हैलो दोस्तो, आज हम आपको ऐसे रोग के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आज कल के समय में बहुत आम हो गया है। और लोग इस बीमारी के बारे में बताने  से बहुत ही संकोच करते हैं  कि लोग हमारा मजाक ना उड़ाएं। तो चलिए जानते हैं  कि वह कौन सा रोग है। जैसा कि आज कल के बिगड़े खान-पान की आदतों के चलते हमें बवासीर की समस्या हो जाती है।  बवासीर को अंग्रेजी में Piles के नाम से जाना जाता है।  यह दो तरह की होती है. 1. आंतरिक बवासीर  2. बाहरी बवासीर. बाहरी बवासीर में मरीज़ के गुदा के आस पास मस्से हो जाते हैं।  इसमें मस्सों में दर्द नहीं  होता लेकिन खुजली अधिक होती है।  वहीँ आंतरिक बवासीर में दर्द हद से ज्यादा होता है जिसके कारण कईं बार मल त्यागने के समय खून निकलता है।  इसको खूनी बवासीर भी कहा जाता है।  बवासीर का समय पर इलाज होना बेहद जरूरी है।  आज हम आपको इस पोस्ट  में बवासीर का देसी इलाज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप अपना कर बवासीर से राहत पा सकते हैं।

बवासीर का देसी इलाज

 बवासीर होने के कारण

 बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी  व पाचन तन्त्र का कमजोर होना है। इसके अतिरिक्त कारण निम्न हैं :- 

1.लम्बे समय तक कब्ज रहना

2.मलत्याग के समय जोर लगाना

3.टॉयलेट में काफी देर तक बैठना

4.हेरिडिटि (वन्शानुगत कारण)

5.अतिसार (दस्त)

6.कईं बार शौच के समय मरीज़ के गुदाद्वार में हलकी पीड़ा  होती है.

7.गुदाद्वार के आस पास खुजली होना भी बवासीर का एक लक्षण हो सकता है.

बवासीर का देसी इलाज

अंजीर

 अंजीर को सदियों से घरेलू उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए यदि आप बवासीर या फिर कब्ज़ के मरीज हैं तो अंजीर आपके लिए उत्तम साबित हो सकती है, इसके लिए आप रात में सोने से पहले सूखी अंजीर को गर्म पानी में भिगो कर रख दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन कर लें। ऐसा करने के कुछ ही दिनों में आपको राहत महसूस होगी। 

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नींबू पानी  

नींबू के रस में विभिन्न पोषक तत्व होते हैं जो केपिलरीज और ब्लड वेसल्स को मजबूत बनाते हैं जिससे बवासीर में राहत मिल सकती है। रुई को नींबू के ताजे रस में भिगोकर पाइल्स पर लगाएं। शुरू में वहाँ कुछ हल्की झुनझुनी या जलन होगी लेकिन जल्द दर्द से निजात मिलेगा। अच्छे रिजल्ट के लिए यह प्रयोग हर तीन घंटे में करना चाहिए। एक चम्मच नींबू का रस, अदरक का रस, पुदीना का रस और शहद मिलाकर दिन में कम से कम एक बार पीने से भी पाइल्स में कुछ ही हफ्तों में आराम मिल जाएगा।

बादाम तेल

बादाम का तेल ठंडक पहुंचाने और सूजन को कम करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। ये एक्सटरनल पाइल्स के इलाज के लिए ज्यादा कारगर है। रुई को बादाम के तेल में भिगोकर एनस पर लगाने से पाइल्स के कारण होने वाली खुजली, दर्द और सूजन में आराम मिलता है। 

आंवला

आंवला भले ही स्वभाव से खट्टे होते हैं लेकिन बवासीर के लिए आंवला से उत्तम दूसरी कोई औषधि नहीं हो सकती।  इसके इलावा आंवला पेट के लिए हेल्दी माना गया है। आप आंवला का चूर्ण सुबह और शाम शहद के साथ खा लें।  इससे आपको बहुत जल्दी बवासीर से राहत मिलेगी। 

नीम

नीम खाने में जितना कड़वा होता है, उतने ही अधिक इसके सेहत को फायदे हैं।  बवासीर के रोगियों के लिए नीम सबसे उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है।  इसके लिए आप मरीज को नियमित रूप से 10 ग्राम नीम पानी में मिला कर दें।

  तिल

 काले तिल की तासीर ठंडी होती है इसलिए कब्ज़ और बवासीर जैसे गंभीर रोगों के लिए बहुत से लोग काले तिल का सेवन करने की सलाह देते हैं।  यदि आपको खूनी बवासीर है तो 10 से 12 ग्राम काले तिल एक ग्राम ताजे मक्खन के साथ खाएं।  इसे खाने से आपको खून आने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

 फाइबर युक्त आहार

 अच्छी और दरुस्त पाचन प्रणाली के लिए फाइबर युक्त भोजन बेहद मायने रखता है।  इसके इलावा फाइबर युक्त आहार के सेवन से कब्ज़ और बवासीर जैसे रोग कोसों दूर बने रहते हैं।  इसलिए अपनी डाइट में साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियां आवश्य शामिल करें।

