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लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान – Side Effects of Running Laptop in Lap in Hindi

लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। कहा जाता है कि डेस्कटॉप कंप्यूटर गये-गुजरे जमाने के बोरिंग मशीन बन कर रह गये हैं क्योंकि इनको बस एक ही जगह पर चलाया जा सकता है। लेकिन हल्के और छोटे “लैपटॉप” की बात ही कुछ और है। यह एक ऐसा यंत्र है जिसका आविष्कार भारी-भरकम डेस्कटॉप कंप्यूटर के विकल्प स्वरूप हुआ है। इसको जहां मर्जी ले जाइये और जैसे मर्जी चलाइये। बैठकर गोद में रखिए और चलाइये, ना किसी टेबल की जरूरत और ना किसी स्टूल आदि की। परन्तु आविष्कारक संभवतः इस बात को भूल गये या यह सोचा ही नहीं कि भविष्य में “मनुष्य” इस लैपटॉप नामक यंत्र के साथ ऐसी-ऐसे हरकतें करेगा जिनके परिणाम इनके शरीर और मस्तिष्क को भुगतने पड़ेंगे। कभी कोई इसे टांगों पर रखकर चलायेगा तो कोई इसे गोद में भरकर, कभी बैड पर रखकर झुक कर तो कभी बैठकर दीवार के साथ सिर लगाकर अधलेटी मुद्रा में। ये सब हरकतें डेस्कटॉप कंप्यूटर के साथ नहीं की जा सकतीं। इसे केवल बैठकर सभ्य तरीके से ही चलाना पड़ता है ना कि लैपटॉप की तरह असभ्य तरीके से। दोस्तो, मनुष्य की हरकतों के फलस्वरूप अर्थात् लैपटॉप को गोद में रखकर चलाने से, जो नुकसान होते हैं उन पर हम प्रकाश डालेंगे और यही है हमारा आज का टॉपिक “लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान”

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको लैपटॉप के बारे में मूल (Basic) जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि लैपटॉप को गोदी में रखकर चलाने के क्या नुकसान होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि लैपटॉप क्या है और लैपटॉप की यात्रा। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान
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लैपटॉप क्या है? – What is a Laptop? 

सबसे पहले हम स्पष्ट कर दें कि अंग्रेजी के शब्द लैप (Lap) का अर्थ ही गोद होता है। बड़े-बड़े तकनीशियनों, इंजिनियरों, विशेषज्ञों ने ऐसी संकल्पना के बारे में सोचा जो डेस्कटॉप कंप्यूटर का सब्स्टिट्यूट हो, जिसे कहीं भी ले जाया जा सके, इसे चलाने के लिये किसी विशेष आधार की जरूरत ना हो और जिसे गोद में रखकर भी चलाया जा सके। इस संकल्पना पर आधारित जो पोर्टेबल कंप्यूटर दुनियां के सामने निकलकर आया उसे लैपटॉप के नाम से जाना जाता है। लैपटॉप का पूरा नाम लाइटवेट एनालिटिकल प्लेटफॉर्म ऑप्टिमाइज्ड पावर (Lightweight Analytical Platform Total Optimized Power) है। यह एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस है जो डेस्कटॉप कंप्यूटर का पूर्ण और उत्तम विकल्प है। लैपटॉप बिजली ना होने की स्थिति में यह पावर बैकअप पर आसानी से चलता है। लैपटॉप में बैटरी इंबिल्ट होती है। बैटरी सैक्शन बैटरी को चार्ज करने और लैपटॉप को बैकअप देने का काम करता है। बैटरी को समय-समय पर चार्ज करना पड़ता है।

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लैपटॉप को बैग में रखकर कहीं भी आसानी से लेकर जाया जा सकता है क्योंकि यह आकार में बहुत छोटा और वजन में बहुत कम होता है। इसका की-बोर्ड और स्पीकर्स भी लैपटॉप में इंबिल्ट होते हैं, माउस की जरूरत नहीं होती। हालांकि माउस अलग से भी लगाया जा सकता है, इसके लिये लैपटॉप में पोर्ट बना होता है। लैपटॉप स्क्रीन का आकार सामान्यतः 10 से 17 इंच, इसका वज़न 3 किलो से कम और मोटाई 2 से 3 इंच होती है। जहां तक रिज़ॉल्यूशन की बात है तो समझिये कि हाई रिज़ॉल्यूशन का अर्थ है उत्तम छवि गुणवत्ता। अधिकतर लैपटॉप, सस्ते वाले भी, फुल एचडी रिज़ॉल्यूशन (1920×1080 पिक्सल) वाले होते हैं। कस्टमर इसी को एक मानक (Standard) मान लेते हैं।  

