दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हमारा आज का टॉपिक एक ऐसी ब्राउनिश या काले रंग वनस्पति है जिसका आकार बहुत ही छोटा है परन्तु इसकी उपयोगिता बहुत विशाल है।  इसका उपयोग व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने और खुश्बूदार बनाने के लिये किया जाता है। औषधीय गुणों में यह अपना विशिष्ट स्थान रखती है और धार्मिक मामलों में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोस्तो, इतना ही नहीं, इसके डिजाइन और नाम का आभूषण दुनियां की लगभग सभी महिलाऐं विशेषकर भारतीय महिलाऐं अपनी नाक में पहनती हैं। अब तो समझ गये ना, हम बात कर रहे हैं लौंग की। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “लौंग के फायदे और नुकसान”।  देसी हैल्थ क्लब आज आपको लौंग के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि लौंग के सेवन के क्या फायदे और नुकसान होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं लौंग के बारे में कि लौंग होती है। 

लौंग के फायदे

लौंग क्या होती है? – What is Clove?

दोस्तो, लौंग वह खाद्य पदार्थ है जिसे व्यंजनों का स्वाद, सुगंध और पौष्टिकता बढ़ाने के लिये मसाले के रूप में उपयोग में लाया जाता है। यह एक सदाबाहर पेड़ होता है जिस पर लगभग 9 वर्ष के पश्चात कलियां लगती हैं। ये कलियां गुच्छों में होती हैं जिनको फूल खिलने के पहले ही तोड़ लिया जाता है। फिर इनको सुखा लिया जाता है। इन्हीं सूखी हुई कलियों को “लौंग” कहा जाता है। कलियों को सुखाने के बाद केवल 40% ही लौंग मिल पाती है। दोस्तो, लौंग के पेड़ से 25 वर्ष तक अच्छी उपज मिल जाती है, प्रत्येक पेड़ से ढाई, तीन किलोग्राम लौंग मिलती है। लौंग के पेड़ से 150 वर्ष तक भी थोड़ी बहुत मात्रा में लौंग मिलती रहती है। 

ऐतिहासिक विवरण – Historical Details

दोस्तो, जहां तक लौंग की खोज के इतिहास की बात है तो यह समझिये कि लौंग के पैदा होने का स्थान मोलुक्का द्वीप है जहां के द्वीपों में लौंग का वृक्ष इन द्वीपों का देशी वृक्ष है। चीन ने ईसा से लगभग तीन शताब्दी पूर्व इसे खोजा था और एलेक्सैंड्रा में इसका आयात तक होने लगा था। इस बारे में रोमन लोग भी अच्छी तरह वाकिफ थे। परन्तु यूरोपीय देशों को 16वीं शताब्दी में इसकी जानकारी तब हुई जब पुर्तगाली लोगों ने मोलुक्का द्वीप में इसे खोज निकाला। कई वर्षों तक लौंग के व्यापार पर पुर्तगालियों और डचों का एकछत्र आधिपत्य रहा। 

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लौंग का उत्पादन – Clove Production

1. लौंग का उत्पादन जंजीबार, सुमात्रा, जमैका, ब्राजील, पेबा, वेस्ट इंडीज़ इंडोनेशिया, मेडागास्कर, भारत, सिंगापुर, पाकिस्तान, श्रीलंका में होता है। 

2. लौंग का सबसे अधिक उत्पादन, जंजीबार में समस्त उत्पादन का 90% होता है। 

3. हमारे देश भारत में केरल और तमिलनाडू राज्यों में किया जाता है।  हमारे यहां लौंग का अधिकांश आयात (Import) सिंगापुर से होता है।

लौंग की उपयोगिता – Clove Utility

1. मसाले के रूप में व्यंजनों स्वादिष्ट और सुगन्धित बनाने में। 

2. धार्मिक पूजा-पाठ, अनुष्ठान, हवन आदि में इसका उपयोग किया जाता है।

3. औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेदिक दवाओं में इसका इस्तेमाल होता है।

4. चीनी दवाओं में लौंग के सूखे फूल की कलियों, पत्तियों और लौंग के तेल का उपयोग किया जाता है। 

5. मंजन, टूथपेस्ट बनाने में। 

6. लौंग से इसका तेल बनाया जाता है। 

लौंग के गुण – Clove Properties

1. लौंग की तासीर गर्म होती है।

2.  लौंग में एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी वायरल, एंटी इंफ्लेबल और एनाल्जेसिक गुण होते हैं। 

3. पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम 

पानी 9.87 ग्रा।

एनर्जी 274 kcal

प्रोटीन 5.97 ग्रा।

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कुल फैट 13 ग्रा।

कार्बोहाइड्रेट 65.5 ग्रा।

फाइबर  33.9  ग्रा।

शुगर   2.38 ग्रा।

ग्लूकोज 1.14 ग्रा।

कैल्शियम 632 मि.ग्रा।

आयरन 11.83 मि.ग्रा।

मैग्नीशियम 259 मि.ग्रा।

फास्फोरस 104 मि.ग्रा।

पोटेशियम 1020 मि.ग्रा।

सोडियम 277 मि.ग्रा

जिंक 2.32 मि.ग्रा

कॉपर 0.368 मि.ग्रा

सेलेनियम 7.2 µg

मैंगनीज 60.1 मि.ग्रा

थियामिन   0.158 मि.ग्रा

राइबोफ्लेविन   0.22 मि.ग्रा

नियासिन 1.56 मि.ग्रा

कैरोटीन-बीटा   45 µg

फोलेट 25 µg

कोलीन  37.4 मि.ग्रा

विटामिन-ए  8 RAE

विटामिन-बी  0.391 मि.ग्रा

विटामिन-सी   0.2 मि.ग्रा

विटामिन-ई 

(अल्फा-टोकोफेरॉल) 8.82 मि.ग्रा

विटामिन-के 

(फाइलोक्विनोन) 142 µg

फैटी एसिड, 

टोटल सैचुरेटेड   3.952 ग्रा।

फैटी एसिड, 

टोटल मोनोअनसैचुरेटेड  1.393 ग्रा।

फैटी एसिड, 

टोटल पॉलीसैचुरेटेड 3.606 ग्रा।

लौंग के फायदे – Benefits of Cloves

1. मॉर्निंग सिकनेस में लाभ (Benefit in Morning Sickness)- गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में लगभग 85% महिलाओं को मिचली और उल्टी होती है। इसी को मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है। नाम बेशक “मॉर्निंग सिकनेस” है परन्तु ये मिचली, उल्टी सुबह, दोपहर, शाम, रात किसी भी समय हो सकती है। ऐसी स्थिति में लौंग बहुत फायदा करती है। इसकी सुगंध और स्वाद उबकाई, उल्टी को रोकने में मदद करती है। इसके लिए गर्भवती महिलाएं लौंग चूस सकती हैं, चबाकर खा सकती हैं। लौंग के तेल की कुछ बूंदें रुमाल पर गिरा कर सूंघ सकती हैं या एक गिलास गर्म पानी में इस तेल की कुछ बूंदें मिलाकर, पानी धीरे-धीरे पी सकती हैं। इसके अतिरिक्त लौंग को बहुत बारीक पीसकर शहद में मिलाकर खा सकती हैं। लौंग हर रूप में आपकी मदद करेगी। 

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2. पाचन शक्ति बढ़ाये (Increase Digestion)-  लौंग के सेवन से पाचन-तंत्र मजबूत होता है। भोजन में तो लौंग डालते ही हैं, भोजन के बाद भी यदि एक लौंग खा ली जाये तो मुंह तो फ्रेश होता ही है, भोजन पचने में भी आसानी रहती है। लौंग शरीर के एंजाइम को उत्तेजित कर पाचन-तंत्र में सुधार कर मजबूत बनाने में मदद करती है। लौंग पाचन संबंधी समस्या जैसे पेट का फूलना, गैस, कब्ज, मिचली आदि से राहत दिलाती है। यह आंतों में होने वाली जलन को भी शांत करती है। लौंग का तेल सूजन को कम करने और पेट के बैक्टीरिया से लड़कर को संक्रमण रहित करने में मदद करता है। 

3. मुंह की बदबू दूर करे (Remove Mouth Smell)- मुंह की बदबू का मुख्य कारण पाचन-तंत्र का कमजोर होना होता है जिससे पेट की अनेक बीमारियां होती हैं और लौंग इनके लिये बेहतरीन उपाय है। हम ऊपर बता चुके हैं कि लौंग पाचन-तंत्र को कैसे मजबूत करती है और पेट की बीमारियों से राहत दिलाती है। लौंग में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो मुंह की बदबू से राहत दिलाने में मदद करते हैं। लौंग बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया और गले के ऊपरी हिस्से  में, तालू में और जीभ के बैक्टीरिया को खत्म कर मुंह की बदबू से राहत दिलाती है। सिर्फ एक लौंग मुंह में रखकर चबायें, बहुत थोड़ी देर में मुंह की बदबू खत्म हो जायेगी। 

