दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, जब हम कोई व्यंजन बनाते हैं तब उसमें पड़ने वाली सामग्री (Ingredients) की सही मात्रा का ध्यान रखा जाता है। चाहे वह नमकीन व्यंजन हो या मीठा। सामग्री की मात्रा यदि थोड़ी भी कम या ज्यादा हो गयी तो समझिये कि खाने का स्वाद तो बेकार हो ही गया उसके पोषक तत्व भी उचित फायदा नहीं दे पायेंगे। यही हाल हमारे शरीर का है यदि शरीर को भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों में से एक की भी कमी हो जाये तो शरीर की कार्य प्रणाली गड़बड़ा जाती है और हम अस्वस्थ होने लगते हैं। ऐसा ही एक खनिज है जो हमारे शरीर का आधार स्तम्भ है। यदि यह नहीं, तो कुछ भी नहीं। इसके बिना तो हम सीधे खड़े भी नहीं हो सकते। जी दोस्तो, हम बात कर रहे हैं कैल्शियम की, जो शरीर की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाये रखता है और जोड़ों को स्वस्थ बनाये रखने का काम करता है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाये तो इसे कैसे पूरा किया जाये। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “कैल्शियम की कमी पूरी करने के उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको कैल्शियम के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि कैल्शियम की कमी पूरी करने के उपाय क्या हैं। तो सबसे पहले जानते हैं कि कैल्शियम  क्या है, इसका काम क्या है और कैल्शियम की कमी क्या होती है।

कैल्शियम की कमी को पूरा करने के उपाय

कैल्शियम क्या है? – What is Calcium?

कैल्शियम (Calcium) एक रासायनिक तत्व होता है। इसे आवर्त सारणी (Periodic table) के द्वितीय मुख्य समूह का धातु तत्व कहा गया है जोकि क्षारीय मृदा धातु  (Alkaline Earth Metal) है। यह शुद्ध अवस्था में उपलब्ध नहीं है लेकिन भूमि में, इसके अनेक यौगिक भरपूर मात्रा में मिलते हैं। कैल्शियम प्राणियों के लिये अति आवश्यक और महत्वपूर्ण होता है। खाने लायक कैल्शियम दूध और अन्य खाद्य पदार्थो से मिलता है। खाने के अतिरिक्त, इसके शुद्ध रूप का और इसके अन्य कई यौगिकों का औद्योगिक उपयोग भी किया जाता है। सन् 1808 में सर हम्फ्री डैवी ने इसे खोजा था। उन्होंने कैल्शियम क्लोराइड से इसे अलग किया था। चूना पत्थर, कैल्शियम का महत्वपूर्ण खनिज स्रोत है, यह पौधों में भी उपलब्ध होता है। कैल्शियम को अंग्रेजी में  ‘Ca’ से इंगित किया जाता है। कैल्शियम प्राणियों में हड्डियों, दांतों और शरीर के अन्य भागों में होता है। यह रक्त में भी होता है और शरीर की कार्य प्रणाली में सक्रिय भूमिका निभाता है।  कैल्शियम हमें भोजन से खनिज के रूप में मिलता है।

कैल्शियम का क्या काम होता है? – What is the Function of Calcium?

दोस्तो, कैल्शियम एक खनिज है जिसे हमारा शरीर भोजन में से अवशोषित (Absorbe) करता है। यह शरीर के लिये सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक तत्व है। दोस्तो, आपको जानकर आश्चर्य होगा की हमारे शरीर में 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और दांतों में होता है नरकंकाल और उसके कामों को संबल (Support) प्रदान करता है। बाकी का 1 प्रतिशत कैल्शियम, मांसपेशियों का संकुचन, धमनियों का संकुचन और विस्तार, शरीर के अन्य भागों में संदेश पहुंचाना, तंत्रिका प्रणाली का सुचारु ढंग से कार्यों करने को सुनिश्चित करना आदि, शरीर के महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है।

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कैल्शियम की कमी क्या होती है? – What is Calcium Deficiency?

