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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, जब मनुष्य बीमार पड़ता है तो उसका उपचार भी किया जाता है। उपचार पद्धति चाहे जो भी हो यानी आयुर्वैदिक, होम्योपैथी, यूनानी या एलोपैथी सबका उद्देश्य एक होता है, मनुष्य को रोगमुक्त करना। कुछ रोग ऐसे होते हैं जिनका उपचार केवल शल्य चिकित्या (Surgery) द्वारा ही संभव हो पाता है। शल्य चिकित्या का श्रेय भारत के महान चिकित्साशास्त्री सुश्रुत को जाता है। इनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है। दोस्तो, अक्सर आंख से संबंधित रोगों का इलाज आई ड्रॉप के माध्यम से हो जाता है परन्तु मोतियाबिंद और ग्लूकोमा ऐसे रोग हैं जिनका उपचार केवल सर्जरी से ही किया जाता है। ग्लूकोमा के उपचार के लिये ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी की जाती है। विस्तार से जानकारी के लिये हमारे पिछले आर्टिकल “Glaucoma क्या होता है?औरट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है पढ़ें। आंखों के एक रोग एस्टिग्मैटिज़्म पर विस्तार जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “एस्टिग्मैटिज़्म से बचाव के उपाय भी पढ़ें।  जहां तक मोतियाबिंद की बात है, इसका उपचार भी सर्जरी ही है क्योंकि इस रोग में आंख का प्राकृतिक लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है जिसे सुधारा नहीं जा सकता। सर्जरी के द्वारा इस लेंस को निकालकर कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है। आखिर मोतियाबिंद से बचाव क्या है ताकि इसको बढ़ने से रोका जा सके। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “मोतियाबिंद के घरेलू उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको मोतियाबिंद के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इससे बचाव के क्या उपाय हैं।  तो, सबसे पहले जानते हैं कि मोतियाबिंद क्या है और इसके कितने प्रकार होते हैं। इसके बाद फिर बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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मोतियाबिंद के घरेलू उपाय
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मोतियाबिंद क्या है? – What is Cataract?

दोस्तो, मोतियाबिंद आंखों में होने वाला सामान्य रोग है जोकि 50 वर्ष की आयु वाले लोगों में पाया जाता है और 60 वर्ष की आयु के बाद तो यह पूरी तरह विकसित हो चुका होता है। वैसे युवा वर्ग भी इस रोग से अछूता नहीं है। युवा वर्ग के बहुत से लोगों में यह रोग देखा देखा गया है। मोतियाबिंद को सामान्य भाषा में सफेद मोती भी कहा जाता है। इस रोग में आंखों में प्रोटीन के गुच्छे जमा हो जाने से आंख का लेंस रेटिना को स्पष्ट चित्र नहीं भेज पाता। लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है, यह अपारदर्शी हो जाता है जिसके कारण आंखों की रोशनी में धुंधलापन आ जाता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को दूर और नजदीक की वस्तुऐं अस्पष्ट और धुंधली दिखाई देती हैं। निष्कर्षतः आंखों के लेंस का अपारदर्शी हो जाना ही मोतियाबिंद कहलाता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 74 प्रतिशत व्यक्तियों को मोतियाबिंद की समस्या है या उनकी सर्जरी हो चुकी है जिनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इस रोग का एकमात्र इलाज सर्जरी ही है क्योंकि ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो लेंस की पारदर्शिता को वापिस लौटा सके। इस मामले में चश्मे भी मदद नहीं कर सकते पाते क्‍योंकि प्रकाश किरणें आंखों से पास नहीं हो पाती हैं। केवल सर्जरी के माध्यम से ही आंखों के प्राकृतिक लेंस को हटा कर कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है, जिसे इंट्राऑक्युलर लेंस IOL कहते हैं।

मोतियाबिंद के प्रकार – Types of Cataracts

मोतियाबिंद मुख्यतःतीन प्रकार होता है परन्तु कुछ विशेषज्ञ कुछ कारणों को ही मोतियाबिंद की श्रेणी में रखकर मोतियाबिंद के प्रकार का रूप दे देते हैं। इसलिये हम हम सभी प्रकार के मोतियाबिंद का विवरण दे रहे हैं जो निम्न प्रकार हैं –

