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ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है? – What is Orthostatic Hypotension in Hindi?

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है?

दोस्तो, कई बार बुजुर्ग लोग बिस्तर से उठकर, कुछ कदम चले और चक्कर खाकर गिर पड़े। कभी बाथरूम में गिर गए तो कभी तो बैठते हुए ही लुढ़क गए। जांच कराने पर पता चला कि इनका ब्लड प्रेशर एकदम अचानक से कम हो गया इस वजह से इनको चक्कर आ गया और ये गिर पड़े। कई बार गिरने से उनको गंभीर चोट भी लग जाती हैं जैसे कि सिर फट गया या कहीं की हड्डी टूट गई। 

ऐसी घटनाएं बुजुर्ग लोगों के साथ होती हैं और डायबिटीज के मरीजों के साथ। जवान व्यक्ति के साथ ऐसी समस्या नहीं देखी गई है। अचानक से ब्लड प्रेशर का कम हो जाना चिंता का विषय है जोकि गंभीर स्थिति बन सकती है और जानलेवा भी हो सकती है। इसे मेडिकल भाषा में ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है। ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन को पोस्चरल हाइपोटेंशन के नाम से भी जाना जाता है। आखिर यह ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन है क्या? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है?”।

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आपको ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि इसका उपचार क्या है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है और इसकी गंभीरता। फिर, इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

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ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है? – What is Orthostatic Hypotension?

दोस्तो, शरीर की मुद्रा (Posture) में अचानक से आए परिवर्तन को ब्लड प्रेशर एडजेस्ट नहीं कर पाता और ब्लड प्रेशर कम हो जाता है परिणामस्वरूप व्यक्ति को चक्कर आ जाता है और गिर जाता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन (Orthostatic Hypotension) कहा जाता है। चूंकि शरीर की मुद्रा में अचानक आए बदलाव के कारण ब्लड प्रेशर कम हो जाता है इसलिए ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन को पोस्चुरल हाइपोटेंशन (Postural Hypotension) भी कहा जाता है।

यह तब होता है जब व्यक्ति लेटे हुए से अचानक से बैठता है या उठता है या बैठे हुए होने पर अचानक से खड़ा होकर चलता है। फिर उसे चक्कर आता है और गिर जाता है। कई बार गिरकर वह बेहोश हो जाता है। यह समस्या अधिकतर बुजुर्ग लोगों के साथ होने वाली एक सामान्य समस्या है तकनीकी तौर पर कहा जाये तो समझिए कि व्यक्ति के खड़े होने पर 3 मिनट के अंदर कम से कम 20 मिमी एचजी (millimeter High – mm Hg) के सिस्टोलिक (ऊपर जाने वाली संख्या) ब्लड प्रेशर, या 10 मिमी एचजी के डायस्टोलिक (नीचे आने वाली संख्या) ब्लड प्रेशर में कमी आ जाए तो इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है।

अर्थात् किसी व्यक्ति का बीपी 140/80 है और वह अचानक से बैठता है या उठता है और उसकी रीडिंग 130 या 110 तक गिर जाती है तो यह ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की स्थिति मानी जा सकती है। 

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ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की गंभीरता – Severity of Orthostatic Hypotension

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन वैसे तो सामान्य ही है परन्तु यह गंभीर रूप भी ले सकती है। इसलिए शुरूआत में ही डॉक्टर से परामर्श कर इलाज करा लेना चाहिए। इसकी निम्नलिखित गंभीरता हो सकती हैं –

1. यदि व्यक्ति गिर कर बेहोश हो गया है और जल्दी ही वह होश में नहीं आता है तो उसे तुरन्त अस्पताल ले जाना चाहिए क्योंकि लंबे समय की बेहोशी जानलेवा हो सकती है।

2. चक्कर आना, सिरदर्द या हल्का सिर दर्द का भी इलाज करा लेना चाहिए क्योंकि यह मस्तिष्क विकार का कारण बन सकते हैं।

3. सिर में लगी चोट गंभीर हो सकती है। यह ब्रेन हैमरेज का कारण बन सकती है जिससे आंतरिक रक्त स्राव हो सकता है।

4. हाथ, पैर, कूल्हे आदि पर लगी चोट से हड्डी फ्रैक्चर हो सकती है इसलिए डॉक्टर से चैक करा लेना चाहिए।

