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पोटेशियम टेस्ट क्या है? – What is a Potassium Test in Hindi

पोटेशियम टेस्ट क्या है

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में। दोस्तो, हमारे शरीर को पोटेशियम खाद्य/पेय पदार्थों से मिलता है। पोटेशियम भी सोडियम की भांति एक इलेक्ट्रोलाइट है। यह शरीर की मांसपेशियों की कार्य प्रणाली, मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में मदद करने, शरीर के द्रव को नियंत्रित करने, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल सामान्य रखने, मांसपेशियों के संकुचन आदि के लिए महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाता है। इसका अपना एक सामान्य स्तर होता है।

यदि इस सामान्य स्तर में बदलाव आता है तो यह शरीर के लिए समस्याएं उत्पन्न कर देता है। पोटेशियम के स्तर में अधिकता या इसके स्तर में कमी होना, दोनों ही स्थितियां कष्टकारी होती हैं। शरीर में पोटेशियम की अधिकता या कमी के लक्षण दिखाई देने पर अथवा पहले से ही मौजूद कुछ बीमारियों पर निगरानी रखने के लिए या रुटीन चेकअप के लिए, डॉक्टर पोटेशियम टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। आखिर यह पोटेशियम टेस्ट है क्या? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “पोटेशियम टेस्ट क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब आज आपको पोटेशियम टेस्ट के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि इस टेस्ट के क्या परिणाम आते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि पोटेशियम टेस्ट क्या है और यह क्यों किया जाता है। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

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पोटेशियम टेस्ट क्या है? – What is a Potassium Test?

दोस्तो, हमने पिछले आर्टिकल में पोटेशियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी और बताया था कि आहार में पोटेशियम एक इलेक्ट्रोलाइट है जो हमें खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है। यह मांसपेशियों और तंत्रिका के बीच संबंध स्थापित करने, मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में मदद करने शरीर के द्रव को नियंत्रित करने, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल सामान्य रखने, मांसपेशियों के संकुचन और इनकी कार्यप्रणाली में सहायता करने जैसे अनेक महत्वपूर्ण काम करता है। हमने यह भी बताया था कि पोटेशियम का अधिकांश भाग कोशिकाओं में मौजूद होता है। यहां हम स्पष्ट कर दें कि पोटेशियम का कुछ भाग रक्त में भी विद्यमान होता है।

जब पोटेशियम का स्तर अपने सामान्य स्तर से ज्यादा या कम होता है तो यह किसी रोग/चिकित्सकीय समस्या की ओर संकेत होता है। पोटेशियम के स्तर में वृद्धि या कमी के कई कारण होते हैं जिनका जिक्र हम आगे करेंगे। रक्त में पोटेशियम का स्तर क्या है इसी के बारे में जानकारी लेने के लिए जो टेस्ट किया जाता है, उसी को पोटेशियम टेस्ट कहा जाता है। ब्लड सेंपल लेकर इसका विश्लेषण किया जाता है। यह टेस्ट, सीरम (रक्त में पाए जाने वाला द्रव) में पोटेशियम लेवल को निर्धारित करता है। इस टेस्ट को सीरम पोटेशियम, सीरम इलेक्ट्रोलाइट्स, K+ टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।

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पोटेशियम टेस्ट क्यों किया जाता है? – Why is the Potassium Test Done?

पोटेशियम टेस्ट कराने के निम्नलिखित आधार  हैं –

1. जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि जब पोटेशियम का स्तर अपने सामान्य स्तर से ज्यादा या कम होता है तो यह किसी रोग/चिकित्सकीय समस्या की ओर संकेत होता है। पोटेशियम के सामान्य स्तर से अधिक वृद्धि यानि अधिकता को हाइपरकलेमिया (Hyperkalemia) कहा जाता है। 

यदि सामान्य स्तर में कमी आ जाए तो इस स्थिति को हाइपोकैलिमिया (Hypokalemia) कहा जाता है। किसी व्यक्ति में हाइपरकलेमिया या हाइपोकैलिमिया के लक्षण दिखाई देने पर पोटेशियम ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। हाइपरकलेमिया और हाइपोकैलिमिया के क्या कारण होते हैं और क्या लक्षण होते हैं, इनका जिक्र हम आगे करेंगे। 

