Bipolar Disorder एक ऐसी जटिल मानसिक बीमारी है, जिससे पीड़ित रोगी का मन लगातार कई महीनों या हफ्तों तक उदास रहता है , या फिर वो बहुत ज्यादा खुश और उत्साहित रहता है।  इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का मूड़ बारी-बारी से दो अलग और विपरित अवस्थाओं में परिवर्तित होता रहता है।  यहां तक कि कई बार व्यक्ति चाहकर भी अपने व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। बाइपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार का मूड डिसऑर्डर है, जिसे उन्माद और हाइपोमेनिया के रूप में समझा जा सकता है।  इससे पीड़ित मरीज कभी-कभी खुद को इतना ऊर्जावान महसूस करते हैं , कि उन्हें बहुत सारा काम करने के बाद भी थकान महसूस नहीं होती है और कभी-कभी व्यक्ति खुद को ऊर्जाहीन व उदास महसूस करता है।

लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर के लिए डाइग्नोस्टिक क्राइटेरिया काफी कठिन होता है। असल में कई तरह के बाइपोलर डिसऑर्डर मौजूद हैं। वैसे तो हर एक तरह का बाइपोलर डिसऑर्डर काफी सीरियस होता है, लेकिन आमतौर पर, प्रिस्क्रिप्शन मेडिकेशन और साइकोथेरेपी के जरिए, ये ट्रीट भी हुआ करते हैं। अगर आपको ऐसा लगता है, कि आप भी किसी ऐसे इंसान को जानते हैं, जिसे बाइपोलर डिसऑर्डर है, तो अपने उस इंसान को सपोर्ट करे ताकि उसकी  बीमारी और ज्यादा ना हो। यह तीन कंडीशन में होता है।  तो आइये जानते है वो कौन से तीन कंडीशन है।

Bipolar Disorder क्या होता है
  1. मेनिया (Mania)
  2. डिप्रेशन (depression)
  3. हाइपोमेनिया (Hypomania) 

मेनिया क्या होता है?(What is Mania):- 

  मेनिया या उन्माद एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो डिप्रेशन का भी नेक्सट लेवल है, लेकिन इसके बारे में कम ही बात होती है। मेनिया कई तरह का हो सकता है और इसके कई कारण हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश और उत्साह से भरा दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर कई मानसिक स्थितियों से लड़ रहा होता है। मेनिया में इंसान अपने बारे में खूब बढ़ा चढ़ाकर बखान करता है। वह अपनी हैसियत से बड़ी बातें करता है और वैसा ही दिखावा करने की कोशिश करता है। उसका व्यवहार सामान्य व्यक्ति जैसा नहीं रहता।

ऐसा व्यक्ति राह चलते राहगीर से भी ऐसे मिलता है जैसे उसको बरसों से जानता है। ये किसी अंजान से भी बात करने की कोशिश करता है। कोई तारीफ कर दे तो ऐसे व्यक्ति खुशी से फूल के कुप्पा हो जाते हैं, लेकिन अगर किसी ने इनकी बात को नहीं माना या उसे गलत साबित किया तो मेनिया से पीड़ित इंसान नाराज़ हो जाता है।

डिप्रेशन के उलट मेनिया में व्यक्ति बहुत बोलने लगता है। डिप्रेशन में सेक्स करने की इच्छा कम या खत्म हो जाती है, जबकि मेनिया में जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। मेनिया की हालत कभी-कभी बेहद ख़र्चीला बना देती है, व्यक्ति अपने आप को बड़ा समझने लगता है। कई बार इस उन्माद में व्यक्ति असामाजिक तक हो जाता है।

मेनिया के लक्षण (Symptoms of mania):- 

मेनिया के कुछ निम्नलिखित लक्षण है , जो रोगियों में पाए जाते है।

  1. बिना कारण हँसना, बोलना, नाचना, गाना,
  2. सामान्य से अधिक खुश रहना,
  3. सोने की इच्छा में कमी,
  4. बड़े-बड़े दावे (बातें) करना, खुद को बड़ा बताना,
  5. यौन इच्छा में वृद्वि,
  6. अपनी क्षमता से परे खर्चे करने की इच्छा करना,
  7. छोटी-छोटी बातों पर या बेवजह गुस्सा हो जाना, विवादो या झगडों में पड़ जाना.

