Advertisements

दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, हमारे शरीर में कुछ ऐसी समस्याऐं उत्पन्न हो जाती हैं जो गंभीर और जानलेवा बीमारी का रूप ले लेती हैं। इनका स्वयं को पता भी नहीं चलता जैसे कि बोन मैरो में समस्या होने पर ब्लड कैंसर, रक्तचाप का बढ़ जाना, खराब वाला कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल LDL) बढ़ने पर हृदय की रक्त धमनियों में रुकावट आदि।  इनको “साइलेंट किलर” कहा जाता है। कुछ समस्याऐं ऐसी होती हैं जो जानलेवा तो नहीं होतीं परन्तु “घातक” अवश्य होती हैं जो शरीर के किसी विशेष अंग को आघात पहुंचा कर क्षतिग्रस्त कर देती हैं। ऐसी ही एक समस्या है “ग्लूकोमा” जो की आंखों की बीमारी है जिसमें अंतःस्रावी दबाव (Intraocular Pressure IOP) बढ़ते रहने से ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती रहती है और दृष्टि प्रभावित होती है। एक स्थिति ऐसी भी आने की संभावना रहती है कि जिसमें आंखों की दृष्टि हमेशा के लिये चली जाये। ग्लूकोमा को “काला मोती” के नाम से भी जाना जाता है। परन्तु हमारा आज का टॉपिक ग्लूकोमा नहीं है। इस विषय पर विस्तार से जानकारी के लिये आप हमारा पिछला आर्टिकल “Glaucoma क्या होता है?” पढ़ें। आखिर इस ग्लूकोमा का उचित उपचार क्या है। दोस्तो, इसका परफैक्ट उपचार है ट्रैबेक्यूलेक्टोमी और यही है हमारा आज का टॉपिक “ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको ट्रैबेक्यूलेक्टोमी के बारे में भी जानकारी देगा। ट्रैबेक्यूलेक्टोमी को जानने से पहले ऑप्टिक नर्व के बारे में जानना बहुत जरूरी है। तो, सबसे पहले जानते हैं कि ऑप्टिक नर्व क्या होती है फिर जानेंगे कि ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है, इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

Advertisements
Advertisements

ऑप्टिक नर्व क्या है? What is the Optic Nerve?

दोस्तो, आंख के पिछले हिस्से में कुछ तंत्रिकाऐं होती हैं जो मस्तिष्क से जुड़ी हुई होती हैं, इन्हीं तंत्रिकाओं को ऑप्टिक नर्व कहा जाता है। यही ऑप्टिक नर्व मस्तिष्क को प्रकाश संकेत भेजती है। इसी के द्वारा मस्तिष्क में चित्र बनते हैं जो वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाता है। ऑप्टिक नर्व एक लाख से भी अधिक छोटे-छोटे तंतुओं से बनी होती है। जब इस ऑप्टिक नर्व के तंतु मरने लगते हैं तब देखते समय काले धब्बे जैसे नजर आते हैं। ये धब्बे इतने बारीक होते हैं कि इनकी तरफ एकदम से ध्यान भी नहीं जाता। परन्तु एक स्थिति ऐसी भी आती है कि जब ऑप्टिक नर्व बहुत ज्यादा  क्षतिग्रस्त हो जाती है तब आंखों की रोशनी ही चली जाती है।

ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है? What is Trabeculectomy?

दोस्तो, एकदम सरल भाषा में कहा जाये तो ग्लूकोमा से पीड़ित मरीजों को ग्लूकोमा से छुटकारा दिलाने के लिये की जाने वाली सर्जरी प्रक्रिया है जोकि ऑपरेशन थियेटर में की जाती है। इस बारे में आंखों के अस्पताल, सेन्टर फॉर साइट, प्रीत विहार, दिल्ली की प्रसिद्ध ग्लूकोमा विशेषज्ञ एवं सलाहकार, सर्जन, डॉक्टर मधु भूत का कहना है कि “ग्लूकोमा के उपचार के लिये ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी उत्तम उपाय है। इस सर्जरी के द्वारा आंख में एक अन्य मार्ग बनाकर, आंख में मौजूद तरल पदार्थ के बाहर निकलने का रास्ता दे दिया जाता है ताकि तरल पदार्थ के जमा होने के कारण, Intraocular Pressure को कम किया जा सके”। डॉ। मधु ने स्पष्ट किया कि “आंख में मौजूद द्रव पदार्थ को बाहर निकलने का रास्ता जब बंद हो जाता है तब यह वहीं आंख में जमा होता रहता है जिससे Intraocular Pressure बढ़ता है। इसी दबाव के कारण ऑप्टिकल नर्वस् क्षतिग्रस्त होने लगती हैं”। डॉ। मधु ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुऐ बताया कि “ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी होने के रिकवरी के बाद फिर कभी दवाओं (Eye drops) की जरूरत नहीं पड़ती अन्यथा सारी ज़िन्दगी Eye drops डालने पड़ सकते हैं फिर भी इस बात की कोई गारन्टी नहीं है कि ऑप्टिकल नर्वस् क्षतिग्रस्त होने से रुक ही जायेंगी”। ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी में क्या होता है, हम इस बारे में जानकारी आगे देंगे। पहले यह जान लेते हैं कि आंख का तरल पदार्थ क्या होता है और ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ती है।