1. न्यूक्लियर स्क्लेरोटिक (Nuclear Sclerotic)- यह सबसे सामान्य प्रकार का  मोतियाबिंद है जो आंख के लेंस के केंद्र में बनता है और लेंस के सख्त और पीले होने की वजह से होता है। यह धीरे-धीरे कई वर्षों तक विकसित होता रहता है और दृष्टि को प्रभावित कर बिगाड़ता रहता है।

2. कॉर्टिकल मोतियाबिंद (Cortical Cataract)- यह मोतियाबिंद, लेंस के बाहरी भाग में सफ़ेद सा दिखने वाला एक थक्का हो जाता है। यह लेंस के पीछे की तरफ या पीछे की सतह पर धुंधले हिस्से के रूप में शुरू होकर धीरे-धीरे केंद्र की तरफ आ जाता है। इस मोतियाबिंद के कारण रोशनी की चकाचौंध बहुत ज्यादा महसूस होती है इसीलिये रात को ड्राइव करने में दिक्कत होती है।

3. सबकैप्सूलर (Subcapsular)- अन्य मोतियाबिंद की तुलना में यह बहुत तेजी से विकसित होता है। लेंस के पीछे की केंद्रीय सतह पर विकसित पर होता है। यह मोतियाबिंद प्रकाश के चारों ओर “प्रभामंडल” प्रभाव छोड़ता है और तेज चमक पैदा कर देता है जिससे पढ़ने में दिक्कत होती है। डायबिटीज़  निकट दृष्टि दोष, रेटिनिटिस पिगमेंटोसा से पीड़ित व्यक्तिओं और स्टेरॉयड का सेवन करने वालों में इसके होने की संभावना अधिक होती है।

4. ट्रॉमेटिक (Traumatic)- आंख में चोट के कारण, चोट लगने के कई वर्ष बाद भी यह मोतियाबिंद हो सकता है। इस प्रकार का मोतियाबिंद लेंस पर कहीं हो सकता है और यह अक्सर फूल की पंखुड़ी या “रोज़ेट” के आकार में विकसित होता है।

5. रेडिएशन मोतियाबिंद (Radiation Cataract)- रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाला रेडिएशन मोतियाबिंद कहलाता है।

6. कन्जेनिटल (Congenital)- यह जन्मजात या बचपन में होने वाला मोतियाबिंद कहलाता है। जन्म से शिशु में मोतियाबिंद का होना या जन्म के कुछ समय बाद उत्पन्न होना बहुत ही कम होता है। वैसे गर्भावस्था के समय यदि मां संक्रमण (जैसे रूबेला) से पीड़ित है तो शिशु में होने की संभावना बन सकती है। यह मोतियाबिंद बहुत छोटा होता है और दृष्टि को बहुत कम प्रभावित करता है परन्तु आयु बढ़ने के साथ-साथ यह अधिक गंभीर हो सकता है।

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7. सेकेंडरी मोतियाबिंद (Secondary Cataract)- ग्लूकोमा के लिए हुई सर्जरी के पश्चात यदि मोतियाबिंद होता है तो इसे सेकेंडरी मोतियाबिंद कहा जाता है।

ये पढ़े – ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है?

मोतियाबिंद होने के कारण – Cause of Cataract

दोस्तो, मोतियाबिंद होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –

1. बढ़ती हुई उम्र सबसे बड़ा और सर्वाधिक सामान्य कारण है।

2. डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को मोतियाबिंद की समस्या होना आम बात है।

3. अधिक समय तक सूरज की रोशनी आंखों पड़ना।

4. अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के संपर्क में आने से भी या रेडिएशन थेरेपी से भी मोतियाबिंद की संभावना बन जाती है।

5. आंख में चोट लगना या सूजन होना।

6. अधिक धूम्रपान करना। धूम्रपान और आंखों के लेंस के धुंधलेपन के बीच भी सम्बन्ध स्थापित होता है। धूम्रपान करने से आंखों में धूंआ लगता रहता है।

