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फिशर क्या है? –  What is a Fissure in Hindi

फिशर क्या है

स्वागत है हमारे ब्लॉग में। दोस्तो, यदि सुबह-सुबह पेट बिना किसी हील-हुज्जत के कुदरती तौर पर साफ़ हो जाता है तो इससे अच्छी कोई बात हो ही नहीं सकती क्योंकि व्यक्ति सारे दिन के लिए फ्री हो जाता है। जिसका पेट साफ़ ना हो रहा हो तो वो बैठे-बैठे जोर लगाता रहता है, पेट में दर्द होता रहता है। बहुत देर, बहुत मशक्कत करने के बाद पेट ढीला तो हो जाता है मगर अंदर ही अंदर चुभन होती रहती है, कभी-कभी खून भी आ जाता है। ये सब तकलीफ़ होती है तो इसे फिशर (Fissure) कहा जाता है। फिशर, एक ऐसा रोग है जिसमें गुदा या गुदा नलिका में जख्म हो जाता है। हालांकि ये कोई बड़ी या गंभीर बीमारी नहीं है मगर शुरुआत में ही इसका उपचार ना किया जाए या खाने पीने का ध्यान ना रखा जाए तो यह बिगड़कर बड़ा रूप ले सकती है। फिशर को संतुलित भोजन के जरिए भी खत्म किया जा सकता है। आखिर यह फिशर क्या है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “फिशर क्या है”?

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आपको फिशर के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि इसका उपचार क्या है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि फिशर क्या है और इसके प्रकार। फिर, इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

फिशर क्या है? – What is a Fissure 

फिशर (Fissure) एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति है जो गुदा की समस्या से संबंधित है तथा गुदा में अथवा गुदा नलिका में जख्म, चोट, खरोंच या दरार आदि को संदर्भित करती है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब मल अंदर सूख कर सख्त हो जाता है और इक्ट्ठा होता रहता है। मल त्याग के समय यह सख्त मल आसानी से नहीं निकल पाता बल्कि इसे निकालने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है जिससे यह जमा हुआ, खुरदुरा और सख्त मल गुदा को क्षति पहुंचाता है या अंदर गुदा नलिका को चीर देता है।

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मल त्याग करते समय दर्द की वजह से पेट की मांसपेशियां ऐंठ जाती हैँ और मल के साथ खून भी आ जाता है। यह समस्या ज्यादातर बच्चों को होती है मगर बड़ों को भी हो जाती है। यह सामान्य है जो कि अक्सर छः हफ्तों में ठीक हो जाता है, बस थोड़ा खानपान का ध्यान रखना पड़ता है। ज्यादा लंबा चलने वाले फिशर का डॉक्टरी इलाज किया जाता है। 

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फिशर के प्रकार – Types of Fissure

फिशर के दो प्रकार होते हैं, विवरण निम्न प्रकार है – 

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1. तीव्र फिशर (Acute Fissure) – इसमें त्वचा की ऊपरी सतह पर छेद बनता है या दरार बनती है। यह ज्यादा से ज्यादा छः हफ्तों में ठीक हो जाता है। फाइबर युक्त भोजन, घरेलू उपायों, दवाओं आदि से यह ठीक हो जाता है।

2. दीर्घकालिक फिशर (Chronic Fissure)- यदि कट और दरार जल्दी नहीं भरते यानि इनको सही होने में छः हफ्ते से ज्यादा का समय लगता है तो ये अंदर या बाहर की ओर विकसित होने लगते हैं। इस स्थिति को क्रोनिक फिशर कहा जाता है। इसके उपचार में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। 

फिशर की जटिलताएं –  Fissure Complications

फिशर की निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती  हैं – 

  • क्रॉनिक एनल फिशर पूरी तरह ठीक ना होने की स्थिति में फिशर की जगह बड़े निशान वाले ऊतक उत्पन्न होने की संभावना रहती है। 
  • फिस्टुला बनने की संभावना रहती है। 
  • गुदा की नलिका असामान्य रूप से संकुचित हो सकती है।

