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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, शारीरिक परीक्षण आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इससे बीमारी पकड़ में आ जाती है चाहे वह छोटी हो या बड़ी। इससे डॉक्टर्स को मरीज की बीमारी का एकदम परफैक्ट इलाज करने की राह आसान हो जाती है। शरीर के परीक्षण आमतौर पर बल्ड, यूरिन या एक्सरे, सीटी स्केन आदि के द्वारा होते हैं परन्तु कुछ मामलों में विशेष परीक्षण होते हैं जैसे एंडोस्कोपी, एंजियोग्राफी, कीमोथेरेपी आदि। इनके अलावा कुछ ऐसे परीक्षण होते हैं जिनमें शरीर के अंदर का हिस्सा, द्रव्य या ऊतक निकाले जाते हैं। इस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है। आज एक ऐसी ही बायोप्सी के बारे में हम जानेंगे जो फेफड़ों की बीमारी जानने के लिये की जाती है जिसे लंग बायोप्सी कहा जाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “लंग बायोप्सी क्या होती है?” देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको लंग बायोप्सी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसकी जरूरत क्यों पड़ती है और यह कैसे की जाती है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि लंग बायोप्सी क्या होती है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है।

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लंग बायोप्सी क्या होती है?
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लंग बायोप्सी क्या होती है? What is a Lung Biopsy?

दोस्तो, बायोप्सी का अर्थ होता है किसी असाधारण से उभार को परीक्षण के लिये शरीर से बाहर निकालना। यह सामान्यतः एक सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट या कार्डियोलॉजिस्ट या इनकी सम्मलित टीम द्वारा किया जाने वाला मेडिकल टेस्ट होता है।  किसी बीमारी की उपस्थिति या सीमा का निर्धारण करने के लिये, जांच के लिये कोशिकाओं या ऊतकों के नमूनों का निष्कर्षण सम्मलित है। जहां तक लंग बायोप्सी की बात है तो हम बता दें कि यह एक प्रकार से सर्जिकल जांच प्रक्रिया है, जिसमें  असामान्य फेफड़ों के ऊतकों के छोटे-छोटे टुकड़ों को निकाला जाता है ताकि फेफड़ों की बीमारी, फेफड़ों का कैंसर या ट्यूमर का पता लगाया जा सके। इस प्रक्रिया को सर्जन/रेडियोलॉजिस्ट अंजाम देते हैं। ट्यूमर कैंसरस हैं या नहीं इसका भी पता चल जाता है। फेफड़ों के बारे में विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “फेफड़ों को मजबूत बनाने के उपाय” पढ़ें।

लंग बायोप्सी के प्रकार Types of Lung Biopsy

लंग बायोप्सी निम्नलिखित चार प्रकार से की जाती है जिनका विवरण, विस्तार से हम आगे देंगे

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1. नीडल बायोप्सी (Needle biopsy)

2. ट्रांसब्रॉन्कियल बायोप्सी (Transbronchial biopsy)

3. थोरैकोस्कोपिक बायोप्सी (Thoracoscopic biopsy)

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4. ओपन बायोप्सी (Open biopsy)

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लंग बायोप्सी क्यों की जाती है? Why is a Lung Biopsy Done?

दोस्तो, लंग बायोप्सी निम्नलिखित परिस्थितियों में की जाती है

1. फेफड़ों की अनियमितताओं को जानने के लिये। अर्थात् मरीज को फेफड़ों में दिक्कत हो रही है मगर सही से पता नहीं चल रहा है।

2. गंभीर निमोनिया की जांच के लिये।

3. सारकॉइडोसिस के लिये। सारकॉइडोसिस एक रोग है जिसके लक्षण अस्पष्ट होते हैं, जैसे निद्रा से भी थकान होना, एनर्जी की कमी, वजन कम होना, दर्द, गठिया, घुटनों में सूजन, अस्पष्ट दृष्टि, सांस फूलना, सूखी खांसी या त्वचा घाव आदि। सारकॉइडोसिस और कैंसर एक जैसे हो सकते हैं जिससे इनमें पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

