दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। आपने अक्सर देखा होगा कि कोई व्यक्ति चलते-चलते या अपने घर में बैठे-बैठे ही गिर जाता है। उसका शरीर अकड़ने लगता है, हाथ पैर बुरी तरह कांपने लगते हैं, दांत भिंच जाते हैं। देखते ही देखते उसके पास मजमां लग जाता है।  फिर उसे कोई पानी पिलाने की कोशिश करता है तो कोई हवा करने लगता है, कोई-कोई तो उसे चप्पल भी सुंघाने लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि उसे होश में लाने की कोशिश की जाती है। होश में आने के बाद भी वह हक्का-बक्का रहता है फिर थोड़ी देर बाद उसकी चेतना लौटती है। दोस्तो, हमारा इशारा उस बीमारी की तरफ है जिसे अक्सर भूत-प्रेत का साया या ऊपरी हवा का असर कहा जाता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मिर्गी की जिसे लाइलाज बीमारी कहा जाता है। परन्तु इसका भी इलाज है और वो है डॉक्टरी इलाज जोकि बहुत समय तक चलता है। देसी उपाय इसको नियन्त्रित करके राहत पहुंचा सकते हैं। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “मिर्गी का घरेलू उपाय”।  देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको मिर्गी के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इससे राहत पाने के देसी उपाय क्या हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि मिर्गी क्या होती है। 

मिर्गी से राहत पाने के उपाय

मिर्गी क्या है ?- What is Epilepsy?

दोस्तो, मिर्गी तंत्रिका तंत्र (Neuron) से संबंधित एक बीमारी है जिसे मस्तिष्क का रोग भी कहा जाता है ना कि कोई भूत-प्रेत का साया या ऊपरी हवा। इस रोग में मरीज को दौरे (Fits) पड़ते हैं। और जब दौरे पड़ते हैं तो उसका कुछ समय के लिये मानसिक और शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है। वह लगभग अपने होश-ओ-हवास खो चुका होता है। उसका शरीर कांपने लगता है, हाथ पैर अकड़ने लगते हैं, कई बार तो मुंह से झाग भी आ जाते हैं। यह किसी भी आयु में किसी को भी हो सकता है। समय रहते इसका डॉक्टरी इलाज करा लेना चाहिये। इस बीमारी का इलाज बहुत लंबा चलता है परन्तु ये लाइलाज नहीं है। 

मिर्गी के दौरे कितने प्रकार के होते हैं? – What are the Types of Epileptic Seizures?

मिर्गी के दौरे मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं जिनके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं 

1. आंशिक दौरे (Partial Seizures)- आंशिक दौरे में मस्तिष्क का केवल एक हिस्सा प्रभावित होता है। इसमें हल्के दौरे आते हैं और कुछ सेकंड तक ही रहते हैं। इनको पहचानना भी मुश्किल होता है क्योंकि मरीज होश में ही रहता है और उसे कई बार पता भी नहीं चलता। ये समझ लीजिये कुछ पल का बहुत ही हल्का भूकंप।

2. पूर्ण दौरे (Full Tour)- पूर्ण दौरे में मस्तिष्क के दोनों भाग प्रभावित होते हैं। ये कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकते हैं। इसमें मरीज को होश नहीं रहता। ये बहुत मजबूत और अनियंत्रित दौरे होते हैं जिसमें मरीज का शरीर अकड़ जाता है। इससे मांसपेशियों में गड़बड़ भी होने की संभावना रहती है। इसे बड़ा भूकंप समझ सकते हैं।

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मिर्गी का दौरा पड़ने के कारण -Cause of Epileptic Seizures

1. मस्तिष्क का काम तंत्रिका कोशिका (Neuron) द्वारा स्पष्ट संकेत देने पर निर्भर करता है। यह तंत्रिका कोशिका एक उत्तेजनीय कोशिका है जो तंत्रिका तंत्र में स्थित होती है।  इसका काम मस्तिष्क को सूचना भेजना, ग्रहण करना और विश्लेषण करना है। यह काम विद्युत-रासायनिक संकेत के द्वारा किया जाता है। जब इस काम में किसी प्रकार की बाधा आती है, जैसे कि मस्तिष्क को स्पष्ट संकेत ना मिल पाना, तब मस्तिष्क के काम में समस्या आती है और मरीज को मिर्गी का दौरा पड़ता है। 

2. मस्तिष्क में ऑक्सीजन पहुंच पाना।

3. कभी सिर पर चोट लगी हो।

4. ब्रेन ट्यूमर होने के कारण 

5. लकवा मार जाना

6. मासिक धर्म में अनियमितता या मासिक धर्म से ही जुड़ी कोई अन्य समस्या।

7. बिजली का झटका लगना

8. शराब का अधिक सेवन करना

9. नशीली दवाओं का सेवन

10. संक्रामक बुखार भी इसका कारण बन सकता है।

मिर्गी के लक्षण – Symptoms of Epilepsy

1. दौरा पड़ने पर मरीज के हाथ-पैर अकड़ने लगते हैं।

2. शरीर कांपने लगता है और ऐंठ जाता है।

3. दांत भिंच जाना

4. मुंह से झाग निकलना

5. मांसपेशियों का अचानक फड़कना

6. भावशून्य हो जाना, कुछ भी समझ ना आना।

7. लगातार एक ही तरफ टकटकी लगाये देखते रहना

मिर्गी के बारे में लोगों के मन में फैली भ्रांतियां – Misconceptions Spread in the Minds of People about Epilepsy

