दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। आज हम अवगत करायेंगे एक ऐसी स्थिति से जो ना रोग है और ना विकार, परन्तु यह मानसिक और शारीरिक रोग को उत्पन्न जरूर कर देती है यदि इससे समय रहते ना निपटा जाये तो। इस स्थिति के आते ही या तो हम निराश (Hopeless) हो जाते हैं या बड़े उत्साह के साथ डट कर सामना करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है हम उस मोड़ पर आ जाते हैं कि जब हम सोचते हैं कि “हां, मैं कर सकता हूं” (Yes, I can do it) या फिर “मुझसे ना हो पायेगा” (I can’t do it)। शरीर और मस्तिष्क उस स्थिति के विरोध में जब ऐसी प्रतिक्रिया (Reaction) देता है तो शरीर में रसायनों का श्राव बढ़ जाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है, पोषक तत्वों जैसे पोटेशियम, मेग्नीशियम, कैल्शियम और अमीनो अम्ल, का अधिक मात्रा में उत्सर्जिन होने लगते हैं और पाचन कि गति कम हो जाती है। हम बात कर रहे हैं उस स्थिति की जिसे तनाव कहा जाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “तनाव से छुटकारा पाने के उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको तनाव के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इससे राहत पाने के क्या उपाय हैं। सबसे पहले जानते हैं कि तनाव क्या होता है।

तनाव क्या है? – What is Stress?

दोस्तो, सबसे पहले हम स्पष्ट कर दें कि तनाव कोई विकार नहीं है, कोई रोग नहीं है परन्तु यह शारीरिक और मानसिक रोगों को जन्म देने वाला कारक है। तनाव एक ऐसी स्थिति है जो हमारे शरीर को, मस्तिष्क को, विपरीत परिस्थितियों, समस्याओं और चुनौतियों को प्रत्युत्तर देने के लिये, प्रतिक्रिया (Reaction) देने के लिये तैयार करती है। यदि इस तनाव रूपी स्थिति को हम सकारात्मक रूप में लेते हैं तो यह हमें समस्याओं और चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देती है और हम सफल होते हैं। परन्तु यदि हम नकारात्मक रूप में लेते हैं तो हम अपने को समस्याओं और चुनौतियों से लड़ने में कमजोर और असमर्थ पाते हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मानसिक, शारीरिक, मन की स्थिति और विपरीत परिस्थितियों/चुनौतियों के बीच असंतुलन ही तनाव है। 

 तनाव से छुटकारा पाने के उपाय

शरीर प्रतिक्रिया देने के लिये कोर्टिसोल, एड्रेनालाइन और नारएड्रेनालाइन रसायन छोड़ता है कि या तो हम उन चुनौतियों से लड़ें या ना लड़ें। यह निर्भर करता है हमारी मनःस्थिति, मानसिक स्थिति और शारीरिक क्षमता पर। इसलिये तनाव को जीवन का हिस्सा मानकर चुनौतियों का सामना करना चाहिये। हां, यदि यह तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाये तो इसका उपचार अतिआवश्यक हो जाता है अन्यथा यह मानसिक और शारीरिक रोगों को जन्म दे देता है। 

तनाव के प्रकार – Types of Stress

1.कम समय वाला तनाव (Acute Stress) – इस प्रकार के तनाव बहुत कम समय के लिये होता है लेकिन इसका आवेग बहुत तीव्र होता है। यह कुछ पहले की घटनाओं पर आधारित हो सकता है या निकट भविष्य में होने वाली घटनाओं या आने वाले खतरे का संकेत हो सकता है। इस प्रकार के तनाव में मस्तिष्क के अंदर के कुछ रसायन, भविष्य में आने वाले खतरे या किसी भी प्रकार के नुकसान या चेतावनी के विरुद्ध प्रतिक्रिया (Reaction) देते हैं। उदहारण के तौर पर यदि आपका किसी से झगड़ा हुआ था या हुआ है और किसी दिन आपको ये पता चलता है कि वो पार्टी बदले की भावना से आपके यहां आ रहे हैं। तो, ऐसी स्थिति में आपको तनाव होगा ही होगा परन्तु जब आप अपनी कुशलता से, बातचीत के माध्यम से या अन्य कोई कार्यवाही करके उस स्थिति पर काबू पा लेते हैं तो यह तनाव भी तभी समाप्त हो जाता है। 

2. एपिसोडिक तीव्र तनाव (Episodic Acute Stress) – इस प्रकार के तनाव में लगभग एक ही प्रकार की समस्या बार बार आती है। कई बार समस्या का रूप बदला होता है। इस तनाव का आवेग भी तीव्र होता है परन्तु समय अवधि इसकी भी कम होती है। उदहारण के लिये प्रतियोगी परीक्षार्थी को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिये परीक्षा देते रहना कभी कोई, कभी कोई। प्राइवेट सैक्टर के कर्मचारियों को काम का लक्षय (Target) हर महीने पूरा करते रहना। गर्भवती महिला को हर महीने अपने स्वास्थ की जांच करवाना। इन सब पर दबाव बना रहता है, बेशक थोड़े समय के लिये ही सही।