5. चोट से हड्डी फ्रैक्चर ना हो ये अच्छी बात है परन्तु आंतरिक चोट से कुछ भी जटिलता हो सकती है, इसलिए चैक करा लेना चाहिए।

6. ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन से ब्लड प्रेशर में हुआ बदलाव मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति को कम कर सकता है जिससे स्ट्रोक का खतरा पैदा हो सकता है।

7. ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन हृदय रोगों को आमन्त्रित कर सकता है जैसे कि हृदय की लय को बाधित करना, हृदय की विफलता, सीने में दर्द, हार्ट अटैक आदि।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के कारण – Causes of Orthostatic Hypotension

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के निम्नलिखित कारण होते हैं –

1. शरीर में पानी की कमी (Lack of Water in the Body)- शरीर में पानी की कमी होना ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का एक मुख्य कारण है। पानी की कमी होने से रक्त की मात्रा में कमी आती है। यह पानी की कमी चक्कर आना, कमजोरी, थकावट, सिर दर्द जैसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षण नोटिस किए जा सकते हैं। उल्टी, दस्त, बुखार, शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलना, पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य पेय पदार्थ ना पीना, शरीर में पानी की कमी का कारण बनते हैं।

2. अंतःस्रावी समस्याएं (Endocrine Problems)- इसमें थायराइड की स्थिति, एडिसन रोग और लो ब्लड शुगर की स्थिति यानि हाइपोग्लाइसीमिया तथा ब्लड शुगर शामिल हैं। ये सभी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की वजह बन सकते हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाले संकेत भेजने में मदद करने वाली नसों को क्षति पहुंचा सकती है।

3. नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर (Nervous System Disorder)- इसमें पार्किंसंस रोग, मल्टीपल सिस्टम एट्रोफी, लेवी बॉडी डिमेंशिया, शुद्ध स्वायत्त विफलता (Pure Autonomic Failure) तथा अमाइलॉइडोसिस की स्थितियां शामिल हैं। ये स्थितियां ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की शरीर की क्षमता में रुकावट डालती हैं।

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4. हृदय से जुड़ी समस्याएं (Heart Related Problems)- ब्रैडीकार्डिया यानि हृदय की अत्यंत कम गति, हृदय के वाल्व की समस्याएं, हृदय की विफलता, हार्ट अटैक आदि खड़े होने की मुद्रा में हृदय को तेजी से अधिक रक्त पंप करने में रुकावट डालती हैं।

5. भोजन के बाद लो ब्लड प्रेशर (Lower Blood Pressure after Meals)- अधिकतर बुजुर्ग लोगों भोजन करने के बाद लो ब्लड प्रेशर महसूस करने लगते हैं। इसे पोस्टप्रैन्डियल हाइपोटेंशन कहा जाता है।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम  कारक – Risk Factors for Orthostatic Hypotension

निम्नलिखित जोखिक कारक ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन को ट्रिगर सकते हैं –

1. आयु (Age)- ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन 65 वर्ष और उससे अधिक आयु ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की समस्या को ट्रिगर कर सकती है क्योंकि बुजुर्ग लोग इसके सॉफ्ट टारगेट होते हैं। वैसे भी गर्दन की विशेष धमनियां जिनको बैरोरिसेप्टर कहा जाता है, बढ़ती उम्र में कमजोर पड़ जाती हैं। ये विशेष धमनियां ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करती हैं।

2. कुछ दवाएं (Some Medicines)- कुछ दवाएं भी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम को बढ़ा सकती हैं जैसे कि हाई बल्ड प्रेशर और हृदय रोग के उपचार के लिए दी जाने वाली दवाएं – अल्फा ब्लॉकर्स, बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एंजियोटेंसिन-कनवर्टिंग एंजाइम (एसीई) अवरोधक और नाइट्रेट आदि।

 कुछ अन्य दवाएं जो पार्किंसंस रोग, स्तंभन दोष के इलाज में दी जाती हैं। एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसाइकोटिक्स, मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं आदि भी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

