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एसटीडी क्या हैं? – What is an STD in Hindi

एसटीडी क्या हैं?

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, बीमारियां कई कारणों से होती हैं। कुछ बीमारियां मौसम की वजह से होती हैं तो कुछ हमारे गलत खानपान के कारण और कुछ वायरस और बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण। वायरस और बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होने वाले रोगों में यौन रोग भी शामिल हैं। इनको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीजिज़ (एसटीडी) – Sexually Transmitted Diseases – STD कहा जाता है। इनको हिन्दी में यौन संचारित रोग कहते हैं। ये रोग ऐसे होते हैं जो यौन क्रियाओं के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाते हैं। इन रोगों में से कुछ का समुचित इलाज हो जाता है और कुछ का नहीं हो पाता, इनको केवल दवाओं के जरिये नियंत्रित किया जाता है। आखिर ये एसटीडी है क्या? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “एसटीडी क्या हैं?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको एसटीडी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा यह भी बताएगा कि एसटीडी का उपचार क्या है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि एसटीडी क्या है और एसटीडी के प्रकार। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

एसटीडी क्या हैं? – What are STD?

दोस्तो, यौन संचारित रोग यानि एसटीडी (Sexually Transmitted Diseases) कोई एक रोग नहीं है बल्कि यौन रोगों का एक समूह है। ये यौन रोग मुख्य रूप से असुरक्षित संभोग, अप्राकृतिक मैथुन, समलिंगी मैथुन, मुख मैथुन (Oral sex) के द्वारा होते हैं। ये यौन रोग वायरस, बैक्टीरिया तथा अतिसूक्षम परजीवी के संक्रमण से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाते हैं।

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इसके अतिरिक्त एसटीडी फैलने के और भी कई कारण होते हैं जिनका जिक्र हम आगे करेंगे। रोगाणुओं की वजह से होने वाले निम्नलिखित एसटीडी का समुचित इलाज हो जाता है –  

1. सिफलिस (Syphilis)

2. क्लैमाइडिया (Chlamydia)

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3. नोरिया (Gonorrhoea)

4. ट्राइकोमोनिएसिस (Trichomoniasis)

परन्तु वायरस के कारण संचारित निम्नलिखित एसटीडी का समुचित इलाज उपलब्ध नहीं है। इनको केवल दवाओं के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है – 

ये भी पढ़े- HPV क्या है?

1. ह्युमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) – (Human Papillomavirus – HPV)

2. ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) – (Human Immunodeficiency Virus -HIV)

3. हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) (Herpes Simplex Virus (HSV)

4. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)

इनके अतिरिक्त कुछ एसटीडी ऐसे होते हैं जो अति सूक्षम परजीवी के कारण फैलते हैं जैसे कि प्यूबिक जूँ (Pubic lice), खुजली (Scabies), ट्राइकोमोनिएसिस (Trichomoniasis) आदि। 

एसटीडी के प्रकार – Types of STD 

दोस्तो, एसटीडी में 30 से अधिक यौन रोग सम्मलित होते हैं। इनमें से हम कुछ का संक्षेप में विवरण दे रहे हैं जो निम्न प्रकार है –

1. ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी)  (Human Immunodeficiency Virus – HIV) – यह रोग असुरक्षित संभोग और गुदा मैथुन से फैलता है। यह एक ऐसा वायरस है जो मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रहार करता है विशेष रूप से CD4 सेल्स (T सेल्स) पर। ये सेल्स किसी भी संक्रमण के विरुद्ध लडने में मदद करते हैं। समय रहते इसका है इलाज ना करवाने पर CD4 सेल्स की संख्या इतनी कम हो जाती है कि शरीर की संक्रमण और रोगों से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है।

यह इस बात की पुष्टि करता है कि व्यक्ति एड्स से पीड़ित है। यहां हम स्पष्ट कर दें कि एड्स होने के लिये व्यक्ति का HIV+ होना जरूरी है। इससे पीड़ित व्यक्ति को दूसरे, तीसरे दिन बुखार आता रहता है, थकान महसूस होती है और वज़न धीरे-धीरे कम होता रहता है। यद्यपि इसका समुचित इलाज नहीं है परन्तु इसे प्रबंधित करने के लिये दवाएं एंटीरेट्रोवाइरल उपचार या एआरटी के रूप में जानी जाती हैं जो एचआईवी को एड्स में विकसित होने से रोकती हैं। 

2. ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी)  (Human papillomavirus – HPV) – यह सबसे आम प्रकार का यौन संक्रमण है। यह जो महिला और पुरुष दोनों को सामान रूप से संक्रमित करता है। इस वायरस से जननांग पर, इसके आसपास के क्षेत्र और हाथ-पैरों पर मस्से बन जाते हैं। 

इसके अतिरिक्त यह वायरस सर्वाइकल कैंसर, वल्वर कैंसर तथा अन्य कैंसर का कारण बनता है। यद्यपि इसका कोई इलाज नहीं मगर इससे टीकाकरण के जरिये बचाव किया जा सकता है तथा दवाओं से इसको नियंत्रित किया जा सकता है।

3. सुजाक – गोनोरिया (Gonorrhea) – यह भी महिला और पुरुष दोनों को संक्रमित करता है। संक्रमित होने के दो दिन से दो सप्ताह के भीतर पुरुष को मूत्र में जलन होने लगती है, मूत्र में गाढ़ा मवाद या खून भी आ सकता है और यह पुरुष को नपुंसक भी बना सकता है। 

महिला को मूत्र में जलन, सफेद डिस्चार्ज, पेडू (Pelvic) तथा कमर में दर्द, फैलोपियन ट्यूब्स में सूजन जैसे लक्षण प्रकट हो सकते हैं। महिला में भी बांझपन हो सकता है। इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है।

4. जननांग दाद (Genital Herpes) – यह भी एक यौन रोग है जो हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस (Herpes Simplex Virus) HSV-1 या HSV-2 के कारण होता है। यह ओरल और जेनेटिल दो प्रकार का होता है। इसमें घाव, जननांग में मलाशय या मुंह के चारों तरफ छाले के समान दिखाई देते हैं। इसका कोई समुचित उपचार नहीं हे। बस, कुछ दवाओं से इसे नियंत्रित किया जाता है। 

5.  क्लैमाइडिया (Chlamydia)- यह महिला और पुरुष दोनों को संक्रमित कर सकता है। यह महिलाओं की प्रजनन प्रणाली के लिये बेहद खतरनाक होता है। यह प्रजनन प्रणाली को इस कदर हानि पहुंचा सकता है कि महिला दुबारा मां नहीं बन सकती। एंटीबायोटिक दवाओं की एकल खुराक के जरिए इसका किया जा सकता है। 

6. उपदंश यानि सिफलिस (Syphilis) – यह यौन रोग बैक्टीरियल इंफेक्शन के जरिये फैलता है। यह गहन चुंबन के जरिये भी फैलता है। सिफलिस में पहले दर्द रहित फोड़ा होता है। फिर यह शरीर में प्रवेश कर योनि या गुदा में हो जाता है। त्वचा पर चकत्ते भी पड़ जाते है। 

यदि इसे आरम्भिक अवस्था में पहचान लिया जाये तो उपचार आसान हो जाता है अन्यथा उपचार लंबा चलता है। इंजेक्शन और एंटीबायोटिक दवाओं के जरिये इसका उपचार किया जाता है।

इनके अतिरिक्त एसटीडी में निम्नलिखित भी शामिल होते हैं –

1. शैंक्रॉइड

2. ट्राइकोमोनिएसिस

3. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी)

4. माइकोप्लाज्मा जेनिटेलियम 

5. निसेरिया मेनिंगिटाइड्स

6. शिगेला फ्लेक्सनेरी 

7. लिम्फोग्रानुलोमा वेनेरेम (LGV)

एसटीडी किसको हो सकता है? – Who Can Get an STD?