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3. दीर्घ कालीन तनाव (Chronic Stress) – यह सबसे अधिक खतरनाक और लंबे समय तक चलने वाला तनाव होता है जिसका प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व पर पड़ता है और एक किस्म से उसका हिस्सा बन जाता है। उसके आचार-व्यावहार में, उसकी सोच में इस तनाव की “झुलसती छाया” समाहित हो जाती है। इस प्रकार के तनाव में आर्थिक स्थिति की समस्या से लेकर व्यक्तिगत जीवन की समस्याऐं कारण बनती हैं। इस प्रकार के तनाव का आवेग अधिकतर कम होता है परन्तु खतरनाक अधिक होता है। इसे धीमा ज़हर (Slow poison) कहना गलत नहीं होगा।  उदाहरण के लिये लंबे समय तक किसी को रोजगार ना मिले तो उसे घर वालों की बातें, ताने लगती हैं। आपने कईयों को कहते सुना होगा कि “मैं बेरोजगार हूं ना, इसलिये सब मुझे ही कहते हैं”, इस व्यथा को व्यक्त करते हुऐ वह रो पड़ता है या जोर-जोर से चिल्लाने लगेगा, कभी-कभी आक्रामक भी हो जाता है। वैवाहिक जीवन की कटुता, लंबी बीमारी,  प्रेम में असफलता, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न आदि का तनाव लंबे समय तक चलता है। इस क्रोनिक तनाव का असर व्यक्ति की पाचन प्रणाली, प्रतिरक्षा प्रणाली, प्रजनन प्रणाली,  उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, केन्द्रिय तन्त्रिका-तंत्र (Central Nervous System) और हृदय स्वास्थ पर पड़ता है। 

तनाव के कारण –  Cause for Tension

दोस्तो, तनाव होने के अनेक कारण हो सकते हैं, प्रदूषित वातावरण से लेकर आपके जीवन की निजी समस्याऐं, पारिवारिक, सामाजिक, कार्य संबंधी आदि। विवरण निम्न प्रकार है :-

1. तनाव के वातावरण संबंधी कारण – 

(i) स्थान विशेष का वातावरण यदि प्रदूषित है तो तनाव का कारण बन सकता है, जैसे हवा में बदबू होना, धूल, मिट्टी, गंदगी आदि का माहौल। 

(ii) ध्वनि प्रदूषण के कारण तनाव होना जैसे मौहल्ले, पड़ोस में शोर-शराबा रहना, कोई बहुत तेज आवाज में गाने सुन रहा है, टी।वी। का वालूयम बहुत तेज किया हुआ है, हर चंद सैकिन्ड के बाद गली में फेरी वालों, सब्जी, फल वालों का चिल्लाना, गली में फोन पर किसी के बहुत तेज आवाज में बात करना आदि, ये सब तनाव होने के बहुत बड़े कारण हैं। 

(iii) किसी विशेष स्थान पर, सामाजिक, धार्मिक या अन्य प्रकार के समारोह में अत्यधिक भीड़भाड़ होना। इससे भी कई लोगों को घबराहट होने लगती है। वे यही सोचकर तनाव में आ जाते हैं कि यदि यहां कुछ हादसा हो गया तो क्या होगा। 

2. कार्य संबंधी कारण 

(i)  स्कूल जाने वाले बच्चों पर परीक्षा में बहुत अच्छे अंक लाने का दबाव रहता है और उनसे ज्यादा माता-पिता पर दबाव रहता है कि कहीं उनका बच्चा पढ़ाई में पीछे ना रह जाये। यही दबाव बच्चा/माता-पिता के लिये तनाव का कारण बनता है।

(ii)  सरकारी सेवा के लिये प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने का दबाव बने रहना। यह दबाव उस समय और बढ़ जाता है जब पिछली प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिली हो। 

(iii) काम की तलाश में भटकते रहना। समय रहते सरकारी नौकरी ना मिल पाना। प्राइवेट काम भी ना मिल पाना।

(iv) अब बात उन व्यक्तियों की जिनके पास काम तो है लेकिन काम हद से ज्यादा है जिसे एक समय सीमा में पूरा करने होता है। इस लक्षय को पाने का दबाव, तनाव का कारण बनता है। 

(v) व्यक्ति की काबलियत के अनुसार काम का ना मिल पाना या मन पसंद काम ना मिलना। ये तथ्य भी तनाव का कारण बन सकते हैं।

(vi) नौकरी में  तरक्की (Promotion) ना मिल पाना। प्राइवेट सेक्टर में तो हालत और भी ज्यादा नाजुक (Critical) या उलझन भरे हो सकते हैं।

(vii) काम के बोझ के साथ-साथ काम की जिम्मेदारियां बढ़ना।

(viii) कार्य स्थल पर भेदभाव का सामना करना और उत्पीड़न को सहन करना।

(ix) महिलाओं के मामले में स्थिति और भी विकट हो जाती है विशेषतौर पर यौन उत्पीड़न के मामले में। एक तरफ बदनामी का डर और दूसरी ओर उत्पीड़न सहने की मजबूरी।

(x)  घर से बहुत दूर स्थानांतरण (Transfer) हो जाना जहां से रोजाना घर और कार्य स्थल आने जाने की समस्या का सामना करना या किसी अन्य राज्य में स्थानांतरण हो जाना। 

3. व्यक्तिगत जीवन से संबंधित तनाव के कारण –

(i)  अपनी शारीरिक बनावट को लेकर परेशान रहना या अपने रंग को लेकर दुखी होना।

(ii) अपनी या अपने परिवार के किसी सदस्य की छोटी या लंबे समयावधि वाली बीमारी के कारण परेशान रहना।

(iii) पारिवारिक समस्याओं के कारण तनाव अधिक बनता है।

(iv) प्रेम प्रसंग में सफलता ना मिलना

(v) आर्थिक स्थिति ठीक ना होना

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(vi) खानपान की गलत आदतों के कारण पौष्टिक आहार ना लेना जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