7. अधिक शराब का सेवन करने से भी मोतियाबिंद की संभावना होती है। एक रिसर्च के अनुसार शराब का सेवन करने वालों को मोतियाबिंद की समस्याऐं अधिक होती हैं।

8. कुछ दवाऐं जैसे कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स, क्लोरप्रोमाज़ीन और अन्य फेनोथीआज़ाइन संबंधित दवाएं या स्टेरॉयड का सेवन मोतियाबिंद की संभावना को बढ़ा देते हैं।

9. भोजन में पोषक तत्वों की कमी से भी मोतियाबिंद को बढ़ावा मिल सकता है जैसे विटामिन-ए, सी, ई, खनिज और फोलिक एसिड की कमी।

10. कुछ बच्चों में जन्मजात या जन्म के कुछ समय बाद भी मोतियाबिंद हो सकता है। यद्यपि इसकी संभावना बहुत कम होती है। गर्भावस्था में माता में संक्रमण (जैसे रूबेला) के कारण यह संभावना बन सकती है।

11. ग्लूकोमा की सर्जरी के बाद भी मोतियाबिंद होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

मोतियाबिंद के लक्षण – Symptoms of Cataract

1. अस्पष्टता और धुंधलापन – मोतियाबिंद का यह सबसे बड़ा और प्रमुख लक्षण है। ज्यादा ज्यादा नंबर वाला चश्मा लगाने के बावजूद भी दूर या नजदीक की वस्तु का स्पष्ट दिखाई ना देना और धुंधला दिखाई देना। इसी वजह से रात को दुर्घटनाऐं भी अधिक होती हैं।

2. नंबर का जल्दी-जल्दी बदलना – चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस के नंबर में जल्दी-जल्दी बदलाव होना का अर्थ है  मोतियाबिंद का विकसित हो जाना।

3. प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता – किसी भी प्रकार की रोशनी से परेशानी महसूस करना यानी रोशनी की चमक जब आंखों में चुभने लगे तो समझ जाना चाहिये कि यह मोतियाबिंद की समस्या है। यह रोशनी सूरज की भी हो सकती है या घर की लाइट्स, स्ट्रीट लाइट्स और वाहनों की हेडलाइट्स।

4. रंगों की सही पहचान ना हो पाना – मोतियाबिंद होने पर रंगों की सही पहचान नहीं हो पाती, एक भ्रम की स्थिति बनी रहती है। विशेषकर काले, नीले और बैंगनी रंगों में सही पहचान कर पाना मुश्किल होता है। दृष्टि धीरे-धीरे भूरी या पीली पड़ने लगती है और कुछ रंग फीके दिखाई देने लगते हैं।

5. दोहरी दृष्टि – अस्पष्टता और धुंधलापन के अतिरिक्त डबल विज़न हो जाना यानी किसी वस्तु का दोहरा दिखाई देना मोतियाबिंद का लक्षण है, इसे डिप्लोपिया भी कहते हैं।

मोतियाबिंद का परीक्षण – Cataract Test

1. टोनोमेट्री परीक्षण (Tonometry Test)- यह परीक्षण कॉर्निया को फ़ैलाने और आंखों के दबाव का परीक्षण किया जाता है। जिसे इंट्राऑक्यूलर दबाव (Intraocular Pressure – IOP) कहा जाता है।  इस परीक्षण में एक मशीन के द्वारा आंखों का दबाव मापने के लिये हवा की तेज फूंक मारी जाती है जो दर्द रहित होती है।

2. रेटिना का परीक्षण (Retinal Test)- रेटिना के परीक्षण के लिये डॉक्टर सबसे पहले, आंखों में आई-ड्रॉप की एक-एक बूंद डालते हैं ताकि आंखों की पुतली बड़ी हो जाये। इससे डॉक्टर को आंख के अंदर बेहतर तरीके से देखने में आसानी है जाती है और फिर आंख के पीछे रेटिना और ऑप्टिक नर्व की अच्छी तरह जांच करते हैं। इस परीक्षण के द्वारा ऑप्टिक नर्व और रेटिना के नुकसान का आकलन किया जाता है।