दोस्तो, हम जो भोजन करते हैं, हमारा शरीर, उससे लगभग 90 प्रतिशत कैल्शियम अवशोषित कर लेता है जो हड्डियों और दांतों में स्टोर हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, विशेष रूप से 30 वर्ष की आयु के बाद, पाचन प्रक्रिया कमजोर होती जाती है जिसके कारण शरीर सामान्यतः सरलता से भोजन में से कैल्शियम को अब्जॉर्ब नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप शरीर को आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिल पाता। इसी को कैल्शियम की कमी होना कहते हैं। कैल्शियम की कमी को हाइपोकैल्शिमिया (Hypocalcemia) कहा जाता है।  इसकी कमी से अनेकों रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। ऑर्थोपिडिक और पेन फिजिशियन डॉ.रूपेश जैन का कहना है कि “30 की उम्र के बाद अपनी डाइट में कैल्शियम रिच फूड की मात्रा बढ़ाकर इसकी कमी से बच सकते हैं। इसके अलावा आसान घरेलू नुस्खे भी आपकी बॉडी में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं”।

कैल्शियम की कमी के कारण – Cause of Calcium Deficiency

दोस्तो, शरीर में कैल्शियम की कमी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

1. विटामिन-डी की कमी होना, कैल्शियम की कमी का बहुत बड़ा कारण है। बात अटपटी है लेकिन सच है। विटामिन-डी, कैल्शियम के अवशोषण (Absorption) की प्रक्रिया को सरल बनाता है। यह शरीर में अवशोषण की प्रक्रिया को आसान बना देता है। अगर विटामिन-डी की कमी है तो कैल्शियम की कमी होना स्वाभाविक है।

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2. दूध, दही, छाछ, पनीर, दलिया आदि का सेवन ना करना या बहुत कम करना। ये सभी विटामिन-डी और कैल्शियम का भरपूर श्रोत हैं।

3. डेयरी उत्पाद के अतिरिक्त आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जिनमें कैल्शियम की मात्रा बहुत कम हो या ना हो।

4. ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करना जो बहुत ज्यादा वसा, मिठास (Sugar) और प्रोटीन युक्त हों, इनसे भी कैल्शियम की कमी होती है, जैसे कोल्ड ड्रिंक, शराब, तम्बाकू, अधिक मात्रा में नमक, चाय, कॉफी आदि।

5. भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जो बहुत ज्यादा फॉस्फोरस या मैग्नीशियम वाले हों।

6. पेट के एसिड्स का रिसाव उचित मात्रा में ना होना भी कैल्शियम में कमी का कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति बुजुर्गों में होती है।

7. शरीर में कैल्शियम का भली-भांति उपयोग ना हो पाना। इसका अधिक मात्रा में मल-मूत्र के जरिये निकलते रहना।

8. शारीरिक गतिविधि ना होना। ऐसा उस अवस्था में होता है जब बीमारी के कारण डॉक्टर ने पूरी तरह आराम (Complete bed rest) करने को कहा हो। इससे भी शरीर में कैल्शियम कम हो जाता है।

9. बहुत अधिक व्यायाम करना भी कैल्शियम के स्तर को कम कर देता है, जबकि हल्के व्यायाम से कैल्शियम में इजाफा होता है।

10. महिला एथलीट में रजोनिवृत्ति के समय कैल्शियम की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है क्योंकि उनमें एस्ट्रोजन (Estrogen) नामक हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। यह हार्मोन हड्डियों में कैल्शियम को जमने में मदद करता है और उन्हें मजबूती देता है। परन्तु इसके कम होने का प्रभाव कैल्शियम पर पड़ता है।

कैल्शियम की कमी के लक्षण – Calcium Deficiency Symptoms

दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करता है कि शरीर में कैल्शियम में कमी होने पर इसके लक्षण एकदम से नजर नहीं आते क्योंकि कमी होने पर शरीर, हड्डियों से कैल्शियम निकालकर रक्त में कैल्शियम लेवल को नियन्त्रित करता है। परन्तु लंबे समय तक कैल्शियम की कमी के परिणाम घातक होते हैं। कैल्शियम की कमी के निम्नलिखित लक्षण होते हैं –

1. अनिद्रा की समस्या, अर्थात् नींद ठीक से पूरी तरह ना आना।

2. शरीर में कमजोरी, थकावट महसूस करना।

3. सही से भूख ना लगना।

4. हाथों का सुन्न हो जाना।

5. त्वचा का शुष्क हो जाना अर्थात् त्वचा में नमी की कमी। 

6. स्मरण शक्ति का कमजोर होना।

7. कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ना

8. रक्तचाप का बढ़ना।

9. हृदय गति का असमान्य रूप से तेज हो जाना।

10. जी घबराना, उल्टी, मितली आदि।

11. सीने में दर्द बन जाना।

12. आंखों में मोतियाबिन्द बन जाना।

13. मसूड़ों का रोग हो जाना, दांतों में सड़न रहना।

14. मिर्गी के दौरे पड़ना।

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15. गर्भपात हो जाना।

कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग – Calcium Deficiency Diseases

शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण निम्नलिखित रोग होने की संभावना रहती है –

1. दांतों की हानि (Loss of Teeth)- कैल्शियम की कमी से दांतों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। ये समय से पहले टूटने शुरू हो जाते हैं। यदि दांत ना भी टूटें तो भी दांतों की परतों की धीरे-धीरे क्षति होने लगती है।

2. अस्थि-सुषिरता (Osteoporosis) – यह एक अस्थि रोग है। रक्त में कैल्शियम की कमी होने पर शरीर, हड्डियों से कैल्शियम खींच कर रक्त में कैल्शियम लेवल को नियन्त्रित करता है।  इससे हड्डियों का कैल्शियम कम होने लगता है जिससे ये कमजोर पड़ जाती हैं और जरा सी चोट लगने पर या कभी अपने आप ही टूटने लगती हैं। इस रोग में नई हड्डियां उतनी तेजी से नहीं बनतीं जितनी तेज गति से पुरानी हड्डियां टूटती हैं। 

3. अस्थिमृदुता (Osteomalacia​) – बड़ों में इसे हड्डियों का मुलायम होना कहते हैं और बच्चों में सूखा रोग (Rickets) के नाम से जाना जाता है। इसे कंकाल-तंत्र का एक गम्भीर रोग माना जाता है। इस रोग में हड्डी के ऊतकों (Bone tissues) में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस की क्षति होने लगती है। हड्डी के यही मूल तत्व होते हैं। यह प्रायः विटामिन-डी की कमी के कारण होता है जो सीधे तौर पर कैल्शियम को खत्म करता है। इस रोग में रीढ़ की हड्डी और हाथों-पैरों की हड्डियों में विकृति आ जाती है और रोगी टेढ़ा-मेढ़ा होकर चलता है।

4. सूखा रोग (Rickets) – यह हड्डियों का रोग प्राय: बच्चों में होता है।  बच्चों में हड्डियों का नरम पड़ जाना या  कमजोर होने को सूखा रोग कहा जाता है। खून में कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी होने पर शरीर, हड्डियों से कैल्शियम लेकर रक्त को संतुलित रखता है जिससे हड्डियां  मुलायम हो जाती हैं और इनकी संरचना कमजोर पड़ जाती है। पैरों का टेढ़ा होना, रीढ़ की हड्डी का असामान्य टेढ़ा हो जाना, छाती की हड्डियों का बाहर आना, टखने और कलाइयों का आकार बढ़ना, जोड़ों के बीच की जगह अधिक हो जाना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

5. अपतानिका (Tetany) – नसों, मांसपेशियों और हृदय के सुचारु रूप से काम करने के लिये कैल्शियम की आवश्यकता होती है। जब कैल्शियम बहुत कम हो जाता है तब यह रोग होता है। इसमें नसों की गतिविधियां बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसके लक्षणों में मांसपेशियों में दर्द, अंगूठों या होठों पर झनझनाहट और हृदय से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। इस रोग में मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द निरन्तर बने रहते हैं। इस रोग की गंभीर अवस्था में गुर्दे की बीमारी भी होने की संभावना रहती है या मृत्यु भी हो जाती है। 

आयु के अनुसार कैल्शियम की मात्रा – Calcium Intake By Age

1. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, व्यक्ति की आयु के अनुसार कैल्शियम की खुराक में अंतर होता है। भारतीयों के लिए Recommended Dietary Allowances निम्न प्रकार है –

शिशु (0-1 साल): 500 mg 

बच्चे  (1-9 साल): 600 mg

किशोर (10 – 18 साल): 800 mg

वयस्क: 600 mg

गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं: 1200 mg

2. परन्तु कुछ डॉक्टर्स के अनुसार कैल्शियम की खुराक निम्न प्रकार होनी चाहिये –

0 से 6 महीने  

लड़का 200 mg.  लड़की 200 mg.

7 से 12 महीने  

लड़का 260 mg.  लड़की 260 mg. 

1 से 3 वर्ष   

लड़का 700 mg    लड़की 700 mg.

4 से 8 वर्ष  

लड़का 1,000 mg. लड़की 1,000 mg.

9 से 13 वर्ष 

लड़का  1,300 mg. लड़की 1,300 mg.

14 से 18 वर्ष 

पुरुष 1,300 mg. महिला 1,300 mg.  

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला 1,300 mg.

19 से 50 वर्ष

पुरुष 1,000 mg.   महिला 1,000 mg.

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला 1,000 mg.

