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बथुआ खाने के फायदे –  Benefits of Eating Bathua in Hindi

बथुआ खाने के फायदे

दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, सर्दी के मौसम में खाने पीने की बहार होती है। सर्दियों में वनस्पति जगत हमें खाने के लिये कुछ ऐसे पदार्थ देता है जो हमें अंदर से सर्दी से बचाते हैं और स्वास्थ के लिये अत्यंत लाभकारी होते हैं। इन्हीं में से एक ऐसा विशेष पदार्थ है जो खेतों में अपने आप उगता है और खरपतवार की श्रेणी में आता है। खरपतवार जिसे व्यर्थ की वस्तु माना जाता है परन्तु इस विशेष खरपतवार को व्यर्थ की वस्तु ना मानकर मनुष्य ने अपने भोजन में शामिल किया और इसके गुणों को देखते हुऐ मान सम्मान दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं बथुआ की जिसका साग बनाकर बड़े चाव से खाया जाता है, परांठों का तो कहना ही क्या। मन करता है कि बस खाये ही जाओ, परन्तु ज्यादा खा लिये तो फायदे के बजाय नुकसान भी हो जाता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “बथुआ खाने के फायदे और नुकसान “। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको बथुआ के बारे में विस्तृत जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसके खाने के क्या फायदे हैं और क्या नुकसान। तो, सबसे पहले जानते हैं कि करेला क्या होता है, इसकी खेती कहां की जाती है और इसके क्या गुण हैं। इसके बाद फिर बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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बथुआ खाने के फायदे
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बथुआ क्या होता है? – What is Bathua?

दोस्तो, बथुआ एक खरपतवार है जो सर्दियों में खेतों में गेंहू या अन्य फसल के साथ अपने आप उगता है। इसको बोना नहीं पड़ता। हां जो किसान इसे बाजार में बेचने के मतलब से बोते हैं वे भी बहुत कम मात्रा में बोते हैं। इसे उगाने में किसी किसी विशेष परिश्रम और देखभाल की ज्यादा जरूरत नहीं होती। इसका पौधा लगभग डेढ़ फुट का हो जाता है। इसके पत्ते मेथी के पत्तों के समान दीखते हैं। इसमें आयरन की भरपूर मात्रा होती है। पोषक तत्वों से भरपूर बथुआ पाचन क्रिया को बढ़ाता है।  

बथुआ की खेती कहां होती है? – Where is Bathua cultivated?

1. बथुआ की खेती एशिया महाद्वीप, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की जाती है।

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2. भारत में लगभग सभी जगह इसकी खेती की जाती है। उत्तरी भारत में तो यह बहुतायत में मिलता है। 

बथुआ के गुण – Properties of Bathua

1. बथुआ का स्वाद थोड़ा नमकीन होता है, पालक की तरह।

2. बथुआ की तासीर गर्म होती है। 

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3. अन्य सागों की तुलना में बथुआ में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। 

4. एक कप बथुआ से तीन दिन का विटामिन-ए, ग्यारह दिन का विटामिन-के और सारे दिन की जरूरत का विटामिन-सी प्राप्त हो जाता है।

5. बथुआ के पोषक तत्व (मात्रा 100 ग्राम बथुआ के पत्ते) :-

पानी                                84 ग्रा.

प्रोटीन                              4.3 ग्रा.

एनर्जी                              44 किलो कैलोरी

कार्बोहाइड्रेट                         7 ग्रा.

आयरन                                4 ग्रा.

फाइबर                                2.1 ग्रा.

फास्फोरस                         81 मि.ग्रा.

कैल्शियम                         280 मि.ग्रा.

फैट                                     0.8 ग्रा.

राइबोफ्लेविन                        0.4 मि.ग्रा.

विटामिन-ए                          11 मि.ग्रा.

नियासिन                               3 मि.ग्रा.

विटामिन-सी                         90 मि.ग्रा.

थायमिन                              0.15 मि.ग्रा. 

