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दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हमारा आज का टॉपिक एक ऐसा फल है जिसे दुनियां का सबसे पुराना और सबसे मीठा फल होने का गौरव प्राप्त है। मनुष्य ने सबसे पहले इस दुनियां में इसको बोया। इसमें 83% प्राकृतिक मिठास (Natural Sugar) होती है जो किसी और फल में इतनी मिठास नहीं होती। यह संभवतः दुनियां में इकलौता ऐसा फल जो सूखने पर अपने वास्तविक नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं इसे “जन्नत का फल” भी कहा जाता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं अंजीर के फायदे की। अंजीर को ऐसे ही फल के रूप में तो खाते ही हैं इस फल के सूख जाने पर सूखे मेवे के रूप में “अंजीर” के ही नाम से इसका सेवन किया जाता है। नाशपाती जैसे आकार के इस छोटे से फल अंजीर की सुगंध कोई खास या तेज नहीं होती लेकिन यह गूदेदार और बहुत रसीला होता है। इसका स्वाद व रंग निर्भर करता है इसको उगाये जाने वाले स्थान पर। इसका रंग हल्का पीला, गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी कुछ भी हो सकता है। इस फल का छिलका, बीज और गूदा सब खाया जाता है। विश्व में अंजीर को लगभग 700 नामों से जाना जाता है।

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अंजीर के फायदे
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कुछ ऐतिहासिक तथ्य

दोस्तो, अंजीर के विषय में कुछ ऐसे तथ्य मिलते हैं जिनसे यह प्रमाणित होता है कि यह फल सबसे पुराना है जिसे मनुष्य ने सबसे पहले बोया था। ये तथ्य इस प्रकार हैं :-

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1. 2006 में साइंस नामक जर्नल में “अर्ली डोमेस्टिकेटेड फिग इन जॉर्डन वैली” शीर्षक से प्रकाशित एक शोध से पता चलता है कि जॉर्डन वैली में स्थित प्रारंभिक नवपाषाण कालीन गांव “गिगल 1” में 11,200-11,400 वर्ष पुराने अंजीर के नौ जीवाश्म पाये गये हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि अंजीर को गेहूं और बार्ली से भी पहले बोना आरम्भ कर दिया था। 

2. बाइबिल के आरम्भिक अध्याय में अंजीर का वर्णन किया गया है कि एक घटना के अनुसार, आदम और हव्वा ने जब ज्ञान वृक्ष के फल को खाया तो उसके बाद उनमें लज्जा की अनुभूति हुई जिसके कारण उन्होंने अपने अंगों को “अंजीर के पत्तों” से ढंक लिया था। इसी कारणवश, प्राचीन नग्न कलाकृतियों में जननांगों को अंजीर के पत्तों से ढंका हुआ दिखाया जाता रहा है। इटली के चित्रकार मसाच्चो की पेंटिंग “द एक्स्पल्सन फ्रॉम द गार्डन ऑफ ईडन” इसका सबसे सशक्त उदाहरण है।

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3. कुरान में अंजीर को जन्नत से धरती पर उतरा हुआ वृक्ष बताया गया है। इस्लामिक ऑनलाइन नामक पोर्टल पर सन् 2000 में प्रकाशित एक आलेख “फूड्स ऑफ द प्रोफेट” के मुताबिक, कुरान के सूरा 95 का शीर्षक अल-तिन है, जिसका मतलब “अंजीर” होता है। कुरान में अंजीर के बारे में पैगम्बर मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि “यदि मुझे किसी ऐसे फल के बारे में बताना हो, जो कि जन्नत से उतरा हो, तो मैं अंजीर का नाम लूंगा, क्योंकि इस स्वर्गिक फल में कोई गुठली नहीं होती और यह फल बवासीर और गठिया जैसे रोगों से भी बचाता है।”

