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मिसलेनियस बीमा क्या है? – What is Miscellaneous Insurance in Hindi

मिसलेनियस बीमा क्या है?

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, बीमा यानि इंश्योरेंस आज के समय में एक आवश्यक आवश्यकता है। इसकी उपयोगिता को लोगों ने कोरोना महामारी के दौरान समझा और अपनाया। बीमा चाहे जीवन का हो, स्वास्थ का या संपत्ति का सबका अपना-अपना महत्व होता है। कुछ बीमा ऐसे होते हैं जो जीवन बीमा, अग्नि बीमा और समुद्री बीमा की श्रेणी से अलग होते हैं, इनको मिसलेनियस बीमा कहा जाता है। इनमें कुछ छोटे और कुछ बड़े बीमा शामिल होते हैं जैसे कि मोबाइल, लैपटॉप, फसल, मवेशी बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, वाणिज्यिक वाहन बीमा, व्यावसायिक देयता बीमा आदि। दोस्तो, हमारा आज का टॉपिक भी यही है “मिसलेनियस बीमा क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको मिसलेनियस बीमा से संबंधित जानकारी देगा। तो सबसे पहले जानते हैं कि बीमा क्या है और बीमा के प्रकार। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे। 

बीमा क्या है? – What is Insurance?

दोस्तो, बीमा वह साधन है या प्रावधान है जिसमें इच्छुक व्यक्ति अपने जीवन, स्वास्थ, सम्पत्ति या अन्य वस्तु आदि की भविष्य में होने वाली हानि का जोखिम, बीमा कंपनी को देता है। इसके बदले में बीमा कराने वाला व्यक्ति प्रतिमास, तिमाही, छमाही या प्रतिवर्ष (जैसा भी वह चाहे), एक निश्चित रकम का भुगतान नियमित रूप से, एक निश्चित अवधी के लिए, बीमा कंपनी को करता है। 

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इस निश्चित रकम को “प्रीमियम” कहा जाता है। बीमा, इच्छुक व्यक्ति और बीमा कंपनी के बीच लिखित अनुबंध होता है। बीमा कंपनी की सभी शर्तों को, इच्छुक व्यक्ति इस लिखित अनुबंध के द्वारा मानने की सहमति देता है। इस लिखित अनुबंध को “बीमा पॉलिसी” कहा जाता है।

बीमा के प्रकार – Types of Insurance

बीमा कई प्रकार का होता है। हम आपको बता रहे हैं आपको कुछ निम्नलिखित बीमा, जिनको भारत में लोग सर्वाधिक कराना पसंद करते हैं –

1. जीवन बीमा (Life Insurance) – यह सबसे अधिक लोकप्रिय और प्रचलित बीमा है। इसमें व्यक्ति, अपनी प्राकृतिक या आकस्मिक मृत्यु होने पर, बीमा कंपनी को, अपने परिवार के नामित व्यक्ति को एक निश्चित धन राशी का भुगतान करने का अनुबंध करता है ताकि परिवार आर्थिक स्थिति का भली-भांति सामना कर सके। इसमें कुछ संभावित लाइलाज रोग या गंभीर रोगों को भी जोड़ा (Add) जा सकता है। ऐसी स्थिति में प्रीमियम थोड़ा सा और बढ़ जाएगा। 

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2. टर्म प्लान (Term Plan) – वस्तुतः यह जीवन बीमा का ही रूप है। यह दो तरह का होता है। एक ऐसा प्लान होता है जिसमें व्यक्ति बहुत ही कम प्रीमियम देकर लंबी अवधी के लिये अधिक कवरेज प्रदान करता है। परन्तु बीमा की निश्चित अवधी समाप्त होने पर बीमित व्यक्ति को जमा रकम का कोई भुगतान नहीं किया जाता। दूसरे प्लान में जमा रकम का एक निश्चित भुगतान बीमित व्यक्ति को कर दिया जाता है। 

परन्तु इसके लिए बहुत अधिक प्रीमियम देना पड़ता है। दोनों ही प्लान में बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर, परिवार के नामित व्यक्ति को बीमा राशि का भुगतान कर दिया जाता है। टर्म प्लान में वार्षिक आय की 15-20 गुना बीमा राशि ही चुनने की अनुमति होती है।

