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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। आप लोगों ने बहुत सुना होगा कि अक्सर लोग कहते रहते हैं कि कोई भी काम करो, अच्छे से मन लगा कर करो, मन लगा कर पढ़ाई करो, मन लगा कर खेलो, सुनो सब की करो अपने मन की, मेरा तो किसी काम में मन ही नहीं लगता और ना जाने क्या-क्या। अपने परिवार में, स्कूल, कॉलेज, कार्यालय स्थल, समाज में, धार्मिक स्थल पर मन का ही बोल-बाला रहता है। हमारे आदर्णीय प्रधानमंत्री महोदय, श्री नरेन्द्र मोदी जी भी, जनता से मुखातिब होने के लिये रेडियो के माध्यम से मन की बात करते हैं। आखिर ये मन है क्या?, क्या काम करता है और कितने इसके रूप हैं? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “चेतन और अवचेतन मन क्या है?”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको मन के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि मन के कितने रूप होते हैं और इनमें क्या अंतर होता है। तो सबसे पहले जानते हैं कि मन क्या है?

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चेतन और अवचेतन मन क्या है?
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मन क्या है? – What is Mind?

दोस्तो, मन कोई शरीर का बाह्य या आंतरिक हिस्सा नहीं है। यह कोई कर्मेन्द्रिय या ज्ञानेन्द्रिय ना होकर भी परोक्ष-अपरोक्ष रूप में कर्म करता है और ज्ञान भी देता है। वास्तव में मन वह अदृश्य शक्ति है या यह भी कह सकते हैं कि मन, मस्तिष्क की वह क्षमता है जो मानव को, सोचने-समझने, चिंतन-मनन, एकाग्रता, ज्ञान को ग्रहण करने में आचार-व्यवहार, अंतर्दृष्टि, स्मरण-शक्ति, निर्णय-शक्ति, के लिये सक्षम बनाता है। मन एक अथाह सागर है जिसमें अच्छे और बुरे विचारों का, संकल्प और विकल्पों का ज्वार-भाटा रहता है। मनुष्य अपनी बुद्धि और ज्ञान के द्वारा बुरे विचारों को सागर की लहरों के समान बाहर फैंक देता है और अच्छाईयों को ग्रहण कर लेता है। इसी को मनुष्य की सक्षमता कहते हैं जो मिलती है मन के द्वारा। मनुष्य संसार को धोखा दे सकता है पर अपने आप को नहीं क्योंकि उसका मन रूपी दर्पण उसके अच्छे बुरे कर्मों को, पाप, पुण्य को दिखाता है। मन के लिये, प्रसिद्ध कवि साहिर लुधियानवी ने बॉलीवुड फिल्म “काजल” में क्या खूब लिखा है “तोरा मन दर्पण कहलाये, भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाये”।  जब मनुष्य को अपने किये किसी कर्म पर पछतावा होता है तो उसकी आत्मा उसे कचोटती है, वह पश्चाताप की अग्नि में जलता है, फिर उसे शांति चाहिये, मुक्ति चाहिये और रहती है भगवान से मिलन की आस। इसी लिये कहते हैं मन का सीधा संबंध आत्मा से है जिसकी चरम सीमा, परमात्मा के दर्शन होती है।

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मन के रूप – As the Mind

दोस्तो, विद्वानों ने मन को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा है परन्तु मन का एक भाग बाद में जोड़ा गया। इस तरह मन के निम्नलिखित तीन भाग बने –

1. चेतन मन (Conscious mind)

2. अवचेतन (अर्धचेतन) मन (Subconscious mind)

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3. अचेतन मन (Unconscious mind)