4. सन् 2014 में प्रकाशित पुस्तक “द लगून: हाउ एरिस्टोटल डिस्कवर्ड साइंस” में बताया गया है कि प्राचीन ग्रीस में अंजीर बड़े स्तर पर उगाया जाता था। प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने इस बात की ओर ध्यान आकर्शित कराया कि जानवरों की तरह ही अंजीर के पेड़ों में भी लैंगिक भिन्नता पाई जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि अंजीर के पेड़ दो प्रकार के होते हैं, पहला – जिस पर  फल लगते हैं और दूसरा – जो पहले प्रकार के पेड़ पर फल लगने में मदद करते हैं।

5. ग्रीक मान्यता के अनुसार, एक कहानी यह भवबताती है कि रोशनी के देवता अपोलो ने एक कौवे को नदी से पानी लाने के लिए भेजा। कौवा ने नदी के किनारे एक “अंजीर” का पेड़ देखा।  यह जानते हुए भी कि देर होने पर देवता नाराज होंगे, लालचवश कौवा अंजीर के पकने का इंतजार करने लगा। जब अंजीर पक गए, तो कौवा अंजीर खाने के बाद पानी के साथ एक सांप को भी पकड़कर देवता के पास ले गया, ताकि देरी का जिम्मेदार उस सांप को ठहराया जा सके। परन्तु देवता ने उसकी धूर्तता को भांप कर पानी के कटोरे, सांप और कौवे को आकाश में फेंक दिया जिससे हाइड्रा, क्रेटर और कोर्वस नमक नक्षत्र का निर्माण हुआ। 

अंजीर कहां पाया जाता है – Where is the fig found

दोस्तो, अंजीर मध्यसागरीय क्षेत्र और दक्षिण पश्चिम एशियाई मूल का एक छोटा पेड़ है जिसकी लंबाई 3-10 फुट तक होती है। इसके पत्ते और शाखायें रोयेंदार होते हैं। यह पाकिस्तान से यूनान तक पाया जाता है। इसकी खेती पाकिस्तान, अफगानिस्तान में काबुल, ईरान, स्पेन, अल्जीरिया, इटली, तुर्की, पुर्तगाल और ग्रीस में की जाती है। हमारे देश भारत में सबसे ज्यादा पैदावार राजस्थान राज्य में बाडमेर जिले के सिवाना क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में होती है। यहां लगभग करीब 15 हजार अंजीर के पौधे खेतों में शोभा बढ़ा रहे हैं। राजस्थान के अतिरिक्त बंगलूरू, उत्तरप्रदेश, कश्मीर, सूरत, नाशिक और मैसूर में अच्छी पैदावार होती है।

अंजीर की प्रजातियां – Fig Species

यूं तो अंजीर की विश्व में अनेक प्रजाति पाई जाती हैं लेकिन कुछ प्रमुख प्रजातियां इस प्रकार हैं –

1. ब्लैक मिशन (Black Mission) –  बाहर से इसका रंग काला या हल्का बैंगनी होता है और अंदर से गुलाबी होता है। खाने में मीठा होने के साथ साथ है इसमें रस भी होता है। 

2. कडोटा (Kadota) – यह बाहर से हरे रंग का होता है और गूदा बैंगनी रंग का। यह अंजीरों में सबसे मीठा होता है। इसे कच्चा भी खा सकते हैं  और इसे गर्म करके ऊपर से हल्का नमक डालकर भी खा सकते हैं। 

3. कैलीमिरना (Calimyrna) –  यह हरे-पीले रंग का होता है और  इसका स्वाद सबसे अलग होता है।  इसे तुर्की अंजीर भी कहते हैं क्योंकि मूल रूप से तुर्की में उगाया गया था और स्मिर्ना अंजीर को डब किया गया था। कैलिमिरना अंजीर स्वाद अखरोट जैसा होता है। जब कैलिफोर्निया में  इसकी खेती शुरू की गयी तो वहां के उत्पादकों ने इसका नाम बदलकर कैलीमिरना रख दिया।

4. ब्राउन तुर्की (Brown Turkey) – इस अंजीर का उपयोग सलाद का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह बाहरी रंग बैंगनी और अंदर से गूदा लाल होता है। यह कम मीठा होता है और स्वाद में हल्का।

