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एचपीवी क्या है? –  What is a HPV in Hindi

एचपीवी क्या है?

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, शरीर पर मस्से सभी के होते हैं चाहे वह महिला हो या पुरुष और उम्र चाहे कोई भी है। ये मस्से, छोटे, बड़े, सपाट, उभरे हुए, खुजली वाले बिना खुजली वाले किसी भी तरह के हो सकते हैं। ये मस्से हाथ, उंगलियों, गर्दन, पैरों और जननांग पर हो सकते हैं जो कि कई प्रकार के कैंसर का रूप ले सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन मस्सों की बैकग्राउंड क्या है। दोस्तो, इन मस्सों की बैकग्राउंड है एचपीवी यानि ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus – HPV)। यह अकेला नहीं है बल्कि 150 से अधिक संबंधित वायरसों का एक समूह है। यह जननांग, हाथ, पैर आदि पर मस्सों के अतिरिक्त अनेक प्रकार के कैंसर का जन्मदाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “एचपीवी क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको एचपीवी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा यह भी बताएगा कि एचपीवी का उपचार क्या है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि एचपीवी क्या है और एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

एचपीवी क्या है? – What is a HPV

दोस्तो, ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus – HPV) उपप्रकार वाला एक ऐसा वायरस जो मनुष्यों में आम मस्से से लेकर सर्वाइकल कैंसर तक के रोगों का कारण बनता है। एचपीवी, सबसे सामान्य यौन संचारित संक्रमण है यानि संभोग के जरिये त्वचा के संपर्क से दूसरे व्यक्ति की त्वचा में फैल सकता है। कभी ना कभी पुरुष और महिलाएं अपने जीवन काल में इस वायरस से संक्रमित अवश्य हुए होंगे। इस संक्रमण से व्यक्ति के जननांगों के बाहर भीतर, हाथ पैरों पर मस्से बन जाते हैं। 

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ये मस्से उभरे हुए, या सपाट, या फूलगोभी के आकार के, गुलाबी, या त्वचा के रंग के हो सकते हैं। ये समूह में हो सकते हैं और अलग-अलग भी। कई बार एचपीवी के संक्रमण के लक्षण प्रकट नहीं होते इसलिये व्यक्ति को पता ही नहीं चलता और यह संक्रमण अपने आप ठीक भी हो जाता है। यह सामान्य और कम जोखिम वाला संक्रमण होता है। परन्तु अधिक खतरे वाले संक्रमण से अनेक प्रकार के कैंसर होने की संभावना रहती है जैसे कि सर्वाइकल, वैजाइनल, वल्‍वर, ऑरोफैरिंक्‍स, पेनाइल कैंसर आदि। 

एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है? – How is HPV Infection Spread?

एचपीवी संक्रमण निम्न प्रकार से फैलता है –

1. त्वचा का त्वचा के संपर्क में आने से, मुख्यतः सामान्य सेक्स के जरिये या ओरल या अप्राकृतिक (Unnatural) सेक्स के जरिये।

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2. एचपीवी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से या उसके साथ सेक्स करने से।

3. एचपीवी संक्रमित व्यक्ति के व्यक्तिगत सामान का उपयोग करने से।

4. बहुत अधिक यौन सक्रिय होना।

5. शिशु में, जन्म के समय उसकी मां से, श्वसन या जननागों में संक्रमण फैल सकता है।

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एचपीवी के प्रकार – Type of HPV

1. एचपीवी कोई एक अकेला वायरस नहीं है। यह 150 से अधिक संबंधित वायरसों का एक समूह है और इस समूह का प्रत्येक वायरस, उसको दिये हुए नंबर से पहचाना जाता है। यही उसका नाम होता है और यही उसका प्रकार ही। यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि हर कैदी को एक नंबर दिया जाता है और उसे उसके नंबर से पुकारा जाता है। 

यही उसकी पहचान होती है। सामान्यतः एचपीवी को “मस्सा” के लिए नामांकित किया गया है। इनमें से एचपीवी की 30 किस्मों का प्रभाव प्रजनन अंगों पर पड़ता है। एचपीवी-16 और एचपीवी-18  सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। ये गर्भाशय कैंसर के लिए 70 प्रतिशत से अधिक सीधे रूप से उत्तरदायी होते हैं। 

2. कुछ प्रकार के एचपीवी वायरस कई प्रकार के कैंसर उत्पन्न कर सकता है। 

3. कुछ प्रकार के एचपीवी वायरस मुंह के अंदर या मुंह के आसपास या ऊपरी श्वसन में घाव उत्पन्न कर सकते हैं जिसकी वजह ओरल सेक्स होती है। 

जटिलताएं – Complications

शरीर पर मस्से बनने के अतिरिक्त, एचपीवी संक्रमण से होने वाली जटिलताएं निम्नलिखित हैं –

