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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी बीमारी के बारे में जिसका सामान्य नाम तो एक है लेकिन स्थान अलग-अलग होने से इसके प्रकार अलग हो जाते हैं और नाम में हल्की सी तब्दीली आ जाती है परन्तु वास्तविक नाम वही रहता है। वैसे तो यह रोग किसी भी आयु में हो सकता है मगर 50 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों को होने की संभावना रहती है। इस रोग का मुख्य कारण खानपान होता है। जी, हम बात कर रहे हैं अल्सर की जो होता है पेट में, जो हो सकता है छोटी आंत में और जो हो सकता है भोजन नली में। वैसे तो इस बीमारी का इलाज गोलियों के जरिये हो जाता है मगर गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है। घरेलू उपाय भी इसके उपचार में बहुत कारगर सिद्ध होते हैं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “अल्सर के घरेलू उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको अल्सर के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इससे राहत पाने के घरेलू उपाय क्या हैं?। तो सबसे पहले जानते हैं कि अल्सर क्या होता है? और अल्सर के कितने प्रकार का होता है। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

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अल्सर के घरेलू उपाय
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अल्सर क्या होता है? What is an Ulcer?

अल्सर एक प्रकार के छाले होते हैं जो पेट, भोजन की नली या आंतों की अंदरूनी सतह पर बनते हैं।  सरल शब्दों में कहा जाये तो यह समझिये कि पेट में घाव या छाले होने की स्थिति को अल्सर कहा जाता है। मेडिकल भाषा में इसे पेप्टिक अल्सर (Peptic Ulcer) और गैस्ट्रिक अल्सर (Gastric Ulcer) भी कहा जाता है। जो भी कुछ खाया जाता है उससे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है। इसी हाइड्रोक्लोरिक एसिड के कारण ही भोजन पचता है। पेट में गाढ़े तरल पदार्थ म्युकस की एक चिकनी परत, पेट की भीतरी परत को हाइड्रोक्लोरिक एसिड से बचाती है। परन्तु जब हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा बढ़ने पर गाढ़े तरल पदार्थ म्युकस के साथ तालमेल बिगड़ जाता है तो यह एसिड शरीर के ऊतकों को क्षति पहुंचाने लगता है और पेट में छाले बनने लगते हैं। बदहजमी होने के कारण जब यह एसिड ऊपर भोजन नली में चला जाता है तो गले में छाले पड़ जाते हैं। इसी तरह छोटी आंत में पड़ने वाले छालों को डुओडेनल अल्सर कहा जाता है। गैस्ट्रिक अल्सर में खाने के बाद पेट में दर्द होता है। यदि खाना खाने के बाद डाइजिन जैसी एंटी-एसिड दवा ले ली जाये तो आराम मिल जाता है। डुओडेनल अल्सर में खाली पेट दर्द होता है और खाना खाते ही ठीक हो जाता है।

अल्सर के प्रकार Types of Ulcer

दोस्तो, अल्सर तीन प्रकार के होते हैं। विवरण निम्न प्रकार है

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1. गैस्ट्रिक अल्सर यह अल्सर पेट के अंदर होते हैं। 

2. डुओडेनल अल्सर ये पेट के अंदर छोटी आंत में बनते हैं।

3. एसोफेजल अल्सर ये अल्सर भोजन की नली में होते हैं।

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अल्सर के कारण Cause of Ulcer

अल्सर बनने के निम्नलिखित कारण होते हैं।

1. हाइड्रोक्लोरिक एसिड अल्सर बनने का यह सबसे प्रमुख कारण है। 

2. हेलिकोबेक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया का संक्रमण।

3. बहुत अधिक ऑयली, तीखा, तेज मिर्च मसाले वाला भोजन, विशेषकर जंक फूड।

4. लिवर, किडनी, फेफड़ों से जुड़े रोगों से ग्रस्त होना। 

5. कुछ दवाओं का सेवन जैसे नॉन स्टेरिओडल एंटीएंफ्लामेट्री ड्रग्स, आइब्यूप्रोफ़ेन, एस्पिरिन, नेपरोक्सन आदि। 

