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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। सप्लीमेंट्स की दुनियां में आपने बहुत नाम सुने होंगे जैसे व्हे प्रोटीन, अन्य प्रोटीन पाउडर, ग्लूटामाइन, फिश-ऑयल आदि। इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ता है क्रिएटिन का जो एनर्जी बूस्टर के रूप में,आजकल युवाओं में बहुत लोकप्रिय होता जा रहा है। हम सभी जानते हैं कि हर काम में एनर्जी लगती है, भारी भरकम काम में तो बहुत ही ज्यादा एनर्जी खर्च होती है जैसे वजन उठाना, भागना-दौड़ना, एक्सरसाइज करना आदि। प्रोफेशनल एथलीट्स और बॉडी-बिल्डर्स या जिम जाकर जी तोड़ एक्सरसाइज करने वालों को तो बहुत ही ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है। इसके लिये उनको क्रिएटिन लेना पड़ता है ताकि खर्च हुई एनर्जी शरीर को फिर से मिल सके। आखिर यह क्रिएटिन है क्या और क्या इसके फायदे होते हैं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “क्रिएटिन खाने के फायदे”।

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको क्रिएटिन के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसके सेवन से क्या फायदे होते हैं। तो सबसे पहले जानते हैं कि क्रिएटिन क्या है और यह क्यों जरूरी है। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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क्रिएटिन खाने के फायदे
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क्रिएटिन क्या है? –  What is Creatine?

दोस्तो, क्रिएटिन एक ऐसा पदार्थ है जो प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर के मसल्स सेल (Muscles cell) मौजूद होता है। इसका काम हमारी मसल्स में अतिरिक्त ऊर्जा  प्रदान करना होता है जिससे हम भारी वजन उठा पाने में समर्थ होते हैं और इसी क्रिएटिन के कारण भारी भरकम उच्च सघनता वाले व्यायाम कर पाते हैं। शरीर इसे क्रिएटिन फॉस्फेट (Creatine phosphate) के रूप में ग्रहण करता है। यह क्रिएटिन फॉस्फेट, एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine triphosphate – ATP) का निर्माण करता है जो मांसपेशी संकुचन के लिए शरीर को एनर्जी देता है।

यह प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में अधिक पाया जाता है जैसे कि मांस या मछली। क्रत्रिम क्रिएटिन, ग्लाइसिन (Glycine), आर्जिनिन (Arginine) और मेथियोनीन (Methionine) इन तीन एमिनो एसिड्स (amino acids) का मिश्रण है और इन तीनों ही केमिकल्स को लैब में बनाया जाता है। अतः यह ना तो स्टेरॉयड होता है और ना ही प्राकृतिक। क्रिएटिन, पाउडर, टैबलेट, एनर्जी बार और ड्रिंक्स के रूप में आता है जो बाजार में या ऑनलाईन उपलब्ध होता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार क्रिएटिन को सुरक्षित माना गया है।

क्रिएटिन क्यों जरूरी है? – Why is Creatine Important

प्राकृतिक रूप से शरीर में मौजूद सामान्य क्रिएटिन से, वेटलिफ्टर्स (weight-lifters) धावकों, पहलवानों, तैराक, जिम में जाकर भारी-भरकम एक्सरसाइज करने वाले, बॉडी-बिल्डर्स का काम नहीं चलता। इनको अतिरिक्त और अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है जोकि भोजन से आवश्यक मात्रा में नहीं मिल पाती। इसलिये इनको सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं जैसे व्हे प्रोटीन, स्टेरॉयड, बीसीएए, ग्लूटामाइन, फिश-ऑयल आदि। 

