दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, कोरोना वायरस-19 (COVID-19) महामारी के प्रकोप से सारी दुनियां परिचित हो चुकी है। इसके लगातार बदलते स्वरूप और संक्रमण के प्रभाव विश्व के लिये चुनौती बने हुऐ हैं। इस समय सबसे बड़ी चुनौती हमारे देश भारत के लिये है जहां इसे Triple Mutation वाला  बताया जा रहा है। कोरोना के लक्षण दिखने के बाद पहली बार में Testing के जरिये भी Detect नहीं हो पा रहा है। क्योंकि यह नाक में नहीं रुकता। यह सीधा फेफड़ों में या पेट में चला जाता है। दूसरी, तीसरी बार test करने में जब तक इसका पता चलता है तब तक मरीज की हालत गंभीर हो जाती है या होने लगती है। भारत में दूसरी लहर की इस Triple Mutation वाले कोरोना वायरस का संक्रमण अब युवा वर्ग और बच्चों को हो रहा है। 18 वर्ष की अधिक आयु वर्ग के लिये तो वैक्सीन है परन्तु इससे कम आयु वाले बच्चों के लिये कोई वैक्सीन नहीं है। यही सबसे बड़ी चुनौती है कि बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं ?

दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक ” बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं “। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से बच्चों को कोरोना से बचाने के उपाय बतायेगा। 

बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं

बच्चों में कोरोना संक्रमण सम्बंधी आंकड़े  – Corona Infection Statistics in Children

1. महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली आदि राज्यों में, मार्च-अप्रैल महीने के बीच, 8 महीने से 14 वर्ष तक के बच्चों में कोरोना का संक्रमण अधिक दिखाई दिया।  

2. हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 15 मार्च और 11 अप्रैल के बीच 41,324 पॉजिटिव लोगों में से 3,445 (8%), 10 वर्ष से छोटे बच्चे पॉजिटिव पाये गये। 

3. इसके अतिरिक्त 15 से 30 वर्ष तक के लगभग 30% युवाओं में भी संक्रमण दिखाई दिया। 

प्रसिद्ध डॉक्टर्स के मत – Opinions of Famous Doctors

4.  लोक नायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ। सुरेश कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि “फिलहाल हमारे अस्पताल में 8 ऐसे बच्चे भर्ती हैं जिनमें कोरोना के गंभीर लक्षण हैं। इनमें से एक बच्चा 8 महीने का है। जबकि बाकी बच्चों की उम्र 12 साल से कम है। इन सभी बच्चों को तेज बुखार, निमोनिया, डिहाइ़ड्रेशन और स्वाद की कमी जैसे लक्षण हैं।”

5.  सर गंगा राम अस्पताल में भी कोरोना से संक्रमित कुछ बच्चे दाखिल हैं। अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ। धीरेन गुप्ता के अनुसार उन्हें कोरोना से संक्रमित बच्चों के परिवार से हर रोज 20-30 फोन आ रहे हैं और लोग वीडियो कंसल्टेशन के लिए संपर्क कर रहे हैं।  

6. गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के बाल रोग विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉक्टर कृष्ण चुघ का कहना है कि वयस्कों की तुलना में कोरोना से संक्रमित बच्चों के इलाज में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कोरोना संक्रमित बच्चों के लिये कोई अलग वॉर्ड नहीं है। डॉक्टर चुघ के अनुसार “बच्चों को रेमडेसिविर जैसी एंटी-वायरल दवाएं या स्टेरॉयड नहीं दिया जा सकता। हम बुखार या कफ की दवाएं और जरूरत पड़ने पर रेस्पिरेटरी सपोर्ट देकर उनका इलाज करने की कोशिश कर रहे हैं”।

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7. डॉक्टर्स का कहना है कि Covid-19 गंभीर होने पर मल्टी-इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS) भी बच्चों में हो रहा है। मल्टी-इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम में बुखार के साथ हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क में गंभीर सूजन हो जाती है जिसके कारण कुछ बच्चों को दौरे भी पड़ रहे हैं। यद्यपि बच्चों में इस प्रकार के गंभीर मामले अभी बहुत कम हैं। इनकी जान समय रहते ही इलाज करवा कर बचाई जा सकती है।

