दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हमारा आज का टॉपिक शरीर की एक ऐसी समस्या है जो अचानक पता चलती है। आपने नोटिस किया होगा कि अचानक किसी के पेट में या पीठ के निचले हिस्से में बहुत तेज असहनीय दर्द उठता है, उसे अस्पताल ले जाते हैं, दवा, इंजेक्शन देकर दर्द को शांत किया जाता है। फिर उसके टैस्ट होते हैं तो पता चलता है कि उसके शरीर में पथरी है।  जी हां, यही है हमारा आज का टॉपिक “पथरी”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से पथरी का घरेलू इलाज के विषय में विस्तार से जानकारी देगा। तो, जानते हैं पथरी के विषय में कि क्या होती है पथरी?

पथरी क्या है? – What is stones

दोस्तो, बहुत सरल भाषा में कहें तो समझिये कि शरीर में  किन्हीं पदार्थों की अधिकता कारण और इनके साथ अन्य विषैले पदार्थों का बाहर ना निकल पाने के कारण, ये पदार्थ दानों के रूप ये जमने लगते हैं। यही जमे हुऐ दाने पथरी कहलाते हैं। ये दाने रेत के छोटे कण से लेकर गोल्फ की गेंद जितने बड़े आकार के हो सकते हैं। अब आपको बताते हैं कि पथरी हमारे शरीर में कहां-कहां होती है।

पथरी का घरेलू इलाज

पथरी कहां-कहां होती है? – Where are the stones?

1. मूत्रवाहिनी (Ureter)- युरेटर एक नली है जो गुर्दे (Kidney) और मूत्राशय (Bladder) को जोड़ती है। गुर्दे में बनी पथरी के कण टूटकर, फिसलकर मूत्रवाहिनी नली में आकर इकट्ठा हो जाते हैं और फंस जाते हैं। इस स्थिती को यूरेट्रिक स्टोन कहा जाता है। 

2. गुर्दे (Kidney)- शरीर में पानी की कमी होने पर किडनी फिल्टर का काम सही से नहीं कर पाती यानि पानी कम छानती है जिसके चलते  कैल्शियम, ऑक्सालेट, फास्फेट, यूरिक एसिड तथा अन्य विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते। परिणामस्वरूप ये सब मिलकर पथरी का निर्माण करते हैं।

3. पित्ताशय की थैली में (Gallbladder)- पित्ताशय हमारे शरीर में लिवर के नीचे नाशपाती के आकार में थैलीनुमा होता है। इसका मुख्य काम पित्त को जमा करना और उसे गाढ़ा करना होता है। इसमें अनेक पथरियां बनती रहती हैं जो 85% व्यक्तियों में शांत पड़ी रहती हैं। पेट के दायें ऊपरी भाग में जब कभी दर्द होता है असली पथरी की समस्या तब होती है। इनके बनने का कोई सटीक कारण नहीं है परन्तु ऐसा माना जाता है कि मोटापा, डायबिटीज, रक्त विकार और आनुवांशिकता इसके कारण हो सकते हैं। 

पथरी के प्रकार – Type of Stones

पथरी मुख्यतः चार प्रकार की होती है जिनका विवरण इस प्रकार है :-

1. सामान्य पथरी (Common stones)- इसे कैल्शियम स्टोन भी कहा जाता है। कैल्शियम, ऑक्सालेट, फास्फेट या कार्बोनेट से मिलकर यह पथरी बनती है। ऑक्सालेट एक प्राकृतिक  पदार्थ है, जो भोजन में, फलों और सब्जियों में और  नट्स्, चॉकलेट आदि में पाया जाता है। यह पथरी महिलाओं की तुलना में, पुरुषों में दो या तीन गुणा ज्यादा होती है और 20 से 30 आयु वर्ग के पुरुष इसकी चपेट में आते हैं।

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2. स्ट्रवाइट पथरी (Struvite stone)- यह आमतौर पर महिलाओं में होती है जो किसी संक्रमण के कारण बनती है। इसका आकार काफी बड़ा हो सकता है। यह पथरी अपने बड़े आकार से गुर्दे, मूत्रवाहिनी या मूत्राशय को बाधित कर सकती है। 

3. यूरिक एसिड पथरी (Uric Acid Stone)- यह पथरी भी महिला की तुलना में, पुरुषों में अधिक होती है। यह उन व्यक्तियों में अधिक होती है जो पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते और ऐसा भोजन करते हैं जिसमें  प्रोटीन उच्च मात्रा में होता है। इनके मूत्र में एसिड अधिक मात्रा में होता है।  