Advertisements

आंख का तरल पदार्थ क्या होता है? What is Eye Fluid?

दोस्तो, मौजूद तरल पदार्थ, जिसके रुक जाने से IOP बढ़ता है जोकि ग्लूकोमा का कारण है, को एक्वेस ह्यूमर (Aqueous Humour) कहा जाता है। इसे हिंदी में नेत्रोद या नेत्र जल कहते हैं। इसका निर्माण सिलिअरी बॉडी द्वारा होता है। सिलिअरी बॉडी आंख के संवहनी अंगों का हिस्सा है जो कोरॉइड (Choroid) को आईरिस से जोड़ती है। कोरॉइड जिसे कोरॉइड कोट के रूप में भी जाना जाता है, आंख की संवहनी परत है, जिसमें संयोजी ऊतक होते हैं, और रेटिना और स्क्लेरा (श्वेतपटल) के बीच स्थित होते हैं। एक्वेस ह्यूमर नामक तरल पदार्थ पानी की तरह पारदर्शी और प्लाज़मा के समान परन्तु कम प्रोटीन सांद्रता युक्त होता है। यह रक्तनालिकाओं से निकल कर लेंस को चारों ओर से कवर करता हुआ, पुतली से होकर आंख के आगे और पीछे (Anterior and Posterior chambers) के कक्षों को भरता है।  फिर अग्रखंड के कोण से इसका बहिष्करण (Exclusion) खून में होता रहता है। चूंकि आंखों के कुछ आंतरिक अंगों में रक्तनलिकाऐं नहीं जातीं जैसे कि लेंस, कोर्निया आदि, इसलिये इनको पोषण पहुंचाने और मल पदार्थ को निकालने का काम यह तरल पदार्थ ही करता है। यह जरूरी हो जाता है कि यह तरल पदार्थ नया बनता रहे और आंख के अग्रखंड के कोण से निकलता रहे। यदि इसका निर्माण रुक जाता है और बाहर नहीं निकलता तो IOP बढ़ जाता है जो कि ग्लूकोमा का मुख्य कारण होता है।

ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ती है? Why is Trabeculectomy Surgery Needed?

आंखों की गहन जांच के बाद यदि ग्लूकोमा की पुष्टि हो जाती है तब इसके उपचार के लिये निम्नलिखित विकल्प अपनाये जाते हैं

1. आई ड्रॉप्स (Eye Drops)- शुरुआत में नेत्र विशेषज्ञ कुछ आई ड्रॉप्स आंखों में डालने की सलाह देते हैं ताकि आंखों में जमा तरल पदार्थ निकल सके और IOP को कंट्रोल किया जा सके। कई मामलों में आई ड्रॉप के कुछ साइड इफेक्ट्स भी देखे गये हैं जैसे कि आंखों में जलन, चुभन तथा खुजली होना, धुंधला नजर आना और दिल की धड़कन का बढ़ जाना।

Advertisements

2. लेजर उपचार (Laser Treatment)- लेजर सर्जरी ग्लूकोमा के उपचार के लिये की जाने वाली सबसे लोकप्रिय और सरल चिकित्सा पद्धति है। इस पद्धति में डॉक्टर आंख से तरल पदार्थ को बाहर निकालने के लिये लेजर का उपयोग करते हैं ताकि अधिक मात्रा में तरल पदार्थ आसानी से निकल सके और IOP कम हो सके और नियंत्रण में रहे।  