बथुआ के उपयोग – Uses of Bathua

1. बथुआ का साग बनाकर खाते हैं।

2. अन्य सब्जी के साथ मिलाकर खाया जा सकता है।

3. बथुआ के पूड़ी और परांठे बना सकते हैं।

4. बथुआ की भुजिया बना सकते हैं।

5. बथुआ को दही में मिलाकर रायता बनाया जा सकता है।

6. बथुआ को धुली मूंग, अरहर, उड़द व अन्य दाल के साथ मिलाकर खा सकते हैं। 

बथुआ खाने के फायदे – Benefits of Eating Bathua

दोस्तो, अब बताते हैं आपको बथुआ खाने के फायदे निम्नलिखित हैं –

1. पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें (Keep Digestive System Healthy)- बथुआ खाने से आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और मजबूत बनता है। इस में  फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है जो कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है। इसके अतिरिक्त पेट फूलना, भूख में कमी आना, खाना देर से पचना, खट्टी डकार आना आदि समस्याओं से भी राहत मिलती है। इसके लिये नियमित रूप से प्रतिदिन कुछ हफ्तों तक बथुआ का सेवन किसी भी रूप में करें, आपको फायदा होगा।

2. गैस्ट्रिक और अम्‍लता दूर करे (Relieve Gastric and Acidity)- जैसा कि हमने ऊपर बताया कि बथुआ में मौजूद फाइबर के कारण कब्ज व अन्य समस्याऐं दूर होती हैं और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और मजबूत बनता है, बथुआ के पत्तों में गैस्ट्रिक और अम्‍लता (Gastric and Acidity) को खत्म करने की क्षमता होती है। बथुआ में एंटी-अम्‍लता (Anti-acidity) कंपाउंड होते हैं जो अम्‍लता से राहत दिलाने में मदद करते हैं और खराब पाचन प्रक्रिया को ठीक कर, पेट दर्द से भी छुटकारा दिलाते हैं। 

3. रक्‍त को साफ करें (Clean the Blood)- कुछ अध्‍ययन यह बताते हैं कि बथुआ प्राकृतिक रक्‍त शोधक (Blood purifier) के रूप में कार्य करता है। यह रक्त को साफ़ करता है और शरीर को अच्छे से डिटॉक्‍सीफाई (Detoxify) करके विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके लिये बथुआ का रस निकाल कर 4-5 नीम की पत्तियों के रस में मिलाकर पीयें अथवा बथुआ की सब्जी बनाकर  खायें या अन्य किसी रूप में इसका सेवन करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक रहता है। 

4. खून की कमी पूरी करे (Make up for Blood Loss)- दोस्तो, शरीर में खून की कमी को एनीमिया कहा जाता है जिसका सीधा संबंध आयरन से है। शरीर में आयरन की कमी का अर्थ है खून की कमी हो जाना। शरीर के कुल वजन का 0.004 प्रतिशत हिस्सा आयरन होता है और इसकी कुल मात्रा शरीर के वजन के अनुसार 3 से 5 ग्राम होती है। बथुआ में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, 100 ग्राम बथुआ के पत्तों में 4 ग्राम आयरन। इसलिये सर्दियों के मौसम में प्रतिदिन बथुआ का सेवन किसी ना किसी रूप में जरूर करें। इससे रोजाना की जरूरत का आयरन आपके शरीर को मिलता रहेगा। एनीमिया पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “एनीमिया को दूर करने के घरेलू उपायपढ़ें। 

5. मूत्र पथ के संक्रमण में फायदा (Benefit in Urinary Tract Infection)- कई बार मूत्र पथ में संक्रमण (Urinary Tract Infection – UTI) हो जाने पर मूत्र संबंधी समस्याऐं जैसे मूत्र विसर्जन में दिक्कत होना, पैदा हो जाती हैं। ऐसे में बथुआ आपकी मदद करता है। रोजाना 10 ग्राम बथुआ के पत्तों के रस में 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। आराम लग जायेगा। किडनी फेल्योर की स्थिति में भी सामान्य रूप से मूत्र प्रवाह में कमी आती है और रक्त आपूर्ति में भी। बथुआ उचित मूत्र प्रवाह और रक्त आपूर्ति को बनाये रखने में मदद करता है। किडनी पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “किडनी को स्वस्थ रखने के घरेलू उपाय पढ़ें। 