चेतन और अवचेतन मन क्या है? – What is Conscious and Subconscious Mind

दोस्तो, चेतन और अवचेतन मन के अंतर को जानने के लिये मोटे तौर पर, यानी सरल भाषा में हम कह सकते हैं कि चेतन मन जागृत अवस्था में रहता है। हमारे दैनिक जीवन के सभी काम इसी के कारण होते हैं। हमारा मस्तिष्क सचेत रहता है। अवचेतन मन अर्ध चेतना में रहता है ना पूरी तरह सोया हुआ और ना जागा हुआ। यह अपने अंदर संग्रहित मानव से संबंधित सामग्री का उपयोग करके अपरोक्ष रूप से काम करता है। इसके अतिरिक्त, एक और मन का रूप है अचेतन मन। यह मन पूरी तरह सुप्त रहता है। इस मन में होने वाली प्रक्रियाएं जागरूकता के धरातल के नीचे होती हैं यानी यह अचेतन मन, चेतन और अवचेतन पर पूरी तरह हावी हो जाता है। इसका प्रभाव अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों ही प्रकार का हो सकता है। विस्तार से इन तीनों में अंतर जानने के लिये के तीनों के में बारे में अलग-अलग से जानना होगा कि ये क्या हैं? देसी हैल्थ क्लब इनके बारे में आपको विस्तार से जानकारी दे रहा है जो निम्न प्रकार है –

चेतन मन क्या है? – What is Conscious Mind?

1. चेतन मन (Conscious Mind)- इसे सचेतन या जागृत या व्यक्त मन भी कहा जाता है। इसमें स्वयं अपने बारे में, क्रिया कलापों के बारे में और वातावरण के बारे में ज्ञान रहता है। इसी के द्वारा ही हम सोचते-समझते हैं, बोलते हैं, लिखते-पढ़ते हैं, खाते पीते हैं, दैनिक जीवन के सभी काम करते हैं, अपने रोजगार के काम करते हैं। हमारी आंखें खुली रहती हैं और मस्तिष्क सचेत रहता है। लेकिन यदि आप जागते हुऐ भी सोये-सोये से हैं, आपके मन में कोई उधेड़बुन चल रही है, या आप अपनी कल्पना के समंदर में ही हैं, या चिंताग्रस्त या भयभीत हैं तो समझिये आपका मन पूरी तरह सचेत नहीं हैं। ऐसी अवस्था को अर्धचेतन मन की स्थिति कहा जायेगा। चेतन मन ज्ञान और विवेक का उपयोग करता है, वह तर्क वितर्क करता है और निर्णय लेता है। दोस्तो, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चेतन मन केवल 10 प्रतिशत ही होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे समंदर में तैरता हुआ हिमखण्ड जिसका मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा ही दिखाई देता है। दोस्तो, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि दुनियांदारी इसी 10 प्रतिशत मन के कारण चलती है। अब प्रश्न यह उठता है कि मन या हिमखण्ड के बाकी 90 प्रतिशत भाग का क्या हुआ?। इसका जिक्र हम आगे करेंगे। 

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अवचेतन मन क्या है? – What is the Subconscious Mind?

2. अवचेतन (अर्धचेतन) मन (Subconscious Mind)- विज्ञान के अनुसार जागृत मस्तिष्क के परे मस्तिष्क का जो हिस्सा है वह अवचेतन मन होता है, जिसकी जानकारी हमें नहीं होती। यह समन्दर के अंदर तैरने वाला हिमखण्ड का 90 प्रतिशत भाग के समान है जो दिखाई नहीं देता।  यह चेतन और अचेतन मन के बीच का हिस्सा है जो ना तो पूरी तरह जागृत अवस्था में होता है और ना ही पूरी तरह सुप्त अवस्था में। यह हमारी भावनाओं, इच्छाओं, दबी हुई अतृप्त और अपूर्ण इच्छाओं, यादों, मूल प्रवृति (आदतों), अनसुलझे प्रश्नों, विचारों को संग्रहित करता है जिसके आधार पर काम करता है। इसे इस तरह समझिये कि मानव का यह डाटा (Data) अवचेतन मन रूपी कंप्यूटर में अपने आप फीड (Feed) होता रहता है। कभी-कभी यह चेतन मन के साथ सामंजस्य स्थापित कर चेतन मन के काम कर में मदद करता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण ड्राईविंग का है, ड्राईविंग करते समय आपकी नज़रें सामने रहती हैं, हाथ स्टेररिंग पर। आप ना अपने हाथों की ओर देखते हो ना पैरों की ओर ये अपना काम अपने आप कर रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि कब गियर बदलना है, ब्रेक लगाना है आदि, यह अवचेतन मन उनसे काम करवा रहा है और चेतन मन आपके ध्यान से, नज़रों से ड्राईविंग करवा रहा है। 

