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शुगर कंट्रोल करने के घरेलू उपाय – How to Control Sugar Level in Hindi

डायबिटीज के घरेलू उपाय

दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हमारा आज का टॉपिक एक ऐसी समस्या है जिसका कुप्रभाव आंखों पर, किडनी और नसों पर पड़ता है। जिसके कुप्रभाव के कारण अधिक प्यास लगती है, बार बार पेशाब आता है, थकावट रहती है और कभी त्वचा कट, फट जाये या चोट लग जाये तो घाव जल्दी नहीं भरता। और समस्या अधिक बढ़ जाये तो हृदयाघात भी हो सकता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मधुमेह यानि डायबिटीज (Diabetes) की। यही है हमारा आज का टॉपिक।  देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आपको शुगर कंट्रोल करने के घरेलू उपाय के विषय में विस्तृत जानकारी को संक्षेप में देगा। डायबिटीज को समझने से पहले इंसुलिन को समझना होगा कि यह क्या है और इसका काम क्या होता है? 

इंसुलिन क्या होता है? – What is Insulin?

इंसुलिन एक हार्मोन है जिसका उत्पादन कोशिकाओं द्वारा किया जाता है। ये कोशिकाऐं, अग्न्याशय (Pancreas) (मिश्रित ग्रन्थि) में होती हैं। यह अग्न्याशय यानि मिश्रित ग्रन्थि आमाशय के नीचे कुछ पीछे की ओर होती है। ये इंसुलिन नामक हार्मोन ग्लूकोज़ यानि शुगर को ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है साथ ही शरीर की कोशिकाओं में भेजता है ताकि उन्हें ऊर्जा मिले। 

डायबिटीज क्या है? – What is Diabetes in Hindi?

हम जो भोजन करते हैं, वह पचने के बाद उसका कार्बोहइड्रेट भाग ग्लूकोज़ बनता है। जिसे इंसुलिन नामक हार्मोन ऊर्जा में बदलता है। जब इंसुलिन की कार्य प्रणाली किसी भी कारण से बाधित होती है यानि इंसुलिन जब ग्लूकोज़ को ऊर्जा में नहीं बदल पाता तब यह ग्लूकोज़ यानि शुगर रक्त में ठहर जाता है। रक्त में ठहरे हुऐ शुगर की सामान्य स्तर से अधिक मात्रा को ही डायबिटीज कहा जाता है। जब कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन शरीर की जरूरत से कम बनता है या बिल्कुल भी नहीं बनता तब ऐसी स्थिती में इंसुलिन के इंजेक्शन देकर मरीज की जान बचाई जाती है। 

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डायबिटीज के घरेलू उपाय
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डायबिटीज के प्रकार – Type of Diabetes

दोस्तो, डायबिटीज मुख्य रूप से तीन प्रकार की ही होती है। देसी हैल्थ क्लब, डायबिटीज के प्रकारों के बारे में बता रहा है जो निम्न प्रकार हैं  :-

1. टाइप 1 (Type 1)- इस प्रकार के डायबिटीज में जब प्रतिरक्षा  प्रणाली उन कोशिकाओं को खत्म कर देती है जो इंसुलिन बनाने का काम करती हैं। ये कोशिकाऐं अग्न्याशय (Pancreas) में होती हैं।  इस कारण इंसुलिन नहीं बन पाता है। अग्न्याशय इंसुलिन का उत्पादन करने में समर्थ नहीं होता है। इस टाइप का डायबिटीज रोग 4 से 7 साल के बच्चों में कुछ मामलों में 10 से 14 साल के बच्चों में भी देखा गया है परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि यह बच्चों का ही रोग है यह किसी भी आयु में हो सकता है। डायबिटीज की इस श्रेणी को पहले इंसुलिन-आश्रित डायबिटीज मेलाईट्स (IDDM – Insulin Dependent Diabetes Mellitus) या किशोर मधुमेह (Juvenile Diabetes) कहा जाता था। इस श्रेणी के रोगियों का उपचार बिना इंसुलिन दिये संभव नहीं है। 

