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स्वागत है आप सब का हमारे ब्लॉग पर। आज का हमारा आर्टिकल गर्भवती महिलाओं की सेवा में समर्पित है। आज हम बतायेंगे महिलाओं की उस अवस्था से जुड़ी एक ऐसी स्थिति के बारे में जो अवस्था तो बहुत सुखद होती है परन्तु इसमें एक स्थिति ऐसी बनती है जिससे महिला बहुत परेशान रहती है। महिला की यह अवस्था होती है गर्भावस्था जो उसके लिये, उसके परिवार के लिये बहुत सुखद होती है, क्योंकि मां बनना हर लड़की का गौरवमय सपना होता है। इस गर्भावस्था में महिला को परेशान करने वाली स्थिति होती है मितली और उल्टी की, जो गर्भावस्था के लगभग चौथे सप्ताह से शुरु हो जाती है। इस स्थिति में उसका जी मिचलाता है, उबकाई आती है और कभी उल्टी आती है और कभी नहीं। इससे शरीर थका-थका सा रहने लगता है और उसके काम करने क्षमता भी कम हो जाती है। कुछ विशेषज्ञ इसे भ्रूण के लिये अच्छा मानते हैं क्योंकि महिला जो भी खाती है उससे बनने वाले कुछ विषाक्त पदार्थ, उल्टी के जरिये बाहर निकल जाते हैं और भ्रूण सुरक्षित रहता है। इस मितली और उल्टी की स्थिति को नॉजिया (nausea) और वॉमिटिंग इन प्रेगनेंसी कहा जाता है जिसे सरल भाषा में मॉर्निंग सिकनेस कहते हैं। यही है हमारा आज का टॉपिक “मॉर्निंग सिकनेस क्या है?”

यह ऐसी स्थिति है जिसे दूर नहीं किया जा सकता, इसीलिये सामान्यतः डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह अपने आप ही खत्म हो जाती है। हां, कुछ घरेलू उपाय अपनाकर इसके प्रभाव से बचाव जरूर किया जा सकता है। देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको मॉर्निंग सिकनेस के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसके प्रभाव से को कैसे कम किया जाये, तो सबसे पहले जानते हैं कि मॉर्निंग सिकनेस क्या है और इसके कारण क्या होते हैं। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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मॉर्निंग सिकनेस क्या है?
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मॉर्निंग सिकनेस क्या है?- What is Morning Sickness?

गर्भावस्‍था में जी मिचलाना यानी मितली और उल्‍टी होना या होने जैसा महसूस करना, इस स्थिति को मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है। इसे मेडिकल भाषा में नॉजिया (nausea) और वॉमिटिंग इन प्रेगनेंसी कहा गया है। यह जरूरी नहीं है मितली और उल्टी सुबह के समय में ही हो, यह स्थिति अपने नाम “मॉर्निंग सिकनेस” के विपरीत दिन में कभी भी हो सकती है सुबह से लेकर शाम, रात तक। सामान्यतः इस स्थिति के लक्षण गर्भावस्था के चौथे और 16वें सप्ताह के बीच प्रकट होते हैं परन्तु 10 प्रतिशत महिलाओं में गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद भी ये लक्षण नजर आते हैं। लगभग 70 से 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाऐं काफी हद तक मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति का सामना करती हैं। आंकड़े बताते हैं कि लगभग 66 प्रतिशत महिलाओं को मितली और उल्टी दोनों होती हैं जबकि 33 प्रतिशत महिलाओं को सिर्फ़ मितली घेरे रहती है। 

एक थ्योरी के अनुसार एस्ट्रोजन के बदलते स्तर और मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन के बदलते स्तर को  मॉर्निंग सिकनेस का कारण माना जाता है अन्यथा इसका कोई प्रमाणिक कारण नहीं है। इसके लक्षणों में पेट दर्द , बुखार या सिरदर्द आमतौर पर शामिल नहीं हैं। मॉर्निंग सिकनेस का सबसे बड़ा कुप्रभाव गर्भवती महिला पर यह पड़ता है कि यह उसके जीवन की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है जिसके फलस्वरूप महिला के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। अधिकतर महिलाओं में यह मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति 16 से 20 हफ्ते की गर्भावस्था तक पूरी तरह समाप्त हो जाती है। गर्भावस्था पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारे पिछले आर्टिकल “गर्भावस्था में सावधानियां : कुछ टिप्स” औरस्ट्रेच मार्क्स के कुछ देसी उपचार” पढ़ें। 

मॉर्निंग सिकनेस के कारण – Cause of Morning Sickness?

