दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो हमारे देश भारत की यह विशेषता है कि यहां हर तरह का मौसम होता है। वैसे तो मौसम छः प्रकार के होते हैं परन्तु मुख्य रूप से केवल तीन – सर्दी, गर्मी और बरसात। इनमें गर्मी का मौसम ऐसा होता है जिसमें किसान बहुत खुश होते हैं क्योंकि उनकी फसल पक कर तैयार हो चुकी होती है और उसे काटने का यही समय होता है। परन्तु दूसरी ओर अन्य व्यक्ति अधिकतर परेशान रहते हैं विशेषकर मजदूर वर्ग या अन्य शरीरिक श्रम करने वाले। कामकाज पर जाने से पहले पूरा इंतजाम करना पड़ता है। भरी दोपहरी में जाने से पहले कई बार सोचना पड़ता है, क्योंकि एक विशेष बीमारी होने की संभावना रहती है जो केवल गर्मी के मौसम में ही होती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं लू की। यही है हमारा आज का टॉपिक “लू”। देसी हैल्थ क्लब आज आपको लू लगने के घरेलू उपाय के विषय में विस्तार से जानकारी देगा। तो, जानते हैं लू के बारे में कि यह क्या होती है?

लू लगने के घरेलू उपाय

लू क्या होती है? – What is the Heat

दोस्तो, गर्मी के मौसम में पूरे उत्तर भारत में उत्तर-पूर्व और पश्चिम से पूर्व दिशा में भीषण गर्म और शुष्क हवाऐं चलती हैं। इन्हीं हवाओं को लू कहा जाता है। 42° सेल्सियस तापमान को खतरनाक स्तर माना जाता है जोकि आमतौर पर रहता ही है। कई बार यह तापमान 45° से भी ऊपर उठकर 48° पर आ जाता है। दिल्ली के पालम क्षेत्र में तापमान 47° से 49° के बीच रहता है। कई स्थानों पर विशेषकर राजस्थान के चुरू क्षेत्र में 52° पर तापमान पहुंच जाता है। इस तापमान में रक्त का गर्म होना शरीर की कूलिंग प्रक्रिया का ठप्प हो जाना स्वाभाविक है। शरीर में नमक और पानी पसीने के रूप में बाहर निकलता रहता है। ऐसे हालात में प्रचण्ड गर्मी के प्रकोप से बीमार हो जाने को ही लू लग जाना (Heat stroke) कहते हैं। इसके लिये आपातकालीन  चिकित्सा की आवश्यकता होती है। स्थिति जटिल होने पर रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। 

लू लगने  लक्षण – Symptoms of Sunstroke

1. सिर में तेज दर्द होना।

2. काम करते हुऐ अचानक आंखों के सामने अंधेरा छाना जाना, चक्कर आना। 

3. दिल की धड़कन बढ़ जाना।

4. शरीर का तापमान बढ़ना।

5. बुखार होना। कम भी हो सकता है और तेज भी।

6. ऐसा लगना जैसे शरीर में से भभका निकल रहा है।

7. बेचैनी बढ़ना, घबराहट होना। 

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8. जी मिचलाना, उल्टी आना। दस्त भी लग सकते हैं। 

9. मांसपेशियों में ऐंठन (स्पाज्म) और तेज दर्द।

10. बहुत थकावट, कमजोरी महसूस करना।

11. बहुत तेज प्यास लगना।

12. सांस तेज-तेज चलना।

लू लगने के कारण – Cause of Sunstroke

1. लू लगने का सबसे मुख्य और वैज्ञानिक कारण है बाहर के और अपने शरीर के तापमान  के बीच का अंतर कम हो जाना। अर्थात् गर्मी के मौसम में हमारे शरीर का तापमान 37° सेल्सियस रहना चाहिये परन्तु जब शरीर का तापमान 42° सेल्सियस पर पहुंचता है तब खून गर्म होने लगता है, प्रोटीन भी जलने लगते हैं। बाहर का तापमान 45° होने पर शरीर की कूलिंग व्यवस्था बाधित हो जाती है। शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा होने लगता है और रक्तचाप कम हो जाता है।

2. कुछ खाये बिना ही घर से बाहर निकलना।

3. पानी कम पीना। 

4. वातानुकूलित (एसी) वाले स्थान से एकदम बाहर निकलकर तुरंत धूप में चल देना।

5. बाहर आकर मशीन वाला ठंडा पानी पीना या एकदम chilled कोल्ड ड्रिंक या अन्य पेय पदार्थ पीना।