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लैपटॉप की यात्रा – Laptop Travel 

लैपटॉप की यात्रा का विवरण निम्न प्रकार है –

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1. 1975 – सितंबर 1975 में जारी किया गया .BM 5100 पहला पोर्टेबल कंप्यूटर था जिसका वज़न 55 पाउंड था। इसमें 5 इंच का CRT Display, टेप ड्राइव 1.9 Mhz का पाम प्रोसेसर और 64 KB रैम था। 

2. 1981 – एडम ओसबोर्न द्वारा निर्मित Osbern को वास्तव में पहला पोर्टेबल कंप्यूटर या लैपटॉप माना जाता है। इसे अप्रैल 1981 में जारी किया गया था। वज़न 24.5 पाउंड, डिस्प्ले 5 इंच, मेमोरी 64 KB, दो 5 ¼ फ्लॉपी ड्राइव, CP/M 2।2 Operating System और एक Modem वाले इस लैपटॉप की कीमत $1795 थी। 

3. 1984 – 1984 में, IBM PCD ने IBM पोर्टेबल कंप्यूटर जारी किया जिसका वज़न 30 पाउंड था।

4. 1986 – IBM PCD ने अपने पहले लैपटॉप कंप्यूटर PC Convertible की 1984 में, घोषणा की। इसका वज़न 12 पाउंड था।

5. आजतक – रोज-रोज बदलती जरूरतें और तकनीक को ध्यान में रखते हुए, लैपटॉप के रंग-रूप, आकार वज़न और कीमत में बदलाव आते रहे हैं, और इसकी यात्रा जारी है। 

लैपटॉप के प्रकार – Types of Laptop

अब बताते हैं कि लैपटॉप कितने प्रकार के होते हैं। इनका विवरण निम्न प्रकार है –

1. पारंपरिक (Traditional) लैपटॉप – सामान्यतः पारंपरिक लैपटॉप ही ज्यादातर उपलब्ध होते हैं। चुनाव कस्टमर अपनी जरूरत को ध्यान में रख कर करता है। किसी को शिक्षा के लिये तो किसी को बिज़नेस के लिये या कोई अपने प्रोफेशन के हिसाब से इसकी जरूरत होती है। कई कंपनियां मॉडल सुविधाओं और घटकों की एक विस्तृत श्रृंखला अपने उत्पाद परिवार में मुहैय्या कराते हैं। कस्टमर की जरूरत और उसके प्रोफेशन के अनुसार प्रोसेसिंग पावर और मेमोरी, रैम, ग्राफिक्स कार्ड, वीडियो कार्ड, फीचर्स आदि की व्यवस्था कंपनी द्वारा की जाती है। 

2. परिवर्तनीय या संकर (Convertible or Hybrid) – इनको 2-इन-1 पीसी परिवर्तनीय लैपटॉप , 2-इन-1 टैबलेट, 2-इन-1 लैपटॉप, 2-इन-1 डिटेचेबल लैपलेट, टैबटॉप, लैपटॉप टैबलेट के नाम से भी जाना जाता है। ये टैबलेट और लैपटॉप दोनों की विशेषताओं वाला पोर्टेबल कंप्यूटर है। इनकी स्क्रीन 360° तक घूम जाती है और ये टचस्क्रीन टैबलेट भी बन जाएंगे। माइक्रोसॉफ्ट का सरफेस सीरीज में माइक्रोसॉफ्ट सर्फेस प्रो एक्स एक ऐसा ही हाइब्रिड लैपटॉप है जो विंडोज 11 प्लेटफार्म पर चलता है। सर्फेस प्रो 3, डिटेचेबल की-बोर्ड के साथ एक किकस्टैंड हिंज लैपटॉप है। 

3. बीहड़ लैपटॉप (Rugged Laptop) – ऐसे लैपटॉप धूल भरे या गीले वातावरण और बेहद खराब परिस्थितियों में मज़बूती से संचालित होने के लिये ही बनाया जाता है। इनका निर्माण मुख्य रूप से औद्योगिक, निर्माण और सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग के लिये किया जाता है। ये सामान्य लैपटॉप की तुलना में इनका अधिक मोटा और मजबूत आवास होता है। 