(vii) धूम्रपान, तम्बाकू, गुटका खैनी आदि का सेवन करना।

(viii) शराब या ड्रग्स का सेवन करना

(ix) महिलाओं के मामले में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न का शिकार होना

(x) वैवाहिक संबंध ठीक ना होना

(xi) किसी अन्य के साथ Love affair होना।

(xii) अनचाहा गर्भ रह जाना या गर्भपात हो जाना

(xiii) सेक्स Life ठीक ना होना

(xiv) बच्चों की जिम्मेदारियां बढ़ना, उनके व्यवसाय, शादियों की चिंता होना।

(xv)  प्राकृतिक विपत्ति आना या कोई अन्य दुर्घटना घटित होना जैसे चोरी, डकैती, बलात्कार, हिंसा आदि।

तनाव के लक्षण – Symptoms of Stress

1. मानसिक लक्षण – 

(i) मानसिक असंतुलन – इस स्थिति में मुख्य रूप से सोचने, समझने की शक्ति का ह्रास होता है। कोई भी निर्णय लेने में व्यक्ति अपने को असमर्थ पाता है। सही या गलत की तो बात ही बाद में आती है। ऐसी स्थिति में लोग यही कहते हैं “पता नहीं क्या सही है क्या गलत, मेरा तो दिमाग काम नहीं कर रहा”। इसी को मानसिक असंतुलन कहते हैं। 

(ii) मन में उद्विग्नता का भाव यानी बैचेनी महसूस करना।

(iii) व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाना। अपने आप में ही झुंझलाहट भरे रहना। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना। किसी भी बात का सामान्य रूप से जवाब ना देना।

(iv) आत्मविश्वास की कमी – आत्मविश्वास के अभाव में व्यक्ति अपनी बात ठीक से दूसरों को कह नहीं पाता, उसे हिचकिचाहट महसूस होती है। वह अपने को दूसरों से तुच्छ (छोटा) और हीन समझने लगता है। इसी हीन भावना को आत्मविश्वास की कमी कहते हैं। 

(v) आत्म सम्मान को ना समझ पाना या जानबूझ कर इग्नोर करना। कोई भी कुछ भी कह कर चले जाये उसकी परवाह ना करना या उसकी बात का असर ना होना या उसको उत्तर ना देना।

(vi) नकारात्मक सोच – मानसिक तनाव का यह सबसे बड़ा लक्षण है कि व्यक्ति की सोच प्रकाश की अपेक्षा अंधकार की तरफ बढ़ने लगती है। वह कुछ करने से पहले ही उसके मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं। सोचने लगता है कि कहीं मेरे करने से कुछ गलत या उल्टा ना हो जाये। आपने लोगों को कहते सुना होगा कि “ये हम से ना हो पायेगा” इसी को नकारात्मक सोच कहते हैं। 

(vii) भय – कहते हैं आदमी गल्तियों का पुतला होता है जिनके परिणाम से सबक सीख कर भविष्य में उन गल्तियों को नहीं दोहराता बल्कि कुछ अच्छा करके आगे बढ़ता है। अपनी गल्तियों को जानना और मानना बहुत बड़ी बात होती रहती है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो यह जानते हैं कि उन्होंने गलती की है और मानना भी चाहते हैं लेकिन गलती मानने पर जो परिणाम आयेंगे उनके बारे में सोचकर भयभीत रहते हैं कि इससे मेरा या मेरे परिवार  का ये नुकसान हो जायेगा। फिर वह इसी डर के साये में रहने लगता है।

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(viii) चिंता – कहते हैं कि चिंता चिता समान होती है। यह सच है। दोस्तो, एक बात याद रखियेगा कि “चिंता की चिता को समाधान के जल से बुझाया जाता है” और समाधान के लिये कर्म करना पड़ता है ना कि चिंता में घुलते हुऐ हाथ पर हाथ रखकर बैठना। इसीलिये मनुष्य योनि को कर्म योनि कहा गया है। शारीरिक/मानसिक रोग की समस्याऐं, घर परिवार की, नौकरी पेशे की आदि अनेकों समस्याओं का समाधान करना चाहिये ना कि चिंतित रहना। दोस्तो, एक बात और ध्यान रखना कि समस्या के जन्म के साथ ही उसके समाधान का भी जन्म हो जाता है। 

(ix)  स्वयं को निर्बल मानना – जब कोई मानसिक दबाव से गुजर रहा होता है तो वह अपने आपको बहुत कमजोर समझने लगता है। यह ठीक है कि हर व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है। परन्तु इसका तात्पर्य यह नहीं कि जो खुद की अपनी क्षमता और योग्यता है उसी को भूल जाओ और दूसरों से तुलना करने लगो। 

(x) दूसरों के साथ संतोषजनक सम्बन्ध और सामंजस्य (Harmony, adjustment) ना बनाये रख पाना – दोस्तो, जब व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है तो उसे खुद का ही ध्यान नहीं होता तो वह अपने परिवार वालों के साथ या पड़ोसियों के साथ, रिश्तेदारों के साथ, दोस्तो के साथ, जहां काम करता है उस सब साथियों के साथ, कैसे मधुर संबंध बनाये रखेगा और कैसे अपने आप को इन सब के बीच Adjust कर पायेगा। यह मानसिक तनाव का एक महत्वपूर्ण लक्षण होता है। 