6. गर्म वातावरण में बहुत ज्यादा देर रहने से शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे लू लगने की संभावना रहती है।

7. गर्मी के दिनों में ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करने जैसे व्यायाम या अन्य शारीरिक श्रम करने से भी लू लगने का जोखिम रहता है।

8. गर्मियों में शराब के सेवन से शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे लू लगने की संभावना बन जाती है।

9. शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाना। पसीने के रूप में पानी निकलता रहता है। इस पानी में शरीर का नमक घुला होता है।

10. किसी कारणवश, मजबूरी के कारण या अपने जिद्दी स्वाभाव के कारण जानबूझ कर भरी दोपहरी में बाहर निकलना, लू को आमन्त्रित करने के समान होता है। 

लू लगने के घरेलू उपाय  – Home Remedies for Sunstroke

1. प्याज (Onion)- दोस्तो, आयुर्वेद में प्याज को लू की काट का ब्रह्मास्त्र माना जाता है। गर्मियों में बाहर जाते समय एक प्याज काट कर जेब में रख लीजिये, लू नहीं लगेगी। इसकी तासीर ठंडी होती है जो आपके शरीर के तापमान को सामान्य बनाये रखने में मदद करती है। इसका प्रतिदिन सेवन कीजिये। आप इसे सलाद के रूप में खा सकते हैं, इसकी चटनी बना सकते हैं और इसका रस निकाल कर भी शहद में मिलाकर पी सकते हैं। इसके रस को कान के पीछे, छाती पर और तलवों पर लगाने से लाभ होता है। इसको लगाने से लू से राहत मिलेगी और शरीर को ठंडक। प्याज को हल्का भूनकर इसमें जीरा पाउडर मिलाकर भी खा सकते हैं। 

2. गिलोय का रस (Giloy juice)- लू के उपचार में गिलोय भी सक्रिय भूमिका निभाती है। आयुर्वेद में गिलोय को वात, पित्त और कफ से हुऐ कष्ट में सन्तोष देने वाला (Sedative) कहा गया है। गिलोय के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाती ही है साथ में लू से होने वाले बुखार को जल्दी ठीक करने में मदद करती है। प्रतिदिन सुबह का नाश्ता करने से पहले दो से तीन चम्मच गिलोय का रस इतने ही पानी में मिलाकर पीयें।  

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3. सेब का सिरका (Apple vinegar)- सेब के सिरके का सेवन लू लगने पर औषधी के रूप में कार्य करता है। लू लगने से शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाने पर यह इनकी पूर्ति करता है। विशेषतौर पर शरीर में पोटैशियम और मैग्नीशियम मिनरल्स की कमी को पूरा करता है सेब का सिरका। रोजाना दिन में दो बार, एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीयें।   

4. बेल का जूस (Bell juice)- बेल की तासीर ठंडी होती है। इसका उपयोग केवल गर्मी के मौसम में ही किया जाता है। गर्मियों में बेल का जूस उत्तम होता है और लू के उपचार में अमृत के समान। बेल का जूस पीने से शरीर ठंडक बनी रहती है। इससे पाचन तंत्र भी ठीक रहता है। भोजन करने से पहले बेल के जूस का सेवन करें। बीच में दिन में भी आप दो बार इसका सेवन कर सकते हैं। लू लगने की संभावना नहीं रहेगी।  

5. आम पन्ना (Mango Panna)- आम पन्ना का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाता है। लू के उपचार में यह स्वास्थ्य टॉनिक माना जाता है। इसके पीने से शरीर में ठंडक रहती है और भी नहीं लगती। लू लगने पर यह औषधी के रूप में काम करता है। प्रतिदिन दो, तीन बार इसे पी सकते हैं। यह बाजार में बना बनाया मिलता है। इसे घर भी बना सकते हैं। आम पन्ना बनाने के लिये कच्चे आम को हल्की आग वाले अंगारे में/राख पर भून लें। आप कच्चे आम को उबाल भी सकते हैं। वैसे भूनना ज्यादा बेहतर होता है। ठंडा होने पर इसके गूदे को निकाल कर पानी और में मसलें। फिर इसमें जीरा, धनिया, नमक, काला नमक, कालीमिर्च, और गुड़ डालकर अच्छे से मिला लें।

