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थायराइड के देसी उपाय – Home Remedies of Thyroid in Hindi

थायराइड के देसी उपाय

दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हमारा आज का टॉपिक एक ऐसी वस्तु है जिसे बीमारी समझा जाता है लेकिन वास्तव में यह बीमारी नहीं बल्कि हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, एक ग्रंथि है जिसमें आये विकार को हम बीमारी समझ लेते हैं। इस विकार के दुष्परिणाम स्वरूप कुछ समस्यायें उत्पन्न होती हैं जिनके कारण हमारे शरीर में परिवर्तन होते हैं, वे बीमारियां होती हैं जैसे कि अचानक से वजन बढ़ना या वजन कम होना, गले में सूजन, बालों का झड़ना, आवाज़ में फर्क आना, जोड़ों में सूजन या दर्द आदि।जी हां हम बात कर रहे हैं थायराइड की। यही है हमारा आज का टॉपिक थायराइड। यह बहुत बड़ा विषय है। इस लेख के माध्यम से हम आपको थायराइड के देसी उपाय के विषय में विस्तृत जानकारी को संक्षेप में आप तक पहुंचाने का प्रयत्न करेंगे। तो, सबसे पहले जानते हैं कि थायराइड है क्या? 

थायराइड क्या है- What is thyroid ?

दोस्तो, Desi Health Club सबसे पहले यह स्पष्ट करता है कि थायराइड कोई बीमारी नहीं है। यह शरीर के अंदर का एक हिस्सा है, एक ग्रंथि होती है जो जिसका आकार तितली जैसा होता है और यह हमारे गले में सामने की तरफ स्थित रहती है। इसी ग्रंथि को थायराइड कहा जाता है।

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थायराइड के देसी उपाय
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थायराइड ग्रंथि के कार्य – Thyroid Gland Functions

1. थायराइड ग्रंथि हमारे भोजन से आयोडीन को अवशोषित करती है, फिर इसका उपयोग;

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2. ट्राईआयोडोथायरोनिन यानी टी3 (T3) (Triiodothyronine) और थायरॉक्सिन यानी टी4 (T4) (Thyroxine) हार्मोन का निर्माण करने में करती है। 

3. यह ग्रंथि इन हार्मोंन्स् को संग्रहित (Store) करती है।

4. फिर आवश्यकतानुसार इन्हें शरीर की कोशिकाओं तक भेजती है।

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हार्मोन क्या करते हैं? – What do hormones do?

हमारी सांस, हृदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर इन हार्मोन का सीधा प्रभाव पड़ता है। इन हार्मोन का काम हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना है।

थायराइड की समस्या क्या है? – What is thyroid problem?

थायराइड ग्रंथि किसी दुष्प्रभाव के कारण जब अपना कार्य करना बंद कर देती है तब हार्मोन्स् असंतुलित हो जाते हैं। इन हार्मोन्स् के असंतुलित हो जाने कारण शरीर में बीमारियां बनने लगती हैं जैसे की वजन का बढ़ जाना या कम होना, श्रवण शक्ति का कम होना, गले में सूजन, बालों का झड़ना, आवाज़ में बदलाव, जोड़ों में सूजन आदि। इसी को ही थायराइड की समस्या कहा जाता है।

थायराइड के प्रकार – Types of thyroid

दोस्तो, थायराइड मुख्य रूप से दो ही प्रकार का होता है, एक हाइपो थायराइड और दूसरा हाइपरथायराइड। परन्तु थायराइड ग्रंथि के कुछ विकारों को भी थायराइड के प्रकार मान लिये जाते हैं। Desi Health Club इन सभी का वर्णन करता है जो निम्न प्रकार है :-

1. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) – जब थायराइड ग्रंथि आवश्यकता से कम हार्मोन का उत्पादन करती है तो उस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं।

2. हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) – इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि आवश्यकता से अधिक हार्मोन का निर्माण करने लगती है।

