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स्वास्थ्य बीमा में संचयी बोनस क्या है? – What is the Cumulative Bonus in Health Insurance in Hindi

स्वास्थ्य बीमा में संचयी बोनस क्या है

स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, निसंदेह स्वास्थ बीमा यानि हैल्थ इंश्योरेंस एक ऐसा प्रावधान है जो मेडिकल इमरजेंसी में आपके और आपके परिवार के लिये एक मददगार फरिश्ते के रूप में आता है। यह आपको ना केवल आर्थिक संकट में फंसने से बचाता है बल्कि आपको और आपके परिवार के सदस्यों को समय पर तुरंत इलाज प्रदान कर आप सब की रक्षा करता है। इसके लिए आपको निर्धारित राशि प्रीमियम के तौर पर प्रतिवर्ष देनी होती है। 

सौभाग्यवश यदि आप या परिवार के सदस्य किसी वर्ष बीमार नहीं पड़ते हैं तो यह बहुत ही अच्छी बात है। ऐसी स्थिति में कोई क्लेम करने का मतलब नहीं रह जाता, यह भी अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात यह है कि जिस वर्ष आप क्लेम नहीं करते हैं उस वर्ष बीमा कंपनी आपको विशेष लाभ प्रदान करती है। इस विशेष लाभ को संचयी बोनस कहा जाता है। आखिर यह संचयी बोनस है क्या। दोस्तो, हमारा आज का टॉपिक भी यही है “स्वास्थ्य बीमा में संचयी बोनस क्या है?”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको संचयी बोनस के बारे में जानकारी देगा और यह भी बताएगा कि संचयी बोनस के क्या फायदे हैं?। मगर इससे पहले बोनस के बारे में जानना होगा तो सबसे पहले जानते हैं कि स्वास्थ्य बीमा में बोनस क्या है और बोनस के प्रकार। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे।

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स्वास्थ्य बीमा में बोनस क्या है? –  What is Bonus in Health Insurance?

दोस्तो, बोनस का अर्थ होता है एक ऐसी राशि जो नियोक्ता (Employer), वित्त वर्ष के दौरान उत्पादन से लाभ का एक अंश अपने कर्मचारियों को देता है जैसे कि फैक्ट्रियों, कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी तथा केन्द्रिय, राज्य सरकारों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में काम करने वाले कर्मचारी। परन्तु स्वास्थ्य बीमा में बोनस का अर्थ बिल्कुल अलग है। 

स्वास्थ्य बीमा की भाषा में बोनस को एक अतिरिक्त (Surplus) राशि के रूप में देखा जाता है। वस्तुतः बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जो राशि मिलती है जिसे संपत्ति (Asset) कहते हैं, उसे वे बाजार में निवेश करते हैं। निवेश करने पर उनको लाभ प्राप्त होता है। बीमित व्यक्तियों या उनके परिवार द्वारा क्लेम के अंतर्गत भुगतान की गई कुल राशि जिसे देनदारी (Liability) कहा जाता है, कुल संपत्ति की तुलना में बहुत कम होती है। 

वित्त वर्ष के अंत में निवेश की गई राशि पर जो कुल लाभ मिला, उसे बीमा कंपनी अपने बीमित व्यक्तियों को बांट देती है। बीमा कंपनियों के लिये यह राशि Surplus और बीमित व्यक्ति के लिये यह Bonus कहलाती है। बांटने से मतलब नकद भुगतान करना नहीं है बल्कि यह अतिरिक्त राशि बोनस के रूप में सुनिश्चित राशि (Sum Assured) में जोड़ दी जाती है। इस प्रकार पॉलिसी परिपक्व (Matured) होने पर मिलने वाली कुल राशि में वृद्धि हो जाती है।

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वित्त वर्ष के अंत में प्रति 1000 रूपये बीमित राशि पर या बीमित राशि के प्रतिशत के रूप में बोनस की घोषणा कर दी जाती है। यदि प्रति 1000 रूपये बीमित राशि 40/- रू। बोनस घोषित किया जाता है तो 1,00,000/- के बीमित राशि पर 4000/- रू, दस वर्ष की पॉलिसी अवधि के लिये 40,000/- रू, कुल बोनस हो जाएगा। यह राशि परिपक्व राशि (Matured amount) से अलग होगी। हम यहां स्पष्ट कर दें कि बोनस केवल पार्टसिपेटरी प्लान पर मिलता है ना कि नॉन-पार्टसिपेटरी प्लान पर। इसीलिए नॉन-पार्टसिपेटरी प्लान का प्रीमियम, पार्टसिपेटरी प्लान की तुलना में बहुत कम होता है। 

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बोनस के प्रकार – Types of Bonus

बोनस के प्रकार निम्नलिखित हैं 

1. सरल प्रत्यावर्ती बोनस (Simple Reversionary Bonus) – अधिकतर परम्परागत पॉलिसी में, प्रतिवर्ष घोषित बोनस की राशि पॉलिसी में, पॉलिसी मैच्योर होने तक जुड़ती जाती है।  

2. चक्रवृद्धि प्रत्यावर्ती बोनस (Compound Reversionary Bonus) – बोनस के इस प्रकार में जो बोनस की राशि बीमित राशि में जोड़ दी जाती है तो अगले वर्ष इस बढ़ी हुई कुल बीमित राशि पर बोनस दिया जाएगा। इस प्रकार बोनस चक्रवृद्धि दर से बढ़ता है। यह सिलसिला पॉलिसी मैच्योर होने तक या पॉलिसीधारक की मृत्यु होने तक चलता है।