6. गुर्दे की पथरी में फायदेमंद (Beneficial in Kidney Stones)- गुर्दे में पथरी (Kidney Stone) हो जाने पर बथुआ के सेवन से बहुत फायदा होता है। इसके लिये प्रतिदिन बथुआ के रस में शक्कर मिलाकर पीयें। इससे गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे टूट जायेगी और मूत्र के जरिये बाहर निकल जायेगी। बथुआ के सेवन से अमाशय भी स्वस्थ और मजबूत रहता है।

7. पीलिया में फायदेमंद (Beneficial in Jaundice)- दोस्तो, बथुआ के सेवन से लिवर भी स्वस्थ रहता है। यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। लिवर संक्रमण से होने वाले रोगों में बथुआ रामबाण उपाय है, विशेषकर पीलिया रोग में। पीलिया के इलाज के लिये यह अचूक उपाय है। बथुआ और गिलोय का रस सीमित मात्रा में मिलाकर  25-30 ग्राम प्रतिदिन दो बार पीयें। पीलिया पर विस्तृत जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “पीलिया से छुटकारा पाने के देसी उपाय पढ़ें।

8. मुंह और दांतों के स्वास्थ्य के लिये (For Mouth and Teeth Health)- दोस्तो, मुंह से आने वाली बदबू का सीधा संबंध दांतों की समस्या से भी है। मुंह की बदबू से आप खुद तो परेशान रहते ही हैं दूसरे भी परेशान होते हैं और शर्मिदगीं भी महसूस होती है। इस वजह से लोग आपको अवॉइड करने लगते हैं। बथुआ एक माउथ फ्रैशनर के रूप में काम करके इस समस्या को दूर करता है। बथुआ में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस होता है जिससे दांतों को मजबूती मिलती है और मसूड़े भी स्वस्थ रहते हैं। रोजाना बथुआ की कुछ पत्तियां चबायें। इससे दांतों की सड़न, मसूड़ों से खून आना, पायरिया आदि और मुंह की बदबू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।

9. स्‍तन कैंसर से बचाव करें (Prevent Breast Cancer)- महिलाओं में ब्रेस्‍ट कैंसर की समस्या बढ़ती ही जा रही है। आवश्यकता है इसके बारे में जागरूक होने की ताकि इससे बचाव हो सके क्योंकि ब्रेस्‍ट कैंसर होने पर इसकी सर्जरी ही करनी पड़ती है। इस मामले में बथुआ मदद करता है। बथुआ के पत्तों में एंटीकार्सिनोजेनिक (Anticarcinogenic) गुण मौजूद होते हैं जो ब्रेस्‍ट कैंसर को विकसित करने वाले  इसलिए बथुआ का सेवन करने से यह उन हार्मोन हार्मोन को रोकते हैं। बचाव के तौर पर बथुआ के पत्तों और डंठलों का रस निकालकर 10-15 मि.ली. रोजाना पीयें। ब्रेस्‍ट कैंसर पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव के उपाय पढ़ें।