1. भूत-प्रेत, ऊपरी हवा का साया है।

2. इसका तो बस झाड़-फूंक ही इलाज है।

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3. इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। 

4. यह लाइलाज बीमारी है।

5. यह कभी खत्म नहीं होती।

6. देसी या अंग्रेजी दवाओं के सहारे यह दब तो जाती है यानी कुछ हद तक इसे कंट्रोल किया जा सकता है। 

मिर्गी के इलाज को लेकर डॉक्टरों की राय – Opinion of Doctors Regarding the Treatment of Epilepsy

1. डॉ. ब्रह्मदीप सिंधू का मानना है कि “मिर्गी लाइलाज बीमारी नहीं है। इसका उपचार थोड़ा लंबा है, लेकिन इस पर काबू पाया जा सकता है। इसका इलाज सिर्फ मेडिकल साइंस से ही संभव है, किसी झाड़-फूंक से नहीं”। 

2. मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता का कहना है कि “मिर्गी दो तरह की होती है। कुछ मरीजों के दिमाग के एक हिस्से में दौरा पड़ता है, तो कुछ मरीजों को दिमाग के पूरे हिस्से में। यदि समय पर मरीज को इलाज मिल जाये तो 2 से 3 साल दवा खाने से यह बीमारी ठीक हो जाती है।  20 से 30 प्रतिशत मरीजों को पूरी जिंदगी दवा खानी पड़ती है जबकि 10 से 20 प्रतिशत मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है”। 

3. क्यूआरजी अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नजीब-उर-रहमान का मानना है कि लोगों को चाहिये कि वह बीमारी से जुड़ी गलत जानकारियों व सूचनाओं पर ध्यान न देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करें।

देसी हैल्थ क्लब की राय – Opinion of Desi Health Club

दोस्तो, यह तो तय है कि मिर्गी कोई भूत-प्रेत या ऊपरी हवा का साया नहीं है बल्कि एक बीमारी है, मस्तिष्क विकार है। इसलिये इसका डाक्टरी उपचार ही कराना चाहिये, बेशक चाहे लंबा इलाज चले परन्तु मरीज ठीक हो जायेगा। देसी उपचार से केवल इसको काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। 

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मिर्गी का घरेलू उपाय – Home Remedy for Epilepsy

1. विटामिन युक्त आहार (Vitamin Rich Diet)- दोस्तो, बीमार व्यक्ति ही नहीं बल्कि स्वस्थ व्यक्ति को भी पोषक तत्वों वाला भोजन करना चाहिये जो, प्रोटीन, खनिज और विटामिन से भरपूर हो। बीमार व्यक्ति को दवाओं को झेलने की ताकत मिलती है और वह जल्दी ठीक होता है। जहां तक मिर्गी का प्रश्न है तो मरीज के लिये विटामिन वाला आहार और भी जरूरी हो जाता है। विटामिन-ई में तंत्रिका कोशिका (Neuron) को कंट्रोल करने में सामर्थ्य होता है। मिर्गी के इलाज में दी जाने वाली कुछ दवाओं से विटामिन-डी की कमी हो जाती है। इसलिये इसको भी पूरा करना जरूरी हो जाता है। विटामिन-बी1 की कमी भी मिर्गी होने के कारण बनता है। कई बार डॉक्टर खुद ही विटामिन-बी1 के सप्लीमेंट दे देते हैं। विटामिन-बी6, विटामिन-बी12 और विटामिन-डी भी मिर्गी के इलाज में कारगर होते हैं। बेहतर होगा यदि मरीज के भोजन में ये सभी विटामिन हों अन्यथा डॉक्टर से इनके सप्लीमेंट लिये जा सकते हैं। 

2. योग, ध्यान (Meditation) और प्राणायाम – योग, ध्यान और प्राणायाम से अनेकों बीमारियों से राहत पाई जा सकती है। ये शारीरिक बीमारियों के अलावा मानसिक विकारों को भी दूर करने में लाभ पहुंचाते हैं। चूंकि मिर्गी एक मानसिक विकार है इसलिये योग, ध्यान और प्राणायाम से इसे नियन्त्रित करने में मदद मिलेगी। सुबह के समय ध्यान करने से मस्तिष्क शांत रहता है और सांयकाल में ध्यान करने से सारे दिन की मानसिक थकावट दूर होगी जिससे मस्तिष्क रिलैक्स फील करेगा और शांत रहेगा। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम और कपालभाति से लाभ होगा और योग में शीर्षासन, बालासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम और कपोतासन मिर्गी को नियन्त्रित करने में मदद करेंगे। 