51 से 71 वर्ष

पुरुष 1,000 mg.   महिला 1,200 mg

71 वर्ष से ऊपर 

पुरुष और महिला 1,200 mg

3. देसी हैल्थ क्लब की यहां स्पष्ट करना चाहता है कैल्शियम की औसतन मात्रा निम्न प्रकार ली जा सकती है –

1 से 8 वर्ष – 600 mg से 1000 mg

9 से 18 वर्ष – 800 mg से 1300 mg

19 से 50 वर्ष – 800 mg से 1000 mg

51 वर्ष से ऊपर

पुरुष 600 mg से 1000 mg

महिलाऐं  800 mg से 1200 mg

गर्भवती एवं स्तनपान 

कराने वाली महिलाएं: 1200 mg

कैल्शियम के श्रोत – Sources of Calcium

खस खस, तिल, बीन्स, खोया, पनीर, दही, मट्ठा, रागी (सूखे क्षेत्रों में उगाये जाने वाला मोटा अनाज), दूध (गाय, भैंस), अजवाइन, चिया के बीज, मसूर, बादाम, केकड़ा (समुद्री), सूअर का मांस, सैल्मन मछली। 

कैल्शियम की कमी को पूरा करने के उपाय – Home Remedies for Calcium Deficiency

1. दूध (Milk)- जब भी कैल्शियम की कमी की बात चलती है, दूध का नाम वरियता में सबसे ऊपर आता है। यह कैल्शियम का सर्वोत्तम श्रोत माना जाता है। गाय के 100 ग्रा। दूध में 113 मि.ग्रा. कैल्शियम मिल जाता है। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिये रोजाना दूध पीना बहुत जरूरी है। जिनको दूध पीना अच्छा नहीं लगता वे दूध में दो छोटी इलायची उबाल कर दूध पी सकते हैं। इससे दूध से आने वाली महक खत्म हो जायेगी। 

2. पनीर (Cheese)- कैल्शियम की कमी पूरा करने के लिये पनीर का सेवन बहुत अच्छा विकल्प है। यह उन लोगों के लिये भी अच्छा विकल्प है जो दूध नहीं पीना चाहते या किसी कारणवश दूध नहीं पी सकते। 100 ग्राम पनीर में लगभग 721 मि.ग्रा. कैल्शियम होता है। पनीर से कैल्शियम के साथ-साथ प्रोटीन भी मिल जाता है। यह हड्डियों को मजबूती देने के साथ-साथ उच्च रक्तचाप को भी नियन्त्रित करता है।

3. बादाम (Almond)- यदि ड्राई-फ्रूट्स की बात की जाये बादाम कैल्शियम का बेहतरीन श्रोत है। 100  ग्राम बादाम से लगभग 248 मि.ग्रा. कैल्शियम मिल जाता है। रात को 4-5 बादाम पानी में भिगो दें। सुबह इनका छिलका उतार कर या तो ऐसे ही खा लें या पीसकर दूध में मिलाकर पीयें। बादाम के साथ-साथ दूध से भी कैल्शियम मिल जायेगा।

4. तिल (Mole)- कैल्शियम की कमी को पूरा करने का एक और अद्भुत श्रोत है तिल। एक बड़े चम्मच तिल में 88 मि.ग्रा. कैल्शियम होता है। तिल का सेवन करना स्वास्थ के लिये बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसे अपने आहार में शामिल करें। रोजाना दो चम्मच तिल का सेवन करने से कैल्शियम की कमी पूरी होगी। आप इसे अनाज के रूप में, सूप या सलाद में डालकर, लड्डू या चिक्की के रूप में ले सकते हैं। 

5. अंजीर (Fig)- अंजीर, 83% प्राकृतिक मिठास (Neutral Sugar) वाला दुनियां का शायद इकलौता फल जो सूखने के बाद भी ड्राई-फ्रूट्स की श्रेणी में अंजीर के नाम से ही जाना जाता है। अंजीर को स्वास्थ्य के लिये अत्यंत लाभकारी और ब्लड प्रेशर नियन्त्रित करने के लिये बेहतरीन माना जाता है। इसमें कैल्शियम के साथ-साथ फाइबर और पोटैशियम की भी पर्याप्त मात्रा पायी जाती है। 100 ग्राम अंजीर में 35 मि.ग्रा. कैल्शियम होता है। हड्डियों के स्वास्थ के लिये फायदेमंद अंजीर का सेवन करें। 2-3 अंजीर फल या सूखे अंजीर खा सकते हैं। या 2-3 अंजीर रात को दूध में भिगो दें ताकि वो अच्छे से फूल जायें, सुबह इन फूले हुऐ अंजीरों को खायें। या एक अंजीर और दो बादाम रात को पानी में भिगो दें, सुबह इनको खायें। निश्चित रूप से फायदा होगा।  