4. सिस्टीन पथरी (Cysteine stones)- यह पथरी का ऐसा प्रकार है जो बहुत कम व्यक्तियों में होता है।  यह आनुवंशिकी इस स्थिति में सिस्टीन नामक एसिड गुर्दे से यूरिन में चला जाता है।

पथरी के लक्षण – Symptoms of Stone

पथरी होने पर महसूस होते हैं ये लक्षण –

1. पीठ के निचले भाग में या पेट के निचले हिस्से में अचानक बहुत जोर से दर्द होना। यह कुछ मिनटों से लेकर घंटो तक रह सकता है। बीच-बीच में दर्द रुक भी जाता है। इसे ”रीलन क्रोनिन” कहा जाता है।

2. जी मिचलाना और उल्टी आना।

3. मूत्र विसर्जन में दर्द होना, खुल कर मूत्र ना आना। 

4. मूत्र में खून आना। 

5. मूत्र में बहुत अधिक बदबू होना।

6. बुखार, कंपकंपी छूटना।

7. बहुत तेज पसीना आना।

8. पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े मूत्र के साथ बाहर आना। 

पथरी बनने के कारण –

पथरी बनने के हो सकते हैं निम्नलिखित कारण –

1. कैल्शियम, ऑक्सालेट, सिस्टीन और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाने से गुर्दे की पथरी बन सकती है।

2. कैंसर, गुर्दा रोग और एचआईवी के इलाज के लिए ली जा रही दवाईयां पथरी का कारण बन सकती हैं। 

3. अधिक मात्रा में प्रोटीन, नमक या ग्लूकोज़ वाले भोजन का सेवन करना।  

4. थायराइड होना।

5. वजन अधिक होना।

6. शरीर में पानी की कमी होना।

7. हाल ही में बाईपास सर्जरी हुई हो।

कुछ सावधानियां अर्थात् पथरी से बचाव :-

“दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब का मानना है कि यदि जीवन में कुछ निम्नलिखित सावधानियां बरती जायें तो काफी हद तक बचाव हो सकता है”

1. पानी (Water)- पानी पथरी से बचाव का सबसे उत्तम विकल्प है। गुर्दे यानि किडनी का काम छानने का है। पानी के छोटे-छोटे मॉलिक्यूल पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकते हैं। शरीर में पानी की कमी होने के कारण किडनी कम पानी छानती है। फलस्वरूप शरीर से कैल्शियम,  यूरिक एसिड, फास्फोरस आदि बाहर नहीं निकल पाते। ये ही सब बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं। इसलिये यह आवश्यक है कि पर्याप्त मात्रा में यानि 8-10 गिलास पानी रोजाना पीया जाये ताकि दिन में रोज कम से कम 2 से 2।5 लीटर मूत्र  बने। जब खूब पानी पीयेंगे तो मूत्र भी खूब आयेगा अर्थात् जिससे पथरी बनाने वाले तत्व और विषैले पदार्थ शरीर से निकल जायेंगे।  

2. शुद्ध पानी (Pure water)- पानी शुद्ध पीयें। बोरिंग, हैन्डपम्प, कूआं आदि का क्षारिय पानी ना पीयें। 

3. अधिकतर गर्मियों में मूत्र में संक्रमण होने की संभावना रहती है। मूत्र विसर्जन में यदि जरा सी भी परेशानी हो तो तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें।  

4. खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर सोडियम और साल्ट की मात्रा देखें। कम सोडियम और साल्ट वाले खाद्य पदार्थ ही खरीदें। 

5. विटामिन-सी की अधिक मात्रा न लें।

6. प्रतिदिन व्यायाम करें। भोजन के पश्चात थोड़ा टहल लेना चाहिये। 

पथरी (किडनी स्टोन) में क्या खाना चाहिए?

