पड़ता है।

3. शुरु में मरीज को तरल आहार दिया जाता है। जब वह खुद खाने लायक हो जाये तब उसे ठोस आहार दिया जाता है।

4. अस्पताल में मरीज की जांच होती रहती है इसके लिये ब्लड टैस्ट होते हैं। दर्द के लिये दर्द निवारक दवाऐं दी जाती हैं। 

5. अस्पताल में मरीज को हल्का-फुल्का मूवमेंट में रहने को कहा जाता है।

घर पर देखभाल Home Care

घर पर आकर मरीज को बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। मरीज को पूरी तरह ठीक होने में लगभग छः महीने का समय लग जाता है। इसलिये निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिये  

1. अस्पताल से डिस्चार्ज मिलते समय डॉक्टर मरीज दवाओं के बारे में और अन्य बातें बताते हैं, इनका पालन करना चाहिये और दवाऐं सही समय से लेते रहना चाहिये। 

2. जब डॉक्टर टांके काटने के लिये बुलायें तो उसी दिन अस्पताल जाकर टांके कटवाने चाहियें। 

3. जख्म को सूखा और साफ़ रखें। जख्म गीला होने पर संक्रमण की संभावना हो सकती है।

4. किडनी ट्रांसप्लांट के बाद, किडनी रिजेक्शन को रोकने के लिये, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बाधित कर दिया जाता है। इसलिये ऐसी जगह ना जायें जहां कोई बीमार हो। यह सावधानी पूरी जिन्दगी रखनी पड़ेगी। किडनी रिजेक्शन पर जानकारी आगे देंगे। 

5. चीरे के स्थान पर दर्द, सूजन, रक्तश्राव या कोई अन्य समस्या होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। 

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किडनी ट्रांसप्लांट के जोखिम Risks of Kidney Transplant

किडनी ट्रांसप्लांट चूंकि एक बड़ी सर्जिकल प्रक्रिया है, इसलिये इसके निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं

1. एनेस्थीसिया के प्रति एलर्जिक प्रतिक्रिया

2. किडनी रेजेक्शन 

3. दान की गई किडनी का फेल हो जाना। ऐसी स्थिति में  अन्य किडनी दान में लेकर मरीज को दूसरा किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ता है। 

4. दवाओं के साइड इफेक्ट्स जैसे वजन बढ़ना, हड्डियों का रोग, बालों का ना बढ़ना आदि।

5. रक्तस्राव 

6. रक्त के थक्के बनना 

7. संक्रमण

8. मूत्रनली से रसाव या ब्लॉकेज होना।

9. हार्ट अटैक की संभावना।

10. स्ट्रोक का खतरा। 

किडनी रिजेक्शन क्या है? What is Kidney Rejection?

हमारे शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाऐं शरीर की आंतरिक संक्रमण से होने वाले रोगों और बाहरी पदार्थों से, प्रतिरक्षा प्रणाली के रूप में रक्षा करती हैं ये प्रतिरक्षा प्रणाली का मूलभूत हिस्सा होती हैं। इनसे बने एंटीबॉडीज़ जीवाणुओं पर आक्रमण करके उनको नष्ट कर देते हैं। ठीक इसी प्रकार डोनेट की हुई किडनी बाहर की होने के नाते, मरीज की श्वेत रक्त कोशिकाओं से बने एंटीबॉडीज़ इस नई किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस प्रकार के नुकसान से नई किडनी खराब होती है और काम नहीं करती। इसी को मेडिकल भाषा में किडनी रिजेक्शन कहा जाता है। बुखार, किडनी की त्वचा के ऊपर संवेदनशीलता, रक्त में क्रीएटिनिन का स्तर बढ़ना, रक्तचाप बढ़ना आदि सब किडनी रिजेक्शन की वजह से होता है। 

किडनी रिजेक्शन रोकने के उपाय Remedies to Prevent Kidney Rejection

किडनी रेजेक्शन को रोकने के लिये शुरु में दवाऐं दी जाती हैं। ये दवाऐं किडनी रिजेक्शन की संभावना कम करने का काम करती हैं। इन दवाओं का प्रभाव मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। थ्रश (Thrush) मुंह में खमीर  संक्रमण, दाद या श्वसन वायरस जैसे संक्रमण का खतरा अधिक होता है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद, कुछ विशेष प्रकार की दवाऐं दी जाती हैं जैसे प्रेडनिसोलोन, एजाथायोप्रीन, सायक्लोस्प्रोरिन, एम. एम. एफ. और टेक्रोलिमस। इन दवाओं को इम्यूनोसप्रेसेन्ट (Immunosuppressant) कहा जाता है, ये किडनी रिजेक्शन को रोकने का काम करती हैं और मरीज की रोग से लड़ने की क्षमता को बनाये रखने में मदद करती हैं। ये दवाऐं बहुत महंगी होती हैं और जीवन भर लेनी पड़ती हैं।

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किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे Benefits of Kidney Transplant

1. मरीज, बार-बार डायालिसिस कराने से मुक्त हो जाता है।

2. हर बार डायालिसिस कराने के लिये Recurring Financial खर्चे से बच जाता है और समय की भी बचत होती है। 

3. हर समय कि यह सोच कि “मैं बीमार हूं” से मुक्ति मिल जाती है।

4. भोजन में परहेज भी कम हो जाता है।

5. लंबा जीवन जीने की उम्मीद बन जाती है।

6. मरीज शारीरिक और मानसिक तौर स्वस्थ रहता है।

7. मनोवैज्ञानिक तौर पर मरीज की चिंता दूर हो जाती है, वह खुश रहने लगता है।

8. मरीज सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जीता है और अपने रोजाना के काम भी कर सकता है।

9. शारीरिक संबंध बनने में कोई दिक्कत नहीं होती।

10. यदि मरीज महिला है तो वह बच्चों को जन्म दे सकती है।

किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च Kidney Transplant Cost

किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च निर्भर करता है अलग-अलग शहरों के अनुसार, वहां के अस्पतालों और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ की रेप्युटेशन पर। फिर भी हमारे देश भारत में किडनी ट्रांसप्लांट पर अनुमानतः 6,00,000/- से 9,00,000/- रुपये खर्च आ जाता है। विदेशों से आये मरीजों के लिये यह खर्च और बढ़कर 10,00,000/- रुपये तक हो सकता है क्योंकि उनके भोजन और आवास का खर्च अतिरिक्त होता है। 

Conclusion  

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किडनी ट्रांसप्लांट क्या है, किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब पड़ती है, किडनी ट्रांसप्लांट किन कारणों से किया जाता है, किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब नहीं होती, अंतिम चरण के मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह कब नहीं दी जाती, किडनी कौन दे सकता है, किडनी ट्रांसप्लांट से पहले की जांच, किडनी ट्रांसप्लांट के प्रकार, किडनी ट्रांसप्लांट कौन करता है, किडनी ट्रांसप्लांट कैसे की जाती है, किडनी ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल, घर पर देखभाल, किडनी ट्रांसप्लांट के जोखिम, किडनी रिजेक्शन क्या है और किडनी रिजेक्शन रोकने के उपाय, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे भी बताये और किडनी ट्रांसप्लांट के खर्च के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।


Disclaimer यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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किडनी ट्रांसप्लांट क्या है?
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किडनी ट्रांसप्लांट क्या है, किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब पड़ती है, किडनी ट्रांसप्लांट किन कारणों से किया जाता है, किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत कब नहीं होती, अंतिम चरण के मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह कब नहीं दी जाती, किडनी कौन दे सकता है।
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