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एड्स क्या है? – What is AIDS in Hindi

AIDS क्या है?

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, जैसे-जैसे नई बीमारियां, महामारियां दुनियां के सामने आती गईं, मेडिकल साइंस भी विकसित होती गई और खोज कर-कर के उपचार के लिए दवाएं और वैक्सीन बनती गईं। यहां तक कि COVID-19 के उपचार के लिये अनेक देशों ने वैक्सीन बना डाली। परन्तु आज भी कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनका वर्तमान में कोई इलाज नहीं है। इन्हीं में से एक है एड्स यानि अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (acquired immunodeficiency syndrome – AIDS)। 

यह बीमारी नहीं अपितु महामारी है जिसकी चपेट में विश्व के करोड़ों लोग आ चुके हैं। इसका कोई इलाज नहीं है परन्तु कुछ दवाओं के माध्यम से इसे प्रबंधित किया जाता है, इसको बढ़ने से रोका जाता है। यह बीमारी, ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (Human Immunodeficiency Virus – HIV) के कारण होती है और इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली इतनी कमजोर पड़ चुकी होती है कि यह प्राकृतिक रूप से मामूली सी बीमारियों के विरुद्ध नहीं लड़ पाती। मरीज को यदि प्रबंधित करने वाली दवाएं निरन्तर ना मिलें तो बहुत जल्दी उसकी मृत्यु  हो जाती है। आखिर यह एड्स है क्या?।  दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “एड्स क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी देगा यह भी बताएगा कि एड्स का उपचार क्या है और इससे बचाव क्या हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि एड्स क्या है और एचआईवी, एड्स में कैसे बदलता है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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एड्स क्या है? – What is AIDS

दोस्तो! अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (acquired immunodeficiency syndrome – AIDS) यानि एड्स, अपने आप में कोई रोग नहीं है अपितु बहुत ही सरल शब्दों में कहा जाए तो यह ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (Human Immunodeficiency Virus – HIV)  एचआईवी के अंतिम चरण का परिणाम है। अब प्रश्न उठता है कि एचआईवी क्या होता है? एचआईवी, लेंटिवायरस (रेट्रोवायरस परिवार का एक सदस्य) है। यह एक ऐसा वायरस है जो व्यक्ति की डीएनए एनेटोलिटिक्स में प्रवेश करने के पश्चात् उस व्यक्ति के साथ एक गहरा संबंध बना लेता है।  

इस पर किसी भी प्रकार की वैक्सीन या दवा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। एचआईवी को यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होता है। यह एचआईवी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को क्षति पहुंचाकर इसे कमजोर करता रहता है। इसका कोई उपचार नहीं है। केवल एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं के जरिये प्रबंधित किया जाता है। ऐसा ना किए जाने पर एचआईवी, तीसरी स्टेज पर पहुंचकर प्रतिरक्षा प्रणाली को इतना तहस-नहस कर चुका होता हो है कि शरीर मामूली सी बीमारियों से भी लड़ने लायक नहीं रहता और कमजोर होता जाता है तथा धीरे-धीरे वजन भी कम होने लगता है। 

मनुष्य की इसी अवस्था को एड्स कहते हैं। एचआईवी के ही समान, एड्स का भी कोई समुचित उपचार नहीं है। इसे भी दवाओं और खानपान के जरिये प्रबंधित किया जाता है, इस वजह से मरीज दस वर्ष या उससे भी अधिक जीवित रह सकता है अन्यथा इस रोग के कारण उसकी आयु तीन वर्ष से अधिक नहीं रहती है। यदि आंकड़ों की बात की जाए तो केवल भारत में ही लगभग को प्रतिवर्ष 80,000 से ज्यादा व्यक्तियों की मृत्यु एड्स के कारण होती है।

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एचआईवी, एड्स में कैसे बदलता है? – How Does HIV turn into AIDS?

जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि एड्स, एचआईवी के अंतिम चरण का परिणाम है तो हम यहां स्पष्ट कर दें कि यदि किसी व्यक्ति को एचआईवी है तो यह जरूरी नहीं है की उसे एड्स है। एड्स होने के लिये एचआईवी पॉजिटिव (HIV+) ive होना जरूरी है। 

और यह स्थिति तब आती है जब एचआईवी, शरीर में लाखों की संख्या में अपना क्लोन बनाकर एक प्रकार से वायरस की फैक्ट्री बना लेता है और सीडी4 (CD4) कोशिकाओं को लगातार नष्ट करता रहता है। सीडी4 (CD4) कोशिकाओं की इतनी क्षति कर चुका होता है कि इनकी संख्या घट कर 200 या इससे भी कम रह जाती हैं। सीडी4 कोशिकाएं क्या होती हैं और कितनी होती हैं इसका जिक्र हम आगे करेंगे। 

सीडी4 कोशिकाएं की संख्या में कमी के परिणाम स्वरूप, प्रतिरक्षा प्रणाली इतनी कमजोर हो जाती है की मामूली सी बीमारी से भी लड़ नहीं पाती। यहीं से एड्स की शुरुआत हो जाती है जिसके लक्षण प्रकट होने में 7 से 10 वर्ष लग जाते हैं। निमोनिया (pneumocytes)(40%), थकावट, कमजोरी, वजन का कम होना, मांसपेशियों में खिचाव, भूख में कमी आदि लक्षण एड्स की मौजूदगी की प्राथमिक स्थिति के संकेत होते हैं।

सीडी4 (CD4) कोशिकाएं क्या होती हैं? – What are CD4 Cells? 

सीडी4, वस्तुतः सफेद रक्त कोशिकाओं का अहम हिस्सा होती हैं जो रक्त प्रवाह के जरिए पूरे शरीर में घूमती हैं और बैक्टीरिया, वायरस तथा अन्य रोगाणुओं को नष्ट करने का काम करती हैं। इनको टी कोशिकाएं (T cells)  भी कहा जाता है। यहां हम बता दें लिम्फोसाइट्स शरीर में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं और इनका निर्माण अस्थि मज्जा (Bone Marrow) द्वारा किया जाता है। लिम्फोसाइट्स के तीन प्रकार प्रकार होते हैं – बी कोशिकाएं, एनके कोशिकाएं और टी कोशिकाएं। विवरण निम्न प्रकार है – 

(i) बी कोशिकाएं – ये एंटीबॉडीज़ का उत्पादन करती हैं। 

(ii) एनके कोशिकाएं – इनको प्राकृतिक हत्यारे कहा जाता है। ये वायरस कोशिकाओं और कैंसर कोशिकाओं को मारने का काम करती हैं।  

(iii) सीडी4 – टी कोशिकाओं के दो रूप होते हैं – सीडी8 और सीडी4। सीडी8 को “किलर” कहा जाता है, ये साइटोटोक्सिक हैं अर्थात् ये वायरस से संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारने में सक्षम होती हैं। सीडी4 को “हेल्पर” कहा जाता है। ये सहायक कोशिकाओं के रूप में कार्य करते हुए, सीडी8 किलर टी कोशिकाओं के उलट,  मेमोरी बी कोशिकाओं और साइटोटॉक्सिक टी कोशिकाओं को और अधिक सक्रिय करने में मदद करती हैं, जिससे बहुत बड़ी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है। 

सीडी4 की संख्या –   CD4 Count

सीडी4 की सामान्य संख्या, असामान्य संख्या तथा अति निम्न संख्या का विवरण निम्न प्रकार है – 

1. सामान्य संख्या (Normal Number)- रक्त में सीडी4 कोशिकाओं की सामान्य रेंज 410-1590 कोशिका प्रति घन मिलीमीटर मानी जाती है जो कि एआरटी प्रभाव का संकेत समझा जाता है। एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) शरीर में एचआईवी वायरस के विस्तार को रोकता है।

2. असामान्य संख्या (Unusual Number)-  यदि सीडी4 कोशिकाएं 250 और 500 कोशिका प्रति घन मिलीमीटर है तो इसे असामान्य मात्रा माना जाताहै जो कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की ओर इशारा करती है। ऐसी स्थिति में गंभीर रूप के बैक्टीरियल संक्रमण जैसे निमोनिया, मेनिनजाइटिस, फेफड़ों का टीबी तथा ओरल कैंडिडायसिस जैसे फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त एक महीने से अधिक समय तक निरन्तर दस्त होने, वजन कम होने, बुखार व  एनीमिया जैसे लक्षण प्रकट हो भी सकते हैं।

3. निम्न संख्या (Mean Number)- सीडी4 की संख्या घटकर 200 कोशिका प्रति घन मिलीमीटर से कम रह जाती है तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि व्यक्ति को एड्स है। यहां हम स्पष्ट करते हैं कि यदि एड्स के मरीज में सीडी4 की संख्या बढ़ कर 200 से ऊपर हो जाती है फिर भी वह एड्स के मरीज ही कहलायेगा। 

एड्स किनको हो सकता है?Who Can Get AIDS? 