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3. गॉइटर (Goiter) – इस विकार को घेंघा रोग कहा जाता है। इस स्थिति में गले में सूजन हो जाती है और गांठ जैसी नजर आती है। ऐसा भोजन में आयोडीन की कमी होने के कारण होता है। 

4. थायरॉयडिटिस (Thyroiditis) – इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाना इसका लक्षण है।

5. थायराइड नोड्यूल (Thyroid nodules) – इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि में गांठ बन जाती है। ये गांठ ठोस या तरल पदार्थ से भरी होती है। इस लक्षण को बहुत ज्यादा गंभीर नहीं माना जाता क्योंकि इसके कारण थायराइड कैंसर होने का खतरा केवल 1% ही होता है।

6. थायराइड कैंसर (Thyroid cancer) – यह अंतिम स्थिती होती है जिसका उपचार सर्जरी द्वारा किया जाता है। थायराइड नोड्यूल की भांति इस स्थिती में भी गांठ बनती है जो दर्द रहित होती है और बहुत तेजी से विकसित होती है और आसपास के टिश्यूज़ को नष्ट कर देती है। इस स्थिती में खाना निगलने में परेशानी होती है और कभी-कभी आवाज़ भी बदल जाती है। इस गांठ से छोटे-छोटे सेल्स टूटकर बाकी शरीर में फैलने लगते हैं। यह फेफडों और हड्डियों तक में फैल जाता है। यह तीन कारणों से होता है – 1। आयोडीन की कमी से, 2। आनुवंशिक (Genetic) और 3। रेडिएशन एक्सपोज़र।

इस थायराइड कैंसर के दो प्रकार होते हैं – 

(i) डिफॅरेन्शिएटेड (Differentiated) – यह सामान्य कैंसर माना जाता है जो धीरे-धीरे बढ़ता है लेकिन इसका उपचार हो जाता है।

(ii) एनाप्लास्टिक (Anaplastic) – यह बहुत आक्रामक (Aggressive) होता है जो बहुत कम लोगों को होता है।

थायराइड के लक्षण – Symptoms of Thyroid

दोस्तो, Desi Health Club स्पष्ट करता है कि थायराइड के लक्षण आम बीमारी जैसे हो सकते हैं। इसलिए यदि शरीर में कुछ असहज सा लगे या कुछ बदलाव नोटिस करते हैं तो बेहतर रहेगा कि डॉक्टर से शरीर संपर्क करें। विशेषतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में। निम्नलिखित लक्षण थायराइड के आरम्भिक लक्षण हो सकते हैं –

1. वजन का बढ़ना या कम होना। 

2. हृदय गति में बदलाव होना।

3. गले में सूजन।

4. मूड का बार बार स्विंग होना।

5. कब्ज।

6. थकावट/कमजोरी

7. तनाव ग्रस्त रहना।

8. शुष्क त्वचा।

9. बालों का झड़ना। 

10. असमय बालों का सफेद होना।

11. पसीना कम आना या बहुत अधिक आना। 

12. उच्च रक्तचाप।

13. जोड़ों में सूजन या दर्द।

14. मांसपेशियों में दर्द रहना।

15. चेहरे पर सूजन।

16. स्मरण शक्ति कमजोर होना।

17. मासिक धर्म का असामान्य/अनियमित होना।

18. प्रजनन क्षमता में असंतुलन।

थायराइड के कारण – Cause of Thyroid

1. 30 साल से अधिक आयु होने पर।

2. आयोडीन की मात्रा कम या ज्यादा होने पर। 

3. गोइटर होने पर।

4. यदि पहले थायराइड हुआ हो तो।

5. अनुवांशिकता।

6. टाइप 1 मधुमेह का इतिहास रहा हो।

7. टाइप 2 मधुमेह के कारण।

8. असंतुलित खान-पान या अधिक तला भुना खाना।

9. जंक फूड व मैदे से बने खाद्य पदार्थ।

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10. भोजन में सोया उत्पादों का ज्यादा सेवन। 