बच्चों में कोरोना के लक्षण – Symptoms of Corona in Children

1. नवजात शिशु या बहुत छोटे बच्चे बोल नहीं सकते। उनमें लक्षण पहचानने पड़ते हैं। बच्चे का सुस्त रहना, त्वचा का रंग का बदलना, त्वचा में सूजन, तेज बुखार, होठों का सूखना, दूध ना पीना, भूख ना लगना आदि उनके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।  

2. इनसे बड़े बच्चों में या युवा वर्ग में तेज बुखार होना, सिर में दर्द, आंखों का रंग बदलना जैसे लाल या गुलाबी दिखना, आंखों में सूजन होना, होंठ, जीभ, हाथ और पैर पर लाली आ जाना, होंठ फटना, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों का दर्द आदि।

3. रक्तचाप कम हो जाना, पेट में दर्द, दस्त लगना, पेट में गैस, उल्टी, मिचली, खांसी, सीने में कफ़ जमना, थकावट, कमजोरी महसूस करना, मुंह में छाले आदि संक्रमण के लक्षण नजर आ सकते हैं।

4. सबसे बड़ा लक्षण भोजन के स्वाद का पता ना लगना हो सकता है।

5. सुगंध और दुर्गंध का भी पता ना चलना। 

बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं – How to Protect Children from Corona Virus

बच्चों को कोरोना से बचाने के उपाय – 

दोस्तो, यह एक विडम्बना है कि बच्चों को कोरोना से बचने के लिये कोई वैक्सीन नहीं बनी है। वैक्सीन जो हैं वो 18 वर्ष की आयु से ऊपर वाले व्यक्तियों पर ही काम करती हैं। 

दूसरी विडम्बना यह है कि रेमडेसिविर जैसी जीवन रक्षक दवाईयां बच्चों को नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो जाती है कि हम बच्चों को घर में ही रखें और उनका खानपान ऐसा हो जिससे कि उनकी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो। दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब आपको बता रहा है कुछ ऐसे निम्नलिखित उपाय जिनसे हम अपने बच्चों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं। 

1. घबराएं नहीं (Don’t Panic)- दोस्तो, कई बार बच्चों को सामान्य रूप से खांसी, बुखार, जुकाम, सिर दर्द आदि हो जाता है। ऐसे लक्षण सामान्मतः फ्लू के भी सकते हैं। इसलिये अपने मन में किसी प्रकार की आशंका को ना आने दें। घबरायें नहीं। बच्चे को डॉक्टर के पास ले जायें, जैसे पहले भी ले जाते रहे हैं, उसका मेडिकल चैकअप करायें।  यदि मेडिकल रिपोर्ट से कोरोना की पुष्टि होती है, तब भी घबरायें नहीं, हौंसला बनाये रखें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे का इलाज करवायें। लेकिन इस स्थिति में अपनी और बच्चे की साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें,  आप खुद भी मास्क पहन कर रहें और बच्चे (यदि नवजात या बहुत छोटा नहीं है तो) को भी मास्क पहनायें।

2. बच्चे को अपने भरोसे में लें (Take the Baby in Your Trust)- बच्चे सबसे पहले और सबसे ज्यादा अपने माता-पिता पर भरोसा करते हैं। इसलिये कोरोना से जुड़े किसी भी मुद्दे पर, जानकारी पर बच्चों से ईमानदारी से और खुलकर बात करें। जो वो कहते हैं पहले उसे सुनें फिर अपनी बात कहें और जो बात उनकी मानने वाली है उसे मानें, विशेषकर युवा बच्चों की। इससे बच्चे का आप पर भरोसा और बढ़ जायेगा। और वे आपकी बात मानेंगे।  

