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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, हर कोई हर राह से होकर नहीं गुजरता लेकिन कुछ राहें ऐसी  होती हैं कि जिनसे होकर गुजरने का अनुभव कभी ना कभी हर किसी को हो जाता है। और ये राह है शारीरिक कष्टों के अनुभव की। कुछ सामान्य रोग ऐसे होते हैं जिनका अनुभव कभी ना कभी सभी को हो जाता है। ऐसा ही एक रोग है जो यूरिन से संबंधित है और जिसका बचाव 70 प्रतिशत तक साफ़-सफाई के जरिये और 20 प्रतिशत सावधानियों से हो जाता है। बाकी 10 प्रतिशत के लिये उपचार ही विकल्प होता है। दोस्तो, जिस बीमारी का जिक्र हम कर रहे हैं यद्यपि कोई गंभीर बीमारी नहीं है परन्तु इसमें पीड़ा बहुत होती है। इस रोग में यूरिन पास करते समय दर्द होता है, कभी रुक-रुक कर आता है, कभी बार-बार आता है, कभी यूरिन के साथ रक्त आता है तो कभी पस आती है और यह सब होता है संक्रमण के कारण। इसे मूत्र संक्रमण या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन कहा जाता है। फिर, इस संक्रमण को खत्म करने का उपाय क्या है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय”

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको यूरिन इन्फेक्शन के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसको रोकने के क्या घरेलू उपाय हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि यूरिनरी ट्रैक्ट क्या है, यूरिनरी ट्रैक्ट के कार्य और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन क्या है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय
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यूरिनरी ट्रैक्ट क्या है? – What is the Urinary Tract?

दोस्तो, गुर्दे (Kidneys), मूत्रवाहिनी (Ureters), मूत्राशय (Bladder) और मूत्रमार्ग (Urethra) के संयोजन से मूत्र प्रणाली (Urinary System) बनती है। इसी प्रणाली को वृक्क प्रणाली (Renal System) या मूत्र पथ (UrinaryTract) कहा जाता है। मूत्रवाहिनी (Ureters) दो ट्यूब होती हैं जो मूत्र को गुर्दे (Kidneys) से लेकर मूत्राशय (Bladder) तक लेकर आती हैं। मूत्रमार्ग (Urethra) एक अकेली ट्यूब होती है जो मूत्र को मूत्राशय (Bladder) से प्राइवेट पार्ट तक लेकर जाती है और शरीर से बाहर निकालने का काम करती है। महिला और पुरुष की मूत्र प्रणाली में कोई विशेष अंतर नहीं होता, ये एक समान ही होती है, अंतर केवल मूत्रमार्ग (Urethra tube) की लंबाई में होता है। दोस्तो, यूरिनरी ट्रैक्ट शरीर के अंदर, अन्य भागों की तरह, महत्वपूर्ण भाग होता है। 

यूरिनरी ट्रैक्ट के कार्य – Functions of Urinary Tract

यूरिनरी ट्रैक्ट के मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य होते हैं –

1.  शरीर से अपशिष्ट (Waste) को खत्म करना।

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2. रक्त की मात्रा नियंत्रित करना।

3. रक्तचाप को नियंत्रित करना। 

4. इलेक्ट्रोलाइट्स के नियंत्रण स्तर और चयापचयों (Metabolites) को नियंत्रित करना।

5. रक्त पीएच को रेगुलेट करना।

6. मूत्र के अंतिम निष्कासन के लिये मूत्र पथ का शरीर की जल निकासी के रूप में कार्य करना। 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन क्या है? – What is Urinary Tract Infection?