2. शारीरिक लक्षण – 

(i)   उच्च रक्तचाप बढ़ जाना 

(ii) हृदय गति का असमान्य रूप से बढ़ जाना 

(iii) नाड़ी गति (Pulse rate ) और श्वास की गति (Breathing rate) में बढ़ोत्तरी।

(iv) मांसपेशियों में जकड़न।

(v)  बार-बार पसीना आना

(vi) सीने में दर्द होना

(vii) हाथ पैरों में सुन्न महसूस करना

(viii) सिर में दर्द रहना।

(ix)  ठीक से नींद न आना या नींद पूरी ना होना।

(x)  भूख ना लगना या कब्ज की समस्या बन जाना।

(xi) शारीरिक थकान, कमजोरी महसूस करना

(xii) बार‌-बार चक्कर आना।

(xiii) अचानक वज़न कम होना या बढ़ जाना

(xiv) रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होना

(xv) यौन-इच्छा में कमी होना या सेक्स करने का मन/मूड ना बनना।

3. भावनात्मक लक्षण –

(i)  स्मरण शक्ति का कमजोर हो जाना

(ii) बार-बार गुस्सा आना, कभी-कभी अपने आप पर ही गुस्सा आना 

(iii) चिड़चिड़ापन रहना

(iv) मन पर उदासी छाई रहना

(v)  मन विचलित रहना, घबराहट होना

(vi) मन में नकारात्मक और बुरे विचार आना

(vii) किसी भी काम को करने की इच्छा ना होना। 

(viii) अवसाद (Depression) होना, बहुत अधिक चिंतित रहना।

4. व्यावहारिक लक्षण – 

(i) अचानक से बहुत अधिक सिगरेट, गुटखा, खैनी, तम्बाकू का सेवन करना।

(ii) शराब, ड्रग्स आदि के सेवन की मात्रा बढ़ा देना।

(iii) नाखून चबाने या बाल खींचने की आदत बन जाना

(iv) बहुत जल्दी निराश हो जाना 

(v)  आप ही आप खोये-खोये रहना

(vi) बात करते-करते अचानक आक्रमक (Aggressive) हो जाना।

(vii) सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं जाना। सामाजिक गतिविधियों में भाग ना लेना।

(viii) बात-बात पर भावुक होकर रोने लग जाना।

(ix) अकेले रहना पसंद करना। किसी से बात ना करना, करना भी तो बहुत कम।

(x) आत्महत्या का प्रयास करना।

तनाव से होने वाले रोग – Stress Related Diseases

दोस्तो, तनाव के लक्षणों से यह पता चलता है कि तनाव किस तरह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से बुरी तरह तोड़कर रख देता है। अधिकतर दीर्घ कालीन चलने वाला तनाव यानी Chronic stress का बहुत बुरा प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है।  इसके कारण होने वाले संभावित रोग (हो भी सकते हैं और नहीं भी) निम्नप्रकार हैं :-

(i)  श्वसन संबंधी रोग (Respiratory disease)

(ii) स्मरण शक्ति कमजोर हो जाना (Alzheimer disease)

(iii) ऐसिड पेप्टिक रोग (Acid Peptic disease)

(iv) आंत से जुड़ी समस्याऐं।

(v)  हाइपरटेंशन

(vi) माइग्रेन

(vii) मनोवैज्ञानिक रोग

(viii) हृदय रोग

(ix) शारीरिक कमजोरी

(x) यौन दुर्बलता

(xi) शराब या अन्य प्रकार के नशे का आदी हो जाना

(xii) सोराइसिस, लाइके प्लैनस, युटिकैरिया, रुराइटस, न्युरोडर्मैटाइटिस आदि जैसे त्वचा रोग।

(xiii) सिरदर्द

(xiv) जबड़े में दर्द और अकड़न। यह स्थिति इसलिये बनती है क्योंकि तनाव में व्यक्ति अक्सर अपने दांत को पीसता है।

(xv)  तनाव के कारण बवासीर जैसी गंभीर और पीड़ादायक बीमारी होने की संभावना रहती है।

(xvi) कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप का बढ़ जाना।

(xvii) डायबिटीज होने की संभावना।

(xviii) मोटापा बढ़ जाना जो हृदय के लिये घातक होता है।

तनाव की जांच कैसे की जाती है? – How is Stress Tested?

1. संवाद द्वारा (By Dialogue)- डॉक्टर अपने सामने मरीज को बिठा कर मरीज के साथ वार्तालाप करते हैं यह वार्तालाप Diagnose करने का प्रथम सबसे महत्वपूर्ण तरीका होता है। मरीज शारीरिक तौर पर, मानसिक तौर पर और भावनात्मक तौर पर क्या महसूस करता है, यह जानकारी ली जाती है। मरीज से कुछ व्यक्तिगत प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मरीज के तनाव या किसी अन्य बीमारी की पिछली हिस्ट्री का पता चल सके, उसके माता पिता के बारे में, नौकरी/व्यवसाय में सफलता, असफलता, संतोष, असंतोष, पारिवारिक जीवन, वैवाहिक जीवन, सेक्स लाइफ, महिला के केस में गर्भपात, घरेलू हिंसा, घर और कार्यस्थल पर उत्पीड़न आदि के बारे में जानकारी ली जाती है।

2. शारीरिक परीक्षण (Physical Test)- तनाव का प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है। तनाव के शारीरिक लक्षणों की पुष्टी के लिये शारीरिक परीक्षण किया जाता है जैसे, वजन की जांच, रक्तचाप, पल्स रेट आदि।

3. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) – तनाव का प्रभाव हृदय पर कितना है, यह जानने के लिये मरीज की ECG की जाती है।