निम्नलिखित व्यक्तियों को एसटीडी होने का खतरा सबसे अधिक होता है – 

1. ऐसे व्यक्ति जो संभोग के लिए कंडोम पसंद नहीं करते हैं।

2. ऐसे लोग जिनके यौन साथी को संभोग के दौरान कंडोम से परहेज है।

3. ऐसे व्यक्ति जो सेक्स में अति सक्रिय रहते हैं।

4. ग्रुप सेक्स करने वाले लोग।

5. अप्राकृतिक संभोग करने वाले।

6. गे (Gay) सेक्स करने वाले।

7. ऐसे लोग जिनके कई यौन साथी हैं 

8. ऐसे लोग जिनके कई यौन साथी के और कई यौन साथी हैं।

9. सेक्स वर्कर।

10. नशीली दवाओं के साथ जो उच्च जोखिम वाले यौन क्रिया करते हैं।  

एसटीडी के कारण – Cause of STD

एसटीडी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –

1. असुरक्षित संभोग एसटीडी का मुख्य कारण है।

2. अप्राकृतिक संभोग।

3. ओरल सेक्स

5. ग्रुप सेक्स

6. गे (Gay) सेक्स

7. अधिकाधिक सेक्स में लिप्त रहना।

8. चुंबन यदि किसी को संक्रमण या मौखिक घाव हैं तो त्वचा का स्पर्श और साथ ही लार की भागीदारी से एसटीडी की संभावना बन जाती है।  

9. एसटीडी संक्रमित सुइयों के उपयोग से।

10. गर्भ के दौरान महिला के द्वारा बच्चे को।

11. संक्रमित व्यक्ति के ब्लड ट्रांसफ़्यूजन से। 

12. दवाओं के दुरुपयोग से।

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एसटीडी के लक्षण – Symptoms of STD

एसटीडी के लक्षण यौन रोग के प्रकार के अनुसार प्रकट होते हैं यानि यदि किसी को एचपीवी है तो एचपीवी के लक्षण प्रकट होंगे, एचआईवी है तो एचआईवी के, हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस है तो इसके लक्षण आदि। यहां हम बता रहे हैं एसटीडी के सामान्य लक्षण जो निम्न प्रकार हैं – 

1. पुरुषों में एसटीडी के लक्षण – STD Symptoms in Men

  • संभोग के समय दर्द होना।
  • संभोग के दौरान खून बहना।
  • जननांग के अंदर जलन या खुजली।
  • जननांग क्षेत्र में मस्से/घाव बनना।
  • जननांग क्षेत्र में सूजन, बेचैनी या खुजली।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द।
  • वृषण में दर्द/सूजन होना।
  • जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द
  • मूत्र विसर्जन के समय दर्द होना, जलन होना।
  • कमर क्षेत्र में सूजन, लिम्फ नोड्स।
  • सिरदर्द और बुखार सहित फ्लू जैसे लक्षण
  • थकावट/कमजोरी।
  • गला खराब होना,खांसी और सांस लेने में दिक्कत।
  • गुदा खुजली।
  • दर्दनाक मल त्याग।

2. महिलाओं में एसटीडी के लक्षण – STD Symptoms in Women

  • संभोग के समय पेट के क्षेत्र में दर्द होना। यह संभावित श्रोणि सूजन की बीमारी, गोनोरिया या क्लैमाइडिया संक्रमण का संकेत हो सकता है। 
  • संभोग के समय योनि में दर्द होना। योनि का सफेद होना।
  • असामान्य योनि रक्तस्राव।
  • असामान्य रक्तस्राव।
  • योनि में या योनि के आसपास जलन या खुजली।
  • योनि के आसपास मस्से/घाव या चकत्ते बन जाना।
  • मूत्र विसर्जन के समय जलन, दर्द महसूस होना।
  • मूत्र का बार-बार और अधिक आना।
  • मूत्र में खून आना।

एसटीडी का निदान – STD Diagnosis

1. एसटीडी का निदान, यौन रोग के प्रकार और उस रोग विशेष के लक्षणों के आधार पर किया जाता है। यद्यपि जांच के लिए कई घरेलू टेस्टिंग किट मौजूद हैं परन्तु इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। क्यों कि नेगेटिव पैप स्मीयर का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को कोई एसटीडी नहीं है। 