खराब बैक्टीरिया के यूरिनरी ट्रैक्ट में जमा होते रहने पर पूरी यूरिनरी सिस्टम संक्रमित हो जाती है। इसी को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन कहते हैं। इस बैक्टीरिया के जीवाणु इतने सूक्ष्म होते हैं कि इनको केवल माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। बैक्टीरिया के अतिरिक्त कभी-कभी यह संक्रमण फंगस और वायरस के कारण भी फैलता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन मनुष्यों में होने वाला सामान्य संक्रमण है। बच्चों की तुलना में वयस्कों में यह इन्फेक्शन अधिक होता है और पुरुषों की तुलना में महिलाऐं इस इन्फेक्शन का अधिक शिकार बनती हैं। महिलाओं के अधिक संक्रमित होने के कारणों का जिक्र हम आगे करेंगे। माना जाता है कि लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं और 12 प्रतिशत पुरुषों को अपने जीवनकाल में कभी न कभी यूरिन इन्फेक्शन की समस्या को झेलना पड़ता है। 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के प्रकार – Types of Urinary Tract Infection 

यह इन्फेक्शन मूत्र प्रणाली के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। इसलिये इसकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। विवरण निम्न प्रकार है –

1. सिस्टाईटिस या मूत्राशय का संक्रमण (Cystitis or Bladder Infection) – यह मूत्राशय के अंदर होने वाला संक्रमण है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणालु वाले व्यक्तियों में सूक्षम कवक (Yeast) भी मूत्राशय के संक्रमण (Bladder infection) का कारण बन सकता है।

2. यूरेथ्राइटिस या मूत्रमार्ग संक्रमण (Urethritis or Urethra Infection) – इसमें मूत्राशय से मूत्र को बाहर निकालने वाली नाली यानी मूत्रमार्ग, बैक्टीरिया के कारण संक्रमण हो जाता है। मूत्रमार्ग में सूजन आ जाने के कारण यूरिन पास करते समय बहुत दर्द होता है। 

3. पाइलोनेफ्राइटिस या गुर्दा संक्रमण (Pyelonephritis or Kidney Infection) – यह संक्रमण किडनी को अपनी चपेट में ले लेता है। यह एक गंभीर स्थिति होती है जिसमें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ जाती है। इस संक्रमण के गर्भवती महिलाओं में  होने की संभावना अधिक होती है। इसमें बुखार होता है, यूरिन में ब्लड आता है, जलन होती है और श्रोणि (Groin) में दर्द होता है। 

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यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण – Cause of  Urinary Tract Infection

1. अधिकतर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन ई-कोलाई (E.coli) बैक्टीरिया की वजह से होते हैं जो आमतौर पर पाचन तंत्र में विद्यमान होता है। क्लैमाइडिया (Chlamydia) और माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) बैक्टीरिया से मूत्रमार्ग (Urethra) का संक्रमित होता है मगर ये बैक्टीरिया मूत्राशय (Bladder) को संक्रमित नहीं कर पाते। 

2. गंदा टॉयलेट इस्तेमाल करना, यह सबसे बड़ा और सामान्य कारण है, चाहे वह टॉयलेट अपने घर का हो या पब्लिक टॉयलेट। गंदे टॉयलेट से बैक्टीरिया पनपते हैं जो संक्रमित करते हैं।

3. अपनी पर्सनल साफ़-सफाई ना करना, जिसे सेक्सुअल हाईजीन भी कहा जाता है। इसमें अंडर गार्मेंट्स भी शामिल हैं। 

4. यूरिन को जबरदस्ती ज्यादा देर तक रोक कर रखने से भी शरीर में यूरिन के बैक्टीरिया बनने लगते हैं। 

5. जल्दबाजी में पूरी तरह यूरिन पास ना करना। इससे मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता।

6. डायबिटीज की बीमारी भी इसका कारण बन सकती है।

7. पथरी की समस्या होना। 

8. कमजोर इम्युनिटी सिस्टम।

9. गर्भावस्था।

10. गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग।

11. एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक उपयोग।

12. सहवास (कई बार, तेज गति से, कई लोगों से और कई नये लोगों के साथ करना)। 

महिलाओं में अधिक यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने के कारण – Reasons for More Urinary Tract Infections in Women

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाऐं इस संक्रमण की अधिक शिकार होती हैं, तो जानते हैं इसके कारण जो निम्न प्रकार हैं –

1. जननांग की संरचना (Structure of the Genital)- महिलाओं की जननांग की संरचना इस प्रकार की है कि बैक्टीरिया बहुत आसानी से और बहुत जल्दी मूत्राशय तक पहुंच सकते हैं।