फिशर के कारण – Cause of Fissure

फिशर के निम्नलिखित कारण होते हैं –

1. डाइटरी फाइबर की कमी (Dietary Fiber Deficiency)- भोजन में फाइबर की कमी फिशर होने की मुख्य कारण है। फाइबर भोजन को रसादार बनाता है जिससे वह जल्दी पच जाता है। पाचन क्रिया सही होने पर पेट के रोग भी नहीं होते। फाइबर मल को नरम बनाता है और ढीला करता है जिससे उसे त्यागने में कोई कठिनाई नहीं होती और कब्ज भी नहीं होती। मगर भोजन में फाइबर की कमी से कब्ज बनेगी और कब्ज से फिशर तथा बवासीर जैसी बीमारियां होंगी। 

2. पुरानी कब्ज 

3. डायरिया की शिकायत रहना

4. यौन संचारित संक्रमण 

5. अवरोधिनी गुदा (anal sphincter) मांसपेशियों का असामान्य रूप से सख्त हो जाना

6. सेक्सुअल ट्रांसमिटिड इंफेक्शन  (Sexually Transmitted Infection – STD) जिसमें एनल सेक्स मुख्य कारण है। 

7. इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory Bowel Disease -IBD)

फिशर के जोखिम कारक – Risk Factors for Fissure

निम्नलिखित कारक फिशर होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं –

  • गुदा में चोट/खरोंच लगना
  • गुदा और मलाशय में सूजन 
  • मलाशय का कैंसर
  • मल त्याग के बाद लापरवाही बरतना, गुदा को ठीक से साफ़ ना करना या सख्ती से दबाव से साफ़ ना करना।
  • गर्भावस्था और प्रसव 
  • उम्र बढ़ने के साथ गुदा में रक्त संचार की गति धीमी हो जाना।

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फिशर के लक्षण –  Symptoms of Fissure

फिशर के निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते  हैं – 

  1. गुदा के आसपास खुजली या जलन।
  2. मल त्याग के समय सामान्य या तेज दर्द होना।
  3. मल त्याग के बाद भी ज्यादा समय तक दर्द होना
  4. मल में कभी-कभी रक्त आना
  5. गुदा के आसपास त्वचा में दरारें नजर आना।
  6. गुदा के आसपास त्वचा पर छोटी सी गांठ बन जाना।

फिशर का निदान –  Fisher’s Diagnosis

फिशर के निदान के लिए निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं – 

1. एनोस्कोपी (Anoscopy)- एक पतली ट्यूब मरीज की गुदा में डालकर गुदा, गुदा नलिका और निचले मलाशय की जांच से चोट, घाव या दरारों का पता लगाया जाता है।

2. सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy)- सिग्मोइडोस्कोपी करने के लिए एक पतली ट्यूब जिसके सिरे पर कैमरा लगा होता है, को मरीज की गुदा में डालकर बड़ी आंत के निचले भाग की जांच की जाती है।

3. बायोप्सी (Biopsy)- बायोप्सी के लिए गुदा के ऊतक का सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिया जाता है।

4. कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy)- कोलोनोस्कोपी 50 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्ग मरीजों, पेट के कैंसर, पेट दर्द आदि की जांच के लिए की जाती है। इसके लिए फ्लेक्सिबल ट्यूब मलाशय में डाली जाती है।

फिशर का इलाज – Fissure Treatment

फिशर के इलाज के लिये निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती हैं –

1. दवाएं (Medicines)- डॉक्टर ब्लड प्रेशर की दवाओं की सिफारिश कर सकते हैं ये दवाएं बल्ड प्रेशर को कंट्रोल करने के साथ-साथ एनल स्फिंक्टर को आराम पहुंचाने का काम करती हैं।

