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हीमोफीलिया क्या है? – What is Hemophilia in Hindi

हीमोफीलिया क्या है?

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, हमारे देश भारत में ऐसे बहुत ही कम लोग हैं जिनको यदि चोट लग जाए या त्वचा कट-फट जाए तो रक्त बहना आसानी से बंद नहीं होता यहां तक कि उपचार के बाद भी बहुत देर तक रक्त बहता रहता है यह कोई मामूली बात नहीं है बल्कि यह बहुत बड़ी गंभीर समस्या है और इस समस्या को मेडिकल साइंस में इसेहीमोफीलियाकहा जाता है जिसमें रक्त के थक्के नहीं बन पाते। हीमोफीलिया एक सेक्स लिंक्ड डिसऑर्डर है जो पुरुष को अपनी माता से विरासत में मिलता है। आखिर यह हीमोफीलिया क्या है? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “हीमोफीलिया क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको हीमोफीलिया के बारे में विस्तार से जानकारी देगा यह भी बताएगा कि इसका इलाज क्या है? तो, सबसे पहले जानते हैं कि हीमोफीलिया क्या है और ब्लड क्लॉटिंग क्या है? फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

हीमोफीलिया क्या है? – What is Hemophilia?

दोस्तो, हीमोफीलिया (Hemophilia) एक आनुवांशिक विकार है (Disorder) जो कि सेक्स लिंक्ड डिसऑर्डर (Sex linked disorder) की श्रेणी में आता है। यह एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर पर कोई कट या चोट लग जाने पर या दुर्घटना में शरीर पर चोट, कट-फट जाने पर रक्त जमता नहीं और बहता रहता है। 

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दूसरे शब्दों में कहा जाये तो रक्त के थक्के (Blood clots) नहीं बनते। यदि रक्त बहना जल्दी बंद ना हो तो यह जानलेवा हो सकता है। हीमोफीलिया का कम या अधिक होना शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर्स (Clotting factors) के स्तर पर निर्भर करता है। इसका अर्थ यह है कि यदि क्लॉटिंग फैक्टर थोड़ा कम है तो सर्जरी या ट्रामा के बाद रक्तस्राव होगा और यदि क्लॉटिंग फैक्टर बहुत कम है तो बार-बार रक्त के बहने की संभावना रहेगी।  

हीमोफीलिया एक ऐसा आनुवांशिक रोग है पुरुष को महिला (उसकी माता) द्वारा मिलता है। यह रोग महिला द्वारा पुरुष में कैसे आता है इसका जिक्र हम आगे करेंगे। यह एक अच्छी बात है कि हमारे देश भारत में इस रोग से ग्रस्त मरीज बहुत ही कम हैं यानि 5,000 पुरुषों में से 1 पुरुष हीमोफीलिया से पीड़ित है।

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ब्लड क्लॉटिंग क्या है? – What is Blood Clotting?

ब्लड क्लॉटिंग रक्त की वह आवश्यक प्रक्रिया है जिसमें रक्त द्रव की अवस्था से अर्ध-ठोस अवस्था यानि जेल (Gel) में परिवर्तित हो जाता है और फिर यह थक्का बना लेता है। यही थक्का कटने-फटने या चोट लगने पर रक्तवाहिका से रक्त को बहने से रोक देता है और फिर प्राकृतिक रूप से वापिस रक्त में ही घुल जाता है। 

रक्तस्तम्भन (Hemostasis) के लिए यह प्रक्रिया बहुत ही लाभदायक, बहुत अच्छी और अत्यंत जरूरी है। परन्तु इस ब्लड क्लॉटिंग का दूसरा पहलू भी है जोकि बहुत ही बुरा और खतरनाक होता है। यदि रक्त का थक्का रक्तवाहिकाओं में हो जाये तो यह रक्त के प्रवाह को रोक देता है परिणाम स्वरूप दिल का दौरा पड़ सकता है या मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है या कोई अन्य विशेष अंग की कार्य प्रणाली रुक सकती है। यह जानलेवा भी हो सकता है। 

आमतौर पर ब्लड क्लॉटिंग पैर के निचले हिस्से में होती है। इसके अतिरिक्त यह हृदय धमनियों (Heart Arteries) में, छाती के किसी हिस्से में, पेट के अंदर आंत में, गर्दन की कैरोटिड आर्टिरीज में या मस्तिष्क में कहीं भी हो सकती है। आम भाषा में इसे खून का थक्का बनना कहते हैं। रक्त का थक्का बनाने में सोडियम आयन (Sodium ion) मददगार होता है क्यों कि सोडियम की ++ आयनिक क्षमता (ionic potential) अधिक होती है इस कारण यह ब्लड क्लॉटिंग में तथा निर्जलीकरण (Dehydration) में सहायक होता है।

रक्त बहना कैसे रुकता है? – How Does Bleeding Stop?

