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कोलिक पेन क्या है? – What is Colic Pain in Hindi

कोलिक पेन क्या है

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में। दोस्तो, छोटे बच्चों का मामला बहुत नाजुक और पेचीदा होता है, विशेषकर शिशुओं का। ये अपना दुख, तकलीफ़ बोलकर नहीं बता सकते और ना ही इशारा करके बता सकते हैं। ये केवल रोकर और अपने हाथ, पैरों की मूवमेंट से बताते हैं जिसको इनकी मां समझ लेती है। हर कोई इनके संकेत को नहीं समझ सकता।उदाहरण के लिये यदि शिशु का हाथ रोते हुए उसके कान पर जाता है तो इसका अर्थ है कि उसके कान में दर्द है। जब पीछे उसको टीका लगता है तो दर्द होने पर बार-बार उसका हाथ हिप पर जाता है। 

इसी तरह जब उसके पेट में दर्द होता है तो वह अपनी दोनों टांगों को सिकोड़कर पेट पर लगाता है। मगर जब वह बहुत तेज-तेज रोता है और चुप कराने के लिए अनेक प्रयास करने के बाद भी उसका रोना लंबे समय तक जारी रहता है तो यह संकेत बहुत कुछ कहता है। यह एक स्पष्ट संकेत है उदरशूल का यानि कोलिक पेन (Colic Pain) का। कोलिक पेन बनता है बच्चे के पेट में गैस रुक जाने की वजह से। इसके लिये कुछ घरेलू उपाय करने पड़ते हैं या बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) के पास जाना पड़ता है। आखिर यह कोलिक पेन है क्या। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “कोलिक पेन क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आपको कोलिक पेन के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और इसके घरेलू उपाय भी बताएगा। तो, सबसे पहले जानते हैं कि कोलिक पेन क्या है और कोलिक पेन के कारण फिर, इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

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कोलिक पेन क्या है? – What is Colic Pain?

दोस्तो, आपने नोटिस किया होगा कि शिशु या छोटे बच्चे जो बोल नहीं सकते, कभी-कभी गैस छोड़ते रहते हैं चाहे दूध पीते हुए, या खेलते हुए या सोते हुए। उनके गैस छोड़ने की आवाज पर हम हंस पड़ते हैं। यह हंसने वाली बात नहीं बल्कि समझने वाली बात है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक है। 

जरा सोचिए यदि बच्चा गैस पास नहीं करता है तो क्या होगा। यदि शिशु/बच्चे को गैस पास नहीं होती है तो गैस उसके पेट में रुक जाती है जिससे पेट में दर्द होता है और शिशु रोने लगता है। चुप कराने पर भी वह चुप नहीं होता अलबत्ता वह और जोर-जोर से रोने लगता है। यही, शिशु का लगातार 3 घंटे से अधिक रोना और रोना 3 दिन तक जारी रहना ही कोलिक पेन (Colic Pain) कहलाता है। 

इस पेन की वजह से शिशु ठीक से सो भी नहीं पाता और चिड़चिड़ा रहने लगता है। कोलिक पेन की समस्या शिशु के जन्म से लगभग जन्म से 6 हफ्ते तक अधिक होती है क्योंकि इस अवधि के बीच शिशु की आंतें विकसित हो रही होती हैं। यह समय माता-पिता के लिए तनाव भरा और चिंता वाला होता है। यह कोलिक पेन की समस्या 30% शिशुओं को प्रभावित करती है। शिशु के लगभग 3 से 4 महीने के हो जाने पर यह कोलिक पेन की समस्या अपने आप खत्म हो जाती है।  

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कोलिक पेन के कारण – Causes of Colic Pain

यह आश्चर्यजनक परन्तु सत्य है कि कोलिक पेन के प्रमाणिक कारण अभी तक पता नहीं चल पाए हैं। अनुमान के अनुसार निम्नलिखित इसके कारण हो सकते हैं –