6. छाछ (Buttermilk)- लू के उपचार में छाछ बेहतरीन विकल्प है। गर्मियों में छाछ पीना अमृत के समान है। इसकी तासीर ठंडी होती है। यह शरीर को शीतलता प्रदान कर शरीर के तापमान को भी बढ़ने से रोकती है। इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।  इसमें काला नमक और भुना हुआ जीरा मिलाने से इसके गुण बढ़ जाते हैं। गर्मियों में प्रतिदिन छाछ पीने से लू लगने की संभावना नहीं रहती। और लू लग जाने पर उसे खत्म भी करती है।

7. नींबू पानी (Lemon Water)- लू लगने पर नींबू पानी शरीर के ताप को हर लेता है क्योंकि यह शरीर में पानी और लवण की मात्रा को पूरा करता है, बार-बार प्यास भी नहीं लगती। नींबू पानी बनाने के लिये पानी घड़े का या सुराही का लिया जाये तो बेहतर है। फ्रिज या बर्फ का पानी ना लें। इसमें नींबू निचोड़कर, चीनी और चुटकी भर नमक मिला लें। यह आपका एक प्रकार से Rehydrate Electrolyte Drink बन जाता है। 

8. नारियल पानी (Coconut water)– नारियल पानी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुणों से समृद्ध होता है। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण आपके शरीर को ठंडा रखता है। प्रतिदिन पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और लू लगने का खतरा भी नहीं होगा। लू लग जाने पर रोगी को रोजाना दो, तीन नारियल पानी पिलायें। उसे बहुत राहत महसूस होगी। 

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9. धनिया (coriander)- धनिया को विश्व में बहुत ठंडा खाद्य पदार्थ माना जाता है। यह लू से बचाव में बहुत सक्रिय भूमिका निभाता है। धनिया पाउडर या इसकी हरी पत्तियों को पीस कर चटनी बनाकर खा सकते हैं या चटनी को पानी में भिगोकर, छानकर पीयें। चाहें तो इसमें स्वादानुसार चीनी भी मिला सकते हैं। यह आपके शरीर को ठंडक पहुंचायेगा और लू को दूर रखेगा।

10. पुदीना और गन्ना (Peppermint and sugarcane)- पुदीना और गन्ना दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। ये दोनों मिल जायें तो समझो सोने पर सुहागा। पुदीना में मैंग्नीज, तांबा और विटामिन-सी भरपूर मात्रा में होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल आदि गुण होते हैं। गन्ने में भी  यही सब गुण होते हैं। गन्ने के रस में पुदीना मिलाकर पीने से शरीर की तपिस खत्म होती है, शरीर ठंडा रहता है। जल्दी-जल्दी प्यास नहीं लगती। यह पेय आपके शरीर को ऊर्जा देता है और लू से बचाव करता है।

11. खीरा और ककड़ी (Cucumber)- दोस्तो, खीरा और ककड़ी को भाई, बहिन समझिये। इन दोनों में पानी 95% से ज्यादा होता हो और तासीर ठंडी। इनके खाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती। ये प्राकृतिक रूप से शरीर में नमी बनाये रखते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होते हैं। इनके सेवन से लू लगने की संभावना नहीं रहती। और जिसको लू लग चुकी है उसके लिये तो खीरा और ककड़ी  बेहद फायदेमंद हैं। 

12. जौ और प्याज (Barley and Onion)-  जौ और प्याज दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। लू लग जाने पर जौ का आटे में प्याज का रस मिलाकर रोगी के शरीर पर लेप करें। उसे लू से फौरन  राहत मिलेगी। उसके शरीर का ताप कम होता जायेगा। 

लू लगने से कैसे बचाव करें ? – How to Protect heatstroke

दोस्तो, यदि हम कुछ निम्नलिखित सावधानियां बरतें तो लू लगने से बचाव हो सकता है –

1. सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्मी के मौसम में हर हल में अपने शरीर का तापमान 37° सेल्सियस रखिये।

3. अपने काम काज के लिये तो बाहर जाना ही पड़ता है, इसलिये घर से कुछ खा पी कर जायें। खाली पेट ना जायें।

4. सूती कपड़े पहनें। ऐसे कपड़े पहनें जिनसे शरीर अच्छी तरह कवर हो जाये ताकि तेज धूप आपकी त्वचा को झुलसा ना दे। टी-शर्ट, हाफ़ पैन्ट को avoid करें।