2. क्रीम (Cream)- निम्नलिखित क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है – 

(i) नाइट्रोग्लिसरीन – इसे गुदा के आसपास फिशर प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जाता है। यह रक्त प्रवाह को बहाल करती है, घाव को ठीक करती है और एनल स्फिंक्टर को आराम पहुंचाने में मदद करती है। 

(ii) कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स – इस ग्रुप में डिल्टियाज़ेम या निफ़ेडिपिन आदि का इस्तेमाल की जा सकती हैं। ये रक्त वाहिकाओं और एनल स्फ्लिंक्टर को आराम देने का काम करती हैं।  

(iii) टॉपिकल एनेस्थेटिक क्रीम – इस कड़ी में लाइडोकेन हाइड्रोक्लोराइड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे  दर्द में आराम मिलता है।

(iv) जिंक ऑक्साइड या (Zinc oxide) या 1% हाइड्रोकोर्टिसोन क्रीम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, यह डॉक्टर से पूछने के बाद ही इस्तेमाल करें।

4. सर्जरी (Surgery)- सर्जरी प्रक्रिया में आंतरिक स्फिंक्टर की मांसपेशियों के एक छोटे से हिस्से में कट लगा दिया जाता है। इसके परिणाम स्वरूप फिशर के लक्षणों में कमी आती है और फिशर ठीक होने में मदद मिलती है। 

5. लेजर उपचार (Laser Treatment)- लेजर उपचार के लिए मरीज को पहले सामान्य या स्थानीय एनेस्थीसिया देना पड़ता है। फिर सर्जन लेजर उपकरण में से लेजर रेडिएशन निकलते हुए म्यूकस को ठीक करने का काम करते हैं। 

फिशर में क्या नहीं खाना चाहिए? – What not to eat in Fischer?

फिशर की समस्या होने पर निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए –

  • बाहर होटल का खाना
  • डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ
  • अधिक ऑयली, चटपटा, तीखा तेज मिर्च मसाले वाले खाद्य पदार्थ। 
  • जंक फूड
  • मैदा से बने खाद्य पदार्थ
  • ऐसा भोजन जो फाइबर युक्त ना हो।

फिशर के घरेलू उपाय – Home Remedies for Fissure

फिशर के लक्षणों से राहत पाने के लिए निम्नलिखित घरेलू उपायों को अपनाया जा सकता है – 

1. फाइबर युक्त भोजन (Fiber rich Food)- फिशर होने का कारण भी फाइबर है तो निवारण भी फाइबर है। फाइबर की कमी से कब्ज होती है जिससे फिशर होता है। भोजन के द्वारा फाइबर की पर्याप्त मात्रा मिलने से कब्ज खत्म होती है यानि यह मल को नरम बनाता है और ढीला करता है जिससे मल त्याग आसानी से हो जाता है, इससे फिशर की समस्या ही खत्म हो जाती है। 

अतः अपने भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके लिए भोजन में गेहूं का चोकर, साबुत अनाज, ब्राउन राइस, ओटमील, दलिया, ब्रेड, सेम, मटर, हरी सब्जियां, खट्टे फल, बीज और नट्स को शामिल करें।

2. एलोवेरा जेल (Aloe vera Gel)- एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लामेटरी और दर्द निवारक गुणों से भरपूर एलोवेरा अपने आप में एक संपूर्ण औषधी है। यह पुरानी दरारों के उपचार में भी सक्षम है। फिशर के उपचार में इसके फायदे देखे जा सकते हैं। ताजा एलोवेरा की पट्टी काटकर इसका जेल निकाल लें। इस जेल को फिशर प्रभावित स्थान पर लगाएं। इसे दिन में  दो, तीन बार लगा सकते हैं। 