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4. श्वसन तंत्र के लिये (The Respiratory System)- लौंग में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो फेफड़ों में आई सूजन को कम करने में मदद करते हैं। ये गुण सर्दी, खांसी, जुकाम आदि से बचाव करते हैं। गले में खराश, बंद नाक, वायरल संक्रमण, अस्थमा, तपेदिक, ब्रोंकाइटिस और विभिन्न साइनस की स्थिति में लौंग के ये गुण राहत दिलाते हैं। लौंग बलगम को काटकर शरीर से बाहर निकालती है और इस तरह श्वसन तंत्र को साफ करने में मदद करती है। लौंग के तेल की कुछ बूंदें पानी में डालकर गर्म करके भाप ले सकते हैं और लौंग वाली दो, तीन चाय पी सकते हैं। श्वसन प्रणाली में फायदा होगा। 

5. दांतों के दर्द से राहत (Toothache)- दांत दर्द में लौंग को रामबाण उपाय माना जाता है। लौंग के एंटी इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण संक्रमित दांत के दर्द और सूजन को खत्म करने में मदद करते हैं। इन्हीं गुणों के कारण पूरी दुनिया में टूथपेस्ट बनाने में लौंग का तेल इस्तेमाल किया जाता है। मंजन बनाने में भी लौंग का प्रयोग किया जाता है। दांत दर्द होने पर रुई की सहायता से दर्द वाले दांत पर और इसके आसपास मसूड़ों पर लगायें या दो लौंग पीसकर जरा सा जैतून तेल मिलाकर लगाएं, दर्द में तुरंत आराम आ जायेगा।  

6. सिर दर्द से राहत (Headache Relief)- लौंग दांत दर्द में तो राहत पहुंचाती ही है, सिर के दर्द से राहत पाने के लिये भी यह बेहद फायदेमंद है। सिर में दर्द चाहे गर्मी से है या सर्दी से, या तनाव के कारण या माइग्रेन वाला सिर दर्द है, लौंग का तेल हर प्रकार के दर्द को खत्म करने में सक्षम होता है। इसके एंटीइंफ्लेमेटरी गुण सिर दर्द में ठंडा और सुखदायक प्रभाव छोड़ते हैं जिससे आप सिर दर्द में राहत महसूस करते हैं। इसके लिये नारियल या बादाम के तेल में लौंग के तेल की कुछ बूंदें डालकर और जरा सा समुद्री नमक  मिलाकर सिर और माथे की मालिश करें। या किसी कपड़े कै लौंग के तेल में भिगोकर 10-15 मिनट के लिये माथे पर रख दें। सिर दर्द में आराम आ जायेगा। 

7. कान के दर्द में आराम (Relieve Earache)-  लौंग में संवेदनाहारी (Anesthetic) और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं मौजूद होते हैं। यह दर्द निवारक के रूप में काम करती है।  यदि कान में दर्द हो जाये तो लौंग के तेल को तिल के तेल में मिलाकर गुनगुना कर लें। फिर इसमें रुई की छोटी बॉल बनाकर तेल में डुबाकर कान में कान की नलिका के पास रख दें। ध्यान रहे यह अंदर ना जाने पाए। बहुत जल्दी कान के दर्द में आराम आ जायेगा। यह तेल कान के संक्रमण को खत्म कर देगा और दर्द के साथ यदि कान में  सूजन भी है तो वह भी खत्म हो जायेगी। यदि लौंग और तिल का तेल नहीं है तो साबुत लौंग पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर गुनगुना गर्म करके छानकर दो, तीन बूंदें कान में डाल सकते हैं। इससे भी कान दर्द में आराम लग जाएगा।

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8. अस्थमा में फायदेमंद (Asthma)- जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि लौंग में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो फेफड़ों में आई सूजन को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही, ये सर्दी, खांसी, ब्रोंकाइटिस विभिन्न साइनस की स्थिति में लाभ पहुंचाती है। यह बलगम को भी बाहर निकालती है। इन सब फायदों के साथ-साथ अस्थमा के मरीजों को भी बहुत राहत मिलती है। लौंग में पाये जाने वाले ब्रोन्कोडायलेटर और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण  एंटी-अस्थमेटिक प्रभाव छोड़ते हैं। लौंग में मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) कंपाउंड भी अपने एंटीअस्थमेटिक प्रभाव डालता है। 

