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बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय – Ways to Protect Children from Summer in Hindi

बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में। दोस्तो, मौसम प्रकृति का नियम है और मौसम में अपने समय पर बदलाव होना प्रकृति की कार्यप्रणाली का हिस्सा है। प्रत्येक मौसम प्रकृति की तरफ से पृथ्वी को दिया हुआ अनूठा उपहार है। हर मौसम की अपनी महत्ता और आवश्यकता होती है। एक मौसम की किसी अन्य मौसम से तुलना नहीं की जा सकती, किसी को कम या ज्यादा अच्छा नहीं आंका जा सकता। हर मौसम प्रणियों के जीवन और वनस्पति जगत के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण होता है। दोस्तो, जहां एक तरफ हर मौसम के फायदे होते हैं तो दूसरी ओर इनकी मार भी झेलनी पड़ती है। मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बूढ़ों पर पड़ता है। बरसात में संक्रमण से बीमारियां, सर्दी से खांसी, जुकाम, बुखार और गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होना, उल्टी, दस्त, सनबर्न जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। बड़े लोग तो मौसम से अपना बचाव खुद कर लेते हैं मगर बच्चों को माता पिता को बचाना पड़ता है। बच्चों को सर्दी से कैसे बचाएं इस बारे में आपको बता चुके हैं मगर बच्चों को गर्मी से कैसे बचाएं, यह बताना बाकी है। इसलिए हमारा आज का टॉपिक है “बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से गर्मी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि बच्चों को गर्मी से बचाने के क्या उपाय हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि गर्मी क्या है और गर्मी और तापमान क्या हैं?। फिर, इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

गर्मी क्या है? – What is Summer

गर्मी यानि ऊष्मा (Heat), पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को कायम रखने के लिए ऊर्जा के आवश्यक रूप है। तापमान में अंतर होने की वजह से एक वस्तु से दूसरे वस्तु में ऊष्मा का स्थानांतरण होता है। ऊष्मा को, गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर ऊर्जा के प्रवाह के रूप में परिभाषित किया गया है। इसका तात्पर्य यह है की ऊर्जा के प्रवाह का रूख, अधिक तापमान वाले पदार्थ से कम तापमान वाले पदार्थ की तरफ होता है। 

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इसका कारण यह है कि अणु तेजी से कंपन करते हैं तथा अपनी ऊर्जा को धीमी गति से कंपन करने वाले अणुओं में ट्रांसफर कर देते हैं। शरीर की गर्मी और शरीर का तापमान गर्मी की मात्रा पर निर्भर करते हैं। जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो अणुओं या परमाणुओं का कंपन बढ़ जाता है। ये कंपन शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में ट्रांसफर हो जाते हैं। 

गर्मी और तापमान क्या हैं? –  What is Summer and Temperature?

यहां हम स्पष्ट कर दें कि गर्मी और तापमान दो अलग अलग स्वतंत्र अस्तित्व वाले शब्द हैं। गर्मी यानि ऊष्मा तापीय ऊर्जा (thermal energy) के हस्तांतरण के संदर्भ में आता है जबकि तापमान किसी विशिष्ट प्रणाली के परमाणु कणों की औसत गतिज ऊर्जा के माप का नाम है। तापमान की माप इकाई फ़ारेनहाइट, सेल्सियस या केल्विन होती है तो ऊष्मा को जूल, कैलोरी या ब्रिटिश थर्मल यूनिट (BTU) में मापा जाता है। 

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गर्मी क्यों आवश्यक है? – Why is Summer Necessary?

हमने ऊपर बताया है कि गर्मी पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बनाए रखने लिए ऊर्जा का आवश्यक रूप है। इसका तात्पर्य यह है कि पृथ्वी पर जितने भी प्राणी हैं उनके जीवन को जीवन्त रखने के लिए गर्मी यानि ऊष्मा यानि ऊर्जा के प्रवाह का स्रोत, अति आवश्यक है। गर्मी, प्रकृति के मौसम रूपी नियम का एक अभिन्न हिस्सा है। जैसे बरसात और सर्दी जरूरी है उसी प्रकार गर्मी भी जरूरी है। 

गर्मी वनस्पति जगत की परम आवश्यक आवश्यकता है। गर्मी के कारण ही फसल पकती हैं और मनुष्यों को अनाज मिलता है जिससे भोजन बनता है। सब्जियां और पके फल प्राप्त होते हैं। पशुओं को चारा मिलता है। शरीर को ऊर्जा मिलती है, त्वचा में गर्मी बनी रहती है तथा शरीर का अनुकूलतम तापमान बना रहता है। हां, जब गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है तो यह शरीर को नुकसान भी पहुंचाती है। सभी लोग इससे परेशान हो जाते हैं। इसलिये गर्मी से बचना भी जरूरी होता है और बच्चों को बचाना भी। 

बच्चों को कितना पानी पीना चाहिए? – How Much Water Should Children Drink?