5. एड्रियाटिक (Adriatic) – यह बाहर से हल्के हरे रंग को होता है और अंदर से गुलाबी। इसे फल के रूप में खाते हैं। यह अंजीरों में सबसे मीठा होता है। हल्के रंग की वजह से इसे सफेद अंजीर भी कहते हैं।

6. सिएरा (Sierra) –  यह बाहर से पीले-हरे रंग का  होता है। यह नरम, मलाईदार और बहुत मीठा होता है। और हल्का किस्म है। ये बड़े और गोल होते हैं। इसे 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया कोऑपरेटिव एक्सटेंशन (Kearney) प्रजनकों द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसका उपयोग सेंट्रल वैली में उत्पादकों द्वारा किया जाता है। सिएरा ताजा और सूखे अंजीर दोनों के लिए उपयुक्त है। 

7.  कोनद्रिया (Kondria)- इस अंजीर को कैलिफ़ोर्निया डॉ। इरा कोंडिट द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। यह एड्रियाटिक अंजीर से उत्पन्न होने के कारण  इसका नाम “कोन-एड्रिया” पड़ा। यह पीले-हरे रंग का होता है जिसमें एक आंतरिक प्रकाश होता है जो हल्के लाल से लेकर एम्बर तक होता है। इसका स्वाद हल्का और मीठा होता है। यह स्नैक्स के रूप में खाने या सलाद, कन्फेक्शन आदि में सेवन करने के लिये एकदम सही है। 

अंजीर के गुण – Properties of Figs

1. अंजीर फल की तासीर ठंडी होती है। 

2. सूखे हुऐ अंजीर की तासीर गरम होती है।

3. किसी भी फल से ज्यादा अंजीर में प्राकृतिक मिठास (Natural Sugar) होती है 

4. अंजीर में विटमिन-ए, सी, के, बी के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर, मैंगनीन, आयरन और कैल्शियम होते हैं। इसके अतिरिक्त अंजीर में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी ऐसिड गुण भी होते हैं जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।  

5. सूखे हुऐ अंजीर में पोषक तत्व अधिक होते हैं और   एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।

पोषक तत्वों का विवरण 

(सूखे अंजीर मात्रा 100 ग्राम)

कैलरी 209

प्रोटीन 4 ग्राम

फाइबर 9.2 ग्राम

फैट 1.5 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट 48.6 ग्राम

(ताजा अंजीर मात्रा 100 ग्राम)

पानी 79.11 ग्राम

ऊर्जा 74 कैलोरी

प्रोटीन 0.75 ग्राम

कुल लिपिड (वसा) 0.3 ग्रा

कार्बोहाइड्रेट 19.18 ग्राम

मैग्नीशियम 17 मिलीग्राम

फास्फोरस 14 मिलीग्राम

फाइबर 2.9 ग्राम

फोलेट 6 मिलीग्राम

कैल्शियम 35 मिलीग्राम

शुगर 16.26 ग्राम

पोटैशियम 232 मिलीग्राम

विटामिन सी 

(कुल एस्कॉर्बिक एसिड) 2 मिलीग्राम

अंजीर खाने के फायदे – Benefits of Figs

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये (Immunity)- अंजीर के सेवन से हमारे शरीर में रोगों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें  पॉलीसेकेराइड नामक कम्पाउंड होता है जो इम्यूनोमॉड्यूलेटर प्रभाव दिखाता है। यह इम्यूनोमॉड्यूलेटर प्रतिरक्षा प्रणाली रोधक को स्वस्थ बनाये रखने का कार्य करता है।  

2. पाचन प्रणाली और कब्ज के लिए (Digestive System)- अंजीर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।  यह मल त्याग करने की क्रिया को आसान बनाकर नियमित करता है। अंजीर का सेवन करने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिल जाता है। इसके लिये रात को दो अंजीर पानी में भिगो दें। सुबह इनको शहद के साथ या ऐसे ही खायें और अंजीर वाले पानी को पीलें। पेट साफ रहेगा। अंजीर डायरिया से भी राहत दिलाता है। 