दोस्तो, ब्लड में तीन प्रकार के कण (कोशिकाएं Cells) होते हैं लाल रक्त कण (Red Blood Cells), श्वेत रक्त कण (White Blood Cells) तथा प्लेटलेट्स (Platelets)। प्लेटलेट्स कोशिकाएं नुकीली अंडाकार होती हैं तथा इनका आकार एक इंच का चार सौ हजारवां हिस्सा होता है। इनका निर्माण बोन मैरो (Bone Marrow) में मौजूद स्पंज जैसे ऊतक में होता है। प्लेटलेट्स ब्लड में मौजूद एलेमेंट्स पानी की तरह द्रव तथा कोशिकाओं से बने होते हैं। इनमें ऑक्सीजन को ले जाने वाले लाल रक्त कण (Red Blood Cells) भी होते हैं।

प्लेटलेट्स में मौजूद माइक्रो पार्टिकल्स को जांच के समय ही देखा जा सकता है। प्लेटलेट्स का मुख्य काम शरीर के खराब ऊतकों की मरम्मत करना है तथा चोट लगने पर चोट वाली जगह और रक्तस्राव वाले हिस्से पर पहुंचकर ब्लड क्लॉटिंग के माध्यम से रक्तस्राव को रोकना है। जब शरीर पर चोट लगती है तो प्लेटलेट्स को संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं जिससे वह चोट और रक्तस्राव वाले हिस्से में पहुंचकर ब्लड को रोकते हैं। रक्तस्राव रुक जाने के बाद यह ब्लड क्लॉटिंग पुनः प्राकृतिक रूप से वापिस रक्त में घुल जाती है। 

स्वस्थ व्यक्ति में प्लेटलेट काउंट 150,000 प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलीटर होना चाहिए। ये प्लेटलेट काउंट 150,000 से कम हो जाने को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia) कहा जाता है तथा 450,000 से अधिक होने की स्थिति को थ्रोम्बोसाइटोसिस (Thrombocytosis) कहा जाता है।

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हीमोफीलिया के प्रकार –  Types of Hemophilia

वैसे तो हीमोफीलिया के दो ही प्रकार होते हैं – हीमोफीलिया A और हीमोफीलिया B, परन्तु कुछ विशेषज्ञों ने इसे हल्का, मध्यम और गंभीर हीमोफीलिया की श्रेणी में बांटा हुआ है। सभी का विवरण निम्न प्रकार है –

1. हीमोफीलिया A (Hemophilia A)- यह क्लॉटिंग फैक्टर VIII आवश्यक रक्त-थक्का बनाने वाला प्रोटीन है। इसे एंटी-हेमोफिलिक कारक के रूप में जाना जाता है। मानव में, क्लॉटिंग फैक्टर VIII को F8 जीन द्वारा कूटबद्ध किया गया है। इस जीन में दोषों के फलस्वरूप हीमोफिलिया A होता है। 

फैक्टर VIII की उत्पत्ति, लीवर साइनसोइडल कोशिकाओं और लीवर के बाहर पूरे शरीर में एंडोथेलियल कोशिकाओं में होती है। क्लॉटिंग फैक्टर VIII की कमी लगभग 80 प्रतिशत हीमोफीलिया के मामलों में देखी गई है। 

2. हीमोफीलिया B (Hemophilia B)- यह  क्लॉटिंग फैक्टर IX की कमी के कारण होता है। इसे “क्रिसमस रोग” (Christmas disease) या क्रिसमस फैक्टर भी कहा जाता है। क्लॉटिंग फैक्टर IX भी शरीर अपने आप पैदा होने वाला एक प्रोटीन है। यह रक्त के थक्के बनाने में मदद करता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में फैक्टर IX के उत्पादन ना होने के कारण हीमोफीलिया B होता है। 

3. वंशानुगत कारक XI (FXI) की कमी को हीमोफिलिया सी या रोसेन्थल सिंड्रोम कहा जाता है।

4. हल्का हीमोफीलिया (Mild hemophilia) – शरीर जब 6 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक ब्लड क्लोटिंग प्रोटीन बनाता है तब हल्के हीमोफीलिया की स्थिति पैदा होती है।

5. मध्यम हीमोफीलिया (Moderate Hemophilia) – इसमें शरीर 2 से 5 प्रतिशत तक ब्लड क्लोटिंग प्रोटीन बना पाता है।

