दोस्तो, आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, हमारे देश भारत में योग और ध्यान का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। यह ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों से लेकर सामान्य व्यक्ति के दैनिक जीवनचर्या का हिस्सा रहा है। योग केवल एक शब्द नहीं अपितु एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर, मन और  आत्मा को एक साथ लाने अर्थात जोड़ने (योग) का काम होता है। इसकी महत्ता जैन पन्थ और बौद्ध पन्थ में भी देखने को मिलती है। यह भारत से बौद्ध पन्थ के साथ चीन,  जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका में पहुंचा, अब तो समस्त विश्व योग को जानता है और मानता है। 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है।  दोस्तो, योग में अनेक आसन होते हैं। इनमें एक आसन ऐसा होता है जो ना तो बैठ कर किया जाता है और ना खड़े होकर। जी हां, हम बात कर रहे हैं शीर्षासन की। यही है हमारा आज का टॉपिक “शीर्षासन”। दोस्तो, देसी हैल्थ कल्ब इस लेख के माध्यम से शीर्षासन के फायदे के विषय में विस्तार से जानकारी देगा। तो, जानते हैं शीर्षासन को, कि ये क्या होता है?

शीर्षासन क्या है? – What is Sirsasana

दोस्तो, बहुत सरल शब्दों में कहा जाये तो शीर्षासन योग की वह मुद्रा (Pose) है जिसमें सिर जमीन पर टिका होता है और पूरा शरीर ऊपर की ओर उठा हुआ, यानि पैर आकाश की ओर। शरीर का पूरा भार सिर पर होता है। यही है शीर्षासन। 

इसे सभी आसनों का राजा भी कहा जाता है। यह अत्यन्त् शक्तिशाली आसन है जो शरीर में रक्त संचार और उसके प्रवाह की स्थिति में सुधार करता है जिससे अनेकों रोग दूर होते हैं। शीर्षासन को योग गुरु या विशेषज्ञ की देखभाल में ही करना चाहिये। आरम्भ में इसे करना बहुत कठिन होता है परन्तु अभ्यास करते-करते सरल हो जाता है। 

शीर्षासन के फायदे

शीर्षासन करने का तरीका – Sirsasana karne ka Tarika

1. सबसे पहले जमीन पर मैट (Mat) बिछायें।

2. वज्रासन की अवस्था में घुटनों के बल बैठ जायें।

3. दोनों हाथों की उंगुलियों को आपस में मिलाकर इंटरलॉक करके हाथों को मैट पर रखें। 

4. अब नीचे की ओर झुक कर सिर को हाथों के बीच में रखें।

5. कमर उठाकर  घुटनों और पैरों को सीधा कर लें।

6. अब पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठायें और सीधे कर लें। 

7. इस अवस्था में सिर के बल शरीर पूरी तरह सीधा तना हुआ होना चाहिये।

8. इस अवस्था में 15-20 सेकेंड रहें सांसों की गति सामान्य रखें।

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9. सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे लाते हुऐ धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जायें।

10. आरम्भ में इसे दो से तीन चक्र करें, बाद में पूरी तरह अभ्यास होने पर चक्र बढ़ा सकते हैं।

शीर्षासन कितनी देर करें – Sirsasana Kitni Der Kare

दोस्तो, शीर्षासन कितनी देर करना चाहिये, तो देसी हैल्थ क्लब यहां स्पष्ट करता है कि यह पूरी तरह निर्भर करता है आपके शरीर की क्षमता पर, आपकी बांहें, गर्दन, पीठ, आपकी सांसें, आपकी आंखें कितनी देर आपका भार सहन कर सकते हैं। कहने को तो सब अपना-अपना मत रखते हैं कि 2 मिनट तक करना चाहिये, कोई 2 से 4 और कोई 5 मिनट तक का भी समय बता देता है। परन्तु हमारा कहना यह है कि जब तक आपको सहज लगे तब तक आप शीर्षासन कीजिये। जरा भी असहज लगे तभी आप अपनी सामान्य स्थिती में आ जायें। आप सुरक्षित रहिये। क्योंकि जीवन सर्वोपरिय है ना कि कोई आसन। 

शीर्षासन के फायदे – Benefits of Sirsasana

1. चेहरे का तेज बढ़ाये (Increase Facial Brightness)- नियमित रूप से शीर्षासन करने से यह चेहरे पर अधिक ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है। रक्त संचार सही रहता है। पोषण तत्व एवं खनिज आदि भी अपना सक्रिय प्रभाव छोड़ते हैं जिससे पिम्पल, रिंकल आदि की समस्या की संभावना को भी दूर करता है। चेहरे पर चमक बढ़ जाती है और आप अधिक सुंदर नजर आते हैं। 