4. अन्य परीक्षण (Other tests)- कुछ विशेष हार्मोन्स् का लेवल जानने के लिये कुछ ब्लड टैस्ट और यूरिन टैस्ट करवाये जाते हैं।

5. जीवन परिवर्तन यूनिट्स (Life Change Units)- तनाव मापने के लिये  जीवन परिवर्तन यूनिट्स किसी व्यक्ति के पिछले साल के जीवन की घटनाओं में लागू होते हैं, को भी उसके जीवन में शामिल करके अंतिम स्कोर निकाला जाता है जो निम्न प्रकार है –

(i)  300+ का स्कोर: बीमारी का खतरा

(ii) 150-299+ का स्कोर: बीमारी का हल्का खतरा (उपरोक्त खतरे से 30% कम)

(iii) 150- स्कोर: बीमारी का काफी कम खतरा।

तनाव से छुटकारा पाने के उपाय – How to Relieve Stress

1. अपने को हाइड्रेट रखें (Keep Yourself Hydrated)- कहते हैं जल ही जीवन है क्योंकि मानव भोजन के बिना 15 दिन तक जीवित रह सकता है परन्तु पानी के बगैर नहीं।  यदि उसे पानी ना मिले तो 5वें दिन उसकी मृत्यु हो जायेगी।  पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी है। यदि मानव जाति की बात करें तो पुरूष में 65 प्रतिशत और महिला में 52 प्रतिशत पानी होता है। रक्त में भी 83 प्रतिशत पानी होता है तो दिमाग में 74।5 प्रतिशत। पानी हमारे शरीर का प्राकृतिक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस (98।6 डिग्री फारेनहाइट) बनाये रखता है। इसलिये डॉक्टर भी शरीर को हाइड्रेट रखने के लिये प्रतिदिन दो लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और मस्तिष्क सहित सभी अंगों में रक्त प्रवाह सही बना रहता है। शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकलते रहते हैं जिससे हम बीमार कम पड़ते हैं। इससे मन और मस्तिष्क दोनों शांत रहते हैं और तनाव की स्थिति की संभावना भी नहीं रहती।

2. पौष्टिक और आहार लें (Eat Nutritious Food)- दोस्तो, मानव के आचार, विचार और व्यावहार का आधार होता है आहार यानी भोजन। जैसा हमारा भोजन होगा उसी के अनुरूप हमारे विचार बनेंगे, हमारा आचरण और व्यावहार भी उसी के अनुरूप होगा यहां तक कि हमारी वाणी भी वैसे ही हो जायेगी। उदाहरण के तौर पर समझिये कि यदि कोई गायक कलाकार तला हुआ, ऑयली भोजन करेगा, या गोलगप्पे, आइसक्रीम खायेगा तो उसके गले का क्या होगा, क्या वह गा पायेगा। इसी प्रकार यदि कोई मांस, मदिरा का सेवन करके आया है क्या उसका मन उस समय भजन, कीर्तन में लगेगा। तात्पर्य यह है कि भोजन का हमारे शरीर और जीवन शैली पर प्रभाव पड़ता है। इसीलिये राजसी और तामसिक भोजन की तुलना में सात्विक भोजन को उत्तम माना गया है। हम यह नहीं कहते कि राजसी और तामसिक भोजन पौष्टिक नहीं होता या नहीं खाना चाहिये, जरूर खाइये परन्तु कभी-कभी ताकि इनका प्रभाव मन और मस्तिष्क पर ना  पड़े। आपका भोजन पौष्टिक तत्वों, खनिज, प्रोटीन और विटामिन्स् से भरपूर होना चाहिये ताकि शरीर के साथ-साथ आपका मस्तिष्क भी पूरी तरह स्वस्थ हो। आपका भोजन विटामिन-बी, सी और डी से युक्त होना चाहिये। ये विटामिन्स् तनाव से छुटकारा दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।  

3. पूरी नींद लें (Get Sleep)-  स्वस्थ तन, मन और मस्तिष्क के लिये नींद पूरी होना बहुत जरूरी है। काम के चक्कर में या किसी अन्य कारण से रात को देर तक जागना स्वास्थ पर बुरा असर डालता है, विशेषकर पाचन-तंत्र पर। आपका पाचन सही है तो आपका स्वास्थ भी सही है। याद रखिये जिस समय आप सो रहे होते हैं उस समय पाचन-तंत्र अपना काम कर रहा होता है। यह समय पाचन-तंत्र को अपना काम करने के लिये सर्वोत्तम समय होता है। इसलिये आप जल्दी सोइये और पाचन-तंत्र अपना काम करने के लिये समय दीजिये। आप कम से कम आठ घंटे की भरपूर नींद लीजिये। इससे तनाव को मौका ही नहीं मिलेगा कि वह आपको परेशान करे। दूसरी  बात यह कि दिन में बहुत थोड़े समय के लिये सो लीजिये जिसे झपकी लेना कहते हैं। यह कुछ समय की झपकी मस्तिष्क के दबाव को कम करेगी और आपके शरीर में फिर से एनर्जी भर जायेगी।