समय-समय पर की जाने वाली जांच से जब यह पता चलता है कि आई ड्रॉप्स और लेजर उपचार से भी IOP कम नहीं हो रहा है और ऑप्टिक नर्व का क्षतिग्रस्त होना जारी तब डॉक्टर ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी करवाने की कहते हैं क्योंकि इसके अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं बचता।

ये भी पढ़े सोरायसिस के घरेलू उपाय

ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट Preparations and Tests Before Trabeculectomy Surgery

दोस्तो, किसी भी सर्जरी से पहले उसकी योजना बनाई जाती है। ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी के लिये भी उचित तैयारी करनी पड़ती है। इसके लिये डॉक्टर मरीज से निम्नलिखित जानकारी लेते हैं और कुछ टैस्ट कराने को कहा जाता है

1. सबसे पहले आंख का मूल्यांकन किया जाता है,  करीब से जांच की जाती है, आंख के आकार का नाप लिया जाता है और आंख में पहले से मौजूद किसी भी स्थितियों पर विचार किया जाता है जिनके कारण सर्जरी के समय या सर्जरी के बाद में जटिलताऐं उत्पन्न हो सकती हैं। 

2. फिर डॉक्टर मरीज के स्वस्थ के बारे में विस्तार से जानकारी लेते हैं जैसे कि डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अस्थमा या अन्य कोई बीमारी के बारे पूछते हैं।

3. यदि मरीज कोई दवा ले रहा है तो इस बारे में डॉक्टर जानकारी लेते हैं और कुछ दवाओं को कुछ समय के लिये छोड़ने के लिये कहा जा सकता है जैसे रक्त पतला करने वाली दवाऐं।

4. कुछ दवाओं में बदलाव भी किया जा सकता है जैसे कि डायबिटीज और उच्च रक्तचाप वाली दवाऐं।

5. डायबिटीक मामले में मरीज से सर्जरी के लिये खाली पेट रहने को कहा जा सकता है।

6. यदि सर्जरी प्रक्रिया जनरल एनेस्थीसिया के साथ की जानी है तो मरीज को प्रक्रिया से 12 घंटे पहले खाली पेट रहने को कहा जायेगा अर्थात् सर्जरी से 12 घंटे पहले कुछ भी नहीं खाना।

7. लोकल एनेस्थीसिया के मामले में सर्जरी से 2 घंटे पहले कुछ हल्का भोजन करने को कहा जाता है।

8. एलर्जी के बारे में भी मरीज से जानकारी ली जाती है।

9. इस बारे में भी जानकारी ली जाती है कि मरीज कोई सप्लीमेंट ले रहा है या नहीं।

10. सर्जरी वाले दिन मरीज को अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र को साथ लाने को कहा जाता है ताकि सर्जरी वाले दिन की सभी औपचारिकताओं को पूरा किया जा सके तथा मरीज को सर्जरी के बाद ठीक से घर ले जाया जा सके।

11. चूंकि मरीज को अस्पताल में एक दिन से अधिक रखा जा सकता है इसलिये मरीज को एक जोड़ी पहनने के अतिरिक्त कपड़े, चप्पल, दवाईयां, इन्हेलर आदि लाने को कहा जाता है।

12. सभी आभूषणों को घर पर ही उतारकर आने को कहा जाता है। सर्जरी के समय किसी भी धातु की वस्तु या आभूषण शरीर पर नहीं होना चाहिये।

13. महिलाओं को मेकअप ना करने की सलाह दी जाती है और नेल पॉलिश ना लगायें।

14. सर्जरी वाले दिन से पहले तीन दिन तक मरीज को एक आई ड्रॉप आंख में डालने को कहा जाता है।

15. मरीज से निम्नलिखित टैस्ट कराने को कहा जाता है

(i)  रेंडम ब्लड शुगर टैस्ट

(ii) यूरीन रुटीन और माइक्रोस्कोपिक टैस्ट

(iii) इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम स्कैन

इनकी टैस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही सर्जरी करने का निर्णय लिया जाता है।

ये भी पढ़ें एनीमिया को दूर करने के घरेलू उपाय

सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया Day of Surgery

दोस्तो, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया निम्न प्रकार रहती   है

1. मरीज को सर्जरी के समय से लगभग दो घंटे पहले बुलाया जाता है ताकि कुछ औपचारिकताऐं पूरी की जा सकें और कुछ टैस्ट भी किये जा सकें।