  1. शिशु का संवेदनशील स्वभाव
  2. अपरिपक्व तंत्रिका तंत्र (immature nervous system)
  3. शिशु के पेट में हवा चले जाने की वजह से गैस बनना
  4. कोई आंतरिक समस्या जैसे कब्ज, गर्ड, लैक्टोज इनटॉलेरेंस, एनल फिशर या माइग्रेन, यद्यपि यह प्रमाणित नहीं है। 
  5. मां के दूध या पाउडर वाले दूध में के किसी प्रकार के प्रोटीन को शिशु द्वारा ना पचा पाना। 

कोलिक पेन के लक्षण – Symptoms of Colic Pain

शिशु में कोलिक पेन के निम्नलिखित लक्षण स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं – 

  1. शिशु लगातार गंभीर रूप से रोता है। 
  2. चुप कराने की कोशिश में वह और जोर-जोर से रोता है।
  3. रोते समय चेहरा लाल पड़ जाता है और आसपास की त्वचा पीली पड़ जाती है। 
  4. शरीर में खिंचाव आ जाता है जैसे कि बाहों को एकदम सीधा करना, मुट्ठी बंद कर लेना, टांगों को अकड़ाना आदि।
  5. टांगों को पेट पर लगा लेना।
  6. पेट में खिंचाव आना।
  7. किसी एक निश्चित समय पर रोना।
  8. चुप होने पर भी चिड़चिड़ा और बेचैन रहना।

कोलिक का परीक्षण –  Colic Test

कोलिक का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर बच्चे की शारीरिक परीक्षण करते हैं जिससे उसकी आंतों में रुकावट, गैस बनना या अन्य बीमारी का पता चल जाता है। इसके अतिरिक्त डॉक्टर, बच्चे के माता पिता से भी कुछ प्रश्न पूछते हैं जिससे बच्चे को डायग्नोज करने में मदद मिलती है। 

कोलिक पेन का उपचार – Treatment of Colic Pain

दोस्तो, आपको जानकर हैरानी होगी कि जैसे कोलिक पेन का कोई प्रमाणिक कारण नहीं है उसी प्रकार इसका कोई सटीक उपचार नहीं है। शिशुओं में गैस की समस्या से निपटने के लिए डॉक्टर सिमेथिकॉन ड्रॉप्स लिख सकते हैं। इन दवाओं को शिशुओं के सुरक्षित माना जाता है क्योंकि ये शरीर में अब्जॉर्ब नहीं होतीं।

कोलिक पेन से बचाव – Prevention of Colic Pain 

काफी हद तक कोलिक पेन होने से बच्चे को बचाया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं – 

  1. यह हमेशा ध्यान रखें कि शिशु को स्तनपान कराने का कोई निश्चित टाइम-टेबल नहीं होता। शिशु को जब भी भूख लगे तभी उसको स्तनपान कराएं। 
  2. शिशु को स्तनपान कभी लेट कर नहीं कराना चाहिए। इससे कभी-कभी दूथ टपक कर या शिशु मुंह से निकलकर सीधा शिशु के कान में जा सकता है।
  3. मां बैठकर शिशु को गोद लेकर ही स्तनपान कराए। इस अवस्था में शिशु का सिर ऊपर उठा रहता है और उसके पैर, सिर कि दिशा से काफी नीचे रहते हैं। इससे शिशु के पेट में हवा जाने की संभावना नहीं रहती। 
  4. बोतल से दूध पिलाते समय भी शिशु को इसी अवस्था में रखें यानि शिशु का सिर ऊपर उठा रहे और उसकी टांगें नीचे की ओर रहें।
  5. स्तनपान या बोतल का दूध पिलाने के बाद शिशु को डकार दिलाएं। डकार आ जाने पर उसके पेट में गैस नहीं बनेगी। डकार दिलाने के लिए शिशु को सीधा खड़ा करके उसकी पीठ थपथपाएं या उसे गोद में लेकर कंधे से लगाकर पीठ थपथपाएं। 
  6. कई बार जब शिशु को सीधा खड़ा करते हैं तो वह खुद ही जोर-जोर से उछलने लगता है और एन्जॉय करता है। उसे ऐसा करने दें। इससे भी शिशु में गैस पास होती रहती है।
  7. यदि बोतल की निप्पल का छेद बड़ा हो चुका है और दूध एकदम से मुंह में ज्यादा जाता है तो तुरन्त निप्पल बदल दें। 
  8. जितनी बार भी बोतल का दूध पिलाएं हर बार बोतल और निप्पल को पानी में डालकर अच्छी तरह उबालकर, उसे ठंडा करके, फिर दूध भरके पिलाएं। उबालने से बोतल और निप्पल के कीटाणु मर जाएंगे।
  9. एक ही बोतल और निप्पल को अधिक समय तक ना चलाएं, इनको समय-समय पर बदलते रहें।