3. बच्चों को सही जानकारी देकर चिंता दूर करें (Relieve Anxiety by Giving Children the Right Information)- कुछ न्यूज मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सेप पर आये वीडियोज़, यूट्यूब पर छाये वीडियोज़, दोस्तों, पड़ोसियों आदि से मिली खबरों/जानकारी, अफ़वाहों, की वजह से बच्चों के मन में आशंकायें उठना, उनका चिन्तित होना स्वाभाविक है। उनके मन, मस्तिष्क पर मनोवैज्ञानिक कुप्रभाव पड़ता है, इसे तोड़ना सबसे जरूरी है। यह काम माता-पिता से बेहतर कोई नहीं कर सकता। माता-पिता को सही खबर, गलत खबर, सही जानकारी, अफ़वाह, उचित, अनुचित का अंतर स्पष्ट कर बच्चों को बताना चाहिये और अफ़वाहों, fake news से दूर रहने को कहना चाहिये। उनको बताना चाहिये कि इन सब पर विश्वास ना करें। बच्चे आपकी बात मान लेंगे क्यों कि वे आप पर भरोसा करते हैं।

4. बच्चों को डराएं नहीं, प्यार से समझाएं (Do not scare children, explain with love)- दोस्तो, छोटे बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं, उनका मन बहुत कोमल होता है। आपके द्वारा कही गयी बात उनके मन में आसानी से बैठ जाती और मस्तिषक में छप जाती है। वे आपसे प्रेमपूर्वक व्यवहार की उम्मीद करते हैं। इसलिये बच्चों को प्यार से और सावधानी से समझायें नाकि उन्हें डरायें। आपके व्यावहार में प्रेम छलकना चाहिये और वाणी मधुर होनी चाहिये। हमेशा याद रखिये बच्चों से बात करते समय “क्रोध और कठोरता” का कोई स्थान नहीं है। बच्चों को कोरोन वायरस के बारे में बताइये की यह एक वायरस ही है जैसे कि अन्य वायरस होते हैं जो  खांसी-जुकाम, डायरिया  बुखार आदि में आक्रमण करते हैं केवल फ़र्क इतना है कि कोरोन वायरस के आक्रमण का घनत्व (Density) अधिक होता है। और उनको यह भी समझाना होगा कि कोरोन वायरस से लड़ना होगा और जीतना होगा।

6. बाहर जाने से रोकें (Stop Going out)- यदि आपके शहर में लॉकडाउन या कर्फ्यू है तो किसी का भी घर से बाहर जाना उचित नहीं है, बच्चों का तो बिल्कुल भी नहीं। बड़े बच्चों को तभी बाहर जाने दें जब बेहद जरूरी हो या आपातकाल की स्थिति में वह भी पूरी तरह उनको प्रतिरक्षित Protected करके। सैनिटाइजर की एक छोटी शीशी उनकी जेब में रख दें। यदि आपके शहर में लॉकडाउन या कर्फ्यू नहीं है तब भी बच्चों को ये सावधानियां बरतने के लिये कहें। याद रखिये किसी भी स्थिति में, चाहे लॉकडाउन/कर्फ्यू है या नहीं है, छोटे बच्चों को घर से बाहर ना जाने दें। नानावटी हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ रवि मलिक भी यही कहते हैं कि बच्चों को बिल्कुल भी बाहर न भेजें, आने वाले 6-7 हफ्ते और अधिक तेजी से कोरोना फैलेगा।  डॉ तुषार मनियार का भी यही मानना है कि बच्चों को घर पर ही रहने दें। जब कोरोना के केस कम हो जायें तभी इनके बाहर जाने के बारे में सोचा जा सकता है। 

7.  बाहर किसी वस्तु को छूने से बचें (Avoid Touching Anything Outside)- बच्चों को बाहर भेजने से पहले बताइये कि वे किसी भी वस्तु को ना छूयें। यदि छू भी लिया है तो तुरन्त अपने को सैनिटाइज़ करें। इसके लिये सैनिटाइजर की एक छोटी शीशी उनको देकर भेजें। 