6. रेडियेशन क्षेत्र का उपचार।

7. शराब का अधिक सेवन।

8. धूम्रपान, या तंबाकू का अन्य रूप में प्रयोग।

9. आनुवंशिक कारण

10. 50 वर्ष से अधिक आयु होने पर अल्सर की संभावना रहती है।

अल्सर के लक्षण Symptoms of Ulcer

अल्सर होने पर निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं

1. पेट में दर्द होना यह मुख्य लक्षण है। दर्द नाभि के ऊपर और छाती के नीचे के क्षेत्र में होता है। कभी-कभी बिना कुछ खाये पीये भी, बेवजह दर्द होता है। इस दर्द का प्रभाव ज्यादातर रात को और सुबह के समय होता है। दर्द की अवधि कुछ मिनट से लेकर कई घंटों की हो सकती है।

2. असहजता। कुछ भी खाने पीने के बाद व्यक्ति अपने को सहज महसूस नहीं कर पाता।

3. पेट में, सीने में जलन होना। 

4. पेट फूलना या सूजन।

5. दर्द, जलन, असहजता, सूजन आदि के कारण ठीक से नींद ना आना।

6. जी मिचलाना, उल्टी होना। उल्टी होने पर कुछ राहत महसूस होती है।

7. भूख ना लगना

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8. गहरा मल आना, मल में खून भी देखा जा सकता है।

9. खून की कमी होना।

10. वजन कम होना। 

अल्सर का परीक्षण Ulcer Test

1. मेडिकल हिस्ट्री (Medical History)- डॉक्टर सबसे पहले मरीज से उसकी पिछली मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। पिछली दवाओं और वर्तमान दवाओं के बारे में जानकर समीक्षा करते हैं। 

2. शारीरिक परीक्षण (Physical Test)- पेट की सूजन, पेट में दर्द, कठोरता, नरमी आदि की जांच करते हैं। स्टेथस्कोप के जरिये पेट की आवाज सुनते हैं। 

3. लैब टेस्ट (Lab Test)- लैब टेस्ट में निम्नलिखित टेस्ट शामिल हो सकते हैं

(i)  यूरिया ब्रेथ टेस्ट (Urea Breath Test)- मरीज को एक विशेष पेय पिलाकर यह हेलिकोबेक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया की स्थिति जानने के लिये टेस्ट किया जाता है। हेलिकोबेक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया इस उत्पाद को कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित कर देते हैं। फिर सांस का सेम्पल लेकर लैब में जांच की जाती है। यदि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक आती है तो, हेलिकोबेक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया की उपस्थिति कन्फर्म हो जाती है।

(ii) ब्लड टेस्ट (Blood Test)- बल्ड में संक्रमण के स्तर जांचने के लिये बल्ड सेंपल लेकर लैब भेज दिया जाता है।

(ii) अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टिनल एंडोस्कोपी और बायोप्सी (Endoscopy and Biopsy)- इसके द्वारा मरीज के जी।आई।ट्रैक्ट को भीतर से समझने की कोशिश की जाती है। 

(iii) कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्केन (CT Scan) मरीज के पेट के अंदर और छोटी आंत की दीवार में छेद आदि के स्पष्ट चित्र बनते हैं।

(iv) मल परीक्षण (Stool Test) हेलिकोबेक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया की जांच के लिये मल परीक्षण भी किया जाता है।

अल्सर का उपचार Ulcer Treatment 

दोस्तो, अल्सर का उपचार इसके प्रकार या कारण के आधार पर किया जाता है। कई मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ती है। विवरण निम्न प्रकार है

1. हेलिकोबेक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के संक्रमण के मामले में यद्यपि कोई विशेष दवा काम नहीं करती परन्तु इससे बचाव के लिये डॉक्टर ट्रिपल थेरेपी या डबल थेरेपी को अपनाते हैं। ट्रिपल थेरेपी में मरीज को बिस्मथ सबसालिसिलेट और टेट्रासाइक्लिन टेबलेट को दिन में चार बार और मेट्रोनिडाजोल को दिन में तीन बार दिया जाता है। अक्सर  80 से 95 प्रतिशत लोगों का अल्सर ठीक हो जाता है। इस थेरेपी के हानिकारक प्रभाव और जटिलताओं को देखते हुऐ डबल थेरेपी का विकास हुआ। इसमें अमोक्सीसीलिन और मेट्रोनिडाजोल टेबलेट मरीज को दिन में तीन बार दी जाती हैं।

2. गैस्ट्रिक अल्सर के मामलों में एंटासिड दवाऐं दी जाती हैं जो दो महीने या अधिक समय तक चलती हैं। 

3. नॉन स्टेरिओडल एंटीएंफ्लामेट्री ड्रग्स और एस्पिरिन आदि दवाओं से हुऐ अल्सर के उपचार के लिये इन दवाओं में बदलाव करने, इनको बंद करने या इनके विकल्प स्वरूप अन्य दवाऐं लेने की सलाह दी जा सकती  है। 