मॉर्निंग सिकनेस के कारण के हो सकते हैं निम्नलिखित कारण – 

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1. मॉर्निंग सिकनेस के प्रमाणिक कारण अज्ञात हैं लेकिन एक थ्योरी के अनुसार, एस्ट्रोजन (महिलाओं में सेक्स हार्मोन) के बदलते स्तर और ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन ( HCG – इसी हार्मोन की वजह से प्रेगनेंसी सुनिश्चित होती है) के बदलते स्तर की वजह से मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति हो सकती है। 

2. ब्लड व में शुगर की कमी।

3. तनाव की स्थिति।

4. गर्भ में जुड़वाँ या तीन  बच्चे होना

5. कमजोरी, थकान आदि

6. ब्लड प्रेशर स्तर में उतार-चढ़ाव, विशेषकर लो ब्लड प्रेशर में। 

7. कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म में परिवर्तन

8.  गर्भावस्था के की वजह से होने वाले शारीरिक और रासायनिक बदलाव।

9. बार-बार यात्रा करना।

10. कोई विशेष गंध सहन ना कर पाना जैसे मांस, मछली बनने की गंध, मसालों जैसे प्याज, लहसुन आदि की गंध, बीड़ी-सिगरेट, शराब की गंध, कोई विशेष परफ्यूम की गंध आदि।

मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण – Symptoms of Morning Sickness

1. जी मिचलाना।

2. बार-बार उल्टी आने जैसा महसूस होना।

3. भूख कम लगना, खाने की कम इच्छा होना।

4. तनाव, चिंता महसूस करना।

5. पेट में हल्का-फुल्का दर्द रहना।

6. पेट की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना।

7. कमजोरी महसूस करना।

8. हृदयगति तेज हो जाना। 

मॉर्निंग सिकनेस में क्या खाएं? – What to Eat in Morning Sickness?

मॉर्निंग सिकनेस के प्रभाव को कम करने के लिये निम्नलिखित को अपने भोजन में शामिल करें –

1. उच्च कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ। 

2. डेयरी प्रोड्कट को भोजन में शामिल करें जैसे दूध, पनीर, दही, छाछ, योगार्ट आदि।

3. खट्टे फलों का सेवन करें (अनानास को छोड़कर)।

4. अपने को हाइड्रेट रखने के लिये, ताजा फलों का जूस,  नारियल पानी, नींबू पानी, सादा पानी आदि।

5. सूप को खाने में शामिल करें।

6. बहुत ही कम मसाले वाली सब्जियां। बेहतर होगा यदि उबली हुई सब्जियां इस्तेमाल की जायें।

7. सलाद विशेषकर पत्तेदार सब्जियों का। 

8. जेली और कस्टर्ड।

9. चावल।

10. पास्ता या नूडल्स।

मॉर्निंग सिकनेस के प्रभाव कम करने के घरेलू उपाय – Home Remedies to Reduce the Effects of Morning Sickness

अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित घरेलू उपाय जिनको अपनाकर मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाई जा सकती है –

1. भरपूर नींद लें (Get Plenty of Sleep)- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ के लिये गर्भवती महिला के लिये एक अच्छी नींद बहुत जरूरी है। इसके लिये आठ घंटे की नींद लेना आवश्यक है ताकि पूरा आराम मिल सके। इसके लिये सोने से पहले गर्म दूध में शहद डालकर पीयें। ऐसा करने से बहुत अच्छी नींद आयेगी। इससे महिला और बच्चे में रक्त संचार ठीक रहता है और गर्भवती महिला तनाव मुक्त रहती है।  सुबह उठने पर अपने को खुशनुमा महसूस करती है। कोई चक्कर नहीं, कोई सिर दर्द नहीं, कोई मितली, उल्टी नहीं। 

2. सुबह-शाम की सैर (Morning/Evening walk) – सुबह जब सोकर उठें तो सुबह की सैर पर निकल जायें। इसी तरह शाम को भी हल्की, फुल्की सैर करें।  सुबह-शाम की सैर करना व्यायाम का महत्वपूर्ण है, इससे शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। विशेषकर सुबह की सैर बहुत महत्वपूर्ण होती है। गर्भावस्था में सुबह की सैर से आप एकदम एक्टिव और प्रसन्न रहेंगी। आपको बहुत तेज नहीं चलना है और ना ही जॉगिंग करनी है बस सामान्य चाल से केवल चलना है। शाम की सैर के बाद रात का भोजन करने के बाद थोड़ा बाहर चहलकदमी कर लें। इससे नींद अच्छी आयेगी। मॉर्निंग वॉक पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “Morning Walk के फायदे” पढ़ें। 