8. पढ़ाई के साथ-साथ आंखों की सुरक्षा भी (Eye Protection Along with Studies)- दोस्तो, हम सभी जानते हैं कि कोरोना के चलते बच्चों पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है जिसके लिये बच्चों को सैलफोन, कम्प्यूटर, लैपटॉप आदि पर कई-कई घंटे इनकी स्क्रीन को देखना पड़ता है। इसके अलावा इनके जरिये वे मनोरंजन भी करते हैं। जिससे आंखें दुखने लगती हैं और आंखों के स्वास्थ की हानि हो सकती है। ऐसी स्थिति घर से बाहर नेत्र विशेषज्ञ के पास जाना पड़ सकता है। जोकि कोरोना को आमन्त्रित करने के बराबर है। बड़ी क्लास के, 11 से 17 वर्ष आयु के बच्चों को संक्रमण की अधिक संभावना रहती है। ऐसी स्थिति ना आये और आंखों का स्वास्थ भी बना रहे इसके लिये जरूरी है कि स्क्रीन पर आंखें लगातार गढ़ा कर ना रखें बीच-बीच में पलकें झपकाते रहें। साथ ही हर 20 मिनट के बाद दो, चार मिनट का ब्रेक लें और आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें।  

9.  बच्चों को समय दीजिये, उनको व्यस्त रखिये (Give time to the Children)- यह बेहद जरूरी हो जाता है कि आप बच्चों को जितना संभव है सके, उतना समय दीजिये, अपना अधिक से अधिक समय बच्चों के साथ बिताइये। उनके ऑनलाइन क्लासिज़, ऑनलाइन होम वर्क में उनकी सहायता कीजिये। याद रखिये बच्चे एक ही गतिविधि को ज्यादा समय तक नहीं करते। वे बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं। उन्हें बिजी रखने के लिये आप निम्नलिखित सृजनात्मक (Creative) विकल्प अपना सकते हैं :-

(i) उनके साथ क्रॉसवर्ड खेलिये इससे उनका ज्ञान  (knowledge) बढ़ेगा, जल्दी बोर भी नहीं होंगे और समय का भी सदुपयोग होगा। इसी प्रकार का कोई अन्य खेल जैसे पांच, छः या इससे अधिक अक्षरों का शब्द बनाना, खेलिये। 

(ii) गणित से सम्बंधित कोई प्रतियोगिता कीजिये, वाद-विवाद कीजिये। ज्यामिति (Geometry) से सम्बंधित आकार (Shape) कागज या क्ले मिट्टी से बनवाइये और समझाइये। इससे बच्चे का दिमाग बहुत तेज होगा। 

(iii) ड्राइंग, शैडो ड्राइंग/पेंटिंग करवाइये।

(iv) सैलफोन से या कैमरा से फोटोग्राफी करवाइये।

(v) पेपर क्राफ्ट का काम करवाइये, सिखाइये।

(vi) सिलाई, कढ़ाई, बुनाई सिखाइये।

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(vii) गीत, संगीत, नृत्य सिखाइये।

(viii) कुकिंग सिखाइये। इसके लिये शुरूआत सब्जी धोना, छीलना, काटना, आटा गूंधना, मिर्च मसालों की जानकारी देना आदि से कर सकते हैं। 

(ix) योग, ध्यान, प्रणायाम करवाइये। इससे शरीर स्वस्थ रहेगा।

(x)  गमलों में बच्चों से पानी डलवाइये, पौधों की देखभाल के बारे में बताइये। इस तरह बच्चों का प्रकृति से नाता जोड़िये।

शुद्ध मनोरंजन – Pure Entertainment

(xi)  इंडोर गेम जैसे कैरम, शतरंज, लूडो, सांप-सीड़ी आदि खेलिये। याद रखिये कभी बच्चों के साथ ताश के पत्ते मत खेलिये।