दूसरा उदहारण – आपको जो भी मैटीरियल दे रखा है टाइप करने के लिये, उसे देख कर, आप बिना की-बोर्ड और स्क्रीन देखे टाइप करते चले जा रहे हो, कैसे? क्योंकि आपकी उंग्लियों को पता है कि कौन सा अक्षर कहां है, उसी के अनुसार उंग्लियों को आदत हो गई है। यहां अवचेतन मन आपकी आदत के अनुसार काम कर रहा है। सपने में भयभीत होना, हिंसा के दृश्य देखना बड़बड़ाना, चीखना-चिल्लाना, ये सब अवचेतन मन हमारे विचारों और सोच को प्रतिबिंबित करता है। सपने में यौनाचार करना, परिणामस्वरूप स्वपनदोष हो जाना, अवचेतन मन दबी हुई इच्छाओं को व्यक्त कर अपना काम करता है। अवचेतन मन जब किसी चीज को स्वीकार कर लेता है तो उसे वह वास्तविकता मान कर उसी के अनुसार परिणाम देता है ठीक उसी प्रकार जैसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग (Computer programming) करते समय जो डाटा फीड (Data feed) किया जायेगा, कंप्यूटर उसी को सही मानकर परिणाम देगा। निष्कर्षतः अवचेतन मन अपने भंडार गृह में मौजूद मानव से संबंधित सामग्री का उपयोग करते हुऐ अपरोक्ष रूप से यानी समझ लीजिये कि पर्दे के पीछे रहकर काम करता है और यह अत्यंत शक्तिशाली होता है जिसका जिक्र हम आगे करेंगे।

अचेतन मन क्या है? – What is Unconscious Mind?

3. अचेतन मन ( Unconscious Mind)- इसे बेसुध दिमाग, या बेहोश शब्द के साथ जोड़ा जाता है। इसे पूर्ण रूप से सोया हुआ मन भी कहा जा सकता है। इसमें प्रक्रियाऐं अपने आप घठित होती हैं। इसमें विचार प्रक्रिया, संस्मरण, यादें, रुचियां, आत्मनिरीक्षण और प्रेरणाएं आदि सम्मलित हैं। यद्यपि इस मन में होने वाली प्रक्रियाएं जागरूकता के धरातल पर नहीं होतीं, उससे नीचे होती हैं लेकिन उनको, व्यवहार पर प्रभाव डालने के लिए सिद्धांतित किया जाता है। जैसे कि आपने किसी को सड़क पर अपने आप ही बोलते सुना होगा, गाली भी देते सुना होगा, उसकी यह अवस्था उसके अचेतन मन के कारण ही है, उसे अपने बारे में बोध नहीं है। लोग उसे विक्षिपत (पागल) समझने लगते हैं। उसका चेतन मन केवल क्रियाऐं करवा रहा है, लेकिन वह क्या क्रियाऐं कर रहा है उसे पता ही नहीं, केवल अचेतन मन को पता है। यह अवस्था उसके जागरूकता (चेतन अवस्था) के धरातल के नीचे की है। ठीक इसी प्रकार शराबी पर जब हद से ज्यादा नशा चढ़ जाता है तो या तो वो कहीं सड़क पर पड़ा होता है या नाली में या गली में सबको गाली दे रहा होता है। ऐसी अवस्था में उसके चेतन और अवचेतन मन पर पूरी तरह से अचेतन मन का कब्जा हो जाता है। जब उसका नशा टूटता है तब उसकी चेतना जागृत होती है। 