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क्रिएटिन इन सबसे अलग ऊर्जा प्रदान करने वाला पदार्थ है जो ना केवल वर्क-आउट क्षमता को बढ़ाते हैं बल्कि वर्क-आउट की अवधि को भी बढ़ाता है। रनर्स अपनी स्पीड बढ़ा लेते हैं और वेटलिफ्टर्स भार उठाने के कौशल में सुधार करते हैं। बॉडी-बिल्डर्स अपने मसल्स में और सुधार करते हैं। इनके अतिरिक्त सामान्य व्यक्ति को भी अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है क्योंकि दैनिक दिनचर्या में उसकी शारीरिक शक्ति खत्म होती रहती है। कई बार सामान्य व्यक्तियों को भी बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करना पड़ जाता है। क्रिएटिन खोई हुई ऊर्जा की भरपाई करता है। 

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क्रिएटिन के प्रकार – Types of Creatine 

फिटनेस की दुनियां में क्रिएटिन दो ही प्रकार का उपयोग में लाया जाता है परन्तु यह कई प्रकार का होता है। विवरण निम्नलिखित है –

1. क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट (Creatine Monohydrate) – क्रिएटिन के इस फॉर्म पर सबसे ज्यादा शोध किये गये हैं। इससे पता चलता है कि एक्सरसाइज करते हुए शरीर की बेहतरीन परफॉर्मेंस में सुधार को नोटिस किया जा चुका है। मोलिक्यूल और पानी मोलिक्यूल से बने इस मोनोहाइड्रेट फॉर्म में क्रिएटिन के कुल वजन का 90% क्रिएटिन है। 

2. क्रिएटिन एथिल एस्टर (Creatine Ethyl Ester)- कुछ क्रिएटिन निर्माता यह दावा करते हैँ कि यह मोनोहाइड्रेट सहित अन्य  सप्लीमेंट की तुलना में बेहतर है, बेहतर अवशोषित हो जाता है और मसल्स बढ़ाने में भी ये अधिक प्रभावी है।

3. बफर क्रिएटिन (Buffered Creatine) – कुछ क्रिएटिन निर्माताओं ने अल्कलाइन पाउडर (Alkaline powder) को मिलाकर क्रिएटिन का नया फॉर्म तैयार किया है जो पेट में क्रिएटिन की स्थिरता में सुधार कर सके। इसीलिये इसे बफर क्रिएटिन के नाम से जाना जाता है। यह सूजन और ऐंठन आदि को कम करता है। 

4. क्रिएटिन हाइड्रोक्लोराइड (Creatine Hydrochloride) – यह क्रिएटिन निर्माताओं और उपभोक्ताओं के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ है। यह मोनोहाइड्रेट फॉर्म की तुलना में 38 गुणा ज्यादा घुलनशील होता है। इसी बेहतर घुलनशीलता की वजह से इसकी बहुत कम मात्रा से अधिक ऊर्जा मिल जाती है।  हालांकि कुछ लोगों में इससे पेट खराब होने जैसे साइड इफैक्ट्स हो सकते हैं। 

5. क्रिएटिन मैग्नीशियम चेलेट (Creatine Magnesium Chelate) – यह क्रिएटिन का वह फॉर्म है जिसमें मैग्नीशियम के गुण मौजूद होते हैं अर्थात् मैग्नीशियम, क्रिएटिन मॉलिक्यूल (Molecule) से जुड़ा होता है। 

6. लिक्विड क्रिएटिन (Liquid Creatine) – क्रिएटिन का यह सबसे अलग रूप है क्योंकि यह लिक्विड फॉर्म में आता है और इसे पीया जाता है। इसे रेडी-टू- ड्रिंक भी कहते हैं और यह उतना ही अन्य क्रिएटिन के समान ही प्रभावशाली होता है। 

क्रिएटिन की कार्य प्रणाली – Mechanism of Action of Creatine

क्रिएटिन शरीर में रक्त के माध्यम से मांसपेशियों तक पहुंच कर फॉस्फेट (Phosphate) बनाता है। व्यायाम करते समय ऊर्जा की जरूरत पड़ती है जोकि एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Triphosphate – ATP) से मिलती है। एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट तीन फॉस्फेट से बना होता है, ऊर्जा प्रदान करते समय एक फॉस्फेट खर्च हो जाता है। बाकी बचे हुए दो फॉस्फेट, एडेनिन डि-फॉस्फेट (Adenine Di-Phosphate – ADP) में परिवर्तित हो जाते हैं।