3. पानी (Water)- वैसे तो एक दिन में कम से कम आठ गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है परन्तु यदि कोई इतना नहीं पी सकता तो जितना हो सके, जितना उसे सहज लगे, उतना तो जरूर पीये। गर्भवती महिला के मामले में यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि इस अवस्था में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है। गर्भवती महिला को हर घंटे थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिये। इसके लिये वह पानी में दालचीनी पाउडर, या सौंफ़ का पाउडर या जीरे के पाउडर मिलाकर एक बॉटल में भरके रख लेना चाहिये। इसके अतिरिक्त ताजा फलों का जूस भी घर पर निकालकर पीना चाहिये। 

4. नारियल पानी (Coconut Water)- नारियल प्रकृति का वरदान है। इसके पानी में प्राकृतिक मिठास होती है जिसके पीने से मन प्रसन्न हो जाता है और आत्मा तृप्त। नारियल पानी में  विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं जो  मॉर्निंग सिकनेस और कब्ज आदि को दूर करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। इससे गर्भावस्था में होने वाली पेट से संबंधित बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। गर्भवती महिला को रोजाना दिन में दो, तीन बार नारियल पानी पीना चाहिये। आप चाहें तो इसमें एक चम्मच नींबू का रस भी मिला सकती हैं। इसे सारे दिन प्रसन्नता बनी रहेगी।

5. नींबू (Lemon)- मॉर्निंग सिकनेस के प्रभाव को कम करने के लिये नींबू अपनी सकारात्मक भूमिका निभाता है क्योंकि नींबू के एसेंशियल ऑयल की सुगंध मस्तिष्क तक ऐसे संकेत भेजती है, जो गर्भवती महिला के मन को शांत करने में मदद करते हैं। नींबू को सूंघने मात्र से तीसरे, चौथे दिन से ही मॉर्निंग सिकनेस की समस्या में सुधार लगने लगता है। इससे पाचन तंत्र की भी सफाई होती रहती है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गिलास नींबू पानी पीयें। आप चाहें तो इसमें काला नमक, पुदीना और थोड़ी सी चीनी मिला सकती हैं। या नींबू काटकर इस पर काला नमक लगाकर चाटें। नींबू पानी पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “निम्बू पानी पीने के फायदे और नुकसान” पढ़ें। 

6. आंवला (Amla)- आंवला में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है जो मितली, उल्टी जैसे मॉर्निंग सिकनेस के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है। आंवला के बीजों का पाउडर भी मॉर्निंग सिकनेस से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। 3-4 आंवला के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर इनके बीज अलग कर दें। आंवला के इन टुकड़ों में थोड़ा सा पानी मिलाकर ग्राइंडर में डालकर जूस निकाल लें। इस जूस में चुटकी भर नमक और आधा चम्मच शहद मिलाकर पीयें। आंवला पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “आंवला के फायदे” पढ़ें। 

7. इलायची (Cardamom)- इलायची के एंटी-ऑक्सिडेंट गुणों की वजह से इसका उपयोग दवाइयों में भी किया जाता है। जी मिचलाने, उल्टी आने की स्थिति में यह बहुत फायदेमंद होती है चाहे वह मॉर्निंग सिकनेस हो या मोशन सिकनस। इसे इस समस्या में एक प्रभावशाली उपाय माना जाता है। जब भी आपको ऐसा लगे कि उल्टी आयेगी या जी मिचलाये, एक या दो हरी इलायची मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबायें।

8. अदरक (Ginger)- अदरक में बायोएक्टिव कंपाउंड  मौजूद होता है जिसे जिंजेरोल कहा जाता है, पेट की समस्याओं के निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसीलिये इसे चाय, फलों के जूस, नींबू पानी आदि में मिलाया जाता है। यह बायोएक्टिव कंपाउंड और इसके एंटीइंफ्लामेट्री गुण, जी मिचलाना, उल्टी आना जैसे मॉर्निंग सिकनेस के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करते हैं। मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति में अदरक का टुकड़ा कर मुंह में रखें और धीरे-धीरे चूसें। या अदरक के टुकड़े को बारीक-बारीक काटकर या कद्दूकस करके एक कप पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर इसे छानकर इसमें कुछ बूंद नींबू के रस की डालकर पीयें।

9. सौंफ़ (Fennel)- मॉर्निंग सिकनेस के लक्षणों को कम करने के लिये सौंफ़ अपना प्रभाव दिखा सकती है। इसे अपने पास रखें। जब भी आपको लगे की उल्टी आयेगी या जी मिचलाये तभी सौंफ़ के 5-7 दाने मुंह में रखकर चबायें। या रात को एक गिलास पानी में आधा चम्मच सौंफ़ भिगो दें, सुबह इसे छानकर सौंफ़ का पानी पीयें।  