एक दिन में बच्चों को कितना पानी पीना चाहिए, इसका विवरण निम्न प्रकार है :- 

  • स्तनपान करने वाले शिशु : इनको पानी पीने की जरूरत नहीं होती। माँ का दूध ही इनमें पानी की कमी को पूरा करता है।
  • 1 से 3 वर्ष के बच्चे  : 4 कप
  • 4 से 8 वर्ष के बच्चे  : 6 कप
  • 9 से 13 वर्ष के बच्चे : 8 कप
  • 14 से 18 वर्ष के बच्चे : 12 कप 

बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय – Ways to Protect Children from Summer

अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित उपाय जिनके जरिए आप अपने बच्चों को गर्मी के प्रकोप से बचा सकते हैं – 

1. बच्चों को हाइड्रेट रखें (Keep Children Hydrated)- गर्मियों में सभी को ज्यादा प्यास लगती है जो कि स्वाभाविक है। इन दिनों में शरीर में पानी की कमी ना होने पाए, इस बात का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को खूब पानी पीने को कहें। कम से कम आधा घंटे के अंतराल पर बच्चों को पानी पीने को कहें। छोटे बच्चों को खुद पानी पिलाएं। यदि बच्चा पानी पीने को मना करता है तो उसे नींबू पानी, ग्लुकोज़ पानी या फलों का जूस, शरबत आदि पिलाएं। 

डिहाइड्रेशन की स्थिति में बच्चों को डायरिया, उल्टी आदि होने का खतरा रहता है। त्वचा भी ड्राई हो जाती है। इसलिए बच्चों को हाइड्रेट रखें। छः महीने तक के शिशु को अतिरिक्त पानी की जरूरत नहीं होती, उनको स्तनपान से ही पानी की जरूरत पूरी हो जाती है। बच्चों को कितना पानी पीना चाहिए इसका विवरण हम ऊपर दे चुके हैं। 

2. बच्चों का भोजन (Kids Meal)- मौसम चाहे गर्मी का हो अथवा सर्दी का बच्चे के भोजन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें –

  1. भोजन बनाने से पहले सुनिश्चित करें कि आप साफ़ हैं, आपके हाथ साफ़ हैं, रसोई साफ़ है और भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन भी साफ़ हैं।
  2. गर्मियों में पसीना बहुत आता है इसलिए पसीना पोंछने के लिए एक टॉवल भी आपके साथ हो।
  3. भोजन विटामिन और खनिजों से भरपूर हो।
  4. गर्मियों में वैसे ही खाना कम खाया जाता है, खाने का मन नहीं करता। इसलिये गर्मियों में भोजन जल्दी पचने वाला और संतुलित होना चाहिए  यानि कैलोरी, वसा, कार्बस्, प्रोटीन, मीठा या नमकीन का सही कॉमबिनेशन होना चाहिए। गर्मियों में बच्चों को भोजन के साथ पुदीना की चटनी रोजाना खिलानी चाहिए, दही, रायता, छाछ को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।   
  5. बच्चों को भोजन उतना परोसें जितना उनकी जरूरत हो। जबरदस्ती खिलाने की कोशिश ना करें।
  6. रखा हुआ खाना परोसने से पहले अच्छी तरह चैक कर लें क्यों कि गर्मियों में रखा हुआ खाना जल्दी खराब हो जाता है।
  7. डिब्बाबंद खाना, होटल का खाना, जंक फूड को अवॉइड करें क्योंकि गर्मियों में इनसे पेट जल्दी खराब हो सकता है।
  8. स्कूल जाने वाले बच्चे को स्टील के टिफिन में खाना पैक करें और स्टील की बोतल में पानी दें। प्लास्टिक को अवॉइड करें। यदि प्लास्टिक का टिफिन और प्लास्टिक की बोतल ही इस्तेमाल करना है तो अच्छी क्वालिटी के खाद्य ग्रेड के प्लास्टिक के बर्तन इस्तेमाल करें। 
  9. गलियों में बिकने वाले खाने पीने के पदार्थों या कटे फलों को बच्चों को न दें। इनकी साफ़-सफाई और गुणवत्ता का किसी को पता नहीं होता। इनसे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। 
  10. गर्मियों में विटामिन-सी युक्त और पानी वाले फल बच्चों को दें जैसे कि मौसमी, संतरा, अंगूर, खरबूज, तरबूज आदि।
  11. बच्चों को चॉकलेट, आइसक्रीम, चाय, कॉफी का सेवन कम करने दें। सुनिश्चित करें कि बच्चे आइसक्रीम अच्छी क्वालिटी की खाएं।
  12. हरा सलाद, विशेषकर खीरा बच्चों को रोजाना खिलाएं। इससे शरीर का तापमान सही रहेगा। 