परन्तु यह ADP तब तक ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं हो सकता जब तक कि इसे एक और फॉस्फेट यानी ATP न मिल जाये। ऐसी स्थिति में क्रिएटिन की सक्रिय भूमिका आमने आती है। शरीर में पहले से मौजूद क्रिएटिन फॉस्फेट अपना फॉस्फेट, ADP को देता है जिससे ADP फिर से ATP में बदल कर शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है और फिर से ADP में परिवर्तित हो जाता है। इस अतिरिक्त ऊर्जा के कारण ही हम हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट कर पाने अधिक भार उठाने में सक्षम हो पाते हैं और वर्कआउट करने की समयावधि भी बढ़ जाती है। 

क्रिएटिन और प्रोटीन में अंतर – Difference Between Creatine and Protein

दोस्तो, क्रिएटिन और प्रोटीन एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, इनकी कार्य प्रणाली, इनके प्रभाव, इनके परिणाम एक दूसरे से भिन्न हैं। दोनों में निम्नलिखित अंतर स्पष्ट देखा जा सकता है –

1. क्रिएटिन, व्यायाम करते समय हमारे शरीर को ज्यादा से ज्यादा एनर्जी देता है जिससे हम कठिन से कठिन एक्सरसाइज भी करने में सक्षम होते हैं और अधिक समय तक कर पाते हैं। अधिक भार भी उठा पाते हैं। 

2. क्रिएटिन को बच्चे तो ले सकते हैं मगर गर्भवती महिलाऐं नहीं क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु के लिये हानिकारक हो सकता है। 

3. प्रोटीन, व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों को ठीक करता है और साइज बढ़ाने में मदद करता है।  

4. प्रोटीन चोट, कटने, फटने, जलने आदि के कारण शरीर के तन्तुओं और कोशिकाओं की जो क्षति होती है प्रोटीन इनकी मरम्मत करता है और नई कोशिकाओं का निर्माण करता है। 

5. प्रोटीन की बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु के वृद्धि और विकास के लिये, सभी को जरूरत होती है।

6. शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स और फैट से ऊर्जा ना मिल पाने की स्थिति में प्रोटीन के द्वारा ही ऊर्जा मिलती है।  

शरीर में क्रिएटिन का भण्डारण – Creatine Storage in the Body

दोस्तो, हमने ऊपर बताया है कि क्रिएटिन एक पदार्थ है जो हमारे शरीर में मांसपेशी सेल (Muscle cell) में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह शरीर में कितना है, यह कई तथ्यों पर निर्भर करता है जैसे कि आप कैसा भोजन करते हैं, भोजन में क्या खाते हैं, व्यायाम करते हैं या नहीं, व्यायाम करते हैं तो कितना और किस प्रकार का, शरीर का टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) और इन्सुलिन-लाइक ग्रोथ फैक्टर-1 (IGF-1) स्तर कितना है आदि-आदि। वैसे क्रिएटिन का शरीर में 90 प्रतिशत मसल्स फोस्फोक्रिएटिन के तौर पर पर और 5 प्रतिशत किडनी, मस्तिष्क और लिवर में भण्डारण होता है। 

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क्रिएटिन किन को नहीं खाना चाहिए? – Who Should not Eat Creatine?

निम्नलिखित व्यक्तियों को क्रिएटिन के सेवन से बचना चाहिये – 

1. किडनी और लिवर की बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि इसके सेवन से किडनी और लिवर और की समस्या और बढ़ सकती है।

2. गर्भवती महिलाओं को क्रिएटिन का सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

3. शिशु को स्तनपान कराने वाली माताओं को भी क्रिएटिन के सेवन को अवॉइड करना चाहिये। यदि लेना ही है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सेवन करें। 