2. मूत्रमार्ग की संरचना (Structure of the Urethra)- पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मूत्रमार्ग (Urethra) छोटा होने के कारण बैक्टीरिया मूत्राशय (Bladder) तक जल्दी पहुंच जाते हैं।

3. डायफ्राम (Diaphragms) – यह एक गर्भनिरोधक पदार्थ है। डायफ्राम का दबाव महिलाओं के मूत्रमार्ग पर पड़ता है जिसके कारण यूरिन पास करते समय मूत्राशय पूरा खाली नहीं हो पाता और यही संक्रमण का कारण बनता है।

4. शुक्राणुनाशक (Spermicides) – यह एक शुक्राणुनाशक गर्भ निरोधक पदार्थ है जो मूत्राशय में बैक्टीरिया के संक्रमण की संभावना को बढ़ाता है। 

5. टेम्पॉन (Tampon) – यह एक छोटा रुई का प्लग होता है जो पीरियड्स के समय अंदर ही अंदर रक्त को सोखने का काम करता है। इसका उपयोग भी बैक्टीरिया के संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है।

6. निम्न गुणवत्ता वाले कंडोम का उपयोग (Use of Low Quality Condoms)- निम्न गुणवत्ता वाले कंडोम जैसे कम या नॉन-लुब्रीकेटिड कंडोम के उपयोग से महिला की आंतरिक त्वचा में घर्षण (Friction) और जलन होती है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने की निश्चितता बढ़ जाती है। 

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7. सहवास (Sex)- सहवास के समय महिलाओं के मूत्र मार्ग पर अधिक दबाव पड़ता है जिससे बैक्टीरिया गुदा से मूत्राशय तक आसानी से पहुंच जाते हैं। सहवास के बाद यूरिन पास करने के बाद भी अधिकतर महिलाओं के यूरिन में बैक्टीरिया की उपस्थिति होती है, यद्यपि ये 24 घंटे के भीतर शरीर इन बैक्टीरिया से छुटकारा पा लेता है। आंत के बैक्टीरिया (Bowel bacteria) भी मूत्राशय से चिपक कर संक्रमण उत्पन्न करते हैं। 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के लक्षण – Symptoms of Urinary Tract Infection 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के लक्षण संक्रमण के स्थान और स्थिति पर निर्भर करते हैं। विवरण निम्न प्रकार है – 

1. निचले मूत्र मार्ग संक्रमण के लक्षण – 

(i)   मूत्राशय संक्रमित  होने पर मूत्रमार्ग और मूत्राशय में सूजन आ जाना।

(ii) यूरिन पास करते समय दर्द और जलन होना।

(iii) बार बार यूरिन आना और रात को भी कई बार यूरिन पास करने के लिये जाना। या यूरिन की मात्रा बहुत कम होना। 

(iv) ऐसा महसूस होना जैसे यूरिन अभी निकल जायेगा।

(v)  यूरिन में सामान्य से अधिक दुर्गंध आना।

(vi) यूरिन में पस या खून आना।

(vii) पेट के निचले वाले हिस्से में या पेल्विस में दर्द होना।

(viii) हल्का बुखार होना (101 फ़ारेनहाइट से कम)।

(ix) सर्दी लगना, कमजोरी, थकावट महसूस होना।

2. ऊपरी हिस्से में मूत्र पथ के संक्रमण (मूत्रवाहिनी और किडनी के संक्रमण) के लक्षण –

(i) तेज बुखार होना (101 फ़ारेनहाइट से ज्यादा)। 

(ii) सर्दी से कंपकपी छूटना।

(iii) मितली, उल्टी होना।

(iv) फ्लेंक पेन (Flank pain)। यह ऐसा दर्द है जो शरीर के एक तरफ पेट के उपरी हिस्से और पीठ के बीच के क्षेत्र में होता है। 

3. मूत्र पथ के संक्रमण के अन्य लक्षण – 

(i) छोटे बच्चों में बुखार, चिड़चिड़ापन, पीलिया, उलटी, दस्त आदि।

(ii) वृद्ध व्यक्तियों में भूख न लगना, सुस्ती, बार-बार मूड बदलना, बुखार या हाइपोथर्मिया (Hypothermia) आदि।