3. स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) – यह अत्यंत महत्वपूर्ण बीमा है जिसे मेडिक्लेम या मेडिकल बीमा कहा जाता है। यह सामान्य रोगों से लेकर, लाइलाज बीमारी, मेडिकल इमरजेंसी, गंभीर रोगों के उपचार, सर्जरी तथा अंग प्रत्यारोपण पर आने वाले भारी भरकम खर्चों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है यानि इन सब पर आने वाले खर्च का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है। 

यह बीमा, इच्छुक व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह कितने वर्ष के लिये और कितनी रकम का स्वास्थ बीमा करवाना चाहता है।

4. संपत्ति बीमा (Property Insurance)- संपत्ति बीमा भी काफी प्रचलित है। यह बीमा अचल आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों को प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, तूफान, बाढ़, आदि और मानवीय गतिविधियों जैसे सेंधमारी, चोरी, दंगा से आर्थिक नुकसान आदि तथा कुछ दुर्घटनाओं जैसे आग, पानी आदि, से हुई क्षति के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है।

इसमें दोषपूर्ण निर्माण या डिजाइन से नुकसान, सामान्य टूट फूट की मरम्मत, घर में रखा हुआ सामान का नुकसान, वाहन का नुकसान, इरादतन संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और युद्ध तथा परमाणु खतरों से होने वाला नुकसान आदि संपत्ति बीमा में कवर नहीं होता।

5. मोटर वाहन बीमा (Motor Vehicle Insurance)- मोटर वाहन बीमा संविदा संपत्ति तथा दायित्व बीमा पर लागू मूल सिद्धांतों के अंतर्गत आता है। सभी मोटर वाहन मालिकों को मोटर वाहन अधिनियम,1988 के अनुसार, मोटर बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य है। इसलिये किसी भी प्रकार का वाहन है उसका बीमा वाहन का मालिक कराता ही है। इसे ‘ऑटो बीमा’ भी कहा जाता है। 

यह बीमा सामान्य बीमा के अंतर्गत आता है। वाहन के द्वारा दुर्घटना में मारे गए या घायल हुए लोगों को मुआवजा देने, दुर्घटना में वाहन की क्षति, चोरी से हुआ नुकसान आदि का दायित्व बीमा कंपनी को दिया जाता है। 

मिसलेनियस बीमा क्या है? – What is Miscellaneous Insurance?

मिसलेनियस बीमा (Miscellaneous Insurance) जिसे हिंदी में विविध बीमा कहा जाता है, में जीवन बीमा, अग्नि और समुद्री बीमा के अतिरिक्त, अन्य प्रकार के बीमा अनुबंध शामिल होते हैं। इसमें तरह-तरह के जोखिम शामिल होते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा है। जहां तक अग्नि बीमा (Fire Insurance) और समुद्री बीमा (Marine Insurance)  का प्रश्न है तो समझिए कि अग्नि बीमा रिहायशी या व्यवसायिक सम्पत्ति का आग लगने से हुई हानि कि क्षतिपूर्ति के उद्देश्य के लिये किया जाता है। 

समुद्री बीमा का एक विस्तृत क्षेत्र है। समुद्री जहाजों, कार्गो, बन्दरगाहों, कंटेनर टर्मिनल, पाइपलाइन्स, समुद्री तूफान, जहाज का डूबना, जहाज का टकरा जाना, आग लग जाना, युद्ध, हड़ताल, समुद्री लुटेरों की गतिविधियों आदि के कारण हुए नुकसान की भरपाई करना समुद्री बीमा में शामिल होते हैं।

मिसलेनियस बीमा में कौन-कौन से बीमा शामिल होते हैं? – What Insurances are Included in Miscellaneous Insurance?