क्रिएटिन खाने का सही समय – Right Time to Eat Creatine

दोस्तो, क्रिएटिन कब खाना चाहिये वर्क-आउट करने से पहले या बाद में, इस विषय पर एक मत नहीं है। कोई वर्क-आउट करने से पहले क्रिएटिन के सेवन को उचित मानता है तो कोई वर्क-आउट के बाद। इस बारे में चर्चाऐं तो बहुत हुईं परन्तु रिसर्च कम। अतः कोई एक ठोस राय नहीं बन पाई। इस लिये आप स्वयं निर्धारित करें का आप पर निर्भर है कि आप वर्क-आउट से पहले लेना चाहते हैं या बाद में, जैसा भी आपको सूट करे और साथ ही लेने का एक समय भी निश्चित करें कि इस समय क्रिएटिन लेना है।

क्रिएटिन कितनी मात्रा में खाना चाहिये? – How Much Creatine Should be Consumed?

दोस्तो, कई लोग क्रिएटिन की शुरुआत लोडिंग फेस से करते हैं ताकि कि इसका बहुत जल्दी प्रभाव हो। परन्तु कुछ लोग लोडिंग फेस के बिना ही इसका सेवन करना चाहते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में क्रिएटिन कितनी मात्रा में खाना चाहिये, इसका विवरण निम्न प्रकार है –

1. लोडिंग फेस से शुरुआत करने के लिये, 5 से 7 दिन तक प्रतिदिन 20 ग्राम क्रिएटिन, पांच बार में बराबर की मात्रा में सेवन करना चाहिये यानी कि 20 ग्राम क्रिएटिन एक बार में नहीं खाना बल्कि पांच बार में खाना है। एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि पानी बहुत ज्यादा मात्रा में पीना है। लोडिंग फेस के दौरान में कब्ज या पेट खराब होने की समस्या भी हो सकती है। 

2. लोडिंग फेस के खत्म हो जाने पर रोजाना 3 से 5 ग्राम क्रिएटिन का सेवन करें ताकि शरीर में क्रिएटिन का लेवल बना रहे और इसका फायदा मिलता रहे। 

3. जो लोग लोडिंग फेस नहीं चलाना चाहते वे 7 से 10 दिन तक प्रतिदिन, दो बार, पांच-पांच ग्राम की मात्रा में क्रिएटिन ले सकते हैं। परिणाम दस दिन बाद नज़र आने लगेगा, इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही क्रिएटिन का सेवन करें। 

4. यद्यपि, बच्चों के लिए 2-6 ग्राम क्रिएटिन प्रतिदिन लेना सुरक्षित माना गया है फिर भी इस बारे में डॉक्टर की सलाह अति आवश्यक है।

क्रिएटिन खाने के फायदे – Benefits of Eating Creatine

दोस्तो, क्रिएटिन खाने से निम्नलिखित फायदे देखे जा सकते हैं –

1. मांसपेशियों में द्रव्यमान बढ़ाये (Increase Muscle Mass)- मांसपेशियों में द्रव्यमान बढ़ाने के लिये क्रिएटिन विश्व का सबसे प्रभावशाली पदार्थ है। क्रिएटिन मांसपेशियों में पानी की मात्रा में बढ़ाता है जिससे मांसपेशियों के आकार और वज़न में तेजी से बढ़ोत्तरी होती है। द्रव्यमान की प्रक्रिया को सेल वॉल्यूमाइज़ेशन (Cell volumization) के नाम से जाना जाता है। क्रिएटिन से  प्रोटीन के गठन को बढ़ावा मिलता है जोकि नई मांसपेशियों की वृद्धि के लिए जरूरी है। यह, द्रव्यमान को बढ़ावा देने वाले कारक GF-1 के स्तर में भी सुधार करता है जो नई मांसपेशी तन्तु का निर्माण होता है। 

2. मांसपेशियों में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाये (Increase Energy Production in Muscles)- क्रिएटिन के सेवन से मांसपेशियों में फ़ॉस्फोक्रिएटिन (phosphocreatine) का स्तर और भण्डारण (storage) बढ़ाता है। फ़ॉस्फोक्रिएटिन, एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) का निर्माण करता है। एक्सरसाइज या कोई अन्य काम करते समय यह ATP टूट कर ऊर्जा पैदा करता है, फिर संश्लेषित होता है। ATP संश्लेषित होने की दर को क्रिएटिन नियंत्रित करता है, ताकि मांसपेशियों में लगातार ऊर्जा बनी रहे। 