(iii) गर्भवती महिलाओं में यूटीआई का खतरा ज्यादा होता है, उनको बच्चे के जन्म से पहले यूरिन टैस्ट करवाते रहना चाहिये। 

(iv) यूटीआई कभी-कभी यौन संचारित रोग भी हो सकता है, ऐसी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का परीक्षण – Urinary Tract Infection Test

मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यूरिन टैस्ट कराने की सलाह देंगे। इसकी रिपोर्ट पर लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और बैक्टीरिया की मौजूदगी को समझेंगे। बार-बार होने वाले यूटीआई के मामलों में निम्नलिखित टैस्ट कराने की सलाह दे सकते  हैं  – 

1. इमेजिंग (Imaging) – अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, रेडिएशन ट्रैकिंग (Radiation tracking) और एक्स रे के माध्यम से डॉक्टर यूरिनरी ट्रैक्ट का मूल्यांकन करेंगे। 

2. यूरोडायनामिक्स (Urodynamics) – इससे यह पता लगाया जाता है कि यूरिनरी ट्रैक्ट किस प्रकार से यूरिन को स्टोर और निष्कासित कर रहा है।  

3. सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy) – इसमें एक पतले ट्यूब की मदद से कैमरे को मूत्रमार्ग (Urethra) के जरिये अंदर डालकर मूत्राशय और मूत्रमार्ग का आंकलन किया जाता है। 

4. इंट्रावेनस पयलोग्राम या आईवीपी (Intravenous Pyelogram or IVP)- इस प्रक्रिया में मरीज के हाथ की नसों में इंजेक्शन लगाकर डाई शरीर में पहुंचायी जाती है। यह मूत्र मार्ग से गुज़रती है और थोड़ी देर बाद पेट का एक्स-रे किया जाता है जिससे मूत्र मार्ग की इमेज मिल जाती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का उपचार – Treatment of Urinary Tract Infection

दोस्तो, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का उपचार इसके कारणों  पर निर्भर करता है यानी जो कारण है उसी के अनुसार निवारण है। विवरण निम्न प्रकार है –

1. बैक्टीरिया के कारण हुऐ इन्फेक्शन के मामले में एंटीबायोटिक दवाऐं दी जाती हैं। अधिकतर इन्फेक्शन बैक्टीरिया के कारण ही हुऐ होते हैं।

2. वायरस के मामले में एंटीवायरल दवाऐं दी जाती हैं और कवक (Fungi) के कारण से हुऐ इन्फेक्शन के लिये एंटीफंगल दवाऐं दी जाती हैं। 

3. आवश्यकतानुसार दर्द निवारक दवाऐं भी दी जा सकती हैं। 

4. UTI के मरीज को अधिक से अधिक तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है ताकि बार-बार यूरिन पास करने से उसके शरीर से बैक्टीरिया निकल सकें। 

5. दर्द की स्थिति में मरीज को पीठ तथा पेट में हीटिंग पैड से सिकाई करने की सलाह दी जाती है। 

6. सामान्यतः मरीज 2-3 दिन में ठीक हो जाता है। जटिल यूटीआई वाले मरीजों जैसे शारीरिक रूप से कमजोर, हृदय प्रत्यारोपण करावाये हुऐ और गर्भवती महिलाओं को 7-14 दिन भी लग सकते हैं। 

यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय – Home Remedies For Urine Infection

निम्नलिखित घरेलू उपाय अपनाकर आप यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं –

1. यूरिन को न रोकें (Do not Hold Urine)- यूरिन इन्फेक्शन का सबसे बड़ा उपाय है, बचाव ताकि यूरिन इन्फेक्शन होने की संभावना ही ना हो। इसके लिये जरूरी है कि जब भी आपको यूरिन आये, बिना समय गंवाये तभी आप इसे पास करें। इसको रोक कर रखना सबसे बड़ी गलती है और यही गलती यूरिन इन्फेक्शन का कारण बनती है। यूरिन पास करने के लिये सब जगह पब्लिक टॉयलेट बने हुऐ हैं। हां, यदि पब्लिक टॉयलेट गंदा हो तो इसका उपयोग ना करें। सुलभ शौचालय भी बहुत जगह उपलब्ध हैं जहां साफ़-सफाई का ध्यान रखा जाता है। महिलाओं के लिये यह भी सुविधा है कि किसी भी छोटे बड़े रेस्टोरेंट, होटल में जाकर टॉयलेट का इस्तेमाल कर सकती हैं, इसके लिये कोई मना नहीं कर सकता। 

2. सफाई (Cleaning)- यूरीन इंफेक्‍शन का बड़ा कारण है टॉयलेट का गंदा होना। गंदे टॉयलेट में बैक्टीरिया पनपते हैं जो प्राइवेट पार्ट के आस-पास जमा होकर इन्फेक्शन फैलाते हैं। इस लिये अपने घर के टॉयलेट का विशेष ध्यान रखना चाहिये और रोजाना कीटाणुरोधी द्रव से साफ़ करना चाहिये। देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करता है कि घर में दो स्थान ऐसे होते हैं जहां स्वास्थ की दृष्टि से विशेष तौर पर सफाई रखनी चाहिये – एक है रसोई और दूसरा है टॉयलेट। यदि ये साफ़ हैं तो समझिये आप 50 प्रतिशत सुरक्षित हैं। 

3. सेक्सुअल हाइजीन मेंटेन करें (Maintain Sexual Hygiene)- दोस्तो, यूरीन इंफेक्‍शन हो या प्राइवेट पार्ट के आस-पास के क्षेत्र पर त्वचा विकार/रोग या अन्य कोई इंफेक्‍शन, इनसे बचने के लिये सेक्सुअल हाईजीन मेंटेन करना बेहद जरूरी है। महिला हो या पुरुष सब को अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करना आवश्यक है। महिलाओं के लिये तो यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि उनके प्राइवेट पार्ट की संरचना इस प्रकार की है कि उनको इंफेक्‍शन बहुत जल्दी हो जाता है। प्राइवेट पार्ट और उससे जुड़ी वस्तुओं जैसे अंडर-गारमेंट्स, बाल आदि, गतिविधियों की हर दृष्टिकोण से साफ़-सफाई रखना ही सेक्सुअल हाईजीन कहलाता है। सेक्सुअल हाईजीन पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “सेक्सुअल हाईजीन मेंटेन करने के उपाय” पढ़ें। 

4. पीरियड्स में साफ-सफाई (Menstrual Hygiene)- महिलाओं को पीरियड्स के समय में सफाई का और भी ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि जरा सी लापरवाही यूरीन इंफेक्‍शन का कारण बन सकती है। पीरियड्स के दौरान सफाई रखना भी सेक्सुअल हाईजीन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीरियड के समय सैनिटरी पैड को प्रत्येक छः घंटे बाद  इनको बदलना चाहिये, यह पैड बदलने का आदर्श समय माना जाता है। परन्तु यदि पैड जल्दी भर जाये तो तीन या चार घंटे बाद पैड बदलना चाहिये। रियूजेबल कॉटन क्लॉथ पैड्स या बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड अच्छे माने जाते हैं और डिस्पोजल की दृष्टि से भी पर्यावरण के लिये सुरक्षित होते हैं। इसके अतिरिक्त पैंटी की भी सफाई रखें  और सिंथेटिक के बजाय कॉटन की पैंटी पहनें और यह अधिक टाइट ना हो। सैनिटरी पैड पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “सैनिटरी पैड के फायदे” पढ़ें। 

5. पानी (Water)- शरीर को हाइड्रेट रखने के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। खूब पानी पीयें जिससे यूरीन भी खूब बने। हमारे शरीर के विषैले पदार्थ निकल यूरिन के जरिये निकलते रहते हैं। पानी की कमी मूत्र मार्ग में जलन और खुजली का कारण बनती है। इसलिये प्रतिदिन जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें इससे यूरिन करते समय जो जलन होती है वह नहीं होगी। और यूरिन भी खुलकर आयेगा। इसलिये उन व्यक्तियों विशेषकर महिलाओं को जिन्हें अक्सर यूटीआई की समस्या होती रहती है प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पीना चाहिये। पानी पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “शरीर में पानी की कमी दूर करने के उपाय” पढ़ें। 