4. डेस्कटॉप प्रतिस्थापन लैपटॉप (Replacement Laptop)- ये ऐसे लैपटॉप होते हैं जिनको डेस्कटॉप को रिप्लेस करने के लिये उपयोग में लाया जाता है। ये पोर्टेबल नहीं होते क्योंकि इनका वज़न अधिक होता है, इनकी स्कीन भी बड़ी होती है, 20 इंच तक भी हो सकती है और इनमें रूमियर की-बोर्ड लगा होता है। इनको कहीं लेकर जाना आसान नहीं होता। 

5. नोटबुक (Notebook) – ये गेम और मल्टीमीडिया के लिए बहुत सोफेस्टिकेटिड ग्राफिक्स होते हैं और इनमें साउंड कार्ड लगा होता है। इनको Garden-variety लैपटॉप के नाम से भी जाना जाता है। इनको नोटबुक मानने के लिये इनका वज़न 5-8 पाउंड होना चाहिये, स्क्रीन 13 इंच से लेकर 16 इंच तक और यह पोर्टेबल भी होना चाहिए। 

6. नैटबुक (Netbook) – ये बहुत ही छोटे साइज़ के होते हैं और कीमत में सस्ते। अन्य लैपटॉप की तुलना में इनका प्रोसेसर कम शक्तिशाली होता है। इसका की-बोर्ड भी बहुत छोटा होता है। 

7. टैबलेट (Tablet) –  ये मल्टीटास्क लैपटॉप होते हैं। इनका इस्तेमाल प्रोफेशनल अपने कार्यों के लिए करते हैं। ये आकार में छोटे और पतले होते हैं। ये मल्टीटास्क लैपटॉप होते हैं और बहुत लोकप्रिय भी हैं। इनका डिस्प्ले बहुत छोटे मॉनिटर से लेकर बड़े तक हो सकते हैं। ये बहुत शक्तिशाली होते हैं इसीलिये महंगे भी होते हैं। 

8. अल्ट्राबुक (Ultrabook) – ये Long बैटरी लाइफ के लिए पावर प्रोसेसर पर फंक्शन करते हैं। ये बहुत पतले होते हैं, वज़न केवल 3 पाउंड तक होता है और स्क्रीन 15 इंच तक हो सकती है। इनका की-बोर्ड छोटा होता है।

लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां – Laptop Manufacturers

लैपटॉप बनाने वाली कुछ कंपनियों के नाम निम्न प्रकार हैं – 

1. हेवलेट पैकर्ड Hewlett Packerd (HP)

2. सोनी (Sony)

3. एप्पल (Apple)

4. एचसीएल (HCL)

5. डेल (Dell) 

6.  कॉम्पैक (Compaq)

7. तोशिबा (Toshiba)

8. लेनोवो (Lenovo)

9. सैमसंग (Samsung)

10. एसर (Acer)

11. एएसयूएस (ASUS)

12. आईबीएम (IBM)

13. आईबॉल (iBall)

14.  माइक्रोमैक्स (Micromax)

15. लावा इंटरनेशनल (Lava International)

16. एजीपी (AGP)

17. स्मार्ट्रोन इंडिया (Smartron India)

18. आरडीपी लैपटॉप (RDP Laptop)

19. कोकोनिक्स (Coconics)

लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान – Side Effects of Running Laptop in Lap

दोस्तो, हर चीज को हैंडल करने का उसका उपयोग करने का एक उचित (Proper) तरीका होता है, चाहे वह लैपटॉप हो या कुछ और। यदि अनुचित तरीके से उपयोग करोगे तो निश्चित रूप से नुकसान ही होगा। यह बात लैपटॉप पर भी लागू होती है। इसे गोद में लेकर, बैड पर रखकर चलाने के हो सकते हैं निम्नलिखित शारीरिक और मानसिक नुकसान – 

1. बांझपन (Infertility) – लैपटॉप को गोद में रखकर चलाने का सबसे मुख्य और बड़ा नुकसान यह है कि इससे पुरुष और महिला दोनों में ही बांझपन का खतरा पैदा हो सकता है। यह बात अलग है महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में बांझपन की समस्या अधिक होती है। इसका कारण यह है कि महिलाओं का गर्भाशय शरीर के भीतर होता है जिसे कम और देर से नुकसान पहुंचता है जबकि पुरुष का जननांग और अंडकोष शरीर के बाहर की तरफ होते हैं। लैपटॉप से निकलने वाली हीट और रेडिएशन सीधे तौर पर जननांग और गर्भाशय को प्रभावित करते हैं। 