डॉक्टर के क्लिनिक या अस्पताल में ही एसटीडी की जांच करानी चाहिए। क्यों कि लोग अक्सर पैप स्मीयर टेस्ट को एसटीडी टेस्ट समझते हैं जबकि यह एसटीडी टेस्ट नहीं है।  इससे एचपीवी का पता लगाया जा सकता है जो सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है।

2. डॉक्टर सेक्शुअल हिस्ट्री और व्यक्ति को जो असामान्य महसूस हो रहा है के आधार पर एसटीडी की जांच कर सकते हैं। बेशक एसटीडी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं या नहीं। क्यों कि लक्षण प्रकट ना होने वाला एसटीडी अधिक खतरनाक हो सकता है।

3. यूरिन और ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है।

4. डॉक्टर जेनिटल स्वैब टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं। 

एसटीडी का उपचार – STD Treatment

दोस्तो, यहां हम स्पष्ट कर दें कि एसटीडी का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। जिस प्रकार का एसटीडी है उसी के अनुसार इसका इलाज किया जाता है। बैक्टीरियल संक्रमण से होने वाले एसटीडी का इलाज हो जाता है। इसके लिये डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की सलाह देते हैं। 

परन्तु वायरल संक्रमणों से होने वाले रोगों का इलाज नहीं होता, केवल दवाओं के जरिये इनको रोका जा सकता है। हां, कुछ वायरल संक्रमण वाले एसटीडी का इलाज हो जाता है। यद्यपि सभी प्रकार के एसटीडी का उपचार के बारे में बताना संभव नहीं है, इसलिये हम कुछ निम्न प्रकार के एसटीडी के उपचार के बारे में बता रहे हैं – 

1. क्लैमाइडिया (Chlamydia)- क्लैमाइडिया का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए किया जाता है। इन दवाओं की एकल खुराक का कोर्स दिनों का होता है। तब तक व्यक्ति को सेक्स से दूर रहना होता है।

2. उपदंश यानि सिफलिस (Syphilis) – यदि शुरुआती अवस्था में इसे पहचान लिया जाता है तो संक्रमण के एक साल के अंदर इसका इलाज एंटीबायोटिक के एक इंजेक्शन के जरिए हो जाता है। प्रारंभिक अवस्था में ना पहचाने जाने की स्थिति में इसका उपचार एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है जो कि लंबा चलता है।

3. ट्राइकोमोनिएसिस (Trichomoniasis)- इसके इलाज के लिए मेट्रोनिडाजोल या टिनिडाज़ोल जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।  

4. गोनोरिया (Gonorrhea)-  इसका इलाज भी एंटीबायोटिक दवाओं के माध्यम से किया जाता है। 

5. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)- इसको टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है तथा एंटीवायरल दवाओं से इसका उपचार किया जा सकता है।  

ये भी पढ़े- हेपेटाइटिस बी क्या है?

6. एचआईवी/एड्स (HIV / AIDS)- एचआईवी से ग्रस्त लोगों में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के जरिए एड्स को रोका जा सकता है। 

7. जननांग दाद (Genital Herpes) –  इसके इलाज के लिये कोई विशेष दवा नहीं बनी है लेकिन कुछ दवाओं के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है। 

8. एचपीवी (HVP)- इसका कोई समुचित उपचार नहीं है परन्तु इसे टीकों के जरिए रोका जा सकता है और दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। एचपीवी के कारण होने वाली अन्य स्वास्थ्य संबंधी रोगों का उपचार किया जाता है जैसे कि मस्से/घाव, अनेक प्रकार के कैंसर।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एसटीडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एसटीडी क्या हैं?, एसटीडी के प्रकार, एसटीडी किनको हो सकता है, एसटीडी के कारण, एसटीडी के लक्षण और एसटीडी का निदान, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से एसटीडी के उपचार के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको एसटीडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एसटीडी क्या हैं?, एसटीडी के प्रकार, एसटीडी किनको हो सकता है, एसटीडी के कारण, एसटीडी के लक्षण और एसटीडी का निदान, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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