2. कुछ दवाओं के सेवन से पोटेशियम के स्तर में परिवर्तन आ सकता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी दवाओं का सेवन कर रहा है और उसमें हाइपरकलेमिया या हाइपोकैलिमिया के लक्षण प्रकट हो रहे हैं तो उसको पोटेशियम टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।

3. जिन व्यक्तियों में पहले से ही कुछ बीमारियां हैं जैसे कि डाइबिटीज़, किडनी संबंधी रोग, अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) संबंधी समस्याएं आदि, तो इनको मॉनिटर करने के लिये या रुटीन चेकअप के लिए उनको पोटेशियम टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।

पोटेशियम स्तर को प्रभावित करने वाले कारण – Factors Affecting Potassium Level

पोटेशियम स्तर को प्रभावित करने वाले कारण निम्नलिखित हैं –

  1. फोलिक एसिड की कमी।
  2. शराब का अधिक मात्रा में सेवन करना।
  3. धूम्रपान।
  4. डायबिटिक कीटोएसिडोसिस। यह डायबिटीज़ से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जिसमें रक्त में बहुत अधिक मात्रा में कीटोन्स नामक ब्लड एसिड बढ़ने लगते हैं। 
  5. निरन्तर दस्त की समस्या।
  6. सामान्य से अधिक पसीना आना।
  7. मूत्रवर्धक का उपयोग करना।
  8. रेचक का अधिकाधिक उपयोग करना।

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पोटेशियम के स्तर में अधिकता के कारण – Cause of High Potassium Levels

पोटेशियम के स्तर में अधिकता यानि हाइपरकेलेमिया की स्थिति के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –

  1. लाल रक्त कोशिकाओं की क्षति होना।
  2. किसी रोग के उपचार में रक्त चढ़ाया गया हो।
  3. विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन।
  4. श्वसन अम्लरक्तता (respiratory acidosis)।
  5. किडनी का फेल होना या किडनी से जुड़ी समस्या।
  6. हाइपरकेलेमिक आवधिक पक्षाघात (hyperkalemic periodic paralysis)।  एक अनुवांशिक समस्या जिसमें मांसपेशियां कमजोर पड़ने पर पोटेशियम की मात्रा बढ़ जाती है। 
  7. एल्डोस्टेरोन हार्मोन का अधिक मात्रा में होना।

पोटेशियम के स्तर में अधिकता के लक्षण – Symptoms of High Potassium Levels

पोटेशियम के स्तर में अधिकता होने पर निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं –

  1. हृदय की अनियमित धड़कन
  2. जी मिचलाना
  3. धकावट
  4. मांसपेशियों में कमजोरी
  5. सुन्नता, झुनझुनी या स्तब्धता
  6. सिरहन महसूस करना

पोटेशियम के स्तर में कमी के कारण – Cause of Low Potassium Levels

पोटेशियम के स्तर में कमी यानि हाइपोकैलिमिया की स्थिति के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –

  1. भोजन से पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम ना मिल पाना।
  2. किडनी तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों का संकुचित हो जाना। 
  3. हाइपोकलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें मांसपेशियों में बेहद कमजोरी हो जाती हैं और पोटेशियम की मात्रा कम होने लगती है। 
  4. लगातार उल्टी लगना
  5. डायरिया होना
  6. कुशिंग सिंड्रोम और रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस की स्थिति भी पोटेशियम स्तर में कमी का कारण बन सकती हैं।

पोटेशियम के स्तर में कमी के लक्षण – Symptoms of Low Potassium Levels

पोटेशियम स्तर में कमी (हाइपोकैलिमिया) होने से निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं –

  1. हृदय की अनियमित धड़कन
  2. मांसपेशियों में ऐंठन
  3. मांसपेशियों में कमजोरी 
  4. मितली, उल्टी
  5. कब्ज की शिकायत
  6. थकावट और कमजोरी महसूस करना
  7. चक्कर आना 
  8. मूत्र का बढ़ना

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पोटेशियम टेस्ट के लिये तैयारी – Preparation for Potassium Test

दोस्तो, पोटेशियम ब्लड टेस्ट/इलेक्ट्रोलाइट पैनल के लिए कोई विशेष तैयारी करने की जरूरत नहीं पड़ती है। हां, कुछ निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