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3. बच्चों के कपड़े (Children’s Wear)- बच्चों को गर्मी से बचाने में कपड़े भी सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। बच्चों के कपड़ों का निम्न प्रकार से ध्यान दें –

  1. गर्मी के मौसम में बच्चों के कपड़े सूती होने चाहिएं। सूती कपड़े सूरज की तपिस को नहीं सोखते। इसलिये इनमें ज्यादा गर्मी नहीं लगती। नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान वाले कपड़ों को पूरी तरह अवॉइड करें। क्योंकि ये सूरज की तपिस सोखते हैं इसलिए इनमें अधिक गर्मी लगती है। ये कपड़े पसीना नहीं सोख पाते। सूती कपड़े पसीना ज्यादा सोखते हैं।
  2. बच्चों को गर्मी में हल्के रंग के कपड़े पहनाएं। ये गर्मी को नहीं सोखते जबकि गहरे रंग के कपड़े सूरज की किरणों को सोख लेते हैं फिर उनसे गर्मी लगती है जैसे कि काले, डार्क नीले, डार्क लाल, डार्क ब्राउन या डार्क पीला आदि। गर्मी में सबसे उत्तम सफेद रंग के कपड़े होते हैं। 
  3. सूरज की तेज किरणों से त्वचा जलने लगती है इसलिए यह जरूरी है कि बच्चों को इस प्रकार के कपड़े पहनाएं कि उनका शरीर 80 प्रतिशत तक ढका रहे। यानि उनकी बाजु और टांगें ढकी रहें। इससे मच्छरों से भी बचाव होगा।
  4. यदि आप बच्चे को धूप से बचाने के लिए कैप पहनाना चाहते हैं तो शिशु को चौड़े रिम वाली कैप पहनाएं। यह सिर, चेहरे और गर्दन को धूप से बचाएगी। इलास्टिक पट्टी वाली कैप या हैट ना पहनाएं क्योंकि इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। 

4. डायपर (Diaper)- गर्मियों में डायपर भी बच्चों को बहुत तंग करता है। बच्चा कई बार बहुत परेशान हो जाता है। डायपर की कमरपट्टी और जांघों के बैंड से बच्चा बंधा-बंधा सा महसूस करता है और उसके जननांग क्षेत्र पर पसीना भी आता है। इससे त्वचा पर रैशेज पड़ जाते हैं। गर्मी के इस पसीने से बचाव के लिए जरूरी है कि दिन में कुछ समय के लिए बल्कि अधिक से अधिक समय के लिए बच्चे को डायपर से मुक्त रखा जाए। इसके लिये निम्नलिखित बातों को ध्यान रखें – 

  1. सबसे पहले बच्चे के मल त्याग और मूत्र विसर्जन का समय ध्यान में रखें। मल त्याग और मूत्र विसर्जन के बाद का कुछ समय ऐसा होता है जिसमें वह दुबारा से नहीं करता। इसी समय को निर्धारित करें और डायपर से मुक्त रखें।  
  2. डायपर से मुक्त रखने का दिन का समय ऐसा निर्धारित करें जिस समय बच्चा सोता हो।  
  3. यद्यपि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बच्चा कब दुबारा से मल त्याग और मूत्र विसर्जन करेगा इसलिए बैडशीट पर प्लास्टिक की शीट बिछाकर कोई और कपड़ा बिछा दें। इससे वह कपड़ा ही खराब होगा बैडशीट नहीं।
  4. जो बच्चा पैदल चलने लगा है उसे डायपर की जगह सूती पजामी पहना सकते हैं। सूती पजामी पसीना सोख लेगी।
  5. डॉक्टर की सलाह पर एंटीसेप्टिक क्रीम का उपयोग करें। 

5. बच्चे को नहलाना (Bathing the Baby)- गर्मियों में बच्चे नहाने को खूब एंजोय करते हैं विशेषतौर पर शावर से। गर्मियों में बच्चे को रोजाना नहलाएं, इससे बच्चे को गर्मी से शान्ति मिलेगी और शरीर भी साफ़ रहेगा। साबुन से बैक्टीरिया भी खत्म होगा और पसीना, धूल, गंदगी भी। लेकिन यदि आप बच्चे को कई बार नहलाएं या बच्चा खुद नहाना चाहे तो हर बार साबुन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