10. बच्चों को मोटापे से बचें (Children Should Avoid Obesity)- बच्चे शरारती भी होते हैं और जिद्दी भी। बच्चों का मन पिज्जा, बर्गर या अन्य जंक फूड खाने का मन करता है, वे जिद भी करते हैं। परन्तु यदि उनको प्यार से से समझाया जाये कि इन सब के सेवन से मोटापा बढ़ेगा और कोविड का कारण बन सकता है बच्चे मान जायेंगे।  तले भुने, अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, ठंडे शरबत आदि को घर में अवॉइड करें। ना घर में ऐसी चीज होगी और ना बच्चा मांगेगा। यह ठीक है कि चॉक्लेट एनर्जी देती है परन्तु यह मोटापा भी बढ़ाती है, इसलिये बच्चों को कम दें। जहां तक पिज्जा, बर्गर, पास्ता, समोसा आदि की बात है तो कभी-कभी आप इनको घर पर बनाकर बच्चों को खिलाइये। इससे बच्चों का बात भी पूरी हो जायेगी और सावधानी भी रहेगी।

11. आहार हो पोषक तत्वों से भरपूर (Diet Should be full of Nutrients)- बच्चे क्या, सभी का आहार खनिज, विटामिन्स और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां, फल, दूध, वेजिटेबल सूप, अंडे आदि को शामिल करें। बच्चों के भोजन में ओट्स, दलिया, खट्टे फल, च्यवनप्राश, सलाद और हल्दी वाला दूध भी शामिल करें ताकि उनकी इम्यूनिटी बढ़े। 

ध्यान रखने वाली बातें/सावधानियां – Things to keep in mind / Precautions

1. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को छूने से पहले सुनिश्चित करें कि खुद के हाथ साफ हों यदि नहीं हैं तो पहले अपने हाथ धोयें। 

2. सबसे पहले अपने घर की साफ-सफाई रखें। बच्चों की साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।  

3. बच्चों को भी साफ-सफाई का महत्व समझायें। 

4. बच्चों को खाना खाने से पहले हाथ धोने की आदत डलवायें और इसका महत्व बतायें। 

5. इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे फ्रिज का ठंडा पानी ना पीयें। हर समय गुनगुना पानी तो कोई भी नहीं पी सकता, सामान्य तापमान का पानी पीने को कहें। भोजन के साथ गुनगुना पानी ही पीने को दें। 

6. बच्चों को गुब्बारा फुलाने का अभ्यास करवायें इससे फेफड़े उनके मजबूत बनेंगे। 

7. बच्चों को सांस लेने, छोड़ने वाली एक्सरसाइज करवायें, इससे बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी।

8. यदि बच्चा संक्रमित हो जाता है तो उसे पर सबसे दूर रखने की कोशिश करें।

9. बच्चे का ध्यान रखने के लिये केवल एक व्यक्ति ही, वह भी अपने मुंह पर मास्क लगाकर साथ रहना चाहिये। यदि बच्चा मास्क लगाने लायक है तो उसे भी मास्क लगा कर रखें। 

10. बच्चों को विटामिन-डी, जिंक की दवा डॉक्टर की सलाह पर दी जा सकती है। 

Conclusion-

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं के विषय में विस्तृत जानकारी दी।  बच्चों में कोरोना संक्रमण संबंधी आंकड़े, प्रसिद्ध डॉक्टर्स के मत, बच्चों में कोरोना के लक्षण बताये। इस लेख के माध्यम से बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाने के बहुत सारे उपाय विस्तारपूर्वक बताये और साथ ही ध्यान रखने वाली बातें और सावधानियां भी बतायीं। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें। ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer- यह लेख विभिन्न जानकारी के श्रोतों पर आधारित है। कृपया जानकारी की वास्तविकता स्वयं परखें। यह केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है।  कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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बच्चों को कोरोना से कैसे बचाएं
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको बच्चों में कोरोना संक्रमण के विषय में विस्तृत जानकारी दी। बच्चों में कोरोना संक्रमण संबंधी आंकड़े, प्रसिद्ध डॉक्टर्स के मत, बच्चों में कोरोना के लक्षण बताये।
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