दोस्तो, ये बेहोशी शब्द 18वीं शताब्दी के जर्मन रोमांटिक दार्शनिक फ्रेडरिक शेलिंग द्वारा गढ़ा गया था। बाद में दार्शनिकों, मनोवैज्ञानिकों, विद्वानों के मत, मतभेद, विवाद इस विषय के साथ जुड़ते चले गये। हिंदू ग्रंथों में मानसिकता के अचेतनता का उल्लेख 2,500 और 600 ईसा पूर्व के बीच मिलता है। जिसमें चेतनता से परे हिन्दु देवी देवताओं के विचार, प्रेरणा उनके उद्देश्यों की पूर्ति के लिये की गईं प्रक्रियाओं पर अचेतनता का प्रभाव देखा जा सकता है। उदहारण के लिये देवी को प्रसन्न करने के लिये कई भक्तों को “खेलते” देखा होगा या किसी औझा को स्वयं “खेलते” देखा होगा।  यह सब पहले गांवों में बहुत होता था। आज भी अचेतन मन के प्रभाव स्वरूप या यह कह लीजिये कि भूत-प्रेत की छाया वाले लोग, कई प्रसिद्ध मंदिरों में “खेलते” मिल जायेंगे और उनका इसी पद्धति द्वारा उपचार किया जाता है। अचेतन मन का प्रभाव अल्पकालीन भी हो सकता है और दीर्घ कालीन भी। अल्पकालीन प्रभाव वाले लोगों में चोट के कारण बेहोश हुऐ, या शराबी, या ऑपरेशन वाले लोग हो सकते हैं और दीर्घकालीन प्रभाव में उन लोगों को शामिल किया जा सकता है जो विक्षिप्त (पागलपन) अवस्था में हैं और वे लोग जो कोमा की स्थिति में हैं या जिनकी स्मरणशक्ति चली गई है। दोस्तो, यहां देसी हैल्थ क्लब स्पष्ट करना चाहेगा कि अचेतन मन के प्रभाव में रहकर भी मनुष्य अपना कौशल नहीं भूलता। यदि वह एक योद्धा है तो वह लड़ना नहीं भूलता, हथियार चलाना नहीं भूलता या जो भी उसका व्यवसाय है उसे नहीं भूलता। 

अवचेतन मन की शक्तियां – Powers of Subconscious Mind

दोस्तो, अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली होता है। यह पूरी तरह जागृत ना होकर भी चेतन मन की अपेक्षा अधिक काम करने की क्षमता होती है। इसका सबसे बड़ा काम ग्रहण करने का है मनुष्य से सम्बंधित हर बात को ग्रहण कर लेता है। इसकी प्रमुख शक्तियां निम्न प्रकार हैं –

1. इसमें संग्रहित करने की क्षमता होती है। यादों से लेकर विचारों, तर्क-वितर्क, सुझाव, आदतों आदि को अपने अंदर समेट कर सुरक्षित रखता है। 

2. इसका संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है। सूक्ष्म शरीर से संबंध स्थापित करके यह अवचेतन मन मनुष्य को कहीं दूर स्थान पर ले जा सकता है या किसी देश की यात्रा करा सकता है।

3. यह मन हमें आने वाले खतरे के बारे में संकेत देता है और उनसे बचने के उपायों के बारे में भी संकेत करता है। इस प्रकार यह मन हमारी रक्षा भी करता रहता है 

4. भविष्य में होने वाली किसी बीमारी के बारे में भी लगभग छः महीने पहले ही संकेत देता है और बीमारी की अवस्था में हमारे स्वास्थ के सुधार में मदद करता है।