3. स्ट्रेंथ और एक्सरसाइज परफॉर्मेंस में सुधार करे (Improve Strength and Exercise Performance)- एक्सरसाइज करते समय, शरीर में मौजूद क्रिएटिन, ATP का निर्माण लगातार करता रहता है जिससे मांसपेशियों में ऊर्जा निरन्तर बनी रहती है, इसलिये परफॉर्मेंस पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। क्रिएटिन के सेवन से स्ट्रेंथ बढ़ती है और हाई-इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज में काफी सुधार होता है।

एक रिव्यू के मुताबिक 8% की स्ट्रेंथ में बढ़ोत्तरी, वेट लिफ्टर्स का 14% सुधार और बेंच प्रेसर्स के 43% अधिक परिणाम देखने को मिले।  एक और शोध के अनुसार सामान्य से 15% तक अधिक और बेहतर एक्सरसाइज प्रदर्शन नोटिस किया गया। क्रिएटिन से दौड़ने की क्षमता में भी सुधार होता है, मांसपेशी सहनशक्ति में बढ़ोत्तरी और थकावट में कमी होती है।

4. वजन बढ़ाये (Gain Weight)- यहां हम स्पष्ट कर दें कि वज़न बढ़ाने से तात्पर्य मोटापा बढ़ाने से नहीं है अपितु शरीर का फैट कम करके शरीर को ठोस बनाना है। शरीर के कुल वजन में, शरीर की चर्बी यानी फैट और दुबली मांसपेशियों (lean muscle mass) का योगदान होता है। क्रिएटिन, कैलोरी, फैट और कार्बोहाइड्रेट में कमी करता है। यह fat composition को बढ़ने नहीं देता। ऐसे में मांसपेशियों का वजन फैट की तुलना में अधिक रहता है। परिणाम स्वरूप क्रिएटिन के सेवन से फैट का वजन कम करके, आपको lean muscle mass का वज़न प्राप्त होता है, जिससे आपका शरीर मजबूत और ठोस बनता है। 

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5. थकावट दूर करे (Relieve Tiredness)- भागने, दौड़ने, साइकिलिंग, तैराकी, एक्सरसाइज और भारी भरकम काम करने आदि के बाद थकावट होना स्वाभाविक है। रात को नींद पूरी ना होने के कारण भी शरीर में थकावट रहती है। क्रिएटिन के सेवन से थकावट दूर होती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है जिससे इन सब गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। साइकिलिंग के दौरान एथलीट्स को ज्यादा थकावट होती है।

6. पार्किंसंस रोग में फायदा (Benefit in Parkinson’s Disease)- डोपामाइन एक न्यूरोमॉड्यूलेटरी अणु है जिसकी कोशिकाओं में अनेक प्रकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डोपामाइन मस्तिष्क में, एक न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में, न्यूरॉन्स के बीच एक केमिकल मैसेंजर तौर पर काम करता है। पार्किंसंस रोग, डोपामाइन के स्तर में होने वाली बहुत ज्यादा कमी के कारण होता है। 

इसका मुख्य लक्षण मूल निग्रा में डोपामिन-स्रावित कोशिकाओं की क्षति के कारण होता है। डोपामिन कोशिकाएं क्षति के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होती हैं। कोशिकाओं की क्षति पार्किन्सोनियन सिंड्रोम को जन्म देती है जो पार्किंसंस रोग की मुख्य विशेषता है। इस रोग में मृत्यु भी हो जाती है। क्रिएटिन डोपामाइन के स्तर को गिरने से रोकने में मदद करता है और पार्किंसंस की संभावना को खत्म करता है। 