10. अनानास (Pineapple)- यद्यपि गर्भवती महिला को अनानास खाने से मना किया जाता है क्योंकि इसमें अबोर्टिफैसियंट (abortifacient) यानी गर्भपात कराने वाला गुण पाया जाता है, परन्तु मॉर्निंग सिकनेस की स्थिति में अनानास का एक बहुत छोटा सा टुकड़ा खाकर राहत पाई जा सकती है। मोशन सिकनेस में यानी रास्ते में सफर करते हुऐ, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्र में और जलमार्ग की यात्रा करते हुऐ जी मिचलाना,उल्टी लगना जैसी स्थिति में अनानास तुरंत प्रभाव दिखाकर राहत देता है। अनानास का खट्टा-मीठा स्वाद दोनों प्रकार की इन सिकनेस की समस्याओं से राहत दिलाता है। अनानास पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “अनानास के फायदे और नुकसान” पढ़ें 

11. पुदीना (Mint)- पुदीना अपने अनोखे और ठंडे स्वाद के लिये प्रसिद्ध है। इसका उपयोग व्यंजनों के अतिरिक्त आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है। पाचन और पेट से संबंधित समस्याओं में पुदीना अत्यंत लाभकारी होता है। जहां तक मॉर्निंग सिकनेस की बात है तो इसके सूंघने मात्र से ही जी मिचलाने में आराम आ जाता है। उल्टी होने की स्थिति में पुदीना की कुछ पत्तियां चबायें या आधा कप पुदीना का रस पी लें या पुदीना की पत्तियों काढ़ा बनाकर 10-20 मि।ली। मात्रा में पी लें। 

12. सेब का सिरका (Apple Vinegar)- मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाने के लिये सेब का सिरका एक अच्छा उपाय माना जाता है। इसके लिये प्रतिदिन एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीयें। 

कुछ टिप्स – Some Tips

अब हम बता रहे हैं आपको कुछ निम्नलिखित टिप्स जिनको अपनाकर मॉर्निंग सिकनेस के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

1. भरपूर नींद लें। 

2. सुबह उठकर सबसे पहले दो, तीन नमकीन बिस्किट्स खा लें, यह मॉर्निंग सिकनेस को रोकने में मददगारहो सकता है।

3. शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहने का प्रयास करें। 

4. मॉर्निंग वॉक पर जायें, इससे बाहर की ताजा हवा आपका अच्छा मूड बनायेगी और मन प्रसन्न रहेगा। शरीर में स्फूर्ति रहेगी।

5. हाइड्रेट रखने के लिये थोड़ी-थोड़ी देर बाद थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी, नारीयल पानी, नींबू पानी, फलों का जूस, अदरक की चाय आदि पेय पदार्थ लेती रहें। 

6. तेज मिर्च मसालेदार और फेट वाले भोजन से बचें।

7. धूम्रपान ना करें और धूम्रपान करने वालों से भी दूरी बनाकर रखें। 

8. शराब का सेवन ना करें।

9. गंध से दूर रहें जैसे सिगरेट, शराब, परफ्यूम, मांस, मछली भोजन की विशेष गंध आदि।

10. नींबू सूंघें। 

11. अदरक का सेवन करें। 

12. भोजन करने के बाद अच्छे से ब्रश करें या माउथवॉश का उपयोग करें ताकि मुंह में भोजन के कण फंसे ना रह जायें और स्वाद ना बने। स्वाद बने रहने से  जी मिचला सकता है। 

13. भोजन करने के बाद थोड़ा बाहर घूमें, एकदम से ना लेटें। यदि बाहर नहीं जाना तो सीधा बैठें। 

14. बार-बार की यात्रा से बचें। 

15. ढीले-ढाले वस्त्र पहनें ताकि पेट पर दबाव न पड़े। 

16. ऐसा व्यायाम ना करें जिससे पेट पर दबाव पड़े। 

17. डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-बी6 के सप्लीमेंट लें।

18. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई अपने आप ना खायें। 

Conclusion – 

आज के आर्टिकल में हमने आपको मॉर्निंग सिकनेस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मॉर्निंग सिकनेस क्या है?, मॉर्निंग सिकनेस के कारण, मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण और मॉर्निंग सिकनेस में क्या खायें, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से मॉर्निंग सिकनेस के प्रभाव कम करने के बहुत सारे घरेलू उपाय बताये और कुछ टिप्स भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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आज के आर्टिकल में हमने आपको मॉर्निंग सिकनेस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मॉर्निंग सिकनेस क्या है, मॉर्निंग सिकनेस के कारण, मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण और मॉर्निंग सिकनेस में क्या खायें, इन सब के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · June 28, 2022 at 7:34 am

Its unique Article

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