5. अवचेतन मन दूसरे की सोच, उसकी नीयत, उसके विचारों और भावों को उसी के रूप के अनुसार समझने में मदद करता है। इसे टेलीपैथी कहा जाता है। यह मन मौन भाषा को समझने का सशक्त माध्यम है। तभी तो आप किसी के कहने से पहले ही समझ जाते हैं कि वह क्या कहना चाहता है।  

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6. इसके माध्यम से दूसरे की सोच और विचारों को बदला जा सकता है और उसके तन, मन और मस्तिष्क की बीमारी को दूर कर उसे स्वस्थ किया जा सकता है। मनोवैज्ञानिक, काउंसलिंग करके मरीज के अवचेतन मन को जागृत कर उसे सशक्त बनाने में मदद करते हैं। 

7. अवचेतन मन के द्वारा आप किसी अदृश्य आत्मा से संबंध स्थापित कर सकते हैं।  

8. कोई ऐसी वस्तु जो आपके सामने नहीं है, उसे या किसी दूर के स्थान, दृश्यों आदि को देखा जा सकता है। 

9. इस मन को सशक्त करने से, भविष्य में घटना, दुर्घटना, बीमारी आदि का पहले ही आभास हो जाता है।

10. अवचेतन मन के सशक्त होने पर आपके मन और मस्तिष्क की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव बढ़ जाता है। मन का भय समाप्त हो जाता है और संकल्प पूरा करने और अपना उद्देश्य (Target) हासिल में मदद करता है। लेकिन इसके लिये अवचेतन मन को सशक्त बनाना पड़ता है।

अवचेतन मन को शक्तिशाली बनाने के उपाय – Remedies to make the Subconscious Mind Powerful

दोस्तो, अब आपको बताते हैं अवचेतन मन को  शक्तिशाली बनाने के कुछ उपाय जिनके द्वारा आप अवचेतन मन को प्रशिक्षित करके शक्तिशाली बना सकते हैं। इससे जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने की संभावना 100 प्रतिशत तक बढ़ जायेगी।

1. अवचेतन मन के अस्तित्व और शक्ति को स्वीकार करना (Acknowledging the Power of the Subconscious Mind)- दोस्तो, यहां सबसे बड़ी बात आती है आपके विश्वास की। आपको यह विश्वास होना अति आवश्यक है कि अवचेतन मन नाम की भी कोई चीज होती है। इसको मानना, इसके अस्तित्व को स्वीकार करना, कि हां अवचेतन मन भी होता है और इसकी शक्ति को स्वीकार करना, इस पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है तभी आप इसे मजबूत बनाने के बारे में सोच सकते हैं। आपका यह विश्वास अवचेतन मन का आधार स्तम्भ है। ठीक उसी प्रकार जैसे कि इस्लाम के पांच आधार स्तम्भ होते हैं तौहीद, नमाज, रोजा, जकात (खैरात बांटना, दान देना – वार्षिक आय का वह चालीसवाँ भाग जिसे दान करना इस्लाम में ज़रूरी माना जाता है। साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोले चांदी या फिर इनके बराबर रकम हो और उसे पूरा एक साल हो चुका हो तो उस शख्स के लिये जकात फर्ज बन जाती है) और हज। तौहीद का मतलब है अल्लाह को मानना और उसके वजूद यानी अस्तित्व को स्वीकार करना। तभी उसे नमाज़ अता करने का हक मिलता है। बाकी के सिद्धान्त बाद में लागू होते हैं। इसलिये सबसे पहले अवचेतन मन के अस्तित्व को स्वीकार कीजिये, इसकी शक्ति को पहचानिये तभी आप इसे और ज्यादा शक्तिशाली बना सकते हैं। 