2. टाइप 2 (Type 2)-  टाइप 2 डायबिटीज का यह सबसे आम प्रकार और लंबे समय तक चलने वाली आम समस्या है। डायबिटीज के सभी प्रकारों से 90 से 95% व्यक्ति  टाइप 2 की श्रेणी में आते हैं। इसमें कोशिकाऐं इंसुलिन इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाती हैं अर्थात् अग्न्याशय शरीर की आवश्यकतानुसार इंसुलिन नहीं बना पाता है। शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है और रक्त में शुगर बढ़ने लगती है।  यद्यपि यह समस्या कम आयु वाले व्यक्तियों और बच्चों में भी हो सकती है लेकिन  अधिकतर बुजुर्ग व्यक्तियों में यह समस्या देखने को मिलती है। इसे पहले गैर इंसुलिन-आश्रित डायबिटीज मेलाईटस  (NIDDM – Non Insulin Dependent Diabetes Mellitus) या वयस्क-शुरुआत मधुमेह (Adult onset Diabetes Mellitus) के नाम से जाना जाता था। आमतौर पर यह अधिकतर बुजुर्गों में ही होता है लेकिन यह कम उम्र वाले व्यक्तियों और कभी-कभी बच्चों को भी हो सकता है।

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3. टाइप 3, गर्भावधि डायबिटीज (Gestational Diabetes) – जैसा का नाम से जाहिर है कि यह डायबिटीज महिलाओं को गर्भावस्था के समय हो सकती है। बिना किसी डायबिटिक हिस्ट्री के गर्भवती महिलाओं में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है और टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण महसूस होने लगते हैं। यद्यपि यह अस्थाई होता है जोकि डिलीवरी के समय सामान्य हो जाता है परन्तु 5 से 10 वर्षों में डायबिटीज के होने की 20-50% तक संभावना रहती है। 

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शुगर के लक्षण – Symptoms of Diabetes

टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण – 

1. बहुत अधिक प्यास लगना।

2. शरीर में पानी की कमी होना।

3. मुंह सूखना

4. बार-बार पेशाब आना।

5. भूख लगना।

6. खुजली होना।

7. उल्टी जैसा लगना।

टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण – 

1. वजन का बढ़ना या कम होना।

2. प्यास ज्यादा लगना।

3. बार-बार पेशाब लगना

4.  भूख बढ़ना।

5. थकावट रहना।

6. नजर का धुंधला होना।

7. घाव, छाले या कट जल्दी ठीक न हो पाना।

8. पैरों या हाथों में सुन्नता या झुनझुनी।

टाइप 3 गर्भावधि डायबिटीज के लक्षण – 

1. धुंधली नजर होना। 

2. थकान रहना।  

3.  बार-बार प्यास लगना।

4. ज्यादा भूख लगना।

5. बार-बार पेशाब लगना 

6. नींद में खर्राटे लेना।

शुगर के कारण – Cause of Diabetes

टाइप 1 डायबिटीज के कारण – 

इसका कोई प्रमाणिक कारण उपलब्ध नहीं है फिर भी हो सकते हैं ये निम्नलिखित अनुमानित कारण-

1. प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा शरीर में इन्सुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देना।

2. वायरस (रूबेला, कॉक्सेकिवायरस बी और एंटेरोवायरस), टॉक्सिन (विषाक्त पदार्थ) और पोषक तत्व (गाय का दूध, सेरियल) आदि। 

3. पारिवारिक कारण अर्थात् यदि माता-पिता, भाई-बहिन को डायबिटीज है तो आगे की पीढी में भी होने की संभावना रहती है।

टाइप 2 डायबिटीज के कारण – 

1. अग्न्याशय द्वारा इन्सुलिन बनाना बंद कर देना।

2. अग्न्याशय द्वारा शरीर की जरूरत के अनुसार  इन्सुलिन ना बना पाना।

3. शुगर का कोशिकाओं में जाने की अपेक्षा रक्त में जमा होना।

4. कोशिकाओं का इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाना यानि  शरीर इन्सुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया ना दे। 

5. कोशिकाओं का इंसुलिन ना मिलने पर वे ठीक से काम ना कर पाना। 

टाइप 3 गर्भावधि डायबिटीज के कारण –

1. गर्भनाल कुछ हॉर्मोन बनाती है तब  कोशिकाएं इंसुलिन के कार्य में बाधा डालने लगती हैं। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अग्नाशय अतिरिक्त इन्सुलिन बनाता है तब कोशिकाओं में शुगर बहुत कम जा पाता है और ज्यादा शुगर रक्त में रह जाता है। इसी वजह से यह समस्या होती है।