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मेनिया के कारण (Due to mania):- 

इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि-

  1. दिमाग में रसायनों का असंतुलित होना,
  2. ऐसी किसी घटना का होना जिसका रोगी के जीवन पर गहरा असर पड़ा हो,
  3. किसी तरह का मानसिक दबाव होना,

मेनिया के उपचार(Treatment of mania)

 इस रोग के उपचार की सबसे उपयुक्त विधि मुक्त साहचर्य है। प्रारंभ में सम्मोहन का प्रयोग होता था। किंतु यह सफल नहीं रहा। मुक्त साहचर्य से रोगी का रुख जीवन के प्रति परिवर्तित हो जाता है और वह स्थायी रूप से, अल्प अथवा दीर्घकाल में रोग से मुक्त हो जाता है। मनोवैज्ञानिक विश्लेषण तथा मानसिक स्वास्थ्य के नियमों से अवगत कराने से लाभ होता है। इसमें औषधि, प्रघात चिकित्सा तथा शल्य उपचार का प्रयोग नहीं किया जाता।

 डिप्रेशन (Depression):- 

आजकल लोग ज़िंदगी की भाग दौड़ में इतना व्यस्त हो जाते हैं , कि कुछ समय बाद ही वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. यह एक मानसिक बीमारी होती है, जो कुछ लोगों को तो थोड़े समय के लिए ही रहती है, लेकिन कई लोगों का यही डिप्रेशन एक भयानक रूप भी ले लेता है, इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है।  इसी कारण इंसान की रोज़मर्रा ज़िंदगी और उसके कामकाज में बुरा प्रभाव पड़ता है। डिप्रेशन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है , और डिप्रेशन होने का कोई स्पष्ट कारण नही है, यह कई मिलेजुले कारणों से

होता है। फिर भी इसके कुछ कारण यह माने जाते हैं- किसी नज़दीकी की मौत, आर्थिक परेशानी, नौकरी का चले जाना जा ना मिलना, प्यार में धोखा, शादी का टूटना, लगातार खराब सेहत, बेमन का काम, असफलता आदि।

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डिप्रेशन के लक्षण (Symptoms Of Depression):-

  1. उदासी। 
  2. अकेलापन। 
  3. बहुत ज्यादा गुस्सा। 
  4. अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे। 
  5. बिस्तर से उठने या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी आपको टास्क लगती हैं। 
  6. आप लोगों से कटने लगे हैं। 

डिप्रेशन के कारण (Causes Of Depression):-

  1. माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव। 
  2. शिक्षा और रोजगार का दबाव। 
  3. पारिवारिक समस्याएं। 
  4. रिलेशनशिप की समस्याएं। 
  5. हॉर्मोन्स में बदलाव और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होना। 
  6. किसी काम में अगर उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिले या वह काम बिगड़ जाए। 

डिप्रेशन का इलाज (Treatment of depression):-  

अगर आपको खुद में कुछ भी डिप्रेशन जैसा लगे तो सायकाइट्रिस्ट या मनोचिकित्सक के पास जाएं।  सलाह लेने में कोई कोताही न बरतें। सायकाइट्रिस्ट की बताई दवाओं के नियमित रूप से सेवन करें।

हाइपोमेनिया (Hypomania) :-  

 एक मनोवैज्ञानिक शब्द है,जिसका उपयोग उन्माद के समान मानसिक स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके लक्षण कम स्पष्ट होते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं मनोदशा, विघटन, और ज्यादातर मामलों में जलन की अधिक सुविधा है।  हाइपोमेनिया एक मनोवैज्ञानिक शब्द है जिसका उपयोग उन्माद के समान मानसिक स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके लक्षण कम स्पष्ट होते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं मनोदशा, विघटन, और ज्यादातर मामलों में जलन की अधिक सुविधा है।  हालांकि, हाइपोमेनिया वाले लोग कुछ नकारात्मक परिणाम भी भुगत सकते हैं। सबसे अधिक समस्या यह है कि वे जोखिम भरा व्यवहार करते हैं, क्योंकि वे अजेय महसूस करते हैं।