2. एक फार्म दिया जाता है जिसे सहमति पत्र कहते हैं, को भरकर, हस्ताक्षर करके दिया जाता है। मरीज इस सहमति पत्र के माध्यम से सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति देता है। इसे पढ़कर और समझकर हस्ताक्षर करना चाहिये।

3. सर्जरी के खर्च का बिल भी जमा कराना होता है।

4. मरीज की जिस आंख की सर्जरी होनी है उसमें लगभग 15-20 मिनट के अन्तराल पर तीन या चार बार दवा डाली जाती है।

5. इसके बाद मरीज का ब्लड प्रैशर और दिल कि धड़कन को नापा जाता है। यदि यह सामान्य है तभी सर्जरी की जाती है।

6. फिर मरीज को सर्जरी कास्ट्यूम पहने को कहा जाता है। फिर आंखों का प्रैशर कम करने के लिये कैन्युला के माध्यम से नस में इंजेक्शन की दवा चढ़ाई जाती है।

7. इसके बाद एनेस्थीसिया चैक करके, मरीज को एनेस्थीसिया दे दिया जाता है।

8. फिर ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी प्रक्रिया शुरु की जाती है।

ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी कैसे की जाती है? How is Trabeculectomy Surgery Performed?

1. ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी प्रक्रिया ऑपरेशन थियेटर में की जाती है जिसके लिये एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगाकर दी जाती है। एनेस्थीसिया के बारे डॉक्टर निर्णय लेते हैं कि मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाना है या लोकल एनेस्थीसिया। जनरल एनेस्थीसिया में मरीज गहरी नींद में  चला जाता है, उसे सर्जरी के समय कुछ भी महसूस नहीं होता। लोकल एनेस्थीसिया में केवल आंख के क्षेत्र को सुन्न कर दिया जाता है। इसमें मरीज को पता चलता है कि उसकी सर्जरी की जा रही है परन्तु उसे किसी भी प्रकार का दुख-दर्द नहीं होता।

2. मरीज को एनेस्थीसिया देने के बाद, जिस आंख की सर्जरी होनी है, सर्जन उसे साफ करके,आंख को खोल कर रखने के लिये एक उपकरण लगाते हैं जिसे लिड स्पेक्युलम कहा जाता है। फिर मरीज के चेहरे पर एक ऐसा पर्दा डाल दिया जाता है जिससे आंख के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिखाई नहीं देता है।

3. इसके बाद सर्जन ऊपरी पलक के पास आंख में एक छिद्र बनाते हैं और ड्रेनेज वाले हिस्से से ऊतक (Tissue) का छोटा टुकड़ा निकाल लेते हैं। सर्जन छिद्र इस तरह से बनाते हैं कि उसका कुछ हिस्सा, स्क्लेरा के टिश्यूज़ से बने एक फ्लैप से ढका रहे। स्क्लेरा आंख की सफेद अपारदर्शी, रेशेदार और सुरक्षा की बाहरी परत होती है। एक्वेस ह्यूमर यानी तरल पदार्थ के नए छिद्र यानी जल निकासी मार्ग से निकलने पर फ्लैप वाले टिश्यूज़ उठ जाते हैं और बुलबुला बन जाता है जिसे ब्लेब कहते हैं, इसकी मदद से सर्जन यह देखते हैं कि तरल पदार्थ का बाहर स्राव हो रहा है या नहीं। इसके बाद सर्जन फ्लेप पर ब्लेब के पास टांके लगा देते हैं ताकि बनाया गया नया जल निकासी मार्ग यानी छिद्र बंद न हो। 15 दिन के बाद इन टांकों को हटा दिया जाता है।

4. इसके बाद सर्जरी वाले हिस्से पर दवाई लगाकर, आंख को बंद करके आई पैच या शील्ड से भी ढक कर टेप लगा दी जाती है।

5. इसके बाद मरीज को आधा/पौना घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। छुट्टी देते समय कुछ दर्द निवारक दवा दी जाती है जिससे मरीज को दर्द और बुखार से राहत मिल सके और कुछ आई ड्रॉप्स प्रेस्क्राइब किये जाते हैं। मरीज को अगले दिन अस्पताल आने को कहा जाता है ताकि आंख की पट्टी को हटाया जा सके और जांच की जा सके। पट्टी हटने के बाद ही आई ड्रॉप्स डालने का सिलसिला शुरू होता है।

