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बच्चे के पेट के कीड़े कैसे निकाले – How to Remove Stomach Worms from a Child in Hindi

बच्चे के पेट के कीड़े कैसे निकाले

स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, शिशु छः महीने तक केवल अपनी मां का दूध पीते हैं जिसके पोषक तत्व अद्वितीय होते हैं या फार्मूला दूध पीते हैं इसमें भी शिशु के लिये जरूरी सभी पोषक तत्व होते हैं। परन्तु कुछ शिशुओं का वजन बढ़ नहीं पाता बल्कि और कम हो जाता है। यही हाल कुछ बड़े बच्चों का भी देखा गया है कि वे कितना भी खाएं और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन कर लें मगर यह खाया पीया उनके तन को लगता ही नहीं है। अलबत्ता उनका वजन और कम होता चला जाता है, वे सूखते चले जाते हैं। इसका मतलब साफ़ है कि बच्चों के पेट में कीड़े हैं। ये कीड़े बच्चों द्वारा खाए गए भोजन को खाते हैं और शरीर में अंदर पनपते रहते हैं। बच्चों के पेट में कीड़े होने के कारण बच्चों का वजन कम होने लगता है, उनकी इम्युनिटी कमजोर पड़ने लगती है, अस्थि खनिज घनत्व (Bone Mineral Density-BMD) का स्तर कम होने लगता है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि बच्चों की ग्रोथ रुक जाती है। आखिर ये पेट में कीड़े क्या होते हैं? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “बच्चे के पेट के कीड़े कैसे निकाले“।   

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको बच्चों के पेट में कीड़ों के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि इसका उपचार क्या है, बचाव क्या है तथा इसके घरेलू उपाय क्या हैं। तो,  सबसे पहले जानते हैं कि बच्चों के पेट में कीड़े होना क्या है और कृमि के प्रकार। फिर बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

बच्चों के पेट में कीड़े होना क्या है? – What are Stomach Worms in Children?

दोस्तो, पेट में कीड़े क्या होते हैं इसको एक परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता। बस इतना समझ लीजिए कि बच्चों के पेट में कीड़े होने का तात्पर्य एकदम स्पष्ट है कि बच्चों के पेट में कीड़ों की उपस्थिति को ही पेट में कीड़े कहा जाता है। इन कीड़ों से पेट में संक्रमण फैलता है जिसे कृमि संक्रमण (worm infection) कहा जाता है।

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यह संक्रमण छोटे बच्चों से लेकर युवावस्था तक कभी भी हो सकता है। यह कृमि संक्रमण अधिकतर छोटे बच्चों और किशोरों को प्रभावित करता है। यह समस्या अधिकतर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय देशों में जैसे कि अफ्रीका, दक्षिण ​एशिया और दक्षिण अमेरिका में देखी गई है। भारत में भी बच्चे इस संक्रमण का शिकार होते हैं। 

ये कृमि यानि कीड़े शरीर को मिलने वाले भोजन पर जिंदा रहते हुए आंतों को आघात पहुंचाते हैं जिससे रक्त भी बहने लगता है। ये कृमि कई प्रकार के हो सकते हैं जिनका जिक्र हम आगे करेंगे। कृमि संक्रमण के कारण बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ पर बहुत बुरा असर पड़ता है तथा बच्चों की ग्रोथ भी रुक जाती है। 

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कृमि के प्रकार – Types of Worms

कृमि अनेक प्रकार के होते हैं परन्तु आमतौर पर मुख्य रूप से थ्रेडवॉर्म, राउंडवॉर्म, हुकवॉर्म, व्हिपवॉर्म और टेपवॉर्म नोटिस किये जाते हैं। इनका विवरण निम्न प्रकार है – 

1. थ्रेडवॉर्म (Threadworm)- ये छोटे-छोटे पैरासाइट्स होते हैं। देखने में धागे के समान होते हैं। इनका रंग सफेद होता है और ये लंबाई में 13 मि.मी. तक हो सकते हैं। ये 10 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को होते हैं तथा 6 हफ्ते तक ज़िंदा रहते हैं। ये त्वचा पर अंडे जमा करते रहते हैं। इनसे शिशु को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसमें गुदा क्षेत्र और इसके आसपास की त्वचा पर जलन और खुजली होती है। लड़कियों की योनि के आसपास की त्वचा भी प्रभावित होती है।

थ्रेडवॉर्म की वजह से वजन कम होना, और लड़कियों में, मूत्रमार्ग संक्रमण अथवा पेट में संक्रमण होने की संभावना रहती है। इनको रात को शिशु के सो जाने के बाद, टॉर्च की रोशनी में शिशु के कपड़ों या गुदा के आसपास देखा जा सकता है।