9. जोड़ों के दर्द में राहत (Joint Pain Relief)- दोस्तो, यह तो हम जान ही चुके हैं कि लौंग दर्द निवारक का काम करती है दांत और कान दर्द के अतिरिक्त जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में दर्द और गठिया के दर्द को भी खत्म करने में सक्षम है। लौंग के तेल को जैतून, तिल, अखरोट या सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करें या लौंग को भूनकर कपड़े में लपेट कर दर्द वाली जगह को लौंग के गर्म रहने तक सेकें। लौंग के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण सारा दर्द खींच लेंगे। 

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10. हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये (Bone Health)- लौंग में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक तत्व होता है। इसके अतिरिक्त लौंग में मैंगनीज, आयरन, कॉपर, जिंक, ओमेगा -3 फैटी एसिड की भी पर्याप्त मात्रा होती है जो  हड्डियों को मजबूत बनाने और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। एक रिसर्च में बताया गया है कि लौंग के हाइड्रोक्लोरिक अर्क में मौजूद यूजेनॉल, एक कार्बनिक यौगिक (Compound) ऑस्टियोपोरोसिस नामक अस्थि रोग के विरुद्ध लड़कर हड्डी को संरक्षित करता है, हड्डियों के घनत्व (Density)को बढ़ाता है।

11. पौरुष शक्ति बढ़ाये (Increase man power)- लौंग के सेवन से टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) में बढ़ोत्तरी होती है। यह नर-सेक्स हार्मोन तथा एक एनाबोलिक स्टेरॉयड होता है जो पुरुष यौन लक्षणों के विकास को बढ़ाकर यौन क्रियाकलापों के लिये और सेक्स करने के लिये प्रेरित करता है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार लौंग का सेवन यदि संयमित मात्रा किया जाये, तो यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। परन्तु अधिक मात्रा टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को कम भी कर सकती है। स्वास्थ विशेषज्ञों के अनुसार लौंग का सेवन पुरुषों में पौरुष शक्ति बढ़ाने का काम करती है। लौंग और जायफल को घिसकर नाभि पर लेप करने से पुरुष में  कामेच्छा, यौन उत्तेजना और संभोग करने की क्षमता बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है की लौंग का तेल नाभि पर लगाने से पुरुष जननांग में कठोरता आती है और आकार में भी बढ़ोतरी हो सकती है। रात को सोने से पहले दो लौंग चबाकर खाना या पानी के साथ सटकना भी यौन क्रिया और शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है।

12. यौन समस्याओं से मुक्ति (Freedom from Sexual Problems)- लौंग के नियमित सेवन से नपुंसकता और शीघ्रपतन जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं, इसके सेवन से शुक्राणुओं के स्वास्थ में इजाफा होता है और शुक्राणुओं की संख्या (Sperm count) भी बढ़ती है। 

लौंग कितनी खा सकते हैं? – How much can cloves eat?

एक व्यक्ति, भोजन में डालने वाली लौंग के अतिरिक्त, एक दिन में दो से चार लौंग खा सकता है। इससे ज्यादा खाने से विषाक्तता हो सकती है। 

लौंग ज्यादा खाने के नुकसान – Side Effects of Cloves

1. लौंग ज्यादा खाने के रक्त पतला है सकता है जिससे ब्लीडिंग की समस्या बन सकती है।

2. पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी हो सकती है।

3. किडनी और आंतों को नुकसान हो सकता है।

4. लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है।

5. आंखों में जलन हो सकती है। 

6. शरीर में या त्वचा की एलर्जी हो सकती है।

7. यदि ब्लड शुगर और रक्तचाप सामान्य है तो, भोजन में जो लौंग पड़ती है उसके अलावा, अलग से लौंग के सेवन से बचें। 

8. गर्भवती और शिशुओं को स्तनपान कराने वाली महिला डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लौंग का सेवन करें। 

Conclusion 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको लौंग के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। लौंग क्या होती है, कहां इसका उत्पादन होता है, इसका ऐतिहासिक विवरण क्या है, इसकी उपयोगिता क्या है, इसके क्या गुण हैं इसके बारे में  विस्तारपूर्वक बताया। इस लेख के माध्यम से लौंग के फायदे बताये, और यह भी बताया कि लौंग कितनी खानी चाहिये। इसके ज्यादा खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं यह भी बताया।  आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर या लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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लौंग के फायदे और नुकसान
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