6. पेय पदार्थ (Beverage)- यूरिन इंफेक्शन से छुटकारा पाने के लिये मौसम के अनुसार पेय पदार्थ पीयें जैसे नारियल पानी, नींबू पानी और गन्ने का जूस आदि। इनमें नारियल और नींबू  हर मौसम में उपलब्ध होते हैं। ये सभी यूरिन के जरिये हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। नारियल पानी में गुड़ और धनिया पाउडर मिलाकर पीयें। इस से यूरिन इन्फेक्शन में जल्दी आराम मिलेगा।

7. आंवला (Amla)- आंवला विटामिन-सी से भरपूर होता है और विटामिन-सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करके बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। यूरिन इन्फेक्शन से छुटकारा पाने के लिये आंवला का उपयोग निम्न प्रकार से कर सकते हैं –

(i)  आंवला और हल्दी – एक कप पानी में एक चम्मच आंवला पाउडर और एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर तब तक उबालें जब तक कि यह आधा कप ना रह जाये। इसे तीन से पांच दिन तक दिन में तीन बार पीयें।

(ii) आंवला और शहद –  आंवला के 50 मि.ली. जूस में 30 मि.ली. शहद मिलाकर दिन में तीन बार पीयें। 7 दिन तक पीने से यूरिन खुलकर आयेगा और जलन भी नहीं होगी। 

(iii) आंवला और धनिया – आंवला और धनिया का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इस पानी को छानकर पीयें। यूरिन इन्फेक्शन में आराम आ जायेगा।  

(iv) आंवला और इलाइची – एक चम्मच आंवला के पाउडर में दो, चार इलाइची के दाने पीसकर मिला दें। इसे पानी के साथ कुछ दिन तक सेवन करें। निश्चित रूप से यूरिन इन्फेक्शन में फायदा होगा। 

आंवला पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “आंवला के फायदे” पढ़ें।  

8. धनिया (Coriander)- 15 ग्राम धनिया रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर, छानकर और इसमें मिश्री मिलाकर पीयें। इससे यूरिन में जलन कम हो जायेगी और कुछ दिनों में यूरिन इन्फेक्शन भी ठीक हो जायेगा। 

9. इलायची (Cardamom)- इलायची की तासीर ठंडी होने के नाते यह यूरिन इन्फेक्शन में तत्काल राहत दिलाने में मदद करती है। इलायची का पाउडर और सोंठ का पाउडर समान मात्रा में लेकर अनार के जूस या दही के पानी में मिलायें और इसमें सेंधा नमक मिलाकर पीयें। यूरिन इंफेक्शन की समस्या जल्द खत्म हो जायेगी।  इलायची पर विस्तृत जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “इलायची खाने के फायदे और नुकसान” पढ़ें।

10. अनानास (Pineapple)- अनानास के ब्रोमेलेन एन्ज़ाइम में एंटीइंफ्लामेटरी गुण मौजूद होते हैं जो यूरिन इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करते हैं। इसके लिये प्रतिदिन एक कप अनानास खायें या आधा गिलास अनानास का जूस निकालकर पीयें। इससे जल्दी ही यूरिन इन्फेक्शन से राहत मिल जायेगी। एक शोध भी यही बताती है कि अनानास में पाये जाने वाला ब्रोमलेन एंजाइम एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव प्रदर्शित करता है, जो यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण को कम करने में मदद कर सकता है। 