वैसे तो मिसलेनियस बीमा में बहुत सारे प्रोडक्ट (बीमा पॉलिसी) शामिल होते हैं, हम आपको कुछ प्रोडक्ट्स के बारे में बता रहे हैं। इनका विवरण निम्न प्रकार है – 

1. व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (Personal Accident Insurance)- कोई भी व्यक्ति कभी भी और कहीं भी अचानक से सड़क, रेल दुर्घटना या अन्य हादसों का शिकार हो सकता है। इन दुर्घटना में शारीरिक नुकसान हो सकता है, अंग-भंग हो सकता है अथवा व्यक्ति आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से अपंग हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष रूप से उसकी आजीविका यानि उसकी कमाई पर निश्चित रूप से बुरा प्रभाव पड़ेगा। 

परिणाम स्वरूप उसके और उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसी आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए यह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा किया जाता है। दुर्घटना में यदि बीमा कराने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार के नामित व्यक्ति को बीमा की रकम मिल जाएगी। 

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2. विकलांगता बीमा (Disability Insurance) – जिन लोगों का कार्यस्थल या व्यवसाय जोखिम भरा है यह बीमा उन लोगों के लिये आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति अपने व्यवसाय में या कार्यस्थल पर दुर्घटना ग्रस्त हो जाता है या किसी गंभीर रोग के कारण या सर्जरी में कोई अंग काटे जाने के कारण, या किसी अन्य दुर्घटना का शिकार होने के कारण अल्पकालिक या स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाता या मानसिक विकार आ जाता है तो निश्चित रूप से उसकी आय पर इसका कुप्रभाव पड़ेगा। 

हो सकता है कि वह काम करने लायक ही ना रहे तो इन सब स्थितियों से निपटने के लिए, उसकी आय का रूप विकलांगता बीमा के अंतर्गत बदल दिया जाता है ताकि उसका परिवार पहले की तरह चलता रहे। इस बीमा के अंतर्गत चिकित्सा सेवाओं, दवाओं, मेडिकल चेकअप आदि को भी कवर किया जा सकता है।

3. श्रमिक मुआवजा बीमा (Workers Compensation) – जिन लोगों का अपना व्यवसाय है विशेषतौर पर भवन निर्माण, निर्माण, उत्पादन, आईटी, परिवहन के क्षेत्र में हैं, उन नियोक्ताओं (Employers) के लिये यह श्रमिक मुआवजा बीमा फायदेमंद है। 

यदि कोई श्रमिक कार्य क्षेत्र में कार्य करते हुए घायल हो जाता है, या श्रमिक को अस्थाई या स्थाई रूप से विकलांगता आती है अथवा उसकी मृत्यु हो जाती है तो मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत निर्धारित मुआवजे की संरचना के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाती है। यह बीमा नियोक्ताओं को मुकदमा या कानूनी कार्रवाई से बचाव करने में भी सहायता करता है। 

4. सेंधमारी बीमा (Burglary Insurance) – यद्यपि सेंधमारी, चोरी, डकैती के बिंदु संपत्ति के बीमा में कवर कर दिये जाते हैं, परन्तु इस तरह के मामलों के लिये अलग से भी बीमा कराया जा सकता है। सेंधमारी, चोरी, डकैती आदि की वजह से हुई क्षति की भरपाई “वास्तविक क्षति के बराबर” बीमा कंपनी द्वारा कर दी जाती है। 

चूंकि कॉसा प्रॉक्सिमा का सिद्धांत इस प्रकार के बीमा पर लागू होता है इसलिए निकटस्थ कारण पॉलिसी के अंतर्गत आने पर ही बीमा कंपनी वास्तविक क्षति की भरपाई करती है। 

5. फसल (Crop) बीमा – फसल उगाने से मनुष्य को भोजन मिलता है तथा पशुओं को चारा। यह जीवन के लिए आवश्यक आवश्यकता है। किसान लोग फसल उगाते हैं और कई बार प्रकृति की मार से जैसे कि तेज बारिश, बाढ़ आदि फसल बर्बाद हो जाती है या सूखा पड़ जाने से फसल उगती ही नहीं है अथवा कोई शत्रुता के कारण फसल को आग लगा देता है। 

इसलिये फसलों और खेती की संपत्ति की क्षतिपूर्ति के उद्देश्य से फसल बीमा किया जाता है ताकि किसान को कुछ आर्थिक राहत मिल सके। 

