अनुलोम-विलोम के फायदे के बारे में तो सब जानते हैं, पर आज हम आपको कुछ खास बात बताएँगे कि अनुलोम विलोम करने से हमें कितना ज्यादा फायदा हो सकता है। तो चलिए जानते हैं कि प्रायाणाम का मतलब क्या होता है। “प्राण” संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका मतलब है लाइफ फाॅर्स (Life Force) यानि वाइटल एनर्जी और “आयाम” शब्द का मतलब होता है किसी चीज या किसी काम को आगे लाना या बढ़ा देना। तो इन्हीं दोनों शब्दों से मिल कर प्राणायाम बनता है।
अनुलोम-विलोम क्या होता है ?
अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नासिका या नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है नाक का बांया छिद्र। अर्थात अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दांये छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं । इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं । अनुलोम-विलोम प्राणायाम को कुछ योगीगण ‘नाड़ी शोधक प्राणायाम’ भी कहते हैं । उनके अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी वे स्वच्छ व निरोग बनी रहती हैं । इस प्राणायाम के अभ्यासी को वृद्धावस्था में भी गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें नहीं होतीं।
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अनुलोम-विलोम के फायदे
1.सिर्फ योग सिखाने वालों को ही इस अनुलोम-विलोम के फायदे मालूम नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिकों ने भी रिसर्च(Research) से पाया है कि इस अनुलोम -विलोम प्राणायाम से दिमाग की नसें खुलती हैं । दाँई तरफ का दिमाग रचनात्मक क्रियाओं को काबू में रखता है और बाँई तरफ का दिमाग लॉजिकल क्रियाओं को काबू में रखता है। रिसर्च ने यह बताया है की जब बाँई तरफ की नासिका बंद होती है तो दाँई तरफ का दिमाग उत्तेजित होता है और जब दाँई तरफ की नासिका बंद होती है तो बाँई तरफ का दिमाग उत्तेजित होता है। रोजाना अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से शरीर की नाडियां शुद्ध होती हैं और शरीर स्वस्थ, कांतिमय और शक्तिशाली बनता है।
2. अगर आप अपने सांसों पर ध्यान देंगे। तो आप इस चीज को महसूस कर करेंगे, कि एक समय में अपनी एक नॉस्ट्रिल ( Nostril) दूसरी नॉस्ट्रिल से ज्यादा चल रही होती है। मतलब आपके एक नाक से ज्यादा साँस आ रही होती है और दूसरी से थोड़ा कम। जो व्यक्ति हेल्दी होता है। उसका एक समय में एक नॉस्ट्रिल ज्यादा चल रही होती है और उसके 3 घंटे बाद उसकी दूसरी नॉस्ट्रिल ज्यादा चल रही होती है। और ऐसे ही पूरे दिन होता रहता है।
3. हमारा दिमाग जो होता है ये दो हेमीस्फेरेस ( Hemispheres ) में बाँटा होता है।
1. Left Hemispheres 2. Right Hemispheres
जो लिफ्ट हेमीस्फेरेस होता है, वो दिमाग के काम को दिमाग से करता है, और जो राइट हेमीस्फेरेस होता है वो दिल से काम करता है। जो आपके लेफ्ट साइड ब्रेन की वजह से आपके अंदर न्यूमेरिकल स्किल्स(Numerical skills), साइंटिफिक स्किल्स (Scientific skills) ,writing स्किल्स (writing skills) ,स्पीकिंग स्किल्स (Speaking skills) objectivity स्किल्स,(objectivity skills) ,और Logical Reasoning होती है। और आपका Right Side वाला Brain होता है उससे आप चेहरों को पहचान पाते हैं, इमोशंस(Emotions) को महसूस कर पाते हैं, आपके अंदर Creativity होती है, इमेजिनेशन (Imagination) कर पाते हैं, इस लिए आपको म्यूजिक और आर्ट अच्छा लगता है।
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4. तीव्र श्वास से संबंधित एक्सरसाइज पेट के संक्रमण, कब्ज और अन्य पेट से जुडी बीमारियों को दूर करके पाचन तंत्र को सही और क्रियाशील रखने में मदद करती है।
5. अनुलोम-विलोम करने से श्वास को नियंत्रित करते हुए मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोकता है। बढ़ी हुई ऑक्सीजन का प्रवाह मस्तिष्क की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करके उनको सक्रिय बनाता है, जिससे याददाश्त, एकाग्रता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद मिलती है साथ ही इसके अभ्यास से अवसाद, चिंता, तनाव जैसी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है।
अनुलोम विलोम कैसे करे
जमींन पर आसन बिछा कर उस पर बैठें और पद्मासन के जैसे पैरों को मोड़ कर बैठ जाइये। पर आप आपने घुटनों को मोड़ नहीं सकेंगे परंतु जितना हो सके उतना मोड़ कर बैठ जायें। जिन्हें अर्थिरीतिस (Arthritis) है वे लकड़ी की चेयर पर सीधी पीठ कर के बैठ सकते हैं। आपका एक अंगूठा नाक के बाजु रखें और अंगूठे के बगल वाली ऊँगली को मोड़ लें और बची दो उंगलियों को सीधी ही रखें ताकि वे दूसरे तरफ की नाक बंद करने में काम आये। अपने उसी हाथ की कोहनी को ज्यादा ऊपर ना उठायें क्योंकि इससे आपका हाथ कुछ समय बाद दर्द करना शुरू कर देगा। अपने हाथ को हल्का ही रखें। अब पहली नासिका से लम्बी सांस लें और दूसरी नासिका को अपनी उंगलियों से बंद कर के रखें। अब पहली नासिका को बंद करें और दूसरी नासिका से सांस छोड़ें। यह पहली साइकिल हुई। अब दूसरी साइकिल के लिए दूसरी नासिका से सांस लें और पहली नासिका को बंद कर के रखिये और अब पहली नासिका से सांस छोड़ें। अब इस प्राणायाम को 3 मिनट तक करें और प्राणायम के समय को धीरे-धीरे बढा कर 15 से 20 मिनट तक ले जायें ।
conclusion
ऊपर हमने आपको अनुलोम विलोम करने के फायदे और उसे करने की सही विधि बताई है। अगर आप इस आसान का पूर्ण फायदा उठाना चाहते हैं तो इसे सही तरीके से ही करें। एक बात और, अगर आप कमजोर और एनीमिया से पीड़ित हैं तो शुरुआत में सांस लेने में कुछ परेशानी हो सकती है। ऐसे में इसे अधिक बार न करें और शुरुवात में कम करें। इसके बाद धीरे धीरे उसे बढ़ाएं।
Disclaimer:- ब्लॉगर किसी भी प्रकार की हानि, अथवा/और घटना, दुर्घटना के लिये उत्तरदायी नहीं होगा। कृपया अपने योग गुरु से सलाह जरूर लें विचार विमर्ष कर लें।
This Article is Based upon scientic research. Good. Thank you.
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