6. टैल्कम पाउडर (Talcum Powder)- गर्मी से राहत पहुंचाने के लिए बच्चों के लिए विशेष रूप से टैल्कम पाउडर डिजाइन किये जाते हैं जो कपड़ों की रगड़ से त्वचा की रक्षा करते हैं। यह त्वचा को सौम्य भी बनाता है। टैल्कम पाउडर के बारे में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें – 

  1. बाजार में उपलब्ध कुछ कॉस्मेटिक टैल्कम पाउडर में रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है जो बच्चे की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए हर्बल और एंटीबैक्टीरियल टैल्कम पाउडर ही खरीदें। 
  2. बच्चे को टैल्कम पाउडर सावधानी से लगाना चाहिए क्योंकि इसके छोटे-छोटे कण सांस के जरिए अंदर जाकर सांस लेने की सामान्य प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं। इसलिये पाउडर सीधे बच्चे की त्वचा पर नहीं छिड़कना चाहिए। पाउडर को अपने हाथ पर निकालकर धीरे-धीरे बच्चे की गर्दन, छाती, पीठ, बगल और जननांग क्षेत्र पर हल्के-हलके लगाएं। 

7. सनस्क्रीन लोशन (Sunscreen Lotion)- छोटे बच्चों को तो घर में रोका जा सकता है लेकिन 4, 5 साल से बड़े बच्चों को नहीं रोका जा सकता। उनको अपने दोस्तों के साथ खेलने बाहर जाना है तो वे जाएंगे। इसलिए उनको सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (ultraviolet – UV)  किरणों से बचाना जरूरी हो जाता है। अतः अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाव के लिए सन प्रोटेक्शन फैक्टर 15, अल्ट्रावायलेट-ए और अल्ट्रावायलेट-बी से रक्षा करने वाली सनस्क्रीन लोशन लगाकर ही बच्चे को बाहर भेजें।

8. घमौरियों से बचाव (Protection from Heat Rash)- गर्मियों में पसीना आने से बच्चों को घमौरिया हो जाती हैं जिससे त्वचा में जलन और खुजली लगती है। इससे बच्चा बहुत परेशान होता है। घमौरियों से बचाव के लिए अक्सर लोग टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। कुछ कॉस्मेटिक टैल्कम पाउडर त्वचा को हानि पहुंचा सकते हैं इसलिए घमौरियों से बचाव के लिए घरेलू उपायों को अपनाना चाहिए। 

इसके लिए एलोवेरा जेल की मसाज, बेकिंग सोडा, चंदन पाउडर का लेप, मुल्तानी मिट्टी और गुलाबजल का लेप आदि को अपना सकते हैं। इनसे शरीर में ठंडक भी पहुंचेगी और गर्मी से राहत भी मिलेगी। 

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9. बाहर घूमना फिरना (Hang Out)- गर्मी के शुरुआती दिनों में तो बच्चे को सुबह शाम बाहर घुमाया जा सकता है परन्तु जैसे-जैसे गर्मी का तापमान बढ़ता है, घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। तब बच्चों को बाहर ले जाना बंद कर देना चाहिए। उनको सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक घर में ही रखना चाहिए। जब भीषण गर्मी पड़ती है तब बड़ों को भी घर में ही रहना चाहिए। 

10. कमरे का तापमान (Room Temperature)- यदि आप एसी चलाते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि कमरा एकदम ठंडा ना हो। सोने के लिए हल्की सी गर्माहट जरूर चाहिए। इसलिए बच्चों के कमरे का तापमान 22 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रखें। कूलर और पंखे की हवा सीधी नहीं लगनी चाहिए। एक बात का ध्यान रखें कि दिन या रात को नहाने के तुरन्त बाद बच्चे सीधा एसी वाले कमरे में ना आएं अन्यथा सर्दी जुकाम लग जाने की संभावना बन जाती है। 

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको बच्चों को गर्मी से बचाने के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गर्मी क्या है?, गर्मी और तापमान क्या हैं?, गर्मी क्यों आवश्यक है और बच्चों को कितना पानी पीना चाहिए, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से बच्चों को गर्मी से बचाने के बहुत सारे उपाय बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

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Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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आज के आर्टिकल में हमने आपको गर्मी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गर्मी क्या है, गर्मी और तापमान क्या हैं, गर्मी क्यों आवश्यक है और बच्चों को कितना पानी पीना चाहिए, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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