2. नकारात्मकता (Negativity)- नकारात्मकता का अर्थ है अपने ऊपर नकारात्मक सोच और विचारों का लबादा ओढ़ लेना। कोई भी समस्या आती है कोई भी काम आता है तो पहले से पहले ही सोच कर बैठ जाना कि ये हम से ना हो पायेगा। या अब क्या करें, आगे क्या होगा। मैं कुछ नहीं कर सकता। अवचेतन मन इसी विचारधारा को सत्य मानकर अपने अंदर समाहित कर लेगा और भविष्य में इसी के आधार पर आपकी शक्ति को कमजोर कर देगा। और आप कर सकने के काबिल होते हुऐ भी अवचेतन मन आपको करने नहीं देगा। कहते हैं ना कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। और यह भी कि, मन जीते, जग जीते।

2. विचार और व्यवहार सकारात्मक रखिये (Keep thoughts and Behavior Positive)- कोई भी छोटी, बड़ी समस्या आती है या कोई ऐसा काम आपको दिया जाता है जो आपको मुश्किल लग रहा है तो आप अपनी सोच सकारात्मक बनाये रखिये कि ये कौन सी बड़ी बात है या भला ये भी कोई काम हुआ, मैं हूं ना सब ठीक हो जायेगा और समस्या निपटाने/काम पूरा करने के लिये सकारात्मक प्रयास करते रहिये। तो अवचेतन मन आपकी इसी सकारात्मकता को ग्रहण कर लेगा और खुद भी  मजबूत होगा और आपको भी एनर्जी देगा। यदि  दिन में कई लोग आपको देखकर कहते हैं कि आज आप बहुत कमजोर लग रहे हो (यह अपरोक्ष रूप से आपके मन को निर्देश दिया जा रहा है) और आप तुरन्त ही अत्यंत आत्मविश्वास के साथ उनको कहते हो कि नहीं में बिल्कुल ठीक हूं तो यकीन मानिये कि आपके इसी आत्मविश्वास वाले व्यावहार और सकारात्मक सोच को अवचेतन मन ग्रहण कर और शक्तिशाली हो जायेगा।  

3. अवचेतन मन को मित्रतापूर्ण व्यवहार से प्रशिक्षित कीजिये (Train the Subconscious Mind with Friendly Behavior)- दोस्तो, यह काम थोड़ा कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं। अवचेतन मन आपकी आदतों से, आचार विचार, व्यवहार और सोच से प्रशिक्षित होता है। इससे मित्रतापूर्ण व्यवहार कीजिये। मान लीजिये आपको सुबह जल्दी उठना होता है परन्तु आलस्य के कारण आप नहीं उठ पाते या आप जानबूझ कर बिस्तर से उठने को इग्नोर कर देते हैं तो आपका अवचेतन मन आपका साथ नहीं देगा। आप यह सोचिये कि देखता हूं सुबह कैसे जल्दी नहीं उठता और आप अलार्म लगा कर सो जाते हैं। सुबह जब अलार्म बजे तो आपके दिमाग में यह बात होनी चाहिये कि आपको तुरन्त उठना है आपको अवचेतन मन को मित्र मानकर को-ऑपरेट करना है तो निश्चित रूप से आप उठ जायेंगे। कुछ दिनों के बाद आपको अलार्म लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। 

अवचेतन मन इसे आपकी आदत मानकर स्वीकार कर लेगा और रोजाना जल्दी उठने में मदद करेगा क्योंकि वह मजबूत हो रहा है। किसानों को खेत पर जाने के लिये जल्दी उठना पड़ता है और जब खेतों में पानी लगाना है तो और भी जल्दी उठना पड़ता है, परन्तु उन्हें कभी अलार्म लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि वे अपनी आदत से, अपने व्यवहार से अवचेतन मन को प्रशिक्षित कर चुके होते हैं। इसी प्रकार यदि आपको कहीं निर्देशित समय पर पहुंचना होता है, तो आप घर से चलने और गंतव्य स्थान तक पहुंचने में लगने वाले समय के साथ ट्रैफिक जाम का समय की गणना करके घर से और 15 मिनट पहले चलिये। यह आपकी आदत अवचेतन मन के स्टोर रूम में फीड हो जायेगी और आप कभी लेट नहीं होंगे। क्योंकि आपकी इस आदत से आपका मन प्रशिक्षित हो चुका है जो आपको समय पर काम करने के लिये प्रेरित करता है।