हाइपोमेनिया के लक्षण (Symptoms of hypomania):-

  1. दबाव भरा भाषण। 
  2. फुलाया आत्म-सम्मान या भव्यता। 
  3. नींद की जरूरत में कमी। 
  4. विचारों की उड़ान या व्यक्तिपरक अनुभव जो विचार रेसिंग कर रहे हैं। 
  5. आसानी से भटकना। 
  6. लक्ष्य-निर्देशित गतिविधि में वृद्धि। 
  7. जोखिम भरा लापरवाह व्यवहार की मांग। 

हाइपोमेनिया के कारण (Due to hypomania):-

इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि-

  1. दिमाग में रसायनों का असंतुलित होना,
  2. ऐसी किसी घटना का होना जिसका रोगी के जीवन पर गहरा असर पड़ा हो,
  3. किसी तरह का मानसिक दबाव होना,

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हाइपोमेनिया उपचार विधि (Hypomania treatment method):- 

इस रोग के उपचार की सबसे उपयुक्त विधि मुक्त साहचर्य है। प्रारंभ में सम्मोहन का प्रयोग होता था। किंतु यह सफल नहीं रहा। मुक्त साहचर्य से रोगी का रुख जीवन के प्रति परिवर्तित हो जाता है और वह स्थायी रूप से, अल्प अथवा दीर्घकाल में रोग से मुक्त हो जाता है। मनोवैज्ञानिक विश्लेषण तथा मानसिक स्वास्थ्य के नियमों से अवगत कराने से लाभ होता है। इसमें औषधि, प्रघात चिकित्सा तथा शल्य उपचार का प्रयोग नहीं किया जाता।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of bipolar disorder):-

  बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्‍या ज्यादातर उन लोगों में पाई जाती है, जो डिप्रेशन से बाहर आने के लिए शराब व नशीली दवाओं का उपयोग करते हैं।  ऐसे लोग शराब के इस्तेमाल से डिप्रेशन से बाहर तो नहीं आ पाते हैं, लेकिन वे बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैं. इससे पीड़ित मरीज में कुछ इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 

  1. नींद न आने की शिकायत होना। 
  2. डिप्रेशन और थकान की समस्या। 
  3. स्वभाव में चिड़चिड़ापन व पागलपन। 
  4. सोचने में परेशानी महसूस होना। 
  5. किसी काम को अच्छे से न कर पाना। 
  6. एनर्जी की कमी महसूस होना। 
  7. हमेशा अपने ख्यालों में खोए रहना। 
  8. दिमाग में चल रही बातों पर काबू न रहना। 
  9. बेकार की चीजों पर बहुत पैसे खर्च करना। 
  10. खाना बहुत कम खाना और चिड़चिड़ापन। 

बाइपोलर डिसऑर्डर  का इलाज (Treatment of Bipolar Disorder):-

बाइपोलर डिसऑर्डर पूरी तरह से क्यूरेबल है।  मनोचिकित्सक की मदद से पीड़ित व्यक्ति फिर से पहले जैसा हो सकता है।  कैसे करें इलाज? आइए, जानते हैं। 

  1. नियमित रूप से दवाइयों के सेवन से पीड़ित व्यक्ति को राहत मिलती है और वो जल्दी ठीक होता है। 
  2. इससे पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त नींद की ज़रूरत होती है। 
  3. दवाइयों के साथ रेग्युलर थेरेपी भी लें।  इससे जल्दी राहत मिलती है। 
  4. अपनी दुनिया से बाहर आएं और दूसरों के साथ बातचीत करना, घूमना-फिरना आदि की आदत बढ़ा दें। 
  5. इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को पूरी तरह से सहयोग करें। 
  6. प्रतिदिन एक्सरसाइज़ और मेडिटेशन करें।
  7. धैर्य रखें।  ये कोई इस तरह की बीमारी नहीं है जो ठीक न हो।  इसलिए मन में विश्वास रखें. समय के साथ आप पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे। 

नोट:  दोस्तों अगर आपके कोई दोस्त या रिलेटिव इस परेशानी से जूझ रहे है ,तो आप उन्हें जल्द ही किसी अच्छे डॉक्टर से दिखाए। और कोई भी चेकउप करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले। 


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