ये भी पढ़े- पुरुष बांझपन के घरेलू उपाय

लंबे समय तक गोद में रखकर लैपटॉप चलाने से, इससे निकलने वाली हीट से अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है। हीट और रेडिएशन से शुक्राणुओं की गुणवत्ता खराब होती है जो पुरुष बांझपन का मुख्य कारण है। यहां हम स्पष्ट कर दें कि यद्यपि लैपटॉप के अंदर साइड में कूलिंग फैन लगा होता है, (पहले कभी ये लैपटॉप की तलहटी में लगे होते थे) जो जाली के रास्ते लैपटॉप को ठंडा रखने के लिये इसकी हीट को बाहर निकालता है। परन्तु जब आप इसे गोद में लेकर, जांघों पर रखकर या बैड पर या तकिये पर या ब्लेंकेट पर रखकर चलाते हैं तो जाली के रास्ते में रुकावट आती है और हीट ठीक से नहीं निकल पाती। इसके साथ हमारे शरीर की हीट भी मिल जाती है और सीधे तौर पर हमारे शरीर को प्रभावित करती है। 

2. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में कमी (Decrease in Testosterone Hormone)– टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को पुरुषों का सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि पुरुषों कामेच्छा जगाने के लिए जिम्मेदार होता है। यह पुरुषों में यौन क्रियाओं और उससे यौन इच्छाओं के लिए मस्तिष्क के लिए संदेशवाहक के रूप में काम करता है। हमने ऊपर बताया है कि लंबे समय तक गोद में रखकर लैपटॉप चलाने पर इससे निकलने वाली हीट से अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है और रेडिएशन भी शुक्राणुओं को प्रभावित करता है। 

चूंकि टेस्टोस्टेरॉन का उत्पादन अंडकोष में होता है इसलिये हीट और रेडिएशन के प्रभाव से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन भी प्रभावित होता है जिससे इसमें कमी आने लगती है। टेस्टोस्टेरोन में कमी होने के कारण पुरुष में कामेच्छा, सेक्स ड्राइव और कामशक्ति में कमी आने लगती है। इतना ही नहीं शुक्राणुओं की संख्या में कमी आने लगती है तथा स्तनों के ऊतक भी बढ़ जाते हैं और सूज जाते हैं। 

3. पीठ और गर्दन में दर्द (Back and Neck Pain)- लैपटॉप को गोद में रखकर चलाने का मतलब है कि हम जानबूझ कर एक गलत पोस्चर को दावत दे रहे हैं जिसका परिणाम, निकट या दूर भविष्य में अत्यंत गंभीर हो सकता है। इससे सर्वाइकल की समस्या जन्म लेती है जिससे पीठ और गर्दन में दर्द रहने लगता है। क्योंकि जितने समय तक आप लैपटॉप को गोद में रखकर चलाते हैं, उतने समय तक अधिकतर आपकी पीठ और गर्दन लैपटॉप पर झुकी रहती है। यदि लैपटॉप को टेबल पर रखकर काम करेंगे तो आपका बॉडी पॉस्चर सही रहेगा और ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी। 

4. अनिद्रा की समस्या (Insomnia Problem)- मेलाटोनिन नामक हार्मोन, पीनियल ग्लैंड से स्रवित होता है। यह पीनियल ग्लैंड मस्तिष्क में स्थित होता है। यह हार्मोन नींद लाने के लिये जिम्मेदार होता है। यह शाम से स्रवित होना शुरु हो जाता है और धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ती जाती है। आधी रात में यह अपनी चरम सीमा पर होता है। यदि इस हार्मोन के स्रवित होने में कोई रुकावट आती है और यह समस्या कई दिनों, महीनों तक बनी रहे तो निश्चित रूप से अनिद्रा की समस्या का जन्म होता है जिसे मेडिकल भाषा में इंसोमनिया (Insomnia) कहा जाता है।

जब आप लैपटॉप को गोद में लेकर चलाते है तो उस समय अधिकतर आप लैपटॉप पर झुके हुए होते हो, और आपकी आंखें लैपटॉप स्क्रीन के बहुत पास होती हैं। लैपटॉप से निकलने वाली किरणें ना केवल आपकी आंखों को हानि पहुंचाती हैं बल्कि ये किरणें आंखों के जरिये मेलाटोनिन हार्मोन के स्रवित होने को रोक सकती हैं। परिणाम स्वरूप आप अनिद्रा का शिकार हो सकते हैं। 