4. बहुत कम मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी द्वारा अल्सर को आंतों से पूरी तरह से निकाल दिया जाता है। एसिड के उत्पादन को कम करने के लिए तंत्रिका आपूर्ति को काट दिया जाता है। रक्तस्राव वाली कोशिकाओं को टांकों की मदद से बांध दिया जाता है। आंत के अन्य अंग से ऊतकों को लेकर अल्सर वाली जगह पर लगा दिया जाता है। 

अल्सर के घरेलू उपाय Home Remedies for Ulcer

दोस्तो, अब आपको बताते हैं कुछ अल्सर से राहत पाने के घरेलू उपाय जो निम्न प्रकार हैं

1. गाय का घी और हल्दी (Cow Ghee and Turmeric)- गाय का घी और हल्दी में पेट के अल्सर के उपचार में रामबाण उपाय माना जाता है।  एक चम्मच गाय के घी में चुटकी भर हल्दी मिलाकर सेवन करें। पेट के अल्सर के अतिरिक्त मुंह के छाले भी ठीक हो जायेंगे। 

2. हल्दी दूध (Turmeric Milk)- हल्दी में अनेक औषधीय गुण होते हैं और दूध विटामिन-डी और कैल्शियम का खजाना। पेट के अल्सर से छुटकारा पाने के लिये एक गिलास गाय के दूध में आधी चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीयें। आराम लग जायेगा। हल्दी दूध पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “हल्दी दूध पीने के फायदे और नुकसान” पढ़ें। 

3. ठंडा दूध (Cold Milk)- ठंडे दूध के फायदे भी कई बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक औषधी के रूप में काम करता है जैसे वजन कम करे एसिडिटी की समस्या दूर करे, शरीर को हाइड्रेट रखे आदि। ठंडे दूध में एलेक्‍ट्रोलाइट्स होते हैं जो शरीर को डीहाइड्रेशन से बचाते हैं। पेट में अल्सर से राहत पाने के लिये आधा गिलास ठंडे दूध में आधा गिलास पानी मिलाकर पीयें। कुछ ही दिनों में अल्सर में आराम लग जायेगा।

4. आँवला (Amla)-  विटामिन-सी जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर आँवला में फोलिक एसिड, कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन और मैग्नीशियम जैसे खनिज पदार्थ होते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है और इसमें 80 प्रतिशत पानी होता है। पेट में अल्सर के उपचार के लिये बहुत बेहतरीन उपाय है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिये आँवला का मुरब्बा खायें। आँवला पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “आँवला के फायदे और नुकसान” पढ़ें। 

5. मेथी दाना (Fenugreek Seeds)- मेथी में पाये जाने वाला प्रोटीन और निकोटिनिक, पाचन तंत्र के स्वास्थ के लिये मेथी अत्यंत लाभदायक माने जाते हैं। यह अल्सर में भी फायदा पहुंचाती है। पेट में अल्सर से राहत पाने के लिये एक चम्मच मेथी दाना एक कप पानी में उबाल लें। इस पानी को छानकर, इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर पीयें। कुछ ही दिनों में अल्सर में आराम लग जायेगा। मेथी पर विस्तृत जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “मेथी दाने के फायदे” पढ़ें। 

6. सौंफ़ (Fennel)- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सौंफ़ पाचन तंत्र के स्वास्थ के लिये उत्तम मानी जाती है। इसके एंटीस्पास्मोडिक, कार्मिनेटिव गुण पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, पेट फूलना, पेट में गैस बनना, आंत में ऐंठन आदि की समस्या से छुटकारा दिलाते हैं। इसकी भी तासीर ठंडी होती है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाये रखती है। एक चम्मच सौंफ़ के पानी के सेवन से पेट में अल्सर की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। सौंफ़ पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “सौंफ़ खाने के फायदे” पढ़ें