ये भी पढ़ें- एलोवेरा के फायदे और नुकसान

3. ऑलिव ऑयल (Olive Oil)- प्राकृतिक लक्सेटिव्स से समृद्ध ऑलिव ऑयल मल त्याग को सरल बनाता है। यह फिशर के उपचार में एक उत्तम उपाय माना जाता है। इसके उपयोग से रक्तस्राव, दर्द, खुजली और सूजन आदि को खत्म करता है। मोम और शहद को ऑलिव ऑयल में मिला कर फिशर वाली जगह पर लगाएं, आराम लग जाएगा।

4. पपीता (Papaya)- पपीता पाचन के लिए उत्तम फल माना जाता है। यह कब्ज को भी ठीक करता है। इसमें पापेन नामक एंजाइम पेट के स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है। यह मल को नरम बनाता है जिससे मल त्याग में कोई दिक्कत नहीं होती। यह गुदा की दरारों को भरने का काम करता है। फिशर की समस्या में रोजाना सुबह के नाश्ते में पपीता को अपने भोजन में शामिल करें।

5. देशी घी (Desi Ghee)- देशी घी प्राकृतिक लैक्सेटिव है तथा फिशर के उपचार में इसका उपयोग किया जाता रहा है। यह पाचन में मदद करता है और कब्ज को दूर करता है। इसमें मौजूद कई फैटी एसिड मल त्याग को आसान बनाते हैं। फिशर की स्थिति में रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देशी घी डालकर पीएं।

6. काली किशमिश (Black Raisins)- डाइटरी फाइबर से भरपूर काली किशमिश पाचन तंत्र में सुधार करती है, कब्ज को खत्म करती है और मल को नरम बनाकर मल त्याग को आसान बनाती है। फिशर के निवारण के लिए रात भर की भीगी हुई 15-20 काली किशमिश को सुबह खाली पेट खाएं और पानी भी पी लें।

7. हल्दी (Turmeric)- हल्दी अपने आप में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक होती है। यह जख्म को भरने और सूजन को कम करने का काम करती है। इसमें मौजूद करक्यूमिन तत्व इसे एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक गुण प्रदान करते हैं। रात को सोने से पहले गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीएं। इससे फिशर के दरार और सूजन खत्म हो जाएंगे। 

8. दही (Curd)- दही प्रोबायोटिक का सबसे बेहतरीन स्रोत है। बिफीडोबैक्टीरियम और लैक्टोबैसिलस जैसे अच्छे बैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं जिससे कब्ज की समस्या खत्म होती है। रोजाना दही के सेवन से पाचन सही रहेगा और मल त्याग भी आसान रहेगा यह सूखेगा नहीं।  

ये भी पढ़ें- दही खाने के फायदे और नुकसान

9. सब्जियों का सूप (Vegetables Soup)- सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं। इनका सूप बनाकर पीना चाहिए। सूप पाचन के लिए बेहतरीन होता है। सूप पीने से भोजन जल्दी पचता है और सुबह प्राकृतिक रूप से मल त्याग भी आसानी से हो जाता है। नियमित रूप से सूप पीने से कब्ज और फिशर की समस्या भी खत्म हो जाती है।

10. अन्य उपाय (Other Solutions)- फिशर की समस्या से राहत पाने के लिए केला खाएं और ओट्स खाएं। इनमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। केला आंतों के लिए बेहतरीन है तो ओट्स मल को नरम बनाए रखने का काम करता है। इनके अतिरिक्त नींबू का भी सेवन किया जा सकता है। नींबू में मौजूद विटामिन-सी, एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करते हुए पाचन को नियंत्रित करता है जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती और फिशर की समस्या भी खत्म हो जाती है।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको फिशर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। फिशर क्या है?, फिशर के प्रकार, फिशर की जटिलताएं, फिशर के कारण, फिशर के जोखिम कारक, फिशर के लक्षण, फिशर का निदान, फिशर का इलाज और फिशर में क्या नहीं खाना चाहिए, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से फिशर के बहुत सारे घरेलू उपाय भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

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Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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