1. गर्भाशय ग्रीवा (Cervical cancer)।

2. योनि (Vaginal cancer)।

3. योनिमुख (Vulvar cancer)।

4. पेनाइल कैंसर (Penile cancer) – लिंग की त्वचा में होने वाले घातक विकास को पेनाइल कैंसर कहा जाता है।

5. ओरोफैरिंक्स (Oropharynx cancer) यह मुंह के पीछे गले का एक हिस्सा होता है।

6. ओरल कैंसर (Oral cancer) – यह ओरल सेक्स करने से होता है।

नेशनल हैल्थ सर्विस के अनुसार, एचपीवी, गर्भाशय कैंसर के लिए 99 प्रतिशत, गुदा कैंसर के लिए 84 प्रतिशत, पेनाइल कैंसर के लिए 47 प्रतिशत उत्तरदायी होता है।

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एचपीवी के कारण – Cause of HPV

1. असुरक्षित सेक्स एचपीवी का मुख्य कारण है जिसमें त्वचा से त्वचा का मिलाप होता है।

2. ग्रुप सेक्स, एनल सेक्स और ओरल सेक्स।

3. हद से ज्यादा सेक्स में रहना।

4. एचपीवी से संक्रमित गर्भवती महिला, शिशु को जन्म देते समय उसमें वायरस संचारित करने का कारण बन सकती है। 

5. किसी कट या खरोंच के जरिये एचपीवी के विषाणु शरीर में जा सकते हैं। 

एचपीवी के जोखिम कारक – Risk Factors for HPV 

निम्नलिखित एचपीवी के जोखिम कारक बन सकते हैं –

1. अनेक यौन साथी (Multiple Sexual Partners)- एक के बजाय कई यौन साथियों के साथ, ग्रुप में या एकल संख्या में सेक्स करने से एचपीवी से संक्रमित होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

2. आयु संबंधी (Age Related)- किशोरों और बच्चों में सामान्य मस्सों  की शुरूआत होने की संभावना सबसे अधिक होती है ये मस्से जननांग पर बनते हैं। तलवों के मस्से व्यस्क लोगों में होते हैं। 

3. त्वचा संबंधी (Dermatological)- यदि त्वचा पर कोई कट लगा है, चोट लगी है या घाव है तो सामान्य मस्से बनने की संभावना रहती है। 

4. व्यक्तिगत संपर्क (Personal Contact)- किसी अन्य व्यक्ति के मस्से को छूने से एचपीवी वायरस से संक्रमित होने का जोखिम रहता है। 

5. सार्वजनिक सुविधाएं (Public Facilities)- सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग करने से भी एचपीवी वायरस से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। 

6. प्रतिरक्षा प्रणाली (Defence System)- जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें एचपीवी वायरस अधिक फैलने की संभावना रहती है। 

एचपीवी के लक्षण – Symptoms of HPV

एचपीवी के निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं –

1. महिलाओं में एचपीवी के लक्षण (Symptoms of HPV in Women)- लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं में एचपीवी के लक्षणों का पता ही नहीं चलता क्योंकि ये कम जोखिम वाले एचपीवी उपभेद में आते हैं। 

(i) कम जोखिम वाले एचपीवी उपभेद – इस श्रेणी में जीनोटाइप 6, 11, 42, 43 तथा 44 सम्मलित हैं। कम जोखिम वाले संक्रमण से मस्से बन सकते हैं ये कठोर गांठें हो सकती हैं। इनमें खुजली होती है। कभी-कभी इन मस्सों से रक्तस्राव हो सकता है और इनमें दर्द हो सकता है। ये मस्से महिला जननांग के चारों ओर गुच्छे के रूप में हो सकते हैं या अलग-अलग। ये हाथ, उंगलियों, पैर, तलवे पर भी हो सकते हैं। 

(ii) उच्च जोखिम वाले एचपीवी उपभेद – इस श्रेणी में 16, 18, 31, 33, 34, 35, 39, 45, 51, 52, 56, 58, 59, 66, 67, 68  69, 70, 73, 82 तथा 97 शामिल हैं। महिला में अक्सर ये भी लक्षण रहित होते हैं। एचपीवी 16 और 18 का पता प्रीकैंसरस कोशिकाओं की मौजूदगी लगाया जाता है। इससे सर्वाईकल कैंसर के बारे में भी पता चल जाता है। उच्च जोखिम वाले एचपीवी में इससे जुड़ी अन्य बीमारियां जैसे योनि कैंसर, वल्वर कैंसर, गुदा कैंसर, आदि शामिल हैं, के लक्षण हो सकते हैं।

2. पुरुषों में एचपीवी के लक्षण – Symptoms of HPV in Men

1. महिलाओं के समान ही पुरुषों में भी जननांग पर, इसके इस पास, हाथ पैरों पर मस्से बनते हैं। 

2. पुरुषों के जननांग से गाढ़ा, सफेद रंग का स्राव होता है जिसमें एक अजीब सी तीखी दुर्गंध आती है मछली की गंध के समान।