 बड़ी इलायची

बड़ी इलायची आयुर्वेद ग्रंथ में बवासीर की अचूक दवा मानी गई है।  दरअसल, इलायची की तासीर ठंडी होती है जो बवासीर के दौरान राहतकारी साबित होती है।  इसके लिए 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रख कर भून लें और ठंडी होने के बाद इन्हें पीस कर चूर्ण तैयार कर लें।  अब इस चूर्ण को रोज़ सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में मिला कर पीएं।  इससे आपकी बवासीर की समस्या ठीक हो जाएगी।

  छाछ

 मस्सों वाली बवासीर की अचूक दवा के रूप में छाछ के सेवन  का विशेष महत्व है. दरअसल, छाछ की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसके सेवन से बवासीर के मस्से जल्दी ठीक होने लगते हैं।  इसके सेवन के लिए आप दो लीटर छाछ में 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा व नमक मिला कर रख दें और जब भी प्यास लगे तो पानी की जगह इसे पी लें।  लगातार एक हफ्ते तक इसके सेवन से आपके मस्से ठीक हो जाएंगे और बवासीर से आपको हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा।

 हल्दी

हल्दी एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका इस्तेमाल रसोई घर में मसालों के रूप में किया जाता है।  हल्दी में कई तरह के एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते हैं जो जख्मों को ठीक करते हैं।  ऐसे में यदि आप बवासीर से पीड़ित हैं तो हल्दी आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है। इसके लिए आप एक चम्मच देसी घी में आधा चम्मच हल्दी मिला लें और मस्सों पर मलहम की तरह लगा लें।  आप इसमें घी की जगह एलोवेरा जैल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।  हल्दी बवासीर के मस्से की दवा के रूप में  भी इस्तेमाल की जाती है।

हींग

हींग को बवासीर के मरीज को अपनी डाइट में जरूर शामिल किया जाना चाहिए। आप इसे सब्जी के तड़के में इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर एक गिलास पानी में घोलकर प्रतिदिन सेवन कर सकते हैं। यह पाचन में सुधार करता है और इसलिए बवासीर के इलाज के लिए प्रभावी माना जाता है।

  एलोवेरा

 पाइल्स के इलाज के लिए एलोवेरा एक अच्छा उपचार है। अपने दर्द निवारक और प्राकृतिक चिकित्सकीय गुणों की वजह से एलोवेरा पाइल्स में होने वाले दर्द और जलन को कम करता है। नियमित रुप से ठंडे एलोवेरा के गूदे को एनस पर रगड़ने से इंटरनल और एक्सटरनल दोनों प्रकार के पाइल्स में आराम हो जाता है।

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 जीरा

पाइल्स होने पर सबसे ज्यादा दिक्कत मल त्याग करने में होती है। इसलिए रोज रात को सोने के पहले गुनगुने गर्म पानी में भुना हुआ जीरा मिलाकर काढ़े की तरह बना लें और इसका सेवन करें। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जो मल को नरम करने में मदद करता है और पेट साफ होता है।

नारियल का तेल

नारियल का तेल एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है, जो खूनी बवासीर से राहत दिलाने में मददगार है। नारियल का तेल लगाने से जलन और सूजन कम होती है। साथ ही इससे खुजली से भी राहत मिलती है।

गुलाब की पत्तियां

 यदि आपको खून वाली बवासीर है तो गुलाब की पत्तियों से बनी गुलकंद आपके लिए वरदान साबित हो सकती है।  कब्ज़ और बवासीर को रोकने के लिए इस उपाय को पिछले कईं सालों से दादी माँ के नुस्खों की लिस्ट में शामिल किया गया है।

conclusion

दोस्तो आज हम आपको पोस्ट में बवासीर का देसी इलाज के बारे में बताया है जो की आज कल बहुत से लोगो को ये बीमारी होने लगी है और वो किसी को बताने से डरते है। इस लिए हमने आपके लिए ये पोस्ट लिखा है। दोस्तो आप या आपके किसी भी सगी-सम्बन्धी को इस तरह की समस्या है तो आप हमारे इस पोस्ट के जरिये। इस बीमारी से निजाद पा सकते है।

 Disclaimer:– ब्लॉगर किसी भी प्रकार की हानि, अथवा/ घटना, दुर्घटना के लिये उत्तरदायी नहीं होगा। कृपया आयुर्वेद विशेषग्य/डॉक्टर से विचार विमर्ष जरूर कर लें।


2 Comments

Shiv Kumar Kardam · October 26, 2020 at 6:21 am

Dear Blogger, you have touched the subject on which the person is ashamed to tell even in his family. You have given great favour to the patients to describe the detailed treatment methods. Though, Lemon water will certainly be too much painful but others will be easy and painless.
I am sure that Disclaimer will provide legal protectection to you. You are too kind to your patients.
Many many thanks to you. God bless you.

    Ram Mohan Haldia · October 26, 2020 at 9:51 am

    Very good information given

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