6. मवेशी बीमा (Cattle Insurance) – इस बीमा के अंतर्गत किसानों और पशुपालकों को, मवेशियों की मृत्यु के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जाती है इसमें दूध देने वाले और ना देने वाले पशु शामिल होते हैं जैसे कि गाय, भैंस, बकरी, भेड़, बैल, बछिया, ऊंट आदि। मृत्यु के कारण कोई दुर्घटना, बीमारी या गर्भावस्था से जुड़ी समस्या आदि हो सकते हैं। 

7. पालतू पशु बीमा (Pet Insurance)- जो लोग कुत्ता, बिल्ली आदि को पालते हैं, उनके लिए वे परिवार का अभिन्न सदस्य बन जाते हैं। इनकी देखभाल पर, चिकित्सा पर, टीके लगने तथा भोजन आदि पर बहुत खर्चा करना पड़ता है। इसीलिये कहा जाता है कि Pet पालना आसान नहीं है। 

अतः इनका बीमा भी कराना चाहिए।  पालतू पशु बीमा, पालतू पशु के चोरी होने, चोट लगने अथवा किसी बीमारी के कारण, या दुर्घटना के कारण मृत्यु होने और अंतिम संस्कार के खर्चों तक को कवर करता है। पालतू पशु बीमा के अंतर्गत कुत्ता, बिल्ली, चिड़िया, भेड़, बकरी, घोड़ा, खरगोश, हाथी आदि पालतू पशु आते हैं। 

8. वाणिज्यिक बीमा (Commercial Insurance) –  यह बीमा उन लोगों के लिये विशेष तौर पर बनाया गया है जिनका अपना व्यवसाय है। यह वाणिज्यिक बीमा संपत्तियों के नुकसान, कर्मचारियों के चोटिल होने के कारण हुए नुकसान के विरुद्ध आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जो सार्वजनिक देयता (Public Liability) या नियोक्ता की देयता (Employer’s Liability) से उत्पन्न अप्रत्याशित खतरों के विरुद्ध आर्थिक रूप से कवरेज देता है। 

9. व्यवसाय बीमा (Business Insurance) – व्यावसायिक बीमा उन उद्यमों को सुरक्षा प्रदान करता है जिनके अपने परिसर (Premises) में मेटीरियल या स्टॉक होता है। व्यवसाय की नियमित गतिविधियों के दौरान घटित घटनाओं के परिणाम स्वरूप होने वाले नुकसान, आग आदि से नुकसान के विरुद्ध आर्थिक सुरक्षा इस व्यवसाय के द्वारा प्रदान की जाती है। 

यह बीमा, संपत्तियों, मुकदमों के जोखिम, कानूनी लड़ाईयों तथा कर्मचारी-उन्मुख (Employee-oriented) के जोखिमों के कारण होने वाले नुकसान को भी कवर करती है। 

10. व्यावसायिक देयता बीमा (Professional Liability Insurance) – इस बीमा को त्रुटियां और चूक बीमा (Errors and Omissions Insurance) भी कहा जाता है। कंपनियां या प्रोफेशनल लोगों, जिनकी सलाह और सेवाओं, वायदों, लापरवाही, दुर्व्यवहार, दुराचार, गलत बयानों आदि के कारण यदि किसी को नुकसान होता है तो यह बीमा, प्रभावित व्यक्ति के बचाव के लिए कानूनी खर्च को कवर करता है। ऐसे प्रोफेशनल लोगों में चिकित्सा संस्थाएं, डॉक्टर, वकील, एकाउंटेंट आदि होते हैं। 

11. देयता बीमा (Liability Insurance) – हर कंपनी को, मालिक को और कंपनी के कर्मचारियों को सुरक्षा की जरूरत होती है। कभी भी इन पर मुकदमा होने का खतरा मंडरा सकता है। किसी कर्मचारी द्वारा किसी ग्राहक को चोट पहुंचाने या उसकी संपत्ति का नुकसान, कंपनी की सेवा या उत्पाद द्वारा ग्राहक का नुकसान, ड्राइवर से कोई सड़क दुर्घटना, संपत्ति का नुकसान या पेशेवर सेवाओं से उत्पन्न त्रुटियां/चूक आदि अनेक परिस्थितियां कभी भी जन्म ले सकती हैं। ऐसे में कानूनी मसलों पर आने वाले खर्च को यह बीमा कवर करता है।

