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स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, “मूली” एक ऐसी हरी सब्जी है जो भारत में “सलाद की लाइफ लाइन” मानी जाती है। इसके बिना सलाद की कल्पना भी नहीं की जा सकती क्योंकि भारत में मूली का उपयोग मुख्य रूप से सलाद बनाने के लिये किया जाता है। इसे कच्चा भी खाया जाता है और अन्य सब्जियों के साथ मिक्स करके सब्जी के रूप में भी। इसकी भूजी बनाकर खाई जाती है और इसके पत्तों का साग बनाकर भी। मूली एक ऐसी जादुई सब्जी है जो अपनी तासीर बदलती है, सुबह कुछ और तथा शाम को कुछ और। अर्थात् सुबह से लेकर दोपहर तक इसकी तासीर गर्म होती है और तीन बजे के बाद शाम को ठंडी। इसीलिये मूली को शाम से पहले खाने की सलाह दी जाती है ताकि इसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह मिल सकें और शरीर स्वस्थ रहे। आखिर मूली खाने के फायदे क्या होते हैं?  दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “मूली खाने के फायदे”

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको मूली के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि इसे खाने के क्या फायदे होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि मूली क्या है? और इसकी खेती कहां होती है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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मूली खाने के फायदे
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मूली क्या है? – What is Radish?

मूली, जमीन के अंदर पैदा होने वाली सब्जी है। यह एक पौधे की जड़ है जिसे कंद कहा जाता है और यह जड़ वाली हरी सब्जी की श्रेणी में आती है। इसका आकार लंबा, बेलनाकार, होता है, ऊपर से यह पतली होती है और नीचे की तरफ से बहुत पतली, नुकीली होती है और बीच में से मोटी होती है। यह जमीन के अंदर ही बढ़ती रहती है। जमीन के ऊपर मूली के पत्ते देखने में सरसों के पत्तों जैसे दिखाई देते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं।

मूली, ठंडी जलवायु वाले पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में पैदा होती है। मैदानी क्षेत्रों में मूली की बुवाई सितम्बर से जनवरी महीने तक की जाती है और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी बुवाई अगस्त तक की जाती है। मूली 40 से 50 दिन में तैयार हो जाती है। रंगों की दृष्टि से मूली सफेद और लाल रंग की होती है। ब्रैसिसेकी (Brassicaceae) परिवार से संबंध रखने वाली मूली का वानस्पतिक नाम रफ़ानस सैटाईवस (Raphanus Sativus) है, इसे अंग्रेजी में रेडिश (Radish) कहा जाता है।

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मूली की खेती कहां होती है? – Where is Radish Cultivated?

1. दोस्तो, मूली की उत्पत्ति के विषय में अलग-अलग मत  हैं। कई इतिहासकार/विशेषज्ञ केन्द्रीय एवं पश्चिमी चीन और भारत को मूली का उत्पत्ति क्षेत्र मानते हैं तो कई दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप को मानते हैं। 

2. भारत के पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, बिहार, पंजाब, असम, हरियाणा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों में मूली की खेती की जाती है। 

मूली के गुण – Properties of Radish

1. मूली की तासीर गर्म होती है, परन्तु शाम के बाद इसकी तासीर ठंडी हो जाती है।

2. मूली का स्वाद मीठा, चरपरा और तीखा होता है।

3. मूली में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीकैंसर, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीडायबिटिक,  एंटीहाइपरटेंसिव, एंटीकॉर्सनोजिनिक आदि गुण मौजूद होते हैं। 

4. मूली में विटामिन-ए, सी, बी समूह और फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि खनिज होते हैं। 

मूली के पोषक तत्व(मात्रा प्रति 100 ग्राम) :-

पानी : 95.27 ग्राम

एनर्जी : 16 केसीएल

प्रोटीन : 0.68 ग्राम

टोटल लिपिड (फैट) : 0.1 ग्राम

शुगर, टोटल : 1.86 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट : 3.4 ग्राम