2. तनाव दूर करे (Tension)- तनाव एक ऐसा कारक जो शारीरिक तथा मानसिक बेचैनी उत्पन्न करता करता है साथ शारीरिक कार्यों में असंतुलन और अस्थिरता पैदा करता है। शीर्षासन तनाव दूर करने के लिये उत्तम विकल्प है। एक रिसर्च पेपर के अनुसार, तनाव व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए योग का प्रयोग किया गया जिसमें  शीर्षासन को भी जगह दी गई। परिणाम सकारात्मक आये। अतः यह कहना एकदम उचित है कि तनाव दूर करके मन को भी शांत करता है।

3. अवसाद दूर करे (Depression) – दोस्तो, अवसाद एक ऐसा विकार है जिसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के मन पर और उसकी जीवनचर्या पर पड़ता है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में अवसाद का अर्थ मन के भावों से जुड़े दुख से होता है। जिसमें व्यक्ति का मन किसी काम में नहीं लगता, वह उदासीन रहता है। अवसाद के पीछे जैविक, आनुवांशिक और मनोसामाजिक कारण होते हैं। इतना ही नहीं जैवरासायनिक असंतुलन के कारण भी व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त हो सकता है। उसका स्वभाव उग्र हो जाता है। कभी-कभी निराशा इस कदर घेर लेती है कि वह आत्महत्या की ओर भी अग्रसर हो जाता है। यह भी देखा गया है कि 90% अवसाद के मरीजों को नींद की समस्या होती है। शीर्षासन इस अवसाद की समस्या से छुटकारा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाता है। इससे मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है। इसके करने से कोर्टिसोल(cortisol) नामक हार्मोन बनने में बहुत कमी आती है। इन हार्मोन के कारण एंग्जायटी (Anxiety) में आराम मिलता है। इससे आपका मूड बदलता है, प्रसन्नचित्त रहते हैं और मन भी शांत रहता है।

4. पाचन-तंत्र को स्वस्थ रखे (Digestive System)- शीर्षासन करने से रक्त संचार बेहतर होता है जिसका असर आपके पेट पर भी पड़ता है। इसके प्रभाव से शारीरिक गतिविधियां भोजन पचाने में मदद करती हैं। तात्पर्य यह है कि यह आसन पाचन-तंत्र को बेहतर बनाता है। जिससे पेट से सम्बंधित समस्याओं की संभावना नहीं होती। 

5. सिर दर्द और माइग्रेन के लिये (Headache)- सिर दर्द तो अक्सर हो ही जाता है लेकिन माइग्रेन लंबी चलने वाली बीमारी है। ये दोनों ही मस्तिष्क की कोशिकाओं के संकुचन और दबाव के कारण होते हैं। शीर्षासन से रक्त संचार में सुधार और प्रवाह संतुलन के कारण कोशिकाओं की गतिविधियों में सुधार होता है जिसके कारण इन समस्याओं में राहत मिलती है। 

6. डायबिटीज में लाभकारी (Diabetes)- शीर्षासन पैंक्रियास (Pancreas) (मिश्रित ग्रन्थि) को उत्तेजित करते हुए इंसुलिन के स्राव में सहायता करता है। इंसुलिन नामक हार्मोन का उत्पादन कोशिकाओं द्वारा किया जाता है। ये कोशिकाऐं, अग्न्याशय (Pancreas) (मिश्रित ग्रन्थि) में होती हैं। ये हार्मोन ग्लूकोज़ यानि शुगर को ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है साथ ही शरीर की कोशिकाओं में भेजता है ताकि उन्हें ऊर्जा मिले। और शुगर स्तर को नियन्त्रित करता है। शीर्षासन पैंक्रियास और इंसुलिन के इस कार्य में  सहायता करके डाइबिटीज की संभावना को रोकता है।

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7. मस्तिष्क स्वास्थ के लिये (Brain health)- जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि शीर्षासन करने से रक्त संचार और रक्त प्रवाह बेहतर होता है साथ ही मस्तिष्क की करोड़ों कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण और खनिज लवण मिलते हैं।  इन कारण मस्तिष्क कोशिकाओं को नया जीवन मिलता है और मस्तिष्क का स्वास्थ भी ठीक रहता है।

8. पाइल्स एवं वैरिकोस नस से राहत (Piles and Varicose Veins)- पाइल्स और वैरिकोस नस की समस्या रक्त जमने के कारण होती है। पाइल्स की जगह पर रक्त जम जाता है और वैरिकोस नस में भी। वैरिकोस बढ़ी हुई नसें होती हैं और कोई भी नस वैरिकोस हो सकती है। परन्तु पैरों और पंजों में ये सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। इस कारण खड़े होने में, चलने में बहुत दर्द होता है। इसके उपचार के लिये डॉक्टर  इन नसों को निकाल सकते हैं या बंद कर सकते हैं। शीर्षासन के नियमित अभ्यास से इन दोनों समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

9. हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये (Bone Health)-  शीर्षासन के नियमित अभ्यास करने से हड्डियां मजबूत बनती हैं। बचपन से ही यदि इसका अभ्यास किया जाये तो वृद्धावस्था तक  हड्डियों से जुड़ी समस्याओं की संभावना नहीं होगी और ना ही ओस्टियोपोरोसिस जैसा अस्थि रोग होगा।

10. अस्थमा के लिये (Asthma)- श्वसन क्रिया से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिये योग बेहतर विकल्प माना जाता है। अस्थमा भी श्वसन रोग ही है जिसके कारण सांस फूलती है। शीर्षासन के अभ्यास से इस रोग की समस्या से राहत पाई जा सकती है। 

11. शरीर मजबूत बने (Body Strong)-  शीर्षासन करते समय आप  उल्टी मुद्रा में होते हैं इससे आपकी कमर और जांघें मजबूत होती हैं। आपके कंधे, बाहें और शरीर के ऊपरी हिस्से मजबूत बनते हैं। शीर्षासन मनचाहे एब्स बनाने में भी मदद करता है। यह आपकी फिजिकल स्ट्रेंथ को बढ़ाता है। 

12. संतुलन बढ़ाने में मदद करता है (Helps to Increase Balance)- जब आप शीर्षासन करने की शुरुआत करते हैं तो आपको दीवार का सहारा लेना पड़ता है। फिर भी आप हिलडुल रहे होते हैं। आप अपना संतुलन (Balance) बनाये रखने की कोशिश करते हैं। कुछ दिनों के अभ्यास के बाद आप बिना दीवार के शीर्षासन करने लगते हैं और आपको संतुलन बनाने का अभ्यास भी हो जाता है। फिर आपको यह सहज लगने लगता है। इससे आपकी संतुलन क्षमता का विकास होता जाता है। परिणामस्वरूप गिरने की स्थिती में आप अपने आपको सहजता से संभाल लेते हैं। 

13. बालों के स्वास्थ के लिये (Hair Health)-  शीर्षासन के प्रतिदिन के अभ्यास के दूरगामी परिणाम बालों के स्वास्थ के लिये बहुत अच्छे होते हैं। ब्रेन वाले हिस्से पर खून का प्रवाह आसन तो हो ही जाता है खोपड़ी भी मजबूत होती है। इससे बालों का असमय सफेद होना,  टूटना, झड़ना आदि रुक जाता है। डैन्ड्रफ से भी राहत मिल जाती है।

14. इनफर्टिलिटी (बांझपन) (Infertility)- अनुमान के अनुसार शीर्षासन महिला और पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या से राहत दिला सकता है। यह शीर्षासन महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन को दूर कर और पुरुषों में शुक्राणु बढ़ा कर इनफर्टिलिटी की समस्या से राहत दिला सकता है। यद्यपि कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

कुछ सावधानियां  – Some precautions

1. यदि आप पहली बार शीर्षासन कर रहे तो इसे योग गुरु/विशेषज्ञ की देखरेख में करें। 

2. इस आसन को सुबह खाली पेट करना बेहतर होता है।

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3. शुरुआत में संतुलन बनाये रखने के लिये दीवार का सहारा लें।

4. शुरुआत में शरीर का पूरा भार सिर पर न डालें, बल्कि बाहों और कंधों पर भी भार रखें। अन्यथा गर्दन में झटका आ सकता है। 

किसको शीर्षासन नहीं करना चाहिये – Sirsasana kisko Nhi Karna Chahiye

1. हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, कब्ज, कफ़ और सर्दी से पीड़ित और बेरी एन्यूरिज्म (दिमाग की नसों से जुड़ी समस्या) हो, ऐसे व्यक्तियों को शीर्षासन करने से बचना चाहिये।

2.  जिनको सिर में चोट या गर्दन की समस्या हो या कंधों, बुजाओं, और पीठ में दर्द, चोट आदि हो, उनको यह आसन करने से बचना चाहिये।

3. शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी तो इस आसन को करने से बचें। 

4. महिलाएं मासिक धर्म के समय यह आसन ना करें।

5. गर्भवती महिलाओं को शीर्षासन नहीं करना चाहिये।

6. 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति यह आसन ना करें। 

शीर्षासन के नुकसान  – Site Effects of Sirsasana

यदि आप योग गुरु/विशेषज्ञ की देखरेख में शीर्षासन करते हैं कोई नुकसान नहीं है। अन्यथा यदि आप गलतियां करते हैं तो गर्दन में तंत्रिका संपीड़न, रेटिनाल आँसू और  गर्दन में विकृत गठिया का कारण बन सकता है।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको शीर्षासन के विषय में विस्तार से जानकारी दी। शीर्षासन क्या होता है, इसे करने का तरीका क्या होता है और कितनी देर करना चाहिये इसके बारे में विस्तार से बताया। इस लेख के माध्यम से शीर्षासन के फायदे और नुकसान भी बताये। कुछ सावधानियां भी बतायीं और यह भी बताया कि किन को और किस अवस्था में शीर्षासन नहीं करना चाहिये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

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