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कोलिक पेन दूर करने के घरेलू उपाय – Home Remedies to Get Rid of Colic Pain

दोस्तो, अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित घरेलू उपाय जिनके जरिए बच्चे को कोलिक पेन से छुटकारा दिलाया जा सकता है –

1. पोजीशन बदलें (Change Position)- यदि बच्चे ने अभी रोना शुरु किया है तो बच्चे की पोजीशन बदल दें। इसके लिए बच्चे को उल्टा यानि पेट के बल लिटा दें या अपनी गोद में लिटा लें। टमी टाइम से भी गैस निकलने की बहुत संभावना रहती है। हां, एक बात का ध्यान रखें कि जब बच्चा पेट के बल लेटा हो तो उसे सुलाने की कोशिश ना करें। यह घातक हो सकता है। इससे सडन इंफैंट डेथ सिंड्रोम की संभावना रहती है। 

2. हींग का उपयोग करें (Use Asafoetida)- हींग, पेट में गैस के निवारण हेतू रामबाण उपाय है। इस उपाय को पहले घर की बड़ी बूढ़ी जैसे दादी अम्मा, नानी अपनाया करती थीं। बच्चे के लगातार रोने को पेट में गैस मिनकर, तुरंत हींग का उपयोग करें। इसके लिए हींग को थोड़े से पानी में घोलकर, रुई का फाहा इसमें डुबोकर बच्चे की नाभि पर रख दें और हींग के पानी से पेट की हल्के-हल्के मालिश करें। 

बहुत ही कम समय में बच्चे को आराम आ जाएगा। पेट में गैस, दर्द की समस्या होने पर हींग का यह उपाय तो बड़े लोग भी अपने लिए कर सकते हैं। बल्कि एक चम्मच हींग का पानी भी पी लें। हींग तुरन्त असर दिखाकर आराम पहुंचाएगी। 

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3. बादाम और नारियल तेल (Almond and Coconut Oil) – एक बर्तन में बादाम का तेल या नारियल तेल लेकर बच्चे के पेट की हल्के हाथ से मालिश करें। मालिश सर्कुलेशन मोड में होनी चाहिए यानि पेट पर हाथ घुमाते हुए धीरे-धीरे मालिश करें। इससे आराम आ जाएगा।

4. गर्म सिंकाई करें (Apply Hot Compress)- बच्चे के पेट में गैस बनने या दर्द होने की स्थिति में बच्चे के पेट की हल्के गुनगुने पानी से सिंकाई करें। इसके लिए थोड़ा सा हल्का गुनगुना (जिसको बच्चा आसानी से सहन कर सके) पानी लेकर, इसमें छोटा तौलिया भिगोकर, इसे निचोड़ कर बच्चे के पेट पर रखें। यह प्रक्रिया करते रहें। इससे बच्चे को आराम लग जाएगा।

5. अंगूर और किशमिश (Grapes and Raisins)- शिशु या बहुत छोटा बच्चा कुछ भी खा नहीं सकता इसलिए उसे ना तो अंगूर खिलाएं और ना ही किशमिश। इसलिये इनका रस/पानी पिलाना होगा। किसी बर्तन में अंगूर का रस निकाल लें और चम्मच से बच्चे को पिलाएं। जहां तक किशमिश की बात है तो किशमिश को गर्म पानी में अच्छी तरह उबाल लें, फिर इसे अपने आप ठंडा होने दें। किशमिश का यह पानी बिल्कुल ठंडा हो जाने पर चम्मच से बच्चे को पिलाएं। आराम लग जाएगा।  