फाइबर, टोटल डायटरी : 1.6 ग्राम

कैल्शियम : 25 मिलीग्राम

आयरन : 0.34 मिलीग्राम

मैग्नीशियम : 10 मिलीग्राम

फास्फोरस : 20 मिलीग्राम

पोटेशियम : 233 मिलीग्राम

सोडियम : 39 मिलीग्राम

जिंक : 0.28 मिलीग्राम

कॉपर : 0.05 मिलीग्राम

मैंगनीज : 0.069 मिलीग्राम

सेलेनियम : 0.6 माइक्रोग्राम

फ्लोराइड : 6 माइक्रोग्राम

विटामिन-सी : 14.8 मिलीग्राम

थियामिन : 0.012 मिलीग्राम

राइबोफ्लेविन : 0.039 मिलीग्राम

नियासिन : 0.254 मिलीग्राम

पैंटोथेनिक एसिड : 0.165 मिलीग्राम

विटामिन-बी6 : 0.071 मिलीग्राम

फोलेट, टोटल : 25 माइक्रोग्राम

कॉलिन, टोटल : 6.5 मिलीग्राम

कैरोटीन, बीटा : 4 माइक्रोग्राम

विटामिन-ए : .U 7 .U

ल्यूटिन + जियाजैंथिन :10 माइक्रोग्राम

विटामिन-के 

(फाइलोक्विनोन) : 1.3 माइक्रोग्राम

फैटी एसिड, 

कुल सैचुरेटेड : 0.032 ग्राम

फैटी एसिड, 

कुल मोनोअनसैचुरेटेड : 0.017 ग्राम

फैटी एसिड, 

कुल पॉलीअनसैचुरेटेड : 0.048  ग्राम

मूली का उपयोग – Use of Radish  

मूली का निम्न प्रकार से उपयोग कर सकते हैं –

1. मूली को कच्चा सलाद के रूप में अलग से या भोजन के साथ खा सकते हैं।

2. दूसरी हरी सब्जियों के साथ मूली की सब्जी बनाकर खाई जा सकती है।

3. मूली की भूजी बनाई जा सकती है। भूजी में मूली के पत्तों का भी उपयोग किया जाता है। 

4. मूली का जूस निकालकर पी सकते हैं।

5. मूली का सूप भी बनाया जा सकता है। 

6. मूली के पत्तों का साग भी बनाया जा सकता है।

7. मूली के चिप्स बना सकते हैं।

8. मूली का अचार बनाया जा सकता है। 

9. मूली के बीज और जड़ से सफेद रंग का तेल भी निकाला जाता है। 

मूली खाने का सही समय – Right Time to Eat Radish

1. मूली खाने का उत्तम समय सर्दियों में खिली धूप में बैठकर खाने का होता है, दोपहर तीन बजे से पहले। तीन बजे के बाद यह अपनी तासीर बदल लेती है यानि गर्म से ठंडी। 

2. शाम या रात को मूली खाने का समय बहुत खराब माना जाता है क्योंकि यह पाचन पर भारी पड़ती है जिससे पेट में गैस बनना या पेट में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मूली के साथ क्या नहीं खाना चाहिए? – What Should not Be Eaten with Radish?

दोस्तो, वैसे तो परस्पर विरोधी खाना तो खाना ही नहीं चाहिये क्योंकि जहां विरोध होगा वहां प्रतिक्रिया (Reaction) भी होगा। यही बात भोजन पर लागू होती है। हम बता रहे हैं कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ जिनका सेवन मूली के साथ नहीं करना चाहिये। विवरण निम्न प्रकार है –

1. मछली (Fish)- मूली के साथ मछली का सेवन नहीं करना चाहिए इससे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। 

2. काले चने(Black Gram) – गलत खाद्य संयोजन के नियमों के अनुसार, काले चनों के साथ मूली ना खाने की सलाह दी जाती है।

3. दूध और दही (Milk and Yogurt)- मूली के साथ कभी दूध या दही का सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि ये विषाक्त हो जाते हैं तथा त्वचा रोग होने की संभावना रहती है। इससे पाचन तंत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। मूली, दूध और दही के बीच एक दिन का गैप रखना होगा।

4. चाय (Tea)- मूली या मूली के परांठों के साथ चाय पीने का तो मन ललचाता है विशेषकर सर्दी के मौसम में परन्तु ऐसा करना हानिकारक हो सकता है। मूली के साथ चाय के संयोजन से एस‍िड‍िटी, कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है।

5. खीरा (Cucumber)- खीरा और मूली को एक साथ नहीं खाना चाहिए। सलाद में भी खीरा और मूली को मिक्स नहीं करना चाहिये। खीरा में मौजूद एस्कॉर्बेट विटामिन-सी को सोख लेता है। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिये दोनों को अलग-अलग खाना चाहिए। 

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6. संतरा (Orange)- मूली और संतरा का भी कंबिनेशन नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे पेट की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। यह गंभीर रूप ले सकती है। स्वास्थ को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इन दोनों के बीच कम से कम पांच घंटे का अंतर होना चाहिए।