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6. संतरा (Orange)- विटामिन-सी और डी से भरपूर संतरे में कैल्शियम  की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है। 100 ग्राम संतरा में 43 मि.ग्रा. कैल्शियम होता है। इसके प्रतिदिन सेवन से कैल्शियम की कमी पूरी की जा सकती है। यह हड्डियों को मजबूती देकर विटामिन-सी और डी को भी पूरा करेगा।

7. रागी (Ragi)- रागी, अफ्रीका और एशिया के सूखे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अन्न है, भारत में उगाये जाने वाले ज्वार, जौं, मक्का, बाजरा के समान। इसे मड़ुआ, मंडुआ, फिंगर मिलेट (Finger millet) आदि नामों से भी जाना जाता है।  प्रति 100 ग्राम रागी में 3.44 ग्रा. कैल्शियम होता है। इसका हफ्ते में एक या दो बार सेवन करें। इसे आप दलिया, हलवा या खीर के रूप में खा सकते हैं। 

8. आँवला (Amla)- विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर आँवला शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। आँवला का सेवन सम्पूर्ण स्वास्थ के लिये बहुत लाभकारी होता है। आँवला में भी कैल्शियम की मात्रा होती है। इसका जूस पीने से विशेष लाभ होता है। कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिये आँवला का सेवन किया जा सकता है। 

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9. गिलोय (Giloy)- आयुर्वेद में आँवला और ऐलोवीरा के समाध ही गिलोय का विशेष स्थान है। गिलोय में गिलोइन नामक ग्लूकोसाइड और टीनोस्पोरिन, पामेरिन एवं टीनोस्पोरिक एसिड, कॉपर, आयरन, फास्फोरस, जिंक,कैल्शियम, मैग्नीशियम मौजूद होते हैं। गिलोय में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होती है। कैल्शियम की कमी दूर करने के लिये गिलोय का रस पीयें। गिलोय का चूर्ण भी इस्तेमाल सेवन कर सकते हैं।  

10. जीरा (Cumin)- जीरा व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ का भी ध्यान रखता है। जीरा व्यंजनों में डालकर तो खाते ही हैं, इसका पानी पीना अत्यंत लाभदायक होता है। इसमें कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है। 100 ग्रा। जीरा में 931 मि।ग्रा। कैल्शियम की मात्रा होती है। कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिये एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबाल लें। जब यह पानी ठंडा हो जाये तो दिन में दो बार पीयें।  या एक चम्मच जीरा को रात को पानी में भिगो दें।  सुबह खाली पेट इस पानी को पीयें। दो हफ्ते में ही फायदा हो जायेगा।

11. अदरक (Ginger)- अदरक भी कैल्शियम का अच्छा श्रोत है। 100 ग्राम अदरक से 16 मि।ग्रा। कैल्शियम मिल जाता है। कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिये अदरक का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिये अदरक को पानी में डाल कर उबाल लें, फिर इसमें थोड़ा सा शहद और आधा नींबू निचोड़ कर पीयें। ऐसा सुबह 20 दिन तक करें, कैल्शियम की कमी दूर हो जायेगी। 

12. नींबू (Lemon)- विटामिन से और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर नींबू कैल्शियम की कमी पूरी करने में मदद करेगा। 100 ग्राम नींबू के रस में 26 मि.ग्रा. कैल्शियम की मात्रा होती है। कैल्शियम की कमी दूर करने के लिये रोजाना एक गिलास नींबू पानी  जरूर पीयें।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको कैल्शियम की कमी को पूरा करने के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कैल्शियम क्या है, इसका काम क्या होता है, कैल्शियम की कमी क्या होती है, कैल्शियम की कमी के क्या कारण होते हैं, क्या इसके लक्षण होते हैं, कैल्शियम की कमी से कौन से रोग हो सकते हैं, आयु के अनुसार कैल्शियम की मात्रा कितनी होनी चाहिये, इन सबके बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको कैल्शियम के श्रोत बताये और कैल्शियम की कमी दूर करने के देसी उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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आज के लेख में हमने आपको कैल्शियम की कमी को पूरा करने के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कैल्शियम क्या है, इसका काम क्या होता है, कैल्शियम की कमी क्या होती है, कैल्शियम की कमी के क्या कारण होते हैं, क्या इसके लक्षण होते हैं।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · July 25, 2021 at 12:27 pm

So nice information

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