4. लंग कैंसर के बारे में, इसकी स्थिति के बारे में जानने के लिये।

5. सिटी स्कैन में खराबी आने पर लंग बायोप्सी की जा सकती है। 

6. छाती में लगी चोट के कारण हुई समस्या का पता लगाने के लिये। 

7. फेफड़ों की अन्य बीमारी का पता लगाने के लिये।

लंग बायोप्सी से पहले की तैयारी Preparation Before Lung Biopsy

लंग बायोप्सी से पहले डॉक्टर मरीज से कुछ जानकारी लेते हैं और कुछ हिदायतें देते हैं जो निम्न प्रकार हैं

1. डॉक्टर मरीज से उसकी पिछली मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। 

2. वर्तमान मेडिकल टैस्ट रिपोर्ट्स को रिव्यू करते हैं।

3. मरीज से यह जानकारी ली जाती है कि वह धूम्रपान करता है या नहीं, शराब, ड्रग्स आदि का सेवन करता है या नहीं या कोई और नशा करता है या नहीं। उसका उत्तर “हां” होने की स्थिति में उसे यह सब बन्द करने को कहा जाता है।

4. डॉक्टर मरीज से यह जानकारी लेते हैं कि वह कोई विशेष दवा ले रहा है या नहीं या खून पतला करने की दवा ले रहा है या नहीं। “हां” की स्थिति में बायोप्सी के तीन दिन पहले से इनको ना लेने को कहा जाता है। 

5. लंग बायोप्सी की प्रक्रिया से आठ घंटे पहले कुछ भी खाने पीने को मना किया जाता है। 

6. बायोप्सी कराने के लिये सभी आभूषण घर पर ही निकालकर आने को कहा जाता है।

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लंग बायोप्सी कैसे की जाती है? How is a Lung Biopsy Done?

दोस्तो, सबसे पहले तो हम आपको यह बता दें कि लंग बायोप्सी करने में 45 मिनट लग जाते हैं। किसी-किसी मामले में एक घंटे का समय भी लग सकता है। जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि लंग बायोप्सी तीन प्रकार की होती है, अब बताते हैं कि यह प्रक्रिया कैसे की जाती है। विवरण निम्न प्रकार है

1. नीडल बायोप्सी (Needle Biopsy)- नीडल बायोप्सी करने के लिये सबसे पहले मरीज को लोकल एनेस्थीसिया देकर उसे प्रभावित अंग को सुन्न कर देते हैं। फिर सीटी स्कैन या एक्स-रे के द्वारा देखते हुऐ डॉक्टर एक सुईं को फेफड़ो में डाल देते हैं। सुईं के द्वारा ही छोटे छोटे टुकड़ों में टिश्यूज़ के सैंपल, जांच के लिये बाहर निकाल लेते हैं। 

2. ट्रांसब्रॉन्कियल बायोप्सी (Transbronchial Biopsy)- पुरानी खांसी, सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों की समस्या की जांच के लिये, पहले से किये गये एक्स-रे या सीटी स्कैन के द्वारा, छाती, लिम्फनोड या फेफड़ों में कोई समस्या दिखाई देती है तो उन जगहों से, जांच के लिये बलगम या टिश्यूज के सैंपल निकालने के लिए भी ब्रॉन्कोस्कोपी की जाती है। इस बायोप्सी के दौरान मरीज के ब्लड प्रैशर और शरीर में ऑक्सीजन स्तर की भी जांच की जाती है। ट्रांसब्रॉन्कियल बायोप्सी करने के लिये फाइब्रॉप्टिक ब्रॉन्कोस्कोप का उपयोग किया जाता है जो एक पतली सी ट्यूब होती है। इसके एक सिरे पर टेलीस्कोप लगा हुआ होता है। इस ट्यूब को मरीज की नाक या मुंह के रास्ते फेफड़ों में डाला जाता है। यह बायोप्सी निम्नलिखित दो प्रकार से की जाती है

(i) फ्लेक्सिबल ब्रॉन्कोस्कोपी इस प्रकार की ब्रॉन्कोस्कोपी में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देने की जरूरत नहीं होती। गले और नाक को सुन्न करने के लिये, सुन्न करने वाली दवा जिसे एनेस्थेटिक कहा जाता है, का स्प्रे नाक और मुंह में किया जाता है। ताकि इस प्रक्रिया के समय मरीज को खांसी ना उठे और गले में घुटन भी महसूस ना है। इसमें प्रक्रिया में एक लम्बी, पतली और लचीली ट्यूब को नाक या मुंह के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचा कर छोटे-छोटे टिश्यूज़ को जांच के लिये बाहर निकाल लेते हैं।  