7. करेला (Bitter Gourd)- करेला और मूली का सेवन एक साथ करने से इनके प्राकृतिक तत्व परस्पर विरोधी गतिविधियां करके आपको बहुत बड़ी मुसीबत में डाल सकते हैं। इससे पेट खराब हो सकता है, सांस लेने में दिक्कत हो सकती है यहां तक कि हृदय से जुड़ी समस्या बन सकती है। इन दोनों के बीज 10 से 12 घंटे का अंतर रखें। 

कुछ सावधानियां – Some Precautions

अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित सावधानियां जो मूली के सेवन के लिये बरतनी चाहियें –

1. सुबह उठकर खाली पेट मूली नहीं खानी चाहिए। इससे शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है। परिणाम स्वरूप पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, पेट में गैस बन सकती है और पेट में दर्द हो सकता है।

2. गर्मी और बरसात के मौसम में मूली खाने को अवॉइड करना चाहिए, अन्यथा स्वास्थ पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। गैस बनना या पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। 

3. यदि सुबह के नाश्ते में मूली के परांठे खाना चाहते हैं तो जरूर खाइये मगर यह सुनिश्चित करें कि परांठों से पहले आपने कुछ अन्य खाद्य पदार्थ खाया हो। शुरुआत परांठों से ना करें।

4. मूली के परांठों के साथ दूध, चाय या अन्य कोई पेय पदार्थ ना लें और ना ही दही, अचार, या खट्टे फल खाएं। 

5. मूली का सलाद हमेशा भोजन से पहले खाएं बाद में नहीं। भोजन से पहले सलाद खाने से मूली के पूरे पोषक तत्व आपके शरीर को मिल जाएंगे। 

6. मूली को सब्जी या भूजी के रूप में दोपहर तक खा लें। 

7. तीन बजे के बाद मूली का सेवन ना करें क्योंकि बाद में इसकी तासीर बदल जाती है। 

मूली खाने के फायदे – Benefits of Eating Radish

मूली खाने के निम्नलिखित फायदे होते हैं –

1. प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाए (Boost Immune System)- मूली में विटामिन-सी की अच्छी मात्रा होती है जो कि खुद अपने आप में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है। मूली को प्रतिदिन सलाद के रूप में खाने से लगभग 15 प्रतिशत विटामिन-सी मिल जाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है और साथ ही चयापचय को विनियमित करता है। मूली के एंटीऑक्‍सीडेंट गुण शरीर को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से मुक्त करते हैं। मूली में पाए जाने वाले ज़िंक, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि खनिज भी शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करते हैं।

2. पाचन तंत्र को मजबूत करें (Strengthen the Digestive System)- यदि मूली को भोजन के बाद खाया जाए तो यह भोजन को आसानी से पचाने में मदद करती है और पाचन तंत्र को मजबूत करती है। भोजन से पहले मूली खाने से यह स्वयं पचने में भारी होती है। इसमें पाए जाने वाला फाइबर भोजन को रसदार बनाता है इससे यह पचने में आसान हो जाता है और मल को भी ढीला करता है जिससे यह शरीर से बाहर आसानी से निकल जाए। मूली पित्त के उत्पादन को बढ़ावा देती है जो कि पाचन के लिये सबसे महत्वपूर्ण भागों में से एक होता है। मूली लिवर और पित्ताशय की थैली दोनों की रक्षा करने में मदद करती है। 

3.मेटाबॉलिज्म बढ़ाए (Increase Metabolism)- मूली में मौजूद विटामिन-सी मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करता है, इसे सुधारने और बढ़ाने में मदद करता है। मूली में मौजूद फास्फोरस पित्त स्राव को बढ़ने में मदद करता है जिससे मेटाबॉलिज्म दर में वृद्धि होती है। मूली में पाये जाने वाला विटामिन-बी समूह मांसपेशियों के निर्माण कार्य में और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है। 

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4. कब्ज से राहत दिलाए (Relieve Constipation)- जब पाचन तंत्र मजबूत हो, तो कब्ज की समस्या नहीं होती। मूली से पाचन तंत्र मजबूत कैसे होता है ये हम ऊपर बता चुके हैं। मूली का सेवन करने से कब्ज से राहत पाई जा सकती है। मूली में मौजूद एसिड आंतों से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है जिससे आंतों को मजबूती मिलती है और ये स्वस्थ रहती हैं।

इसमें मौजूद पोटेशियम, पेट की समस्याओं जैसे पेट दर्द, गैस, दस्त आदि से आराम दिलाता है। मूली में मौजूद फाइबर, मल को ढीला करता है जिससे त्यागने में परेशानी ना हो।