10. त्‍वचा के लिये फायदेमंद (Beneficial for the Skin)- त्वचा विकार या बीमारियों में त्वचा के फायदे देखे जा सकते हैं। यह त्वचा की जलन और खुजली में फायदा पहुंचाता है।  बथुआ के उबले हुऐ पानी से त्वचा को धोने से और बथुआ के पत्तों का रस निकालकर तिल का तेल में मिलाकर गर्म करके त्वचा पर लगायें। इससे त्वचा की जलन में आराम लगेगा। सफेद दाग, कुष्ट, दाद, खुजली जैसे त्वचा रोगों में रोजाना बथुआ की सब्जी खायें, उबालकर इसका रस पीयें। फोड़े, फुंसी, सूजन होने पर, बथुआ पीसकर सौंठ और नमक मिलाकर गीले कपड़े में बांधकर कपड़े पर गीली मिट्टी लगाकर आग में सेकें और सहन करने लायक   गर्म-गर्म बांधें। मोटा फोड़ा बैठ जायेगा या पककर शीघ्र फूट जायेगा और ठीक हो जायेगा।

11. बालों के लिये फायदेमंद (Beneficial For Hair)- बथुआ में विटामिन-ए और डी तथा आयरन, फास्फोरस व अन्य खनिज पदार्थ भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। बथुआ के सेवन से बालों में नेचुरलिटी बनी रहती है। इसके फायदे आँवला से अधिक होते हैं। बथुआ की सब्जी खाने से प्राकृतिक रूप से काले होते हैं, घने और लंबे होते हैं। बथुआ के उबले हुऐ पानी से सिर धोने पर बालों में चमक आ जाती है। 

12. खूनी बवासीर में फायदा (Benefit in Bleeding Piles)- बथुआ के पत्तों  का रस निकाल कर बकरी के दूध के साथ पीने से खूनी बवासीर ठीक हो जाता है। 

13. अनियमित मासिक धर्म में फायदा (Irregular Menstruation Benefits)- महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म की समस्या आम बात है। जिससे महिलाओं को बहुत परेशानी होती है। इस समस्या में बथुआ के बीज बहुत फायदा करते हैं। अनियमित मासिक धर्म की समस्या से राहत पाने के लिये बथुआ के बीज और सोंठ का पाउडर बनाकर 400 मि.ली. पानी में 15-20 ग्राम पाउडर मिलाकर तब तक उबालें जब तक वह 100 ग्राम रह जाये। इसे छानकर दिन में दो बार पीयें। निश्चित रूप से मासिक धर्म चक्र नियमित हो जायेगा। अनियमित पीरियड के बारे में विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “पीरियड समय पर लाने के घरेलू उपाय पढ़ें।

14. यौन स्‍वास्‍थ्‍य में फायदेमंद (Beneficial in Sexual Health)- बथुआ की तासीर गर्म होती है। यह एक अच्छे कामोत्तेजक के रूप में काम करता है। यह काम क्रीडा को लंबे समय तक बढ़ाने में मदद करता है और कामोत्तेजना स्तर को बढ़ाकर काम शक्ति की क्षमता में सुधार करता है। 

बथुआ खाने के नुकसान – Side Effects of Eating Bathua

दोस्तो, बथुआ की तासीर गर्म होने के कारण इसका उचित मात्रा में सेवन करना चाहिये। अधिक मात्रा में खाने पर हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. बथुआ में ऑक्सिजेलिक एसिड (oxygelic acid) अधिक होने के कारण डायरिया की समस्या हो सकती है। कब्ज और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। 

2. गर्भवती महिलाओं को बथुआ का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे गर्भपात की संभावना रहती है।

3. बथुआ का अधिक सेवन करने से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है क्योंकि इसमें प्रजनन विरोधी गुण होता है। 

4. बथुआ में ऑक्सिजेलिक एसिड की अधिक मात्रा होने के कारण शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम हो सकती है।

5. जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है उनको बथुआ के अधिक सेवन से बचना चाहिये। उनको एलर्जी हो सकती है। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बथुआ खाने के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बथुआ क्या होता है?, बथुआ की खेती कहां होती है?, बथुआ के गुण और बथुआ के उपयोग इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से बथुआ खाने के फायदे बताये और कुछ नुकसान भी। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बथुआ खाने के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बथुआ क्या होता है?, बथुआ की खेती कहां होती है?, बथुआ के गुण और बथुआ के उपयोग इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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