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4. सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Outlook)- तनाव को दूर करने के लिये अपनी सोच, अपना दृष्टिकोण सकारात्मक (Positive) रखिये, यह ब्रह्मास्त्र है।  बड़ी से बड़ी विपत्ति में, विषम परिस्थितियों में भी कुछ अच्छा देखने की कोशिश करें। निश्चित रूप आपका तनाव खत्म हो जायेगा। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरू श्री प्रेम रावत ने इसका सबसे अच्छा उदहारण कोरोना काल का दिया है। उन्होंने कहा कि “लोगों की जॉब्स चली गयीं, छोटे बड़े व्यापार प्रभावित हुऐ। ऐसे खराब माहौल में हम बुराई ही देख रहे हैं और बुराई को ही बड़ा बना लेते हैं। जो अच्छाई है उसे नहीं देख रहे हैं। अच्छाई यह है कि आपके अंदर स्वांस आ रहा है, जा रहा है। सबसे बड़ी बात है जो भी आप हैं, जहां भी आप हैं हिम्मत से और अपने अंदर की जो शक्ति है उससे सामना करें”। गुरू महाराज ने दूसरा उदहारण बच्चों का दिया कि “बच्चे पिछले आठ, नौ महिने से घर में कैद होकर रह गये हैं, वे ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं, मोबाइल पर अपना समय बिता रहे हैं, कहीं आना जाना नहीं। ये बच्चों की एनर्जी है।  ऐसे में माता पिता का फर्ज़ है कि उस एनर्जी को नीचे ना लायें। यह समय है घर में कुछ अच्छा करने की, घर में आनन्दपूर्ण वातावरण बनायें, घर में ही कुछ अच्छा करें और बच्चों को इसमें शामिल करें। गुरू महाराज फिर कहते हैं कि हमारे अंदर एक शक्ति है। जो बुरा है उसे देखने की जरूरत नहीं, उससे बचकर चलिये, आपका लक्ष्य रुकना नहीं चलना है। अपने अंदर की सच्ची शक्ति को पहचानिये जीवन का आनन्द लीजिये”।

5. व्यायाम करें (Exercise)- तनाव दूर करने का एक और अच्छा उपाय है व्यायाम।  प्रतिदिन नियमित रूप से कम से कम आधा घंटा व्यायाय करें। यह सारा दिन आपको चुस्त, दुरुस्त और फिट रखेगा, साथ ही तनाव से मुक्ति भी दिलायेगा। व्यायाम करने से शरीर का ऐड्रेनेलिन में कमी आयेगी और सहायक रसायन उत्पन्न होंगे जिससे आपको सकारात्मक ऊर्जा महसूस होगी। व्यायाम करने से मस्तिष्क की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है। यह शरीरिक और मानसिक स्वास्थ के लिए अच्छा होता है। आप सुबह की सैर भी कर सकते हैं कम से कम 45 मिनट के लिये। यह भी व्यायाम का एक उत्तम हिस्सा है। 

6. योग, ध्यान (Meditation) और प्राणायाम – योग, ध्यान और प्राणायाम भारतीय जीवन शैली की पहचान रही हैं, इनके लाभ और महत्ता को जानकर विश्व के बहुत देशों ने इनको अपनाया है। प्रातःकाल में ध्यान करने से मन और मस्तिष्क शांत रहते हैं, इससे आत्मिक बल मिलता है और सांयकाल में करने से सारे दिन की शारीरिक और मानसिक थकावट दूर होती है। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उज्जायी, भस्त्रिका आपको फायदा पहुंचायेंगे। योग में सूर्यनमस्कार, शीर्षासन, पद्मासन, वज्रासन, उत्तानासन, बालासन, मालासन, सर्वांगासन आदि तनाव से छुटकारा दिलायेंगे।

7. समस्याओं को रचनात्मक रूप में देखिये (Creative Problems)- कई बार ऐसी परिस्थितियां बनती हैं जिन पर आपका कोई नियन्त्रण नहीं होता आप कुछ नहीं कर सकते क्योंकि, वह परिस्थिति हो सकता है कि केवल आप को ही नहीं बल्कि सभी को प्रभावित कर रही हो। जैसे कि ट्रैफिक जाम, या रास्ते में बदलाव या कुछ और। ऐसी परिस्थिति को सहने के अलावा इसे एक और रूप में लें कि किसी को आपात कालीन सेवा देने के लिये या किसी खतरनाक स्थिति से निपटने के लिये यह सब करना पड़ा  हो। ऐसा सोचने पर कभी तनाव नहीं होगा, और जब आपको बाद में ऐसी ही वास्तविकता का पता चलता है तो आप खुद कहते हैं कि ट्रैफिक जाम सही था या रूट डायवर्जन होना ही चाहिये था।  

8. संगीत द्वारा तनाव दूर करें (Music Therapy) – कहते हैं प्रकृति का संगीत सबसे मधुर और मनमोहक होता है। प्रकृति की गोद में जाकर मनुष्य, थोड़े समय के लिये ही सही अपने सारे दुख दर्द भूल जाता है। जो लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं वे तो प्रकृति के संगीत का आनन्द लेते ही रहते हैं परन्तु मैदानी क्षेत्र के लोगों को तो प्लान करके जाना पड़ता है। डॉक्टर भी कई बार डिप्रेशन के शिकार लोगों को पहाड़ी क्षेत्र में जाने की सलाह देते हैं ताकि वहां का शुद्ध वातावरण और प्राकृतिक संगीत तनाव से राहत दे सके। दोस्तो, मानव निर्मित संगीत को प्राकृतिक संगीत का विकल्प के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है।  यही therapy आप अपने घर में भी अपना सकते हैं। किसी को पुराने फिल्मी गाने पसंद होते हैं तो किसी को नये, किसी को शास्त्रीय संगीत अच्छा लगता है तो किसी को लोक संगीत। कोई पॉप म्युजिक सुनना पसंद करता है और पश्चिमी संगीत। आप शाम को थके हारे कार्य स्थल से घर लौटते हैं, सारा दिन पता नहीं क्या-क्या झेलना पड़ता है, दिमाग भन्नाया हुआ होता है। ऐसे में आप अपनी पसंद का संगीत लगा दीजिये और आंखें बंद करके सुनिये, उस संगीत में आप खो जाइये। निश्चित रूप से आपकी सारे दिन की थकान उतरती चली जायेगी और सारा तनाव उड़नछू हो जायेगा। संगीत ना सुनना चाहें तो आप अपनी पसंद के वीडियो देख सकते हैं। 