3. अंतरिम बोनस (Interim Bonus) – इस प्रकार के बोनस की भी घोषणा वित्त वर्ष के अंत में होती है। परन्तु यदि बोनस घोषित होने की तारीख से पहले पॉलिसी मैच्योर हो जाती है या पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है  तो फिर उसे अंतरिम बोनस दिया जाएगा।

4. टर्मिनल बोनस (Terminal Bonus) – यदि कोई पॉलिसी धारक अपनी पॉलिसी को मैच्योर होने तक चलाता है तो उसे यह टर्मिनल बोनस दिया जाता है। पॉलिसी धारक की मृत्यु होने की स्थिति में भी यह बोनस दिया जाता है। यह केवल एक ही बार दिया जाता है।

5. संचयी बोनस (Cumulative Bonus) – यह वस्तुतः नो क्लेम बोनस (No Claim Bonus) का एक प्रकार है। संचयी बोनस पर विस्तार से जानकारी हम आगे देंगे।

संचयी बोनस क्या है? – What is the Cumulative Bonus?

दोस्तो, संचयी बोनस वास्तव में नो क्लेम बोनस (No Claim Bonus – NCB) का एक प्रकार है। संचयी बोनस, प्रत्येक स्वास्थ बीमा कंपनी अपने पॉलिसीधारकों को, कोई क्लेम प्रस्तुत ना करने के बदले में पुरस्कार स्वरूप दिया जाता है। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि यदि कोई पॉलिसीधारक, जिस किसी वर्ष में कोई मेडिकल क्लेम, बीमा कंपनी को नहीं देता है तो बीमा कंपनी इसके बदले में, पॉलिसीधारक की बीमित राशि (Sum Assured) में कुछ राशि जोड़ देती है। 

यदि वह अगले वर्ष भी कोई मेडिकल क्लेम नहीं देता है तो फिर से कुल बीमित राशि में जोड़ दी जाती है। इसी “कुछ राशि” को संचयी बोनस कहा जाता है और यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक कि वह मेडिकल क्लेम ना दे दे। जिस वर्ष में वह मेडिकल क्लेम बीमा कंपनी को देता है, उस वर्ष के लिये वह संचयी बोनस का हकदार नहीं होगा। यह संचयी बोनस, बीमित राशि में अधिक से अधिक 10 वर्षों तक जुड़ सकता है। 

अधिकतर बीमा कंपनियां बीमित राशि का 5 से 50 प्रतिशत संचयी बोनस देती हैं। यानि पहले वर्ष में 5 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 10 प्रतिशत, फिर 15, फिर 20, इस तरह यह दसवें वर्ष 50 प्रतिशत हो जाता है। परन्तु कुछ बीमा कंपनियां इसे 10 से 100 प्रतिशत तक देने का दावा करती हैं। कुछ बीमा कंपनियां संचयी बोनस को बीमित राशि में ना जोड़कर, पॉलिसी रिन्यू कराते समय, रिन्यूवल में छूट प्रदान करती हैं यानि रिन्यूवल की कुल राशि में से संचयी बोनस की राशि कम करके पॉलिसीधारक प्रीमियम जमा करा देता है।

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संचयी बोनस के फायदे – Benefits of Cumulative Bonus

और अब बताते हैं आपको संचयी बोनस के फायदे जो निम्नलिखित हैं –

1. कोई भी मेडिकल क्लेम स्वास्थ बीमा कंपनी को ना देने का मतलब है कि आप अपने स्वास्थ के प्रति हमेशा सजग रहते हैं, आप अपने स्वास्थ का भली-भांति देखभाल करते हैं। सही मायने में यह संचयी बोनस से भी बड़ा लाभ है जो आप अपने आप को देते हैं।

2. यदि आप हल्की-फुल्की बीमारी के छोटे-छोटे बिल खुद अदा कर देते हैं तो आप संचयी बोनस प्राप्त करने की संभावना को बढ़ा रहे हैं।

3. कोई क्लेम ना देने के परिणाम स्वरूप यदि आपको पर छूट मिलती है तो यह प्रीमियम के लिये बड़ा कवरेज होता है। पॉलिसी रिन्यू कराते समय, इस कवरेज के फलस्वरूप आप अधिक पैसा बचाते हैं।

4. क्लेम नहीं देने पर यदि संचयी बोनस का पैसा आपके बीमित राशि में जोड़ दिया जाता है तो बीमित राशि में वृद्धि होती है। यदि यह वृद्धि साल-दर-साल होती है तो बीमित राशि बहुत बड़ी हो जाती है। मैच्योरिटि पर यह राशि आपको अपार खुशी देगी और इस राशि को आप जरूरत के कार्य में लगा सकते हैं। 

5. संचयी बोनस का लाभ दस वर्ष तक उठाया जा सकता है।

Conclusion –

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको संचयी बोनस के बारे में जानकारी दी। स्वास्थ्य बीमा में बोनस क्या है, बोनस के प्रकार और संचयी बोनस क्या है, इन सब के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से संचयी बोनस के फायदे भी बताए। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा।

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको संचयी बोनस के बारे में जानकारी दी। स्वास्थ्य बीमा में बोनस क्या है, बोनस के प्रकार और संचयी बोनस क्या है, इन सब के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से संचयी बोनस के फायदे भी बताए।
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