3. उच्च रक्तचाप को कम करे (Hingh BP)- अंजीर उच्च रक्तचाप को कम करके रक्तचाप में संतुलन बनाये रखता है। अंजीर में फ्लेवोनोइड्स, फिनोल और पोटैशियम होते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि अंजीर में पोटैशियम की मात्रा अधिक और सोडियम कम होता है। इसलिये ये सब रक्तचाप में संतुलन बनाये रखकर उच्च रक्तचाप के खतरे को कम करते हैं। अंजीर के ये गुण नसों को शांत रखते हुऐ  हाइपरटेंशन के मरीजों को तनाव मुक्त रखते हैं। 

4. कोलेस्ट्रॉल कम करे (Cholesterol)-  अंजीर का सेवन खराब  कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है। अंजीर में पाये जाने वाला पेक्टिन (pectin) नाम का घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है। यह पाचन तंत्र में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को साफ करके उसे खत्म करने के लिए कोलेस्ट्रॉल को आंतों तक ले जाता है। अंजीर में ओमेगा-3, ओमेगा-6, फैटी एसिड और फाइटोस्टेरॉल भी होते हैं जो शरीर में प्राकृतिक कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण (Synthesis) को कम करते हैं और ब्लड प्रेशर को भी नियमित करते हैं।

5. डायबिटीज के लिए (Diabetes)- अंजीर में पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह शुगर के अवशोषण (absorbtion) को नियन्त्रित करता है। इसके अतिरिक्त अंजीर के पत्तों में एथिल एसीटेट अर्क होता है जो अग्नाशय (Pancreatic) की बीटा कोशिकाओं के माध्यम से इन्सुलिन उत्पादन को उत्तेजित करके एंटीडायबिटिक प्रभाव छोड़ता है। मधुमेह के रोगियों के इन्सुलिन के इंजेक्शन पर निर्भर रहना होता है। अंजीर के सेवन से इस निर्भरता में कमी आ सकती है। अंजीर की चाय भी डायबिटीज में फायदेमंद होती है। इसके लिये अंजीर के चार-पांच पत्तों को गर्म पानी में उबाल कर  पीयें। या फिर अंजीर के पत्तों को सुखाकर फिर पीसकर पाउडर तैयार कर लें। पानी में एक छोटी चम्मच पाउडर डालकर उबालकर पीयें।

6. कम वजन के लिए (Low Weight)- अंजीर के सेवन से आपका वजन कम हो सकता है क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा होता है और फैट बहुत कम। मोटे व्यक्तियों को वजन कम करने के लिये अंजीर खाने को कहा जाता है परन्तु एक सच्चाई यह भी है कि ज्यादा अंजीर खाने से वजन कम होने की अपेक्षा बढ़ सकता है विशेषतौर पर उस परिस्थिती में जब आप दूध के साथ अंजीर का सेवन कर रहे हों। इसलिये थोड़ा सावधान भी रहिये और संतुलित मात्रा में अंजीर खाईये। 

7. हृदय को स्वस्थ रखे (Heart Healthy)- दोस्तो, हमने आपको ऊपर बताया है कि अंजीर के सेवन से रक्तचाप नियन्त्रण में रहता है, खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है, वजन कम होता है और अंजीर मधुमेह को भी कन्ट्रोल करता है तो परोक्ष रूप से हृदय की सुरक्षा स्वतः ही है जाती है क्योंकि इन्हीं सबका असर हृदय पर पड़ता है। दूसरे सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंजीर खून में ट्राइग्लिसराइड (Triglyceride) यानि खून में मौजूद वसा के कणों, के स्तर को कम करती है। ट्राइग्लिसराइड हृदय सम्बंधी रोगों का बड़ा कारण होता है। अंजीर में पाये जाने वाले फिनोल, ओमेगा 3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड कोरोनरी हृदय रोग के संभावना को कम करते हैं। 