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9. अपने को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त करें (Express with Confidence)- दोस्तो, आज का time, presentation का है। कौन किस तरह अपने आप को सही से व्यक्त कर पाता है कि सामने वाला उससे impress हो जाये। यह कला तो है ही, साथ में कुशलता और आत्मविश्वास भी है। यह बात प्राइवेट सैक्टर में बहुत मायने रखती है। सब उसी की बात से सहमत होते हैं जो अपने आप को सही रूप में व्यक्त करता है। यह बात केवल कार्य क्षेत्र में ही नहीं बल्कि घर परिवार में, पड़ोस में, रिश्तेदारी में और समाज में भी लागू होती है। आपने लोगों को कहते सुना होगा कि यार मेरी तो कोई बात सुनता ही नहीं, कोई बात मानता ही नहीं। और उसे इसी बात का तनाव हो जाता है। इसका मुख्य कारण होता है आत्मविश्वास की कमी अपनी भावनाओं को व्यक्त ना कर पाना। इसलिये यह जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें पूरे आत्मविश्वास के साथ, यह सोचकर कि जिसे मेरी बात से सहमत होना होगा, हो जायेगा, जिसे नहीं होना है वो बेशक ना हो। यकीन मानिये तनाव आपको छू भी नहीं पायेगा। 

10. “नहीं” कहना भी सीखें (Learn to Say “No” Too)- हर समय किसी की हां में हां मिलाना भी अच्छा नहीं होता, ना कहना भी बहुत जरूरी हो जाता है। चाहे वह आपका कार्य स्थल हो, व्यवसायिक जीवन या व्यक्तिगत जीवन। ना का भी अपना महत्व होता है, महिलाओं के लिये और भी अधिक महत्व होता है। यदि आप चाहते हैं कि आप तनाव में ना आयें और आपकी वजह से कोई और भी तनाव में ना आये तो यह “नहीं” के महत्व को समझना होगा। नहीं का मतलब नहीं (No means No)। इसका सम्मान करना सीखें। अपनी मर्यादा और क्षमता को जानते हुऐ काम की अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेने से मना करें। किसी से काम जबरदस्ती नहीं लिया जा सकता। और ना किसी से उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई “फेवर”। इसलिये “नहीं” कहना भी सीखिये, खुद को तनाव से दूर रखिये और दूसरों को भी तनाव से बचाइये।  

11. अनचाहे लोगों को अवॉइड करें (Avoid Unwanted People)- कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो आपके लिये तनाव का कारण बनते हैं ये कहीं भी हो सकते हैं, पड़ोस में, आपके कार्य स्थल पर या आते जाते रोजाना मिलते हैं, ये बहस करते हैं, आप पर गुस्सा करते हैं, आपको गुस्सा दिलाते हैं या इनके व्यावहार से आपको तनाव होता है तो इन लोगों को जहां तक हो सके अवॉइड करें। आप इनकी विचारधारा नहीं बदल सकते, ना इनका व्यावहार बदल सकते और ना ही इनको समझा सकते हैं। क्योंकि यह आपके नियन्त्रण से परे है। इसका बहुत ही सरल उपाय है कि आप ऐसे लोगों से ज्यादा घनिष्ट संबंध रखें जिन्हें देखकर आपका चेहरा खिल उठे और आत्मा प्रसन्न हो जाये। यकीन मानिये अनचाहे लोगों के साथ बिताये हुऐ वो तनाव के पल काफूर हो जायेंगे।

12. उम्मीद ना करें (Don’t Expect)- दोस्तो, श्रीमद् भागवत् गीता का सार है कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। तात्पर्य यह है कि आप अपना कर्तव्य कीजिये लेकिन दूसरे से उम्मीद मत करो कि वह भी अपना कर्तव्य करे। आप अपने परिवार के प्रति अपना कर्म कीजिये, लेकिन किसी से कोई उम्मीद मत कीजिये। आप पड़ोस में किसी की मदद करते हैं, रिश्तेदारों की मदद करते हैं कीजिये लेकिन यह मत सोचिये कभी समय आने पर वो आपकी मदद करेंगे। आप अपने बेटे, बेटी के उज्जवल भविष्य के लिये जो भी आप करते हैं, यह सोच कर कीजिये कि वे भविष्य में अपने परिवार के लिये मुझसे भी अच्छा करेंगे, अपने लिये उनसे अपेक्षा मत कीजिये। आप किसी की, किसी भी प्रकार की मदद करते हैं तो करके भूल जाइये, किसी को कर्ज देते हैं तो यह सोच कर दीजिये कि यह पैसा वापस नहीं आयेगा। तात्पर्य यह है कि नेकी कर, कूंऐ में डाल। इस फार्मूले को अपनाओगे तो बहुत सुखी रहोगे, कभी कोई तनाव नहीं होगा।