3. स्लिट लैंप जांच (Slit Lamp Probe)- एक माइक्रोस्कोप के जरिये डॉक्टर को आंख सामने की संरचनाओं को बड़ा कर-कर के देखने में मदद मिलती है। इसे स्लिट लैंप कहा जाता है। यह आईरिस और कॉर्निया के बीच की जगह, कॉर्निया, आईरिस और लेंस तक एक पतली रोशनी की लाइन से प्रकाश पहुंचाने का काम करता है जिससे छोटे वर्गों में आंख की इन संरचनाओं को देखने में आसानी हो जाती है और किसी भी प्रकार की छोटी से छोटी असामानता का पता चल जाता है।

4. अन्य परीक्षण (Other Tests)- डॉक्टर कुछ अन्य परीक्षण जैसे प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, रंगों की पहचान आदि  भी कर सकते हैं।

ये पढ़े – एस्टिग्मेटिज्म से बचाव के उपाय

मोतियाबिंद का उपचार – Cataract of Treatment

दोस्तो, मोतियाबिंद का एकमात्र उपाय सर्जरी है, इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं। जब चश्मे का नंबर भी बढ़ता जाये और दैनिक कार्यों को करने में भी दिक्कत आने लगे तो समझिये कि अब सर्जरी की जरूरत है। सर्जरी में आंखों के प्राकृतिक लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है।  सर्जरी की प्रक्रिया की जानकारी हम आगे देंगे। इससे पहले जानते हैं सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट।

मोतियाबिंद सर्जरी से पहले की तैयारी और टेस्ट – Preparations and Tests Before Cataract Surgery

दोस्तो, मोतियाबिंद की सर्जरी के लिये उचित तैयारी करनी पड़ती है। इसके लिये डॉक्टर मरीज से कुछ जानकारी लेते हैं, सलाह देते हैं और कुछ टैस्ट कराने को कहते हैं जो निम्न प्रकार हैं  –

1. आंख के जो भी टैस्ट होते हैं वे पहले ही करा लिये जाते हैं। आंख में पहले से मौजूद किसी भी स्थिति पर विचार किया जाता है जिनके कारण सर्जरी के समय या सर्जरी के बाद में कोई जटिलता ना हो।

2. डॉक्टर मरीज के स्वस्थ के बारे में विस्तृत जानकारी लेते हैं जैसे कि एलर्जी, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अस्थमा या अन्य कोई बीमारी के बारे में पूछा जाता है।

3. यदि मरीज कोई दवा ले रहा है तो डॉक्टर इसकी जानकारी लेते हैं और कुछ दवाओं को कुछ समय के लिये ना लेने को कहा जा सकता है जैसे रक्त पतला करने वाली दवाऐं।

4. कुछ दवाओं में बदलाव भी किये जा सकते हैं जैसे कि डायबिटीज और उच्च रक्तचाप वाली दवाऐं।

5. सर्जरी से 2 घंटे पहले कुछ हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है।

6. यदि मरीज को किसी से एलर्जी है तो इस बारे में भी मरीज से जानकारी ली जाती है।

7. सर्जरी वाले दिन मरीज को अपने परिवार से किसी सदस्य को या मित्र को साथ लाने को कहा जाता है ताकि सर्जरी वाले दिन की जो भी औपचारिकताऐं हैं उनको पूरा किया जा सके और मरीज को सर्जरी के बाद ठीक से घर ले जाया जा सके।

8. सभी आभूषणों को घर पर ही छोड़ने को कहा जाता है। सर्जरी के समय कोई धातु की वस्तु या आभूषण शरीर पर नहीं होना चाहिये।

9. महिलाओं को मेकअप ना करने की सलाह दी जाती है और नेल पॉलिश ना लगायें।

10. सर्जरी वाले दिन से पहले तीन दिन तक मरीज को एक आई ड्रॉप आंख में डालने को कहा जाता है।