12. वाणिज्यिक वाहन बीमा (Commercial Vehicles Insurance) – किसी भी कंपनी के पास माल लाने, ले जाने तथा अन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिये उसके अपने वाहन और ड्राइवर होते हैं। इनको वाणिज्यिक वाहन कहा जाता है। ये कंपनी की संपत्ति होते हैं। इन वाहनों का बीमा होना भी बेहद जरूरी है। 

इस प्रायोजन से वाणिज्यिक ऑटो बीमा, वाणिज्यिक वाहन को पहुंचने वाली क्षति, चोरी तथा अन्य खतरों जैसे कि वाहन के कारण किसी की संपत्ति का नुकसान, किसी और को चोट लगना आदि को कवर करता है, साथ ही यह बीमा इन वाहनों के ड्राइवर्स की चोटों को भी कवरेज देता है। वाणिज्यिक ऑटो बीमा में माल ढोने वाले ट्रक, बॉक्स ट्रक, अन्य ट्रक, वैन, कार शामिल होते हैं परन्तु इसमें ट्रैक्टर, ट्रैक्टर ट्राली, अर्ध-ट्रक आदि, सम्मलित नहीं होते। 

13. बंधक बीमा (Mortgage Insurance) – बीमा की इस पोलिसी को बंधक गारंटी और गृह-ऋण बीमा (Mortgage Guarantee and Home-loan Insurance) के नाम से भी जाता है। इस बीमा को होम लोन की सुरक्षा के लिये लिया जाता है। इसके अंतर्गत कर्ज लेने वाले को कर्ज चुकाने की अवधि के अंत तक सुरक्षा मिलती है।

यह बीमा इस लिये लिया जाता है कि कर्ज लेने वाले के बाद उसके परिवार वालों को कर्ज ना चुकाना पड़े। कर्ज की अवधि के दौरान कर्ज लेने वाले की मृत्यु के बाद, कर्ज देने वाली वित्तिय संस्था, कर्ज दाता के घर पर कब्जा नहीं कर सकती। इस पॉलिसी को बंधक क्षतिपूर्ति गारंटी (Mortgage Indemnity Guarantee – MIG) कहा जाता है। 

14. क्रेडिट बीमा (Credit Insurance) – क्रेडिट बीमा वस्तुतः एक प्रकार की जीवन बीमा पॉलिसी ही है जिसको व्यक्ति एक या अधिक, वर्तमान में चल रहे कर्जों को चुकाने के लिए लेता है विशेषकर अपनी बेरोजगारी, बीमारी, अपंगता अथवा मृत्यु की स्थिति में। यह बीमा कर्जदार की मृत्यु की स्थिति में कर्ज की रकम चुकाती है। 

तात्पर्य यह है कि कर्ज लेने वाला व्यक्ति यदि किसी कारणवश कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है तो उस स्थिति में यह पॉलिसी वित्तिय संस्था जिसने कर्ज दिया है, को कर्ज का भुगतान कर देगी। बीमा कंपनी, इस बीमा पॉलिसी को अक्सर क्रेडिट कार्ड के रूप में बेचती है। 

15. भवन बीमा (Building Insurance) – यह एक ऐसा बीमा है जो भवन के ढांचे और उसके स्थायी जुड़ाव को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बीमा भवन की संरचना अर्थात् दीवारें, फर्श, छतें और खिड़कियां शामिल हैं को कवर करता है।

बाथरूम, बैडरूम, किचन की फिटिंग भी इस कवरेज में शामिल होती है परन्तु इसमें घर के अंदर रखे हुए सामान का कवरेज नहीं होता। यह बीमा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, तूफान, बिजली गिरना, भूकंप आदि से हुई क्षति की भरपाई करता है।