6. गंभीर हीमोफीलिया (Severe Hemophilia) – इस शरीर केवल 1 प्रतिशत या इससे भी कम ब्लड क्लोटिंग प्रोटीन का निर्माण कर पाता है। इस गंभीर हीमोफीलिया में व्यक्ति में बार-बार अत्यधिक रक्त बहने का जोखिम रहता है।

हीमोफीलिया के कारण – Cause of Hemophilia

हीमोफीलिया होने के कारण निम्नलिखित हैं –

1. हीमोफीलिया होने का कारण मुख्य कारण रक्त में विशेष प्रोटीन की कमी है जिसे “क्लॉटिंग फैक्टर” कहा जाता है। इसमें क्लॉटिंग फैक्टर VIII और IX शामिल होते हैं। इनके बारे में हम ऊपर बता चुके हैं।

2. कुछ निम्नलिखित कारक भी हीमोफीलिया को ट्रिगर कर सकते हैं –

  • ऑटो इम्युनिटी
  • गर्भावस्था
  • कैंसर
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस
  • दवाओं का रिएक्शन

हीमोफीलिया पुरुषों में क्यों होता है? – Why Does Hemophilia Occur in Males?

प्रत्येक पुरुष और महिला में X गुणसूत्र, एक सेक्स क्रोमोसोम (Chromosome), होता है। पुरुषों में X की केवल एक प्रति (copy) होती है। परन्तु महिलाओं में X की दो प्रतियां होती हैं यानि XX। जब पुरुष में X प्रभावित (affected) होता है तो उसके पास कोई और X नहीं बचता। अतः हीमोफीलिया मां में एक जीन के माध्यम से बच्चे (पुरुष) को विरासत में मिलता है। इसीलिये यह रोग सेक्स लिंक्ड डिसऑर्डर की श्रेणी में आता है। 

हीमोफीलिया की जटिलताएं –  Complications of Hemophilia

हीमोफीलिया की निम्नलिखित जटिलताएं देखी जा सकती हैं- 

1. सूजन या सुन्नत (Swelling or Numbness)- मांसपेशियों की गहराई में होने वाले गंभीर रक्तस्राव से हाथ-पैरों में सूजन आ सकती है। इस सूजन की वजह से उस हिस्से में दर्द रह सकता है या वह हिस्सा सुन्न भी हो सकता है।

2. जोड़ों पर प्रभाव (Effects on Joints)- आंतरिक रक्तस्राव से जोड़ प्रभावित हो सकते हैं। तेज दर्द होने की स्थिति में आर्थराइटिस हो सकता है या जोड़ों हानि होने की संभावना बन सकती है।

3. क्लॉटिंग फैक्टर्स का निष्क्रिय हो जाना (Inactivation of Clotting Factors)- कुछ मामलों में हीमोफीलिया के इलाज के समय प्रतिरक्षा प्रणाली का क्लॉटिंग फैक्टर्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ प्रोटीन बनाती है जिनको अवरोधक (inhibitors) कहा जाता है। इस वजह से क्लॉटिंग फैक्टर्स निष्क्रिय हो जाते हैं जिससे इलाज का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। 

4. संक्रमण (Infection)- हीमोफीलिया के उपचार में रक्ताधान (Blood Transfusion) की अधिक आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में संक्रमण होने की संभावना रहती है। यद्यपि इसके लिए पूरी सावधानी बरती जाती है फिर भी संक्रमण होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

हीमोफीलिया के लक्षण – Symptoms of Hemophilia

हीमोफीलिया के निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते   हैं –

1. त्वचा के कटने-फटने, चोट लगने पर, उपचार के बाद भी रक्त का बंद ना होना या बहुत देर से बंद होना, यह प्रमुख लक्षण है।

2. नाक से रक्त का बहना।

3. आंख से भी रक्त निकलना।

4. मसूड़ों से रक्त का बहना।

5. मल-मूत्र में रक्त आना।

6. रक्तस्राव कोहनी और घुटनों के अंदर भी हो सकता है।

7. मस्तिष्क के अंदर भी रक्तस्राव होने की संभावना रहती है।

8. शरीर पर नीले निशान पड़ जाना।

9. जोड़ों में सूजन और दर्द।

10. बच्चों में चिड़चिड़ापन।

हीमोफीलिया का परीक्षण – Hemophilia Test 

मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जानने और लक्षणों का आकलन करने के बाद निम्नलिखित ब्लड टेस्ट किए जा सकते हैं –

1. कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट- रक्त में प्लेटलेट्स स्तर जानने के लिये यह टेस्ट जरूरी है। प्लेटलेट्स का कम स्तर थक्का जमने से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है।