2. गर्भावस्था के समय महिला 25 वर्ष से अधिक हो।

3. महिला के परिवार में कोई डायबिटिक रहा हो।

4. महिला को हाई बीपी की समस्या हो।

5. गर्भावस्था के पहले महिला का वजन ज्यादा हो,

6. पहले कभी गर्भपात हुआ हो।

7. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हो (Polycystic Ovary Syndrome) 

8. यदि महिला ने 4 किलो से अधिक वजन वाले बच्चे को जन्म दिया हो। 

शुगर टैस्ट कैसे करें – How to Test Diabetes

1. ग्लूकोज फास्टिंग टेस्ट (Fasting Blood Sugar) – यह टेस्ट खाली पेट किया जाता है यानि 12 घंटे तक कुछ भी ना खाया हो। अर्थात् रात के भोजन के बाद सुबह तक 12  घंटे की अवधि तक खाली पेट होना चाहिये। यह रक्त में शुगर कितना है यह जानने के लिये, बल्ड सेम्पल लेकर यह टेस्ट किया जाता है। यदि रक्त में शुगर का स्तर 126 मिलीग्राम / डीएल के बराबर या उससे ज्यादा है तो डायबिटीज होने संभावना अधिक है।

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2. खाने के बाद का टेस्ट(Post Prandial Blood Sugar) – यह टैस्ट सुबह का नाश्ता करने के 2 घंटे बाद किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि खाना खाने के बाद ब्लड में शुगर कितनी है। भोजन के साथ सही मात्रा में व्यक्ति को इंसुलिन मिल रहा है या नहीं। खाना खाने के बाद ब्लड शुगर का लेवल 200 मिलीग्राम / डीएल से कम होना चाहिये। 

3. रैंडम ब्लड शुगर टैस्ट (Random Blood Sugar Test) – यह टैस्ट फास्टिंग टैस्ट का इंतजार किये बिना दिन में कभी भी और कई बार किया जा सकता है जैसा भी डॉक्टर उचित समझे। इस टैस्ट की उपयोगिता यह है कि स्वस्थ लोगों में शुगर का स्तर पूरे दिन व्यापक रूप से अलग-अलग नहीं होता। इस टैस्ट में भी शुगर का स्तर 200 मिलीग्राम / डीएल से कम होना चाहिये।

4. हीमोग्लोबिन ए1सी टैस्ट (Hemoglobin A1c Test) – यह टैस्ट दिन में किसी समय किया जा सकता है और मरीज को भूखे रहना नहीं पड़ता। इससे यह पता चलता है कि लाल रक्त कोशिकाओं में कितना ग्लूकोज  है। इस टैस्ट को डायबिटीज के उपचार के लिए किया जा सकता है। इस टैस्ट में पिछले 2 से 3 महीनों के शुगर स्तर का पता चल जाता है। इसके परिणाम से औसत बल्ड शुगर के स्तर का अनुमान लगाया जाता है। इसीलिये इसको अनुमानित औसत ग्लूकोज (estimated average glucose) कहते हैं। इसी के आधार पर डॉक्टर दवाई में बदलाव कर सकते हैं। इस टैस्ट में यदि बल्ड शुगर का स्तर 6।5% या उससे अधिक आता है तो डायबिटीज होने की संभावना हो सकती है। 

5. ग्लूकोज चैलेंज टैस्ट – इसे ग्लूकोज स्क्रीनिंग टैस्ट भी कहा जाता है। यह गर्भवती महिलाओं के लिये है जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज का शक होने पर डॉक्टर यह टैस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। इस टैस्ट के लिये मीठा पेय पदार्थ दिया जाता है फिर एक घंटे बाद यह टैस्ट किया जाता है।