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5. टोस्टेड स्किन सिंड्रोम (Toasted Skin Syndrome)- यदि आप गोद में रख कर लैपटॉप चलाते हैं तो तुरन्त इस आदत को बदलिये क्योंकि यह आदत “टोस्टेड स्किन सिंड्रोम” को दावत दे सकती है। इसे एरिथेमा एब इग्ने (Erythema ab igne – EAI) भी कहा जाता है। टोस्टेड स्किन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने के कारण, त्वचा का रंग बदल जाता है।

 त्वचा पर धब्बेदार लालिमा आ जाती है और हाइपरपिग्मेंटेड रैशेज पड़ जाते हैं। लैपटॉप को जांघों पर रखकर लंबे समय तक चलाने पर थर्मल बिल्डअप लगभग 44 डिग्री से अधिक का तापमान बनाता है, इससे सबसे ज्यादा जांघों की त्वचा प्रभावित होती है। पैरों की त्वचा पर दाने भी पड़ सकते हैं या त्वचा का रंग बदल सकता है। इनमें जलन भी हो सकती है। यह स्थिति त्वचा कैंसर को आमन्त्रित कर सकती है।

6. कंप्‍यूटर विजन सिंड्रोम (Computer Vision Syndrome)- हमने ऊपर बताया है कि लैपटॉप को गोद में लेकर चलाते है समय अधिकतर आप लैपटॉप पर झुके हुए होते हैं और आपकी आंखें लैपटॉप स्क्रीन के बहुत पास होती हैं। लैपटॉप से निकलने वाली किरणें ना केवल आपकी आंखों को हानि पहुंचाती हैं। यहां हम स्पष्ट करते हैं कि लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन वाले उपकरणों का उपयोग करने से आंखों पर जोर पड़ता है, आंखों से पानी आने लगता है, सिर में दर्द होने लगता है जिससे आंखों की दृष्टि प्रभावित होती है। इसी स्थिति को कंप्‍यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है। 

गोद में रखकर लैपटॉप चलाने से यह खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है। वस्तुतः कंप्‍यूटर विजन सिंड्रोम ऐसे लक्षणों का समूह है जो, लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन वाले उपकरणों जैसे पर्सनल कम्प्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टफोन आदि, का उपयोग करने के परिणाम स्वरूप प्रकट होते हैं। इन लक्षणों में, आंखों में खिंचाव, तनाव, आंखों की थकावट, आंखों में सूखापन, आंखों में खुजली, अस्पष्ट दृष्टि, दोहरा दिखाई देना, निकट दृष्टि दोष जिसे मायोपिया कहा जाता है, सिर में दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द आदि प्रकट हो सकते हैं। गोद में रखकर लैपटॉप चलाने से कई प्रकार के नेत्र विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं। 

7. कैंसर की संभावना (Chance of Cancer)- जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि गोद में रखकर लैपटॉप चलाने से टोस्टेड स्किन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है तो यह भविष्य में त्वचा के कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अतिरिक्त जांघों  पर रखकर लैपटॉप चलाने से महिलाओं में ओवेरियन कैंसर तथा पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। 

8. रेडिएशन (Radiation)- इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि इलैक्ट्रोनिक उपकरण कोई भी हो रेडिएशन छोड़ते हैं चाहे वह कंप्यूटर हो, लैपटॉप हो, मोबाइल फोन हो या किचन का माइक्रोवेव ओवन। हां, कौन उपकरण कितना छोड़ता है यह अलग से चर्चा का विषय हो सकता है। जहां तक लैपटॉप की बात है तो समझिये कि यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक कि यह वाईफाई से कनेक्ट नहीं होता और टेबल पर रखकर आप इससे दो फीट की दूरी बनाकर काम कर रहे हैं। 

यह एक सच्चाई है कि सभी इंटरनेट ड‍िवाइस रेडियोफ्र‍ीक्‍वेंसी का उपयोग करते हैं जो शरीर के लिये हानिकारक होता है। हॉर्डड्राइव से, लो फ्र‍ीक्‍वेंसी रेड‍िएशन निकलता है तो ब्‍लूटूथ कनेक्‍शन से हाई रेडिएशन। यह रेडिएशन उस समय और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब आप लैपटॉप को गोद में लेकर काम कर रहे होते हैं क्योंकि आपका शरीर लैपटॉप को छू रहा होता है। लैपटॉप और शरीर के बीच में कोई फासला नहीं होता। इसका प्रभाव शरीर के इतना सघन होता है कि आपकी त्वचा को गहरा नुकसान पहुंच सकता है।