5. बिना किसी कारण के भरी दोपहरी में बाहर ना जायें। जाना भी पड़े तो पूरे कपड़े पहनकर निकलें। सिर पर तौलिया, हैट आदि रखें। या छतरी लगा लें। आंखों पर भी धूप का चश्मा पहनें।

6. सफर करते समय एक प्याज काट कर जेब में रख लें। आपको कभी लू नहीं लगेगी।

7. पानी से भरी बोतल साथ रखें। थोड़ी-थोड़ी देर बाद पानी पीते रहें।

8. फ्रिज़, बर्फ का पानी ना पीयें। घड़े या सुराई का ठंडा पानी पीयें। 

9. दही, छाछ, लस्सी (बिना बर्फ वाली), शरबत, साफ और ताजा गन्ने का रस (बिना बर्फ वाला) आमपन्ना, फलों का रस, शिकंजी, नींबू पानी आदि का सेवन करें।

10. तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, बेलपत्थर आदि का सेवन करें। बाजार से कटे हुऐ फल ना खायें। 

11. घर को भी ठंडा रखें। कूलर, एसी, खस का इस्तेमाल करें। छत पर भी गमलों में पौधे, बेल आदि लगायें। 

12. एसी वाले स्थान को छोड़कर एकदम धूप में ना जायें। बाहर छाया वाली जगह पर थोड़ी देर रुकें जिससे कि आपके शरीर का तापमान सामान्य हो सके।

13. बाहर से घर आकर एकदम पानी ना पीयें। थोड़ा हाथ मुंह धोकर शरीर को ठंडा करें, पसीना सुखायें तब पानी पीयें।

14. धूम्रपान ना करें। शराब या किसी अन्य प्रकार के नशे का सेवन ना करें।

लू लगने पर प्राथमिक उपचार – First aid on heatstroke

दोस्तो, लू लगने पर मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिये, यदि मरीज की हालत बहुत खराब है और उसका चल पाना संभव नहीं है तो डॉक्टर को ही घर पर बुला लेना चाहिये। डॉक्टर द्वारा चिकित्सा लेने से पहले कर सकते हैं ये निम्मलिखित प्राथमिक उपचार –

1. मरीज को एसी, कूलर, पंखा वाले कमरे में लिटा कर उसके कपड़े थोड़े ढीले कर दें। 

2. यदि मरीज बेहोश है तो उसके मुंह पर पानी के छींटे मारकर होश में लाने का प्रयास करें। 

3. उल्टी की स्थिति में उसे एक साइड से लिटा दें। 

4. मरीज का तापमान चैक करें। 102° से अधिक बुखार की स्थिति में बर्फ़ की पट्टी सिर पर रखते रहें। 104° या इससे अधिक बुखार होने पर मरीज के बगल, पेट व जांध के बीच के भाग में आइसपैक भी रखें। बुखार 102° से नीचे आने पर बर्फ़ की पट्टी और आइसपैक ना रखें। 

5. लू से पीड़ित व्यक्ति के तलवों पर लौकी घिसें। लौकी सारी खींच लेगी और मरीज को राहत मिलेगी।

6. बेहोशी की स्थिति में मरीज को कुछ भी पिलाने की कोशिश ना करें।

7. दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब यह स्पष्ट करता है कि यदि मरीज होश में है तो भी उसे ऐसा कुछ भी खाने पीने को नहीं देना चाहिये जिससे डॉक्टर की चिकित्सा या दवाईयों में कोई व्यवधान पड़े। 

8. देसी हैल्थ क्लब का मानना है कि डॉक्टर की चिकित्सा लेने से पहले मरीज को पीने के लिये निम्नलिखित पेय पदार्थ दिये जा सकते हैं :-

(i)  नींबू पानी में चीनी और हल्का सा नमक घोल कर।

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(ii) जीवन रक्षक घोल (Oral Rehydration Solution – ORS)।

(iii) ORSL Rehydration Electrolyte Drink।

(iv) ORSL Plus।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको लू लगने के घरेलू उपाय के विषय में विस्तृत जानकारी दी। लू क्या है, लू लगना किसे कहते हैं, लू लगने के क्या लक्षण होते हैं, क्या कारण होते हैं इसके बारे में विस्तार से बताया। इस लेख के माध्यम से लू लगने के देसी उपाय बताये, लू से कैसे बचाव करें और लू लग जाने पर क्या प्राथमिक उपचार किया जाये इस बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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