6. जीरा पानी (Cumin Water)- जीरा पाचन के लिए लाभकारी होता है विशेषकर इसका पानी। गैस, पेट दर्द की समस्या से भी जीरा पानी छुटकारा दिलाता है। इसके लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा डालकर अच्छी तरह उबालें। उबालने के बाद इसे ढक कर सारी रात के लिए छोड़ दें। 

अगले दिन इस जीरा पानी को छान कर जीरा पानी बच्चे को पिलाएं। थोड़ी-थोड़ी देर बाद यह प्रक्रिया दोहराएं। बेहतर होगा यदि बच्चे की मां भी इस पानी को पीए। उसका भी पाचन और पेट ठीक रहेंगे। 

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7. हरी इलायची (Green Cardamom)- हरी इलायची में भी आयुर्वेदिक गुण होते हैं जो पाचन संबंधी समस्याओं और पेट में गैस, दर्द जैसी दिक्कतों को दूर करती है। यह मितली और उल्टी से भी राहत दिलाती है। यह बच्चे को कोलिक पेन से भी राहत दिलाएगी। इसके लिए पानी में एक चम्‍मच इलायची के पाउडर डालकर अच्छे से उबाल लें। बिल्कुल ठंडा हो जाने पर इस पानी को चम्मच से बच्चे को पिलाएं। बच्चे की मां भी इस पानी को पी सकती है।

8. दही (Curd)- दही प्रोबायोटिक्स का भरपूर स्रोत है। प्रोबायोटिक्स आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं जिससे पाचन सरल हो जाता है। चूंकि शिशु या छोटा बच्चा दही तो खाएगा नहीं और ना ही इसका स्वाद पसंद आएगा, इसलिये दही के पानी में चुटकी भर मिश्री का पाउडर मिक्स करके चम्मच की सहायता से, यह पानी बच्चे को पिलाएं। बच्चे द्वारा खट्टा मीठा स्वाद पसंद करने की काफी संभावना रहती है। 

9. अजवाइन (Celery)- मां जैसा भोजन करती है उसी के अनुसार स्तनों में दूध पर प्रभाव पड़ता है। अजवाइन में पेट से जुड़ी समस्याओं के निवारण के गुण मौजूद होते हैं। मां पहले अपने पेट को सही रखे, उसे गैस, कब्ज आदि की शिकायत नहीं होनी चाहिए। जब मां का पेट सही रहेगा तो बच्चे का भी पेट काफी हद तक ठीक रहेगा। 

इसके लिए अजवाइन को पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर इसे अपने आप ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसे किसी बोतल में भर लें। मां रोजाना इस अजवाइन के पानी को पीए। बच्चा का भी पेट ठीक रहेगा। याद रखें कि यह अजवाइन का पानी मां ने पीना है, बच्चे ने नहीं। 

10. मां अपना भोजन बदल कर देखे (Mom, Try Changing Your Diet)- हमने ऊपर बताया है कि मां जैसा भोजन करती है उसी के अनुसार स्तनों में दूध पर प्रभाव पड़ता है। मां खुद ध्यान दे कि वह क्या खा रही है। यदि कोई पदार्थ ऐसा है जो गैस की वजह सकता है तो उसको छोड़े। 

कुछ समय तक लगभग दो सप्ताह तक डेयरी उत्पादों, ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थों और नट्स को भी छोड़ कर देखे और यह विश्लेषण करे कि ऐसे पदार्थ छोड़ने पर बच्चे के पेट में सुधार होता है या नहीं। यदि नहीं, तो डॉक्टर की सलाह लें। इस सिलसिले में फार्मूला दूध को भी बदल कर देखा जा सकता है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको कोलिक पेन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कोलिक पेन क्या है?, कोलिक पेन के कारण, कोलिक पेन के लक्षण, कोलिक का परीक्षण, कोलिक पेन का उपचार और कोलिक पेन से बचाव, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से कोलिक पेन दूर करने के बहुत सारे फायदे भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

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Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको कोलिक पेन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कोलिक पेन क्या है?, कोलिक पेन के कारण, कोलिक पेन के लक्षण, कोलिक का परीक्षण, कोलिक पेन का उपचार और कोलिक पेन से बचाव, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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