1. यदि ब्लड सेंपल पर कोई अन्य टेस्ट कराने की सलाह दी गई है तो, व्यक्ति को कुछ घंटे खाली पेट रहने (ना कुछ खाना और ना कुछ पीना) को कहा जा सकता है। इसका पालन करना चाहिए।

2. यदि आप किसी भी प्रकार दवा भी ले रहे हैं या विटामिन या हर्ब या सप्लीमेंट ले रहे हैं तो, डॉक्टर को इनके बारे में अवश्य बताएं। हो सकता है कि डॉक्टर इनको बंद करने की सलाह दे। 

3. नॉन-स्टेरॉयडस एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, ग्लूकोज, डाईयुरेटिक, टेस्ट के परिणाम पर असर डाल सकते हैं। इनके सेवन (यदि कर रहे हैं तो) के बारे में भी डॉक्टर को बताएं। ये पोटेशियम की मात्रा में वृद्धि कर सकते हैं। हिस्टामिन, हेपरिन, एपिनेफ्रीन, आइसोनाइजिड और एमिनोकैपरोइक एसिड आदि भी पोटेशियम की मात्रा में वृद्धि कर सकते हैं।

4. एमिनोसैलिसिलिक एसिड, इन्सुलिन, कार्बेनिसिलिन और एमफोटेरिसिन जैसी दवाएं पोटेशियम स्तर को कम कर सकती हैं।

पोटेशियम टेस्ट के लिये सैंपल – Sample for Potassium Test

पोटेशियम टेस्ट के लिये ब्लड सैंपल लेना पड़ता है। इसके लिये मेडिकल एक्सपर्ट – टेक्नीशियन या खुद डॉक्टर एक छोटी सुई का इस्तेमाल करते हैं। मरीज की बांह की नस में सुई लगाकर सिरिन्ज में ब्लड भरकर इस सैंपल को जांच के लिए लैब भेज देते हैं। बांह की नस में सुई डालते हुए हल्की सी चुभन महसूस होती है, सिरिन्ज में ब्लड भरने में बहुत हल्का दर्द यहसूस हो सकता है। यह ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया दो या तीन मिनट में पूरी हो जाती है।  

पोटेशियम टेस्ट के परिणाम – Potassium Test Results

पोटेशियम टेस्ट के परिणाम निम्न प्रकार होते हैं-

1.  सामान्य परिणाम (General Results)- यदि टेस्ट, पोटेशियम लेवल 3.6 से 5.2 मिलिमोल (millimoles) प्रति लीटर (mmol/L) के बीच आता है तो यह पोटेशियम टेस्ट का सामान्य परिणाम माना जाता है क्यों कि यह पोटेशियम की सामान्य रेंज है।

2. असामान्य परिणाम (Abnormal Results)- यदि टेस्ट, पोटेशियम लेवल 3.6 से 5.2 मिलिमोल (millimoles) प्रति लीटर (mmol/L) से कम या अधिक दर्शाता है तो यह असामान्य परिणाम कहा जाएगा। 

3. पोटेशियम का सामान्य स्तर (Normal Potassium Levels)- पोटेशियम का सामान्य स्तर 3.6 से 5.2 मिलिमोल (millimoles) प्रति लीटर (mmol/L) माना जाता है।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको पोटेशियम टेस्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पोटेशियम टेस्ट क्यों किया जाता है, पोटेशियम स्तर को प्रभावित करने वाले कारण, पोटेशियम के स्तर में अधिकता के कारण, पोटेशियम के स्तर में अधिकता के लक्षण, पोटेशियम के स्तर में कमी के कारण, पोटेशियम के स्तर में कमी के लक्षण, पोटेशियम टेस्ट के लिये तैयारी और पोटेशियम टेस्ट के लिये सैंपल, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से पोटेशियम टेस्ट के परिणाम के बारे में भी बताया। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको पोटेशियम टेस्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पोटेशियम टेस्ट क्यों किया जाता है, पोटेशियम स्तर को प्रभावित करने वाले कारण, पोटेशियम के स्तर में अधिकता के कारण, पोटेशियम के स्तर में अधिकता के लक्षण, पोटेशियम के स्तर में कमी के कारण, पोटेशियम के स्तर में कमी के लक्षण, पोटेशियम टेस्ट के लिये तैयारी और पोटेशियम टेस्ट के लिये सैंपल, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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