11. मरीज से निम्नलिखित टैस्ट कराने को कहा जाता है –

(i)  रेंडम ब्लड शुगर टैस्ट

(ii) यूरीन रुटीन और माइक्रोस्कोपिक टैस्ट

(iii) इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम स्कैन

सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया – Procedure on the Day of Surgery

दोस्तो, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया निम्न प्रकार रहती है –

1. मरीज को, सर्जरी के समय से लगभग दो घंटे पहले बुलाया जाता है ताकि कुछ औपचारिकताऐं पूरी की जा सकें और कुछ टैस्ट भी किये जा सकें।

2. एक फार्म जिसे सहमति पत्र कहते हैं, को भरकर, हस्ताक्षर करके दिया जाता है। मरीज इस सहमति पत्र के माध्यम से सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति देता है। इसे पढ़कर और समझकर हस्ताक्षर करें।

3. सर्जरी के खर्च का बिल भी जमा कराना होता है।

4. मरीज की जिस आंख की सर्जरी होनी है उसमें लगभग 15-20 मिनट के अन्तराल पर तीन या चार बार दवा डाली जाती है।

5. इसके बाद मरीज का ब्लड प्रैशर और दिल कि धड़कन को नापा जाता है। यदि यह सामान्य है तभी सर्जरी की जाती है।

6. फिर मरीज को सर्जरी कास्ट्यूम पहने को कहा जाता है।

7. इसके बाद एनेस्थीसिया चैक करके, मरीज को एनेस्थीसिया दे दिया जाता है।

8. इसके बाद सर्जरी प्रक्रिया शुरु की जाती है।

मोतियाबिंद की सर्जरी – Cataract Surgery

दोस्तो, हम ऊपर बता चुके हैं कि मोतियाबिंद का एकमात्र उपाय सर्जरी है। सर्जरी में, मूलतः आंखों के प्राकृतिक लेंस जो अपनी पारदर्शिता खो चुका होता है, को निकालकर कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है जिसे इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) कहा जाता है। इस सर्जरी के लिये मरीज को भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, सर्जरी से केवल दो घंटे पहले मरीज को जाना पड़ता है ताकि अन्य औपचारिकताऐं पूरी की जा सकें। सर्जरी में तो केवल 15-20 मिनट लगते हैं। दोस्तो, अब वो समय नहीं रहा जब मोतियाबिंद सर्जरी के लिये 8।0 से 10।0 मिमी की लंबाई का कट लगाया जाता था, बदलती आधुनिक तकनीक में अब बहुत ही छोटा कट आता है और सर्जरी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। हम ऐसी ही कुछ सर्जरी प्रक्रिया का विवरण दे रहे हैं जो निम्नलिखित हैं –

1. फेको सर्जरी (Phaco Surgery) – इसे फेको या फेको-पायसीकरण सर्जरी कहा जाता है। इसमें केवल 2।5 से 2।8 मिमी तक का कट लगाया जाता है। एक फेको सुई को उद्घाटन के माध्यम से अंदर भेज दिया जाता है। सुई अल्ट्रासाउंड तरंगों का उत्सर्जन कर लेंस को नरम कर छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है और सुई द्वारा ही चूषण कर बाहर निकाल दिया जाता है। उद्घाटन के माध्यम से ही एक कृत्रिम लेंस आंख के प्राकृतिक लेंस के स्थान पर लगा दिया जाता है। उद्घाटन चीरा बहुत छोटा  बनाया जाता है इसलिए घाव को बंद करने के लिये स्वयं-सील करता है। इसमें किसी टांके की जरूरत नहीं होती। इसीलिये इसे “स्टिचलेस” मोतियाबिंद सर्जरी कहा जाता है।

2. माइक्रोइंसिजन मोतियाबिंद सर्जरी (MICS) – सर्जरी की इस प्रक्रिया में सिर्फ़ 1।8 मिमी का कट आता है। इस सर्जरी में एक उपकरण अल्ट्रासाउंड तरंगों का उत्सर्जन करता है जिससे लेंस डाल दिया जाता है। 