8. लिवर के लिए (Liver)- एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार अंजीर की पत्तियों में हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर सरंक्षण) गुण पाया जाता है। यह गुण हानिकारक तत्वों से लिवर की रक्षा कर सकने में समर्थ होता है। अंजीर के पत्ते लिवर को ठीक रखने में सहायक सिद्ध होते हैं। अंजीर के पत्तों की चाय के बारे में  हम आपको ऊपर बता ही चुके हैं। तो इस चाय का सेवन कीजिये और लिवर को रखिये एकदम स्वस्थ।

9. मूत्र सम्बंधित समस्याओं के लिए (Urinary Related Problem)- दोस्तो, मूत्र के जरिये हमारे शरीर से अनेक तत्व निकल जाते हैं जिन्हें नियंत्रित करता है पोटैशियम। अंजीर पोटैशियम का भरपूर श्रोत है। यह पोटैशियम मूत्र द्वारा निकलने वाले तत्वों को रोकने का काम करता है, कैल्शियम को भी रोकता है और विषाक्त पदार्थों को हमारे शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। 

10. गले के दर्द में आराम (Throat Pain)- दोस्तो, अंजीर खाने से ना केवल गले की खराश, दर्द में आराम आता है बल्कि गले की सूजन भी कम हो जाती है। यह  खांसी या सांस से सम्बंधित समस्याओं में भी फायदेमंद है। अंजीर के सेवन से स्वरतंत्रिका (vocal-chords) पर पड़ रहे स्ट्रैस और दर्द से आराम आता है। गले की समस्या से राहत पाने के लिये अंजीर खाने के साथ साथ इसके गूदे को गर्म पानी में घोलकर गले पर लगायें। आराम लगेगा।

11. आंखों के लिए (Eyes)- बढ़ती उम्र के साथ साथ मैक्यूलर डिजनेरेशन (Macular degeneration) होना आम समस्या है। यह आंखों की एक गंभीर समस्या होती है जिसमें रेटिना क्षतिग्रस्त होने लगता है और दृष्टि धीरे धीरे कम होने लगती है। इसका समस्या का चिकित्सा जगत में कोई उपचार नहीं है परन्तु विटामिन्स, लेजर थेरेपी और दवाओं के जरिये इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अंजीर में विटामिन-ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह एंटीऑक्सीडेंट आंखों को मुक्त कणों (Free Radicals) से बचा कर रेटिना को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।

ये भी पढ़े – विटामिन-डी की कमी कैसे दूर करें

12. हड्डियों के लिए (Bones)- अंजीर में पोटेशियम भरपूर मात्रा में  पाया जाता है और कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस की भी पर्याप्त मात्रा होती है। फॉस्फोरस हड्डियों के विकास में सहायक होता है तो कैल्शियम हड्डियों की मजबूती का आधार। हड्डियों की समस्या से छुटकारा पाने के लिये डॉक्टर भी कैल्शियम की गोलियां खाने की सलाह देते हैं। अंजीर में पाये जाने वाले ये सभी तत्व हड्डियों को स्वस्थ बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसे अस्थि रोग से रक्षा करते हैं। 

13. एंटी-एजिंग है अंजीर (Anti Aging)- अंजीर त्वचा के लिये भी फायदेमंद है। इसके गुण अपना एंटी-एजिंग प्रभाव दिखाते हैं। त्वचा के तन्तुओं में कसावट बनाये रखते हैं जिससे झुर्रियों के विकास की गति कम हो जाती है और आप अपनी वास्तविक आयु से कम दिखते हैं। अंजीर का रस मेलेनिन और सीबम के स्तर को भी कम करता है और त्वचा में नमी बनाये रखता है। 

14. शरीर को दे भरपूर ऊर्जा (Body Plenty of Energy)- दोस्तो, हमारे शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो मिलती है भोजन के द्वारा। सूखे अंजीर से हमें भरपूर ऊर्जा मिल जाती है यदि हम इसे अपने भोजन में शामिल करें तो। क्योंकि सूखे अंजीर में 249 कैलोरी होती है और फल में 74. इसलिये शरीर की ऊर्जा पूर्ती के लिये अंजीर का सेवन फायदेमन्द है। 