2. राउंडवॉर्म (Roundworm)- राउंडवॉर्म से होने वाले संक्रमण को एस्कारियासिस कहा जाता है। ये पैरासाइट्स पेट में अंडों के जरिए अपनी संख्या बढ़ाते हैं तथा पेट में 10 से 24 महीने तक रहते हैं। अधिकतर गन्दी बस्तियों में रहने वाले बच्चे इसकी चपेट में आते हैं।  

3. टेपवर्म (Tapeworm)- इन पैरासाइट्स के स्रोत अध पका संक्रमित मांस और दूषित पानी होते हैं। इन स्रोतों के जरिये ये शरीर में प्रवेश करके संक्रमण फैलाते हैं। इस संक्रमण का उपचार सरलता से हो जाता है। बहुत कम मामलों में ही गंभीर स्थिति देखी गई है। 

4. व्हिपवॉर्म (Whipworm)- ये पैरासाइट्स दूषित मिट्टी के जरिए शरीर में प्रवेश करके संक्रमण फैलाते हैं। इसीलिए इन पैरासाइट्स को सॉइल ट्रांसमिटेड हेल्मिन्थस (soil transmitted helminth) कहा जाता है। ये बड़ी आंत में रहते हैं और इसके अंडे संक्रमित व्यक्ति के मल से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। 

5. हुकवर्म (Hookworm)-  ये पैरासाइट्स लार्वा के माध्यम से आते हैं। यह लार्वा मल से दूषित मिट्टी में पनपता है। लार्वा, मल से दूषित मिट्टी के संपर्क में आने से बच्चे से लेकर बड़ों में भी आता है। त्वचा पर चकत्ते बन जाना, खुजली, बुखार, खांसी, पेट दर्द, भूख कम लगना, दस्त लगना जैसे इसके लक्षण होते हैं।

पेट में कीड़े होने के कारण – Cause of Stomach Worms

पेट में कीड़े होने के निम्नलिखित कारण होते हैं –

  1. दूषित मिट्टी के संपर्क में आने से।
  2. मल युक्त दूषित मिट्टी
  3. गंदा या संक्रमित पानी
  4. कीचड़
  5. नहाने के स्थान स्वीमिंग पूल, तालाब आदि का गंदा पानी
  6. अधपका भोजन
  7. अधपका मांस, मछली
  8. सब्जियों को ठीक से ना धोना
  9. गन्दे और संक्रमित पशु 
  10. बच्चे के गन्दे खिलौने, नाखून ना काटना, गन्दे कपड़े, बैडशीट उचित समय पर ना बदलना आदि। 

पेट में कीड़े होने के लक्षण – Symptoms of Stomach Worms

बच्चों के पेट में कीड़े होने पर सामान्यतः निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं –

  1. रात को सोते समय बच्चे के मुंह से लार निकलती है। 
  2. बच्चे के पेट में दर्द रहना
  3. बच्चे का चिड़चिड़ा हो जाना
  4. दस्त लगना
  5. गुदा पर खुजली लगना
  6. सूखी खांसी 
  7. कमजोरी, थकावट
  8. बच्चे का वजन कम हो जाना
  9. बच्चे को बार-बार भूख लगना
  10. सोते समय दांत किटकटाना
  11. मल में कीड़े दिखाई देना
  12. मल में खून आना
  13. लड़कियों के मामले में मूत्रमार्ग संक्रमण के कारण बार-बार मूत्र आना।
  14. मूत्र विसर्जन के समय दर्द होना। 
  15. उल्टी में कीड़े निकलना

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शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव – Effects on the Body

बच्चों के पेट में कीड़े होने पर उपरोक्त लक्षणों के अतिरिक्त कीड़ों के प्रभाव स्वरूप कुछ निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं –

  1. आवश्यक विटामिनों और खनिजों की कमी बच्चे के विकास में बाधक बनती है।
  2. आयरन की कमी से बच्चे में रक्त की कमी होने लगती है।
  3. बच्चे में डीहाइड्रेशन की समस्या होने वगती है।
  4. अस्थि खनिज घनत्व (Bone Mineral Density-BMD) का स्तर कम होने लगता है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
  5. बच्चे की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है। 
  6. वजन कम होने लगता है जिससे शरीर कमजोर हो जाता है।
  7. पेट में संक्रमण के कारण आंतों की क्षति होने लगती है।
  8. संक्रमण के कारण मस्तिष्क में गांठे बनने का जोखिम रहता है। 
  9. लड़कियों में मूत्रमार्ग संक्रमण होने का जोखिम रहता है।
  10. बच्चे की ग्रोथ रुक जाती है। 