3. गर्म वातावरण (Hot Climate)- गर्मी का मौसम। कार्यस्थल का गर्म वातावरण या भारी भरकम व्यायाम जो बहुत अधिक पसीने का कारण बनते हैं, शरीर में पानी की भारी कमी पैदा कर सकते हैं, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम को बढ़ाने के लिए काफी हैं।

4. लंबे समय तक का आराम (Long Rest)- बीमारी या रोग की वजह से लंबे समय तक का आराम करना पड़ जाए तो यह स्थिति शारीरिक सामान्य गतिविधियों को रोक देती है। ऐसी स्थिति भी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन को ट्रिगर करती है।

5. शराब व ड्रग्स (Alcohol and Drugs)- लंबे समय तक शराब का सेवन या ड्रग्स का सेवन ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षण – Symptoms of Orthostatic Hypotension

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं।

  • जब आप लेटे हुए हों या बैठे हुए हों तब अचानक से उठने या उठने और खड़े होने में चक्कर आना मुख्य लक्षण है।
  • नजर धुंधली हो जाना।
  • कमजोरी या थकावट महसूस करना।
  • सिर में दर्द।
  • मतिभ्रम होना।
  • चक्कर आने पर गिर जाना।
  • मूर्छित हो जाना।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का निदान – Diagnosis of Orthostatic Hypotension

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के निदान के लिए निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं –

1. ब्लड प्रेशर चेक करना (Checking Blood Pressure)- बैठने और खड़े होने की स्थिति में ब्लड प्रेशर मापा जाता है। खड़े होने के 2 से 5 मिनट के बीच अंदर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 20 mmHg और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 10 mmHg की गिरावट ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का संकेत माना जाता है।

2. ब्लड टेस्ट (Blood Test)- ब्लड टेस्ट में ब्लड शुगर, थायरॉयड और लाल रक्त कोशिकाओं के स्तर की जांच की जाती है तथा अन्य स्वास्थ संबंधी जानकारी ली जाती है।

3. ईसीजी (ECG)- ईसीजी हृदय की विद्युत गतिविधियों को मापने का काम करता है। इसके जरिए हृदय की लय में कोई समस्या, हृदय की संरचना में बदलाव और हृदय की मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा आदि का पता चल जाता है।  

4. सांस बंद करके परीक्षण (Breath Holding Test)- यह नाक या ग्लोटिस को बंद करके सांस छोड़ने का प्रयास करने की क्रिया है।  इससे मध्य कान और छाती में दबाव बढ़ जाता है। इसमें होठों के जरिए हवा को बाहर निकाला जाता है मानो जैसे कि किसी बैलून को फुलाया जाता है। इस टेस्ट के जरिए हृदय गति और ब्लड प्रेशर की जांच में मदद मिलती है।

5. तनाव की जांच (Stress Test)- इसमें मरीज को ट्रेडमिल पर चलाया जाता है। जिन लोगों के लिये यह असुविधाजनक होता है या संभव नहीं होता उनकी, हृदय को अधिक मेहनत करने के लिए दवा देकर, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी या इकोकार्डियोग्राफी की जाती है तथा अन्य परीक्षण भी किये जा सकते हैं।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का उपचार – Treatment of Orthostatic Hypotension

दोस्तो, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का इलाज जीवन शैली में बदलाव करके, दवाओं में बदलाव करके और दवाओं के जरिए किया जा सकता है। विवरण निम्न प्रकार है –

1. जीवन शैली में बदलाव (Lifestyle Changes)- इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के ग्रस्त व्यक्ति अपने स्वास्थ के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें, अपना ध्यान खुद रखने की कोशिश करें क्योंकि परिवार का कोई सदस्य हर समय आपके साथ नहीं रह सकता। 

आलस त्याग कर नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम करें, शारीरिक गतिविधियां बनाए रखें, जंक फूड को अवॉइड करें, घर का बना हुआ हल्का और सुपाच्य भोजन करें। धूम्रपान और शराब आदि का त्याग करें और समय-समय पर ब्लड प्रेशर सहित स्वास्थ की जांच करवाए।