6. ओरल ग्‍लूकोज टॉलरेंस टैस्ट (Oral Glucose Tolerance Test) –  इस टैस्ट के लिये भी खाली पेट रहना होता है। एक रात या कम से कम आठ घंटे। टैस्ट से दो घंटे पहले ग्लूकोज का पानी पीने के लिये दिया जाता है। फिर अगले दो घंटे तक ब्लड शुगर स्तर की नियमित जांच की जाती है। ब्लड ग्लूकोज़ मेज़रमेंट की श्रृंखला बनती है। गर्भवती महिलाओं के लिये भी यह टैस्ट किया जाता है।

शुगर कंट्रोल करने के घरेलू उपाय

1. करेला(Bitter gourd) – करेले का स्वाद कड़वा लेकिन गुण मीठे होते हैं। डायबिटीज में तो यह रामबाण उपचार माना जाता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध बताती है कि करेला में एंटी-डायबिटीक गुण होते हैं जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार हो सकते हैं। इसमें हाईपोग्लाइकेमिक बायो-केमिकल पदार्थ होता है जो ब्लड शुगर के उपचार में उपयोगी होता है। प्रतिदिन करेले का जूस पीने से डायबिटीज में निश्चित तौर पर लाभ होगा। करेले के जूस में स्वादानुसार नमक, काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस मिला सकते हैं। करेले के जूस में टमाटर और खीरा को भी शामिल कर सकते हैं।  

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2. नीम (Azadirachta indica) करेले की तरह नीम में भी हाईपोग्लाइकेमिक बायो-केमिकल पदार्थ होता है जो ब्लड शुगर के उपचार में मदद करता है। यह तथ्य एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध से भी प्रमाणित होता है जिसमें बताया गया है कि नीम के हाईपोग्लाइकेमिक प्रभाव ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में समर्थ हो सकते हैं। नीम की कुछ पत्तियों को (हो सके तो कोंपल लें ) प्रतिदिन सुबह-सुबह खाली पेट खायें। पत्तियों को पीस कर पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं।

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3. मेथी (Fenugreek)- मेथी डायबिटीज उपचार में बहुत अच्छा विकल्प है। रात को एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच मेथी के दाने भिगो दें।  सुबह खाली पेट इस पानी को पीलें और भीगे हुऐ मेथी के दाने भी खालें। निश्चित रूप से डायबिटीज कन्ट्रोल में आ जायेगी। मेथी की सब्जी भी फायदा करेगी। मेथी के पत्तों को सलाद के रूप में भी खा सकते हैं या इन मेथी के पत्तों को किसी भी अन्य सब्जी के ऊपर डालकर खा सकते हैं। स्वाद कड़वा भी नहीं लगेगा और डायबिटीज में फायदा भी होगा।

4. एलोवेरा (Aloe Vera)एलोवेरा भी डायबिटीज उपचार में अच्छा विकल्प है। इसमें एंटी-डायबिटिक गुण डायबिटीज के उपचार में फायदा पहुंचाते हैं। एलोवेरा टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटिक मरीजों के अतिरिक्त प्री-डाइबिटिक व्यक्तियों के लिये भी अत्यन्त लाभकारी है। प्रतिदिन एलोवेरा का फीका जूस पीयें। अन्य विकल्प में एलोवेरा के केप्सूल भी ले सकते हैं। 

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5. जामुन (Java Plum)- जामुन डायबिटीज उपचार के लिये स्वादिष्ट प्राकृतिक उपहार है। काले नमक के साथ जामुन खायें। सुबह-शाम जामुन के पत्ते चबायें। जामुन की गुठली को सुखाकर, पीसकर पाउडर बनालें। सुबह-शाम एक-एक चम्मच यह पाउडर पानी के साथ ले सकते हैं। डायबिटीज में निश्चित रूप से फायदा होगा।  

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6. पुदीना (Mint)- दोस्तो, अपने भोजन में पुदीना को सम्मलित करके देखिये, डायबिटीज में निश्चित रूप से फायदा करेगा। पुदीना की चटनी बनाते समय अदरक, लहसुन और खट्टा अनारदाना भी मिक्स करके पीस लीजिये। इस प्रकार की चटनी का सेवन किसी भी मौसम में कर सकते हैं। यह चटनी डायबिटीज को जड़ से समाप्त कर देगी। 