कीड़ों का निदान – Diagnosis of insects

कीड़ों का निदान निम्न प्रकार से किया जाता है –

1. बच्चों में कृमि संक्रमण का पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच करते हैं जिसमें –

(i) नाखूनों के नीचे की जांच की जाती है। नाखूनों के नीचे कीड़े हो सकते हैं।  

(ii) रुई के फाहे की मदद से बच्चे के नितंबों के आसपास के क्षेत्र और गुदा को साफ़ कर के कीड़ों का पता लगाया जा सकता है। 

2. स्टूल टेस्ट (Stool Test)- कीड़ों और अंडों का पता लगाने के लिए बच्चे के मल का सेंपल लेकर लैब भेजा जा सकता है।

3. स्टिकी टेप टेस्ट (Sticky Tape Test)- अंडों को इकट्ठा करने के लिए बच्चे के नितंबों के आसपास के क्षेत्र पर एक टेप का एक टुकड़ा चिपका देते हैं। फिर इस टेप को लैब भेज दिया जाता है। 

4. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)- बच्चे के शरीर में बहुत सारे कीड़े होने की स्थिति में कीड़ों की वास्तविक स्थिति और स्थान का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।

पेट में कीड़ों का इलाज – Treatment of Stomach Worms

बच्चों में पेट के कीड़ों का इलाज कीड़ों के प्रकार, जांच रिपोर्ट और बच्चे की आयु पर निर्भर करता है। इसके लिए निम्नलिखित दवाएं दी जा सकती हैं –

  • दो वर्ष से कम आयु के बच्चे : ज़ेंटेल सस्पेंशन (Zentel Suspension)
  • दो वर्ष से अधिक आयु के बच्चे : जेनटेल 400 एमजी (Zentel 400mg)
  • बड़े बच्चों के लिए : रीसीस पिनवॉर्म (Reese’s Pinworm)

पेट में कीड़ों से बचाव – Protection from Stomach Worms

दोस्तो, यदि हम अपनी और बच्चे की सफाई, घर की सफाई यहां तक कि घर पर काम करने वाली मेड की साफ सफाई का ध्यान रखें तो काफी हद तक बच्चों को पेट में कीड़े होने से, बचा सकते हैं। इस बारे में निम्नलिखित सावधानियां बरती जा सकती हैं –

  1. सबसे पहले जरूरी है घर के फर्श की सफाई। जब शिशु बैठने लग जाता है तथा घुटनों के बल चलने लग जाता है तो वह एक जगह नहीं टिकता। वह फर्श पर रहना पसंद करता है। ऐसी अवस्था में शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए फर्श की सफाई/पोछा डिटॉल, लाइजोल जैसे कीटनाशक से करें और दिन में कम से कम दो बार सफाई करें।
  2. जब-जब भी बच्चा मूत्र विसर्जन करे या मल त्याग करे, हर बार बच्चे को अच्छी तरह धुलवाएं, फिर उसका डाइपर/निक्कर बदलें।
  3. बच्चे का बिस्तर एकदम साफ सुथरा होना चाहिए। 
  4. बच्चे के कपड़े, माता, पिता तथा परिवार के सभी सदस्यों के कपड़े हमेशा साफ सुथरे होने चाहिएं। कोई भी बच्चे को गंदे हाथों से ना छुए।
  5. बच्चे को धूल, मिट्टी, कीचड़, नमी वाले स्थान, दूषित पानी से बचाकर रखें। 
  6. समय-समय पर बच्चे के नाखून काटते रहें।
  7. जब बच्चा पैदल चलना शुरु कर दे तो उसको जूते/चप्पल पहनाकर रखें।
  8. बाहर खेलने के लिये उसे जूते/चप्पल पहनाकर बाहर जाने दें। वापिस घर आने पर उसके हाथ पैर साबुन से अच्छी तरह धोएं।
  9. जब बच्चा बड़ा हो जाए तो उसे बताएं कि हमेशा साफ़ टॉयलट का ही उपयोग करना चाहिए और फिर हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए।
  10. सब्जियां हमेशा अच्छी तरह धोकर पकाएं और अच्छी तरह पकाएं। भोजन अधपका नहीं होना चाहिए।
  11. छोटे बच्चों को पानी उबालकर, सामान्य तापमान पर ठंडा करके पिलाएं। बड़े बच्चों को पानी फिल्टर वाला दें। 
  12. शिशु अंगूठा बहुत चूसते हैं और दांत निकलने के समय हर वस्तु को मुंह में देते हैं। ऐसे में शहद वाली निप्पल चूसने को दें और दांत निकलने के समय मुंह से चबाने वाले मुलायम विशेष खिलौने बच्चे को दें। इस खिलौने को बार-बार पानी से भी धोएं क्यों कि बच्चा इसे बार-बार फर्श पर फेंकेगा और मुंह में देगा।
  13. घर में मेड की सफाई को सुनिश्चित करें। बिना हाथ धोए वह बच्चे को गोद में ना ले।
  14. यदि घर में पालतू कुत्ता या अन्य जानवर है तो उसकी सफाई/टीके लगवाना सुनिश्चित करें ताकि पशुओं से बच्चे को कोई संक्रमण ना हो।