लैपटॉप इस्तेमाल करने के सही तरीके – Correct Way to Use Laptop

दोस्तो, सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि लैपटॉप एक संवेदनशील डिवाइस है, इसलिये इसके प्रति हमको भी संवेदनशील होना पड़ेगा। इसको सही तरीके हैंडल करना ही इसकी रिस्पेक्ट करना है तभी ये हमें लंबे समय तक अच्छी सेवाएं दे पाएगा। इसको इस्तेमाल करने के कुछ सही तरीके हम बता रहे हैं जो निम्न प्रकार हैं –

1. हमें यह भी समझना होगा कि लैपटॉप, डेस्कटॉप कम्प्यूटर की तुलना में ज्यादा और तेज गर्म होता है। इसलिये काम करते-करते यदि गर्म हो गया है तो काम रोक कर लैपटॉप को रैस्ट देना चाहिये ताकि यह ठंडा हो जाये। ओवर हीटिंग से इसकी बैटरी खराब हो सकती है और फट सकती है। 

2. यदि आप पावर बैकअप से लैपटॉप चला रहे हैं तो बैटरी का ध्यान रखें। लो होने पर काम रोक कर पहले इसे चार्ज होने दें। जब चार्जिंग पर लगा हो उस समय भूलकर भी लैपटॉप का इस्तेमाल ना करें अन्यथा ओवर हीटिंग से इसकी बैटरी खराब हो जाएगी। 

3. बैटरी चार्ज होने के दरम्यान लैपटॉप का इस्तेमाल ना करें तथा चार्ज हो जाने के बाद भी तुरन्त लैपटॉप पर करना शुरु ना करें क्योंकि यह गर्म होता है। इसको ठंडा होने के लिये कम से कम 15 मिनट का समय दें। 

4. लैपटॉप को टेबल पर रखकर इस्तेमाल करें बेहतर होगा यदि कंप्यूटर टेबल का इस्तेमाल किया जाये।

5. सुनिश्चित करें कि लैपटॉप हाई मैग्नेटिक फील्ड वाली वस्तुओं से दूर रखकर काम करें, जैसे कि टीवी, बड़े स्पीकर्स, कुछ हाई टेक रेफ्रीजिरेटर आदि। लैपटॉप पर काम करते समय स्मार्टफोन भी लैपटॉप के पास पर रखा नहीं होना चाहिए।

6. लैपटॉप को बैड पर, तकिये पर या ब्लेंकेट पर रख कर रखकर ना चलाएं। इससे कूलिंग फैन के रास्ते में रुकावट आती है। 

7. लैपटॉप को कभी भी बैड पर अधलेटी मुद्रा में पेट के पास रख कर इस्तेमाल ना करें। इससे भी कूलिंग फैन के रास्ते में रुकावट आती है। 

8. लैपटॉप को भूल कर भी गोद में लेकर या जांघों पर रखकर इस्तेमाल ना करें। लैपटॉप का इस्तेमाल अंरने का यह सबसे अधिक खतरनाक तरीका है। इससे कूलिंग फैन के रास्ते में रुकावट आने पर हीट सीधी आपके शरीर को प्रभावित करती है साथ ही आपके शरीर की हीट से लैपटॉप भी जल्दी गर्म हो जायेगा। 

9. यदि आप बैड पर बैठकर लैपटॉप पर काम कर रहे हैं तो आपको बार-बार इस पर झुकना पड़ता है, इससे आपकी गर्दन, कमर और आंखों में दर्द होने लगता है। इसलिये बैड पर बैठकर लैपटॉप पर काम करने को अवॉइड करें। लैपटॉप को केवल टेबल पर रख कर ही इस्तेमाल करें। 

10. लैपटॉप पर (कंप्‍यूटर पर भी) ब्‍लू लाइट फिल्‍टर का उपयोग करें ताकि आंखों को रेडिएशन से बचाया जा सके। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान के बारे में जानकारी दी। लैपटॉप क्या है, लैपटॉप की यात्रा, लैपटॉप के प्रकार और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान बताये और लैपटॉप इस्तेमाल करने के बहुत सारे सही तरीके भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको लैपटॉप गोदी में रखकर चलाने के नुकसान के बारे में जानकारी दी। लैपटॉप क्या है, लैपटॉप की यात्रा, लैपटॉप के प्रकार और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया है।
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