15. अंजीर के एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव (Antioxidant Effect)- अंजीर में  विटामिन्स्, खनिज और पोषक तत्वों की भरमार होती है। और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का स्रोत भी। ये एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और शरीर से फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालकर अनेक बीमारियों की संभावनाओं को खत्म करते हैं। इसलिये अंजीर का सेवन हमारे शरीर के लिये अत्यन्त लाभकारी है। 

16. बालों के लिए (Hair)- पोषक तत्वों के अभाव में बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं जिसके कारण बाल टूटना या झड़ना शुरु हो जाते हैं। अंजीर की पत्तों के अर्क में एंटीइन्फ्लामेट्री और एंटी-एंड्रोजन गुण होते हैं जो बालों के स्वास्थ को बनाये रखने में मददगार होते हैं। यह अर्क एंड्रोजेनिक एलोपिशिया (एक प्रकार का गंजापन) की समस्या से छुटकारा दिला सकता है। दही और बेसन के पेस्ट में आधा चम्मच (लगभग 10 बूंद ) अंजीर का तेल मिलाकर  बालों में लगायें फिर एक घंटे बाद शैंपू से सिर को धो लें। आपके बाल घने और मजबूत होंगे।

17. यौन समस्याओं के लिये (Sexual Problems)- अंजीर यौन शक्ति बढ़ाने और यौन समस्याओं उपचार के लिये वरदान माना जाता है। इसीलिये भारतीय उपमहाद्वीप में इसका उपयोग यौन रोगों के निदान के लिए परम्परागत रूप से प्राचीन काल से किया जाता रहा है। अंजीर के पत्तों के अर्क से शुक्राणुओं की गुणवत्ता व संख्या में वृद्धि होती है। अंजीर के सेवन से स्तंभन दोष यानि नपुंसकता (Erectile dysfunction) दूर होता है। महिलाओं में प्रजनन क्षमता  सूखे अंजीर खाने से सुदृढ  हो सकती है। कामशक्ति और कामक्षमता बढ़ाने के लिये 2-3 अंजीर रात को दूध में भिगो दें जिससे कि वो फूल जायें, सुबह इन फूले हुऐ अंजीरों को खा लें। 

मात्रा 

दोस्तो, अंजीर खाने का कोई विशेष विवरण नहीं है फिर भी किसी भी वस्तु के अधिक सेवन करने से समस्या बन सकती है। वैसे 3-4 अंजीर फल या सूखे अंजीर खा सकते हैं। 

अंजीर के नुकसान – Side Effects of Figs

1. अंजीर में पाये जाने वाला फ्यूरोकोमोरिंस नामक तत्व त्वचा के लिये घातक हो सकता है। अंजीर खाने से किसी को एलर्जी भी हो सकती है। यदि इसको खाने से कुछ असहज लगे तो डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये। 

2. अंजीर के पत्तों से संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को जलन या खुजली हो सकती है। 

3. अंजीर में पायी जाने वाली शुगर से मोटापा बढ़ सकता है।

4. कम रक्तचाप वालों का रक्तचाप और कम हो सकता है। अंजीर उच्च रक्तचाप वालों के लिये ठीक रहती है इससे उनकी ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन की मात्रा संतुलित रह सके।  

5. अंजीर के अधिक मात्रा में सेवन से, शुगर की अधिकता होने के कारण, दांत सड़ सकते हैं।

6. पेट में दर्द या पाचन प्रणाली में रक्तश्राव हो सकता है।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको अंजीर के फायदे के बारे में जानकारी दी। अंजीर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, इसके गुणों और प्रजातियों के बारे में बताया। और साथ ही अंजीर खाने के फायदे और नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।


2 Comments

Shiv Kumar Kardam · February 25, 2021 at 5:53 am

Nice Article. Interesting introduction and History events

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  • Ram mohan haldia · February 27, 2021 at 1:56 pm

    Nice but too long
    It should be to the point

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