1. उच्च फाइबर वाले अनाज – गेंहू, जौ, बाजरा।

2. कम ओक्जीलेट वाली सब्जियां – आर्टिचोक्स, एस्पैरेगस, लेट्यूस, मटर।

3. कम ओक्जीलेट वाले फल – सेब नाशपाती और खरबूजा आदि

4. फलियां जिनसे प्रोटीन मिले – मटर, सेम, सोयाबीन,  चना आदि।

5. साइट्रस फल – नींबू , नारंगी आदि।

क्या नहीं खाना चाहिये

उच्च ओक्सीलेट और उच्च सोडियम वाले खाद्य पदार्थ और एनिमल प्रोटीन के सेवन से बचना चाहिये। ऐसे कुछ खाद्य पदार्थ निम्नलिखित हैं :-

1. नट्स और नट्स से बने उत्पाद।

2. मूंगफली।

3. पालक।

4. गेंहू का चोकर।

5. मछली।

6. अंडा।

7. मांस।

8. दूध, दही, मक्खन,सोया मिल्क, 

सोया फूड और सोया बटर।

9. सूरजमुखी के बीज

10. गाजार, मूली, प्याज, लहसुन। 

11. गैस वाले कोल्ड ड्रिंक्स। 

पथरी का परीक्षण (Diagnosis of Stone) :-

पथरी का परीक्षण निम्न प्रकार से किया जाता है –

1. ब्लड के द्वारा (By Blood)- ब्लड सैम्पल लेकर खून में अधिक कैल्शियम या यूरिक एसिड का पता चल जाता है जो गुर्दे के स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों की जानकारी के लिए मदद करते हैं।

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2. मूत्र परीक्षण (Urine Test)- इसके लिये एक शीशी में 24 घंटे का मूत्र रखना होता है। इस परीक्षण से यह पता चलता है कि मूत्र में पथरी बनाने वाले खनिज हैं या पथरी के गठन को रोकने वाले पदार्थ कम हैं। इस परीक्षण के लिये लगातार दो दिनों के लिए दो मूत्र संग्रह करने को भी कहा जा सकता है। 

3. इमेज के द्वारा (By Image)- इमेज के द्वारा परीक्षण हर जगह की पथरी का पता चल जाता है। इमेज निम्नलिखित माध्यम से ली जा सकती है –

(i)  पेट का अल्ट्रासाउंड।

(ii) पेट का एक्स-रे।

(iii) सीटी स्कैन।

पथरी के देसी उपाय – Home Remedies of stones

1. पत्थरचट्टा (Rock-cut)- पत्थरचट्टा एक ऐसा पौधा है जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह सदाबहार पौधा है जो हमारे देश भारत में सब जगह पाया जाता है। इस पौधे का  उपयोग किडनी से समस्याओं और मूत्र विकारों के उपचार के लिये किया जाता है। सुबह खाली पेट पत्थरचट्टा के दो पत्ते साफ गर्म पानी के साथ खायें। या एक पत्ते को मिश्री के थोड़े से दानों के साथ पीसकर खायें। 

2. बिच्छू पत्तियां (Scorpion leaves)- दोस्तो, बिच्छू का पौधा एक विशेष प्रकार का पौधा होता है जिसके छूने पर शरीर में झनझनाहट, जलन और खुजली होने लगती है। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य में पाया जाता है। यह औषधीय गुणों से सम्पन्न होता है। बिच्छू की पत्तियों में  मेथेनोलिक अर्क पथरी बनने को रोकने और उसके आकार को कम करने की भी क्षमता होती है। बिच्छू की सूखी हुई पत्तियों को (लगभग 2 बड़े चम्मच) गर्म पानी में  10 मिनट तक उबालें। फिर छान कर धीरे-धीरे चाय की तरह पीयें। प्रतिदिन दिन में दो, तीन बार पीयें। 

3. तुलसी (Basil)- तुलसी की पत्तियों का अर्क पथरी बनाने वाले तत्व कैल्शियम ओक्जीलेट को कम कर, पथरी बनने की संभावना को कम करता है। आयुर्वेद में तुलसी को गुर्दे के लिए टॉनिक माना जाता है। यह मूत्र प्रणाली से पथरी को बाहर निकालने में सहायता करती है। तुलसी की 5,6 पत्तियों को पानी में उबालकर थोड़ा शहद मिलाकर चाय की तरह पीयें। रोजाना दिन में दो, तीन बार पीयें। लगभग छः महिने अवश्य पीयें। यदि यह चाय नहीं पीनी है तो सुबह-सुबह खाली पेट तुलसी की पत्तियां चबायें। 

4. आँवला (Amla)- आँवला को सुखाकर पीसकर पाउडर बना लें। प्रतिदन एक चम्मच आँवला मूली के रस में मिलाकर खायें। कुछ दिनों पश्चात पथरी गल जायेगी। 