(ii) रिज़िड (कठोर) ब्रॉन्कोस्कोपी इस प्रक्रिया में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है। फिर एक सीधी, खोखली धातु की ट्यूब के द्वारा इस  ब्रॉन्कोस्कोपी प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। 

3. थोरेकोस्कोपिक बायोप्सी (Thoracoscopic Biopsy)- बायोप्सी की इस प्रक्रिया को वीडियो-असिस्टेड थोरैसिक सर्जरी (VATS) बायोप्सी भी कहा जाता है। इसे करने के लिये मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है। फिर एंडोस्कोप चेस्ट कैविटी को सांस नली में डाला जाता है, इसके द्वारा ही अन्य बायोप्सी टूल्स को भी फेफड़ों में डालकर फेफड़ों की अच्छी तरह से जांच की जाती है। शरीर में यदि कोई नोडूयल नजर आता है तो जांच के लिये उसे बाहर निकाल लिया जाता है और यदि कोई चोट है तो उसे भी ठीक कर दिया जाता है। 

4. ओपन बायोप्सी (Open Biopsy)-  इस प्रक्रिया में भी मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है फिर मरीज की चेस्ट कैविटी त्वचा पर एक चीरा लगाना पड़ता है। चीरा कहां और कितना लगाना है यह मरीज की स्थिति को देखकर निर्धारित किया जाता है। फिर एक यन्त्र फॉरसेप के जरिये, फेफड़ों के टिश्यूज़ को जांच के लिये निकला जाता है। फिर चीरे वाले स्थान पर खून को नियंत्रित करने के लिये प्रैशर लगा दिया जाता है और खून के रिसाव को रोकने के लिये बैंडेज लगा देते हैं। यदि टांकों की जरूरत हो तो चीरे के आकार के अनुसार एक या एक से ज्यादा टांके लगा दिये जाते हैं। ओपन बायोप्सी के मामले में मरीज को कई दिन तक अस्पताल में रुकना पड़ सकता है।

लंग बायोप्सी के बाद की देखभाल Care After Lung Biopsy

1. लंग बायोप्सी के बाद मरीज को रिकवरी के लिये कुछ दिनों या कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। मरीज की स्थिति के हिसाब से उसे अस्पताल में रखा जा सकता है। 

2. अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने पर भी घर पर ही कुछ दिनों के लिये आराम करना चाहिये। 

3. व्यायाम आदि नहीं करना चाहिये।

4. वजन ना उठायें।

5. फालतू की यात्रा, घूमने से बचें।

6. आहार संबंधी जानकारी डॉक्टर से लें। 

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कुछ जटिलताएं/समस्या Some Complications/Problems

लंग बायोप्सी के बाद कुछ निम्नलिखित जटिलताऐं/समस्याऐं होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

1. तेज बुखार होना।

2. सीने में दर्द होना।

3. एलर्जी होना।

4. हवा जमा हो जाना।

5. रक्तस्राव होना।

6. सांस लेने में दिक्कत होना। 

7. खांसने समय बलगम में खून आना।

8. छाती पर लालिमा या सूजन होना।

Conclusion  

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको लंग बायोप्सी क्या होती है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लंग बायोप्सी क्या होती है, लंग बायोप्सी के प्रकार, लंग बायोप्सी क्यों की जाती है, लंग बायोप्सी से पहले की तैयारी और लंग बायोप्सी कैसे की जाती है, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से लंग बायोप्सी के बाद की देखभाल और कुछ जटिलताऐं/समस्याऐं, इनके विषय में भी बताया। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको लंग बायोप्सी क्या होती है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लंग बायोप्सी क्या होती है, लंग बायोप्सी के प्रकार, लंग बायोप्सी क्यों की जाती है, लंग बायोप्सी से पहले की तैयारी और लंग बायोप्सी कैसे की जाती है, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · December 8, 2021 at 10:50 am

Good Article

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