11.बढ़ता हुआ वजन या मोटापा। 

12. ज्यादातर तनाव रहना। 

13. महिलाओं में गर्भावस्था के समय बदलते हार्मोन।

14. गर्भपात।

15. बच्चे का समय से पहले जन्म 

16. बांझपन का इतिहास।

थायराइड के देसी उपचार – Home Remedies of Thyroid

1. आंवला (Gooseberry)- आंवला पाउडर में थोड़ा सा शहद मिलाकर पेस्ट बनाकर सुबह के नाश्ते में सेवन करें। या एक चम्मच आंवला पाउडर को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम पीयें। आंवला हाईपरथायरॉइड की समस्या में लाभकारी है। यह थायराड हार्मोन्स को कन्ट्रोल करता है। देवी अहिल्या विश्विद्यालय के एक शोध में भी यह कहा गया है कि आंवला का सेवन बढ़े हुऐ थायराइड को कम करने में मदद कर सकता है और साथ ही यह भी कहा गया है कि आंवला के हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षा प्रदान करने वाला) गुण इस काम में भी सक्रिया भूमिका निभा सकते हैं। 

2. पत्ता गोभी (Cabbage)- कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनमें गोइट्रोजिन् होते हैं। पत्ता गोभी में गोइट्रोजिन्स की मात्रा बहुत अधिक होती है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम करते हैं। हाईपरथायराइड की समस्या में पत्ता गोभी का सेवन लाभकारी है।

3. ब्रोकली (Brockley)- ब्रोकली भी गोइट्रोजिन् युक्त खाद्य पदार्थ है। इसके अतिरिक्त इसमें आइसोथियोसाइनेट्स नाम का पदार्थ पाया जाता है। ये सब बहुत ज्यादा हार्मोन के उत्पादन को कम करते हैं। हाईपरथायराइड की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन करना चाहिये।

4. बेरी (Berry)- अनेक प्रकार की बेरी खाने से जैसे ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी, स्ट्रॉबेरी, चेरी आदि, थायराइड ग्रंथि की सूजन कम करने में फायदा होता है। इनमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रचुर मात्रा में होते हैं। 

5. एलोवेरा (Aloe vera)- एलोवेरा औषधीय गुणों से सम्पन्न होता है। हाइपोथायराइड के लक्षण को कम करने में समर्थ है और थायराइड हार्मोन बनने की प्रक्रिया को सुधारता है। प्रतिदिन 50 मि।ली। एलोवेरा जूस का सेवन करना चाहिये। इस तथ्य की पुष्टि एलोवेरा पर प्रकाशित एक रिसर्च जर्नल से भी होती है। गुनगुने पानी में एलोवेरा जूस पी सकते हैं। 

6. सेब का सिरका (Apple Vinegar)- मोटापा थायराइड के कारणों में से एक है। एनसीबीआई के एक शोध के अनुसार सेब का सिरका लिपिड और ब्लड शुगर को कंट्रोल कर मोटापे की समस्या से राहत दिलाता है। यह शरीर की उपापचय प्रक्रिया में सुधार कर थायराइड से सम्बंधित समस्या को कम करने में मदद करता है। प्रतिदिन सुबह-शाम खाना खाने से लगभग एक घंटा पहले एक गिलास पानी में एक या दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीयें। 

7. लौकी का जूस (Gourd juice)- लौकी का छिलका भी बहुत काम की चीज है। इसके एंटी-ऑक्सीडेंट गुण यह बढ़ते हुऐ थायराइड हार्मोन्स को कम करने में मदद करते हैं तो लौकी के विशेष तत्व पेरीप्लोगेनिन (periplogenin) में एंटी-थायराइड प्रभाव पाया जाता है, जो हाईपरथायराइड के लक्षणों को कम कर बढ़ते हुए थायराइड हार्मोन को कम करता है। लौकी का जूस निकलते समय इसमें कुछ पुदीने की पत्तियां, हल्की सी काली मिर्च और नमक मिलायें। जूस बनने के बाद इसमें आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीयें। लौकी का जूस का सुबह खाली पेट पीयें। 