5. शरीर को हाइड्रेट करे (Hydrate the Body)- मूली में पानी भरपूर मात्रा में होता है, 100 ग्राम मूली में 95।27 ग्राम पानी। शरीर में पानी की कमी ना हो इसके लिये मूली एक उत्तम विकल्प है। मूली खाने से शरीर हाइड्रेट रहता है जिससे पाचन भी सही रहता है और कब्ज से भी राहत मिलती है।

शरीर हाइड्रेट रहने से त्वचा में नमी बनी रहती है और यह कोमल बनी रहती है। त्वचा में नमी विशेषकर सर्दी के मौसम में बहुत जरूरी होती है क्योंकि सर्द हवाएं त्वचा को शुष्क बना देती हैं। इसलिये शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है और इस काम में मूली मदद करती है। 

6. वजन कम करे (Lose Weight)- मूली वजन कम करने में मदद कर सकती है परन्तु इसके साथ सही एक्सरसाइज भी करनी होगी जिसके लिये एक्सपर्ट की सलाह भी ले लेनी चाहिए। मूली में कैलोरीज़ भी कम होती हैं, कार्ब्स भी और फैट भी, मगर पानी भरपूर होता है। इस वजह से पेट भरा-भरा रहता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगती। मूली खाने से भूख शांत होती है। 

7. रक्तचाप को नियंत्रित करे (Control Blood Pressure)- मूली हाई ब्लड प्रेशर को कम कर, ब्लड प्रेशर लेवल को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है। इसमें पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा होती है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। पोटेशियम रक्त वाहिकाओं को आराम देता है जिससे रक्त प्रवाह सुचारु रूप से बना रहता है। मूली में एंटीहायपरटेन्सिव गुण होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम करते हैं। इसलिये  हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को नियमित रूप से मूली का सेवन करना चाहिए।

8. डायबिटीज में फायदेमंद (Beneficial in Diabetes)- डायबिटीज के मरीजों को मूली खाने का फायदा होता है। यह ब्लड में शुगर लेवल को कम करती है। इसमें एंटीडायबिटिक गुण होते हैं। इसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के लिए जानी जाती है अर्थात् इसे खाने से शुगर लेवल नहीं बढ़ता। स्ट्रेस के कारण भी शुगर लेवल बढ़ता है। इसके पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सिडेंट इंसुलिन स्राव को बढ़ाते हैं। इसके  एंटीऑक्सीडेंट गुण लिपिड पेरोक्सीडेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। 

9. पीलिया में फायदा(Benefit in Jaundice) – मूली, पीलिया के उपचार में अत्यंत लाभदायक होती है। इसे परफेक्ट इलाज माना जाता है। बिलीरुबिन एक पीले रंग का द्रव होता है जो लिवर में मौजूद बाइल फ्लूइड में पाया जाता है। जब बिलीरुबिन का स्तर बढ़ता है तो पीलिया रोग उत्पन्न होता है जिससे त्वचा और आंखों का रंग पीला दिखाई देने लगता है।

यदि इसका इलाज समय रहते ना किया जाये तो इससे लिवर खराब होने का खतरा बन जाता है। मूली, फालतू बिलीरुबिन को निकालती है इसके उत्पादन को कंट्रोल करती है। सुबह उठकर प्रतिदिन एक कच्ची मूली खाएं। पीलिया में आराम आ जाएगा।

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10. लिवर के लिए फायदेमंद (Beneficial for Liver)- जिस तरह मूली पीलिया रोग के उपचार में फायदा करती है उसी प्रकार यह लिवर को स्वस्थ रखती है। विशेषकर काली मूली लिवर के लिए अधिक लाभदायक होती है। इसमें ग्लूकोसाइनोलेट्स (glucosinolates- सल्फर युक्त यौगिक) प्रचुर मात्रा में होता है जो लिवर से विषैले पदार्थों को निकाल लिवर को डीटॉक्सिफाई करता है।

मूली लिवर और पित्ताशय की थैली को सुरक्षित रखती है। मूली में पाए जाने वाला बायोएक्टिव रसायन नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग में भी फायदा पहुंचाती है।

11. किडनी के लिए फायदेमंद (Beneficial for Kidney)- लिवर के साथ-साथ मूली किडनी और मूत्राशय के लिये भी फायदेमंद होती है। यह लिवर के अतिरिक्त किडनी की भी सफाई करती है। मूली मूत्रवर्धक, शुद्धिकारक और निस्संक्रामक के रूप में जानी जाती है। मूली किसी भी प्रकार के संक्रमण से किडनी की रक्षा करने में सक्षम होती है। यह मूत्र प्रणाली को भी संक्रमण से बचाती है। मूली का जूस, मूत्र में जलन, मूत्र विसर्जन के समय दर्द, जलन, सूजन तथा अन्य मूत्र विकारों से राहत दिलाता है। 