7. तंत्रिका संबंधी रोग में फायदा (Benefit in Neurological Diseases)- क्रिएटिन के सेवन से अल्जाइमर, इस्कीमिक स्ट्रोक, मिर्गी, मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी की चोटों में भी फायदा देखा गया है। तंत्रिका संबंधी रोग (Neurological Disease) फ़ॉस्फोक्रिएटिन के स्तर में कमी की वजह से होती हैं जिनको क्रिएटिन के सेवन से रोका जा सकता है। फ़ॉस्फोक्रिएटिन के स्तरों में बढ़ोत्तरी से कोशिकाओं की क्षति या नष्ट होने की समयावधि को लगभग 25% तक कम किया जा सकता है। 

8. मस्तिष्क के लिये फायदेमंद (Beneficial to the Brain)- मस्तिष्क को जटिल कार्य करने के लिये अधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है जिसे ATP पूरा करता है और इस काम में क्रिएटिन मदद करता है। क्रिएटिन, मस्तिष्क में फ़ॉस्फोक्रिएटिन के स्तर को बढ़ाता है ताकि अधिक मात्रा में ATP का निर्माण हो सके। क्रिएटिन, डोपामाइन के स्तर में बढ़ोत्तरी करके और माइटोकॉन्ड्रिया की कार्य क्षमता में सुधार करके मस्तिष्क की कार्य प्रणाली में मदद करता है। 

9. डायबिटीज में फायदेमंद (Beneficial in Diabetes)- क्रिएटिन, कम ब्लड शुगर के उपचार में लाभकारी होता है। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और उपचार में मददगार साबित होता है। क्रिएटिन, परिवाहक अणु (GLUT4) की कार्य क्षमता में बढ़ोत्तरी करता है और मांसपेशियों में रक्त ब्लड शुगर को लाता है। 

10. फेफड़ों की बीमारी में लाभकारी (Beneficial in Lung Disease)- क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग (COPD) से ग्रस्त लोगों के लिये क्रिएटिन, अत्यंत लाभकारी है। क्रिएटिन का सेवन, फेफड़ों के कार्यों में और व्यायाम क्षमता में सुधार करता है। 

क्रिएटिन के नुकसान – Side Effects of Creatine

दोस्तो, पिछले चार, पांच वर्षों से रिसर्च में अभी तक कोई साइड इफेक्ट निकल कर नहीं आया है। हां यदि कोई इसका दुरुपयोग करेगा, यानी अधिक मात्रा में खायेगा तो निम्नलिखित दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं – 

1. पेट में दर्द, ऐंठन, दस्त लगना।

2. जी मिचलाना, उल्टी होना।

3. क्रिएटिन का सेवन करने पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना अति आवश्यक है अन्यथा मांसपेशियों में ऐंठन, अकड़न की समस्या हो सकती है।

4. पर्याप्त मात्रा में पानी ना पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है विशेषकर गर्मियों में। इसलिये यदि क्रिएटिन का सेवन कर रहे हैं तो गर्मियों में एक्सरसाइज करना अवॉइड करें।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको क्रिएटिन खाने के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। क्रिएटिन क्या है, क्रिएटिन क्यों जरूरी है, क्रिएटिन के प्रकार, क्रिएटिन की कार्य प्रणाली, क्रिएटिन और प्रोटीन में अंतर, शरीर में क्रिएटिन का भण्डारण, क्रिएटिन किन को नहीं खाना चाहिये, क्रिएटिन खाने का सही समय और क्रिएटिन कितनी मात्रा में खाना चाहिये, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से क्रिएटिन खाने के बहुत सारे फायदे बताये और कुछ नुकसान भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको क्रिएटिन खाने के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। क्रिएटिन क्या है, क्रिएटिन क्यों जरूरी है, क्रिएटिन के प्रकार, क्रिएटिन की कार्य प्रणाली, क्रिएटिन और प्रोटीन में अंतर, शरीर में क्रिएटिन का भण्डारण, क्रिएटिन किन को नहीं खाना चाहिये, क्रिएटिन खाने का सही समय और क्रिएटिन कितनी मात्रा में खाना चाहिये, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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