8. दही(Curd) – अपने भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को सम्मिलित करना चाहिए जिसमें आयोडीन की मात्रा अधिक हो क्यों कि आयोडीन थायराइड ग्रंथि के दुष्प्रभाव को रोकता है। दही में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है। दही में थोड़ा सा काला नमक डालकर भोजन के साथ या ऐसे ही दिन में दो बार सेवन करें।

9. धनिया (Coriander)- धनिया की पत्तियों में और बीज में फ्लेवोनोइड के कारण एंटी-थायराइड गुण होते हैं जो हाईपरथायराइड की समस्या से छुटकारा दिलाने में लाभदायक होते हैं। धनिया की पत्तियों को पीसकर गुनगुने पानी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीयें। पत्तियों की बजाये धनिया के बीज पीसकर भी पी सकते हैं क्यों कि बीज की अपेक्षा पत्तियों में फ्लेवोनोइड की मात्रा अधिक होती है जो समस्या को बढ़ा भी सकती है। 

10. काली मिर्च (Black Pepper)- काली मिर्च में पिपरीन नामक विशेष तत्व होता है जो थायराइड ग्रंथि की सक्रियता को कम कर के थायराइड हार्मोन को नियंत्रित करने में सक्षम होती है। 6-7 काली मिर्च पीसकर गुनगुने पानी में मिलाकर चाय की तरह पिएं। 

11. अदरक (Ginger)- अदरक जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अतिरिक्त एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से सम्पन्न होती है। इन गुणों के कारण ही इसे थायराइड की समस्या का बेहतर घरेलू उपचार है। आप अदरक को किसी भी तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। सब्जी में डालकर, दाल में छोटे-छोटे टुकड़े करके, डालकर, सलाद के साथ या ऐसे ही चबाकर। अदरक की चाय बनाकर – अदरक के कुछ टुकड़े पानी में डालकर उबालें। थोड़ा ठंडा हो जाये तो चाय की तरह पीयें।

12. अलसी पाउडर (Flaxseed powder)- अलसी के पाउडर में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हाइपोथायरायडिज्म के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। परन्तु इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से राय अवश्य ले लें क्योंकि अधिक समय तक इसका उपयोग गॉइटर या आयोडीन कमी सम्बंधी समस्या का कारण बन सकता है। अलसी पाउडर को पानी या किसी फल के जूस में मिलाकर दिन में एक बार पी सकते हैं। 

13. केल्प(Kelp) – केल्प समुद्र की गहराई में पाई जाने वाली समुद्री खरपतवार है। यह आयोडीन की स्रोत और आयोडीन की कमी का बेहतर विकल्प है। आयोडीन की कमी के कारण होने वाली थायराइड से सम्बंधित समस्या का बेहतर विकल्प है। केल्प सप्लीमेंट, जिसमें 150-175 माइक्रोग्राम आयोडीन हो का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार कर सकते हैं। 

14. नारियल तेल (Coconut Oil)- थायराइड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने में नारियल तेल मददगार साबित हो सकता है। परन्तु नारियल तेल प्राकृतिक होना चाहिये, प्रोसेस्ड नहीं। प्रतिदिन एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच शुद्ध नारियल तेल पीयें या भोजन नारियल तेल में बना सकते हैं। 

15. अश्वगंधा (Ashwagandha)- अश्वगंधा एडापोजेनिक (तनाव कम करने वाली) जड़ी-बूटियों की श्रेणी में आता है। इसे थायराइड से सम्बंधित समस्या के उपचार के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है। National Center for Biotechnology Information की शोध के अनुसार अश्वगंधा थायराइड हार्मोन को बढ़ाने में मदद कर सकता है। एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार अश्वगंधा हाईपोथायराइड के रोगियों के इलाज में मददगार हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार अश्वगंधा कैप्सूल (500mg) ले सकते हैं। 