3. फेम्टोसेकन्ड लेज़र असिस्टिड कैटरेक्ट सर्जरी (Femtosecond Laser Assisted Cataract Surgery – (FLACS) सर्जरी की इस प्रक्रिया में कोई हाथ से चीरा नहीं लगाया जाता और ना ही किसी सुई का प्रयोग किया जाता है। सर्जरी का प्रत्येक काम कंप्यूटर द्वारा किया और जांचा जाता है। इसमें पहला काम लेज़र द्वारा मोतियाबिंद के चारों ओर लेंस कैप्सूल में छिद्र  करना होता है। ये छिद्र हाथ से बनाये गये में छिद्र की बनावट व आकार की तुलना में पांच गुणा सटीक होता है। और फिर लेंस को लेजर से ही नरम और द्रवित कर छोटे-छोटे कणों में तोड़ कर निकाल दिया जाता है। फिर कृत्रिम लेंस को इम्प्लांट कर दिया जाता है। सर्जरी की इस प्रक्रिया में लेज़र को केवल 30-40 से सेकंड लगते हैं और यह एकदम सुरक्षित और सटीक मानी जाती है।

सर्जरी के बाद की कुछ हिदायतें/सावधानियां – Some Post-Surgery Instructions/Precautions

1. सर्जरी के बाद, मरीज के साथ आये व्यक्ति को दवाओं और आई ड्रॉप्स के बारे में बताया जाता है।

2. आंख की पट्टी हटने के बाद मरीज को कुछ दिनों के लिये काला चश्मा लगाने को कहा जाता है।

3. आंख को पानी से बचाकर रखने को कहा जाता है क्योंकि आंख में पानी जाने से इंफेक्शन होने की संभावना रहती है। मरीज को गर्दन से नीचे ही नहाने की सलाह दी जाती है।

4. भाप से भी बचने को कहा जाता है।

5. झुकने को मना किया जाता है।

6. वजन उठाने की मनाही होती है।

7. दो हफ्ते तक मॉर्निंग वाक के लिये बाहर जाने, व्यायाम करने, खेलने कूदने आदि के लिये मना किया जाता है।

8. लंबी यात्रा पर जाने और ड्राईव करने की मनाही होती है।

9. मोबाइल फोन का बहुत ही कम इस्तेमाल करने को कहा जाता है। थोड़ी देर के लिये टीवी देख सकते हैं वह भी दूर से।

10. कुछ दिन तक पढ़ने की कोशिश ना करें।  इससे सर्जरी वाली आंख पर जोर पड़ता है।

11. आंख में दवाई डालने से पहले हाथ साबुन से अच्छी तरह हाथ धोयें या सेनिटाइज करें।

12. आंख में दवा डालने के बाद, एकदम साफ़ कपड़े से आंख बहुत हल्के हाथ से साफ़ करें, रगड़ें नहीं। आंख साफ़ करने के लिये वाइप्स (Wipes) का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा।

13. डॉक्टर के निर्देशानुसार नियमित रूप से दवा लेते रहें और समय-समय पर डॉक्टर के पास जाकर जांच कराते रहें। 

मोतियाबिंद के घरेलू उपाय – Home Remedies For Cataract

दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करता है कि मोतियाबिंद को रोकने का कोई उपाय नहीं है परन्तु इसके विकास को रोका जा सकता है यदि हम आंखों के प्रति सचेत रहें और अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव करें। हम बता रहे हैं कुछ निम्नलिखित ऐसे उपाय जिनको यदि अपनाया जाये हो सकता है कि मोतियाबिंद कभी बने ही नहीं। और यदि है भी तो उसका विकास रुक जायेगा –