4.ध्यान, प्राणायाम और योग (Meditation, Pranayama and Yoga)- दोस्तो, ध्यान, प्राणायाम, योगा और व्यायाम से आप शारीरिक और मानसिक रूप से तो स्वस्थ रहते ही हैं, इनका प्रभाव आपके चेतन और अवचेतन मन पर भी पड़ता है। सुबह ध्यान लगाने से मन मस्तिष्क शांत रहता है और शाम को इसके द्वारा पूरे दिन की थकान मिट जाती है और आप रिफ्रैश महसूस करते हैं, सूर्य नमस्कार से आपका ओज बढ़ता है, तेज बढ़ता है अवचेतना जागृत होती है। नित्य प्रतिदिन के ये कर्म आपके व्यावहार और आदत में शामिल हो जाते हैं जिनको अवचेतन मन ग्रहण कर मजबूत बनता है और समय-समय पर आपकी मदद करता है।

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5. सम्मोहन क्रिया (Hypnotism)- दोस्तो, सम्मोहन विद्या कोई जादू-टोना या तंत्र-मंत्र नहीं, बल्कि विज्ञान है।  सम्मोहन क्रिया द्वारा भी अवचेतन मन की शक्ति बढ़ती है। सम्मोहन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चेतन मन को निद्रा में लाकर अवचेतन मन को सामने लाया जाता है। साधारण नींद में चेतन मन अपने आप सो जाता है और सम्मोहन नींद में  सम्मोहन कराने वाला चेतन मन को सुलाकर अवचेतन मन को जागृत कर ऐसे-ऐसे असाधारण काम करवाता है जो चेतन मन के चलते संभव नहीं होते और जिनके बारे में कल्पना भी नहीं कर सकते।  इसके माध्यम से या ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने मन की एकाग्रता से, वाणी का प्रभाव से, दृष्टि तथा हाथ के इशारे मात्र से अपने संकल्प को पूरा करने में सक्षम हो जाता है।  देसी हैल्थ क्लब यहां स्प्ष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति अपने आपको सम्मोहित नहीं कर सकता। इसके लिये एक प्रशिक्षित सम्मोहनकर्ता की आवश्यकता पड़ती है। इसका एक सिद्धान्त यह भी है कि यदि आप सम्मोहित नहीं होना चाहते तो कोई भी सम्मोहनकर्ता आपको सम्मोहित नहीं कर सकता। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको चेतन और अवचेतन मन क्या है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मन क्या है, मन के कितने रूप होते हैं, चेतन मन और अवचेतन मन में क्या अंतर होता है, चेतन मन क्या है, अवचेतन मन क्या है और अचेतन मन क्या होता है, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बताया और अवचेतन मन को शक्तिशाली बनाने के उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

Summary
चेतन और अवचेतन मन क्या है?- What is Conscious and Subconscious Mind in Hindi
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चेतन और अवचेतन मन क्या है?- What is Conscious and Subconscious Mind in Hindi
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको चेतन और अवचेतन मन क्या है? के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मन क्या है, मन के कितने रूप होते हैं, चेतन मन और अवचेतन मन में क्या अंतर होता है, चेतन मन क्या है, अवचेतन मन क्या है और अचेतन मन क्या होता है, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
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2 Comments

Shiv Kumar Kardam · August 4, 2021 at 4:17 am

Philosophical Article

  • Advertisements
  • Suraj Sharma · August 4, 2021 at 5:04 am

    it’s a very amazing post on the conscious and subconscious mind

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