13. भविष्य की चिन्ता न करना (Don’t Worry About the Future)- आज के वर्तमान कल के भविष्य का आधार होता है। इसलिये भविष्य की चिन्ता करके तनाव ना लें और ना ही वर्तमान को खराब करें। बीते समय की घटनाओं से सबक सीख कर वर्तमान को निखारने में प्रयत्नशील रहें, भविष्य अपने आप संवर जायेगा। आप जो वर्तमान अपने बच्चों को दे रहे हैं वह उनके भविष्य को बनाने में सहायक होगा। बाकी बच्चों के कर्म उनका मार्ग दर्शन कर उनके भविष्य को उज्जवल बनायेंगे। इसलिये भविष्य की चिन्ता में घुलकर जानबूझ कर तनाव ना लें।

14. काम की वरीयता (Priority) और समय का  प्रबंधन (Time management) – अक्सर देखा गया है कि खूब काम करते हैं फिर भी काम खत्म नहीं होता बल्कि जरूरी काम और बढ़ जाता है। उस पर भी तुर्रा ये कि शाम को घर पहुंचने पर पता चलता है कि एक घर का काम करना था, उसका तो याद ही नहीं रहा। फिर शुरू होता है पार्टनर के साथ वाद-विवाद और जन्म लेता है तनाव। तो, दोस्तो, एक बात याद रखिये कि काम कभी खत्म नहीं होता, उसको समय के साथ मैनेज करना पड़ता है। बेहतर होगा कि आप अपने कामों को वरीयता दें, जो सबसे ज्यादा जरूरी है पहले उसे करें। कुछ काम ऐसे होते हैं जिनकी तुरन्त जरूरत नहीं होती, उनको कुछ दिनों बाद भी किया जा सकता है। इसी प्रकार घर के कामों को सबसे पहली प्राथमिकता देकर पूरा करें। जब आप काम की वरीयता तैयार कर लेते हैं तब उसे समझना भी आसान है जाता है और यह भी समझ पाते हैं कि कौन सा काम किस समय करना है। इस प्रकार समय भी अपने आप मैनेज होने लगता है, बस काम की वरीयता के आधार पर थोड़ा सा प्रयास और कीजिये समय को मैनेज करने में। कुछ दिनों बाद आप रिलैक्स फील करेंगे। तनाव आपको छू भी नहीं पायेगा।

15. अपने लिये भी जीयें (live for yourself)- दोस्तो, एक हिन्दी फिल्म का गाना याद आ गया “अपने लिये जीये तो क्या जीये, तू जी अय दिल जमाने के लिये”। लेकिन जमाने के लिये तो आप तभी जियोगे ना जब आप पूरी तरह स्वस्थ होंगे। जब आप खुद ही तनाव में जी रहे हो तो जमाने के लिये जी कर क्या फायदा पहुंचा दोगे। इसलिये आप अपने लिये भी जीना सीखिये, अपने आप से प्यार कीजिये। अपने लिये समय निकालिये, जहां आप जाना चाहते हैं जाइये। अकेले जाना चाहते हैं, अकेले जाइये। दोस्तों के साथ बैठिये उनके साथ समय बिताइये, मौज मस्ती कीजिये। महीने में कम से कम दो बार परिवार के साथ बाहर जाकर खाना खाइये और कुछ महीनों के अंतराल पर कहीं दूर घूमने जाइये। कहने का तात्पर्य है कि अपने लिये भी समय निकाल कर जीना सीखिये। तनाव आपसे बहुत दूर रहेगा।

देसी हैल्थ क्लब की सलाह – Desi Health Club Advice

1. एक्सपर्ट्स की सलाह लें (Get Advice from Experts)- दोस्तो, जीवन के किसी मोड़ पर यदि आपको महसूस हो कि तनाव बहुत बढ़ गया है तो आप तुरन्त किसी मनोवैज्ञानिक चिकित्सक या अन्य मानसिक स्वास्थ विशेषज्ञ साइकोलोजिस्ट (Psychologist) से संपर्क करें। ये तनाव प्रबंधन या बायोफीडबैक तकनीक में प्रशिक्षित होते हैं। 

2. इनके सेवन से बचें –

(i) फास्ट फूड, तला, भुना, तीखा तेज मिर्च मसाले वाला  भोजन, बेक किये हुए खाद्य पदार्थ, डब्बा बंद, भोजन, अत्यधिक नमक और चीनी, फालतू की दवाईयां। कई लोगों को आदत हो जाती है मामूली सी बीमारी में दवाईयां लेने की, कभी डॉक्टर से लिखवाकर तो कभी अपनी मर्जी से केमिस्ट से खरीदकर। 

(ii) कैफीन, शराब, ड्रग्स, तंबाकू, खैनी, गुटका आदि। ये सब आपको बहुत थोड़े समय के लिये राहत पहुंचा सकते हैं लेकिन धीरे-धीरे इनका आदि होने पर ये बहुत ही हानिकारक सिद्ध होते हैं और अनेक बीमारियों का कारण भी बनते हैं। कैफीन और निकोटीन किसी व्यक्ति को उत्तेजित करके उसके तनाव के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको तनाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। तनाव क्या होता है, कितने प्रकार का होता है, इसके क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं, तनाव से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं और तनाव की जांच कैसे की जाती है, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से तनाव से छुटकारा पाने के उपाय भी बताये और सलाह भी दी। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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तनाव से छुटकारा पाने के उपाय - How to Relieve Stress in Hindi
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तनाव से छुटकारा पाने के उपाय - How to Relieve Stress in Hindi
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको तनाव से छुटकारा पाने के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। तनाव क्या होता है, कितने प्रकार का होता है, इसके क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं, तनाव से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं और तनाव की जांच कैसे की जाती है, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
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