एड्स निम्नलिखित व्यक्तियों को हो सकता है –

1. एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति जिसकी सीडी4 कोशिकाएं लगातार कम हो रही हों। 

2. एक से अधिक लोगों के साथ सेक्स करने वाले व्यक्ति।

3. असुरक्षित संभोग करने वाला व्यक्ति।

4. अप्राकृतिक मैथुन करने वाला व्यक्ति।

5. ओरल सेक्स करने वाले व्यक्ति।

6. गे (Gay) सेक्स करने वाला व्यक्ति।

7. वेश्‍यावृति करने वाली महिलाएं और इनसे सेक्स करने वाले लोग।

8. ड्रग्स लेने के लिए सुई का उपयोग करने वाले लोग।

9. नशीली दवाओं के साथ उच्च जोखिम वाले यौन क्रिया करने वाले लोग। 

10. संक्रमित रक्त ग्रहण करने वाला व्यक्ति। 

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एड्स कैसे फैल सकता है? –  How Can AIDS Spread?

एड्स निम्न कारणों से फैल सकता है – 

1. असुरक्षित यौन संबंध बनाने, अप्राकृतिक रूप से मैथुन करने और एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने से।

2. एचआईवी संक्रमित व्‍यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित करने से।

3. एचआईवी संक्रमित सुई और सिरिंज का उपयोग करने से।

4. एचआईवी संक्रमित मां से शिशु को जन्‍म से पहले, प्रसव के समय, या प्रसव के शीघ्र बाद स्तनपान के जरिये।

5. एचआईवी संक्रमित अंग प्रत्‍यारोपण के जरिये। 

6. एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ाने से।

7. नाई द्वारा एचआईवी संक्रमित ब्लेड/उस्तरा के इस्तेमाल से।

एड्स कैसे नहीं फैलता? – How Does AIDS Not Spread?

एड्स निम्नलिखित कारणों से नहीं फैलता –

1. एड्स ग्रस्त व्यक्ति के साथ रहने से। 

2. एड्स ग्रस्त व्यक्ति को छूने उससे हाथ मिलाने से और गले लगाने से।

3. एड्स ग्रस्त व्यक्ति के साथ खाना खाने से।

4. एड्स ग्रस्त व्यक्ति के साथ बर्तन, रसोई या कपड़े साझा करने से। 

5. एक ही वॉशरूम, टॉयलेट, कटलरी साझा करने से।

6. खांसने, छींकने या थूकने से भी एड्स नहीं फैलता है।

एड्स के लक्षण – Symptoms of AIDS

एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद एड्स के लक्षण एकदम से प्रकट नहीं होते, इनको सामने आने में 7 से 10 वर्ष का समय भी लग सकता है। ये लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं –

1. निरन्तर कई-कई हफ्ते बुखार बने रहना।

2. निमोनिया।

3. एक महीने से भी अधिक दस्त बने रहना।

4. खांसी रहना।

5. अचानक वजन कम होना। 

6. थकावट, कमजोरी।

7. गले, जांघों और बगलों की लसिका ग्रंथियों में सूजन से गांठें बन जाना।

8. त्वचा पर रैशेज़ पड़ जाना।

9. पूरे शरीर में खुजली और जलन होना।

10. महिलाओं में शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाना, पीरियड्स रुक जाना, फ्लू या हल्का बुखार, बहुत ज्यादा थकावट महसूस करना होना, भूख कम लगना आदि लक्षण होते हैं।

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एड्स का परीक्षण – AIDS Test

एड्स के परीक्षण के लिए निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं –

1. एलिसा टेस्ट – एलिसा का अर्थ है Enzyme-linked Immunosorbent Assay – ELISA आमतौर पर यह टेस्ट खून में एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए किया जाता है। यदि इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इसकी पुष्टि के लिए वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट किया जाता है।

2. वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट – एलिसा टेस्ट की पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर इसकी पुष्टि के लिये यह टेस्ट किया जाता है। इससे एड्स के बारे में शत प्रतिशत सही जानकारी मिल जाती है। 

3. सीडी-8 कोशिकाओं की अधिकता, संख्या, पी-24 एंटीजेन टेस्ट, बीटा-टू आइक्रोग्लोन्यूलीन आदि परीक्षणों की मदद ली जा सकती है।

4. सीडी-4 सेल काउंट – इस टेस्ट से रक्त में सीडी-4 कोशिकाओं की संख्या का पता लगता है। इसे सीडी4 लिम्फोसाइट काउंट सीडी4+ काउंट, टी4 काउंट, टी-हेल्पर सेल काउंट और सीडी4 प्रतिशत नाम से भी जाना जाता है।

5. आरएनए कॉपीज टेस्ट – इससे टेस्ट से पता चलता है कि दवा कब शुरू करना है और अब यह किस अवस्था में है।

एड्स का उपचार – AIDS Treatment

दोस्तो, एड्स का कोई समुचित इलाज नहीं है। इसके लिए ना तो कोई वैक्सीन है और ना ही कोई विशेष दवा। हां, भारत, जापान, अमेरिका, यूरोपीय देश और अन्य देशों में इसकी वैक्सीन के लिए रिसर्च जारी है। एड्स को प्रबंधित करने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं। वस्तुतः एड्स का उपचार बहुत मंहगा है। 

दवाओं की कीमत वहन करना आम आदमी के बसकी बात नहीं है। सिपला की ट्रायोम्यून जैसी यह दवाओं का वार्षिक खर्च लगभग 1,50,000/- रुपये आता है और ये हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। ये दवाएं बीमारी को रोक सकती हैं पर इस रोग को खत्म नहीं कर सकतीं।  इन दवाओं का सेवन यदि रोक दिया जाये तो बीमारी फिर से बढ़ जाती है।  इसलिए इनको आजीवन लेना होता है। 

एड्स से बचाव के उपाय – AIDS Prevention 

दोस्तो, चूंकि वर्तमान में एड्स का कोई इलाज नहीं है इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। इसके लिए सबसे मुख्य उपाय यही है कि अपने शरीर में एचआईवी को ही प्रवेश ना करने दें। इसके लिये निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं जो एचआईवी से भी बचाएंगे और एड्स से भी –

1. एक से अधिक व्यक्तियों से यौन संबंध ना बनाएं।

2. ग्रुप सेक्स के भागीदार ना बनें।

3. गे सेक्स, एनल सेक्स से बचें।

4. ओरल सेक्स से बचें।

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5. केवल अपने जीवन साथी के साथ यौन संबंध रखें।

6. सेक्स के लिए हमेशा कंडोम का उपयोग करें। यह 80 प्रतिशत तक सुरक्षा देता है।

7. एचआईवी/एड्स पीड़ित व्यक्ति से यौन संबंध ना बनाएं।

8. यदि किसी बीमारी के उपचार के लिए इंजेक्शन ले रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि सीरिंज और सुई एकदम नयी हों। 

9. रक्त के आदान प्रदान में सुनिश्चित करें कि रक्त और सुई संक्रमित ना हों।

10. सैलून में शेव कराते समय सुनिश्चित करें कि ब्लेड नया हो। शेव के बाद एंटीसेप्टिक लोशन का इस्तेमाल करें।  

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एड्स क्या है, एचआईवी, एड्स में कैसे बदलता है, सीडी4 (CD4) कोशिकाएं क्या होती हैं, सीडी4 की संख्या, एड्स किनको हो सकता है, एड्स कैसे फैल सकता है, एड्स कैसे नहीं फैलता, एड्स के लक्षण और एड्स का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से एड्स के उपचार के बारे में बताया और एड्स से बचाव के उपाय भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एड्स क्या है, एचआईवी, एड्स में कैसे बदलता है, सीडी4 (CD4) कोशिकाएं क्या होती हैं, सीडी4 की संख्या, एड्स किनको हो सकता है, एड्स कैसे फैल सकता है, एड्स कैसे नहीं फैलता, एड्स के लक्षण और एड्स का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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