11. क्रैनबेरी का जूस (Cranberry Juice)- प्रोएंथोस्यानिडींस (Proanthocyanidin) पॉलीफेनोल्स का एक वर्ग है जो कई पौधों में होता है जैसे क्रैनबेरी, ब्लूबेरी और अंगूर के बीज। बतौर रसायन यह फ्लेवोनोइड हैं जो यूरिन इन्फेक्शन उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को इन्फेक्शन फैलाने से रोकते हैं। यदि रोजाना क्रैनबेरी का आधा गिलास जूस पीया जाये तो यूरिन इन्फेक्शन होगा ही नहीं, और जिनको यह इन्फेक्शन हो चुका है उनको दिन में तीन बार एक-एक गिलास क्रैनबेरी का जूस पीना चाहिये। यदि किसी को किडनी स्टोन की समस्या है तो उसे क्रैनबेरी जूस को नहीं पीना चाहिये।

12.  चावल का पानी (Rice Water)- चावल का पानी यूरिन इन्फेक्शन के उपचार में अत्यंत लाभकारी होता है। इसके सेवन से इन्फेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। यूरिन पास करते समय होने वाली जलन में भी आराम लग जायेगा। यूरिन इन्फेक्शन की समस्या में आधा गिलास चावल का पानी लेकर इसमें एक चम्मच चीनी मिलाकर पीयें। 

13. सेब का सिरका (Apple Vinegar)- सेब के सिरके में मौजूद एन्ज़ाइम्स, पोटेशियम और अन्य खनिज उन बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं जो यूरिन इन्फेक्शन का कारण बनते हैं। सेब का सिरका प्राकृतिक एन्टिबायोटिक के रूप में काम करता है। एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका, एक चम्मच का रस और एक चम्मच शहद अच्छी तरह मिलाकर पीयें। इसे दिन में दो बार पी सकते हैं। 

14. दही (Curd)- यूरिन इन्फेक्शन की समस्या में अधिक से अधिक भोजन के साथ दही का सेवन करें। यह फ़िल्टर की तरह काम करती है और शरीर से यूरिन इन्फेक्शन के बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करती है और यूरिन में होने वाली जलन को शांत करती है। 

15. बादाम (Almond)- यूरिन इन्फेक्शन के उपचार में बादाम भी लाभदायक होते हैं। इसके सेवन से यूरिन में होने वाली जलन शांत होती है और दर्द भी खत्म होता है। इसके लिये 5-7 बादाम, 2 छोटी इलायची और थोड़ी सी मिश्री पीसकर इसके पाउडर को पानी में मिलाकर सेवन करें। निश्चित रूप से आराम लग जायेगा। 

16. कुलथी (Kulthi)- जैसे अरहर, मूंग, मसूर, उड़द की दाल होती है वैसे ही कुलथी भी एक दाल होती है। इसका तीन पत्तियों वाला पौधा होता है जिसे अंग्रेजी में हार्स ग्राम कहा जाता है। यह कई बीमारियों में काम आती है। यूरिन इंफेक्शन के उपचार के लिये कुलथी के बीजों का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली पानी में मिलाकर पीयें। 

17. गेहूं (Wheat)- गेहूं के उपयोग से भी यूरिन इंफेक्शन को दूर किया सकता है। इसके लिये गेहूं के 10-15 दाने रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसे छानकर इस पानी में थोड़ी सी चीनी मिलाकर पीयें। इससे यूरिन में होने वाली जलन नहीं होगी। 

18. प्याज (Onion)- 50 ग्राम प्याज को बारीक-बारीक काटकर आधा लीटर पानी में अच्छी तरह तब तक उबालें जब तक कि यह पानी आधा ना रह जाये। इस पानी को छानकर, ठंडा करके पीयें।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यूरिनरी ट्रैक्ट क्या है, यूरिनरी ट्रैक्ट के कार्य, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन क्या है, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के प्रकार, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण, महिलाओं में अधिक यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने के कारण, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के लक्षण, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का परीक्षण और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का उपचार, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से आपको यूरिन इन्फेक्शन रोकने के बहुत सारे घरेलू उपाय भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।
Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको यूरिन इन्फेक्शन से बचने का घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यूरिनरी ट्रैक्ट क्या है, यूरिनरी ट्रैक्ट के कार्य, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन क्या है, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के प्रकार, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण, महिलाओं में अधिक यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने के कारण, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के लक्षण, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का परीक्षण और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का उपचार, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · July 2, 2022 at 6:56 pm

It’s excellent Article from medical point of view.

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