7. करी पत्ता (Curry leaf)- करेले और नीम के विकल्प में आप करी पत्ता का सेवन कर सकते हैं। इसके औषधीय गुणों में एंटी-डायबिटिक गुण भी हैं जो डायबिटीज के उपचार में फायदा पहुंचाते हैं। करी पत्ता के सेवन से इंसुलिन की प्रक्रिया नियंत्रित रहती है।  करी पत्ता का उपयोग भोजन बनाते समय सब्जी में कीजिये। इसके दो, तीन पत्ते प्रतिदिन चबायें। टाइप 2 डायबिटीज में बेहद लाभकारी होने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करते हैं। 

8. हल्दी और आंवला (Turmeric and Amla)- हल्दी और आँवला को औषधीय गुणों को लगभग सभी जानते हैं। आँवला पाउडर में एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा शहद मिलाकर खायें। डायबिटीज की स्थिती में काफी सुधार हो जायेगा। आँवला का जूस भी ले सकते हैं। 10 मिलीग्राम आँवला के जूस में 2 ग्राम हल्दी पाउडर मिलाकर  दिन में दो बार पीयें। 

9. तुलसी (Tulsi)- प्रतिदिन सुबह तीन-चार तुलसी के पत्ते खाली पेट खायें। इसमें पाये जाने वाले एंटी-ऑक्‍सीडेंट और अन्य तत्व जैसे इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन आदि  इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं की कार्य प्रणाली में सुधार करते हैं।

10. अमरूद (Guava)- डायबिटीज के उपचार में स्वदिष्ट और मीठा विकल्प है अमरूद। इसमें पाये जाने वाला पोलिसकराइड (polysaccharides) एंटी-डायबिटिक प्रभाव दिखाता है। टाइप 2 डायबिटीज में फायदेमंद है। अमरूद को बिना छिलके के ऐसे ही खायें या नमक लगाकर। बल्ड शुगर का स्तर कम हो जायेगा।

11. दलिया (Oatmeal)- दलिया में पाये जाने वाला बीटा-ग्लुकोन कार्बोहाइड्रेट (Beta-glucans) ब्लड शुगर के स्तर को कम करता है और साथ ही दिल की बीमारियों के खतरे से भी बचाव करता है। यह टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिये बेहद फायदेमंद है। इसके लिये,  सादा दलिया का सेवन करें। क्योंकि फ्लेवर वाले या तुरन्त पकने वाले दलिया में शुगर की मात्रा हो सकती है।

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12. मखाने (Makhane)- डायबिटीज को जड़ से खत्म करने के लिये प्रतिदिन खाली पेट पांच-सात मखाने खायें। इसके पोषक तत्व जोड़ों के दर्द में भी फायदा करेंगे और साथ ही हृदय को भी सुरक्षित रखेंगे। नियमित रूप से सेवन करने पर बल्ड शुगर स्तर सामान्य हो जायेगा।   

13. कुछ विभिन्न प्रकार के पत्ते (Different types of leaves)- कुछ विशेष पत्तों के सेवन से भी बल्ड शुगर को नियन्त्रित किया जा सकता है। जैसे कि 6 बेलपत्र , 6 तुलसी के पत्ते, 6 नीम के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, और 3 साबुत कालीमिर्च पीसकर खाली पेट, पानी के साथ सेवन करें। यह पीने के बाद आधे घंटे तक कुछ भी नहीं खाना। 

14. जिनसेंग चाय (Ginseng tea)- Desi Health Club स्पष्ट करता है कि जीनस पैनाक्स (genus panax) नाम के पौधे की जड़ को ही जिनसेंग कहते हैं। यह एक औषधीय पौधा है। इसका स्वाद कड़वा और मसालेदार होता है। इसमें एंटी-डायबिटीक गुण होते हैं जो ब्लड शुगर के स्तर को कम करते हैं। एक अन्य शोध के अनुसार खाने से दो घंटे पहले जिनसेंग के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज मरीजों में शुगर के स्तर में सुधार होता है। एक या दो चम्मच जिनसेंग चाय पत्ती को पानी में उबालकर, थोड़ा ठंडा करके प्रतिदिन पीयें।

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको शुगर कंट्रोल करने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  डायबिटीज के प्रकार, इसके लक्षण और कारण बताये। डायबिटीज के टैस्ट के बारे में भी जानकारी दी। इस लेख के माध्यम से शुगर कंट्रोल करने के घरेलू उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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