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3. व्यायाम (Exercise)- प्रतिदिन व्यायाम करने से आप चुस्त, दुरुस्त और ऊर्जावान रहते हैं। व्यायाम करने से रक्त प्रवाह सुधरने के साथ-साथ मस्तिष्क तक ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है। शरीर को ठीक करने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं। मिर्गी के मरीज के लिए सुबह की सैर यानी चलना बहुत ही सरल और सुरक्षित व्यायाम है। प्रतिदिन कम से कम से कम 45 मिनट सामान्य या सामान्य से थोड़ा तेज गति से चलें जैसे भी आपको सुविधा हो। ज्यादा स्ट्रैस लेने की जरूरत नहीं। तैराकी भी एक अच्छा व्यायाम है या पानी का ही कोई अन्य खेल मिर्गी से राहत दिला सकता है। व्यायाम के बाद खूब पानी पीयें। इससे रिलैक्स फील होगा। 

(कृपया ध्यान रखें कि मरीज सुबह की सैर करने या तैराकी के लिये अकेला ना जाये)

मिर्गी के कुछ परम्परागत देसी उपाय – Some Traditional Home Remedies for Epilepsy

1.  तुलसी (Basil)- मिर्गी से राहत पाने के लिये तुलसी का उपयोग इस प्रकार किया जा सकता है –

(i)  प्रतिदिन तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खायें।

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(ii) मिर्गी का दौरा पड़ने पर तुलसी की पत्तों के साथ कपूर सुंघायें। रोगी को होश आ जायेगा। 

(iii) मिर्गी का दौरा पड़ने पर तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें  सेंधा नमक मिलाकर मरीज की नाक में डालें। 

2. सीताफल (Cilantro)- सीताफल के पत्तों का रस भी, उसमें सेंधा नमक मिलाकर मरीज की नाक में डाला जा सकता है।

3. पेठा या कद्दू(Pita or Pumpkin)- पेठा जिसे कई लोग कद्दू भी कहते हैं, मिर्गी के इलाज के लिये सबसे बेहतरीन परम्परागत देसी उपाय माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो मस्तिष्क के नाडी-रसायन को संतुलित करने में मदद करते हैं। इसकी सब्जी बनाकर मरीज को खिलाइये। इसका जूस बनाकर पिलाइये इससे अधिक लाभ होगा। जूस को स्वादिष्ट बनाने के लिये इसमें चीनी (नमकीन बनाना है तो सेंधा नमक) और मुलेहटी का पाउडर मिला सकते हैं। 

4. अंगूर का जूस (Grape Juice)- मिर्गी के उपचार में उत्तम माना जाता है। लगभग छः महीने लगातार सुबह खाली पेट एक गिलास अंगूर का जूस मिर्गी के रोगी को पिलायें। मिर्गी से छुटकारा मिल जायेगा। 

5. अंगूर और शहतूत का जूस (Grapefruit and Mulberry Juice)- सुबह खाली पेट, रोजाना एक गिलास अंगूर और शहतूत का जूस पीने से मिर्गी में आराम लग जायेगा।

6. नींबू (Lemon)- नींबू में हींग पाउडर या गोरखमुंडी मिलाकर रोजाना चूसें। कुछ ही दिनों में ही मिर्गी के दौरे बंद हो जायेंगे। नींबू में केवल हींग पाउडर ही छिड़का जा सकता है। इसे चूसने से भी आराम लगेगा। 

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7. आयुर्वेद में मिर्गी के उपचार के लिये प्याज का इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है। 2-3 सफेद प्याज का जूस निकाल कर पानी में मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट मरीज को पिलायें। इसे 1, 2 महीने जारी रखें। आराम लग जायेगा। 

8. कटेरी (Kateri)- कटेरी को कंटकरी के नाम से भी जाना जाता है। मिर्गी के उपचार के लिये यह सबसे उपयोगी प्राकृतिक जड़ी-बूटी है।  इसका ताजा रस लेकर प्रतिदिन 2-2 बूंद नाक में डालें।  मिर्गी के दौरे में राहत मिलेगी।

9. प्रतिदिन दस ग्राम गाय के दूध से बना मक्खन खायें।  मिर्गी में आराम मिलेगा। 

10. दूध में लहसुन उबालकर रोजाना पीयें। यह सिलसिला लंबे समय तक चलेगा। 

11. सरसों के तेल में लहसुन तलकर रोजाना खाने से भी मिर्गी से राहत मिलती है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको मिर्गी का घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से आपको विस्तारपूर्वक बताया कि मिर्गी क्या होती है, इसके दौरे कितने प्रकार के होते हैं, मिर्गी का दौरा पड़ने के कारण, इसके लक्षण, मिर्गी के बारे में फैली भ्रान्तियां, मिर्गी के इलाज को लेकर डॉक्टर्स की राय क्या है, देसी हैल्थ क्लब की राय और मिर्गी से राहत पाने के देसी उपाय क्या हैं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

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Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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