2. प्रोथ्रॉम्बिन टाइम – रक्त का थक्का जमने के समय का निर्धारण इस टेस्ट के जरिए किया जाता है।

3. एक्टिवेटेड पार्शियल थ्रॉम्बोप्लास्टिन टाइम – इस टेस्ट के जरिए रक्त का थक्का जमने के समय की पहचान करने में मदद मिलती है।

कुछ निम्नलिखित दूसरे टेस्ट भी किए जा सकते हैं –

  • फैक्टर 8 लेवल टेस्ट
  • फैक्टर 9 लेवल टेस्ट 
  • एंटी-थ्रॉम्बिन ऐक्टिविटी 
  • प्रोटीन सी एक्टिविटी
  • प्रोटीन एस ऐक्टिविटी

हीमोफीलिया का इलाज – Treatment of Hemophilia

हीमोफीलिया के इलाज के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती हैं –

1. ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (Blood Transfusion)- गंभीर हीमोफीलिया के मरीज को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूज़न देते रहना होता है क्यों कि इसका प्रभाव कुछ दिनों के लिए नहीं बल्कि कुछ घंटों के लिए ही रहता है। अत्याधिक रक्तस्राव की स्थिति में 100 घन सेंटीमीटर का ब्लड प्रति 8 घंटे के अंतर पर देना पड़ता है। 

ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की जरूरत ना होने पर भी 100 से 180 घन सेंटीमीटर नया प्लाज्मा अथवा बर्फ़ के समान ठंडा प्लाज्मा देना पड़ता है, क्योंकि इसमें अनुवांशिक रक्तस्राव के सभी विपरीत गुणों की मौजूदगी होती है। 

2. रिप्लेसमेंट थेरेपी (Replacement Therapy)- क्लॉटिंग फैक्टर को बदलना, गंभीर हीमोफीलिया का मुख्य उपचार होता है। इसके लिए एक नली को नसों में डाली जाती है। रक्तस्राव को रोकने के लिए इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है, यह घर पर भी दी जा सकती है। नया क्लॉटिंग फैक्टर रक्तदान किये गए रक्त से प्राप्त होता है।

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3. रिकम्बीनैंट क्लॉटिंग फैक्टर्स (Recombinant Clotting Factors)- कई बार “रिकम्बीनैंट क्लॉटिंग फैक्टर्स” का उपयोग किया जाता है जो मानव या प्राणी के रक्त से नहीं बनता। इसे डीएनए से निकाला जाता है। इससे किसी संक्रमण की संभावना भी नहीं रहती। रिकॉम्बिनेंट क्लॉटिंग फैक्टर रक्त में उपस्थित प्राकृतिक क्लॉटिंग फैक्टर्स के समान ही काम करते हैं। 

4. फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)- अंदरूनी रक्तस्राव से जोड़ों को हानि होने के मामलों में इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है। जोड़ों के गंभीर रूप से हुई हानि के मामले में सर्जरी की आवश्यकता होती है।

5. डेस्मोप्रेसिन या डीडीएवीपी (Desmopressin or DDAVP)- इसका टीका नसों में लगाया जाता है अथवा नाक में स्प्रे किया जाता है। हल्के हीमोफीलिया के मामले में, ये हॉर्मोन आपके शरीर को अधिक क्लॉटिंग फैक्टर बनाने के लिए ट्रिगर करता है।

6. दवाएं (Medicines)- दवाओं में एंटीफिब्रिनोलिटिक्स दवाओं का उपयोग किया जाता है जो  ब्लड क्लॉट्स को टूटने नहीं देती तथा फाइब्रिन सीलेंट दवाएं जो सीधा चोट पर लगायी जाती हैं ताकि वहजल्दी ठीक हो सके और ब्लड क्लॉट बन सके। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको हीमोफीलिया रोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हीमोफीलिया क्या है, ब्लड क्लॉटिंग क्या है, रक्त बहना कैसे रुकता है, हीमोफीलिया के प्रकार, हीमोफीलिया के कारण, हीमोफीलिया पुरुषों में क्यों होता है, हीमोफीलिया की जटिलताएं, हीमोफीलिया के लक्षण और हीमोफीलिया का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से हीमोफीलिया के इलाज के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको हीमोफीलिया रोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हीमोफीलिया क्या है, ब्लड क्लॉटिंग क्या है, रक्त बहना कैसे रुकता है, हीमोफीलिया के प्रकार, हीमोफीलिया के कारण, हीमोफीलिया पुरुषों में क्यों होता है, हीमोफीलिया की जटिलताएं, हीमोफीलिया के लक्षण और हीमोफीलिया का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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