16. किराएदारों का बीमा (Renters Insurance) – यह बीमा किराये के मकानों में रहने वाले किरायेदारों की संपत्ति की प्राकृतिक आपदाओं, चोरी, आग, बर्बरता के कारण हुए नुकसान की क्षति पूर्ति करता है। इसके अतिरिक्त घर की मरम्मत और रखरखाव के दौरान अलग होटल या अन्य स्थान पर रहने के खर्च को भी इस बीमा में कवर किया जाता है।

17. जमींदार बीमा (Landlord Insurance) – यह एक ऐसी बीमा पॉलिसी है जो उन मकान मालिकों को सुरक्षा प्रदान करती है जो अपना मकान किराये पर देते हैं। अप्रत्याशित घटनाओं की वजह से संपत्ति की क्षति, चोरी और किराये की आय का नुकसान, की क्षतिपूर्ति तथा कानूनी समस्याओं से निपटने का खर्च आदि का कवरेज इस बीमा के अंतर्गत मकान मालिकों को मिलता है। 

18. बाल बीमा (Child Insurance) – आज के युग में जब मंहगाई बढ़ती ही जा रही है, एक बच्चे को भी सही ढंग से पालना बहुत मुश्किल पड़ता है। स्कूल की जबरदस्त फीस, किताबें, कापियां, स्कूल की अन्य गतिविधियां, स्वास्थ सेवाएं जान निकालकर रख देते हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य के बारे में जल्दी ही सोचना चाहिये और कुछ करना चाहिए।

इसके लिए बाल बीमा योजना को अपनाया जा सकता है जो कि एक बीमा पॉलिसी है। बाल बीमा योजना अनेक प्रकार की हैं जो भविष्य में वित्तिय सहायता प्रदान करती हैं। इसके लिए बीमा कंपनियों के अतिरिक्त भारतीय डाक घर भी से संपर्क किया जा सकता है।

19. मोबाइल बीमा (Mobile Insurance) – आजकल सस्ता स्मार्टफोन भी दस-पंद्रह हजार से कम नहीं आता और मंहगे स्मार्टफोन तो लाखों रुपये तक के आते हैं। औसतन बीस-पच्चीस हजार का फोन अक्सर लोग ले ही लेते हैं। एक बार फोन गुम हो जाए या चोरी हो जाए तो वापिस मिलने की बहुत कम उम्मीद होती है। 

मोबाइल फोन की मरम्मत भी महंगी होती है और यदि डिस्प्ले स्क्रीन टूट जाए तो इसकी कीमत नये फोन से कुछ ही कम होती है। ऐसे में बीमा कंपनियां मोबाइल बीमा के जरिए राहत पहुंचाती हैं। मोबाइल चोरी होने, गुम होने, तरल पदार्थ से स्क्रीन को नुकसान पहुंचने, एक्सिडेंट आदि को मोबाइल बीमा में कवर किया जाता है। 

20. लैपटॉप बीमा (Laptop Insurance) – लैपटॉप भी एक कीमती चल संपत्ति है। एक अच्छा लैपटॉप साठ-सत्तर हजार से कम नहीं पड़ता। फिर इसकी मरम्मत भी बहुत मंहगी पड़ती है, चोरी हो जाये तो पूरा का पूरा नुकसान। इसलिये लैपटॉप का भी बीमा बहुत जरूरी है। 

यह आपको लैपटॉप के चोरी हो जाने के आर्थिक नुकसान और मरम्मत के खर्च से राहत दिलाता है। लैपटॉप बीमा, चोरी, आग, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल नुकसान, तरल पदार्थ से नुकसान आदि को कवर करता है।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको मिसलेनियस बीमा के बारे में जानकारी दी। बीमा क्या है, बीमा के प्रकार और मिसलेनियस बीमा क्या है, इन सब के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से मिसलेनियस बीमा में कौन-कौन से बीमा शामिल होते हैं यह भी बताया। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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मिसलेनियस बीमा क्या है?
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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको मिसलेनियस बीमा के बारे में जानकारी दी। बीमा क्या है, बीमा के प्रकार और मिसलेनियस बीमा क्या है, इन सब के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से मिसलेनियस बीमा में कौन-कौन से बीमा शामिल होते हैं यह भी बताया।
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