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2. दवाओं में बदलाव (Change in Medications)- यदि आप ब्लड प्रेशर या किसी अन्य बीमारी की दवा ले रहे हैं और आप ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की समस्या से एक, दो बार गुजर चुके हैं तो, डॉक्टर से ली जाने वाली दवाओं की समीक्षा करने को कहें। हो सकता है कुछ दवाओं में बदलाव जरूरी हो। डॉक्टर के कहे अनुसार ही दवाएं लें। यह दिशा, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के उपचार में निश्चित रूप से मदद करेगी। 

3. दवाएं (Medicines)- ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के उपचार के लिए मिडोड्राइन (ऑर्वेटेन), ड्रोक्सिडोपा (नॉर्थेरा), फ्लूड्रोकोर्टिसोन या पाइरिडोस्टिग्माइन (मेस्टिनोन, रेगोनोल) आदि दी जा सकती हैं।

ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन से बचाव – Prevention of Orthostatic Hypotension

दोस्तो, कुछ निम्नलिखित उपाय अपनाकर और सावधानियां बरत कर ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की समस्या से बचाव किया जा सकता है –

1. सबसे पहले तो यह समझें कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक क्षमता का ह्रास होता है जो शक्ति युवावस्था में होती है वह वृद्धावस्था में नहीं होती। इसलिए कोई भी काम अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता के अनुसार ही करें। अपने को सुपरमैन समझने की गलती ना करें।

2. अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधियां नियमित रूप से करें, आलसी होकर ना बैठे रहें।

3. रोजाना थोड़ा-बहुत व्यायाम भी जरूर करें।

4. अपने आप को हाइड्रेट रखें। इसके लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। पानी के अतिरिक्त दूध, फलों का जूस या अन्य पेय पदार्थ जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी आदि पीएं।

5. घर का बना हुआ पौष्टिक भोजन करें। भोजन हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए।

6. बाहर का खाना या जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स को अवॉइड करें।

7. डॉक्टर की सलाह पर भोजन में नमक की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

8. कमर-हाई कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स का उपयोग किया जा सकता है। इसे दिन में पहनें और लेटते समय और रात को सोते समय उतार दें। इससे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षणों से राहत पाने में मदद मिलेगी।

9. ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन से पीड़ित व्यक्ति कुर्सी पर बैठ कर नहाए।

10. महिलाओं को रसोई में काम करते समय यदि हो सके तो वे कुर्सी पर बैठ कर काम करें अन्यथा वे थोड़े-थोड़े समय बाद थोड़ा -थोड़ा ब्रेक लेती रहें इससे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की संभावना नहीं रहेगी।

पोस्चर सही रखने के उपाय –  Ways to Maintain Correct Posture

सबसे महत्वपूर्ण – दोस्तो, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की संभावना को दूर रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि बैठते, उठते, नींद से जागने पर अपने शरीर के पोस्चर को सही रखना। इसके लिए आप निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं –

1. बिस्तर पर या कुर्सी पर बैठते समय अपनी मांसपेशियों को स्ट्रेच और फ्लेक्स जरूर करें। जांघों को दबाएं, पेट, कमर को हल्का-हल्का दबाएं। नितम्बों की मांसपेशियों को भी दबाएं।

2. उठने के लिए भी एकदम झटके से ना उठें। आराम से कोई सहारा लेकर धीरे-धीरे उठें। उठकर, थोड़ा रुकें और पैरों के पंजों को 10 से 20 सेकेन्ड के लिए ऊपर-नीचे करें और चलें।

3. सुबह नींद से जागने के बाद बिस्तर से एकदम से ना उठें। 15-20 सेकेन्ड के लिए बिस्तर पर ही बैठे रहें।

4. फिर जमीन पर पैर रख कर 15-20 सेकेन्ड के लिए बैठे हुए ही थोड़ी और प्रतीक्षा करें।

5. अब बैठे-बैठे ही पैरों के पंजों को ऊपर, नीचे करते रहें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाएगा।

6. फिर बिस्तर से धीरे-धीरे उठकर दीवार या कोई अन्य वस्तु का सहारा लेकर 10 से 15 सेकेन्ड के लिए खड़े रहें।

7. अब सामान्य रूप से आगे चल सकते हैं।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या है?, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की गंभीरता, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के कारण, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के जोखिम कारक, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षण, ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन का निदान, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का उपचार और ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन से बचाव के उपाय इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से पोस्चर सही रखने के बहुत सारे उपाय भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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