1. पोषक तत्व युक्त भोजन (Nutrient Rich Food)- अपने भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को सम्मलित करें जो खनिज, विटामिन और फोलिक एसिड से भरपूर हों। अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन-ए, सी और विटामिन-ई से भरपूर खाद्य/पेय पदार्थ और फलों को सम्मलित करें। यदि बच्चों को शुरू से ही ऐसा भोजन करने की आदत डालेंगे तो निश्चित रूप से मोतियाबिंद होने की संभावना नहीं रहेगी। डायबिटीज के मरीजों को तो विशेष तौर पर अपने भोजन का ध्यान रखना चाहिये क्योंकि उनको ब्लड शुगर का स्तर सामान्य बनाये रखना होता है।

2. नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं (Get Regular Eye Exams)- आंखों का मामला बहुत ही संवेदनशील होता है इसलिये इनके प्रति सचेत रहना चाहिये। चाहे आंखों में कोई तकलीफ़ है या नहीं, आंखों की नियमित रूप से जांच कराते रहना चाहिये। साल में एक बार अवश्य जांच करानी चाहिये। फिर भी आंखों में हल्की सी भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये।

3. चश्मे की स्थिति में जांच (Check the Condition of the Glasses)- यदि चश्मा लगा हुआ है तो यह बहुत जरूरी हो जाता है कि हर छः महीने बाद आंखों की जांच करायें, इससे यह पता चलता रहता है कि चश्मे का नंबर बढ़ रहा है या नहीं। बढ़ते नंबर की स्थिति में डॉक्टर आंखों की अच्छी तरह जांच करेंगे कि कहीं मोतियाबिंद तो नहीं पनप रहा।

4. सूरज की रोशनी से बचें (Avoid Sunlight)- यह बहुत जरूरी है की आंखों को सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाया जाये क्योंकि इससे भी मोतियाबिंद होने की संभावना रहती है। अक्सर गर्मियों में सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रकोप अधिक होता है इसलिये धूप में निकलने के लिये धूप वाला चश्मा अवश्य पहनें। यदि नजदीक और दूर का एक ही चश्मा बना हुआ है तो चश्मे के ग्लास फोटोक्रोमिक होने चाहियें। चश्मे के फोटोक्रोमिक लेंस आंखों को कवच की तरह 100 प्रतिशत सूरज की हानिकारक यूवीए और यूवीबी किरणों से बचाव करते हैं। यदि चश्मे के ग्लास फोटोक्रोमिक नहीं भी हैं तो अलग से काले शीशों का कवर आता है जो चश्मे पर फिट हो जाता है इससे भी सूरज की हानिकारक किरणों से बचाव होता है।

ये पढ़ें – एक्जिमा के घरेलू उपाय

5. धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें (Do not Smoke and Drink Alcohol)- एक शोध के अनुसार धूम्रपान और शराब का सेवन करने से मोतियाबिंद होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसलिये इनसे बचना चाहिये। धूम्रपान तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिये, शराब एक लिमिट में और कभी-कभी पीने से नुकसान की संभावना बहुत कम हो जाती है।

6। रोगों का उपचार – यदि कोई स्थाई रोग है जैसे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर तो इनका उपचार नियमित रूप से करायें जिससे कि इनका कुप्रभाव आंखों पर ना पड़े।

Conclusion –

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको मोतियाबिंद के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मोतियाबिंद क्या है, मोतियाबिंद के प्रकार, मोतियाबिंद होने के कारण होने के कारण, मोतियाबिंद के लक्षण, मोतियाबिंद का परीक्षण, मोतियाबिंद का उपचार, मोतियाबिंद सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया, मोतियाबिंद की सर्जरी और सर्जरी के बाद की कुछ हिदायतें/सावधानियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से मोतियाबिंद से बचाव के उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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मोतियाबिंद के घरेलू उपाय
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मोतियाबिंद के घरेलू उपाय
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको मोतियाबिंद के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मोतियाबिंद क्या है, मोतियाबिंद के प्रकार, मोतियाबिंद होने के कारण होने के कारण, मोतियाबिंद के लक्षण, मोतियाबिंद का परीक्षण, मोतियाबिंद का उपचार, मोतियाबिंद सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया, मोतियाबिंद की सर्जरी और सर्जरी के बाद की कुछ हिदायतें/सावधानियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · November 28, 2021 at 2:44 am

Good information.

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