12. बवासीर में फायदा (Benefit in Piles)- मूली, पानी प्रतिधारण (water retention) में मददगार होती है। कब्ज, बवासीर का एक प्रमुख कारण है। मूली के सेवन से कब्ज से छुटकारा मिलता है इसलिये जब कारण ही नहीं रहेगा तो बवासीर जैसी समस्या भी उत्पन्न नहीं होगी। बवासीर के उपचार के लिये मूली का जूस और पत्ते इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मूली का जूस 20 मि।ली। लेकर इसमें 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर पीने से लाभ होगा।

यदि मूली के पत्ते इस्तेमाल करने हैं तो इसके पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इस पाउडर में बराबर की मात्रा में चीनी मिलाकर 40 दिन तक 25 से 50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। 

13. बुखार में फायदा (Benefit in Fever)- मूली में एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं जो सूक्षम रोग कीटाणुओं से लड़ते हैं संक्रमण के कारण होने वाले रोगों और बुखार से राहत दिलाते हैं। बुखार की वजह से शरीर का ताप बढ़ने लगता है। मूली का जूस इस ताप को कम करता है और यदि कहीं सूजन है तो इसके एंटीइंफ्लामेटरी गुण इससे भी राहत दिलाते हैं। मूली के जूस में काला नमक मिलाकर पीने से बुखार में आराम आ जाएगा।

14. सफेद दागों से राहत (White Spots Relief)– सफेद दागों को मेडिकल भाषा में विटिलिगो (vitiligo) या ल्यूकोडर्मा (leucoderma) के नाम से जाना जाता है। इसके उपचार के लिए मूली के बीजों का उपयोग किया जाता है। वस्तुतः मूली में एंटकॉर्सनोजिनिक गुणों मौजूद होते हैं जो ल्यूकोडर्मा के उपचार में सहायक सिद्ध होते हैं। मूली के बीजों को पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को सिरका, अदरक के जूस में या गाय के मूत्र में भिगोकर सफेद दागों पर लगाएं। इसके अतिरिक्त मूली भी खाएं। आराम लगेगा। 

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15. त्वचा के लिए फायदेमंद  (Beneficial for Skin)- हमने ऊपर बताया है कि 100 ग्राम मूली में 95।27 ग्राम पानी होता है जो शरीर को हाइड्रेट रखता है। सर्दियों में हवाओं के कारण त्वचा शुष्क और बेजान होने लगती है। यही पानी त्वचा को इन समस्याओं से बचाकर त्वचा को कोमल और मुलायम बनाए रखता है और त्वचा स्वास्थ को बनाए रखता है। मूली में पाए जाने वाले विटामिन-सी, फास्फोरस, जिंक और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स त्वचा स्वास्थ के लिए बहुत अच्छे होते हैं।

मूली के निस्संक्रामक गुण त्वचा की शुष्कता, दाग-धब्बे, मुंहासे, चकत्ते आदि विकारों से राहत दिलाते हैं। इसके अतिरिक्त मूली को कद्दूकस करके, फेसपैक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे चेहरे पर प्राकृतिक दमक आ जाएगी। 

मूली खाने के नुकसान – Side Effects of Eating Radish 

मूली के सेवन से हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. मूली का अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट खराब हो सकता है। 

2. मूली का अधिक मात्रा में सेवन करने से भूख में कमी हो सकती है।

3. अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह और गले में दर्द और सूजन आदि की समस्या हो सकती है। 

4. अधिक मात्रा में सेवन करने से थायराइड हार्मोन का स्तर असंतुलित हो सकता है।

5. मूली का अधिक मात्रा में सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल बहुत कम हो सकता है। इसलिये डायबिटीज की दवा लेने वालों को मूली का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको मूली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मूली क्या है, मूली की खेती कहां होती है, मूली के गुण, मूली के पोषक तत्व, मूली का उपयोग, मूली खाने का सही समय, मूली के साथ क्या नहीं खाना चाहिये और कुछ सावधानियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से मूली खाने के बहुत सारे फायदे बताये और कुछ नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको मूली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मूली क्या है, मूली की खेती कहां होती है, मूली के गुण, मूली के पोषक तत्व, मूली का उपयोग, मूली खाने का सही समय, मूली के साथ क्या नहीं खाना चाहिये और कुछ सावधानियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया है।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · November 28, 2022 at 9:09 pm

Fantastic Article

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