7. लहसुन (Garlic)- लहसुन एक ऐसा पदार्थ है जिसकी उपयोगिता इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है। इसे ‘प्राकृतिक एंटीबायोटिक’ का स्थान प्राप्त है। प्रथम विश्व युद्ध के समय कच्चे लहसुन के रस को घावों पर एंटीसेप्टिक के रूप में इस्तेमाल किया गया जिससे हजारों लोगों को बचाने में मदद मिली थी। लहसुन में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण होते हैं। लहसुन के गुण पाचन से सम्बंधित सभी प्रकार के विकारों को खत्म करते हैं। इसका लसीका ग्रंथियों (Lymph) पर लाभकारी प्रभाव होता है। लहसुन शरीर के  घातक पदार्थों को खत्म करता है। लहसुन पेट के कार्यकलापों को नियंत्रित कर पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाये रखता है। अल्सर से राहत पाने के लिये लहसुन की एक कच्ची कली का सेवन करें। लहसुन की कलियों को क्रश करके पानी या दूध के साथ भी सेवन किया जा सकता है। लहसुन पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “लहसुन के फायदे” पढ़ें

8. अदरक (Ginger)- अदरक एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होने के कारण आयुर्वेदिक औषधी के रूप में काम करती है। एस्प्रिन दवा के कारण हुऐ अल्सर को खत्म करने में अदरक कारगर सिद्ध होती है। इसके लिये एक चम्मच पिसी हुई अदरक को एक कप पानी में अच्छी तरह उबालें। इसे छानकर, ठंडा करके पीयें। दिन में तीन बार पी सकते हैं। चाहें तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं।

9. पत्ता गोभी (Cabbage)- पत्ता गोभी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकार जैसे गैस्ट्रिटिस, पेप्टिक व डुओडेनल अल्सर, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम में फायदा पहुंचाते हैं। पत्ता गोभी का जूस एंटीपेप्टिक गुणों से समृद्ध होता है। यह अल्सर पर शक्तिशाली प्रभाव छोड़ता है। यह तीनों प्रकार के यानी गैस्ट्रिक, डुओडेनल और एसोफेजल अल्सर में फायदा करती है। इसके लिये अल्सर की समस्या में पत्ता गोभी की सब्जी, सलाद और जूस का सेवन करें। 

10. केला (Banana)- जब पौष्टिकता की चर्चा होती है तो फलों में केले का नाम सबसे पहले आता है। केला ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, विटामिन-बी6 और विटामिन-ए से भरपूर होता है। कच्चे केले में फॉस्फेटिडिलकोलाइन और पेक्टिन जैसे तत्व पेट में अल्सर उत्पन्न करने वाले कारणों को खत्म करने में मदद करते हैं। केले का एंटासिड प्रभाव पेट के अल्सर से बचाव करता है और एसिडिटी को कम करके पेट की जलन को कम करता है। अल्सर की समस्या होने पर प्रतिदिन दो केले खायें और कच्चे केले की सब्जी बनाकर खायें। 

11. नारियल पानी (Coconut Water)- नारियल पानी प्राकृतिक रूप से शुद्ध और मीठा होता है, इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल नहीं होता। पाचन तंत्र के लिये तो यह एक बेहतरीन डाइजेशन टॉनिक के रूप में काम करता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का प्रमुख स्रोत है। यह विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम तथा फाइबर जैसे अनेक पोषक तत्व होते हैं। नारियल पानी को आब-ए-हयात यानी जिन्दगी देने वाला पानी भी कहा जा सकता है। यह पेट से जुड़ी सभी बीमारियों जैसे एसिडिटी, कब्ज, दस्त आदि में बेहद फायदेमंद होता है। इसके एंटीअल्सरोजेनिक और साइटोप्रोटेक्टिव गुण पेट में अल्सर से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। अल्सर की समस्या होने पर कच्चा नारियल खायें और नारियल पानी पीयें। नारियल पर विस्तार से जानकारी पर हमारा पिछला आर्टिकल “नारियल पानी पीने के फायदे” पढ़ें

12. गुड़हल के फूल (Hibiscus Flowers)- गुड़हल के फूलों को अल्सर के उपचार के लिये एक अच्छी औषधी माना जाता है। गुड़हल के फूलों को पीसकर इसका शर्बत बनाकर पीयें।

13. बेल (Bell)- बेल पत्थर (बेलपत्र) का जूस पीने से भी अल्सर में आराम मिलता है।

14. बादाम (Almond)- रात को 5-6 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह उठकर, बादाम का छिलका निकाल लें। बादाम पीसकर दूध में मिलाकर खायें। अल्सर में आराम मिलेगा। 

Conclusion  

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको अल्सर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अल्सर क्या होता है, अल्सर के प्रकार, अल्सर के कारण, अल्सर के लक्षण, अल्सर का परीक्षण और अल्सर का उपचार, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से अल्सर के बहुत सारे घरेलू उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।


Disclaimer यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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