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पेट के कीड़ों के घरेलू उपाय – Home Remedies for Stomach Worms

अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित घरेलू उपाय जिनके जरिये बच्चों को पेट के कीड़ों से छुटकारा दिलाया जा सकता है –

1. अरंडी का तेल (Castor Oil)- गुनगुने दूध या पानी में एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर रात को सोने से पहले बच्चे को पिलाएं। इससे पेट के कीड़े मर जाएंगे और मल के जरिए बाहर निकल जाएंगे।

2. नारियल पानी (Coconut Water)- बच्चे को रोजाना नारियल पानी पिलाएं। इससे आंतों में कीड़े मर जाएंगे।  

3. नीम और शहद (Neem and Honey)- नीम औषधीय गुणों का खजाना है तो शहद औषधीय गुणों के साथ प्राकृतिक मिठास का खजाना। नीम के पत्तों को पीसकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को खिलाएं। पेट के कीड़े मर जाएंगे। 

4. हींग और काला नमक (Asafoetida and Black Salt)- एक गिलास पानी में एक चम्मच काला नमक और एक चुटकी हींग मिलाकर रोजाना बच्चे को खाली पेट पिलाएं। कीड़े खत्म हो जाएंगे।

5. कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds)- बच्चे को रोजाना कद्दू के बीज खिलाएं। इससे 89 प्रतिशत तक टेपवार्म संक्रमण से राहत मिल जाएगी।

6. लहसुन और गुड़ (Garlic and Jaggery)- लहसुन की 3-4 कलियों को छीलकर थोड़ा सा गुड़ लेकर इनको अच्छी तरह पीस लें। केवल तीन दिन तक, दिन में दो बार बच्चे को खिलाएं। कीड़े खत्म हो जाएंगे। इसे एक वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चे को खिला सकते हैं।

7. तुलसी और अदरक (Basil and Ginger)- तुलसी और अदरक दोनों ही आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होती हैं। पेट के कीड़ों के लिए एक उत्तम दवा।  3-4 तुलसी के पत्ते पीसकर इसमें शहद मिलाएं और एक चुटकी सूखी हुई अदरक का पाउडर मिलाकर बच्चे को खाली पेट खिलाएं। कीड़ों से छुटकारा मिल जाएगा। 

8. हल्दी और काली मिर्च (Turmeric and Black Pepper)- ये दोनों ही मसाले औषधीय गुणों से सम्पन्न होते हैं। एक-एक चुटकी हल्दी पाउडर और काली मिर्च पाउडर में आधा चम्मच शहद मिलाकर रात को सोने से पहले बच्चे को खिलाएं। फिर बच्चे को गुनगुना पानी पिला दें। कीड़े खत्म हो जाएंगे।

9. गाजर (Carrot)- पेट में कीड़े हो जाने पर रोजाना बच्चे को गाजर का जूस पिलाएं या कच्ची गाजर खिलाएं। इससे पेट के कीड़े मर जाएंगे। बच्चे को गाजर का जूस पिलाने या गाजर खिलाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लें।

10. पपीता (Papaya)- पपीता पेट के लिए बहुत लाभदायक होता है। इससे कब्ज़ नहीं होती। पपीता में कृमिनाशक (Antihelminthic) गुण उपस्थित होते हैं जो पेट के कीड़े को खत्म करने में मदद करते हैं। बच्चे को रोजाना थोड़ा सा पपीता जरूर खिलाएं। आतों के कीड़े मर जाएंगे।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको बच्चों के पेट में कीड़े के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों के पेट में कीड़े होना क्या है, कृमि के प्रकार, पेट में कीड़े होने के कारण, पेट में कीड़े होने के लक्षण, शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव, कीड़ों का निदान, पेट में कीड़ों का इलाज और पेट में कीड़ों से बचाव, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से पेट के कीड़ों के बहुत सारे घरेलू उपाय भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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बच्चे के पेट के कीड़े कैसे निकाले
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको बच्चोंबच्चों के पेट में कीड़े के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों के पेट में कीड़े होना क्या है, कृमि के प्रकार, पेट में कीड़े होने के कारण, पेट में कीड़े होने के लक्षण, शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव, कीड़ों का निदान, पेट में कीड़ों का इलाज और पेट में कीड़ों से बचाव, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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