सर्जरी के बाद की कुछ हिदायतें/सावधानियां Some Post-Surgery Instructions/Precautions

1. सर्जरी, मरीज के साथ आये व्यक्ति को दवाओं और आई ड्रॉप्स के बारे में बताते हैं कि कब-कब आंख में दवा डालनी है।

2. आंख की पट्टी खुलने के बाद मरीज को कुछ दिनों के लिये काला चश्मा लगाये रखने को कहा जाता है।

3. आंख को पानी से बचाकर रखने की सख्त हिदायत दी जाती है क्योंकि आंख में पानी जाने से इंफेक्शन होने की संभावना रहती है। इसीलिये मरीज को गर्दन से नीचे ही नहाने को कहा जाता है। दोस्तो, यहां एक प्रश्न उपस्थित होता है कि यदि किसी के घर या रिश्तेदारी में कोई दुर्घटना हो जाती है और मरीज को रो पड़ता है तो इसका आंख पर क्या प्रभाव पड़ेगा?। डॉ। मधु ने इसका बहुत ही अच्छा और तर्कसंगत उत्तर दिया कि “आंसू आंख का पानी है बाहर का नहीं, इसलिये आंख का कोई नुकसान नहीं होगा और ना ही कोई इंफेक्शन”।

4. मरीज को भाप से भी बचने को कहा जाता है।

5. झुकने को भी मना किया जाता है।

6. वजन ना उठायें

7. दो हफ्ते तक सुबह की सैर के लिये बाहर जाने, व्यायाम करने, खेल कूद आदि के लिये मना किया जाता है।

8. लंबी यात्रा और ड्राईविंग की सख्त मनाही होती है। इसलिये घर पर ही आराम करें।

9. मोबाइल फोन का बहुत ही कम इस्तेमाल करें। थोड़ी देर के लिये टीवी देख सकते हैं वह भी दूर से।

10. जबरदस्ती पढ़ने की कोशिश ना करें, इससे सर्जरी वाली आंख पर जोर पड़ता है।

11. यदि मरीज स्वयं या कोई परिवार का सदस्य जो भी आंख में दवाई डाल रहा है तो सुनिश्चित करे कि हाथ साफ हों, इसके लिये साबुन से अच्छी तरह हाथ धोयें या सेनिटाइज करें।

12. आंख में दवा डालने के बाद, एकदम साफ़ कपड़े से आंख बहुत हल्के हाथ से साफ़ करें, रगड़ें नहीं। किसी भी समय गलती से भी आंख को रगड़ना नहीं चाहिये। बेहतर होगा आंख साफ़ करने के लिये वाइप्स (Wipes) का इस्तेमाल करें।

13. डॉक्टर के निर्देशानुसार नियमित रूप से दवा लेते रहें और समय-समय पर डॉक्टर के पास जाकर जांच कराते रहें क्योंकि पूरी तरह सही होने में लगभग दो महीने लग जाते हैं।

ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी का समय और  खर्चा Trabeculectomy Surgery Time and Cost

ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी में लगभग एक घंटा लग जाता है और लगभग 60 हजार से 70 हजार रुपये का खर्च आता है।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको ट्रैबेक्यूलेक्टोमी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ऑप्टिक नर्व क्या है, ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है, आंख का तरल पदार्थ क्या होता है, ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ती है, ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया, ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी कैसे की जाती है, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से सर्जरी के बाद की कुछ हिदायतें/सावधानियां बतायीं और यह भी बताया कि ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी में कितना समय लगता है और कितना खर्चा आता है। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

Summary
ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है?
Article Name
ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है?
Description
दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको ट्रैबेक्यूलेक्टोमी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ऑप्टिक नर्व क्या है, ट्रैबेक्यूलेक्टोमी क्या है, आंख का तरल पदार्थ क्या होता है, ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ती है, ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी से पहले की तैयारी और टैस्ट, सर्जरी वाले दिन की प्रक्रिया, ट्रैबेक्‍यूलेक्‍टोमी सर्जरी कैसे की जाती है, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
Author
Publisher Name
Desi Health Club
Publisher Logo

2 Comments

Shiv Kumar Kardam · November 4, 2021 at 5:44 am

It’s an outstanding Article

  • Advertisements
  • Madhu · December 3, 2021 at 4:55 am

    Wonderfully explained

    Leave a Reply

    Avatar placeholder

    Your email address will not be published.

    error: Content is protected !!