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3. जननांग के ऊतकों में बदलाव दिखाई दे सकता है जैसे कि रंग में बदलाव या त्वचा का मोटा होना।

4. गले में खराश, आवाज में बदलाव।

5. सांस लेने तथा निगलने में दिक्कत होना।

6. एचपीवी संक्रमण से कुछ के लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे पेनाइल कैंसर, ओरल कैंसर, ओरोफैरिंक्स कैंसर आदि।

एचपीवी का परीक्षण – HPV Test 

एचपीवी का परीक्षण निम्न प्रकार किया जाता  है –

1. दृष्टिक निरीक्षण (Visual Inspection) – डॉक्टर एचपीवी के परीक्षण के लिए मस्से का देखते हैं। यदि ये दिखाई दे जाते हैं तो उसी के अनुसार डॉक्टर संक्रमण का इलाज करते हैं।

2. विनेगर सोलूशन टेस्ट (Vinegar Solution Test) – यदि मस्से दिखाई नहीं देते हैं तो संक्रमित स्थान पर विनेगर सोलूशन लगाया जाता है। इससे संक्रमित हिस्से का रंग सफेद हो जाते है। इससे ना दिखाई देने वाले घावों/मस्सों को पहचान लिया जाता है।

3. पेप टेस्ट (Pap Test)- कैंसर से पहले होने वाले बदलाव जो कैंसर का रूप ले सकते हैं, उनका पता लगाने के लिए यह पेप टेस्ट किया जाता है।  इस टेस्ट के लिए डॉक्टर महिलाओं के सर्विक्स या गुप्तांग से कुछ सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज देते हैं। समय रहते भविष्य में होने वाले कैंसर से बचाव किया जा सकता है। 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को तीन साल में कम से कम एक बार पेप टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। 

4. डीएनए टेस्ट (DNA Test)- इस टेस्ट के जरिए जननांग कैंसर के उच्च जोखिम उत्पन्न करने वाले एचपीवी के उपभेद की पहचान की जाती है। इसके लिए सर्विक्स से कोशिकाओं का सैंपल लिया जाता है।  

एचपीवी का उपचार – Treatment of HPV 

यहां हम स्पष्ट करते हैं कि एचपीवी वायरस का कोई समुचित उपचार नहीं है फिर भी एचपीवी की वजह से होने वाली अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उपचार किया जाता है जैसे कि मस्से/घाव, अनेक प्रकार के कैंसर।

कैंसर के उपचार की प्रक्रिया बहुत लंबी चलती है जिसमें सर्जरी प्रक्रिया भी शामिल है। हम यहां केवल मस्से के इलाज पर प्रकाश डालेंगे। इसके उपचार के लिये निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती हैं –

1. दवाएं (Medicines)- यदि मस्सों का इलाज ना किया जाये तो इसकी दो संभावनाएं बनती हैं। पहली तो यह कि मस्सों का आकार बढ़ सकता है और इनकी संख्या भी। दूसरी संभावना यह कि ये वैसे के वैसे ही रह सकते हैं या आप ही आप समाप्त भी हो सकते हैं। इसलिये कोई भी रिस्क ना लेकर इनका इलाज कराना चाहिए। 

इसके लिए डॉक्टर इमीकिमॉड, पॉडोफिलिन और ट्राइक्लोरोएसेटिक एसिड जैसी दवाएं दे सकते हैं। इमीकिमॉड (जायक्लारा, अलदारा) एचपीवी के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाकर अपना काम करती है। पॉडोफिलॉक्स और पॉडोफिलिन जननांग मस्सों के ऊतकों को खत्म करने का काम करती हैं।

2. क्रायोथेरेपी (Cryotherapy)- इस विधि में तरल नाइट्रोजन के साथ वायरस से संक्रमित कोशिकाओं को फ्रीज कर दिया जाता है। इससे मस्सों के चारों ओर एक फफोला बनाकर मस्सों के कार्यों को रोक दिया जाता है।

3. टीकाकरण (Vaccination)- युवाओं के एचपीवी वायरस से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं।  इनमें से कई अति गंभीर एचपीवी-16 और एचपीवी-18 वायरस से बचाने का काम करते हैं। एक अन्य सबसे नया टीका एचपीवी से संबंधित कैंसर से 90 प्रतिशत तक बचाव करता है।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एचपीवी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एचपीवी क्या है?, एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है, एचपीवी के प्रकार, जटिलताएं, एचपीवी के कारण, एचपीवी के जोखिम कारक, एचपीवी के लक्षण और एचपीवी का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से एचपीवी का उपचार के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एचपीवी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एचपीवी क्या है?, एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है, एचपीवी के प्रकार, जटिलताएं, एचपीवी के कारण, एचपीवी के जोखिम कारक, एचपीवी के लक्षण और एचपीवी का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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