16. समुद्री आहार (Sea food) – शेलफिश, झींगा और समुद्री मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो थायराइड से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने मददगार होता है। अपने भोजन में समुद्री आहार को सम्मलित करें।

17. फल और जूस (Fruit and juice)- फलों मे एंटी-ऑक्सीडेंट् गुण होते हैं, जिनसे प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ होती है। और थायराइड से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में सहायक। इसलिये अनार, सेब, केला, संतरा, अंगूर, तरबूज़ जैसे फलों और इनके जूस का सेवन करें। 

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18. आयरन और कॉपर युक्त आहार (Copper rich foods)- पालक, फलियां, लाल मांस, कद्दू के बीज, टोफू, ड्राई फ्रूट्स, सूरजमुखी के बीज आदि का सेवन करें।

क्या नहीं खाना चाहिए –

1. ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक हो। 

2. जंक फूड जैसे – चिप्स, कैंडी, बर्गर व पिज्जा आदि।

3. सॉफ्ट ड्रिंक्स/कोल्ड ड्रिंक्स। 

4. सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ जो मीट या चीज़ से मिलता हो। 

5. दूध – यह टीएसएच का स्तर को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों को इससे लैक्टोज इनटॉलेरेंस की समस्या बन सकती है। 

थायराइड टेस्ट –

दोस्तो, व्यक्ति किस प्रकार के थायराइड से पीड़ित है यह जानने के लिये ब्लड सैम्पल के माध्यम से निम्नलिखित जांच की जाती है :-

1. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट (TSH test) – इस टेस्ट में पिट्यूटरी ग्रंथि (यह मटर के दाने के बराबर, दिमाग के निचले हिस्से में होती है) के द्वारा टीएसएच की जांच की जाती है। इससे यह पता चलता है कि शरीर में टी-3 और टी4 थायराइड हार्मोन की स्थिति क्या है। यदि टीएसएच स्तर हाई है तो यह हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन का कम होना या न बनना) की स्थिति का पता चलता है। और यदि, टीएसएच स्तर कम आता है तो हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की अधिकता) का पता चलता है।

2. टी4 टेस्ट (T4 test)- ब्लड में टी4 हार्मोन्स् का अधिक होना हाईपरथायरॉइड यानि बढ़े हुए थायराइड को बताता है तो, ब्लड में टी4 का कम होना हाईपोथायरॉइड (थायराइड हार्मोन की कमी) को बता देता है।

3. टी3 टेस्ट(T3 Test) – हाइपोथायरायडिज्म का उपचार करने के लिए और रक्त में टी3 हार्मोन की मात्रा का पता लगाने के लिए किया जाता है। टी4 हार्मोन्स् के सामान्य होने की पर यदि डॉक्टर को लगे कि मरीज को हाईपरथायरॉइड की समस्या है तो डॉक्टर टी3 हार्मोन्स् के स्तर के आधार पर बढ़े हुए थायराइड के कारण को अच्छी तरह से समझ सकता है। 

4. थायराइड एंटीबॉडी टेस्ट (Thyroid Antibody Test)- इस टेस्ट के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित विकार/समस्या का पता चल जाता है। जैसे 1। ग्रेव्स डिजीज़ जोकि बढ़े हुए थायराइड हार्मोन्स् का एक आम कारण होता है और 2। हाशीमोटोज डिजीज़ जिसके कारण थायराइड हार्मोन्स् नहीं बनते। 

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको थायराइड के देसी उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। थायराइड के प्रकार, इसके लक्षण और कारण बताये। इस लेख के माध्यम से थायराइड से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के देसी उपाय और इसके टैस्ट के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा।

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Disclaimer- यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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