5. सौंफ (Fennel)- सौंफ भी पथरी के उपचार में एक अच्छा घरेलू विकल्प है। एक चम्मच सौंफ को बारीक पीसकर पानी में डालकर पांच मिनट तक उबालें। थोड़ा ठंडा होने पर गुनगुना सा, छानकर चाय की तरह पीयें। रोजाना दिन में दो, तीन बार पीयें। एक शोध के अनुसार सौंफ में एंटी-यूरोलिथिएटिक (पथरी को गलाने वाला) प्रभाव पाया जाता है जो पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकने तथा इसके आकर को कम करने में भी मदद कर सकता है।

6. सेब का सिरका (Apple vinegar)- सेब का सिरका यूरिनरी साइट्रेट के स्तर को बढ़ाने में मददगार होने के कारण यह किडनी की पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकने सक्षम हो सकता है। यह पथरी के दर्द को भी कम करेगा। रोजाना दिन में एक बार भोजन से पहले एक गिलास पानी में दो बड़े चम्मच सेब का सिरका पीयें। 

7. तरबूज(watermelon) – तरबूज एक ऐसा फल है जिसमें 97% पानी होता है। यह शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। तरबूज में पोटेशियम भी होता है जो मूत्र में एसिड स्तर को सामान्य रखता है, गुर्दे को स्वस्थ रखता है और गुर्दे की पथरी को मूत्र द्वारा निकालने में मदद करता है। आप इसे नियमित रूप से रोजाना खा सकते हैं। तरबूज के रस में 1/4 चम्मच धनिया पाउडर मिक्स करके पी सकते हैं। 

8. खरबूज (Melon)- खरबूजे में भी 90% पानी होता है। तरबूज की भांति खरबूज में भी पोटेशियम होता है जो गुर्दे की पथरी को की समस्या से छुटकारा दिलाने में मददगार होता है। खरबूज के बीज का छिलका उतारकर जो गिरी निकलती है वह गुर्दे की पथरी की समस्या से राहत दिलाने में सहायक होती है। थोड़े से खरबूज के बीज की गिरी, 3-4 बड़ी इलायची के दाने और एक चम्मच मिश्री को एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। ठंडा होने पर इसको पीयें।

9. गेहूं के जवारे (Wheat grass) – देसी हैल्थ क्लब स्पष्ट करता है कि जब गेहूं जमीन में बोये जाते हैं तो कुछ दिनों में अंकुर निकल आते हैं। अंकुर में जब पांच, छः पत्ते हो जाते हैं तो उस अंकुर को गेहूं के जवारे या गेहूं की घास कहते हैं। यही घास गुर्दे से जुड़ी बीमारियों और गुर्दे की पथरी के उपचार में मददगार होती है। गेहूं के जवारे का जूस पीते समय इसमें एक चम्मच नींबू का रस या तुलसी के पत्ते का रस मिला सकते हैं। या गेहूं के जवारे को पानी में उबालकर ठंडा करके पीयें।

10. बेकिंग सोडा (Baking soda)-  एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की एक रिसर्च के अनुसार कैल्शियम और यूरिक एसिड अधिक होने के कारण बनने वाली गुर्दे की पथरी को तोड़कर बाहर निकालने में बेकिंग सोडा मदद कर सकता है। एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर चाय की तरह धीरे-धीरे पीयें।

11. बीयर (Beer)- दोस्तो, बीयर पीना किडनी स्वास्थ के लिये फायदेमंद हो सकता है। डॉक्टर भी इसे पीने की सलाह दे देते हैं। क्योंकि बीयर पीने से किडनी में पथरी के मूत्र के द्वारा बाहर निकलने की अधिक संभावना रहती है। ऐसा इसलिये क्योंकि बीयर पीने से मूत्र ज्यादा बनता है। अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पता चला कि 40% बीयर पीने वालो में किडनी की पथरी होने का खतरा पीयर ना पीने वालों की अपेक्षा कम हो गया है। दोस्तो, यहां स्पष्ट करना अति आवश्यक है कि देसी हैल्थ क्लब अल्कोहल के सेवन को प्रमोट नहीं कर रहा बल्कि बीयर को केवल एक विकल्प के रूप में बता रहा है। 

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको पथरी का घरेलू इलाज  के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  पथरी कहां-कहां होती है, कितने प्रकार की होती है, इसके लक्षण और कारण क्या हैं, इन सब के बारे में बताया। पथरी के टैस्ट के बारे में भी जानकारी दी। इस लेख के माध्यम से पथरी से छुटकारा पाने के देसी उपाय भी बताएं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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